परमेश्वर के दैनिक वचन | "आरंभ में मसीह के कथन : अध्याय 103" | अंश 96

एक ज़बरदस्त आवाज़ बाहर निकलती है, पूरे ब्रह्मांड को थरथरा देती है, लोगों के कान फोड़ देती है, उन्हें रास्ते से बच निकलने में बहुत देर हो जाती है, और कुछ मारे जाते हैं, कुछ नष्ट हो जाते हैं, और कुछ का न्याय किया जाता है। यह वास्तव में ऐसा नज़ारा है जैसा पहले किसी ने नहीं देखा है। ध्यानपूर्वक सुनो, गरज के विस्फोटों के साथ रोने की आवाज़ें आती हैं, और यह आवाज़ अधोलोक से आती है, यह आवाज़ नरक से आती है। यह विद्रोह के उन पुत्रों की कटु आवाज है जिनका मेरे द्वारा न्याय किया गया है। जो लोग वह नहीं सुनते हैं और जो मेरे वचनों का अभ्यास नहीं करते हैं, उनका गंभीर रूप से न्याय किया जाता है और वे मेरे कोप का अभिशाप प्राप्त करते हैं। मेरी आवाज़ न्याय और कोप है, और मैं किसी के प्रति उदारता नहीं दिखाता हूँ और किसी के प्रति भी दया नहीं दिखाता हूँ, क्योंकि मैं स्वयं धार्मिक परमेश्वर हूँ, और मैं कोप से भरा हूँ, मैं अग्न, शुद्धिकरण, विनाश से भरा हूँ। मुझमें छुपा हुआ कुछ भी नहीं है, भावनात्मक कुछ भी नहीं है, बल्कि सब कुछ स्पष्ट, धार्मिक और निष्पक्ष है। क्योंकि मेरे ज्येष्ठ पुत्र पहले से ही मेरे साथ सिंहासन पर हैं, सभी राष्ट्रों और सभी लोगों पर शासन कर रहे हैं, इसलिए अन्यायपूर्ण और अनैतिक चीज़ों और लोगों का न्याय किया जाना शुरू हो रहा है। मैं एक-एक करके उनकी जाँच करूँगा, कुछ भी नहीं छोड़ूँगा, उन्हें पूर्णतः प्रकट करूँगा। क्योंकि मेरा न्याय पूरी तरह से प्रकट हो गया है और पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया गया है, और कुछ भी रोक कर नहीं रखा गया है; इसलिए जो कुछ भी मेरी इच्छा के अनुकूल नहीं होता है मैं उसे बाहर फेंक दूँगा और उसे अथाह गड्ढे में सदैव के लिए नष्ट होने दूँगा; मैं उसे अथाह गड्ढे में सदा के लिए जलने दूँगा। यह मेरी धार्मिकता है; यह मेरी ईमानदारी है। कोई भी इसे बदल नहीं सकता है, और यह अवश्य मेरे आदेश पर होगा।

अधिकांश लोग मेरे वचनों को अनदेखा करते हैं और सोचते हैं कि वचन केवल वचन हैं और तथ्य तथ्य हैं। वे अंधे हैं! क्या वे नहीं जानते हैं कि मैं स्वयं विश्वसनीय परमेश्वर हूँ? मेरे वचन और तथ्य एक साथ होते हैं—क्या यह वास्तव में सत्य नहीं है? लोग मेरे वचनों को बिल्कुल नहीं समझते हैं, और जो लोग प्रबुद्ध हैं केवल वे ही वास्तव में समझ सकते हैं—यह एक तथ्य है। जैसे ही लोग मेरे वचनों को देखते हैं, वे डर के कारण सोच नहीं पाते हैं, हर जगह छिपते फिरते हैं, उल्लेख करने की आवश्यकता नहीं कि ऐसा तब होता है जब मेरा न्याय पड़ता है। जब मैंने सभी चीज़ों को बना लिया, जब मैं दुनिया को नष्ट करता हूँ, और जब मैं ज्येष्ठ पुत्रों को पूर्ण करता हूँ, तो ये सभी चीज़ें मेरे मुँह के एक वचन से पूरी हो जाती हैं, क्योंकि मेरा वचन स्वयं में ही अधिकार है, न्याय है। यह कहा जा सकता है कि मैं स्वयं में न्याय, प्रताप हूँ, और इसे कोई भी नहीं बदल सकता है। यह मेरे प्रशासनिक आदेशों का एक पक्ष है; लोगों का न्याय करने का मेरा एक तरीका है। मेरी नज़रों में, सभी लोग, सभी मामले और सभी चीज़ें—सर्वथा सबकुछ—मेरे हाथों में हैं और मेरे न्याय के अधीन हैं, कोई भी और कुछ भी जानबूझकर, पागलों के समान व्यवहार करने की हिम्मत नहीं करता है, और सब कुछ मेरे मुँह के वचनों के अनुसार अवश्य सम्पन्न होगा। मानव धारणा में हर कोई मेरे वचनों पर विश्वास करता है। जब मेरा आत्मा आवाज़ देता है, तो लोग संदेहपूर्ण हो जाते हैं। वे मेरी सर्वशक्तिमत्ता को बिल्कुल नहीं जानते हैं, और वे मेरे विरुद्ध लांछन लगाते हैं। मैं तुझे बता रहा हूँ! जो भी मेरे वचनों पर संदेह करते हैं, जो भी मेरे वचन का तिरस्कार करते हैं, ये ही ऐसे लोग हैं जो नष्ट हो जाएँगे, ये तबाही के शाश्वत पुत्र हैं। इससे यह देखा जा सकता है कि बहुत कम ऐसे हैं जो ज्येष्ठ पुत्र हैं, क्योंकि यह कार्य करने का मेरा तरीका है। जैसा कि मैंने कहा, मैं एक अँगुली भी नहीं चलाता हूँ, बल्कि इसके बजाय मैं सब कुछ पूरा करने के लिए केवल अपने वचनों का उपयोग करता हूँ। तब यही है जहाँ मेरी सर्वशक्तिमत्ता निहित होती है। मेरे वचनों में कोई भी मेरे भाषण का स्रोत और उद्देश्य नहीं ढूँढ सकता है। लोग इसे प्राप्त नहीं कर सकते हैं, और वे केवल मेरी अगुआई के अनुसार कार्य कर सकते हैं, और मेरी धार्मिकता के अनुसार केवल मेरी इच्छा के अनुरूप सब कुछ कर सकते हैं, ताकि मेरे परिवार के पास, सदा-सदा के लिए दृढ़ और अटल रहते हुए, धार्मिकता और शांति होगी।

मेरा न्याय हर एक के लिए आता है, मेरे प्रशासनिक आदेश हर एक को छूते हैं, और मेरे वचन और मेरा व्यक्तित्व हर किसी के लिए प्रकट होते हैं। यह मेरे आत्मा के महान कार्य का समय है (इस समय जिन लोगों को आशीष मिलेगा और जो दुर्भाग्य से पीड़ित होंगे उन्हें अलग किया जाता है)। मेरे वचनों के सामने आते ही, मैंने उन लोगों को अलग कर दिया है जिन्हें आशीष मिलेगा और जो दुर्भाग्य से पीड़ित होंगे। यह सब अत्यंत स्पष्ट है और मैं इसे एक नज़र में देख सकता हूँ। (यह मेरी मानवता के संबंध में बोला जाता है, इसलिए यह मेरे पूर्वनियतन और चयन के विपरीत नहीं है।) मैं पहाड़ों और नदियों और सभी चीजों पर, ब्रह्मांड के अन्तरिक्ष में घूमता हूँ, हर जगह को देखता हूँ और हर स्थान को शुद्ध करता हूँ, ताकि उन अशुद्ध स्थानों और असंयमी भूमियों का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा और मेरे वचनों के कारण जल कर शून्य हो जाएगा। मेरे लिए, सब कुछ आसान है। यदि अभी वह समय होता जो मैंने दुनिया को नष्ट करने के लिए पूर्वनियत किया था, तो मैं इसे एक वचन से निगल सकता था, लेकिन अभी वह समय नहीं है। इससे पहले कि मैं यह कार्य करूँगा, सभी को तैयार अवश्य रहना चाहिए, ताकि मेरी योजना अस्तव्यस्त और मेरा प्रबंधन बाधित न हो। मुझे पता है कि इसे उचित तरीके से कैसे करना है: मेरे पास मेरी बुद्धि है और मेरे पास मेरी अपनी व्यवस्था है। लोगों को अवश्य एक अँगुली भी नहीं हिलानी चाहिए—मेरे हाथ से नहीं मारे जाने के लिए सावधान रहो; यह पहले से ही मेरे प्रशासनिक आदेशों को स्पर्श करता है। इससे कोई व्यक्ति मेरे प्रशासनिक आदेशों की कठोरता को देख सकता है, और कोई मेरे प्रशासनिक आदेशों के सिद्धांतों को देख सकता है, जिसमें दो पहलू शामिल हैं: एक ओर तो मैं उन सभी को मारता हूँ जो मेरी इच्छा के अनुरूप नहीं हैं और जो मेरे प्रशासनिक आदेशों को अपमानित करते हैं; दूसरी ओर, अपने कोप में मैं उन सभी को शाप देता हूँ जो मेरे प्रशासनिक आदेशों को अपमानित करते हैं। ये दोनों पहलू अपरिहार्य हैं और मेरे प्रशासनिक आदेशों के कार्यकारी सिद्धांत हैं। चाहे लोग कितने ही वफादार क्यों न हों, सभी के साथ इन दोनों सिद्धांतों के अनुसार, बिना भावना के व्यवहार किया जाता है। यह मेरी धार्मिकता को दर्शाने के लिए पर्याप्त है और मेरे प्रताप और मेरे कोप को दर्शाने के लिए पर्याप्त है, जो सभी पार्थिव चीज़ों, सभी सांसारिक चीज़ों और उन सभी चीज़ों को भस्म कर देगा जो मेरी इच्छाओं के अनुरूप नहीं हैं। मेरे वचनों में रहस्य छुपे हैं, और मेरे वचनों में रहस्यों को भी प्रकट किया गया है, इसलिए मानव धारणा में, मानव मन में, मेरे वचन सदैव समझ से बाहर हैं और मेरा हृदय सदैव अथाह है। दूसरे शब्दों में, मुझे मनुष्यों को अवश्य उनकी धारणाओं और सोच से बाहर करना होगा। यह मेरी प्रबंधन योजना का सबसे महत्वपूर्ण अंश है। मुझे अपने ज्येष्ठ पुत्रों को पाने के लिए और उन चीजों को पूरा करने के लिए जो मैं करना चाहता हूँ इसे इसी तरह से अवश्य करना होगा।

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

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