मसीह की बातचीतों के अभिलेख

विषय-वस्तु

अध्याय 31. बुनियादी ज्ञान जो मनुष्य के पास होना चाहिए

परमेश्वर द्वारा इंसानों पर विजय प्राप्त कर लेने के बाद, ज्ञान की बुनियादी विशेषता जो उन्हें प्रदर्शित करनी चाहिए वह है बोली में अहंकार की कमी। उन्हें जो सबसे अच्छा काम करना चाहिए वह है नम्र स्थिति को अपना लेना, “जमीन पर पड़े गोबर के जैसे,” और व्यावहारिक रूप से बातचीत करना। विशेष रूप से परमेश्वर का दर्शन करते समय, अगर आप कोई खोखली बात या बड़ी-बड़ी बात किए बगैर, कोई काल्पनिक झूठ बोले बगैर, अपने हृदय से कुछ गहराई वाली बात कह सकते हैं, तो फिर आपका स्वभाव बदल जाएगा और यह तब होना चाहिए जब आप परमेश्वर द्वारा जीत लिए गए हों। अगर आप इतना भी ज्ञान नहीं रख सकते हैं, तो आप वास्तव में अमानवीय हैं। भविष्य में परमेश्वर द्वारा सभी देशों और क्षेत्रों को जीत लेने पर, अगर परमेश्वर के गुणगान के लिए एकत्रित भारी भीड़ में, आप फिर से अहंकारी की तरह व्यवहार करना आरंभ कर देते हैं, तो आप निकाल और समाप्त कर दिए जाएंगे। भविष्य में आपको हमेशा उचित ढंग से व्यवहार करना चाहिए, अपनी हैसियत और स्थिति को पहचानना चाहिए और अपने पुराने रंग-ढंग में नहीं लौट जाना चाहिए। शैतान की छवि सबसे अच्छे ढंग से मानव के अभिमान में प्रकट होती है। स्वयं के इस पहलू को बदले बगैर, आप कभी भी इंसान नहीं दिखाई देंगे और हमेशा शैतान का चेहरा धारण करेंगे। इस क्षेत्र का ज्ञान होना पूर्ण परिवर्तन हासिल करने के लिए पर्याप्त नहीं होगा। आपको बहुत सारे सुधारों को दृढ़ बनाए रखना होगा। बगैर कोई कार्यवाही और काट-छांट, दीर्घकाल में, आप फिर भी खतरे के अधीन रहेंगे। भविष्य में, जब परदेशी शामिल हों और कहें: “हमें ज्ञान प्राप्त हुआ है, परमेश्वर को चीन में विजेताओं का एक समूह मिल गया है,” आप यह सुनकर सोचेंगे: “हमें समझ आ गया है कि हमारे पास शेखी बघारने के लिए कुछ नहीं है, सब कुछ परमेश्वर की कृपा से प्राप्त होता है। हम विजेता कहलाने के योग्य नहीं हैं।” समय के साथ, जैसे-जैसे आप स्वयं को कुछ कहने के लिए सक्षम होते देखना शुरू करते हैं, और आप यह सुनना शुरू करते हैं कि जहां तहां परदेशियों को ज्ञान प्राप्त हो रहा है, तो आप विचार करेंगे: “वास्तव में, पवित्र आत्मा ऐसे ही ज्ञान का प्रकाश फैलाती है, हम परदेशियों से कहीं अधिक जानते हैं, इसलिए हमें विजेता माना जाना चाहिए!” अब आप अपने हृदय में इस अभिस्वीकृति को चुपचाप मान लेंगे, और आप निस्संदेह बाद में सार्वजनिक रूप से स्वीकार करेंगे। मनुष्य प्रशंसा किए जाने और स्थिति द्वारा परीक्षा लिए जाने पर टिक नहीं पाते हैं। अगर आपकी हमेशा प्रशंसा होती है, तो आप जल्दी ही बर्बाद हो जाएंगे।

आपको अपने पुराने रंग-ढंग में वापस लौट जाने से बचने के लिए, पहले आपको यह पहचानना चाहिए कि आपका स्वभाव बदला नहीं है, आपमें परमेश्वर से विश्वासघात करने की प्रकृति की जड़ें गहरी हैं और उन्हें अभी हटाया जाना शेष है; आप अभी भी परमेश्वर से विश्वासघात करने के खतरे में है। आप विनाश की निरंतर संभावना का सामना करते हैं। तीन अन्य प्रमुख बिंदु हैं: पहला, आपने परमेश्वर को नहीं जाना है। दूसरा, आपका स्वभाव बदला नहीं है। तीसरा, आपको अभी भी इंसान की छवि प्राप्त करना बाकी है, आप अच्छे लोगों में सबसे नीचे हैं; हर किसी को यह बिंदु स्पष्ट रूप से समझ लेना चाहिए। हर किसी को एक आदर्श वाक्य के साथ तैयार रहना चाहिए, इसे खुदवा या लिखवा लेना चाहिए, : “मैं दानव हूँ,” या “मैं अकसर अपने पुराने रंग-ढंग में लौट जाता हूँ।” या “मैं हमेशा खतरे में रहता हूँ,” या “मैं जमीन पर पड़ा हुआ गोबर हूँ।” शायद सदैव इन शब्दों से स्वयं को चेतावनी देते रहने से कुछ प्रभाव पड़ेगा लेकिन सबसे अधिक महत्वपूर्ण है कि आप परमेश्वर के वचनों को पढ़ें और अपनी प्रकृति को समझें। केवल वास्तविक बदलाव हासिल करके ही आप सुरक्षित रहेंगे। दूसरी चीज यह है कि कभी भी ऐसे व्यक्ति का स्थान न लें जो परमेश्वर का साक्षी हो। आपको केवल निजी अनुभव के बारे में बात करना चाहिए। आप इस बारे में बात कर सकते हैं कि परमेश्वर ने आपको कैसे बचाया, इस बारे में बातचीत कर सकते हैं कि परमेश्वर ने आपको कैसे जीता और उन्होंने आप पर क्या कृपा की। भूलें नहीं कि आप सबसे अधिक भ्रष्ट व्यक्ति हैं, आप गोबर की खाद और कचरा हैं। केवल परमेश्वर के माध्यम से ही आपकी उन्नति हुई है। क्योंकि आप सबसे भ्रष्ट हैं, सबसे गंदे हैं, वे आपके उद्धार के लिए देहधारण करते हैं और आप पर इतनी बड़ी कृपा करते हैं। इसलिए आपमें शेखी बघारने के लायक कुछ नहीं है और आप केवल परमेश्वर की प्रशंसा कर सकते हैं, परमेश्वर का धन्यवाद कर सकते हैं। आपका उद्धार केवल परमेश्वर की कृपा से ही है। ऐसा क्यों कहा जाता है कि आप सबसे भाग्यशाली व्यक्ति हैं? आप भाग्यशाली इसलिए नहीं हैं क्योंकि आपके पास कुछ विशेष लाभ हैं या अच्छे गुण हैं। आप इसलिए भाग्यशाली हैं क्योंकि आपका जन्म चीन में हुआ है और आप शैतान द्वारा सबसे अधिक भ्रष्ट और अशुद्ध किए गए हैं। इसलिए, परमेश्वर ने सबसे पहले सर्वाधिक भ्रष्ट और गंदे स्थान में से अनुकरणीय मॉडलों का एक समूह बना करके अपनी प्रबंधन योजना की शुरूआत की। इसलिए उन्होंने आपको खोज निकाला। अगर परमेश्वर इस तरह से योजना नहीं बनाते, तो आपका हमेशा के लिए नाश हो गया होता। इसलिए आप कह सकते हैं कि आप सबसे भाग्यशाली हैं, लेकिन इसमें गर्व करने वाली कोई बात नहीं है, और शेखी बघारने वाली कोई बात निश्चित रूप से नहीं है। जब आप परमेश्वर के लिए गवाही देते हैं, तो आपको मुख्य रूप से इस बारे में अधिक बात करनी चाहिए कि परमेश्वर कैसे न्याय करते हैं और लोगों को कैसे दंड देते हैं, मनुष्यों का शुद्धिकरण करने और मनुष्यों के स्वभाव में परिवर्तन लाने के लिए किन परीक्षणों का उपयोग करते हैं, आपने कितना सहन किया है, आपके भीतर कितने विद्रोह और भ्रष्टाचार का पता चला है, और आपने किन तरीकों से परमेश्वर का विरोध किया है। फिर आप इस बारे में बात कर सकते हैं कि आखिरकार परमेश्वर ने कैसे आपको जीता था और आपको इसका बदला परमेश्वर को कैसे चुकाना चाहिए। इस प्रकार की भाषा में तत्व डालें, इसे सरल तरीके से प्रस्तुत करें, और खोखले सिद्धांतों के बारे में बात नहीं करें। तत्व के बारे में बात करें, हृदय से बोलें, यह आपके अनुभव के लिए पर्याप्त होता है। अलंकरण के रूप में बहुत अधिक प्रत्यक्ष गहराई वाले खोखले सिद्धांतों को तैयार नहीं करें। यह बहुत अहंकारी और मूर्खतापूर्ण लगेगा। वास्तविकता वाले व्यावहारिक अनुभवों से सच के बारे में ज्यादा बोलें, अपने हृदय से वचनों के बारे में बोलें। वे ही हैं जिनसे लोगों को सबसे अधिक लाभ होता है और जो लोगों के लिए सबसे अधिक उपयुक्त होते हैं। आप परमेश्वर के सबसे कट्टर विरोधी थे, परमेश्वर के सबसे अवज्ञाकारी, लेकिन आज आप जीत लिए गए हैं, इसे कभी नहीं भूलें। इस प्रकार के मामलों में अनवरत विचार की आवश्यकता होती है। इन चीजों पर अधिक देर तक विचार करें, ऐसा न हो कि आप और अधिक बेशर्म और मूर्खतापूर्ण कृत्य कर बैठें।