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अंतिम दिनों के मसीह के कथन - संकलन

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अंतिम दिनों के मसीह के कथन - संकलन

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वचन देह में प्रकट होता है से आगे जारी

ऐसा बहुत कुछ है जो मैं मनुष्य से कहना चाहता हूँ, बहुत सी चीजें हैं जो मुझे उसे अवश्य बतानी चाहिए। परन्तु मनुष्य में स्वीकृति की योग्यताओं का अत्यधिक अभाव हैः मेरे वचनों को, जिस अनुसार मैं प्रदान करता हूँ, उस अनुसार समझने में पूरी तरह से अक्षम है, और केवल एक ही पहलू को वह समझता है किन्तु दूसरे के प्रति अनभिज्ञ रहता है। फिर भी, मैं मनुष्य को उसकी शक्तिहीनता की वजह से मृत्यु नहीं देता हूँ, न ही मैं उसकी कमज़ोरी से व्यथित हूँ। मैं मात्र अपना कार्य करता हूँ, और हमेशा की तरह ही बातचीत करता हूँ, भले ही मनुष्य मेरी इच्छा को नहीं समझता है; जब दिन आएगा, तो लोग अपने हृदय की गहराईयों से मुझे जान जाएँगे और अपने विचारों में मुझे स्मरण करेंगे। जब मैं इस संसार से जाऊँगा यह ठीक तब होगा जब मैं मनुष्य के हृदय के सिंहासन पर चढ़ जाऊँगा, कहने का अर्थ है, यह तब होगा जब सभी मनुष्य मुझे जान लेते हैं। इसलिए, ऐसा भी तब होगा जब मेरे पुत्र और लोग पृथ्वी पर राज्य करेंगे। जो मुझे जानते हैं वे निश्चित रूप से मेरे राज्य के स्तम्भ बन जाएँगे और अन्य कोई नहीं बल्कि ये लोग ही मेरे राज्य में शासन करने और सामर्थ्य का उपयोग करने के योग्य होंगे। वे सभी जो मुझे जानते हैं मेरे अस्तित्व को धारण करते हैं और सभी मनुष्यों के बीच मुझे जीने में समर्थ हैं। मैं परवाह नहीं करता हूँ कि मनुष्य मुझे किस हद तक जानता है: कोई भी किसी भी प्रकार से मेरे कार्य को रोक नहीं सकता है, और मनुष्य मुझे कोई सहायता प्रदान नहीं कर सकता है और मेरे लिए कुछ नहीं कर सकता। मनुष्य मेरे प्रकाश में मेरे मार्गदर्शन का केवल अनुसरण कर सकता है और इस प्रकाश में मेरी इच्छा को खोज सकता है। आज, लोग योग्य हो गए हैं और विश्वास करते हैं कि वे मेरे सामने अकड़ कर चल सकते हैं, और जरा से भी अवरोध के बिना मेरे साथ हँस और मज़ाक कर सकते हैं और समकक्ष के रूप में मुझे संबोधित कर सकते हैं। तब भी मनुष्य मुझे नहीं जानता है, तब भी वह विश्वास करता है कि सार में हम लगभग एक ही हैं, कि हम दोनों रक्त और मांस के हैं, और दोनों इस मानव जगत में रहते हैं। उसका मेरे लिए आदर बहुत ही कम है; वह तब मेरा आदर करता है जब वह मेरे सामने होता है, किन्तु पवित्रात्मा के सामने मेरी सेवा करने में अक्षम है। यह ऐसा है मानो कि मनुष्य के लिए पवित्रात्मा का बिलकुल भी अस्तित्व नहीं है। परिणामस्वरूप, किसी भी मनुष्य ने कभी भी पवित्रात्मा को नहीं जाना है; मेरे देहधारण में, लोग केवल रक्त और मांस के एक शरीर को देखते हैं, और परमेश्वर की आत्मा को महसूस नहीं करते हैं। क्या इस तरह से मेरी इच्छा को वास्तव में पूरा किया जा सकता है? लोग मुझे धोखा देने में माहिर हैं; उन्हें मुझे मूर्ख बनाने के लिए शैतान के द्वारा विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया प्रतीत होता है। फिर भी मैं शैतान के द्वारा अविकल हूँ। मैं तब भी सम्पूर्ण मानवजाति को जीतने और सम्पूर्ण मावनजाति को भ्रष्ट करने वाले को हराने के लिए अपनी बुद्धि का उपयोग करता हूँ, ताकि पृथ्वी पर मेरा राज्य स्थापित किया जा सके।

मनुष्यों के बीच ऐसे लोग हैं जिन्होंने तारों के आकार, या अंतरिक्ष का परिमाण सुनिश्चित करने का प्रयास किया है। फिर भी, कभी भी उनके अनुसंधान फलदायक साबित नहीं हुए हैं, और वे केवल अपने सिर को निराशा से लटका सकते हैं और अपने आपको विफलता के अधीन कर सकते हैं। सभी मनुष्यों के बीच देखते हुए और मनुष्य विफलताओं में उसकी गतिशीलता को देखते हुए, मुझे कोई नहीं दिखाई देता है जो मेरे बारे में पूरी तरह से आश्वस्त हो, कोई नहीं दिखाई देता है जो मेरा आज्ञापालन करता हो और मेरे प्रति समर्पित हो। मनुष्य की महत्वकांक्षाएँ कितनी निराधार हैं! जब गहराई पर सम्पूर्ण धरातल धुँधला था, तो मनुष्यों के बीच मैंने संसार की कड़वाहट का स्वाद लेना आरम्भ किया। मेरा आत्मा संसार भर में यात्रा करता है और सभी लोगों के हृदयों को ध्यान से देखता है, मगर इसलिए भी मैं अपने देहधारी देह में मानवजाति को जीतता हूँ। मनुष्य मुझे नहीं देखता है, क्योंकि वह अंधा है; मनुष्य मुझे नहीं जानता है, क्योंकि वह संवेदनाहीन हो गया है; मनुष्य मेरा विरोध करता है, क्योंकि वह अवज्ञाकारी है; मनुष्य मेरे सामने दण्डवत करने आता है, क्योंकि वह मेरे द्वारा जीता जा चुका है; मनुष्य मुझे प्रेम करने के लिए आता है, क्योंकि मैं अंतर्निहित रूप से मनुष्य के प्रेम के योग्य हूँ; मनुष्य मुझे जीता और प्रदर्शित करता है, क्योंकि मेरी सामर्थ्य और बुद्धि उसे मेरे हृदय के अनुकूल बनाती हैं। मनुष्य के हृदय में मेरा एक स्थान है, किन्तु मैंने कभी भी उसकी आत्मा में मेरे बारे में मनुष्य के प्रेम को प्राप्त नहीं किया है। वास्तव में मनुष्य की आत्मा में ऐसी चीजें हैं जिन्हें वह अन्य सबसे अधिक प्रेम करता है, किन्तु मैं उनमें से एक नहीं हूँ, और इसलिए मनुष्य का प्रेम साबुन के एक बुलबुले के जैसा हैः जब हवा बहती है तो वह फूट जाता है और समाप्त हो जाता है, फिर कभी भी दुबारा दिखाई नहीं देता है। मैं मनुष्य के प्रति अपने दृष्टिकोण में हमेशा स्थिर और अपरिवर्ती रहा हूँ। क्या मनुष्य के बीच किसी ने यही किया है? मनुष्य की दृष्टि में, मैं अस्पृश्य और वायु के समान अदृश्य हूँ, और इसी कारण अधिकांश लोग केवल असीम आकाश में या लहरदार समुद्र के ऊपर, या शान्त झील के ऊपर, या खोखले पत्रों और सिद्धांतों के बीच खोजते हैं। एक भी ऐसा व्यक्ति नहीं है जो मानवजाति के सार को जानता हो, एक भी ऐसा बिल्कुल भी नहीं है जो मेरे भीतर के रहस्य के बारे में कुछ कह सके, और इसलिए मैं यह नहीं कहता हूँ कि मनुष्य उन उच्चतम मानकों को प्राप्त करे जो वह कल्पना करता है कि मैं उससे अपेक्षा करता हूँ।

मेरे वचनों के दौरान, पहाड़ लुड़कते हैं, पानी विपरीत प्रवाहित होता है, मनुष्य दब्बू बन जाता है, और झीलें बिना रूके बहना शुरू कर देती हैं। यद्यपि उफनता हुआ समुद्र क्रोधित हो कर आकाश की ओर उमड़ता है, किन्तु मेरे वचनों के दौरान इस प्रकार के समुद्र झील की सतह के समान शान्त हो जाते हैं। मेरे हाथ के जरा सा हिलाने से, भयानक आँधियाँ तुरन्त गायब हो जाती है और मेरे सामने से चली जाती हैं, और मानव संसार तुरन्त ही शान्ति की ओर लौट जाता है। किन्तु जब मैं अपने क्रोध निकालता हूँ, तो पहाड़ तुरन्त ही टूटकर बिखर जाते हैं, धरती तुरन्त उथल-पुथल करना आरम्भ कर देती है, पानी तुरन्त सूख जाता है, और मनुष्य तुरन्त आपदा से व्याकुल हो जाता है। मेरे कोप की वजह से, मैं मनुष्य की चीखों पर कोई ध्यान नहीं देता हूँ, उनकी चीखों के जवाब में कोई सहायता प्रदान नहीं करता हूँ, क्योंकि मेरा क्रोध बढ़ रहा होता है। जब मैं आकाशों के बीच होता हूँ, तो कभी भी मेरी उपस्थिति के द्वारा तारों को खलबली में नहीं डाला जाता है। इसके बजाय, वे अपने हृदय को मेरे लिए उनके कार्य में लगाते हैं, और इसलिए मैं उन्हें और भी अधिक प्रकाश प्रदान करता हूँ और उन्हें और भी अधिक शानदार ढंग से चमकवाता हूँ, ताकि वे मेरे लिए अधिक से अधिक महिमा प्राप्त करें। जितना अधिक आसमान चमकदार होता है, उसके नीचे का संसार उतना ही अधिक अंधकारमय होता है; कई लोगों ने शिकायत की है कि मेरी व्यवस्थाएँ अनुचित हैं, कई लोगों ने अपना स्वयं का राज्य बनाने के लिए मुझे छोड़ दिया है, जिसे वे मेरे साथ विश्वासघात करने, और अंधकार की स्थिति को उलटने के लिए काम में लाते हैं। फिर भी, किसने अपने संकल्प से इसे प्राप्त किया है? और कौन अपने संकल्प में सफल रहा है? कौन उसे उलट सकता है जिसकी व्यवस्था मेरे हाथों के द्वारा की गई हो? जब पूरी धरती पर वसंत फैलता है, तो मैं चुपचाप और गुप्त रूप से संसार में प्रकाश को भेजता हूँ, ताकि पृथ्वी पर, मनुष्य को वायु में क्षण भर के लिए ताज़गी का भाव मिले। फिर भी उसी क्षण में, मैं मनुष्यों की आँखों को अस्पष्ट कर देता हूँ, ताकि वह केवल धरती पर छाए कोहरे को देखे और सभी लोग एवं चीजें अस्पष्ट हो जाएँ। मनुष्य स्वयं के लिए केवल आहें भर सकते हैं, क्यों रोशनी केवल क्षण भर के लिए ही रहती है? क्यों परमेश्वर मनुष्य को केवल धुंध और धुँधलापन देता है? लोगों की निराशा के बीच, कोहरा एक पल में गायब हो जाता है, किन्तु जब वे प्रकाश की एक झलक देखते हैं, तो मैं उन पर बारिश की बौछार छोड़ देता हूँ, और जैसे ही वे सोते हैं उनके कान के परदे तूफ़ान की गर्जना से फट जाते हैं। आतंक से जकड़े हुए, उनके पास शरण लेने के लिए कोई समय नहीं रहता, और वे मूसलाधार बारिश से घिर जाते हैं। एक ही क्षण में, आसमानों के नीचे की सभी चीजें मेरे कुपित क्रोध के दौरान धुल कर साफ़ हो जाती हैं। लोग भारी बारिश के हमले के बारे में अब और शिकायत नहीं करते हैं और उन सब में आदर उत्पन्न हो जाता है। बारिश के इस अचानक हमले की वजह से अधिकांश लोग उस पानी में डूब जाते हैं जो आकाश से बरसता है, पानी में शव बन जाते हैं। मैं सम्पूर्ण पृथ्वी पर ध्यान से देखता हूँ और देखता हूँ कि कई लोग जाग रहे हैं, कि कई लोग पछतावा कर रहे हैं, कि कई लोग छोटी-छोटी नावों में पानी के स्रोत की खोज कर रहे हैं, कई लोग मुझ से क्षमा माँगने के लिए मेरे आगे झुक रहे हैं, कि कई लोगों ने प्रकाश देख लिया है, कि कई लोगों ने मेरे चेहरे को देख लिया है, कई लोगों के पास जीने का साहस आ गया है, और कि सम्पूर्ण संसार रूपान्तरित हो गया है। बारिश की इस बड़ी बौछार के बाद, सभी चीजें उस तरह से लौट जाती हैं जैसा मैंने अपने मन में उनकी तस्वीर बनायी थी, तथा अब और अवज्ञाकारी नहीं हैं। बहुत पहले से, पूरी धरती हँसी की आवाज़ से भरी है, पृथ्वी पर हर कहीं प्रशंसा का माहौल है, और कोई भी जगह मेरी महिमा के बिना नहीं है। पृथ्वी पर हर कहीं और सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में मेरी बुद्धि है। सभी चीजों के बीच मेरी बुद्धि के परिणाम ही हैं, सभी लोगों में मेरी बुद्धि की उत्कृष्ट कृतियाँ भरी है; सब कुछ मेरे राज्य की चीजों के समान है और सभी लोग मेरे आसमानों के नीचे मेरे चारागाहों पर भेड़ों के समान आराम में रहते हैं। मैं सभी मनुष्यों से ऊपर चलता हूँ और हर कहीं देख रहा हूँ। कोई भी चीज कभी भी पुरानी नहीं दिखाई देती है, और कोई भी व्यक्ति वैसा नहीं है जैसा वह हुआ करता था। मैं सिंहासन पर आराम करता हूँ, मैं सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड पर आराम से पीठ टिकाए हुए हूँ और मैं पूरी तरह से संतुष्ट हूँ, क्योंकि सभी चीजों ने अपनी पवित्रता को पुनः प्राप्त कर लिया है, और मैं एक बार फिर से सिय्योन में शान्तिपूर्वक निवास कर सकता हूँ, और पृथ्वी पर लोग मेरे मार्गदर्शन के अधीन शान्त, तृप्त जीवन बिता सकते हैं। सभी लोग सब कुछ मेरे हाथों में प्रबंधित कर रहे हैं, सभी लोगों ने अपनी पूर्व की बुद्धिमत्ता और मूल प्रकटन को पुनः-प्राप्त कर लिया है; वे धूल से अब और ढके हुए नहीं हैं, बल्कि, मेरे राज्य में, हरिताश्म के समान शुद्ध हैं, प्रत्येक ऐसे चेहरे वाला जैसा कि मनुष्य के हृदय के भीतर के एक पवित्र जन का हो, क्योंकि मनुष्यों के बीच मेरा राज्य स्थापित हो चुका है।

14 मार्च, 1992

अंतिम दिनों के मसीह के कथन - संकलन

केवल वह जो परमेश्वर के कार्य को अनुभव करता है वही परमेवर में सच में विश्वास करता है परमेश्वर का प्रकटीकरण एक नया युग लाया है केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है सात गर्जनाएँ – भविष्यवाणी करती हैं कि राज्य के सुसमाचार पूरे ब्रह्माण्ड में फैल जाएंगे उद्धारकर्त्ता पहले से ही एक "सफेद बादल" पर सवार होकर वापस आ चुका है जब तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देख रहे होगे ऐसा तब होगा जब परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नये सिरे से बना चुका होगा वे जो मसीह से असंगत हैं निश्चय ही परमेश्वर के विरोधी हैं बुलाए हुए बहुत हैं, परन्तु चुने हुए कुछ ही हैं तुम्हें मसीह की अनुकूलता में होने के तरीके की खोज करनी चाहिए मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है क्या तुम जानते हो? परमेश्वर ने मनुष्यों के बीच एक बहुत बड़ा काम किया है केवल अंतिम दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनन्त जीवन का मार्ग दे सकता है अपनी मंज़िल के लिए तुम्हें अच्छे कर्मों की पर्याप्तता की तैयारी करनी चाहिए तुम किस के प्रति वफादार हो? पृथ्वी के परमेश्वर को कैसे जानें परमेश्वर मनुष्य के जीवन का स्रोत है सर्वशक्तिमान का आह भरना तुम लोगों को अपने कार्यों पर विचार करना चाहिए भ्रष्ट मनुष्य परमेश्वर का प्रतिनिधित्व करने में अक्षम है विश्वासियों को क्या दृष्टिकोण रखना चाहिए परमेश्वर में अपने विश्वास में तुम्हें परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन करना चाहिए प्रतिज्ञाएं उनके लिए जो पूर्ण बनाए जा चुके हैं दुष्ट को दण्ड अवश्य दिया जाना चाहिए वास्तविकता को कैसे जानें परमेश्वर की इच्छा की समरसता में सेवा कैसे करें सहस्राब्दि राज्य आ चुका है तुम्हें पता होना चाहिए कि व्यावहारिक परमेश्वर ही स्वयं परमेश्वर है आज परमेश्वर के कार्य को जानना क्या परमेश्वर का कार्य इतना सरल है, जितना मनुष्य कल्पना करता है? तुम्हें सत्य के लिए जीना चाहिए क्योंकि तुम्हें परमेश्वर में विश्वास है परमेश्वर पर विश्वास करना वास्तविकता पर केंद्रित होना चाहिए, न कि धार्मिक रीति-रिवाजों पर जो आज परमेश्वर के कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर की सेवा कर सकते हैं जो सच्चे हृदय से परमेश्वर के आज्ञाकारी हैं वे निश्चित रूप से परमेश्वर के द्वारा ग्रहण किए जाएँगे राज्य का युग वचन का युग है भाग एक राज्य का युग वचन का युग ह भाग दो "सहस्राब्दि राज्य आ चुका है" के बारे में एक संक्षिप्त वार्ता वे सब जो परमेश्वर को नहीं जानते हैं वे ही परमेश्वर का विरोध करते हैं क्या त्रित्व का अस्तित्व है? भाग एक क्या त्रित्व का अस्तित्व है? भाग दो जब परमेश्वर की बात आती है, तो तुम्हारी समझ क्या होती है एक वास्तविक मनुष्य होने का क्या अर्थ है तुम विश्वास के विषय में क्या जानते हो? देहधारियों में से कोई भी कोप के दिन से नहीं बच सकता है सुसमाचार को फैलाने का कार्य मनुष्यों को बचाने का कार्य भी है व्यवस्था के युग में कार्य छुटकारे के युग में कार्य के पीछे की सच्ची कहानी तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई भाग एक तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई भाग दो पद नामों एवं पहचान के सम्बन्ध में भाग एक पद नामों एवं पहचान के सम्बन्ध में भाग दो वह मनुष्य किस प्रकार परमेश्वर के प्रकटनों को प्राप्त कर सकता है जिसने उसे अपनी ही धारणाओं में परिभाषित किया है? जो परमेश्वर को और उसके कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर को सन्तुष्ट कर सकते हैं देहधारी परमेश्वर की सेवकाई और मनुष्य के कर्तव्य के बीच अंतर भाग दो देहधारी परमेश्वर की सेवकाई और मनुष्य के कर्तव्य के बीच अंतर भाग एक परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम भाग एक परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम भाग दो परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम भाग तीन परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है (भाग दो) परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है (भाग एक) भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है भाग एक भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है भाग दो भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है भाग तीन परमेश्वर द्वारा आवासित देह का सार भाग एक परमेश्वर द्वारा आवासित देह का सार भाग दो परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार भाग एक परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार भाग दो परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार भाग तीन स्वर्गिक परमपिता की इच्छा के प्रति आज्ञाकारिता ही मसीह का वास्तविक सार है मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग एक मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग दो मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग तीन परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे भाग एक परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे भाग दो संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सातवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - आठवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - नौवाँ कथन नये युग की आज्ञाएँ संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - ग्यारहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - तेरहवाँ कथन दस प्रशासनिक आज्ञाएँ जिनका परमेश्वर के चयनित लोगों द्वारा राज्य के युग में पालन अवश्य किया जाना चाहिए क्या आप जाग उठे हैं? देहधारण के महत्व को दो देहधारण पूरा करते हैं परमेश्वर के वचन के द्वारा सब कुछ प्राप्त हो जाता है भाग एक पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान भाग एक क्या तुम परमेश्वर के एक सच्चे विश्वासी हो? केवल पूर्ण बनाया गया ही एक सार्थक जीवन जी सकता है संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - बारहवाँ कथन तुझे अपने भविष्य मिशन से कैसे निपटना चाहिए "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग चार "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग तीन देहधारी परमेश्वर और परमेश्वर द्वारा उपयोग किए गए लोगों के बीच महत्वपूर्ण अंतर संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - बीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - दसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - चौदहवाँ कथन "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग छे: "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग पांच केवल वही जो परमेश्वर को जानते हैं, उसकी गवाही दे सकते हैं संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - छठवाँ कथन एक अपरिवर्तित स्वभाव का होना परमेश्वर के साथ शत्रुता होना है पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान भाग दो पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान भाग तीन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - पन्द्रहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - अठारहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - उन्नीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - अट्ठाइसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सत्रहवाँ कथन "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो परमेश्वर से प्रेम करने वाले लोग हमेशा के लिए उसके प्रकाश में रहेंगे सफलता या असफलता उस पथ पर निर्भर होती है जिस पर मनुष्य चलता है भाग एक सफलता या असफलता उस पथ पर निर्भर होती है जिस पर मनुष्य चलता है भाग दो "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक "परमेश्वर के काम का दर्शन" पर परमेश्वर के वचन के तीन अंशों से संकलन भाग दो "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग चार तीन चेतावनियाँ संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - चौथा कथन परमेश्वर के स्वभाव को समझना अति महत्वपूर्ण है "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग तीन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सत्ताईसवाँ कथन "परमेश्वर के काम का दर्शन" पर परमेश्वर के वचन के तीन अंशों से संकलन भाग एक संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - पाँचवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - पच्चीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - तेइसवाँ कथन "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - इक्कीसवाँ कथन सेवा के धार्मिक तरीके पर अवश्य प्रतिबंध लगना चाहिए परमेश्वर सम्पूर्ण सृष्टि का प्रभु है परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है पतरस ने यीशु को कैसे जाना "जीतने वाले कार्य का भीतरी सत्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो भाग दो संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सोलहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - चैबीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - छब्बीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - बाईसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - उन्तीसवाँ कथन परमेश्वर के प्रकटन को उनके न्याय और ताड़ना में देखना "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो "जीतने वाले कार्य का भीतरी सत्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग तीन "बाइबल के विषय में" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो "जीतने वाले कार्य का भीतरी सत्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक "बाइबल के विषय में" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक

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