केवल परमेश्वर को प्रेम करना ही वास्तव में परमेश्वर पर विश्वास करना है भाग दो

मनुष्य के भीतर परमेश्वर के द्वारा किए जाने वाले प्रत्येक कार्य के चरण में, बाहर से यह लोगों के मध्य परस्पर क्रिया के समान प्रतीत होता है, जैसे कि यह मानव प्रबंधों के द्वारा उत्पन्न हुआ हो, या मानविक हस्तक्षेप के माध्यम से। परन्तु पर्दे के पीछे, कार्य का प्रत्येक चरण, और घटित होने वाला सब कुछ, शैतान के द्वारा परमेश्वर के सामने चली गई बाज़ी होती है और परमेश्वर के लिए एक दृढ़ गवाह बने रहने के लिए लोगों से अपेक्षा की जाती है। उदाहरण के लिए, जब अय्यूब की परीक्षा ली जा रही थी: पर्दे के पीछे, शैतान परमेश्वर के सामने शर्त लगा रहा था, और अय्यूब के साथ जो हुआ वह मनुष्यों के कार्य थे, और मनुष्यों का हस्तक्षेप था। हर कदम के पीछे जो परमेश्वर ने शैतान के साथ बाज़ी में परमेश्वर ने तेरे लिए उठाए—उन सभी के पीछे एक युद्ध था। उदाहरण के लिए, यदि तू अपने भाइयों और बहनों के प्रति पक्षपातपूर्ण भावना रखता है, तो तेरे पास वे शब्द होंगे जो तू कहना चाहता है—वे शब्द जो परमेश्वर को अप्रसन्न करने वाले हो सकते हैं—परन्तु यह तेरे लिए भीतरी तौर पर कठिन होगा, और इस क्षण में, तेरे भीतर एक युद्ध आरंभ होगा: क्या मैं बोलूँ या नहीं? यही एक युद्ध है। इस प्रकार से, सभी बातों में एक युद्ध होता है, और जब तेरे भीतर एक युद्ध चल रहा हो, तो भला हो तेरे वास्तविक सहयोग और पीड़ा का, परमेश्वर तेरे भीतर कार्य करता है। अंत में, अंदर तू मामले को एक तरफ रख पाता है और क्रोध स्वाभाविक रूप से समाप्त हो जाता है। परमेश्वर के साथ तेरे सहयोग का यही प्रभाव होता है। हर एक चीज़ जो तू करता है उसके प्रयासों के लिए तुझे एक कीमत चुकानी होती है। बिना वास्तविक कठिनाई के, तू परमेश्वर को संतुष्ट नहीं कर सकता है, यह परमेश्वर को संतुष्ट करने के कुछ करीब तक भी नहीं पहुंचता है, और तुम केवल खोखले नारे लगा रहे हो! क्या ये खोखली बातें परमेश्वर को संतुष्ट कर सकती है? जब परमेश्वर और शैतान आत्मिक क्षेत्र में युद्ध करते हैं, तुझे परमेश्वर को कैसे संतुष्ट करना चाहिए, और उसके लिए गवाही में तुझे किस प्रकार से दृढ़ खड़े रहना चाहिए? तुझे यह जानना चाहिए कि जो कुछ भी तेरे साथ होता है वह एक महान परीक्षण है और वह समय है जब परमेश्वर चाहता है तू उसके लिए एक गवाह बन। बाहरी तौर पर, ये एक बड़ी बात जैसी न दिखाई दें, परन्तु जब ये बातें होती हैं तब यह प्रकट होता है कि तू परमेश्वर से प्रेम करता है या नहीं। यदि तू करता है, तो तू उसके लिए गवाही देते समय दृढ़ खड़ा रह पाएगा, और यदि तूने उसके लिए प्रेम को अभ्यास में नहीं लाया है, तो यह दिखाता है कि तू वह नहीं है जो सत्य को अभ्यास में लाता है, यह कि तू बिना सत्य के है, और बिना जीवन के भी है, कि तू भूसे के समान है! लोगों के साथ जो कुछ भी होता है यह तब होता है जब परमेश्वर लोगों से अपेक्षा रखता है कि वे उसके लिए गवाही के लिए दृढ़ बने रहें। इस क्षण में तेरे साथ कुछ भी बड़ा नहीं घटा है, और तू महान गवाही नहीं दे रहा है, परन्तु तेरे जीवन का प्रत्येक विस्तार परमेश्वर के लिए गवाही से सम्बन्ध रखता है। यदि तू अपने भाइयों और बहनों, परिवार के सदस्यों और अपने आसपास के प्रत्येक लोगों की प्रशंसा को जीत सके; यदि एक दिन, अविश्वासी आएं और जो कुछ तू करता है उसकी तारीफ करें, और देखें कि जो कुछ परमेश्वर करता है वह अद्भुत होता है, तो तूने गवाही दे दी होगी। हालांकि तेरे पास कोई परिज्ञान नहीं है और तेरी क्षमता बहुत कम है, परमेश्वर द्वारा तुझे पूर्ण किए जाने के माध्यम से, तू उसे संतुष्ट करने के योग्य होता है और उसकी इच्छा को ध्यान में रखता है। अन्य लोग देखेंगे कि सबसे कम क्षमता के लोगों में उसने कितना महान कार्य किया है। लोग परमेश्वर को जानेंगे, और शैतान पर विजय प्राप्त करेंगे और एक हद तक परमेश्वर के प्रति वफादार बने रहेंगे। इसलिए इस समूह के लोगों के समान किसी और के पास इतना अधिक आधार नहीं होगा। यही सबसे महान गवाही होगी। हालांकि तू महान कार्य करने में असक्षम है, तू परमेश्वर को संतुष्ट करने के योग्य है। अन्य लोग अपनी धारणाओं को एक तरफ नहीं रख सकते हैं, परन्तु तू रख सकता है; अन्य लोग अपने वास्तविक अनुभवों के दौरान परमेश्वर के लिए गवाही नहीं दे सकते हैं, परन्तु तू परमेश्वर के प्रेम को चुकाने और उसके लिए बेहतरीन गवाही देने के लिए अपनी वास्तविक कद-काठी और कार्यों का उपयोग कर सकता है। केवल यही परमेश्वर को वास्तव में प्रेम करना कहा जा सकता है। यदि तू इसे करने में अयोग्य है, तो तू अपने परिवार के सदस्यों, भाइयों और बहनों के बीच या संसार के अन्य लोगों के सामने गवाह नहीं बनता है। यदि तू शैतान के सामने गवाही नहीं दे सकता, तो शैतान तुझ पर हंसेगा, वह तुझे मज़ाक, खेलने वाली चीज की तरह लेगा, वह अकसर तुझे मूर्ख बनाएगा, और तुझे उन्मादी बनाएगा। भविष्य में, महान परीक्षण तेरे ऊपर आएंगे—परन्तु आज, यदि तू परमेश्वर को एक सच्चे हृदय से प्रेम करता है, और चाहे कितनी भी बड़ी परीक्षाएं तेरे सामने आएं, तेरे साथ चाहे कुछ भी हो, तू अपनी गवाही में दृढ़ बना रह पाएगा, और परमेश्वर को संतुष्ट कर पाएगा, तब तेरे हृदय को दिलासा मिलेगी, और चाहे भविष्य में कितनी भी भयानक परीक्षाएं आएं तू भयभीत नहीं होगा। तुम लोग भविष्य में होने वाली बातों को नहीं देख सकते; तुम लोग केवल आज की परिस्थितियों में परमेश्वर को संतुष्ट कर सकते हो। तुम लोग कोई भी महान कार्य करने में अयोग्य हो, और तुम लोगों को अपने वास्तविक जीवन में परमेश्वर के वचनों को अनुभव करने के माध्यम से उसे संतुष्ट करने पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए, और एक मज़बूत और शानदार गवाही देना चाहिए जिससे शैतान शर्मिंदा हो। हालांकि तेरा देह असंतुष्ट और पीड़ा में रहेगा, तू परमेश्वर को संतुष्ट करेगा और शैतान को शर्मिंदा करेगा। यदि तू हमेशा इस प्रकार से ही अभ्यास करे, तो परमेश्वर तेरे लिए एक मार्ग खोल देगा। एक दिन जब एक बड़ी परीक्षा तेरे ऊपर आएगी, अन्य लोग गिर जाएंगे, परन्तु तू फिर भी दृढ़ बना रह पाएगा: क्योंकि तूने कीमत चुकाई है, परमेश्वर तेरी रक्षा करेगा ताकि तू दृढ़ बना रहे और गिरे नहीं। यदि, साधारणतया, तू सत्य को अभ्यास में लाने और परमेश्वर को प्रेम करने वाले हृदय से संतुष्ट करने के योग्य है, तो परमेश्वर निश्चय ही भविष्य की परीक्षाओं के दौरान तेरी सुरक्षा करेगा। हांलाकि तू मूर्ख है और कम कद-काठी और निम्न क्षमता वाला मनुष्य है, परमेश्वर तेरे खिलाफ भेदभाव नहीं करेगा। यह आपकी धारणाओं पर निर्भर करता है कि वे उचित हैं या नहीं। आज, तू परमेश्वर को संतुष्ट करने के योग्य है, जिसमें तू छोटी से छोटी बात पर ध्यान रखता है, तू सभी बातों में परमेश्वर को संतुष्ट करता है, तेरे पास परमेश्वर को सच्चाई से प्रेम करने वाला हृदय है, तू अपना सच्चा हृदय परमेश्वर को देता है और हालांकि कुछ ऐसी बातें हैं जो तू नहीं समझ सकता है, तू अपनी प्रेरणाओं को सुधारने, और परमेश्वर की इच्छा को खोजने के लिए परमेश्वर के सामने आ सकता है, और तू वह सब कुछ करता है जो परमेश्वर को संतुष्ट करने के लिए आवश्यक है। हो सकता है कि तेरे भाई और बहन तुझे छोड़ दें, परन्तु तेरा हृदय परमेश्वर को संतुष्ट करेगा, और तू देह के आनन्द का लालच नहीं करेगा। यदि तू हमेशा इस प्रकार से अभ्यास करता रहेगा, तो तेरे ऊपर जब बड़ी परीक्षाएं आएंगी तो तुझे बचा लिया जाएगा।

लोगों की कौन सी आंतरिक स्थिति पर यह सब परीक्षणों को लक्ष्य किया जाता है? ये लोगों के विद्रोही स्वभाव को लक्षित करती हैं जो परमेश्वर को संतुष्ट करने के अयोग्य है। लोगों के भीतर बहुत सी अशुद्ध बातें हैं, और बहुत सा पांखड भरा हुआ है, और इसलिए परमेश्वर उन्हें परीक्षाओं के आधीन करता है ताकि उन्हें शुद्ध बना सके। परन्तु यदि आज, तू उसे संतुष्ट करने के योग्य है, तो भविष्य की परीक्षाएं तुझे सिद्ध बनाने के लिए होंगी। यदि तू उसे आज संतुष्ट करने में असमर्थ है, तो भविष्य की परीक्षाएं तुझे लुभाएंगी, और तू अनजाने में नीचे गिर जाएगा, और उस समय तू स्वयं की सहायता करने में असमर्थ होगा, क्योंकि तू परमेश्वर के कार्य के साथ बराबरी नहीं कर सकता है और तुझमें वास्तविक कद-काठी नहीं होता है। इसलिए, यदि तू भविष्य में दृढ़ बने रहने की इच्छा रखता है, तो परमेश्वर को संतुष्ट करना और अंत तक उसका अनुसरण करना बेहतर होगा, आज तुझे एक दृढ़ आधार बनाना होगा, तुझे सत्य को हर बात के अभ्यास में लाकर, और उसकी इच्छा को ध्यान में रखकर परमेश्वर को संतुष्ट करना होगा। यदि तू हमेशा इस प्रकार का अभ्यास करे, तो तेरे भीतर एक आधार बनेगा, और परमेश्वर तेरे भीतर हृदय को प्रेरणा देगा जो परमेश्वर से प्रेम करेगा, और वह तुझे विश्वास देगा। एक दिन, जब एक परीक्षा वास्तव में तेरे ऊपर आएगी, तुझे वास्तव में कुछ पीड़ा का अनुभव हो सकता है, और तू एक बिन्दु तक व्यथित महसूस कर सकता है और तीव्र पीड़ा सह सकता है, जैसे कि आप मर रहे हो—परन्तु परमेश्वर के लिए तेरा प्रेम नहीं बदलेगा और यह अधिक गहरा हो जाएगा। यही परमेश्वर की आशीषें हैं। यदि तू आज परमेश्वर द्वारा कही और की जाने वाली सभी बातों को आज्ञाकारी हृदय से स्वीकारने के योग्य है, तो तू निश्चय ही परमेश्वर के द्वारा आशीषित होगा और इसलिए तू परमेश्वर के द्वारा आशीषित व्यक्ति बन जाएगा और उसकी प्रतिज्ञाओं को प्राप्त करेगा। यदि आज, तू अभ्यास न करे, जब एक दिन तेरे ऊपर परीक्षाएं आएंगी तो तू बिना विश्वास या बिना प्रेम के हृदय वाला होगा, और उस समय परीक्षाएं प्रलोभन बन जाएंगी; तू शैतान के प्रलोभनों के मध्य में फंस जाएगा और किसी भी प्रकार से बच निकलने का रास्ता तेरे पास नहीं होगा। आज, तू छोटी सी परीक्षा तेरे ऊपर आने से दृढ़ खड़ा रह सकता है, परन्तु यह आवश्यक नहीं है कि एक दिन जब बड़ी परीक्षाएँ तेरे ऊपर आएँगी तब भी तू दृढ़ खड़ा रह पाए। कुछ लोग अभिमानी होते हैं, और सोचते हैं कि वे पहले से ही लगभग पूर्ण हो गए हैं। यदि तू ऐसे समय में गहराई से नहीं सोचेगा और उदासीन ही बने रहेगा, तो तू खतरे में होगा। आज, परमेश्वर महान परीक्षणों वाला कार्य नहीं करता है, जो सभी दिखावे में अच्छा दिखाई देता है, परन्तु जब परमेश्वर तेरी परीक्षा लेता है, तू देखेगा कि तेरे भीतर बहुत सारी कमियां मौजूद हैं, क्योंकि तेरी कद-काठी बहुत ही छोटी है, और तू बड़ी परीक्षाओं को सहने के योग्य नहीं है। यदि आज, तू आगे नहीं बढेगा, यदि तू एक ही स्थान पर खड़ा रहेगा, तो जब तेज़ हवा बहेगी तो तू गिर जाएगा। तुम लोगों को अकसर देखना चाहिए कि तुम लोगों की कद-काठी कितनी छोटी है; केवल इसी प्रकार से तुम लोग विकास कर पाओगे। यदि यह केवल परीक्षण के दौरान तू देखता है कि तेरी कद-काठी बहुत ही छोटी है, कि तेरी इच्छाशक्ति बहुत ही कमज़ोर है, कि तेरे भीतर बहुत ही कम चीज वास्तविक है, और कि तू परमेश्वर की इच्छा के लिए अपर्याप्त है—और यदि तू केवल इन बातों को महसूस करेगा, तब तक बहुत देर हो चुकी होगी।

यदि तू परमेश्वर के स्वभाव को नहीं जानता है, तो तू इन परीक्षणों के दौरान निश्चित तौर पर गिरेगा, क्योंकि तू इस बात से अनजान है कि परमेश्वर लोगों को पूर्ण कैसे बनाता है, और किस माध्यम से वह उन्हें पूर्ण बनाता है, और जब परमेश्वर की परीक्षाएं तेरे ऊपर आएंगी और वे तेरी धारणाओं से मेल नहीं खाएंगी, तो तू दृढ़ खड़ा नहीं रह पाएगा। परमेश्वर का सच्चा प्रेम उसके सम्पूर्ण स्वभाव में निहित है, और जब परमेश्वर का सम्पूर्ण स्वभाव तेरे ऊपर प्रकट होता है, तो यह तेरे देह पर क्या लेकर आता है? जब परमेश्वर का धार्मिक स्वभाव तुझे दिखाया जाता है, तेरा देह अनिवार्य रूप से अत्यधिक कष्ट सहेगा। यदि तू इस पीड़ा को नहीं सहेगा, तो तुझे परमेश्वर के द्वारा पूर्ण नहीं बनाया जा सकता है, न ही तू परमेश्वर को सच्चा प्रेम अर्पित कर पाएगा। यदि परमेश्वर तुझे पूर्ण बनाता है, तो वह तुझे निश्चय ही अपना सम्पूर्ण स्वभाव दिखाएगा। सृष्टि की रचना के बाद से आज तक, परमेश्वर ने अपने सम्पूर्ण स्वभाव को कभी भी नहीं दिखाया है—परन्तु अंतिम दिनों में वह इसे उस समूह के लोगों को प्रकट करता है जिन्हें उसने पूर्व निर्धारित किया है और चुना है, और मनुष्यों को पूर्ण बनाने के द्वारा वह अपने स्वभाव को खुला प्रकट करता है, जिसके माध्यम से वह एक समूह के लोगों को पूर्ण बनाता है। लोगों के लिए ऐसा है परमेश्वर का सच्चा प्रेम। उनको परमेश्वर के सच्चे प्रेम को अनुभव करने के लिए उन्हे अत्यधिक पीड़ा को सहना और एक अधिकतम मूल्य चुकाना आवश्यक है। केवल इसके बाद ही वे परमेश्वर के द्वारा प्राप्त किए जाएंगे और परमेश्वर को अपना प्रेम वापस चुका पाएँगे और केवल इस के बाद ही परमेश्वर का हृदय संतुष्ट होगा। यदि लोग परमेश्वर के द्वारा पूर्ण बनाए जाने की इच्छा रखते हैं और यदि वे उसकी इच्छा को पूरा करना चाहते हैं और पूरी तरह से परमेश्वर को प्रेम करने के लिए अपना हृदय दे देते हैं, तो उन्हें मृत्यु से भी भयंकर कष्ट सहने के लिए अत्यधिक कष्ट और कई परिस्थितियों की पीड़ाओं से होकर गुजरना होगा, अंततः उन्हें परमेश्वर को अपना वास्तविक हृदय देना ही पड़ेगा। कोई व्यक्ति परमेश्वर से वास्तव में प्रेम करता है या नहीं यह कठिनाई और शुद्धिकरण के समय प्रकट होता है। परमेश्वर लोगों के प्रेम को शुद्ध करता और यह केवल कठिनाई और शुद्धिकरण के मध्य ही प्राप्त किया जा सकता है।

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