जीवन में प्रवेश पर उपदेश और वार्तालाप

3 परमेश्वर के वचन के बारे में धर्मोपदेश और सहभागिता "तुम्हें मसीह की अनुकूलता में होने के तरीके की खोज करनी चाहिए"

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परमेश्वर के जिन वचनों पर आज हम सहभागिता कर रहे हैं, तुम्हें उन्हें अच्छी तरह से प्रार्थना की तरह पढना चाहिए। परमेश्वर का निर्णय, परमेश्वर की ताड़ना, वे आखिरकार क्या हासिल करना चाहते हैं? उनका उद्देश्य यह है कि हम मसीह के साथ सही मायने में अनुकूल हो सकें। यदि हम मसीह के साथ अनुकूल होते हैं, तो हम परमेश्वर के साथ भी अनुकूल हैं। मसीह के साथ अनुकूल होना, परमेश्वर के साथ अनुकूल होना है, क्योंकि मसीह परमेश्वर का देह्धारण है, अर्थात् स्वयं परमेश्वर ही कह रहा है, और अपनी आवाज़ में बोल रहा है। उन कई अवधारणों के बावजूद जिसके साथ तुम इस देह्धारण को देखते हो, तुम्हारा यह देखना कि यह देह्धारण कितना सामान्य है, यह देखना कि यह तो केवल एक बहुत सामान्य व्यक्ति है, फिर भी यह देहधारण परमेश्वर की आत्मा का देहधारण है, सच्चाई का देहधारण है। चूँकि मसीह बाहर से सामान्य मानवता ओढ़े हुए है, कोई भी इससे परे उसके सार को नहीं देख सकता है, यह कहते हुए: "तुम्हारी मानवता तो बहुत सामान्य है। चाहे मैं कैसे भी देखूँ, तुम केवल एक मनुष्य ही प्रतीत होते हो, तुम एक सामान्य व्यक्ति ही नज़र आते हो! तुम केवल एक साधारण और सामान्य व्यक्ति हो, तुम परमेश्वर कैसे हो सकते हो? मैं कैसे समझ नहीं सकता?" यह एक सामान्य सवाल है उनके लिए जो परमेश्वर के देहधारण में विश्वास करते हैं। यदि ऐसा प्रश्न मौजूद होता है, तो इस तरह की एक धारणा भी तुम्हारे भीतर मौजूद होनी चाहिए, इसलिए क्या तुम कोई ऐसे व्यक्ति हो जो मसीह के साथ अनुकूल है? तुम केवल मसीह की सामान्य मानवता देख सकते हो, तुम मसीह के दिव्य सार को नहीं जानते हो, और यही तुम्हारा अंत होगा। परमेश्वर कहता है: "देहधारण के महत्व को दो देहधारण पूरा करते हैं" इन वचनों का क्या अर्थ है? दस साल के अनुभव के साथ भी, तुम इन वचनों को समझ नहीं पाओगे। यद्यपि मेरे पास अनुभव के बीस, तीस वर्ष हैं, मैंने भी केवल इस स्तर तक ही समझ प्राप्त की है। कोई कहता है: "बहुत सारे लोग प्रभु यीशु के चरण के दौरान प्रभु में विश्वास करते थे। क्या प्रभु में विश्वास करने का अर्थ यह मान लेना नहीं था कि प्रभु यीशु परमेश्वर है, कि वह देहधारी परमेश्वर है? क्या वे सभी नहीं मानते थे कि प्रभु यीशु ही मसीह है, परमेश्वर का पुत्र?" क्या ऐसे लोग थे जिन्होंने प्रभु यीशु को परमेश्वर के रूप में माना? क्या किसी को पता था कि प्रभु यीशु सच्चे परमेश्वर का प्रकटन है? क्या ऐसी कोई समझ थी? नहीं। इसलिए, जब वे प्रभु यीशु से प्रार्थना करते हैं, "हे प्रभु यीशु, तुम प्रभु हो, तुम परमेश्वर के पुत्र हो, तुम मसीह हो," बस इतना ही है जो वे कहते हैं। वे यह नहीं कहते हैं, "तुम परमेश्वर हो। प्रभु यीशु मसीह, तुम पिता परमेश्वर हो, तुम यहोवा परमेश्वर हो।" इस तरह की प्रार्थनाएँ बहुत कम हैं, और उन लोगों के लिए भी जो इस तरह के शब्दों को कह सकते हैं, उनके दिलों में भी ऐसी समझ नहीं है। इसलिए, अनुग्रह के युग के दौरान, जब देहधारी परमेश्वर ने छुटकारे का कार्य पूरा किया, क्या उसने वास्तव में लोगों को परमेश्वर को जान लेने की अनुमति दी? नहीं। कोई भी परमेश्वर को नहीं जानता था। इसलिए, उस चरण के दौरान, पवित्र आत्मा केवल इस प्रकार गवाही देने में सक्षम था, "यह मेरा प्रिय पुत्र है, जिस से मैं प्रसन्न हूँ: इस की सुनो।" (मत्ती 17:5). अगर उसने कहा होता, "प्रभु यीशु परमेश्वर है", तो क्या लोगों के लिए यह विश्वास करना आसान होता? उस चरण के दौरान, पवित्र आत्मा केवल इस प्रकार गवाही देने में सक्षम था। पवित्र आत्मा को इस प्रकार गवाही क्यों देनी चाहिए? क्योंकि छुटकारे का कार्य पूरा करना ही पवित्र आत्मा के कार्य का वह चरण था, इसलिए मनुष्यों से की गई माँग बहुत अधिक नहीं थी। "तुम्हें प्रभु यीशु को जानना चाहिए: वह पिता है, वह एक सच्चा परमेश्वर है जिसने आकाश और पृथ्वी और सारी चीजों को बनाया है, वही सृष्टिकर्ता है।" यह वह नहीं था जो उस चरण को पूरा करना था, इसका उद्देश्य तो केवल छुटकारे का कार्य पूरा करना था। यह पर्याप्त था कि तुम प्रभु यीशु के छुटकारे को जानते थे, कि तुमने इसे स्वीकार किया था, तब तुम प्रभु यीशु से प्रार्थना कर सकते थे और पाप स्वीकार करते थे, ताकि पश्चाताप कर उसके पास लौट सको, उसके लिए गवाही दे सको, और परमेश्वर ने अपना काम पूरा कर लिया है। उस चरण के दौरान, मनुष्यों से परमेश्वर की माँगें अधिक नहीं थीं, लेकिन वे इस चरण के दौरान अलग हैं। इस चरण के दौरान, जब परमेश्वर अपनी आवाज़ में कहता है, तो क्या उसने ऐसे वचन कहे हैं कि "सर्वशक्तिमान परमेश्वर परमेश्वर का पुत्र है, वह देहधारी मसीह है"? पवित्र आत्मा अब इस प्रकार गवाही नहीं दे रहा है; वह प्रत्यक्ष रूप से गवाही दे रहा है कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर एक सच्चे परमेश्वर का प्रकटन है। वही पहला और अंतिम है, वह सर्वशक्तिमान परमेश्वर है, वह स्वामी है जिसने आकाश और पृथ्वी और सब कुछ बनाया है। प्रत्यक्ष गवाही। इसलिए, जब अंतिम दिनों का मसीह आता है, तो परमेश्वर क्या पूरा करना चाहता है? सारी मानव जाति परमेश्वर के अधीन होनी चाहिए। जब परमेश्वर अंतिम दिनों में आता है, वह राज्य के साथ आता है, तो लोगों के एक समूह को परिपूर्ण करेगा, ताकि मसीह का राज्य पृथ्वी पर प्रकट हो सके। जो लोग मसीह और परमेश्वर के साथ भोज में भाग लेते हैं, वे परमेश्वर का शुद्धिकरण और परमेश्वर की पूर्णता प्राप्त करेंगे। इन लोगों को तब राज्य के भीतर लाया जाएगा, राज्य की प्रजा बनने के लिए। यह अंतिम दिनों के दौरान परमेश्वर के न्याय के कार्य का दर्शन है, जो परमेश्वर के कार्य का उद्देश्य भी है, वह तथ्य जो कि परमेश्वर अंत में प्राप्त करेगा—ताकि मसीह का राज्य धरती पर प्रकट हो सके।

शैतान की बुरी ताकतें इस तरह परमेश्वर के कार्य पर हमला क्यों करती हैं, परमेश्वर के कार्य का आंकलन करते हुए? क्यों बड़े लाल अजगर की बुरी ताकतें उन्मत्त होकर परमेश्वर पर हमला और उसकी निंदा कर रही हैं, और परमेश्वर की कलीसिया को उत्पीडित कर रही हैं? क्यों शैतान की सभी बुरी ताकतें, धार्मिक मंडलियों के अंदर मसीह-विरोधी बिरादरी सहित, सर्वशक्तिमान परमेश्वर की निंदा करती हैं? ऐसा इसलिए है क्योंकि शैतान जानता है कि इसका अंत निकट है, कि परमेश्वर पहले से ही अपने राज्य को सुरक्षित कर चुका है और वह आ गया है, और यह कि अगर शैतान परमेश्वर के साथ एक निर्णायक लड़ाई में नहीं जुटता है तो वह तुरंत नष्ट हो जाएगा। क्या तुमने इस तथ्य को समझा है? चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार से एक बार उन्मादी निंदा को सुनते ही, कई भ्रमित लोग तय करते हैं कि यह सही रास्ता नहीं है; एक बार जब उन्होंने पादरियों और धार्मिक मंडलियों के ज्येष्ठों (एल्डरों) से व्यापक निंदा देख ली है, तो वे तय करते हैं कि यह सही रास्ता नहीं है। ये लोग किन तरीकों से भ्रमित हैं? क्या वे दुनिया के अंधेरे और बुरे तत्वों को देख सकते हैं? बाइबिल ने कहा, "ज्योति अन्धकार में चमकती है, और अन्धकार ने उसे ग्रहण न किया।" (यूहन्ना 1:5). क्या वे वास्तव में इन शब्दों को समझते हैं? "सारा संसार उस दुष्‍ट के वश में पड़ा है।" (1 यूहन्ना 5 :19) क्या वे इन शब्दों का सही अर्थ जान सकते हैं? वे कुछ भी साफ़-साफ़ देखने में असमर्थ हैं। वे सोचते हैं कि यदि यह सही रास्ता हो, अगर परमेश्वर आ गया है, तो चीनी सरकार को इसका स्वागत करना चाहिए, धार्मिक मंडली को इसका स्वागत करना चाहिए, और वह इसे सही मार्ग बना देगा। यह किस तरह का तर्क है? क्या यह शैतान का तर्क नहीं है? कुछ लोग परमेश्वर के कार्य का अध्ययन करते हैं, वे पहले देखते हैं कि क्या विश्व सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया, पूर्वी लाइटनिंग, का स्वागत करता है और उससे सहमत है या नहीं, क्या धार्मिक मंडली इसका स्वागत करती है और इसके साथ सहमत है या नहीं। "अगर विश्व इसका स्वागत करता है, और विशेषकर, अगर चीनी कम्युनिस्ट सरकार घोषित करती है कि यही सही रास्ता है, तभी हम इसमें विश्वास कर सकते हैं। यदि सभी पादरी और धार्मिक मंडली के बुजुर्ग यह कहते हैं कि यह सच है, कि यह प्रभु यीशु की वापसी है, तभी हम इसे स्वीकार कर सकते हैं।" इस तरह के कई भ्रमित लोग हैं। कुछ लोग, जैसे ही वे परमेश्वर के लिए काम आना चाहते हैं, बड़ा लाल अजगर और शैतान उनकी परीक्षा लेने आते हैं: "सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया लोगों का अपहरण करती है। यदि तुम सर्वशक्तिमान परमेश्वर पर विश्वास करते हो, तो तुम छोड़ कर जा नहीं पाओगे, अन्यथा वे तुम्हारी आँखें निकाल लेंगे, तुम्हारे कान काट लेंगे, और तुम्हारी टाँगें तोड़ देंगे।" मुझे बताओ, अगर वास्तव में यह बात है, तो इस दुनिया में कितने लोगों की पहले से ही आँखें निकाल दी गई होंगी और उनके कान कट चुके होंगे? क्या तुमने ऐसा एक मामला भी देखा है? मुझे बताओ, परमेश्वर के लिए जिन लोगों ने योगदान दिया है, क्या तुमने उनमें से किसी एक व्यक्ति को भी देखा है जिसका अपहरण कर लिया गया हो, जिसे परमेश्वर के लिए काम आने के लिए मजबूर किया गया था क्योंकि अन्यथा वे नहीं लौट पाएंगे? यदि उनका वास्तव में अपहरण हुआ था, तो क्या उनका काम और उनका प्रचार प्रभावी होगा? एक बार जब कोई सुलझे दिमाग वाला व्यक्ति इस मामले पर विचार करता है, तो वह इस निष्कर्ष पर आ जाएगा कि: "मामला यही है, यह सीसीपी द्वारा गढ़ी गई अफवाह है, यह सीसीपी द्वारा कहा गया एक झूठ है। दुष्ट शैतान वास्तव में अफवाहों को फैलाने में निपुण है, मैं सच्चाई को कैसे नहीं देख पाया?" कुछ लोग इन बातों पर विश्वास नहीं करते हैं, जबकि अन्य लोग करते हैं। कुछ लोग, जब वे परमेश्वर के लिए काम आना चाहते हैं, तो वे सुनते हैं कि "सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया लोगों का अपहरण कर लेती है। यदि तुम्हारा उनके द्वारा अपहरण हो जाता है, तो उम्मीद नहीं है कि तुम वापस आ सकोगे। अगर तुम वापस आ भी गए, तो कम से कम, तुम्हारी आँखें निकाल ली जाएँगी, और तुम्हारे कान काट दिए जाएँगे।” एक बार जब वे यह सुनते हैं, तो वे परमेश्वर के लिए काम आने की और हिम्मत नहीं करते। "मैं खुद को समर्पित नहीं कर सकता। यह खतरनाक है, मैं अपना जीवन खो सकता हूँ!" और वे छोड़ जाते हैं। क्या इन लोगों में समझने की क्षमता है? कुछ लोग यह भी कहते हैं: "मैं देखता हूँ कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन परमेश्वर के वचन हैं, परमेश्वर की आवाज़ है। मैंने मूल रूप से यह निर्धारित किया है कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन सच्चे हैं, लेकिन यह संगठन, सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया, क्या है? मैंने अभी तक इसकी अच्छी तरह से जाँच नहीं की है। मुझे सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया की कोई समझ नहीं है। क्या वे वास्तव में लोगों का अपहरण करने में सक्षम हैं? अगर वे मेरा अपहरण करें, तो क्या वे मेरी आँखों को निकाल लेने और मेरे कानों को काट देने में सक्षम हैं?" यहीं आकर वे भ्रमित हो जाते हैं। वे कहते हैं: "मैं नहीं जा सकता। अगर उन्होंने मेरी आँखों को निकाल लिया और मेरे कान काट दिये, तो मैं अपने बाकी जीवन के लिए अपाहिज हो जाऊँगा। मेरे लिए अभी भी सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया पर लटका हुआ एक प्रश्न-चिह्न है, मैं इसे नहीं समझ पाता; परमेश्वर की उक्तियों के बारे में, मैंने मूल रूप से उन्हें सच मान लिया है कि वे परमेश्वर की ही आवाज़ हैं, कि उनमें सच्चाई है।" वे अपनी परीक्षा में बहुत सावधान हैं, इसे दो चरणों में करते हुए: सबसे पहले सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों की जांच करो, और देखो कि क्या वे परमेश्वर के वचन हैं। अगर उन्होंने स्वीकार कर लिया कि ये वास्तव में परमेश्वर के वचन हैं, तो वे आगे इसकी जाँच करते हैं कि क्या सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया एक वास्तविक कलीसिया है। अगर सर्वशक्तिमान देवता की कलीसिया एक आपराधिक संगठन हो, जबकि सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन वास्तविक हैं, तो क्या वह फिर भी उनके लिए एक समस्या खड़ी नहीं करता है? क्या यह संभव है? यदि यह बात सही हो, तो सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया एक वास्तविक कलीसिया नहीं, बल्कि एक आपराधिक संगठन है। फिर कौन उपदेश दे रहा है और परमेश्वर के वचनों की गवाही देता है? कौन सर्वशक्तिमान परमेश्वर के लिए गवाही देता है? अगर चीजें ऐसी हों जैसी कि उन्होंने कल्पना की है, अर्थात सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया जो परमेश्वर के वचनों का प्रचार कर रही है और सर्वशक्तिमान परमेश्वर के लिए गवाही दे रही है, ऐसे लोगों का एक संगठन है, जो परमेश्वर के नहीं हैं, तो क्या सर्वशक्तिमान परमेश्वर का कार्य सिर्फ एक ढकोसला नहीं है? परमेश्वर कैसे एक आपराधिक संगठन के लोगों को, मनुष्यों के एक संगठन के लोगों को, उसकी स्तुति करने और उसके लिए गवाही देने की इजाजत दे सकता है? क्या यह परमेश्वर का अपमान नहीं है? क्या परमेश्वर खुद को अपमानित कर सकता है? कुछ लोग इस मामले के आर-पार देखने में असमर्थ हैं। उन्होंने परमेश्वर के वचनों को स्वीकार किया है, फिर भी वे यह स्पष्ट रूप से नहीं देख पा रहे हैं कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया एक किस प्रकार की कलीसिया है, और वे इसमें विश्वास करने की हिम्मत नहीं करते। सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के लोग कहते हैं: "क्या हम तुमसे मिलकर बात कर सकते हैं? आओ हम सहभागिता करें।" "मैं इस समय व्यस्त हूँ, मेरे पास समय नहीं है", जब कि वे सोच रहे हैं: "मैं तुम्हारे साथ संपर्क में आना नहीं चाहता हूँ। अगर तुम्हारे साथ संपर्क में आने के बाद तुम्हारी कलीसिया के लोग मेरा अपहरण कर लेते हैं, तो मैं क्या करूँगा?" ये लोग उन संतों के साथ तुलना के करीब नहीं आ सकते हैं, जिन्होंने सदियों से परमेश्वर के लिए खुद को शहीद किया है। जब प्रभु यीशु ने उन्हें प्रचार करने के लिए भेजा था, तो ऐसा लगता था कि भेड़ियों के बीच मेमनों को फेंक दिया गया था, और उन लोगों ने परमेश्वर के लिए खुद को शहीद करने की हिम्मत की। अब ये लोग सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया को एक आपराधिक संगठन के रूप में देखते हैं। वे डरपोक और भयभीत हो गए हैं। क्या परमेश्वर इससे निराश है? लोगों में विश्वास की कमी है और वे शैतान की बात सुनते हैं, यह मनुष्य की एक त्रासदी है।

आदम और हव्वा अदनवाटिका में बहुत खुश थे, परमेश्वर के प्रति आज्ञापालन करते हुए और परमेश्वर की आवाज़ सुनते हुए, लेकिन आखिर में उनके पाप करने का कारण क्या बना? परमेश्वर द्वारा उनसे बात करने के बाद, शैतान आया, उनको प्रलोभित करने के लिए कुछ शब्द कहे, और वे धोखा खा गए, वे भूल कर गए। उनकी भूल के बाद, वे परमेश्वर से कट गए थे, परमेश्वर ने उनसे और बात नहीं की, परमेश्वर ने अपने चेहरे को उनसे छिपा लिया। क्या यह मनुष्य के लिए त्रासदी नहीं है? सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों को सुनने के बाद, कई लोगों ने कहा, "ओह, यह वास्तव में परमेश्वर की आवाज़ है, यह वास्तव में सच है। ये शब्द इतने व्यावहारिक हैं, प्रभु यीशु के चरण के दौरान इतने सारे शब्द नहीं कहे गए थे।" एकाएक, ऐसा लगता था जैसे वे एक बार फिर परमेश्वर के आलिंगन में वापस आ गए हों, और उन्होंने आनंदित और संतुष्ट महसूस किया था। किसने सोचा होगा कि इसी क्षण में शैतान का प्रलोभन आ जाएगा: "क्या तुमने पूर्वी बिजली के बारे में सुना है? यह एक आपराधिक संगठन है, यह एक पंथ है। यदि तुम उनके द्वारा प्रचारित सुसमाचार पर विश्वास नहीं करते हो, तो वे तुम्हारी आँखें निकाल लेंगे और तुम्हारे कान काट लेंगे। वे भयावह हैं! इसलिए, अगर तुम पूर्वी बिजली के संपर्क में आते हो, तो तुमको सावधान रहना चाहिए, और तुमको कभी भी उनकी धोखाधड़ी का शिकार नहीं होना चाहिए।" और शैतान के इस प्रलोभन से, ये लोग फँस गए हैं। वे स्तब्ध हैं, और वे अब परमेश्वर के लिए काम में आने की हिम्मत नहीं करते। इसे कहते हैं "अपने संपूर्ण जीवन में चतुर रहना, लेकिन मूर्खता के एक क्षण में बर्बाद हो जाना।" क्या पूरे ताइवान में एक भी व्यक्ति ऐसा है जिसकी आँखें निकाल ली गयी हैं और जिसके कान काट दिए गए हैं? पूरे ताइवान में ऐसा एक भी मामला नहीं है। सम्पूर्ण मुख्यभूमि चीन में आँखें निकालने और कान काटने वाला एक भी किस्सा नहीं है। अगर ऐसा एक भी मामला हो, तो क्या सीसीपी इसे जाने देगी? उसने समस्त मीडिया को पूरी दुनिया में घोषणा करने के लिए नियुक्त कर दिया होता, यहाँ तक ​​कि कई दिनों के लिए इस तरह की घटनाओं का उत्साहपूर्वक प्रचार किया होता। ऐसा एक भी मामला नहीं मिल सकता है। सीसीपी हर जगह व्याप्त है, फिर भी शैतान द्वारा प्रलोभित उन लोगों को सीसीपी की असली पहचान का पता नहीं है, वे सीसीपी द्वारा किए गए सभी पापों, उसके किये सभी बुरे कर्मों के आर-पार नहीं देख पा रहे हैं। सीसीपी के मीडिया ने जितना भी कहा है, उसमें लेशमात्र भी सच्चाई नहीं है, फिर भी ये लोग इसकी असलियत को नहीं देख पा रहे हैं। तुम कहते हो कि परमेश्वर को जानना आसान नहीं है, क्योंकि परमेश्वर आत्मा है, क्योंकि परमेश्वर रहस्यमय है; लेकिन सीसीपी को जानना, शैतान को जानना, यह चीज़ तो ऐसी है ना जिसे इंसान जान सकता है, है ना? मैंने संयुक्त राज्य अमरिका (अमरिकियों) से परमेश्वर के चुने हुए कई लोगों के कुछ शब्दों को सुना, उन्होंने कहा: "हम सभी संयुक्त राज्य अमरिका के भाग्य से चिंतित हैं। संयुक्त राज्य का उत्थान और पतन हमारे लिए घनिष्टता से सम्बद्ध हैं। हमें यू.एस. के चुनावों के दौरान बोलना चाहिए, हमें बाहर जाना चाहिए और वोट देना चाहिए। यदि हम खलनायकों और शैतान की बुरी ताकतों को सत्ता में आने की इजाजत देते हैं, तो हम भी संकट में होंगे, इसलिए हमें चुनाव में भाग लेना और बोलना चाहिए। क्या यह राजनीति में भाग लेना है?" संयुक्त राज्य अमरिका से परमेश्वर के चुने गए लोगों ने एक सवाल उठाया है, और जब मैंने यह सुना तो मुझ पर इसका बहुत प्रभाव पड़ा। मैंने उन्हें बताया कि चीनी लोगों के पास ऐसे अधिकार नहीं हैं। चीन के नागरिको, क्या तुम्हें वोट देने का अधिकार है? तुम लोग सरकारी अधिकारियों का चुनाव करना चाहते हो, लेकिन क्या तुम्हारे पास अधिकार हैं? तुम्हारे पास ऐसे अधिकार नहीं हैं। इसलिए, चीनी लोगों को केवल करों का भुगतान करने का अधिकार है, लेकिन उनके पास वोट देने का अधिकार नहीं है। उनके पास नागरिकों के रूप में कोई अधिकार नहीं है, उनके पास धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार भी नहीं है। यदि तुम कहते हो कि तुम सही मार्ग की तलाश कर रहे हो, कि तुम सर्वशक्तिमान परमेश्वर को स्वीकार करते हो, कि तुम परमेश्वर के कार्य की गवाही देते हो, कि तुम परमेश्वर की गवाही देने के लिए काम आते हो, तो शैतान तुम्हें दोषी ठहराएगा। अमरिकियों के पास नागरिकों के रूप में अधिकार हैं, उनका वोट देने का अधिकार है, उनके पास बोलने की स्वतंत्रता का अधिकार है। संयुक्त राज्य अमरिका चीनी लोगों की नज़रों में अलग है, संयुक्त राज्य अमेरिका वास्तव में लोकतांत्रिक देश है, जबकि चीनी लोगों के पास ऐसे अधिकार नहीं हैं। हालांकि, अमरिकियों का कहना है, हमारे नागरिकों का चुनाव में भाग लेना, और वे सभी चीजें जो हम नागरिक होने के अधिकारों के अनुसार करते हैं, क्या उन चीज़ों का अर्थ राजनीति में भाग लेना है? ये बातें राजनीति में भाग लेना नहीं हैं, ये चीजें खुद नागरिकों के अधिकार हैं। नागरिकों का अपने अधिकारों का प्रयोग करना और अपने कर्तव्यों को पूरा करना, ये राजनीति में भाग लेना नहीं है, क्या यह सही नहीं है? अनुग्रह के युग के दौरान, प्रभु यीशु ने कहा कि हमें पृथ्वी का प्रकाश और नमक होना चाहिए, इसका क्या अर्थ है? पृथ्वी के प्रकाश और नमक होने का अर्थ है परमेश्वर के लिए गवाही देना, संतों की भद्रता को जीना, उस तथाकथित वास्तविकता को परमेश्वर के वचनों के अनुसार जीना जिसकी परमेश्वर ने माँग की है। यही धरती का प्रकाश और नमक बनना है। संयुक्त राज्य अमरिका के परमेश्वर के चुने हुए लोगों में न्याय की भावना है, इसलिए वे इसकी माँग करते हैं, इसलिए उन्हें इस जिम्मेदारी को उठाना है। ऐसे लोग जब परमेश्वर के कार्य को स्वीकार करते हैं, तो वे निश्चित रूप से कई सच्चाइयों को समझ सकते हैं, और वे भविष्य में परमेश्वर के लिए गवाही देने में सक्षम होंगे। दुनिया की राजनीतिक शक्तियों के नाम पर की जाने वाली कई चीजें परमेश्वर द्वारा अनुमोदित नहीं हैं; फिर भी, परमेश्वर की इच्छा पूरी करने के नाम पर, परमेश्वर के लिए गवाही देने के नाम पर, बहुत काम किया गया है, इस तरह के काम को परमेश्वर की मंजूरी मिलेगी। क्या अब तुमने इस मुद्दे को पूरी तरह से समझ लिया है? एक नागरिक के अधिकारों का प्रयोग करो, साथ ही नागरिक के रूप में जिम्मेदारियों और कर्तव्यों को पूरा करो, लेकिन एक राजनीतिज्ञ न बनो, और ऐसे व्यक्ति बनो जो परमेश्वर के लिए गवाही देता है, यह प्रमुख है। क्या अब तुम समझते हो?