218 न्याय द्वारा रूपांतरित

1 मैंने बरसों प्रभु में विश्वास रखा, मैं हमेशा प्रभु के पुरस्कारों और स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करने के लिए तरसता रहा। मैंने पद-प्रतिष्ठा के लिए मेहनत-मशक्कत की, लेकिन परमेश्वर के वचनों पर मैंने कभी अमल नहीं किया। मैं यह तो कहता था कि मुझे परमेश्वर से प्रेम है, लेकिन जब परीक्षण आए, तो मेरे दिल में गलतफ़हमियाँ और शिकायतें पैदा हो गईं। परमेश्वर से तर्क-वितर्क करते हुए, मैंने कई विद्रोही बातें कहीं। मसीह के सिंहासन के सामने न्याय से गुज़रने के द्वारा, मैंने स्वयं को जाना। परमेश्वर के वचन एक तेज़ दुधारी तलवार की तरह थे जिन्होंने मेरे दिल, मेरी आत्मा को चीरा और खोलकर रख दिया। परमेश्वर के कठोर न्याय ने मेरे पाखंड की सच्चाई को उजागर कर दिया। मैंने आशीष पाने के लिए बहुत भाग-दौड़ की, लेकिन मैंने कहा कि मैंने सारे कष्ट परमेश्वर के प्रेम के लिए उठाए हैं। मैं कपटी था, मैंने जो कुछ भी किया परमेश्वर को धोखा देने और मूर्ख बनाने के लिए किया। मैंने परमेश्वर में आस्था रखी और परमेश्वर से सौदेबाज़ी भी की—मुझमें ज़रा-सा भी न ज़मीर था, न विवेक। मैंने परमेश्वर को बहुत गंभीर चोट पहुँचाई, मैंने पूरी तरह से अपनी इंसानियत गँवा दी, मैं पश्चाताप से भर गया। मुझे कहीं मुँह छिपाने की जगह नहीं मिली, इसलिए मैं परमेश्वर की शरण में चला गया और परमेश्वर के न्याय को स्वीकार करने के लिए तैयार हो गया।

2 इंसान को बचाने के लिए परमेश्वर अत्यंत कष्ट और अपमान सहता है। वह इंसान की गलतफ़हमियों और शिकायतों को बर्दाश्त करता है, और मौन रहकर इंसान के जागने की प्रतीक्षा करता है। परमेश्वर का न्याय और ताड़ना महज़ इसलिए हैं ताकि इंसान सत्य और जीवन को प्राप्त कर सके। अब जबकि मैं समझता हूँ कि परमेश्वर कितने श्रमसाध्य प्रयास करता है, मैंने सत्य का अनुसरण करने का निश्चय किया है। न्याय और परीक्षणों से गुज़रकर, मेरे भ्रष्ट स्वभाव शुद्ध हो गए हैं। परमेश्वर के वचनों के सत्य के अनुसार आचरण करने से परमेश्वर को प्रसन्नता होती है, वो मेरे हृदय को मधुरतम अनुभूति देता है, अब जाकर मैं इस बात को समझ पाया हूँ कि न्याय और परीक्षण परमेश्वर का आशीर्वाद हैं। परमेश्वर का प्रेम बहुत वास्तविक है—हम उसको धन्यवाद कैसे न दें और उसकी स्तुति कैसे न करें? मैं ऐलान करने और परमेश्वर के प्रेम का प्रतिदान देने हेतु उसकी गवाही देने की ख़ातिर अपना तन-मन अर्पित करने के लिए तैयार हूँ। मैं परमेश्वर के उपदेशों को अच्छी तरह से याद रखूंगा और परमेश्वर को संतुष्ट करने के लिए अपना कर्तव्य ईमानदारी से निभाऊंगा। मैं परमेश्वर की इच्छा के प्रति विचारशील रहूँगा, उसके लिए सुंदर और शानदार गवाही दूंगा। हालाँकि रास्ता ऊबड़-खाबड़ है, लेकिन मैं परमेश्वर से हमेशा प्रेम करना चाहता हूँ।

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