645 हमें बचाने के लिए परमेश्वर को धन्यवाद दो

1 कि परमेश्वर "पूर्वी एशिया के बीमार मनुष्य" नामक उन लोगों में काम करने में सक्षम है यह उसकी महान सामर्थ्य है। यह उसकी विनम्रता और प्रच्छन्नता है। हमारे प्रति उसके कठोर वचनों या ताड़ना की परवाह के बिना, हमें उसकी विनम्रता के लिए अपने दिल की गहराई से उसकी स्तुति करनी चाहिए, और इसके बिल्कुल अंत तक उससे प्रेम करना चाहिए। जिन लोगों को शैतान द्वारा हजारों वर्षों से बाध्य किया गया है, उन्होंने उसके प्रभाव के अधीन रहना जारी रखा हुआ है और उसे ठुकराया नहीं है। उन्होंने कड़ुवाहट के साथ टटोलना और संघर्ष करना जारी रखा है। अतीत में वे धूप जलाते थे और शैतान के आगे झुकते थे और उसे प्रतिष्ठापित करते थे, और वे परिवार और दुनियावी उलझनों और साथ ही सामाजिक संबंधों से कस कर बँधे हुए थे। वे उन्हें ठुकराने में असमर्थ थे। इस प्रकार के गला-काट-प्रतियोगिता वाले समाज में, किसी भी व्यक्ति को सार्थक जीवन कहाँ प्राप्त हो सकता है? लोग जिसका वर्णन करते हैं वह पीड़ा का जीवन है, और सौभाग्य से, परमेश्वर ने इन निर्दोष लोगों को बचाया है, हमारे जीवन को अपनी देखभाल और अपने संरक्षण के अधीन रखा है ताकि हमारी जिंदगी आनंदित रहे और चिंता से अब और भरी न हो। अभी तक हमने उसके अनुग्रह के अधीन रहना जारी रखा है। क्या यह परमेश्वर का आशीर्वाद नहीं है? किसी में भी कैसे परमेश्वर से अतिव्ययी माँग करने की धृष्टता हो सकती है?

2 क्या उसने हमें इतना कम दिया है? क्या तुम लोग अभी भी संतुष्ट नहीं हो? मुझे लगता है कि हमारे लिए परमेश्वर का प्यार चुकाने का समय आ गया है। यद्यपि हम उपहास, अपयश और उत्पीड़न की किसी छोटी मात्रा के अधीन नहीं हैं क्योंकि हम परमेश्वर में विश्वास के मार्ग का अनुसरण करते हैं, किंतु मेरा मानना है कि यह एक सार्थक चीज है। यह महिमा की बात है, शर्म की नहीं, और कुछ भी हो, जिन आशीषों का हम आनंद लेते हैं वे बिल्कुल भी मामूली नहीं है। निराशा के असंख्य समयों में, परमेश्वर के वचनों ने आराम पहुँचाया है, और इससे पहले कि यह हमें पता चले, दुःख प्रसन्नता में पलट जाता है। आवश्यकता के असंख्य समयों में, परमेश्वर आशीर्वाद लाया है और उसके वचनों के माध्यम से हमारा भरण-पोषण किया गया है। बीमारियों के असंख्य समयों में, परमेश्वर के वचनों ने जीवन प्रदान किया है—हमें खतरे से मुक्त किया है, और खतरे से सुरक्षा में पलट दिया है। तुम महसूस किए बिना पहले से ही इन जैसी बहुत सी चीजों का आनंद उठा चुके हो। क्या संभवतः ऐसा हो सकता है कि तुम्हें याद न हो?

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "मार्ग... (2)" से रूपांतरित

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