सच्चे मसीह और झूठे मसीह में भेद करने के सत्य को समझने के बाद, अब मैं आँखें मूँदकर रक्षात्मक नहीं होती

11 दिसम्बर, 2019

शियांगवांग, मलेशिया

छोटी आयु से ही मैं अपनी मॉम के साथ, जो कि कलीसिया की उपयाजक और संडे स्कूल की शिक्षक हैं, प्रभु में विश्वास रखा है। मॉम के साथ मैं अक्सर सभाओं में जाकर बाइबल पढ़ती थी। जैसे-जैसे मैं बड़ी हुई, मैं बच्चों के ग्रुप से किशोरों के ग्रुप में आ गयी।

किशोर आयु के बच्चों को उपदेश देने वाले पादरी धर्मशास्त्र में पीएचडी थे। वे अक्सर हमें बताते थे कि पादरी होना सरल नहीं है, अगर पवित्र आत्मा की प्रेरणा न हो, तो पादरी के कार्यभार को संभालना बहुत मुश्किल है। इसलिए हम उन्हें अपना आदर्श मानते थे, हम यह मानते थे कि उनके अंदर परमेश्वर का आनंद है और उन्हें पवित्र आत्मा से प्रेरणा मिलती है। जब वे हमें उपदेश देते थे, तो अक्सर बाइबल के दो पदों का प्रयोग किया करते थे: "उस समय यदि कोई तुम से कहे, 'देखो, मसीह यहाँ है,' या 'देखो, वहाँ है,' तो प्रतीति न करना; क्योंकि झूठे मसीह और झूठे भविष्यद्वक्‍ता उठ खड़े होंगे, और चिह्न और अद्भुत काम दिखाएँगे कि यदि हो सके तो चुने हुओं को भी भरमा दें" (मरकुस 13:21-22)। वे हमें कहते थे कि अंत के दिनों में बहुत सारे झूठे मसीह आएँगे और हमें फुसलाएँगे कि हमें हमेशा सावधान रहना चाहिए, वैसे ही कहीं भी जाकर दूसरों के उपदेश नहीं सुनने चाहिए। ख़ासतौर से हम में से उन लोगों को बाइबल में जिनकी बहुत मज़बूत बुनियाद नहीं है और जिनका आध्यात्मिक कद बहुत छोटा है। उनका कहना था कि सबसे अच्छा तो यही है कि दूसरे संप्रदायों के किसी भी व्यक्ति के उपदेश को न सुना जाए, न पढ़ा जाए और न ही उसकी जाँच-पड़ताल की जाए, ताकि किसी प्रकार का धोखा ही न हो।

इसके अलावा, पादरी अक्सर यह भी कहते थे कि हमें चमकती पूर्वी बिजली सहित कुछ ख़ास कलीसियाओं से बचकर रहना चाहिए, उन्होंने हमें चमकती पूर्वी बिजली के बारे में फैल रही कुछ नकारात्मक खबरों के बारे में भी बताया। यह सुनकर हमारे ग्रुप के सदस्यों ने कहा कि वे इस कलीसिया से बचकर रहेंगे। पादरी अक्सर हमें उपदेश देते थे कि, अगर हम लोग बाइबल पढ़ेंगे, नियमित रूप से सभाओं में शामिल होंगे और आध्यात्मिक भक्ति करेंगे, हर दिन प्रभु से अपने पापों के लिए पश्चाताप करेंगे और हर समय धैर्य से नज़र रखेंगे, तो जब प्रभु आएँगे तो हमें स्वर्गिक राज्य में आरोहित किया जाएगा। उनकी बातों पर मुझे पूरा भरोसा था, मैं यूँ ही दूसरी कलीसियाओं में जाकर उपदेश सुनने का साहस नहीं करती थी, और पूरी तरह से पादरी की हिदायतों का पालन करती थी। इस तरह, मुझे लगता था कि मैंने तो पहले ही उन लोगों में अपनी जगह बना ली है जो प्रभु की वापसी का इंतज़ार कर रहे हैं।

सच्चे मसीह और झूठे मसीह में भेद करने के सत्य को समझने के बाद, अब मैं आँखें मूँदकर रक्षात्मक नहीं होती

अगस्त 2017 में एक दिन, हमारी कलीसिया से भाई हू मुझसे मिलने मेरे स्कूल आए और बड़े ही गंभीर लहजे में मुझसे बोले, "मुझे तुमसे एक बहुत ज़रूरी बात करनी है। ऐसा लगता है कि तुम्हारी मॉम और तुम्हारी बहन चमकती पूर्वी बिजली में आस्था रखती हैं।" यह सुनकर मैं स्तब्ध रह गयी, मैंने सोचा: "क्या पादरी हमेशा हमें चमकती पूर्वी बिजली से कोई नाता न रखने के लिए प्रेरित नहीं करते रहते हैं? मेरी मॉम चमकती पूर्वी बिजली में आस्था रखना कैसे शुरू कर सकती है?" उसके बाद, भाई हू ने मुझे चमकती पूर्वी बिजली के बारे में फैल रही नकारात्मक ख़बरों के बारे में बताया, मैं सुन-सुनकर, और ज़्यादा घबराने लगी। मैं सोचने लगी, "मैं क्या कर सकती हूँ? मैं क्या कर सकती हूँ?" तभी, भाई हू ने कहा, "जल्दी घर जाओ और अपनी मॉम से पूछो क्या उन्होंने सचमुच चमकती पूर्वी बिजली में आस्था रखनी शुरू कर दी है। लेकिन जब तुम यह बात पूछो, तो उन्हें बताना मत कि तुम्हें पता है। पहले उनकी बात सुनना कि वे क्या कहती हैं, फिर मुझे अपनी बातचीत की रिकॉर्डिंग दे देना।" मुझे इस बात का डर था कि मेरी मॉम भटक गयी है, इसलिए मैं उनकी बात मान गयी।

और वही हुआ, जैसे ही मैं घर वापस आई, मॉम ने कहा कि प्रभु यीशु सर्वशक्तिमान परमेश्वर के रूप में वापस आ गया है। सर्वशक्तिमान परमेश्वर अंत के दिनों में बहुत से वचन व्यक्त कर रहा है। वह इंसान को शुद्ध करने, उसे बदलने और पूरी तरह से पाप के बंधन से बचाने के लिए परमेश्वर के घर से शुरू होने वाला न्याय का कार्य कर रहा है। मॉम ने यह भी कहा कि इंसान को बचाने के लिए परमेश्वर के कार्य का यह अंतिम चरण है, अगर हमने इसे गँवा दिया, तो हमें बचाए जाने का दूसरा मौका नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि मैं परमेश्वर के अंत के दिनों के कार्य की जाँच करने में देरी नहीं करूँगी और सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया की सभा में शामिल हूँगी। जब उन्होंने यह बात कही, तो मुझे तुरंत ही चमकती पूर्वी बिजली के बारे में नकारात्मक प्रचार का ख़्याल आया जैसा कि भाई हू ने कहा था और मॉम जो कुछ कह रही थी उसके प्रति मेरे मन में ज़बर्दस्त घृणा का भाव आ गया। लेकिन मुझे सारी बातचीत को रिकॉर्ड करना था, इसलिए मैंने अपने जज़्बात पर काबू रखा और मैं उनकी बात सुनती रही।

अगले दिन, सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया की सभा के लिए मॉम ने मुझे ऑनलाइन आने के लिए कहा, लेकिन मैंने तुरंत उनकी बात को काटते हुए कहा, "मॉम, मैं उनकी सभाओं में शामिल नहीं हूँगी, और न ही आपको शामिल होना चाहिए। आपका झुकाव उनकी तरह बढ़ता ही जा रहा है।" मॉम ने प्यार से जवाब दिया, "बेटा, सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के भाई-बहनों के साथ सभाओं और सहभागिता में शामिल होकर, मैंने अपने अंदर एक नयी रोशनी और बाइबल में परमेश्वर के वचनों पर समझ हासिल की है। मुझे मन में विश्वास है कि उनकी सहभागिताएँ रोशनी से भरी हैं और वे पवित्र आत्मा के प्रबोधन से आती हैं। इसके अलावा, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों ने मेरी बहुत-सी उलझनें सुलझायी हैं, मुझे इस बात का पूरा यकीन है कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया में निश्चित रूप से पवित्र आत्मा का कार्य है, और सर्वशक्तिमान परमेश्वर द्वारा व्यक्त वचनों में सत्य है...।" उस मुकाम पर, मेरा मन चमकती पूर्वी बिजली के बारे में धारणाओं से भरा हुआ था और मैं सहज ही मॉम की किस भी बात को स्वीकार नहीं कर पायी। उसके बाद, मैंने ऑनलाइन जाकर मॉम को चमकती पूर्वी बिजली के बारे में वह नकारात्मक प्रचार दिखाया जो भाई हू ने कहा था। मैंने मॉम से कहा, "मॉम, देखा आपने? इस बात को साफ़ तौर पर ऑनलाइन कहा गया है, हमारे पादरी भी अक्सर कहते हैं कि हम चमकती पूर्वी बिजली की जाँच-पड़ताल न करें। मॉम, प्लीज़ कहिए कि आप आज के बाद उनसे कोई संबंध नहीं रखेंगी।"

मॉम ने नकारात्मक प्रचार की ओर कोई ध्यान नहीं दिया, लेकिन मेरी बातों को ध्यान से सुनती रहीं और बोलीं, "मेरी प्यारी बिटिया, चीनी कम्युनिस्ट सरकार एक नास्तिक संगठन है जिसे परमेश्वर के प्रकटन, कार्य और हर धार्मिक आस्था रखने वाले इंसान से घृणा है। चीन में, सीसीपी सरकार कुपंथ के तौर पर प्रोटेस्टैंट और कैथोलिक धर्म की निंदा करती है, बाइबल कुपंथ पुस्तक के रूप में निषिद्ध है। इसकी अनगिनत प्रतियाँ जला दी या नष्ट कर दी गयी हैं, अब तो इसे चीन में बेचने पर भी पाबंदी है। सीसीपी सरकार द्वारा प्रोटेस्टैंट और कैथोलिक धर्म को मानने वाले बहुत से लोगों को गिरफ़्तार करके यताना दी गयी है, उन्हें जेलों में ठूँस दिया गया है। कुछ लोगों को या तो पंगु बना दिया गया है या उन्हें मार डाला गया है। अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार समूहों और पश्चिमी देशों ने कितनी ही बार ज़ोरदार ढंग से भर्त्सना की है। क्या तुम सचमुच ऐसी परमेश्वर-विरोधी शैतानी सत्ता की बातों पर विश्वास कर सकती हो? क्या यह इस काबिल है कि परमेश्वर के प्रकटन और कार्य का आकलन और उसकी निंदा कर सके? ये पादरी और एल्डर हमें परमेश्वर के अंत के दिनों के कार्य की जाँच क्यों नहीं करने देते? क्या इन लोगों के कृत्य प्रभु की शिक्षाओं के अनुरूप हैं? प्रभु यीशु ने हमसे कहा था, 'धन्य हैं वे, जो मन के दीन हैं, क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्हीं का है' (मत्ती 5:3)। प्रभु यीशु के वचनों से हम लोग देख सकते हैं कि प्रभु चाहता है कि हम खुले-दिमाग के खोजी बनें, जब कोई प्रभु की वापसी की गवाही दे, तो हम सक्रिय रूप से उसकी जाँच-पड़ताल करें, क्योंकि तभी हम लोग प्रभु की वापसी का स्वागत कर सकते हैं। प्यारी बिटिया, प्रभु के विश्वासी होने के नाते, हम लोग प्रभु के वचनों पर ध्यान देने के बजाय, दूसरों की राय पर ध्यान क्यों दें? अगर हम लोग पादरी की बातों पर और उस नकारात्मक प्रचार पर ध्यान देंगे जो शैतानी शासन द्वारा फैलायी गयी हैं, और जब हम किसी के द्वारा प्रभु की वापसी की गवाही की बात सुनकर, उसके प्रति निष्क्रिय और रक्षात्मक रहेंगे, तो क्या यह प्रभु की इच्छा के अनुरूप है? ऐसा करके, क्या हम प्रभु के वचनों के खिलाफ़ नहीं जा रहे हैं? यीशु के समय में, यहूदी विश्वासियों ने प्रभु के वचनों और कार्य की न तो कोई खोज की और न ही उसकी जाँच की, बल्कि आँखें मूँदकर उन मनगढ़ंत अफवाहों पर विश्वास कर लिया जो फ़रीसियों ने फैलायी थीं, और इस तरह उन्होंने प्रभु यीशु का विरोध किया, उसकी निंदा की और आखिरकार उसे सूली पर चढ़ा दिया और परमेश्वर के हाथों सज़ा पायी। हमें यहूदियों की नाकामी से सबक लेना चाहिए और प्रभु के स्वागत के अवसर को गँवाना नहीं चाहिए। प्रकाशित-वाक्य में बहुत बार भविष्यवाणी की गयी है: 'जिसके कान हों वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है' (प्रकाशितवाक्य 2, 3)। इस पद से हम समझ सकते हैं कि प्रभु जब लौटकर आएगा, तो वह अपने वचन भी व्यक्त करेगा, और अगर हम उसकी वापसी का स्वागत करना चाहते हैं, तो हमें परमेश्वर की वाणी को सुनना सीखना होगा। सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों को पढ़कर और उनकी जाँच-पड़ताल करके ही तुम जानोगी कि वह परमेश्वर की वाणी है या नहीं।" अपनी बात कहने के बाद, मॉम ने "अंत के दिनों के मसीह के कथन" नाम की पुस्तक उठायी और मुझे देने लगी।

मैंने पुस्तक की तरफ देखा लेकिन मैंने पुस्तक ली नहीं। क्योंकि वे जो कुछ कह रही थीं, मैं उसे अभी भी स्वीकार नहीं कर पायी, मैंने कहा, "मैं यह पुस्तक नहीं पढ़ना चाहती।" और पलटकर मैं अपने कमरे में चली गयी।

अपनी डेस्क पर बैठी, मैं मॉम की कही गयी बातों पर ठंडे दिमाग से विचार करने लगी। मैंने सोचा: "मॉम का कहना दरअसल गलत नहीं था। चमकती पूर्वी बिजली गवाही देती है कि प्रभु वापस आ गया है, फिर भी मैंने आँखें मूँदकर पादरी की बातों पर भरोसा किया और सर्वशक्तिमान परमेश्वर द्वारा व्यक्त किए गये वचनों को पढ़े बिना ही चीनी कम्युनिस्ट सरकार द्वारा चमकती पूर्वी बिजली के बारे में फैलायी गयी नकारात्मक बातों को मान लिया। मेरा ख्याल है वो मेरा इकतरफा निर्णय था। अगर सर्वशक्तिमान परमेश्वर सचमुच लौटकर आया प्रभु यीशु है और मैं उसे नकार रही हूँ, तो मैं प्रभु के स्वागत के अवसर को गँवा दूँगी। लेकिन पादरी हमेशा कहते हैं कि अंत के दिनों में झूठे मसीह प्रकट होंगे, और अगर मैं भटक गयी, तो क्या प्रभु में मेरी आस्था व्यर्थ नहीं चली जाएगी?" मेरा मन डाँवाडोल होने लगा, मुझे समझ में नहीं आया कि किस पर विश्वास करूँ, इसलिए मैंने प्रभु को पुकारा: "हे प्रभु! मैं हमेशा तेरी वापसी के लिए तरसती रही हूँ लेकिन अब मैं अंत के दिनों में प्रकट होने वाले झूठे मसीहों के हाथों धोखा खाने से भयभीत हूँ। हे प्रभु! चमकती पूर्वी बिजली के लोग अब गवाही दे रहे हैं कि तू लौट आया है, अगर तू सचमुच सर्वशक्तिमान परमेश्वर के रूप में लौट आया है, तो मैं तुझसे विनती करती हूँ कि तू मुझे प्रबुद्ध कर और राह दिखा, और मुझे अपनी वाणी को पहचानने दे।"

अगले दिन, फिर मॉम ने मुझे उनकी सभा में शामिल होने के लिए कहा। थोड़ी झिझक के बाद, मैंने ऑनलाइन जाकर उनकी बातें सुनने का फैसला किया। जैसे ही उनकी सभा शुरू हुई, मैं बहुत उखड़ गयी, सहभागिता में भाई-बहन क्या कह रहे हैं, मैंने सुना ही नहीं। बाद में, भाई झांग ने सत्य के पहलुओं के बारे में सहभागिता की, जैसे इंसान को बचाने के लिए परमेश्वर की प्रबंधन योजना, परमेश्वर के कार्य के तीन चरण और अंत के दिनों में परमेश्वर द्वारा किया जाने वाला न्याय का कार्य; मेरा दिल उस ओर खिंचने लगा, मैं उनकी बातें सुन-सुनकर ज़्यादा ताज़गी और नयापन महसूस करने लगी। हालाँकि मैंने पहले बाइबल के अध्ययन की कक्षाओं में जा चुकी थी, लेकिन उपदेशक वहाँ केवल परमेश्वर द्वारा दिखाए गये चमत्कारों की चर्चा कर-करके परमेश्वर के कार्य की चमत्कारिक प्रकृति की ही बातें किया करते थे, या यह बातें किया करते थे कि किस तरह पहले के संत परमेश्वर के आदेशों को पूरा करने के लिए परमेश्वर का आज्ञापालन किया करते थे, वगैरह-वगैरह। उन्होंने कभी भी इंसान को बचाने की परमेश्वर की प्रबंधन योजना की चर्चा नहीं की। भाई झांग की सहभागिता से मुझे इंसान के प्रबंधन से संबंधित परमेश्वर के कार्य की थोड़ी-बहुत समझ हासिल हुई; ये तमाम ऐसी बातें थीं जो मुझे इतने बरसों तक बाइबल पढ़ने के बावजूद कभी समझ में नहीं आई थीं। सहभागिता खत्म होते-होते, मेरा मन बदल चुका था। मैंने तय कर लिया कि मैं पहले सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अंत के दिनों के कार्य की जाँच-पड़ताल करूँगी और अपनी मॉम के साथ हुई अपनी बातचीत की रिकॉर्डिंग को मिटा दूँगी।

सच्चे मसीह और झूठे मसीह में भेद करने के सत्य को समझने के बाद, अब मैं आँखें मूँदकर रक्षात्मक नहीं होती

तीसरे दिन हमने अपनी सभा में, बुद्धिमान कुँवारियों और मूर्ख कुँवारियों पर चर्चा की। भाई झांग ने कहा, "बुद्धिमान कुँवारियाँ बुद्धिमान होती हैं क्योंकि वे परमेश्वर के प्रकटन के लिए तरसती हैं और जानती हैं कि परमेश्वर की वाणी को कैसे सुनना है। वे अक्लमंद होती हैं, उनमें क्षमता होती है, और वे सत्य से प्रेम करने और खोजने वाली होती हैं। फलस्वरूप, जब वे यह समाचार सुनती हैं कि प्रभु आ गया है, तो वे सक्रिय होकर जाँच-पड़ताल करती हैं—ऐसे लोगों को झूठे मसीह धोखा नहीं दे सकते। मूर्ख कुँवारियों को सत्य से प्रेम नहीं होता, वे परमेश्वर की वाणी को सुनने पर ध्यान नहीं देतीं, न वे यह जानती हैं कि उसे कैसे सुनना है; वे दुविधाग्रस्त होती हैं और उनमें कोई विवेक नहीं होता, जहाँ तक प्रभु के आगमन की बात है, परमेश्वर के कार्य का विरोध और उसकी निंदा करने के लिए वे केवल अपनी धारणाओं और कल्पनाओं से ही चिपकी रहती हैं। मिसाल के तौर पर, कुछ भाई-बहन परमेश्वर में आस्था रखते हुए भी, प्रभु के वचनों को सुनने को महत्व नहीं देते, बल्कि पादरियों और एल्डरों की बातों पर यकीन करते हैं। जो कुछ पादरी और एल्डर कहते हैं, वे उसी पर विश्वास करते हैं। और कुछ ऐसे भाई-बहन हैं जो सिर्फ आँखें मूँदकर झूठे मसीहों के प्रति रक्षात्मक रुख अपनाए रहते हैं, जब कोई प्रभु के लौटने की खबर फैलाता है, तो भी वे न तो उसकी खोज करते हैं न ही उसकी जाँच-पड़ताल करते हैं—क्या यह गला घुटने के डर से खाना छोड़ देना नहीं है? क्या ऐसे लोग प्रभु का स्वागत करने योग्य हैं?"

भाई झांग की बातों से मुझे अचानक एक अंतर्दृष्टि मिली, और मैंने सोचा, "यह बात सही है! इतने समय तक मैंने पादरी की बातों पर ही भरोसा किया, मैंने कभी परमेश्वर के अंत के दिनों के कार्य की जाँच ही नहीं की। अगर सर्वशक्तिमान परमेश्वर सचमुच ही लौटकर आया प्रभु यीशु है, तो क्या मैं एक मूर्ख कुँवारी के रूप में उजागर नहीं हो गयी? प्रभु यीशु ने कहा है, 'माँगो, तो तुम्हें दिया जाएगा; ढूँढ़ो तो तुम पाओगे; खटखटाओ, तो तुम्हारे लिये खोला जाएगा' (मत्ती 7:7)। मैंने हमेशा प्रभु यीशु के स्वागत की राह देखी है और अब सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया इस बात की गवाही दे रही है कि प्रभु वापस आ गया है। मुझे बुद्धिमान कुँवारी बनकर सक्रिय रूप से सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अंत के दिनों के कार्य की जाँच-पड़ताल करनी चाहिए, क्योंकि वही परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप है।" और इसलिए, मैंने सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अंत के दिनों के कार्य की जाँच करने का फैसला किया।

अगले दिन सभा में, मैंने पूछा, "भाई, आपने कल सहभागिता में कहा था कि बुद्धिमान कुँवारी बनने के लिए परमेश्वर की वाणी को सुनने पर ध्यान देना प्रमुख है। मुझे लगता है कि परमेश्वर अंत के दिनों के कार्य की जाँच करने के लिए अब मुझे एक मार्ग मिल गया है, लेकिन मेरे पादरी अक्सर अपने उपदेशों में यह बात कहते हैं कि लोगों को धोखा देने के लिए अंत के दिनों में झूठे मसीह प्रकट होंगे, तो हम सच्चे मसीह और झूठे मसीह में भेद कैसे करें? मुझे सत्य का यह पहलू समझ में नहीं आता, इसलिए मैं सोच रही थी कि अगर आप इस पर मुझसे अपनी सहभागिता साझा कर सकें तो?"

भाई झाग ने कहा, "तुमने जो सवाल किया है वो काफी अहम है क्योंकि इसका सीधा संबंध इस बात से है कि हम प्रभु यीशु का स्वागत कर सकते हैं या नहीं। अगर हम सच्चे मसीह और झूठे मसीह में भेद कर सकते हैं, तो फिर झूठे मसीह परमेश्वर होने का कितना भी नाटक करें, हम उनसे धोखा नहीं खाएँगे। जहाँ तक सच्चे मसीह और झूठे मसीह में भेद करने का सवाल है, प्रभु ने कहा है, 'उस समय यदि कोई तुम से कहे, "देखो, मसीह यहाँ है!" या "वहाँ है!" तो विश्‍वास न करना। क्योंकि झूठे मसीह और झूठे भविष्यद्वक्‍ता उठ खड़े होंगे, और बड़े चिह्न, और अद्भुत काम दिखाएँगे कि यदि हो सके तो चुने हुओं को भी भरमा दें' (मत्ती 24:23-24)। प्रभु यीशु के वचन हमें साफ तौर पर बताते हैं कि अंत के दिनों में झूठे मसीह लोगों को धोखा देने के लिए अधिकतर संकेतों और चमत्कारों का प्रयोग करते हैं। क्योंकि झूठे मसीहों में कोई सत्य नहीं होता, उनकी प्रकृति दुष्ट आत्माओं और शैतानों वाली होती है, वे केवल परमेश्वर के पहले वाले कार्यों की नकल कर सकते हैं और मात्र कुछ साधारण से संकेत और चमत्कार ही दिखा सकते हैं, या फिर रहस्यमय सिद्धांतों के ज़रिये लोगों को भ्रमित करने के लिए बाइबल की गलत व्याख्या कर सकते हैं। केवल मसीह ही सत्य, मार्ग और जीवन है, केवल वही सत्य व्यक्त कर सकता है, हमें मार्ग दिखाकर जीवन दे सकता है। जो लोग खुद को मसीह कहते हैं लेकिन सत्य व्यक्त नहीं कर सकते, वे लोग निश्चय ही झूठे मसीह और बहुरूपिए हैं, इस आधार पर हम झूठे मसीहों को पहचान सकते हैं।"

भाई की सहभागिता सुनने के बाद, मैंने धर्मशास्त्र के अंश को ध्यान से पढ़ा और तब मुझे सब-कुछ साफ तौर पर समझ में आ गया: "हाँ, बाइबल में वाकई कहा गया है कि झूठे मसीह लोगों को धोखा देने के लिए संकेतों और चमत्कारों का प्रयोग करेंगे। जब ऐसा है तो झूठे मसीहों को पहचानने के इन सिद्धांतों को बाइबल के ज्ञाता पादरी क्यों नहीं समझ आए?"

भाई झांग ने तब सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों का यह अंश भेजा: "यदि, वर्तमान समय में, कोई व्यक्ति उभर कर आता है जो चिह्नों और चमत्कारों को प्रदर्शित करने, पिशाचों को निकालने, चंगाई करने में और कई चमत्कारों को करने में समर्थ है, और यदि यह व्यक्ति दावा करता है कि वो यीशु की वापसी है, तो यह दुष्टात्माओं की जालसाजी और उसका यीशु की नकल करना होगा। इस बात को स्मरण रखें! परमेश्वर एक ही कार्य को दोहराता नहीं है। यीशु के कार्य का चरण पहले ही पूर्ण हो चुका है, और परमेश्वर फिर से उस चरण के कार्य को पुनः नहीं दोहराएगा। ... यदि अंत के दिनों के दौरान, परमेश्वर अभी भी चिह्नों और चमत्कारों को प्रदर्शित करता है और अभी भी दुष्टात्माओं को निकालता और बीमारों को चंगा करता है—यदि वह यीशु के ही समान करता है—तो परमेश्वर एक ही कार्य को दोहरा रहा होगा, और यीशु के कार्य का कोई महत्व या मूल्य नहीं होगा। इस प्रकार, प्रत्येक युग में परमेश्वर कार्य के एक ही चरण को करता है। एक बार जब उसके कार्य का प्रत्येक चरण पूरा हो जाता है, तो शीघ्र ही इसकी दुष्टात्माओं के द्वारा नकल की जाती है, और शैतान द्वारा परमेश्वर का करीब से पीछा करने के बाद, परमेश्वर एक दूसरा तरीका बदल देता है। एक बार परमेश्वर अपने कार्य का एक चरण पूर्ण कर लेता है, तो इसकी दुष्टात्माओं द्वारा नकल कर ली जाती है। तुम लोगों को इस बारे में अवश्य स्पष्ट हो जाना चाहिए" ("वचन देह में प्रकट होता है" में "आज परमेश्वर के कार्य को जानना")।

भाई झांग ने सहभागिता करते हुए कहा, "हम सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों से समझ सकते हैं कि परमेश्वर सदा नया रहता है, वह कभी पुराना नहीं होता, और उसने वही काम कभी दोबारा नहीं किया। परमेश्वर जब भी कार्य का नया चरण आरंभ करता है, तो वह नए वचन व्यक्त करता है और इंसान को अभ्यास के लिए नया मार्ग देता है। मिसाल के तौर पर, जब प्रभु यीशु आया, तो उसने व्यवस्थाओं और आदेशों का ऐलान करने का काम नहीं किया, बल्कि उसने उस काम का इस्तेमाल हर इंसान को छुटकारा दिलाने के लिए किया, और उसने उस वक्त के लोगों को अभ्यास के नए तौर-तरीके दिए। जैसे कि, उसने लोगों को पाप स्वीकार करना और पश्चाताप करना, दुश्मन से भी प्रेम करना, क्षमा करना और परस्पर प्यार करना सिखाया, वगैरह-वगैरह। अब सर्वशक्तिमान परमेश्वर अंत के दिनों में आया है, वह फिर से पश्चाताप का मार्ग नहीं बता रहा, बल्कि वह छुटकारे के काम को आधार बनाकर, वचनों के द्वारा इंसान का न्याय करने और उसे शुद्ध करने का कार्य कर रहा है। काम के इस चरण में, परमेश्वर संकेत और चमत्कार नहीं दिखाता, बल्कि वह सही मायनों में हमारे भ्रष्ट स्वभावों को उजागर करने और हमारी अधार्मिकता का न्याय करने के लिए वचन व्यक्त करता है। साथ ही, परमेश्वर वे सारे सत्य प्रदान करता है जो हमारे उद्धार के लिए ज़रूरी हैं, वह हमें इस योग्य बनाता है कि हम स्वभावगत बदलाव को समझ सकें, जिसके जरिये हम अपने भ्रष्ट स्वभावों को दूर करें और परमेश्वर के माध्यम से उसके राज्य में प्रवेश का मार्गदर्शन पाएँ। दूसरी ओर, अधिकतर झूठे मसीह दुष्टात्माएँ होते हैं, वे बेहद अहंकारी और बेतुके होते हैं। वे नये युग की शुरुआत नहीं कर पाते, न ही युगों का अंत कर पाते हैं, स्वभावगत बदलाव के लिए वे लोगों को मार्ग दिखाने के लिए सत्य तो बिल्कुल व्यक्त नहीं कर पाते। वे सिर्फ प्रभु यीशु के पहले के कार्य की नकल कर सकते हैं और लोगों को धोखा देने के लिए थोड़े-बहुत संकेत या चमत्कार दिखा सकते हैं। लेकिन जहाँ तक प्रभु यीशु द्वारा दिखाए गए बड़े चमत्कारों का प्रश्न है, जैसे मरे हुए इंसान को ज़िंदा करना और दो मछलियों और पाँच रोटियों से पाँच हज़ार लोगों को खाना खिलाना, ऐसे कामों की नकल करना झूठे मसीहों के वश की बात नहीं है। क्योंकि ऐसा अधिकार और सामर्थ्य केवल परमेश्वर के पास है, झूठे मसीह ऐसे काम कभी नहीं कर सकते।"

मैं भाई की सहभागिता से ही यह बात समझ पायी कि परमेश्वर सदा नया रहता है, कभी पुराना नहीं होता, झूठे मसीह सिर्फ परमेश्वर के पहले के कार्य की नकल कर सकते हैं, कुछ साधारण से संकेत और चमत्कार दिखा सकते हैं। लेकिन वे परमेश्वर का कार्य नहीं कर सकते, अगर हम लोग परमेश्वर के कार्य के सिद्धांतों को समझते हैं, तो कभी धोखा नहीं खाएँगे। पहले, मैं हमेशा धोखा खाने से डरती थी, इसलिए कभी चमकती पूर्वी बिजली के उपदेशों को सुनने की मिम्मत नहीं करती थी, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अंत के दिनों के कार्य की जाँच-पड़ताल करने की तो बात ही दूर है। बल्कि मैं स्वयं को कलीसिया तक सीमित रखती थी, वहाँ उपदेश सुनती थी और प्रभु की स्तुति करती थी, और सोचती थी कि आगे बढ़ने का यही सबसे सुरक्षित तरीका है, इस तरह भविष्य में प्रभु से मेरा पुनर्मिलन हो जाएगा। अब जब इस बारे में सोचती हूँ, तो लगता है कि अंत के दिनों में सक्रिय होकर प्रभु के वचनों की खोज न करके, निष्क्रिय और रक्षात्मक रुख अपनाकर मैंने सचमुच प्रभु के स्वागत के अवसर को हाथ से गँवा देने की स्थिति पैदाकर दी थी।

भाई झांग ने अपनी सहभागिता जारी रखते हुए कहा, "परमेश्वर सत्य, मार्ग और जीवन है, परमेश्वर के कार्य के सिद्धांतों के जरिये सच्चे और झूठे मसीहों को पहचानने के अलावा, हम लोग मसीह की प्रकृति के जरिये भी उनकी पहचान कर सकते हैं।" उस मुकाम पर, भाई झांग ने परमेश्वर के वचनों का एक अंश भेजा: "परमेश्वर देहधारी हुआ और मसीह कहलाया, और इसलिए वह मसीह, जो लोगों को सत्य दे सकता है, परमेश्वर कहलाता है। इसमें कुछ भी अतिशयोक्ति नहीं है, क्योंकि वह परमेश्वर के तत्व को स्वयं में धारण किए रहता है, और अपने कार्य में परमेश्वर के स्वभाव और बुद्धि को धारण करता है, और ये चीजें मनुष्य के लिये अप्राप्य हैं। जो अपने आप को मसीह कहते हैं, फिर भी परमेश्वर का कार्य नहीं कर सकते, वे सभी धोखेबाज़ हैं। मसीह पृथ्वी पर केवल परमेश्वर की अभिव्यक्ति नहीं है, बल्कि वह विशेष देह भी है जिसे धारण करके परमेश्वर लोगों के बीच रहकर अपना कार्य पूर्ण करता है। यह वह देह नहीं है जो किसी भी मनुष्य के द्वारा प्रतिस्थापित किया जा सके, बल्कि वह देह है, जो परमेश्वर के कार्य को पृथ्वी पर अच्छी तरह से करता है और परमेश्वर के स्वभाव को अभिव्यक्त करता है, और अच्छी प्रकार से परमेश्वर का प्रतिनिधित्व करता है, और मनुष्य को जीवन प्रदान करता है। देर-सवेर, मसीह का भेष धारण करने वालों का पतन होगा, क्योंकि वे भले ही मसीह होने का दावा करते हैं, किंतु उनमें किंचितमात्र भी मसीह का सार-तत्व नहीं होता। इसलिए मैं कहता हूं कि मसीह की प्रामाणिकता मनुष्य के द्वारा परिभाषित नहीं की जा सकती है, परन्तु स्वयं परमेश्वर के द्वारा उत्तर दिया और निर्णय लिया जा सकता है" ("वचन देह में प्रकट होता है" में "केवल अंतिम दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनन्त जीवन का मार्ग दे सकता है")।

भाई झांग की सहभागिता चलती रही, "हम लोग परमेश्वर के वचनों से समझ सकते हैं कि मसीह परमेश्वर के आत्मा का ही देहधारण है—उसकी प्रकृति दिव्य है, वह परमेश्वर का कार्य करता है, परमेश्वर के स्वभाव को ही व्यक्त करता है, वह किसी भी समय इंसान को पोषण देने और उसकी देखभाल करने के लिए सत्य व्यक्त कर सकता है, और केवल मसीह ही इंसान को बचाने का कार्य कर सकता है। मिसाल के तौर पर, प्रभु यीशु मसीह था, उसके प्रकटन और कार्य ने ही व्यवस्था के युग का अंत किया और अनुग्रह के युग की शुरुआत की। उसने इंसान को पश्चाताप का मार्ग प्रदान करने के लिए, परमेश्वर की इच्छा और अपेक्षाओं को जानने के लिए, और इंसान को ऐसा मार्ग देने के लिए जिसका वो मुश्किलों में अनुसरण कर सके, वचन भी व्यक्त किए। प्रभु यीशु के वचनों से इंसान समझ गया कि उसे प्रभु से कैसे प्रार्थना करनी है, परस्पर कैसे रहना है, एक-दूसरे को क्षमा कैसे करना है, वगैरह-वगैरह। इसके अलावा, प्रभु यीशु ने अपने प्रेम करने वाले दयालु और करुणामय स्वभाव को भी व्यक्त किया, उसने रोगियों का इलाज किया, शैतानों को मिटाया और इंसान पर असीम अनुग्रह किया। अंतत:, इंसान के छुटकारे के लिए वह सूली पर चढ़ गया, इस तरह उसने हर इंसान के छुटकारे के, उसे बंधनों और बेड़ियों के नियमों से बचाने के काम को पूरा किया। प्रभु यीशु ने जो कार्य किए, ये उनमें से कुछ हैं, उसकी जगह इन कामों को और कोई नहीं कर सकता था। प्रभु यीशु के कार्य और वचनों से हम समझ सकते हैं कि वह सत्य, मार्ग और जीवन है। उसी तरह, अंत के दिनों में परमेश्वर ने एक बार फिर देहधारण करके अनुग्रह के युग का अंत किया और राज्य के युग का आरंभ किया। उसने लाखों वचन बोले हैं, वह परमेश्वर के धार्मिक स्वभाव को व्यक्त करता है जो कि प्रतापी है, क्रोधी है और अपमान सहन न करने वाला है। सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने जो वचन व्यक्त किए हैं वे न केवल परमेश्वर के तमाम प्रबंधन कार्य के रहस्यों को प्रकट करते हैं और इंसान की अंतिम मंज़िल का अंत करते हैं, बल्कि वे उन सत्यों को भी एकदम स्पष्ट तरीके से समझाते हैं जो हमारी ज़रूरतों के अनुसार हमें शुद्ध होने और उद्धार पाने के लिए आवश्यक हैं। मिसाल के तौर पर, वह समझाता है कि शैतान किस तरह इंसान को भ्रष्ट करता है, शैतान के हाथों इंसान की भ्रष्टता की सच्चाई को समझाता है, किस तरह परमेश्वर इंसान के भ्रष्ट स्वभावों का न्याय करके उन्हें शुद्ध करता है, किस तरह इंसान को परमेश्वर में आस्था रखनी चाहिए और उसका आज्ञापालन करना चाहिए, परमेश्वर किस तरह के इंसान से प्रेम करता है और किस तरह के व्यक्ति से घृणा करता है और उसे हटा देता है, परमेश्वर द्वारा पूर्ण बनाए जाने के लिए किस प्रकार अनुसरण करना चाहिए, वगैरह-वगैरह। परमेश्वर के न्याय और ताड़ना का अनुभव करते हुए, हम शैतान द्वारा अपनी भ्रष्टता के सार और जड़ को अच्छी तरह देख लेते हैं और समझ जाते हैं कि परमेश्वर धार्मिक है, पवित्र है और उसके स्वभाव का अपमान नहीं किया जा सकता। हम सच्चा पश्चाताप करते हुए परमेश्वर के सामने ज़मीन पर दंडवत करने को विवश होते हैं, हम उसके प्रति अधिक से अधिक श्रद्धानत और आज्ञाकारी हो जाते हैं और, धीरे-धीरे हम अपने शैतानी भ्रष्ट स्वभावों से छुटकारा पा लेते हैं, अपने आपको पाप के बंधनों से मुक्त कर लेते हैं और परमेश्वर का सच्चा उद्धार पा लेते हैं। सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन और कार्य हमें सत्य, मार्ग और जीवन प्रदान करते हैं—सर्वशक्तिमान परमेश्वर स्वयं परमेश्वर है और वह देहधारी मसीह है। झूठे मसीहों में परमेश्वर का सार नहीं होता, वे सत्य व्यक्त नहीं कर सकते, इंसान को बचाने का कार्य करने की तो बात ही बहुत दूर है। वे केवल लोगों को धोखा देने और उन्हें नुकसान पहुँचाने के लिए आकर्षक घोषणाएँ कर सकते हैं। जब कोई उन्हें सुनता है, तो पोषण मिलना तो दूर, उसका दिल और अंधकारमय हो जाता है, डूबता चला जाता है, उसके पास कहीं और जाने का विकल्प नहीं बचता, और आखिरकार उसका हश्र यह होता है कि उसे शैतान निगल जाता है। इसलिए, हम लोग परमेश्वर के कथनों से, परमेश्वर के कार्य और व्यक्त स्वभाव से यह सुनिश्चित कर पाते हैं कि वह देहधारी मसीह है या नहीं।"

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों को सुनकर और भाई की सहभागिता से, मुझे यह सच्चाई पूरी तरह से समझ में आ गयी कि सच्चे और झूठे मसीहों में भेद कैसे करना है। केवल मसीह ही सत्य, मार्ग और जीवन है, केवल मसीह ही सत्य व्यक्त कर सकता है, और स्वयं परमेश्वर का कार्य कर सकता है। जो लोग अपने आपको मसीह कहते हैं लेकिन सत्य व्यक्त करने के काबिल नहीं हैं और इंसान को बचाने का काम नहीं कर सकते, वे झूठे मसीह हैं। मुझे अंतत: आगे का रास्ता मिल गया। अब मैं झूठे मसीहों से धोखा खा जाने के भय से न तो आँखें मूँदकर रक्षात्मक थी और न ही निष्क्रिय थी। परमेश्वर का धन्यवाद!

उसके बाद, भाई झांग ने मुझसे दूसरे सत्यों पर भी सहभागिता की, जैसे कि देहधारण का रहस्य, परमेश्वर के कार्य और इंसान के काम में अंतर, बाइबल की अंदरूनी कहानी, और बहुत कुछ। मैं जितना ज़्यादा सुन रही थी, मुझे उतनी ही ज़्यादा संतुष्टि मिल रही थी। मुझे हर दिन भाई-बहनों के साथ सभाओं में शामिल होने का इंतज़ार रहता था। हर सभा की समाप्ति के बाद, मैं और मॉम सभा से मिलने वाली नयी रोशनी पर चर्चा किया करते थे, धीरे-धीरे मैं परमेश्वर के अंत के दिनों के कार्य को समझने लगी। मैंने जैसे-जैसे खोज और जाँच-पड़ताल की, तो मुझे यकीन हो गया कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर ही वस्तुत: प्रभु यीशु है। मैंने फिर सुसमाचार का प्रचार करना शुरू कर दिया और मैं ज़्यादा से ज़्यादा ऐसे लोगों को प्रभु की वापसी का समाचार देने लगी जो परमेश्वर के प्रकटन के लिए तरस रहे थे।

बाद में, मैं और मॉम फ्राइडे आराधना में शामिल होने के लिए अपनी पुरानी कलीसिया गये। हमें आश्चर्य हुआ जब सभा खत्म होने के बाद, पादरी ने एक वीडियो दिखाया जिसमें सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के खिलाफ झूठे आरोप लगाए गए थे। जब मैंने सर्वशक्तिमान परमेश्वर के खिलाफ लगायी गयी मनगढ़ंत अफवाहें और लाँछन देखे, तो मुझे गुस्सा आ गया, मैंने सोचा: "जैसा ये लोग कहते हैं सर्वशक्तिमान परमेश्वर वैसा बिल्कुल नहीं है। उन लोगों का सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया से कोई संबंध नहीं है, न ही उन लोगों ने परमेश्वर के अंत के दिनों के कार्य की कोई जाँच-पड़ताल की है। ये लोग परमेश्वर के कार्य का आकलन बिना किसी आधार के और मनमर्ज़ी से कैसे कर सकते हैं?"

वीडियो खत्म होने के बाद, पादरी, उपयाजक और कलीसिया के दो काउंसिल सदस्यों ने मुझे और मॉम को रुकने के लिए कहा। पादरी हमसे बोला, "अब आप दोनों क्या सर्वशक्तिमान परमेश्वर में आस्था रखते हैं?" हमने "हाँ" में उत्तर दिया।

जैसे ही हमने यह बात कही, एक उपयाजक उछलकर खड़ा हो गया और, मॉम की ओर उंगली उठाता हुआ गुस्से में बोला, "तो अब आप सर्वशक्तिमान परमेश्वर में आस्था रखती हैं? अब कल से आपको संडे स्कूल में पढ़ाने की इजाज़त नहीं है। कल दोपहर को, मैं आपके घर आऊँगा और कलीसिया का पैसा ले लूँगा।"

मॉम ने कहा, "आप जब चाहें पैसा वापस ले सकते हैं।"

पादरी गुस्से में बोला, "पूरा धार्मिक जगत सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया का विरोध और निंदा करता है। आप उनसे संबंध रखने पर क्यों अड़ी हुई हैं?"

मॉम ने मुँहतोड़ जवाब दिया, "पादरी, क्या धार्मिक जगत के पास सत्य है? क्या कभी प्रभु यीशु ने कहा कि हम धार्मिक जगत का अनुसरण करके ही प्रभु का स्वागत कर सकते हैं? बरसों पहले जब प्रभु यीशु ने प्रकट होकर अपना कार्य किया, तो यहूदी अगुवाओं ने न केवल खुद उसके कार्य की खोज या जाँच-पड़ताल नहीं की, बल्कि किसी विश्वासी को भी उस कार्य को स्वीकार नहीं करने दिया। यहाँ तक कि प्रभु यीशु के बारे में अफवाहें फैलायीं, पागलों की तरह उसका विरोध किया, उसे परखा और उसकी निंदा की। आखिरकार, उन्होंने परमेश्वर के स्वभाव का अपमान कर दिया और इस तरह वे लोग परमेश्वर के अभिशाप के भागी बने और उसके द्वारा दंडित किए गए। अगर हम आपकी बात भी मान लें, कि धार्मिक जगत जिस मार्ग का विरोध और निंदा करता है वह सच्चा मार्ग नहीं है, तो क्या इसके मायने ये नहीं हुए कि आप प्रभु यीशु तक के कार्य को नकार रहे हैं? आप परमेश्वर के अंत के दिनों की खोज या जाँच-पड़ताल को नकारते हैं क्योंकि धार्मिक जगत सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया का विरोध और निंदा करता है—क्या यह प्रभु के वचनों के अनुरूप है? कलीसिया के पादरी और उपयाजक होने के नाते, आप सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अंत के दिनों के कार्य की बिना कोई जाँच किए मनमाने ढंग से विरोध और निंदा कैसे कर सकते हैं? सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों को पढ़ने के बाद, और यह देखने के बाद कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन सत्य हैं, वे परमेश्वर की वाणी हैं, हमें यकीन हो गया कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर ही लौटकर आया प्रभु यीशु है।" मुझे आश्चर्य हुआ जब उन्होंने मॉम की बात पर तिरस्कारपूर्ण प्रतिक्रिया दी।

मॉम ने अपने फोन पर एक ऐप खोला और उन्हें सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन पढ़कर सुनाए। फिर कलीसिया काउंसिल का एक सदस्य बड़े अहंकारभाव से बोला और उसने सर्वशक्तिमान परमेश्वर के बारे में कुछ निंदात्मक टिप्पणी की। मॉम भड़कर बोलीं, "यकीन नहीं होता कि आप इतने अहंकारी हैं। ये वचन सत्य हैं—क्या यह बात आपको समझ में नहीं आती? क्या आपको सुनकर समझ में नहीं आता कि यह परमेश्वर की वाणी है? क्या आप वाकई परमेश्वर की भेड़ हैं?"

अनमनी मुस्कान के साथ, वे लोग दंभपूर्ण ढंग से हमें घूरने लगे। उसके बाद पादरी घमंड से बोला, "हम जिस प्रभु यीशु का इंतज़ार कर रहे हैं, उसके हाथों में कीलों के ज़ख्म होंगे और वह यहूदी के वेश में आएगा। हम लोग प्रभु यीशु के अलावा, और किसी को स्वीकार नहीं करेंगे, फिर भले ही सर्वशक्तिमान परमेश्वर द्वारा व्यक्त वचन सत्य ही क्यों न हों।" उनका अड़ियल रवैया देखकर, मॉम और मैंने उनसे बातचीत की कोशिश पर विराम लगा दिया। मैंने देखा कि उनका बर्ताव बिल्कुल वैसा ही था जैसा प्रभु यीशु का विरोध करने वाले फ़रीसियों का था; उन्हें परमेश्वर में तो आस्था थी लेकिन उन्होंने सत्य की खोज नहीं की, न ही उन्होंने परमेश्वर की वाणी सुनने पर ध्यान दिया। बल्कि वे अहंकारी और कपटी बने रहे, अड़ियल ढंग से अपनी धारणाओं और कल्पनाओं से चिपके रहे, उन्होंने मनमाने ढंग से परमेश्वर के कार्य का आकलन और विरोध किया—दरअसल वे ऐसे लोग थे जो आए तो परमेश्वर की सेवा करने थे, लेकिन उसका विरोध करने लगे।

उसके बाद, पादरी ने हमें धमकी दी, "हम आपको एक महीने का समय देते हैं, आप फिर से सोच लीजिये। लेकिन अगर आप एक महीने के बाद भी सर्वशक्तिमान परमेश्वर में ही आस्था रखती रहीं, तो हम आपको कलीसिया से बेदखल कर देंगे।"

मैं गुस्से में बोली, "एक महीना इंतज़ार करने की ज़रूरत नहीं है। आप हमें अभी बेदखल कर दीजिए। काफी समय तक परमेश्वर के अंत के दिनों के कार्य की खोज और जाँच-पड़ताल करने के बाद, हमें यकीन हो चुका है कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर ही लौटकर आया प्रभु यीशु है। आखिरकार हमने परमेश्वर की वाणी सुन ली है, इसलिए अगर आप हमें नहीं भी निकालते हैं, तो हम वैसे भी अब कलीसिया की सभाओं में शामिल होने नहीं आएँगे।"

पादरी अपना स्वर धीमा करते हुए, धूर्तता से बोले, "हम ऐसा नहीं करेंगे। अगर हम आपको अभी निकाल देंगे, तो भाई-बहन हमारे बारे में क्या सोचेंगे? वे कहेंगे कि हमने आपको सिर्फ किसी ऑनलाइन सभा में शामिल होने की वजह से निकाल दिया, उन्हें हम लोग पत्थर-दिल नज़र आएँगे। एक महीने में, हम लोग भाई-बहनों को बता देंगे कि हमने आपको बहुत समझाने की कोशिश की, आप लोगों को सोचने के लिए पर्याप्त समय भी दिया, लेकिन आखिर में आप लोग सर्वशक्तिमान परमेश्वर में विश्वास रखने पर अड़े रहे और कलीसिया छोड़ने का फैसला कर लिया, तब जाकर हमने आप लोगों को बेदखल किया है।"

पादरी की यह बात सुनकर, मेरा मन खराब हो गया, अब उनसे कुछ भी कहने की इच्छा नहीं हुई। मैं जाने लगी और मॉम को भी साथ चलने के लिए खींचने लगी। जैसे ही हम लोग जाने लगे, पादरी ने हमें चेतावनी दी: "यह आप पर है कि आप सर्वशक्तिमान परमेश्वर में आस्था रखें या न रखें, लेकिन मैं अब आप लोगों को हमारी कलीसिया के भाई-बहनों के साथ कोई संबंध नहीं रखने दूँगा।"

कलीसिया से निकले तो दोपहर के एक बज चुके थे। अभी जो कुछ हुआ था, जब मैंने उस पर विचार किया, तो मुझे यकीन नहीं हुआ कि मैं जिस नैतिकतावादी और गुणवान उपदेशक पादरी का इतना सम्मान करती थी, वह ऐसे पेश आ सकते हैं। तभी मेरे मन में परमेश्वर के वचन आए: "वे जो बड़ी-बड़ी कलीसियाओं में बाइबल पढ़ते हैं, वे हर दिन बाइबल पढ़ते हैं, फिर भी उनमें से एक भी परमेश्वर के कार्य के उद्देश्य को नहीं समझता है। एक भी इंसान परमेश्वर को नहीं जान पाता है; और यही नहीं, उनमें से एक भी परमेश्वर के हृदय के अनुरूप नहीं है। वे सबके सब व्यर्थ, अधम लोग हैं, जिनमें से प्रत्येक परमेश्वर को सिखाने के लिए ऊँचे पर खड़ा हैं। यद्यपि वे परमेश्वर के नाम पर धमकी देते हैं, किंतु वे जानबूझ कर उसका विरोध करते हैं। यद्यपि वे स्वयं को परमेश्वर का विश्वासी दर्शाते हैं, किंतु ये वे लोग हैं जो मनुष्यों का मांस खाते और रक्त पीते हैं। ऐसे सभी मनुष्य शैतान हैं जो मनुष्यों की आत्माओं को निगल जाते हैं, मुख्य राक्षस हैं जो जानबूझकर उन्हें विचलित करते हैं जो सही मार्ग पर कदम बढ़ाना चाहते हैं या सही मार्ग पर चलने का प्रयास करते हैं, और वे बाधाएँ हैं जो परमेश्वर को खोजने वालों के मार्ग में रुकावट उत्पन्न करती हैं। यद्यपि वे 'मज़बूत देह' वाले हैं, किंतु उसके अनुयायियों को कैसे पता चलेगा कि वे ईसा-विरोधी हैं जो लोगों को परमेश्वर के विरोध में ले जाते हैं? वे कैसे जानेंगे कि ये जीवित शैतान हैं जो निगलने के लिए विशेष रूप से आत्माओं को खोज रहे हैं?" ("वचन देह में प्रकट होता है" में "जो लोग परमेश्वर को नहीं जानते हैं वे ही परमेश्वर का विरोध करते हैं")।

मैं हमेशा सोचा करती थी कि पादरी और एल्डर प्रभु के सेवक होते हैं, उनमें बाइबल की सबसे अच्छी समझ होनी चाहिए और उन्हें परमेश्वर की इच्छा के सबसे ज़्यादा अनुरूप होना चाहिए। मुझे हमेशा लगता था कि जब प्रभु वापस आएगा, तो ये लोग निश्चित रुप से प्रभु का स्वागत करेंगे। मैं कभी सोच भी नहीं सकती थी कि प्रभु की वापसी की खबर सुनकर, पादरी इसकी खोज या जाँच-पड़ताल करने के बजाय इतना अहंकारी और आत्माभिमानी हो जाएँगे, अड़ियल ढंग से अपनी धारणाओं और कल्पनाओं से चिपके रहेंगे, परमेश्वर और उसके अंत के दिनों के कार्य का आकलन और उसकी निंदा करेंगे। उनके अंदर परमेश्वर-भीरु दिल नहीं था, यहाँ तक कि "झुण्ड की रक्षा" करने की आड़ में उन्होंने अपना ओहदा और रोज़ी-रोटी चलाए रखने की खातिर, विश्वासियों को परमेश्वर के अंत के दिनों के कार्य की जाँच-पड़ताल करने से रोका। जिन विश्वासियों ने परमेश्वर के अंत के दिनों के कार्य को स्वीकार कर लिया था, उन लोगों को पादरियों और एल्डरों ने डराया-धमकाया कि उन्हें कलीसिया से बेदखल कर दिया जाएगा, यहाँ तक कि कलीसिया के भाई-बहनों को कहा गया कि वे उनसे कोई संबंध न रखें ताकि वे लोग अपने भाई-बहनों को सुसमाचार न सुना सकें। वे लोग कितने दुष्ट और कुटिल हैं! अपने ओहदे और रोज़ी-रोटी को बनाए रखने की खातिर, उस समय फ़रीसियों ने बुरी तरह से प्रभु का विरोध किया था, उनकी निंदा की थी और उन्हें सूली पर चढ़ा दिया था। आज के पादरियों और एल्डरों का सार बिल्कुल फ़रीसियों जैसा ही है—ये लोग मसीह-विरोधी हैं जो परमेश्वर के अंत के दिनों के कार्य के द्वारा उजागर किए जा चुके हैं, ये ऐसे हैवान हैं जो इंसान की आत्मा को निगल जाते हैं। आखिरकार, उस वक्त मुझे यह बात पूरी तरह से समझ में आ गयी कि जब कोई परमेश्वर को और उसके कार्य को जाने बिना परमेश्वर में आस्था रखता है, तो वह चाहे कितना भी कष्ट उठाता नज़र आए या अपने आपको खपाता नज़र आए, वह अपने अहंकारी और कपटी शैतानी स्वभाव पर निर्भर रहकर, हमेशा परमेश्वर का विरोध ही करेगा और परमेश्वर के स्वभाव का अपमान ही करेगा।

उस समय, मैंने मन ही मन परमेश्वर को धन्यवाद दिया और उसकी स्तुति की। पहले मैं पादरियों और एल्डरों की दिखावटी नैतिकता के झाँसे में आ गयी थी, हमेशा उन्हें अपना आदर्श मानकर, उनका अनुसरण और आज्ञापालन करती थी। जब प्रभु का स्वागत करने की बात आयी, तो उनके साथ-साथ मैंने भी परमेश्वर का विरोध किया था। परमेश्वर ने अंतत: उन्हें उजगर करके, मुझे पादरियों और एल्डरों का सत्य से और परमेश्वर से घृणा करने वाला, शैतानी सार दिखा दिया, और तब मैं, उस भूलभुलैया से बाहर निकल आयी जो उन्होंने मेरे लिए बनायी थी और मैं प्रभु का स्वागत कर पायी। मैं परमेश्वर का धन्यवाद करती हूँ कि उसने मुझे बचाया, मैं परमेश्वर में आस्था के मार्ग पर चलकर ईमानदारी से सत्य का अनुसरण करना चाहती हूँ ताकि परमेश्वर के प्रेम का प्रतिदान दे सकूँ!

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