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मैंने सच्ची खुशी खोज ली

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ज़ैंग हुआ, कम्बोडिया

मेरा जन्म एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। भले ही मेरा परिवार अमीर नहीं था, लेकिन मेरे पिता और मां एक—दूसरे से बहुत प्रेम करते थे और अच्छी तरह से मेरा ख्याल रखते थे। हमारा पारिवारिक जीवन काफी पर्याप्त और समृद्ध था। मेरे बड़े होने के बाद, मैंने खुद से कहा: मुझे एक पति खोजना चाहिए जो मेरा अच्छे से ख्याल रखे और मुझे एक सुखद व सुखी परिवार स्थापित करना चाहिए। यही बात सबसे महत्वपूर्ण है। मैं अमीरी की खोज नहीं करती हूं, मुझे बस अपने पति के साथ एक प्रिय संबंध बनाने और शांतिपूर्ण पारिवारिक जीवन जीने की जरूरत है।

एक पारस्परिक जान—पहचान के माध्यम से मेरे पति से मेरी मुलाकात हुई। वह मुझे नापसंद आया क्योंकि उसका कद काफी छोटा था, लेकिन मेरे पिता और माता उसे प्रशंसात्मक ढंग से देखा। उन्होंने मुझसे कहा: “उसका दिल अच्छा है और वह अच्छी तरह से तुम्हारा ध्यान रखेगा।” मैंने देखा कि मेरा पति लोगों से बहुत ईमानदारी से बर्ताव करता था और वह ऐसा लगता था जो अपने परिवार का अच्छी तरह से ध्यान रखता था। मैंने सोचा, “अगर उसका कद थोड़ा छोटा भी है, तब भी ठीक है। जब तक वह मेरे साथ अच्छे से बर्ताव करता है, तब तक सब ठीक है।” परिणामस्वरूप, मैं शादी के लिए तैयार हो गई और 1989 में, हमने शादी कर ली। हमारी शादी होने के बाद, मेरे पति ने बड़ी कोमलता से मेरे साथ बर्ताव किया और वह अच्छी तरह से मेरा ख्याल रखा करता था। मेरा वैवाहिक जीवन काफी सुखद और पर्याप्त था। मेरा पति मुझसे अच्छा बर्ताव करता था, और मुझे यह अपने दिल से याद था। मैं भी पूरी लालसा से उसका ख्याल रखती थी और सभी मामलों में उसके बारे में सोचती थी। हमारी दो बेटियों का जन्म हो जाने के बाद, मेरे पति को निश्चित होकर काम करने की अनुमति देने के लिए, मैं घर में रुक गई और परिवार का ख्याल रखने लगी। उस समय, मेरी छोटी बेअी अक्सर ही बीमार हो जाती थी। एक बार, रात के समय, उसे अचानक बुखार आ गया। मेरा पति रात्रि पाली में काम कर रहा था और वह घर पर नहीं था। घबराहट में, मैंने अपनी बेटी को खुद की हॉस्पिटल ले जाने का फैसला किया। जब मेरे पति को इसका पता चल, तो वह घर वापिस आना चाहता था। वह नहीं चाहता था कि मुझे बहुत ज्यादा कष्ट सहना पड़े। मैं बहुत खुश थी कि मेरे पति का दिल इतना अच्छा है। इसके बाद, वे दो बच्चियां पढ़ाई के लिए गांव से बाहर चली गईं। मैं उनकी पढ़ाई के दौरान उनका साथ देने और ख्याल रखने के लिए एक जगह किराए पर ले ली। जब तक मैं एक निश्चित मामले को संभाल सकती थी, तब तक मैंने अपने पति को उस बारे में तकलीफ नहीं दी। भले ही कई बार, यह कठिन था और मैं कुछ थक भी जाती थी, लेकिन पति और पत्नी के रूप में हमारा संबंध पारस्परिक प्यार और सहयोग से भरा हुआ था। मुझे महसूस होता था कि मेरा जीवन सुखद है।

उन दिनों, मेरा पति जो धन कमाया करता था वह हमारे दैनिक खर्चों को पूरा करने बस के लिए पर्याप्त था। भले ही हमारी जिंदगी थोड़ी कठिन थी, लेकिन मैंने कभी भी उससे शिकायत नहीं की। मैंने महसूस किया कि पति और पत्नी को जीवन के सुखों और दुखों को साझा करना चाहिए। इसके बाद, मेरे पति के कार्यस्थल में आर्थिक स्थिति गड़बड़ा गई और वह हर महीने की तुलना में केवल आधी कमाई ही घर लाने में सक्षम हो रहा था। जल्द ही, हम अपने बच्चों के विद्यालय शुल्क का भुगतान करने में भी सक्षम नहीं होने वाले थे। अपने पति के दबाव को कम करने के प्रयास में, मैं अक्सर ही अपने रिश्तेदारों से धन उधार लिया करती थी। मैंने सोचा, “ये कठिनाईयां बस अस्थाई हैं। परिस्थिति अंतत: बेहतर हो जाएंगी।” चूंकि हम काफी से ऋण पर धन लेते आए थे, इसलिए धीरे—धीरे हम पर कर्ज बढ़ता ही गया। मेरा पति और मैं दोनों ने ही यह महसूस किया कि यह दबाव बहुत ज्यादा था। 2013 में, मेरे पति ने धन कमाने के लिए विदेश जाने के बारे में सोचना शुरू किया। जब मैंने यह सुना, तो भले ही मैं अनिच्छुक थी, लेकिन मैंने सोचा, “यह यह कुछ धन कमाने के लिए दो से तीन सालों के लिए विदेश जाता है, तो हम अपना कुछ कर्ज उतार सकते हैं और अपने परिवार की स्थिति को बेहतर कर सकते हैं।” इससे भी बढ़कर, हमारे बच्चे बड़े हो रहे हैं और हम उन्हें अच्छा वातावरण देना चाहते हैं। अपने परिवार की खातिर, मैं काम करने के लिए उसे विदेश जाने के लिए तैयार हो गई।

मेरा पति तीन साल के लिए कम्बोडिया चला गया। इन तीन सालों में, मैं घर पर रुकी और बच्चों और हमारे बुजुर्ग माता—पिता का ध्यान रखती थी। आरंभ में, मेरा पति अक्सर ही घर कॉल किया करता था और दिखाता था कि वह परिवार का ख्याल करता है। मैं घर धन भी भेजा करता था। इसके बाद, उसके कॉल आना कम से कमतर होते गए और वह घर पर धन भी बहुत कम भेजने लगा था। अंत में, यह इतना गंभीर हो गया कि वह घर कोई धन ही नहीं भेजता था और उसे घर पर कॉल किए हुए भी बहुत समय हो गया था। मुझे चिंता हो रही थी कि उसे कहीं कुछ हो तो नहीं गया था। परिणामस्वरूप, मैं उसे देखने जाने के लिए अपनी बेटियों को ले गई। जब हम कम्बोडिया पहुंचे और मैंने देख लिया कि मेरा पति सही—सलामत था, तो मुझे राहत मिली। चूंकि हम पहली बार कम्बोडिया में थे, मैंने वापिस घर जाने से पहले वहां अपनी बेटियों के साथ कुछ समय तक ठहरने और अपने ​पति के साथ रहने की तैयारी की थी। हालांकि, मैंने पाया कि हर बार जब मैं अपने पति के साथ बाहर जाया करती थी, तो मेरे पति को जानने वाले लोग बहुत ही अजीब भाव के ​साथ देखते थे। चूंकि, हम समान भाषा नहीं बोलते थे, इसलिए वे क्या कह रहे थे, मैं यह नहीं जानती थी। एक हफ्ते के बाद, मेरा पति एक अजनबी बच्चे को अपनी बांह में लेकर मेरे पास आया। उसने उस बच्चे से कहा, “अपनी आंटी से तुरंत नमस्ते करो।” उस समय, मैं भावशून्य तरीके से बस देखती रही क्योंकि मैं नहीं जानती थी कि क्या हो रहा था। जब मैंने अपने पति से पूछा, तो पाया कि यह बच्चा उसे कम्बोडिया में मिली एक दूसरी औरत से पैदा हुआ था। मैं अकथनीय रूप से गुस्सा हो गई ​थी और मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूं। मैंने उसे खूब भला—बुरा कहा, तो उसने नीरसता से उत्तर दिया, “यह बहुत आम बात है। यहां कई लोग ऐसा करते हैं!” जब मैंने उसे ऐसा कहते हुए सुना, तो मुझे इतनी गुस्सा आई कि मेरा पूरा शरीर कांपने लगा। मैंने कभी यह सोचा भी नहीं था कि मेरा पति और मैं इतने सालों से एक—दूसरे से प्रेम किया करते थे, फिर भी वह मुझे इतनी उदासीन और निर्मोही बात कह सकता था और बेशर्मीपूर्वक ऐसा कुछ कर सकता था। गुस्से में, मैंने क्रूरतापूर्वक उसे दो थप्पड़ मार दिए। मेरे पति के धोखे से मैं कमजोर हो गई थी। उसके धोखे का सत्य मुझ पर स्वच्छ आकाश में बिजली गिरने की तरह था। उसे कभी भी ऐसा कोई पूर्व संकेत तक नहीं दिया था कि वह ऐसा कुछ कर लेगा। मैं उसके बारे में यह स्वीकार नहीं कर सकती थी। मैं जमीन पर बैठ गई और फूट—फूटकर रोने लगी। मैंने खुद से बार—बार यह पूछा, “मेरा पति मेरे साथ ऐसा क्यों करेगा?” मैं जिस पति को जानती थी वह कहां चला गया?” क्या ऐसा हो सकता है कि अनंत प्रेम की उसकी प्रतिज्ञा, उसकी स्नेहशीलता और देखभाल सबकुछ नकली था? मैंने इस परिवार को सबकुछ दिया। मैंने कभी भी अपने पति को मुझे धन या भौतिक आनंद देने के लिए नहीं कहा। हालांकि, अब... मेरे पति का धोखा अब मुझपर एक बड़े अपमान की तरह था। मुझे महसूस हुआ कि मुझमें जिंदा रहने की कोई गरिमा नहीं बची थी।

उसके बाद के दिनों में, मैं हर रोज आंसुओं से अपना चेहरा धोती थी। मैं उस औरत एवं उस बच्चे से घृणा करती थी। मैंने अपने पति को बताया कि मुझे तलाक चाहिए और मैं अपनी बेटियों को घर ले जाने और इस तथा—कथित परिवार को छोड़ने के लिए तैयार थी। मैंने नहीं सोचा था कि मेरा पति न ही तो मुझे तलाक देने के लिए तैयार होगा, न ही उस महिला को छोड़ने के लिए। परिणामस्वरूप, मुझे पता चला कि मेरे परिवार के कुछ सदस्य पहले से ही यह जानते थे कि मेरे पति को कोई दूसरी महिला मिल गई है और उसे उससे एक बच्चा भी है। उन्होंने इस बारे में मुझे बस अंधकार में रखा। मुझे और भी ज्यादा महसूस होने लगा कि मैं किसी गरिमा में नहीं जी रही थी। मैंने इस परिवार के लिए कड़ी मेहनत से त्याग किया था। मैंने कभी भी यह नहीं सोचा था कि मुझे इस धोखे और कपट के साथ अदायगी की जाएगी। मेरा दिल टूट गया था... यह धोखा पहले से ही बहुत दर्दनाक था। एक और बात जिसे स्वीकार करना मेरे लिए और भी कठिन हो गया था कि वे लोग जो मेरे पति और उस महिला को जानते थे, वे अजीब तरह से मुझे देखा करते थे और मेरी आलोचना भी किया करते थे। असल में, यह मेरा पति ही था जिसने मुझे धोखा दिया था और उस महिला ने मेरे परिवार के टुकड़े कर दिए थे। हालांकि, अब, दूसरों की आंखों में, मैं तृतीय पक्ष थी। उस समय मैं जिस दर्द को महसूस कर रही थी मैं उसका वर्णन नहीं कर सकती। जब व्यक्ति खराब महसूस कर रहा हो, तो समय भी धीरे—धीरे चलता है। जल्द ही, मैंने 10 कि.ग्रा. से ज्यादा वजन घटा दिया।

उस समय जब मैं पूरी तरह से निराश हो गई थी, तब मेरा सामना अंत के दिनों के सर्वशक्तिमान परमेश्वर के उद्धार से हुआ। जब मेरी पड़ोसी लिन टिंग को इस घटना के बारे में पता चला, तो वह मेरे पास आई और उस सुसमाचार का प्रचार मुझसे किया। उसने कहा, “परमेश्वर में विश्वास रखे। परमेश्वर तुम्हारी मदद कर सकता है।” हालांकि, नास्तिकता के प्रभाव में होने की वजह से, मैं यूं ही कैसे परमेश्वर में विश्वास कर सकती थी! मैंने उसे कोई भी उत्तर नहीं दिया। इसके बाद, लिन टिंग ने एक बार फिर मुझसे बात की, “परमेश्वर के वचन पढ़ो। परमेश्वर तुम्हें बचाने और अपने दर्द से मुक्त होने में तुम्हारी मदद करने में सक्षम है।” उसने इतनी ईमानदारी से ये बाते कही कि मैं भावनात्मक रूप से विचलित हो गई। मैं एक बार फिर उसे मना करने में शर्मिंदगी महसूस की और परिणामस्वरूप, मुझे 'वचन देह में प्रकट होता है' पुस्तक की एक प्रति प्राप्त हुई। मैंने उस पुस्तक को खोला और निम्न अवतरण पढ़े: “मनुष्य, जिन्होंने सर्वशक्तिमान के जीवन की आपूर्ति को त्याग दिया, नहीं जानते हैं आखिर वे क्यों अस्तित्व में हैं, और फिर भी मृत्यु से डरते रहते हैं। इस दुनिया में, जहां कोई सहारा नहीं है, सहायता नहीं है, वहाँ बहादुरी के साथ, बिन आत्माओं की चेतना के शरीरों में एक अशोभनीय अस्तित्व को दिखाते हुए मनुष्य, अपनी आंखों को बंद करने में, अभी भी अनिच्छुक है। तुम इनके समान जीते हो, आशाहीन; उसका अस्तित्व इसी प्रकार का , बिना किसी लक्ष्य का है । किंवदन्ती में मात्र एक ही पवित्र जन है जो उन्हें बचाने के लिए आएगा जो कष्ट से कराहते हैं और उसके आगमन के लिए हताश होकर तड़पते हैं। … जब तुम थके हो और इस संसार में खुद को तन्हा महसूस करने लगो तो, व्याकुल मत होना, रोना मत। सर्वशक्तिमान परमेश्वर, रखवाला, किसी भी समय तुम्हारे आगमन को गले लगा लेगा।” (“वचन देह में प्रकट होता है” से “सर्वशक्तिमान का आह भरना” से) जब मैंने परमेश्वर के आंतरिक वचनों को पढ़ा, तो मैं आंसुओं से भर गई और मैंने महसूस किया कि वह परमेश्वर असल में मानव जाति को समझता है। जब मैंने अपने पति के धोखे का सामना किया था, तो मैंने मरना चाहती थी लेकिन मुझमें ऐसा करने की हिम्मत नहीं थी न ही मैंने इस तरह से मृत्यु को त्यागा। मैंने अपने जीवन की दिशा और उद्देश्य को खो दिया था और मैं खुद को त्यागना भी चाहती थी। जब मैंने परमेश्वर के वचन पढ़े, तो मैं ​जीवन की आशा खोज पाई और मेरे दिल को शांति मिली। भले ही मेरे पति ने मुझे धोखा दे दिया था, लेकिन मैं परमेश्वर पर भरोसा कर सकती थी। मैं अकेली थी। सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने कहा था, “जब तुम थके हो और इस संसार में खुद को तन्हा महसूस करने लगो तो, व्याकुल मत होना, रोना मत। सर्वशक्तिमान परमेश्वर, रखवाला, किसी भी समय तुम्हारे आगमन को गले लगा लेगा।” मैं परमेश्वर पर भरोसा करने की इच्छुक ​थी क्योंकि मुझे दुख पहुंचा था और मेरी परवाह करने वाला कोई भी नहीं था। मुझे परमेश्वर के अनुग्रह की जरूरत थी। मैंने महसूस किया कि हर दिन काफी दर्दनाक और थकाऊ था। मैं इसे इसी तरह से जारी नहीं रखना चाहती थी। चूंकि परमेश्वर मानव जाति को इतनी अच्छी तरह से समझता है, इसलिए वह निश्चित रूप से मुझे इस दर्द से बाहर निकलने के लिए मार्गदर्शन कर सकता था। परिणामस्वरूप, मैंने लिन टिंग के साथ परमेश्वर के वचनों को पढ़ना जारी रखा। हमने परमेश्वर के प्रयोजनों का संचार किया और परमेश्वर की पूजा करने के लिए भजन गाना भी सीखा। लिन टिंग ने मुझे बताया था, “जब तुम बुरे समय से गुजर रही हो, तो परमेश्वर से प्रार्थना करो और परमेश्वर के वचनों को पढ़ो। परमेश्वर हमारे आहत दिल को राहत दे सकता है।” मैंने वैसा ही किया, जैसे करने के लिए उसने मुझसे कहा था। जब मैंने सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कलीसिया के भाइयों व बहनों द्वारा शूट किए गए एमवी और भजन के वीडियो को देखा, तो मेरे दिल में मैंने खुशी महसूस करनी शुरू कर दी। मुझे महसूस हुआ कि केवल परमेश्वर के परिवार में ही सच्चा प्रेम है और यह सच्च आनंद केवल मेरे भाइयों व बहनों के साथ मिल सकता है। यह परिस्थिति खास तौर पर तब थी जब मैंने “कनान की धरती पर खुशियाँ” वीडियो देखा। मेरा दिल भाइयों व बहनों के साथ गाने और नाचने के लिए कूदने लगा था। मेरा कष्ट और अवसाद से भरा दिल तुरंत ही चमक गए और अंतत: मेरे चेहरे पर एक मुस्कान आना शुरू हो गई। तुरंत ही, मैंने महसूस किया कि यही वह परिवार है जिसे मैं सच में चाहती थी। परिणामस्वरूप, मैं अपने भाइयों व बहनों के साथ कलीसिया के जीवन का आनंद लेने लगी।

इसके बाद, मैंने परमेश्वर के कुछ और वचन भी पढ़ें: “शैतान के मामले में भी विशेष व्याख्या की आवश्यकता है जो मनुष्य को भ्रष्ट करने के लिए सामाजिक प्रवृत्तियों का लाभ उठाता है। इन सामाजिक प्रवृत्तियों में अनेक बातें शामिल होती हैं। कुछ लोग कहते हैं: "क्या वे उन कपड़ों के विषय में हैं जिन्हें हम पहनते हैं? क्या वे नवीतनम फैशन, सौन्दर्य प्रसाधनों, बाल बनाने की शैली एवं स्वादिष्ट भोजन के विषय में हैं?" क्या वे इन चीज़ों के विषय में हैं? ये प्रवृतियों (प्रचलन) का एक भाग हैं, परन्तु हम यहाँ इन बातों के विषय में बात करना नहीं चाहते हैं। ऐसे विचार जिन्हें सामाजिक प्रवृत्तियां लोगों के लिए ले कर आती हैं, जिस रीति से वे संसार में स्वयं को संचालित करने के लिए लोगों को प्रेरित करती हैं, और जीवन के लक्ष्य एवं बाह्य दृष्टिकोण जिन्हें वे लोगों के लिए लेकर आती हैं हम केवल उनके विषय में ही बात करने की इच्छा करते हैं। ये अत्यंत महत्वपूर्ण हैं; वे मनुष्य के मन की दशा को नियन्त्रित एवं प्रभावित कर सकते हैं। एक के बाद एक, ये सभी प्रवृत्तियां एक दुष्ट प्रभाव को लेकर चलती हैं जो निरन्तर मनुष्य को पतित करती रहती हैं, जो उनकी नैतिकता एवं उनके चरित्र की गुणवत्ता को और भी अधिक नीचे ले जाती हैं, उस हद तक कि हम यहाँ तक कह सकते हैं कि अब अधिकांश लोगों के पास कोई ईमानदारी नहीं है, कोई मानवता नहीं है, न ही उनके पास कोई विवेक है, और कोई तर्क तो बिलकुल भी नहीं है। …वे इस किस्म की चीज़ों को करते हुए शुरुआत करते हैं, इस किस्म के विचार या इस किस्म के दृष्टिकोण को स्वीकार करते हैं। फिर भी अधिकांश लोगों को उनकी अनभिज्ञता के मध्य इस किस्म की प्रवृत्ति के द्वारा अभी भी संक्रमित, सम्मिलित एवं आकर्षित किया जाएगा, जब तक वे सब इसे अनजाने में एवं अनिच्छा से स्वीकार नहीं कर लेते हैं, और जब तक सभी को इस में डूबोया एवं इसके द्वारा नियन्त्रित नहीं किया जाता है। क्योंकि मनुष्य जो एक स्वस्थ्य शरीर एवं मन का नहीं है, जो कभी नहीं जानता है कि सत्य क्या है, जो सकारात्मक एवं नकारात्मक चीज़ों के बीच अन्तर नहीं बता सकता है, इन किस्मों की प्रवृत्तियां एक के बाद एक उन सभों को स्वेच्छा से इन प्रवृत्तियों, जीवन के दृष्टिकोण, जीवन के दर्शन ज्ञान एवं मूल्यों को स्वीकार करने के लिए प्रेरित करती हैं जो शैतान से आती हैं। जो कुछ शैतान उनसे कहता है वे उसे स्वीकार करते हैं कि किस प्रकार जीवन तक पहुंचना है और जीवन जीने का उस तरीके को स्वीकार करते हैं जो शैतान उन्हें "प्रदान" करता है। उनके पास वह सामर्थ्य नहीं है, न ही उनके पास वह योग्यता है, प्रतिरोध करने की जागरूकता तो बिलकुल भी नहीं है।” (“वचन देह में प्रकट होता है” से “स्वयं परमेश्वर, अद्वितीय VI परमेश्वर की पवित्रता (III)” से) जब मैंने परमेश्वर के वचनों के इस अंश को पढ़ा, तो मैंने वह बात सोची जो मेरे पति ने मुझसे कही थी: “यह बहुत आम बात है। यहां कई लोग ऐसा करते हैं!” क्या मेरे पति के विचार उस सत्य के रूप में प्रकट नहीं हुए हैं जिसे परमेश्वर के वचनों ने उजागर किया है कि कि कैसे समाज की बुरी रीतियां शैतान के भ्रष्ट और समाविष्ट लोगों से प्रभावित हुई है। मेरे प​ति के देश छोड़ने से पहले, वह अपने परिवार का ध्यान रख सकता था और मेरा और हमारे बच्चों का ध्यान रख सकता था। हालांकि, उसे काम के लिए घर छोड़े हुए केवल तीन साल ही हुएथे, लेकिन वह समाज की बुरी रीतियों का पूरी तरह से अनुसरण करने लगा था और उसने अपने ही परिवार को धोखा दे दिया था। फिर मैंने सोचा: आज के समाज में, उपपत्नी होना भी शर्मिंदगी की बात नहीं है। असल में, यह ऐसा कुछ है जो अक्सर ही होता है। कई पुरुषों को इस नुकसानदायक विचार से नुकसान पहुंचाया गया है, जो निम्न प्रकार से है: “घर का लाल झंडा नहीं गिरता है, बाहर का रंगीन झंडा मंद हवा में भी फड़फड़ाता है।” वे ढिठाई से विवाहेत्तर संबंध बना लेते हैं। चूंकि वे शर्मिंदगी से हतोत्साहित नहीं होे हैं, इसलिए वे गौरव से प्रोत्साहित भी नहीं होते हैं। मेरा पति मुझे तलाक नहीं देना चाहता है, यद्यपि वह उस महिला को छोड़ना भी नहीं चाहता है। क्या वह इस प्रकार के विचार व दृष्टिकोण से नियंत्रित नहीं हो गया है। परमेश्वर के वचनों को पढ़ने के माध्यम से, मैं यह समझने में सक्षम हो गई थी: असल में, हर कोई पीड़ित है। हर कोई शैतान के बुरे विचारों से ठगा गया है। इसी वजह से हमें इस हद तक भ्रष्ट कर दिया गया है कि जहां हमें कोई भी नैतिकता और शर्म नहीं रह गई है। अगर लोग अपनी खुद की स्वार्थी इच्छाओं को पूरा करते हैं, तो उससे उन्हें क्या मिल जाता है? क्या उन्हें वाकई में खुशी मिली है? अगर मेरे पति और उस महिला की बात करें, तो मुझे नहीं लगता कि वे किसी भी तरह से मुझसे ज्यादा खुश हैं। इसके अलावा, हमारे बच्चे बेगुनाह पीड़ित हैं। क्या यह विपदा नहीं है जिसका सामना मेरे परिवार को शैतान के भ्रष्टाचार और नुकसान की वजह से किया है? जब मैं खुद के बारे में सोचती है, तो अगर मैंने परमेश्वर के उद्धार का सामना नहीं किया होता, तो मैं भी समाज की बुरी रीतियों से बिगड़ गई होती। मैंने सोचा था कि चूंकि मेरे पति ने दूसरी महिला पा ली है, तो मैं भी इसी तरह से दूसरा पुरुष खोज सकती हूं। मैं किसी भी तरह से अनचाही महिला नहीं है। मैं आभारी हूं कि परमेश्वर ने मुझे उस समय बचा लिया जब शैतान मुझे ग्रसने ही वाला था। उसने मुझे अपने समक्ष आने और उसकी सुरक्षा हासिल करने की अनुमति दी थी। अन्यथा, समाज की इस बुरी धारा ने मुझे बर्बाद कर दिया होता।

जब मैं पढ़ना जारी रखा, तो परमेश्वर के वचनों ने कहा, “जब कभी शैतान मनुष्य को भ्रष्ट करता है या बेलगाम क्षति में संलग्न हो जाता है, तो परमेश्वर आलस्य से किनारे खड़ा नहीं रहता है, न तो वह एक तरफ हट जाता है या न ही अपने चुने हुओं को अनदेखा करता है जिन्हें उसने चुना है। …जो कुछ परमेश्वर देखना चाहता है वह यह है कि मनुष्य के हृदय को पुनर्जीवित किया जा सके। दूसरे शब्दों में, ये तरीके जिन्हें वह मनुष्य में कार्य करने के लिए उपयोग करता है वे मनुष्य के हृदय को निरन्तर जागृत करने के लिए हैं, मनुष्य के आत्मा को जागृत करने के लिए हैं, मनुष्य को यह जानने के लिए हैं कि वे कहाँ से आए हैं, कौन उन्हें मार्गदर्शन दे रहा है, उनकी सहायता कर रहा है, उनके लिए आपूर्ति कर रहा है, और किसकी बदौलत मनुष्य अब तक जीवित है; वे मनुष्य को यह जानने देने के लिए हैं कि सृष्टिकर्ता कौन है, उन्हें किसकी आराधना करनी चाहिए, उन्हें किस प्रकार के मार्ग पर चलना चाहिए, और मनुष्य को किस रीति से परमेश्वर के सामने आना चाहिए; मनुष्य के हृदय को धीरे-धीरे पुनर्जीवित करने के लिए उनका उपयोग किया जाता है, इस प्रकार मनुष्य परमेश्वर के हृदय को जान पाता है, परमेश्वर के हृदय को समझ पाता है, और मनुष्य को बचाने के लिए उसके कार्य के पीछे की बड़ी देखभाल एवं विचार को समझ पाता है। जब मनुष्य के हृदय को पुनर्जीवित किया जाता है, तब वे आगे से एक पतित एवं भ्रष्ट स्वभाव के जीवन को जीने की इच्छा नहीं करते हैं, बल्कि परमेश्वर की संतुष्टि के लिये सत्य की खोज करने की इच्छा करते हैं। जब मनुष्य के हृदय को जागृत कर दिया जाता है, तो वे शैतान के साथ स्थायी रूप से सम्बन्ध तोड़ने में सक्षम हो जाते हैं, शैतान उन्हेंअब आगे से कोई हानि नहीं पहुंचापाता है, उन्हें अब आगे से नियंत्रित नहीं करपाता या मूर्ख नहीं बनापाता है। बल्कि, मनुष्य परमेश्वर के हृदय को संतुष्ट करने के लिए परमेश्वर के कार्य में और उसके वचन में सकारात्मक रूप से सहयोग कर सकता है, इस प्रकार परमेश्वर के भय को प्राप्त करता है और बुराई से दूर रहता है। यह परमेश्वर के कार्य का मूल उद्देश्य है।”( “वचन देह में प्रकट होता है” से “स्वयं परमेश्वर, अद्वितीय VI परमेश्वर की पवित्रता (III)” से) परमेश्वर के वचनों से, मैं समझ गई कि भले ही शैतान मनुष्य को भ्रष्ट करने के लिए सभी प्रकार की सामाजिक रीतियों का प्रयोग करता है, लेकिन कुल मिलाकर, परमेश्वर ने मानव जाति को बचाने का कार्य किया है। उसने कभी भी हमारे उद्धार पर परित्याग नहीं किया है क्योंकि हम बहुत गहराई तक भ्रष्ट हो गए हैं। अंत के इन दिनों में, देहधारी परमेश्वर फिर से आया है और उसने अपने वचनों को व्यक्त किया है, मनुष्य की आत्मा जागृत हो और वह शैतान की बुराई, अधमता को देखने को सक्षम हो सके। उसने हमें जगाया भी है ताकि हम सत्य का पीछा करें और अपने भ्रष्ट शैतानी स्वभाव से मुक्त हो और शैतान को पूरी तरह से त्यागते हुए परमेश्वर के पास वापस चले जाए। परमेश्वर के वचनों से, मैं यह भी समझ गई कि केवल परमेश्वर में शुद्ध और पवित्र सार है, कि परेश्वर बुराई और पाप का तिरस्कार करता है और यह कि परमेश्वर आशा करता है कि हम सभी परमेश्वर के समक्ष आएंगे, उसके वचनों का मार्गदर्शन स्वीकार करेंगे और बिजली की रोशनी हासिल करेंगे। शैतान क बुरे विचारों ने मनुष्य के दिल को भ्रष्ट कर दिया है, जिससे मनुष्य इसे तोड़कर इससे दूर जाने में अशक्त हो गया है और धीरे—धीरे भ्रष्ट हो रहा है और निगला जा रहा है। केवल परमेश्वर ही हमें बचाने में सक्षम है। केवल वे सत्य जो परमेश्वर व्यक्त करता है, उनसे ही हम मनुष्य को भ्रष्ट करने के शैतान के पापी षडयंत्रों और चालों देख सकते हैं और शैतान के नुकसान से मुक्त होने की ताकत पा सकते हैं और यथार्थ मानवीय जीवन हासिल कर सकते हैं। धन्यवाद सर्वशक्तिमान परमेश्वर! यह सर्वशक्तिमान परमेश्वर ही था जिसे मुझे दर्द के रसातल से बचाया था! मैं परमेश्वर के वचनों को पढ़ने, सत्य का पीछा करने और अंत में उसका उद्धार हासिल करने के लिए तैयार हूं। आज कल, चूंकि मैंने परमेश्वर के वचनों को और भी पढ़ना शुरू कर दिया है, इसलिए मैं थोड़ा—बहुत सत्य समझती हूं और मैं कई परिस्थितियों के परे देख सकता हूं। अब मैं अपने पति या उस महिला से नफरत नहीं करती हूं। वे यह चुनने के लिए स्वतंत्र हैं कि वे किस प्रकार जिंदगी जीना चाहते हैं। रिश्तेदारों व दोस्तों की बात करें, तो मैं शांतिपूर्वक उनसे निपटने में सक्षम हूं। मैं अब अपने रिश्तेदारों को दोष नहीं देती हूं क्योंकि हम सभी को शैतान द्वारा भ्रष्ट किया गया है और हम सभी इससे पीड़ित हैं। अब, मैं अक्सर ही अपने भाइयों व बहनों के साथ धर्मसभाओं में शामिल होती हूं। हम परमेश्वर के वचन पढ़ते हैं और हम संचार करते हैं एवं अपने व्यक्तिगत अनुभवों को साझा करते हैं। हम परमेश्वर के वचनों से हर रोज फायदा लेते हैं। अपने दिलों के अंदर, हम में शांति और आनंद है और हमारी जिंदगियां आशा से भरी हुई है। जीवन के सही मार्ग की ओर मेरा मार्गदर्शन करने के लिए और मुझे सच्चा परिवार देने के लिए तुम्हारा आभार सर्वशक्तिमान परमेश्वर। यहां, मुझे सच्ची खुशी मिली है! मैं हमेशा ही परमेश्वर का अनुसरण करने के लिए तैयार हूं!