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अंतिम दिनों के मसीह के कथन - संकलन

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अंतिम दिनों के मसीह के कथन - संकलन

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वचन देह में प्रकट होता है से आगे जारी

समय गुज़रा, और पलक झपकते ही आज का दिन आ गया है। मेरे आत्मा के मार्गदर्शन में, सभी लोग मेरे प्रकाश के बीच में रहते हैं, और कोई भी अतीत के बारे में अब और नहीं सोचता है या बीते कल पर अब और ध्यान नहीं देता है। कौन वर्तमान दिन में कभी नहीं रहा है? किसने राज्य में खुबसूरत दिनों और महिनों को नहीं बिताया है? कौन सूर्य के नीचे नहीं रहा है? यद्यपि, राज्य लोगों के बीच उतर चुका है, फिर भी किसी ने भी वास्तव में उसकी गर्मी को महसूस नहीं किया है; मनुष्य इसके सार को नहीं समझते हुए इसे केवल बाहरी तौर पर ही समझता है। जब मेरा राज्य आकार लेता है उस दौरान, कौन उसकी वजह से खुश नहीं होता है? क्या पृथ्वी के राष्ट्र वास्तव में बच निकल सकते हैं? क्या बड़ा लाल अजगर अपनी धूर्तता के कारण वास्तव में बच निकलने में समर्थ है? मेरी प्राशसनिक आज्ञाएँ पूरे विश्व में घोषित की जाती हैं, और वे सभी लोगों के बीच मेरा अधिकार स्थापित करती हैं, और विश्व भर में प्रभावी होती है; तथापि, मनुष्य ने सच में इसे कभी नहीं जाना है। जब मेरी प्राशसनिक आज्ञाएँ विश्व के सामने प्रकट होती हैं तो ऐसा उस समय होता है जब मेरा कार्य भी पृथ्वी पर पूरा होने ही वाला होता है। जब मैं सभी मनुष्यों के बीच शासन करता हूँ और अपनी सामर्थ्य को काम में लाता हूँ और जब मैं एकमात्र परमेश्वर स्वयं के रूप में पहचान लिया जाता हूँ, तो मेरा राज्य पृथ्वी पर पूरी तरह से उतर जाता है। आज, सभी लोगों की एक नए पथ पर एक नई शुरुआत है। इन्होंने एक नए जीवन की शुरुआत की है, फिर भी किसी ने भी कभी भी पृथ्वी पर स्वर्ग के सदृश्य जीवन का वास्तव में अनुभव नहीं किया है। क्या तुम लोग सच में मेरे प्रकाश के मध्य रहते हो? क्या तुम लोग सच में मेरे वचनों के बीच जीते हो? कौन अपनी स्वयं की संभावनाओं पर विचार नहीं करता है? कौन अपने स्वयं के भाग्य द्वारा व्यथित नहीं है? कौन दुःखों के सागर के बीच संघर्ष नहीं करता है? कौन स्वयं को मुक्त करना नहीं चाहता है? क्या राज्य के आशीष पृथ्वी पर मनुष्य के कड़े परिश्रम के बदले में हैं? क्या मनुष्य जैसा चाहता है उसके अनुसार उसकी सभी इच्छाएँ पूरी की जा सकती हैं? मैंने एक बार मनुष्य के सामने राज्य का एक सुन्दर दृश्य प्रस्तुत किया था, तब भी उसने मात्र लालच भरी निगाहों से उसे घूरा था और वहाँ कोई नहीं था जो सच में उसमें प्रवेश करने की आकांक्षा रखता था? मैंने एक बार मनुष्य को पृथ्वी की सच्ची स्थिति से "अवगत" कराया था, किन्तु उसने सुनने से अधिक कुछ नहीं किया, और उसने हृदय से उन वचनों का सामना नहीं किया जो मेरे मुँह से निकले थे; मैंने एक बार मनुष्य को स्वर्ग की परिस्थितियों के बारे में बताया था, तब भी उसने मेरे वचनों को अद्भुत कहानियों के रूप में माना, और उसे वास्तव में स्वीकार नहीं किया जो मेरे मुँह के द्वारा वर्णन किया गया था। आज, राज्य के दृश्य मनुष्यों के बीच कौंधते हैं, किन्तु क्या कभी किसी ने उसकी खोज में "शिखरों और घाटियों को पार किया है?" मेरी प्रेरणा के बिना, मनुष्य अभी भी अपने स्वप्नों से भी नहीं जागा होता। क्या वह पृथ्वी पर अपने जीवन द्वारा वास्तव में बहुत वशीभूत है? क्या सच में उनके हृदय में कोई ऊँचे मानक नहीं हैं?

जिन्हें मैंने अपने लोगों के रूप में पहले से ही नियत कर दिया है वे अपने आपको मेरे प्रति समर्पित करने और वे मेरे साथ समरसता में रहने में समर्थ हैं। वे मेरी दृष्टी में बहुमूल्य हैं, और मेरे राज्य में मेरे लिए प्रेम के साथ चमकते हैं। आज के लोगों में, कौन ऐसी शर्तों को पूरा करता है? कौन मेरी अपेक्षाओं के अनुसार उस दर्जे तक पहुँचने में समर्थ है? क्या मेरी अपेक्षाएँ वास्तव में मनुष्य के लिए कठिनाईयाँ पैदा करती हैं? क्या मैं जानबूझकर उससे ग़लतियाँ करवाता हूँ? मैं सभी लोगों के प्रति उदार हूँ, और मैं उनसे वरीयता वाला व्यवहार करता हूँ। हालाँकि, यह सिर्फ चीन में मेरे लोगों के प्रति है। ऐसा नहीं है कि मैं तुम लोगों को कम आँकता हूँ, न ही मैं तुम लोगों की तरफदारी करता हूँ, बल्कि मैं तुम लोगों के प्रति व्यावहारिक और यथार्थवादी हूँ। लोग अपरिहार्य रूप से अपने जीवन में नाकामयाबी का सामना करते हैं, चाहे परिवार के सम्बन्ध में हो या विस्तृत संसार के सम्बन्ध में हो। फिर भी किसकी कठिनाई उसके स्वयं के हाथों के द्वारा व्यवस्थित की गई है? मनुष्य मुझे जानने में अक्षम है? उसके पास मेरे बाहरी रूप की कुछ समझ है, फिर भी वह मेरे सार से अनभिज्ञ है; वह उस भोजन के अवयवों को नहीं जानता है जिसे वह खाता है। कौन मेरे हृदय को सावधानी से महसूस कर सकता है? कौन मेरे सामने मेरी इच्छा को सचमुच समझने में समर्थ है? जब मैं पृथ्वी पर उतरा, उस समय यह अंधकार से आच्छादित है और मनुष्य "गहरी नींद में पड़ा हुआ है।" मैं सभी जगहों पर चला, और वह सब कुछ जो मैं देखता हूँ वह कटा फटा और जीर्ण-शीर्ण है और उस पर दृष्टी डालना असहनीय है। यह ऐसा है मानो कि मनुष्य केवल आनन्द लेना चाहता है, और उसकी "बाहरी संसार से चीज़ों" पर ध्यान देने की कोई इच्छा नहीं है। सभी लोगों के जाने बिना, मैं सारी पृथ्वी का सर्वेक्षण करता हूँ, फिर भी मैं ऐसी कोई भी जगह नहीं देखता हूँ जो जीवन से भरपूर हो। सीधे तौर पर, मैं अपने प्रकाश को चमकाता हूँ और गर्माहट देता हूँ और तीसरे स्वर्ग से पृथ्वी पर दृष्टि डालता हूँ। यद्यपि प्रकाश भूमि पर पड़ता है और गर्माहट उसके ऊपर फैल जाती है, फिर भी केवल प्रकाश और गर्माहट ही आनंन्दित करने वाले प्रतीत होते हैं; वे मनुष्य में कुछ भी उत्पन्न नहीं करते हैं, जो आराम में मौज मना रहा है। इसे देखते हुए, मैं तुरन्त ही मनुष्य के बीच उस "लाठी" को प्रदान करता हूँ जिसे मैंने तैयार किया है। जैसे ही लाठी पड़ती है, प्रकाश और गर्माहट धीरे-धीरे बिखर जाता है और पृथ्वी तुरंत उजाड़ और अंधेरी हो जाती है—और अंधकार के कारण, मनुष्य का आनंद लेते रहने का अवसर ज़ब्त हो जाता है। मनुष्य को मेरी लाठी के आने का थोड़ा अनुभव तो होता है, किन्तु वह प्रतिक्रिया नहीं करता है, और वह पृथ्वी पर आशीषों का आनन्द लेने में लगा रहता है। उसके बाद, मेरे मुँह से सभी मनुष्यों की ताड़ना की घोषणा होती है, और संपूर्ण विश्व के लोगों को उल्टा करके सलीब पर चढ़ा दिया जाता है। जब मेरी ताड़ना आती है, तो मनुष्य लुढ़कते हुए पहाड़ों और धरती के फटने के शोर से काँप जाता है। भौंचक्का हो कर जाग कर, वह हक्का-बक्का और भयभीत हो जाता है, और भाग जाना चाहता है, परन्तु बहुत देर हो चुकी है। जैसे ही मेरी ताड़ना पड़ती है, मेरा राज्य पृथ्वी के ऊपर उतर जाता है और सभी राष्ट्रों को टुकड़ों में चूर-चूर कर दिया जाता है, और वे बिना किसी नामोनिशान के विलुप्त हो जाते हैं और पीछे कुछ नहीं छूटता है।

हर दिन मैं विश्व के चेहरे को निहारता हूँ, और हर दिन मैं मनुष्य के मध्य अपना नया कार्य करता हूँ। फिर भी सभी लोग "निस्स्वार्थ भाव से काम कर रहे हैं," और कोई भी मेरे काम की गतिशीलता पर ध्यान नहीं देता है या उन चीज़ों की अवस्था के बारे में ध्यान नहीं देता है जो उनसे परे हैं। यह ऐसा है मानो कि लोग अपने बनाए हुए किसी नए स्वर्ग और किसी नई पृथ्वी में रहते हैं, और नहीं चाहते हैं कि कोई अन्य हस्तक्षेप करे। वे सभी अपने आपको आनन्दित करने के काम में लगे हैं, जब वे अपने "शारीरिक व्यायाम" करते हैं तो वे सभी अपने आपकी प्रशंसा करते हैं। क्या वास्तव में मनुष्य के हृदय में मेरा कोई स्थान नहीं है? क्या मैं वास्तव में मनुष्य के हृदय का शासक होने में अक्षम हूँ? क्या मनुष्य की आत्मा ने वास्तव में उसे छोड़ दिया है? किसने कभी मेरे मुँह के वचनों पर वास्तव में मनन किया है? किसने कभी मेरे हृदय की इच्छा को महसूस किया है? क्या मनुष्य के हृदय पर वास्तव में किसी और चीज़ के द्वारा कब्जा कर लिया गया है? कई बार ऐसा हुआ है कि मैं मनुष्य पर जोर से चीखा हूँ, फिर भी क्या कभी किसी ने संवेदना महसूस की है? क्या कभी कोई मानवजाति में रहा है? मनुष्य शरीर में रह सकता है, किन्तु वह मानवता के बिना है। क्या वह जानवरों के संसार में पैदा हुआ था? या क्या वह स्वर्ग में पैदा हुआ था, और दिव्यता से सम्पन्न है? मैं मनुष्य से अपेक्षाएँ करता हूँ, फिर भी यह ऐसा है मानो कि वह मेरे वचनों को नहीं समझता है, मानो कि मैं पहुँच से बाहर कोई दानव हूँ जो उसके लिए अन्य-देशीय है। कई बार मैं मनुष्य के द्वारा निराश किया गया हूँ, कई बार मैं उसके ख़राब प्रदर्शन से क्रोधित हुआ हूँ, और कई बार मैं उसकी कमज़ोरियों से व्यथित हुआ हूँ। मैं मनुष्य के हृदय में आध्यात्मिक भावना क्यों नहीं जगाऊँ? मैं मनुष्य के हृदय में प्रेम को प्रेरित क्यों नहीं करूँ? मनुष्य मेरे साथ अपनी आँख के तारे के समान व्यवहार करने का अनिच्छुक क्यों है? क्या मनुष्य का हृदय उसका स्वयं का नहीं है? क्या किसी और चीज़ ने उसकी आत्मा में निवास कर लिया है? मनुष्य बिना रूके विलाप क्यों करता रहता है? वह दयनीय क्यों है? जब वह दुःखी होता है, तब क्यों मेरे अस्तित्व की उपेक्षा करता है? क्या मैं उसे छुरा घोंपता हूँ? क्या मैंने जानबूझकर उसका परित्याग किया है?

मेरी नज़रों में, मनुष्य सभी चीज़ों का शासक है। मैंने उसे कम मात्रा में अधिकार नहीं दिया है, उसे पृथ्वी पर सभी चीज़ों—पहाड़ो के ऊपर की घास, जंगलों के बीच जानवरों, और जल की मछलियों—का प्रबन्ध करने की अनुमति दी है। फिर भी इसकी वजह से खुश होने के बजाए, मनुष्य चिंता से व्याकुल है। उसका पूरा जीवन एक मनस्ताप का, और वह यहाँ-वहाँ भागने का, और खालीपन में कुछ मौज मस्ती जोड़ने का है, और उसके पूरे जीवन में कोई नए अविष्कार और नई रचनाएँ नहीं हैं। कोई भी अपने आप को इस खोखले जीवन से छुड़ाने में समर्थ नहीं है, किसी ने कभी भी सार्थक जीवन की खोज नहीं की है, और किसी ने कभी भी एक वास्तविक जीवन का अनुभव नहीं किया है। यद्यपि आज सभी लोग मेरे चमकते हुए प्रकाश के नीचे जीवन बिताते हैं, फिर भी वे स्वर्ग के जीवन के बारे में कुछ नहीं जानते हैं। यदि मैं मनुष्य के प्रति दयालु नहीं हूँ और मनुष्य को नहीं बचाता हूँ, तो सभी लोग व्यर्थ में आए हैं, पृथ्वी पर उनके जीवन का कोई अर्थ नहीं है, और वे व्यर्थ में चले जाएँगे, और उनके पास गर्व करने के लिए कुछ नहीं होगा। हर पंथ, समाज के हर वर्ग, हर राष्ट्र, और हर सम्प्रदाय के सभी लोग पृथ्वी पर खालीपन को जानते हैं, और वे सभी मुझे खोजते हैं और मेरी वापसी का इन्तज़ार करते हैं—फिर भी जब मैं आता हूँ तो कौन मुझे जानने में सक्षम है? मैंने सभी चीज़ों को बनाया, मैंने मानवजाति को बनाया, और आज मैं मनुष्य के बीच उतर गया हूँ। हालाँकि, मनुष्य पलटकर मुझ पर वार करता है, और मुझ से बदला लेता है। क्या जो कार्य मैं मनुष्य पर करता हूँ वह उसके किसी लाभ का नहीं है? क्या मैं वास्तव में मनुष्य को संतुष्ट करने में अक्षम हूँ? मनुष्य मुझे अस्वीकार क्यों करता है? मनुष्य मेरे प्रति इतना निरूत्साहित और उदासीन क्यों है? पृथ्वी लाशों से क्यों भरी हुई है? क्या वास्तव में संसार की स्थिति ऐसी ही है जिसे मैंने मनुष्य के लिए बनाया था? ऐसा क्यों हैं कि मैंने मनुष्य को अतुलनीय समृद्धि दी है, फिर भी वह बदले में मुझे दो खाली हाथ प्रदान करता है? मनुष्य मुझसे सचमुच में प्रेम क्यों नहीं करता है? वह कभी भी मेरे सामने क्यों नहीं आता है? क्या मेरे सारे वचन वास्तव में व्यर्थ हैं? क्या मेरे वचन पानी में से गर्मी की तरह ग़ायब हो गए हैं? क्यों मनुष्य मेरे साथ सहयोग करने का अनिच्छुक है? क्या मेरे आगमन का दिन मनुष्य के लिए वास्तव में मृत्यु का दिन है? क्या मैं वास्तव में उस समय मनुष्य को नष्ट कर सकता हूँ जब मेरे राज्य का गठन होता है? मेरी प्रबन्धन योजना के दौरान, क्यों कभी भी किसी ने मेरे इरादों को नहीं समझा है? क्यों मनुष्य मेरे मुँह के वचनों को सँजोने के बजाए, उनसे घृणा करता है और उन्हें अस्वीकार करता है? मैं किसी की भी निंदा नहीं करता हूँ, परन्तु मात्र सभी लोगों को शांत करवाता हूँ और उनसे आत्म-चिंतन का कार्य करवाता हूँ।

27 मार्च 1992

अंतिम दिनों के मसीह के कथन - संकलन

केवल वह जो परमेश्वर के कार्य को अनुभव करता है वही परमेवर में सच में विश्वास करता है परमेश्वर का प्रकटीकरण एक नया युग लाया है केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है सात गर्जनाएँ – भविष्यवाणी करती हैं कि राज्य के सुसमाचार पूरे ब्रह्माण्ड में फैल जाएंगे उद्धारकर्त्ता पहले से ही एक "सफेद बादल" पर सवार होकर वापस आ चुका है जब तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देख रहे होगे ऐसा तब होगा जब परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नये सिरे से बना चुका होगा वे जो मसीह से असंगत हैं निश्चय ही परमेश्वर के विरोधी हैं बुलाए हुए बहुत हैं, परन्तु चुने हुए कुछ ही हैं तुम्हें मसीह की अनुकूलता में होने के तरीके की खोज करनी चाहिए मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है क्या तुम जानते हो? परमेश्वर ने मनुष्यों के बीच एक बहुत बड़ा काम किया है केवल अंतिम दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनन्त जीवन का मार्ग दे सकता है अपनी मंज़िल के लिए तुम्हें अच्छे कर्मों की पर्याप्तता की तैयारी करनी चाहिए तुम किस के प्रति वफादार हो? पृथ्वी के परमेश्वर को कैसे जानें परमेश्वर मनुष्य के जीवन का स्रोत है सर्वशक्तिमान का आह भरना तुम लोगों को अपने कार्यों पर विचार करना चाहिए भ्रष्ट मनुष्य परमेश्वर का प्रतिनिधित्व करने में अक्षम है विश्वासियों को क्या दृष्टिकोण रखना चाहिए परमेश्वर में अपने विश्वास में तुम्हें परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन करना चाहिए प्रतिज्ञाएं उनके लिए जो पूर्ण बनाए जा चुके हैं दुष्ट को दण्ड अवश्य दिया जाना चाहिए वास्तविकता को कैसे जानें परमेश्वर की इच्छा की समरसता में सेवा कैसे करें सहस्राब्दि राज्य आ चुका है तुम्हें पता होना चाहिए कि व्यावहारिक परमेश्वर ही स्वयं परमेश्वर है आज परमेश्वर के कार्य को जानना क्या परमेश्वर का कार्य इतना सरल है, जितना मनुष्य कल्पना करता है? तुम्हें सत्य के लिए जीना चाहिए क्योंकि तुम्हें परमेश्वर में विश्वास है परमेश्वर पर विश्वास करना वास्तविकता पर केंद्रित होना चाहिए, न कि धार्मिक रीति-रिवाजों पर जो आज परमेश्वर के कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर की सेवा कर सकते हैं जो सच्चे हृदय से परमेश्वर के आज्ञाकारी हैं वे निश्चित रूप से परमेश्वर के द्वारा ग्रहण किए जाएँगे राज्य का युग वचन का युग है भाग एक राज्य का युग वचन का युग ह भाग दो "सहस्राब्दि राज्य आ चुका है" के बारे में एक संक्षिप्त वार्ता वे सब जो परमेश्वर को नहीं जानते हैं वे ही परमेश्वर का विरोध करते हैं क्या त्रित्व का अस्तित्व है? भाग एक क्या त्रित्व का अस्तित्व है? भाग दो जब परमेश्वर की बात आती है, तो तुम्हारी समझ क्या होती है एक वास्तविक मनुष्य होने का क्या अर्थ है तुम विश्वास के विषय में क्या जानते हो? देहधारियों में से कोई भी कोप के दिन से नहीं बच सकता है सुसमाचार को फैलाने का कार्य मनुष्यों को बचाने का कार्य भी है व्यवस्था के युग में कार्य छुटकारे के युग में कार्य के पीछे की सच्ची कहानी तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई भाग एक तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई भाग दो पद नामों एवं पहचान के सम्बन्ध में भाग एक पद नामों एवं पहचान के सम्बन्ध में भाग दो वह मनुष्य किस प्रकार परमेश्वर के प्रकटनों को प्राप्त कर सकता है जिसने उसे अपनी ही धारणाओं में परिभाषित किया है? जो परमेश्वर को और उसके कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर को सन्तुष्ट कर सकते हैं देहधारी परमेश्वर की सेवकाई और मनुष्य के कर्तव्य के बीच अंतर भाग दो देहधारी परमेश्वर की सेवकाई और मनुष्य के कर्तव्य के बीच अंतर भाग एक परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम भाग एक परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम भाग दो परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम भाग तीन परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है (भाग दो) परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है (भाग एक) भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है भाग एक भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है भाग दो भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है भाग तीन परमेश्वर द्वारा आवासित देह का सार भाग एक परमेश्वर द्वारा आवासित देह का सार भाग दो परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार भाग एक परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार भाग दो परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार भाग तीन स्वर्गिक परमपिता की इच्छा के प्रति आज्ञाकारिता ही मसीह का वास्तविक सार है मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग एक मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग दो मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग तीन परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे भाग एक परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे भाग दो संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सातवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - आठवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - नौवाँ कथन नये युग की आज्ञाएँ संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - ग्यारहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - तेरहवाँ कथन दस प्रशासनिक आज्ञाएँ जिनका परमेश्वर के चयनित लोगों द्वारा राज्य के युग में पालन अवश्य किया जाना चाहिए क्या आप जाग उठे हैं? देहधारण के महत्व को दो देहधारण पूरा करते हैं परमेश्वर के वचन के द्वारा सब कुछ प्राप्त हो जाता है भाग एक पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान भाग एक क्या तुम परमेश्वर के एक सच्चे विश्वासी हो? केवल पूर्ण बनाया गया ही एक सार्थक जीवन जी सकता है संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - बारहवाँ कथन तुझे अपने भविष्य मिशन से कैसे निपटना चाहिए "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग चार "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग तीन देहधारी परमेश्वर और परमेश्वर द्वारा उपयोग किए गए लोगों के बीच महत्वपूर्ण अंतर संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - बीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - दसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - चौदहवाँ कथन "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग छे: "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग पांच केवल वही जो परमेश्वर को जानते हैं, उसकी गवाही दे सकते हैं संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - छठवाँ कथन एक अपरिवर्तित स्वभाव का होना परमेश्वर के साथ शत्रुता होना है पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान भाग दो पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान भाग तीन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - पन्द्रहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - अठारहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - उन्नीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - अट्ठाइसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सत्रहवाँ कथन "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो परमेश्वर से प्रेम करने वाले लोग हमेशा के लिए उसके प्रकाश में रहेंगे सफलता या असफलता उस पथ पर निर्भर होती है जिस पर मनुष्य चलता है भाग एक सफलता या असफलता उस पथ पर निर्भर होती है जिस पर मनुष्य चलता है भाग दो "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक "परमेश्वर के काम का दर्शन" पर परमेश्वर के वचन के तीन अंशों से संकलन भाग दो "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग चार तीन चेतावनियाँ संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - चौथा कथन परमेश्वर के स्वभाव को समझना अति महत्वपूर्ण है "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग तीन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सत्ताईसवाँ कथन "परमेश्वर के काम का दर्शन" पर परमेश्वर के वचन के तीन अंशों से संकलन भाग एक संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - पाँचवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - पच्चीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - तेइसवाँ कथन "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - इक्कीसवाँ कथन सेवा के धार्मिक तरीके पर अवश्य प्रतिबंध लगना चाहिए परमेश्वर सम्पूर्ण सृष्टि का प्रभु है परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है पतरस ने यीशु को कैसे जाना "जीतने वाले कार्य का भीतरी सत्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो भाग दो संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सोलहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - चैबीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - छब्बीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - बाईसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - उन्तीसवाँ कथन परमेश्वर के प्रकटन को उनके न्याय और ताड़ना में देखना "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो "जीतने वाले कार्य का भीतरी सत्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग तीन "बाइबल के विषय में" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो "जीतने वाले कार्य का भीतरी सत्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक "बाइबल के विषय में" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक

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