तुम एक विषमता होने के अनिच्छुक क्यों हो? (भाग दो)

अब इस प्रकार के कार्य का अनुभव करते हुए, तुम लोगों को परमेश्वर के कार्य के चरणों और लोगों को रूपांतरित करने के उसके तरीकों पर कुछ समझ अवश्य हो जानी चाहिए। रूपांतरण में परिणामों को प्राप्त करने का यह होना ही एकमात्र तरीका है। तुम लोगों की खोज में, तुम लोगों की बहुत सी व्यक्तिगत अवधारणाएँ, आशाएँ और भविष्य होते हैं। वर्तमान कार्य तुम लोगों की हैसियत की अभिलाषा और तुम्हारी अनावश्यक अभिलाषाओं से निपटने के लिए है। आशाएँ, हैसियत, और अवधारणाएँ सभी शैतानी स्वभाव के उत्कृष्ट प्रतिनिधित्व हैं। लोगों के हृदयों में ये चीजें विद्यमान हैं इसका कारण पूरी तरह से यह है कि शैतान का विष हमेशा लोगों के विचारों को दूषित कर रहा है, और लोग शैतान के इन प्रलोभनों से पीछा छुड़ाने में हमेशा असमर्थ हैं। वे पाप के बीच में रह रहे हैं, मगर इसे पाप होना नहीं मानते हैं, और वे अभी भी सोचते हैं: “हम परमेश्वर पर विश्वास करते हैं, इसलिए उसे अवश्य हमें आशीष प्रदान करने चाहिए और हमारे लिए सब कुछ उचित प्रकार से व्यवस्थित करना चाहिए। हम परमेश्वर पर विश्वास करते हैं, इसलिए हमें दूसरों से श्रेष्ठतर अवश्य होना चाहिए, और हमारे पास किसी और की तुलना में अधिक हैसियत और अधिक भविष्य अवश्य होना चाहिए। चूँकि हम परमेश्वर पर विश्वास करते हैं, इसलिए उसे हमें असीम आशीषें अवश्य देनी चाहिए। अन्यथा, इसे परमेश्वर पर विश्वास नहीं कहा जाएगा।” कई सालों से, जिन विचारों पर लोगों ने अपने अस्तित्व के लिए भरोसा रखा था, वे उनके हृदयों को इस स्थिति तक दूषित कर रहे हैं कि वे विश्वासघाती, डरपोक और नीच हो गए हैं। न केवल उनमें इच्छा शक्ति और संकल्प का अभाव है, बल्कि वे लालची, अभिमानी और स्वेच्छाचारी भी बन गए हैं। उनमें ऐसे किसी भी संकल्प का सर्वथा अभाव है जो स्वयं को ऊँचा उठाता हो, और इससे भी ज्यादा, उनमें इन अंधेरे प्रभावों की बाध्यताओं से पीछा छुड़ाने की लेश मात्र भी हिम्मत नहीं है। लोगों के विचार और जीवन इतने सड़े हुए हैं कि परमेश्वर पर विश्वास करने के बारे में उनके दृष्टिकोण अभी भी असहनीय रूप से वीभत्स हैं, और यहाँ तक कि जब लोग परमेश्वर में विश्वास के बारे में अपने दृष्टिकोण की बात करते हैं तो इसे सुनना मात्र ही असहनीय है। सभी लोग कायर, अक्षम, नीच, और दुर्बल हैं। वे अंधेरे की शक्तियों के लिए गुस्सा महसूस नहीं करते हैं, और वे प्रकाश और सत्य के लिए प्यार महसूस नहीं करते हैं; इसके बजाय, वे उन्हें बाहर निकालने का अपना अधिकतम प्रयास करते हैं। क्या तुम लोगों के वर्तमान विचार और दृष्टिकोण ठीक इसी तरह के नहीं हैं? “चूँकि मैं परमेश्वर पर विश्वास करता हूँ कि मुझ पर केवल आशीषों की वर्षा होनी चाहिए और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि मेरी हैसियत कभी नहीं गिरती है और कि यह अविश्वासियों की तुलना में अधिक रहनी चाहिए।” तुम लोग केवल एक या दो वर्षों से ही इस तरह के दृष्टिकोण को अपने भीतर प्रश्रय नहीं दे रहे हो; बल्कि कई वर्षों से दे रहे हो। तुम लोगों की लेन-देन संबंधी मानसिकता अति विकसित है। यद्यपि आज तुम लोग इस चरण तक पहुँच गए हो, तब भी तुम लोगों ने हैसियत को जाने नहीं दिया है, बल्कि इसके बारे में पूछताछ करने के लिए लगातार संघर्ष करते हो, और इस पर रोज ध्यान देते हो, एक गहरे डर के साथ कि एक दिन तुम लोगों की हैसियत खो जाएगी और तुम लोगों का नाम बर्बाद हो जाएगा। लोगों ने सहुलियत की अपनी अभिलाषा की कभी भी उपेक्षा नहीं की है। इसलिए, जैसा कि मैं आज जिस तरह तुम्हारा न्याय करता हूँ, अंत में तुम लोगों को कितने अंश की समझ होगी? तुम लोग कहोगे कि यद्यपि तुम लोगों की हैसियत ऊँची नहीं है, फिर भी तुम लोगों ने परमेश्वर के उत्कर्ष का आनंद लिया है। क्योंकि तुम लोग अधम पैदा हुए थे इसलिए तुम लोगों के पास हैसियत नहीं है, लेकिन तुम हैसियत प्राप्त कर लेते हो क्योंकि परमेश्वर तुम्हारा उत्कर्ष करता है—यह कुछ ऐसा है जो परमेश्वर ने तुम लोगों को प्रदान किया था। आज तुम लोग व्यक्तिगत रूप से परमेश्वर का प्रशिक्षण, उसकी ताड़ना, और उसका न्याय प्राप्त करने में सक्षम हो। उससे भी अधिक, यह उसका उत्कर्ष है। तुम व्यक्तिगत रूप से उसके द्वारा शुद्धिकरण और जलाए जाने को प्राप्त करने में सक्षम हो। यह परमेश्वर का महान प्रेम है। युगों से एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं है जिसने उसका शुद्धिकरण और जलाया जाना प्राप्त किया है, और एक भी व्यक्ति उसके वचनों के द्वारा पूर्ण किया जाना प्राप्त करने में सक्षम नहीं हो पाया है। परमेश्वर अब तुम लोगों के साथ आमने-सामने बात कर रहा है, तुम लोगों को शुद्ध कर रहा है, तुम लोगों के भीतर के विद्रोहीपन को प्रकट कर रहा है—यह वास्तव में उसका उत्कर्ष है। लोगों के पास क्या योग्यताएँ हैं? चाहे वे दाऊद के पुत्र हों या मोआब के वंशज, कुल मिला कर, लोग रचना किए गए प्राणी है जिनके पास शेख़ी मारने के लिए कुछ नहीं है। चूँकि तुम लोग परमेश्वर के प्राणी हो, इसलिए तुम लोगों को प्राणी का कर्तव्य अवश्य करना चाहिए। तुम लोगों से अन्य कोई अपेक्षाएँ नहीं हैं। तुम लोगों को ऐसे प्रार्थना करनी चाहिए : “हे परमेश्वर, चाहे मेरी हैसियत हो या नहीं, अब मैं स्वयं को समझती हूँ। यदि मेरी हैसियत ऊँची है तो यह तेरे उत्कर्ष के कारण है, और यदि यह निम्न है तो यह तेरे आदेश के कारण है। सब कुछ तेरे हाथों में है। मेरे पास न तो कोई विकल्प हैं न ही कोई शिकायतें हैं। तूने निश्चित किया कि मैं इस देश में और इन लोगों के बीच पैदा हूँगी, और मुझे केवल तेरे प्रभुत्व के अधीन पूरी तरह से आज्ञाकारी होना चाहिए क्योंकि सब कुछ उसी के भीतर है जो तूने निश्चित किया है। मैं हैसियत पर ध्यान नहीं देती हूँ; आखिरकार, मैं मात्र एक प्राणी हूँ। यदि तू मुझे अथाह गड्ढे में, आग और गंधक की झील में डालता, तो मैं एक प्राणी से अधिक कुछ नहीं हूँ। यदि तू मुझे उपयोग करता है, तो मैं एक प्राणी हूँ। यदि तू मुझे परिपूर्ण बनाता है, मैं तब भी एक प्राणी हूँ। यदि तू मुझे परिपूर्ण नहीं बनाता है, तो मैं तब भी तुझ से प्यार करती हूँ क्योंकि मैं सृष्टि के एक प्राणी से अधिक कुछ नहीं हूँ। मैं सृष्टि के परमेश्वर द्वारा रचित एक सूक्ष्म प्राणी से अधिक कुछ नहीं हूँ, निर्मित मनुष्यों के बीच सिर्फ एक। यह तू था जिसने मुझे बनाया है, और अब तूने एक बार फिर मुझे अपने हाथों में अपनी दया पर रखा है। मैं तेरा उपकरण और तेरी विषमता होने के लिए तैयार हूँ क्योंकि सब कुछ वही है जो तूने निश्चित किया है। कोई इसे बदल नहीं सकता है। सभी चीजें और सभी घटनाएँ तेरे हाथों में हैं।” जब वह समय आएगा, तब तू हैसियत पर ध्यान केंद्रित नहीं करेगी, और तू इससे छुटकारा पा लेगी। केवल तभी तू आत्मविश्वास से, निर्भीकता से खोज करने में सक्षम होगी, और तभी तेरा हृदय किसी भी बाधा से मुक्त हो सकता है। एक बार लोगों को इन चीज़ों से छुड़ा लिया जाता है, तो उनके पास और कोई चिंताएँ नहीं होंगी। अभी तुम लोगों में से अधिकांश की चिंताएँ क्या हैं? तुम लोग हमेशा हैसियत द्वारा विवश होते हो और हमेशा अपनी संभावनाओं की चिंता करते रहते हो। तुम लोग हमेशा परमेश्वर के कथनों की पुस्तक के पन्ने पलटते हो, मानवजाति की मंज़िल से संबंधित कहावतों को पढ़ने की इच्छा रखते हो और जानना चाहते हो कि तुम्हारी संभावनाएँ और मंज़िल क्या होंगी। तुम सोचते हो, “क्या वाकई मेरी कोई संभावनाएँ हैं? क्या परमेश्वर ने उन्हें ले लिया है? परमेश्वर बस यह कहता है कि मैं एक विषमता हूँ; तो फिर, मेरी संभावनाएँ क्या हैं?” अपनी संभावनाओं और नियति को एक किनारे रखना तुम्हारे लिए मुश्किल है। अब तुम लोग अनुयायी हो, और तुम लोगों को कार्य के इस स्तर की कुछ समझ प्राप्त हो गयी है। हालाँकि, तुम लोगों ने अभी तक हैसियत के लिए अपनी अभिलाषा की उपेक्षा नहीं की है। जब तुम लोगों की हैसियत ऊँची होती है तो तुम लोग अच्छी तरह से खोज करते हो, किन्तु जब तुम्हारी हैसियत निम्न होती है तो तुम लोग अब और खोज नहीं करते हो। हैसियत के आशीष हमेशा तुम्हारे मन में होते हैं। ऐसा क्यों है कि अधिकांश लोग अपने आप को नकारात्मकता से नहीं हटा सकते हैं? क्या उत्तर हमेशा निराशाजनक संभावनाओं के कारण नहीं है? जैसे ही परमेश्वर के कथनों को जारी किया जाता है, तुम लोग यह देखने के लिए हड़बड़ी करते हो कि तुम्हारी हैसियत और पहचान वास्तव में क्या हैं। तुम लोग हैसियत और पहचान को प्राथमिक स्थान देते हो, और दर्शन को दूसरे स्थान पर रख देते हो। तीसरे स्थान पर वह है “जिसमें तुम लोगों को प्रवेश पाना चाहिए”, और चौथे स्थान पर परमेश्वर की वर्तमान इच्छा है। तुम लोग सबसे पहले देखते हो कि क्या परमेश्वर द्वारा तुम लोगों को दी गई “विषमताओं” की उपाधि बदल गई है या नहीं। तुम लोग बार-बार पढ़ते हो, और जब तुम लोग देखते हो कि “विषमता” की उपाधि हटा दी गई है, तो तुम लोग खुश हो जाते हो और परमेश्वर का बहुत धन्यवाद करते हो और उसकी महान सामर्थ्य की स्तुति करते हो। लेकिन यदि तुम देखते हो कि तुम लोग अभी भी विषमता हो, तो तुम लोग तुरंत परेशान हो जाते हो और तुम लोगों के हृदय में कोई प्रेरणा तुरंत गायब हो जाती है। जितना अधिक तू इस तरह से तलाश करेगी उतना ही कम तू पाएगी। हैसियत के लिए किसी व्यक्ति की अभिलाषा जितनी अधिक होगी, उतनी ही गंभीरता से उसके साथ निपटा जाना होगा उतने ही अधिक बड़े शुद्धिकरण से उसे अवश्य गुजरना होगा। इस तरह के लोग व्यर्थ हैं! उसके द्वारा इन चीज़ों को पूरी तरह से छोड़ दिए जाने के उद्देश से उसके साथ पर्याप्त रूप से निपटा और उसका ठीक से न्याय अवश्य किया जाना चाहिए। यदि तुम लोग अंत तक इस तरह से अनुकरण करते हो, तो तुम लोग कुछ भी नहीं पाओगे। जो लोग जीवन का अनुकरण नहीं करते हैं वे रूपान्तरित नहीं किए जा सकते हैं; जिन्हें सच्चाई की प्यास नहीं है वे सच्चाई को प्राप्त नहीं कर सकते हैं। तू व्यक्तिगत रूपान्तरण का अनुकरण करने और प्रवेश पर ध्यान केन्द्रित नहीं करती है; बल्कि इसके बजाय तू हमेशा उन अनावश्यक अभिलाषाओं और उन चीज़ों पर ध्यान केंद्रित करती है जो परमेश्वर के लिए तेरे प्रेम को बाधित करती हैं और तुझे उसके करीब आने से रोकती हैं। क्या वे चीजें तुझे रूपान्तरित कर सकती हैं? क्या वे तुझे राज्य में ला सकती हैं? यदि तेरी खोज का उद्देश्य सच्चाई की तलाश करना नहीं है, तब तू इस अवसर का लाभ भी उठा सकती है और इसकी सफलता का प्रयास करने के लिए दुनिया में लौट सकती है। तेरा समय वास्तव में इस तरह से बर्बाद करने योग्य नहीं है—क्यों अपने आप को यातना देती है? क्या यह सच नहीं है कि तू सुंदर दुनिया में सभी प्रकार की चीजों का आनंद उठा सकती है? धन, खूबसूरत महिलाएँ, हैसियत, घमंड, परिवार, बच्चे, इत्यादि—क्या दुनिया के ये सभी उत्पाद वे सर्वोत्तम चीजें नहीं हैं जिनका तू आनंद ले सकती है? एक ऐसे स्थान की खोज में जहाँ तू खुश रह सकती है यहाँ इधर-उधर भटकने का क्या उपयोग है? मनुष्य के पुत्र को अपना सिर रखने के लिए कहीं जगह नहीं है, तो तुझे आराम की जगह कैसे मिल सकती है? वह तेरे लिए आराम की एक सुन्दर जगह कैसे बना सकता है? क्या यह संभव है? मेरे न्याय के अतिरिक्त, आज तू केवल सत्य पर शिक्षाएँ प्राप्त कर सकती है। तू मुझ से आराम प्राप्त नहीं कर सकती है और तू उस सुखद आशियाने को प्राप्त नहीं कर सकती है जिसके बारे में तू दिन-रात सोचती रहती है। मैं तुझे दुनिया की दौलत प्रदान नहीं करूँगा। यदि तू निष्कपटता से अनुसरण करती है, तो मैं तुझे संपूर्णता में जीवन का मार्ग देने, तुझे पानी में वापिस आयी एक मछली की तरह स्वीकार करने के लिए तैयार हूँ। यदि तू निष्कपटता से अनुसरण नहीं करती है, तो मैं यह सब वापस ले लूँगा। मैं अपने मुँह के वचनों को उन्हें देने को तैयार नहीं हूँ जो आराम के लालची हैं, जो बिल्कुल सूअरों और कुत्तों जैसे हैं!

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