मैं सभी का पर्यवेक्षण स्वीकार करने की इच्छुक हूँ

21 दिसम्बर, 2017

ज़िआंशैंग जिंझॉन्ग शहर, शांग्ज़ी प्रांत

कुछ समय पहले, जब भी मैं सुनती थी कि जिले के उपदेशक हमारे कलीसिया में आ रहे हैं, तो मैं थोड़ा बेचैन महसूस करती थी। मैं बाहरी तौर पर अपनी भावनाएँ प्रकट नहीं करती थी, लेकिन मेरा दिल गुप्त विरोध से भरा हुआ होता था। मैंने सोचती थी कि: "अच्छा होगा कि तुम सब लोग न आओ। अगर तुम लोग आते हो, तो कलीसिया में कम से कम मेरे साथ कार्य मत करो। अन्यथा, मैं प्रतिबंधित हो जाऊँगी और संगति नहीं कर पाऊँगी।" बाद में, यह परिस्थिति इतनी बुरी हो गई कि मैं उनके आने से वास्तव में नफ़रत करती थी। ऐसे में भी, मैं नहीं मानती थी कि मुझमें कुछ ग़लत है और निश्चित रूप से, इस परिस्थिति के संदर्भ में खुद को जानने का प्रयास नहीं करती थी।

फिर एक दिन, मैंने परमेश्वर के वचन के निम्नलिखित अंश को पढ़ा: "सामंतवाद की नैतिक और आचार-विचार विषयक शिक्षाओं के प्रसारण और प्राचीन संस्कृति के ज्ञान की विरासत ने लंबे समय से मनुष्य को संक्रमित किया है और उन्हें छोटे-बड़े शैतानों में बदल दिया है। कुछ ही लोग हैं, जो ख़ुशी से परमेश्वर को स्वीकार करते हैं, और कुछ ही लोग हैं, जो उसके आगमन का उल्लासपूर्वक स्वागत करते हैं। समस्त मानवजाति का चेहरा हत्या के इरादे से भर गया है, और हर जगह हत्यारी साँस हवा में व्याप्त है। वे परमेश्वर को इस भूमि से निष्कासित करना चाहते हैं; हाथों में चाकू और तलवारें लिए वे परमेश्वर का 'विनाश' करने के लिए खुद को युद्ध के विन्यास में व्यवस्थित करते हैं। ... इस देश में हर जगह इंद्रधनुष के सभी रंगों वाली मूर्तियाँ रखी हैं, जिन्होंने इस देश को कामुक आनंद की दुनिया में बदल दिया है, और शैतानों का राजा दुष्टतापूर्वक हँसता रहता है, मानो उसका नीचतापूर्ण षड्यंत्र सफल हो गया हो। इस बीच, मनुष्य पूरी तरह से बेखबर रहता है, और उसे यह भी पता नहीं कि शैतान ने उसे पहले ही इस हद तक भ्रष्ट कर दिया है कि वह बेसुध हो गया है और उसने हार में अपना सिर लटका दिया है। शैतान चाहता है कि एक ही झपट्टे में परमेश्वर से संबंधित सब-कुछ साफ़ कर दे, और एक बार फिर उसे अपवित्र कर उसका हनन कर दे; वह उसके कार्य को टुकड़े-टुकड़े करने और उसे बाधित करने का इरादा रखता है। वह कैसे परमेश्वर को समान दर्जा दे सकता है? कैसे वह पृथ्वी पर मनुष्यों के बीच अपने काम में परमेश्वर का 'हस्तक्षेप' बरदाश्त कर सकता है? कैसे वह परमेश्वर को उसके घिनौने चेहरे को उजागर करने दे सकता है? शैतान कैसे परमेश्वर को अपने काम को अव्यवस्थित करने की अनुमति दे सकता है? क्रोध के साथ भभकता यह शैतान कैसे परमेश्वर को पृथ्वी पर अपने शाही दरबार पर नियंत्रण करने दे सकता है? कैसे वह स्वेच्छा से परमेश्वर के श्रेष्ठतर सामर्थ्य के आगे झुक सकता है? इसके कुत्सित चेहरे की असलियत उजागर की जा चुकी है, इसलिए किसी को पता नहीं है कि वह हँसे या रोए, और यह बताना वास्तव में कठिन है। क्या यही इसका सार नहीं है?" ("वचन देह में प्रकट होता है" में 'कार्य और प्रवेश (7)')। मैंने अपनी हालिया स्थिति पर चिंतन करते हुए इस अंश के अर्थ पर मनन किया: ऐसा क्यों था कि मैं अपने कलीसिया में जिला के कार्यकर्ताओं का आना इतना ज्यादा नापसंद करती हूँ? क्यों मैं उन्हें कलीसिया में अपने साथ कार्य करने देने की इच्छुक नहीं हूँ? क्या ऐसा इसलिए नहीं था क्योंकि मुझे इस बात की चिंता थी कि अगर वे कलीसिया में आते हैं, तो उन्हें पता चल जाएगा कि मैं सिद्धांतों या परमेश्वर की इच्छा के अनुसार कार्य नहीं कर रही हूँ और इस मामले के संबंध में वे मुझसे निपटेंगे? इसके अलावा, क्या मुझे इस बात का डर नहीं था कि उनके आने से ऐसा कुछ होगा जिससे मेरी कार्य योजनाओं में व्यवधान पड़ जाएगा? क्या मुझे इस बात का डर नहीं था कि वे मुझसे बेहतर संगति करेंगे और इस वजह से मैं अपने भाई-बहनों के दिलों में अपना विशेष दर्जा खो दूँगी? अगर वे नहीं आए, तो मैं अपनी इच्छानुसार ही अपनी कार्य योजनाओं को कर सकती थी। भले ही मेरे तरीके सिद्धांत या परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप नहीं होते, तब भी किसी को पता नहीं चलता और निश्चित रूप से कोई मुझसे नहीं निपटता या मेरी आलोचना नहीं करता। इस प्रकार, मेरे भाई-बहनों के दिलों में मेरा स्थान केवल ज्यादा बड़ा, ज्यादा विशेष और ज्यादा स्थाई हो जाएगा। कलीसिया के सभी भाई-बहन मेरा आदर करेंगे, मेरी सराहना करेंगे और मेरे आदेशों का पालन करेंगे। पूरा कलीसिया मेरे आसपास घूमता रहेगा। क्या यह मेरा असल उद्देश्य नहीं था? क्या मैं अपने भाई-बहनों के दिलों से परमेश्वर को बाहर करने का षडयंत्र नहीं रच रही थी ताकि मैं उनके दिलों में हैसियत प्राप्त कर सकूँ? क्या मैं बड़े लाल अजगर के उन ज़हरों का जीवंत और साँस लेता हुआ उदाहरण नहीं थी कि "स्वर्ग ऊँचा है और सम्राट नज़र से दूर है," "मेरे अलावा कोई राजा नहीं है"? मानवजाति के ऊपर नियंत्रण और प्रभुत्व का दावा करने के लिए, परमेश्वर को मनुष्यों के मामले में हस्तक्षेप करने, इसके घिनौने चेहरे को उजागर करने, इसकी योजनाओं में या इसके प्रभुत्व के शासन में हस्तक्षेप न करने देते हुए, बड़े लाल अजगर ने पूरी ताक़त से परमेश्वर के आगमन से लड़ाई की। इसलिए, उसने क्रूरता के साथ परमेश्वर के कार्य का विरोध किया, उसमें व्यवधान उत्पन्न किया, उसे नष्ट और तबाह किया। उसने यह कल्पना की थी कि, एक दिन, यह मानवजाति के दिलों में से परमेश्वर को निकाल सकेगा और मनुष्य का शाश्वत न्यायकर्ता बनने और अपनी आराधना करवाने के लिए मानवजाति को बाध्य करने के अपने कुत्सित उद्देश्य को पूरा कर सकता है। मेरे अपने विचारों और बड़े लाल अजगर के कार्यकलापों में क्या अंतर था? क्योंकि मैं अपनी खुद की हैसियत बनाए रखना चाहती थी और यह सुनिश्चित करना चाहती थी कि मैं अपने हिसाब से चल सकूँ और अपने काम में किसी से बाधित न हूँ, इसलिए मैं अन्य अगुआ या कार्यकता को मेरे कार्य का पर्यवेक्षण या निरीक्षण नहीं करने देना चाहती थी। मैं नहीं चाहती थी कि मेरी कलीसिया के कार्य या मेरे भाई-बहनों की सिंचाई के कार्य में अन्य कोई हस्तक्षेप करे। मैं ऐसा क्यों नहीं चाहती थी? क्या यह सिर्फ इसलिए नहीं था क्योंकि मैं दूसरों पर नियंत्रण करना और उन पर प्रभुत्व का दावा करना चाहती थी? क्या मेरी असली आकांक्षा अपने भाई-बहनों पर खुद को राजा और लौकिक शासक घोषित करना नहीं थी? मैं देखती थी कि बड़े लाल अजगर का ज़हर—वह अनियंत्रित अहंकार और अहंकारोन्माद—मेरे अस्तित्व की गहराई में समा चुका था। बड़े लाल अजगर के प्रभाव ने काफी समय से मेरे भीतर से मुझे गिरफ़्त में ले लिया था: मैं वैसा ही द्रोही दानव बन गई थी जैसा कि खुद अजगर है। सतही तौर पर, मैं अपने कर्तव्य को पूरा करने के लिए कार्य कर रही थी, लेकिन मेरे दिल में गुप्त अभिप्राय थे। वास्तविकता में, मैं सिंहासन को तोड़ना, ओहदों में अराजकता मचाना और परमेश्वर के विरुद्ध एवं परमेश्वर की इच्छा के क्रियान्वयन के अवरोध में अपना खुद का साम्राज्य खड़ा करना चाहती थी। मेरी प्रकृति पूरी तरह से दुष्ट और कितनी भयावह थी! अगर परमेश्वर के वचन का यह कटु प्रकाशन और न्याय नहीं हुआ होता, तो मुझे कभी पता ही नहीं चलता कि मुझे शैतान के द्वारा किस हद तक भ्रष्ट और परमेश्वर के विरुद्ध कर दिया गया था। मैं कभी भी नहीं जान पाती कि, मेरी आत्मा की गहराई में, एक नीच साज़िश रची गई थी और यह कि मेरी असली प्रकृति बुराई से इतनी ही गहराई तक संतप्त थी।

तेरे प्रकाशन और तेरी प्रबुद्धता के लिए परमेश्वर तेरा धन्यवाद, जिससे मुझे अहंकार और दुष्टता की मेरी शैतानी प्रकृति को समझने दिया। मैं देखती हूँ कि मैं, वास्तव में, बड़े लाल अजगर की और महादूत की बेटी हूँ। परमेश्वर, मैं कर्मठता से सत्य की खोज करने और इस बात की गहरी समझ तक पहुँचने की शपथ लेती हूँ कि कैसे बड़े लाल अजगर का ज़हर मेरी प्रकृति को संतप्त करता है। इससे भी अधिक, मैं अन्य कार्यकर्ताओं और अगुआओं के निरीक्षण और पर्यवेक्षण को स्वीकार करने की शपथ लेती हूँ। मैं सभी के व्यवहार और उनकी काट-छाँट को स्वीकार करूँगी। मैं खुद को समस्त धार्मिकसभा के निरीक्षण के अधीन रखूँगी ताकि मैं तेरे दिल को सांत्वना पहुँचाने के लिए शुद्ध अन्तःकरण से अपने कर्तव्यों को पूरा कर सकूँ।

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