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अंतिम दिनों के मसीह के कथन - संकलन

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अंतिम दिनों के मसीह के कथन - संकलन

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वचन देह में प्रकट होता है से आगे जारी

मेरी ताड़नाएँ सभी लोगों पर आती हैं, फिर भी यह सभी लोगों से दूर भी रहती हैं। हर व्यक्ति का संपूर्ण जीवन मेरे प्रति प्रेम और नफ़रत से भरा हुआ है, और किसी ने भी मुझे कभी नहीं जाना है—और इस प्रकार मेरे प्रति मनुष्य की प्रवृत्ति कभी हाँ कभी ना करना की होती है, और सामान्य होने में अक्षम है। फिर भी मैंने हमेशा से मनुष्य की परवाह और सुरक्षा की है। यह केवल उसकी मूर्खता के कारण है कि वह मेरे सभी कर्मों को देखने और मेरे प्रबल अभिप्रायों को समझने में असमर्थ है। मैं सभी देशों में अग्रणी हूँ, और सभी लोगों में सबसे श्रेष्ठ हूँ। यह बस इतना ही है कि मनुष्य मुझे नहीं जानता है। बहुत सालों तक मैंने मनुष्य के बीच जीवन बिताया है और मनुष्य के संसार में जीवन का अनुभव किया है, फिर भी उसने हमेशा मेरी उपेक्षा की है और मुझ से बाहरी अंतरिक्ष के प्राणी के समान व्यवहार किया है। परिणामस्वरूप, स्वभाव और भाषा में भिन्नता के कारण, लोग मुझ से सड़क के एक अजनबी के समान व्यवहार करते हैं। ऐसा प्रतीत होता है, कि मेरा पहनावा भी अनोखा है; जिसके परिणामस्वरूप मेरे पास पहुँचने के लिए मनुष्य में आत्म विश्वास का अभाव है। केवल तभी मैं मनुष्य के बीच जीवन की वीरानी महसूस करता हूँ, और केवल केवल तभी मैं मनुष्य के संसार के अन्याय को समझता हूँ? मैं राहगीरों के बीच चलता हूँ, और उन सब के चेहरों को देखता हूँ। यह ऐसा है मानो कि वे किसी बीमारी के बीच रहते हैं जो उनके चेहरों को अवसाद से, और ताड़ना के बीच भर देती है, जो उनकी मुक्ति को रोकती है। मनुष्य अपने आपको जंजीरों में बाँधता है, और स्वयं का तिरस्कार करता है। अधिकांश लोग मेरे सामने अपने आपके बारे में एक ग़लत धारणा बनाते हैं ताकि मैं उनकी प्रशंसा करूँ, और अधिकांश लोग जानबूझ कर अपने आपको मेरे सामने दयनीय दिखाते हैं ताकि उन्हें मेरी सहायता प्राप्त हो सके। मेरी पीठ पीछे, सभी लोग मुझे धोखा देते हैं और मेरी अवज्ञा करते हैं। क्या मैं सही नहीं हूँ? क्या यह मनुष्य के जीवित बचे रहने की रणनीति नहीं है? किसने कभी भी अपने जीवन में मुझे जीया है? किस ने कभी भी मुझे दूसरों के बीच बड़ा ठहराया है? कौन कभी भी पवित्रात्मा के सामने बँधा रहा है? कौन शैतान के सामने मेरे लिए अपनी गवाही देने में कभी भी अडिग रहा है? किसने मेरे प्रति "वफ़ादारी" में कभी भी सत्यनिष्ठा मिलायी है? किसे कभी भी मेरे कारण बड़े लाल अजगर के द्वारा निकाला गया है? लोगों ने शैतान के साथ अपने जीवन को दृढ़ता से जोड़ लिया है, वे मेरी अवज्ञा करने में विशेषज्ञ हैं, वे मेरे प्रति विरोध के अविष्कारक हैं, और वे मेरे साथ टाल-मटोल करने में स्नातक हैं। अपनी स्वयं की नियति के लिए, मनुष्य पृथ्वी पर यहाँ वहाँ खोजता फिरता है; जब मैं उसे संकेत करता हूँ, तो वह मेरी उत्कृष्टता के प्रति असंवेदनशील रहता है और स्वयं के ऊपर अपने विश्वास पर भरोसा करता रहता है, और दूसरों पर बोझ बनने का अनिच्छुक रहता है। मनुष्य की अभिलाषाएँ बहुमूल्य हैं, फिर भी किसी की अभिलाषाओं ने कभी भी पूर्ण अंक प्राप्त नहीं किए हैं: वे सभी मेरे सामने, खामोशी से लुढ़क कर, चूर-चूर हो जाते हैं।

मैं प्रति दिन बात करता हूँ, और प्रति दिन नई चीज़ों को भी करता हूँ। यदि मनुष्य अपनी पूरी ताक़त नहीं जुटाता है तो मेरी आवाज़ को सुनने में उसे कठिनाई होगी, और मेरा चेहरा देखने में उसे कठिनाई होगी। प्रियतम सकुशल हो सकता है, और उसकी वाणी कोमल हो सकती है, परन्तु मनुष्य आसानी से उसके महिमामय चेहरे को देखने और उसकी वाणी को सुनने में असमर्थ है। युगों-युगों से, किसी ने भी कभी भी आसानी से मेरे चोहरे को नहीं देखा है। एक बार मैंने पतरस से बात की थी और पौलुस के सामने प्रकट हुआ था, और किसी भी अन्य ने—इस्राएलियों के अपवाद के साथ—वास्तव में मेरे चेहरे को नहीं देखा है। आज, मैं व्यक्तिगत रूप से मनुष्य के बीच उसके साथ रहने के लिए आ गया हूँ। क्या यह तुम लोगों को अत्यंत दुर्लभ और बहुमूल्य प्रतीत नहीं होता है? क्या तुम लोग अपने समय का सबसे बेहतरीन उपयोग नहीं करना चाहते हो? क्या तुम लोग इसे ऐसे ही गुजरने देना चाहते हो? क्या लोगों के मन की घड़ी की सुइयाँ अचानक रुक सकती हैं? या क्या समय वापस लौट सकता है? या क्या मनुष्य फिर से जवान बन सकता है? क्या आज का धन्य जीवन कभी दोबारा आ सकता है? मैं मनुष्य को उसकी "व्यर्थता" के लिए उचित "पुरस्कार" नहीं देता हूँ। मैं, अन्य सभी से अनासक्त, मात्र अपने कार्य में लगा रहता हूँ, और मनुष्य की व्यस्तता की वजह से, या उसके रोने की आवाज़ की वजह से, समय के प्रवाह को नहीं रोकता हूँ। कई हज़ार सालों से, कोई भी मेरी ताक़त को विभाजित करने में सक्षम नहीं हुआ है, और कोई भी मेरी मूल योजना को अस्तव्यस्त करने में समर्थ नहीं हुआ है। मैं अंतिरिक्ष से आगे बढ़ जाऊँगा, और युगों को पाट दूँगा, और सभी चीज़ों से ऊपर और सभी चीजों में दोनों में अपनी सम्पूर्ण योजना के मूल को आरम्भ करूँगा। कोई भी मुझ से विशेष व्यवहार प्राप्त करने में समर्थ नहीं हुआ है, और कोई भी मेरे हाथों से "पुरस्कार" प्राप्त करने में समर्थ नहीं हुआ है। और भले ही लोगों ने अपने मुँह खोले दिए हैं और मुझसे प्रार्थना की है, फिर भी, अन्य सभी बातों से असावधान, उन्होंने मुझसे माँग करने के लिए हाथों को पसार दिया है, परन्तु उनमें से किसी ने मुझे प्रभावित नहीं किया है, और उन सभी को मेरी "निर्मम" आवाज़ के द्वारा पीछे धकेल दिया गया है। अधिकांश लोग अभी भी विश्वास करते हैं कि वे "बहुत कम उम्र के हैं" और इसलिए मेरे द्वारा महान दया दिखाए जाने की, उनके प्रति दूसरी बार करुणामय होने की, प्रतीक्षा करते हैं, और वे कहते हैं कि मैं उन्हें पिछले दरवाज़े से आने की अनुमति दे दूँ। फिर भी मैं कैसे अपनी मूल योजना में अकस्मात् ही कोई हस्तक्षेप कर सकता हूँ? क्या मैं मनुष्य के यौवन के वास्ते पृथ्वी का घूमना रोक दूँ, ताकि वह पृथ्वी पर कुछ और साल जीवित रह सके? मनुष्य का मस्तिष्क बहुत जटिल है, फिर भी ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ ऐसी चीजें भी हैं जिनका उसमें अभाव है। परिणामस्वरूप, अक्सर मनुष्य के मन में जानबूझ कर मेरे कार्य में हस्तक्षेप करने के लिए "अद्भुत तरीके" दिखाई देते हैं।

यद्यपि कई बार हुआ है कि मैंने मनुष्य के पापों को क्षमा किया है, और उसकी कमज़ोरी की वजह से उस पर विशेष कृपा की है, कई बार ऐसा भी हुआ है कि मैंने उसकी अज्ञानता की वजह से उसके साथ उचित व्यवहार किया है। यह बस इतना ही है कि मनुष्य ने कभी नहीं जाना है कि मेरी अनुकंपा की सराहना किस प्रकार करे, इस तरह से कि वह अपने वर्तमान अंतिम परिणाम में डूब गयाः धूल से ढका हुआ, उसके चिथड़े हुए कपड़े, उसके सिर के बाल खरपतवार की पैदावार की तरह उसके सर को ढके हुए, और उसका चेहरा कालिख से ढका हुआ, अपने पैरों में वह घर में बनाए हुए जूते पहने हुए, उसके हाथ मरे हुए गिद्ध के पंजों के समान, कमज़ोर होकर अगल-बगल में लटके हुए। जब मैं अपनी आँखों को खोलकर देखता हूँ, तो यह ऐसा प्रतीत होता है मानो कि मनुष्य अभी अथाह कुण्ड से चढ़कर ऊपर आया है। मैं क्रोधित होने के सिवाए कोई सहायता नहीं कर सकता हूँ: मैं हमेशा मनुष्य के प्रति सहनशील रहा हूँ, फिर भी मैं शैतान को उसकी इच्छा के अनुसार कैसे मेरे पवित्र राज्य में आने-जाने की अनुमति दे सकता हूँ? मैं कैसे एक भिखारी को मुफ्त में मेरे घराने में खाने की अनुमति दे सकता हूँ? मैं कैसे किसी अशुद्ध आत्मा का मेरे घराने में एक मेहमान के रूप में होना सहन कर सकता हूँ? मनुष्य हमेशा "अपने प्रति कठोर" और "दूसरों के प्रति उदार" रहा है, फिर भी वह मेरे प्रति थोड़ा भी शालीन नहीं रहा है, क्योंकि मैं स्वर्ग का परमेश्वर हूँ, इसलिए वह मेरे साथ अलग तरह से व्यवहार करता है और उसे मेरे लिए कभी भी थोड़ा सा भी स्नेह नहीं रहा है। यह ऐसा है मानो कि मनुष्य की आँखें विशेष रूप से चालाक हैं: जैसे ही वह मेरा सामना करता है, उसके चेहरे की अभिव्यंजना एकदम बदल जाती है और वह अपने उदासीन एवं भाव-शून्य चेहरे में थोड़ी अधिक अभिव्यक्ति जोड़ देता है। मेरे प्रति मनुष्य की प्रवृत्ति की वजह से मैं उस पर उचित प्रतिबंध अधिरोपित नहीं करता हूँ, बल्कि ब्रह्माण्डों के ऊपर से मात्र आसमानों को देखता हूँ और वहाँ से पृथ्वी पर अपना कार्य करता हूँ। मनुष्य की यादों में, मैंने कभी भी किसी मनुष्य पर अपनी अनुकंपा नहीं दिखाई है, किन्तु मैंने किसी से ग़लत व्यवहार भी नहीं किया है। क्योंकि मनुष्य अपने हृदय में मेरे लिए एक "खाली स्थान" नहीं छोड़ता है, इसलिए जब मैं हवा में चेतावनी भेजता हूँ और उसके अंदर रहता हूँ, तो वह अनौपचारिक ढंग से मुझे जबरदस्ती बाहर निकाल देता है, और फिर बहाने बनाने के लिए चिकनी चुपड़ी बातों और चापलूसी का उपयोग करता है, कहता है कि उसमें बहुत सी कमी हैं और मेरे आनन्द के लिए अपने आपको उपलब्ध कराने में अक्षम है। जब वह बात करता है, तो उसका चेहरा लगातार "काले बादलों" से आच्छादित हो जाता है, मानो किसी भी समय मनुष्यों के बीच विपत्ति पड़ सकती है। तब भी वह, शामिल ख़तरों के बारे में कोई भी विचार किए बिना, मुझ से चले जाने के लिए कहता है। भले ही मैं मनुष्य को अपने वचन और अपने आलिंगन की गर्मी देता हूँ, तब भी ऐसा प्रतीत होता है कि उसके पास सुनने के अंग नहीं हैं, और इसलिए वह मेरी वाणी पर थोड़ा सा भी ध्यान नहीं देता है, इसके बजाए वह अपना सिर पकड़कर भाग जाता है। मैं थोड़ा निराश, बल्कि थोड़ा कुपित भी महसूस करते हुए मनुष्य के पास से चला जाता हूँ। इस बीच मनुष्य प्रचण्ड वायु और शक्तिशाली लहरों के घातक आक्रमण के बीच विलुप्त हो जाता है। इसके बाद तुरन्त, वह मुझे पुकारता है, परन्तु वह हवा और लहरों की चालों को कैसे प्रभावित कर सकता है? धीरे-धीरे, मनुष्य का सारा नामोनिशां मिट जाता है, और उसका कहीं अता पता नही रहता है।

युगों से पहले, मैंने ब्रह्माण्डों के ऊपर से सारी भूमियों को देखा। मैंने पृथ्वी पर एक बड़े काम को करने की योजना बनाई: एक ऐसी मानवजाति सृजन जो मेरे स्वयं के हृदय के अनुकूल थी, और अपनी सामर्थ्य से आकाश को भरने और अपनी बुद्धि को पूरे विश्व में फैलने की अनुमति देते हुए, स्वर्ग के समान पृथ्वी पर एक राज्य का निर्माण करना। और इसलिए आज, हज़ारों साल बाद, मैं अपनी योजना को जारी रखता हूँ, फिर भी पृथ्वी पर कोई भी मेरी योजना और मेरे प्रबन्धन को नहीं जानता है, पृथ्वी पर मेरे राज्य के बारे में बिल्कुल भी नहीं जानता है। इसलिए, मनुष्य छायाओं का पीछा करता है, और, स्वर्ग में मेरे आशीषों के लिए एक "मूक कीमत" चुकाना चाहते हुए, मुझे मूर्ख्र बनाने का प्रयास करने के लिए मेरे सामने आता है। परिणामस्वरूप, वह मेरे कोप को भड़काता है और मैं उसके ऊपर न्याय लेकर आता हूँ, परन्तु वह तब भी नहीं जागता है। यह ऐसा है मानो कि जो भूमि के ऊपर है उससे बिलकुल अनभिज्ञ होकर, वह भूमिगत कार्य कर रहा हो, क्योंकि वह अपनी स्वयं संभावनों के अलावा अन्य कुछ नहीं खोजता है। सभी लोगों में से, मैंने कभी भी किसी को भी नहीं देखा जो मेरे चमकदार प्रकाश के नीचे रहता हो। वे अंधकार के संसार में रहते हैं, और ऐसा प्रतीत होता है कि वे उस अंधकार के बीच रहने के अभ्यस्त हो चुके हैं। जब प्रकाश आता है तो वे बहुत दूर खड़े हो जाते हैं, और यह ऐसा है मानो कि प्रकाश ने उनके कार्यों में विघ्न डाल दिया हो; परिणामस्वरूप, वे थोड़े नाराज़ दिखाई देते हैं, मानो प्रकाश ने उनकी समस्त शांति ध्वस्त कर दी हो और उन्हें गहरी नींद सोने में असमर्थ बना दिया हो। परिणामस्वरूप, मनुष्य प्रकाश को दूर भागने के लिए अपनी पूरी ताक़त का आह्वान करता है। उस प्रकाश में भी "जागरूकता" का अभाव दिखाई देता है, और इसलिए मनुष्य को नींद से जगाता है, और जब मनुष्य जाग जाता है, तो वह अपनी आँखों को बन्द कर लेता है, और क्रोध से भर जाता है। वह मुझ से कुछ-कुछ अप्रसन्न है, मगर मैं अपने हृदय में इसका कारण जानता हूँ। मैं धीरे-धीरे प्रकाश की तीव्रता को बढ़ाता हूँ, सभी लोगों को मेरे प्रकाश में रहने का कारण बनता हूँ, इतना कि वे बहुत पहले ही प्रकाश के साथ सम्बद्ध होने में दक्ष हो जाएँ, और इसके अतिरिक्त, सभी प्रकाश को सँजो कर रखें। इस समय, मेरा राज्य मनुष्य के बीच में आ चुका है, सभी लोग आनन्द के साथ नाचते हैं और उत्सव मनाते हैं, पृथ्वी अचानक हर्षोल्लास से भर जाती है, और प्रकाश के आगमन से हज़ारों वर्षों का सन्नाटा टूट जाता है...

26 मार्च 1992

अंतिम दिनों के मसीह के कथन - संकलन

केवल वह जो परमेश्वर के कार्य को अनुभव करता है वही परमेवर में सच में विश्वास करता है परमेश्वर का प्रकटीकरण एक नया युग लाया है केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है सात गर्जनाएँ – भविष्यवाणी करती हैं कि राज्य के सुसमाचार पूरे ब्रह्माण्ड में फैल जाएंगे उद्धारकर्त्ता पहले से ही एक "सफेद बादल" पर सवार होकर वापस आ चुका है जब तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देख रहे होगे ऐसा तब होगा जब परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नये सिरे से बना चुका होगा वे जो मसीह से असंगत हैं निश्चय ही परमेश्वर के विरोधी हैं बुलाए हुए बहुत हैं, परन्तु चुने हुए कुछ ही हैं तुम्हें मसीह की अनुकूलता में होने के तरीके की खोज करनी चाहिए मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है क्या तुम जानते हो? परमेश्वर ने मनुष्यों के बीच एक बहुत बड़ा काम किया है केवल अंतिम दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनन्त जीवन का मार्ग दे सकता है अपनी मंज़िल के लिए तुम्हें अच्छे कर्मों की पर्याप्तता की तैयारी करनी चाहिए तुम किस के प्रति वफादार हो? पृथ्वी के परमेश्वर को कैसे जानें परमेश्वर मनुष्य के जीवन का स्रोत है सर्वशक्तिमान का आह भरना तुम लोगों को अपने कार्यों पर विचार करना चाहिए भ्रष्ट मनुष्य परमेश्वर का प्रतिनिधित्व करने में अक्षम है विश्वासियों को क्या दृष्टिकोण रखना चाहिए परमेश्वर में अपने विश्वास में तुम्हें परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन करना चाहिए प्रतिज्ञाएं उनके लिए जो पूर्ण बनाए जा चुके हैं दुष्ट को दण्ड अवश्य दिया जाना चाहिए वास्तविकता को कैसे जानें परमेश्वर की इच्छा की समरसता में सेवा कैसे करें सहस्राब्दि राज्य आ चुका है तुम्हें पता होना चाहिए कि व्यावहारिक परमेश्वर ही स्वयं परमेश्वर है आज परमेश्वर के कार्य को जानना क्या परमेश्वर का कार्य इतना सरल है, जितना मनुष्य कल्पना करता है? तुम्हें सत्य के लिए जीना चाहिए क्योंकि तुम्हें परमेश्वर में विश्वास है परमेश्वर पर विश्वास करना वास्तविकता पर केंद्रित होना चाहिए, न कि धार्मिक रीति-रिवाजों पर जो आज परमेश्वर के कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर की सेवा कर सकते हैं जो सच्चे हृदय से परमेश्वर के आज्ञाकारी हैं वे निश्चित रूप से परमेश्वर के द्वारा ग्रहण किए जाएँगे राज्य का युग वचन का युग है भाग एक राज्य का युग वचन का युग ह भाग दो "सहस्राब्दि राज्य आ चुका है" के बारे में एक संक्षिप्त वार्ता वे सब जो परमेश्वर को नहीं जानते हैं वे ही परमेश्वर का विरोध करते हैं क्या त्रित्व का अस्तित्व है? भाग एक क्या त्रित्व का अस्तित्व है? भाग दो जब परमेश्वर की बात आती है, तो तुम्हारी समझ क्या होती है एक वास्तविक मनुष्य होने का क्या अर्थ है तुम विश्वास के विषय में क्या जानते हो? देहधारियों में से कोई भी कोप के दिन से नहीं बच सकता है सुसमाचार को फैलाने का कार्य मनुष्यों को बचाने का कार्य भी है व्यवस्था के युग में कार्य छुटकारे के युग में कार्य के पीछे की सच्ची कहानी तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई भाग एक तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई भाग दो पद नामों एवं पहचान के सम्बन्ध में भाग एक पद नामों एवं पहचान के सम्बन्ध में भाग दो वह मनुष्य किस प्रकार परमेश्वर के प्रकटनों को प्राप्त कर सकता है जिसने उसे अपनी ही धारणाओं में परिभाषित किया है? जो परमेश्वर को और उसके कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर को सन्तुष्ट कर सकते हैं देहधारी परमेश्वर की सेवकाई और मनुष्य के कर्तव्य के बीच अंतर भाग दो देहधारी परमेश्वर की सेवकाई और मनुष्य के कर्तव्य के बीच अंतर भाग एक परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम भाग एक परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम भाग दो परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम भाग तीन परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है (भाग दो) परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है (भाग एक) भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है भाग एक भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है भाग दो भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है भाग तीन परमेश्वर द्वारा आवासित देह का सार भाग एक परमेश्वर द्वारा आवासित देह का सार भाग दो परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार भाग एक परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार भाग दो परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार भाग तीन स्वर्गिक परमपिता की इच्छा के प्रति आज्ञाकारिता ही मसीह का वास्तविक सार है मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग एक मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग दो मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग तीन परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे भाग एक परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे भाग दो संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सातवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - आठवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - नौवाँ कथन नये युग की आज्ञाएँ संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - ग्यारहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - तेरहवाँ कथन दस प्रशासनिक आज्ञाएँ जिनका परमेश्वर के चयनित लोगों द्वारा राज्य के युग में पालन अवश्य किया जाना चाहिए क्या आप जाग उठे हैं? देहधारण के महत्व को दो देहधारण पूरा करते हैं परमेश्वर के वचन के द्वारा सब कुछ प्राप्त हो जाता है भाग एक पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान भाग एक क्या तुम परमेश्वर के एक सच्चे विश्वासी हो? केवल पूर्ण बनाया गया ही एक सार्थक जीवन जी सकता है संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - बारहवाँ कथन तुझे अपने भविष्य मिशन से कैसे निपटना चाहिए "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग चार "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग तीन देहधारी परमेश्वर और परमेश्वर द्वारा उपयोग किए गए लोगों के बीच महत्वपूर्ण अंतर संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - बीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - दसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - चौदहवाँ कथन "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग छे: "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग पांच केवल वही जो परमेश्वर को जानते हैं, उसकी गवाही दे सकते हैं संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - छठवाँ कथन एक अपरिवर्तित स्वभाव का होना परमेश्वर के साथ शत्रुता होना है पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान भाग दो पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान भाग तीन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - पन्द्रहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - अठारहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - उन्नीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - अट्ठाइसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सत्रहवाँ कथन "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो परमेश्वर से प्रेम करने वाले लोग हमेशा के लिए उसके प्रकाश में रहेंगे सफलता या असफलता उस पथ पर निर्भर होती है जिस पर मनुष्य चलता है भाग एक सफलता या असफलता उस पथ पर निर्भर होती है जिस पर मनुष्य चलता है भाग दो "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक "परमेश्वर के काम का दर्शन" पर परमेश्वर के वचन के तीन अंशों से संकलन भाग दो "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग चार तीन चेतावनियाँ संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - चौथा कथन परमेश्वर के स्वभाव को समझना अति महत्वपूर्ण है "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग तीन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सत्ताईसवाँ कथन "परमेश्वर के काम का दर्शन" पर परमेश्वर के वचन के तीन अंशों से संकलन भाग एक संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - पाँचवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - पच्चीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - तेइसवाँ कथन "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - इक्कीसवाँ कथन सेवा के धार्मिक तरीके पर अवश्य प्रतिबंध लगना चाहिए परमेश्वर सम्पूर्ण सृष्टि का प्रभु है परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है पतरस ने यीशु को कैसे जाना "जीतने वाले कार्य का भीतरी सत्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो भाग दो संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सोलहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - चैबीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - छब्बीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - बाईसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - उन्तीसवाँ कथन परमेश्वर के प्रकटन को उनके न्याय और ताड़ना में देखना "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो "जीतने वाले कार्य का भीतरी सत्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग तीन "बाइबल के विषय में" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो "जीतने वाले कार्य का भीतरी सत्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक "बाइबल के विषय में" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक

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