परमेश्वर के दैनिक वचन | "संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन : अध्याय 26" | अंश 63

राज्य में, सृष्टि की असंख्य चीज़ें पुनः जीवित होना और अपनी जीवन शक्ति फिर से प्राप्त करना आरम्भ करती हैं। पृथ्वी की अवस्था में परिवर्तनों के कारण, एक भूमि और दूसरी भूमि के बीच की सीमाएँ भी खिसकना शुरू करती हैं। पूर्व काल में, मैं भविष्यवाणी कर चुका हूँ: जब भूमि से भूमि विभाजित हो जाती है, और भूमि से भूमि संयुक्त हो जाती है, तो यही वह समय होगा जब मैं राष्ट्र को तोड़-फोड़ कर टुकड़े-टुकड़े कर दूँगा। इस समय, मैं सारी सृष्टि को फिर से नया करूँगा और समस्त ब्रहमाण्ड को पुनः-विभक्त करूँगा, इस प्रकार पूरे विश्व को व्यवस्थित रूप से रखूँगा, और इसकी पुरानी अवस्था को नए में रूपान्तरित कर दूँगा। यह मेरी योजना है। ये मेरे कार्य हैं। जब संसार के सभी राष्ट्र और लोग मेरे सिंहासन के सामने लौटते हैं, तो उसके बाद मैं स्वर्ग के सारी उपहारों को लेकर उन्हें मानवीय संसार को दे दूँगा, ताकि, मेरे कारण, वह बेजोड़ उपहारों से लबालब भर जाएगा। किन्तु जब तक पुराना संसार निरन्तर बना रहता है, मैं सारे विश्व में खुले तौर पर अपनी प्रशासनिक आज्ञाओं की घोषणा करते हुए, अपने प्रचण्ड प्रकोप को इनके राष्ट्रों के ऊपर तेजी से फेंकूँगा, और जो कोई उनका उल्लंघन करता है उनको ताड़ना दूँगा:

जैसे ही मैं बोलने के लिए विश्व की तरफ अपने चेहरे को घुमाता हूँ, सारी मानवजाति मेरी आवाज़ को सुनती है, और उसके बाद उन सभी कार्यों को देखती है जिसे मैंने समूचे ब्रह्माण्ड में गढ़ा है। वे जो मेरी इच्छा के विरूद्ध जाते हैं, अर्थात्, जो मनुष्य के कार्यों से मेरा विरोध करते हैं, वे मेरी ताड़ना के अधीन नीचे गिर जाएँगे। मैं स्वर्ग के असंख्य तारों को लूँगा और उन्हें फिर से नया कर दूँगा, और मेरे कारण सूर्य और चन्द्रमा को नया बना दिया जाएगा—आकाश अब और वैसा नहीं रहेगा जैसा वह था; पृथ्वी पर बेशुमार चीज़ों को फिर से नया बना दिया जाएगा। मेरे वचनों के माध्यम से सभी पूर्ण हो जाएँगे। विश्व के भीतर अनेक राष्ट्रों को नए सिरे से विभक्त कर दिया जाएगा और मेरे राष्ट्र के द्वारा बदल दिया जाएगा, जिसकी वजह से पृथ्वी के राष्ट्र हमेशा हमेशा के लिए विलुप्त हो जाएँगे और एक राष्ट्र बन जाएँगे जो मेरी आराधना करता हो; पृथ्वी के सभी राष्ट्रों को नष्ट कर दिया जाएगा, और उनका अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। विश्व के भीतर मनुष्यों में, वे सभी जो शैतान से संबंध रखते हैं उनका सर्वनाश कर दिया जाएगा; वे सभी जो शैतान की आराधना करते हैं उन्हें जलती हुई आग के द्वारा नीचा दिखाया जाएगा—अर्थात्, उनको छोड़कर जो अभी इस धारा के अन्तर्गत हैं, बाकियों को राख में बदल दिया जाएगा। जब मैं बहुत से लोगों को ताड़ना देता हूँ, तो वे जो, भिन्न-भिन्न अंशों में, धार्मिक संसार में हैं, मेरे कार्यों के द्वारा जीत लिए जा कर मेरे राज्य में लौट आएँगे, क्योंकि उन्होंने एक श्वेत बादल पर सवार पवित्र जन के आगमन को देख लिया होगा। समस्त मानवता अपने-अपने स्वभाव का अनुसरण करेगी, और जो कुछ उसने किया है उससे भिन्न-भिन्न ताड़नाएँ प्राप्त करेगी। वे जो मेरे विरूद्ध खड़े हुए हैं सभी नष्ट हो जाएँगे; जहाँ तक उनकी बात है जिन्होंने पृथ्वी पर अपने कार्यों में मुझे शामिल नहीं किया है, वे, क्योंकि उन्होंने जिस प्रकार अपने आपको दोषमुक्त किया है, पृथ्वी पर मेरे पुत्रों और मेरे लोगों के शासन के अधीन निरन्तर बने रहेंगे। मैं अपने महान कार्य की समाप्ति की घोषणा करने के लिए पृथ्वी पर अपनी ध्वनि आगे करते हुए अपने आपको असंख्य लोगों और असंख्य राष्ट्रों के सामने प्रकट करूँगा, ताकि समस्त मानवजाति अपनी आँखों से देखे।

जैसे-जैसे मेरी आवाज़ उत्सुकता में गहरी होती है, मैं विश्व की दशा का भी अवलोकन कर रहा हूँ। मेरे वचनों के माध्यम से, सृष्टि की असंख्या चीज़ों को नया बनाया जाता है। स्वर्ग बदलता है, और पृथ्वी भी बदलती है। मानवता अपने मूल रूप में उजागर होती है और, धीरे-धीरे, प्रत्येक अपने स्वभाव के अनुसार उजागर होता है, और मनुष्य अकस्मात् ही अपने अपने परिवारों के आँचल में जाने के लिए अपना रास्ता ढूँढ़ लेता है। इस पर, मुझे बहुत अधिक प्रसन्न होगी। मैं विदारण से मुक्त हूँ, अकस्मात् ही मेरा महान कार्य सम्पूर्ण हो जाता है, अकस्मात् ही सृष्टि की सभी असंख्य चीज़ें रूपान्तरित हो जाती हैं। जब मैंने संसार को बनाया था, तब मैंने सभी चीज़ों को उसके स्वभाव के अनुसार तराशा था, और प्रत्येक गोचर रूप की हर चीज़ को उसके स्वभाव के साथ एक साथ इकट्ठा किया था। ज्यों ही मेरी प्रबन्धन योजना का अंत नज़दीक आएगा, मैं सृष्टि की भूतपूर्व की दशा पुनःस्थापित कर दूँगा, मैं प्रत्येक चीज़ को गहराई से बदलते हुए, हर चीज को उसी प्रकार पुनःस्थापित कर दूँगा जैसी वह मूल रूप से थी, ताकि हर चीज़ मेरी योजना के आँचल में वापस लौट जाए। समय आ चुका है! मेरी योजना की अंतिम अवस्था लगभग पूरी होने ही वाली है। आह, पुराना अपवित्र संसार! तुम निश्चित रूप से मेरे वचनों के आधीन आ जाओगे! मेरी योजना के द्वारा तुम निश्चित रूप से मिटा दिए जाओगे! आह, सृष्टि की असंख्य चीज़ें! तुम सभी को मेरे वचनों के भीतर नया जीवन मिलेगा, अब तुम्हारे पास एक सम्पूर्ण प्रभुत्वसम्पन्न प्रभु है! आह, शुद्ध और निष्कलंक नया संसार! तुम निश्चय ही मेरी महिमा के भीतर पुनःजीवित हो जाओगे! आह, सिय्योन पर्वत! अब और मौन मत रह। मैं विजयोल्लास में लौटा हूँ! सृष्टि के बीच से, मैं सारी पृथ्वी का सूक्ष्म परीक्षण करता हूँ। पृथ्वी पर मानवजाति ने एक नए जीवन की शुरूआत की है, और एक नई आशा को जीत लिया है। आह, मेरे लोगो! तुम लोग मेरे प्रकाश के भीतर जीवन में वापस कैसे नहीं आ सकते हो? तुम लोग मेरे मार्गदर्शन के अधीन आनन्द से उछल कैसे नहीं सकते हो? भूमियाँ उल्लास में चिल्ला रही हैं, जल कलकल की आवाज़ के साथ आनन्द से ठहाका मारकर हँस रहे हैं! आह, पुनर्जीवित इस्राएल! मेरे द्वारा पूर्वनियति के कारण तुम क्यों गर्व महसूस नहीं कर सकते हो? कौन रोया है? किसने विलाप किया है? पुराना इस्राएल समाप्त हो गया है, और आज का इस्राएल संसार में उदय हुआ है, सीधा खड़ा हुआ है और ऊँचा उठता जा रहा है, और समस्त मानवता के हृदय में उठ गया है। आज का इस्राएल मेरे लोगों के माध्यम से अस्तित्व के स्रोत को निश्चित रूप से प्राप्त करेगा! आह, घृणित मिस्र! निश्चित रूप से तू अभी भी मेरे विरूद्ध खड़ा नहीं होता है? तू कैसे मेरी दया का लाभ उठा सकता है और मेरी ताड़ना से बचने की कोशिश कर सकता है? तू मेरी ताड़ना के भीतर कैसे अस्तित्व में बना नहीं रह सकता है? वे सभी जिनसे मैं प्रेम करता हूँ वे निश्चय ही अनन्त काल तक जीवित रहेंगे, और वे सभी जो मेरे विरूद्ध खड़े होते हैं उन्हें निश्चय ही मेरे द्वारा अनन्त काल तक ताड़ना दी जाएगी। क्योंकि मैं एक ईर्ष्यालु परमेश्वर हूँ, मैं उन सब के कारण जो मनुष्यों ने किया है उन्हें हल्के में नहीं छोडूँगा। मैं पूरी पृथ्वी पर निगरानी रखूँगा, और, संसार की पूर्व दिशा में धार्मिकता, प्रताप, कोप और ताड़ना के साथ प्रकट हो जाऊँगा, और मैं मानवता के असंख्य मेज़बानों पर स्वयं को प्रकट करूँगा!

— “वचन देह में प्रकट होता है” से उद्धृत

परमेश्वर बहाल कर देगा सृजन की पूर्व स्थिति

I

अपने गहरे होते वचन के साथ, परमेश्वर की नज़र है कायनात पर। हर सृजन बनता है नया, परमेश्वर के वचनों की बुनियाद पर। स्वर्ग बदल रहा है, धरती बदल रही है, इंसान अपनी असलियत दिखा रहा है। धरती बनाई जब परमेश्वर ने, तो तराशी हर चीज़ उसके स्वभाव के अनुरूप। गोचर रूप की हर चीज़ को संजोया एक साथ, उसके स्वभाव के अनुरूप। परमेश्वर का प्रबंधन जब करीब होगा समापन के, तो हर चीज़ बहाल होगी अपने मूल स्वरूप में। थोड़ा-थोड़ा, धीरे-धीरे हो रहा है इंसान वर्गीकृत अपनी किस्म में, है जिससे रिश्ता उसका, लौट रहा है उस परिवार में। ख़ुश है परमेश्वर इस बात से। कुछ भी नहीं है जो परेशाँ कर सके उसे। परमेश्वर का महान कार्य हो जाता है पूरा, इससे पहले कि कोई जान सके। इससे पहले कि ख़बर हो उन्हें, बदल जाती हैं चीज़ें। थोड़ा-थोड़ा, धीरे-धीरे हो रहा है इंसान वर्गीकृत अपनी किस्म में।

II

सृजन के समय जो स्वरूप था चीज़ों का, परमेश्वर बहाल कर देगा उसे। परमेश्वर बदल देता है हर चीज़ को पूरी तरह, ले आता है वापस उन्हें अपनी योजना में। अब वक्त आ गया है! परमेश्वर की योजना का समापन करीब है। ओ मलिन, गंदे जगत, होगा तेरा पतन परमेश्वर के वचन तले। परमेश्वर की योजना की बदौलत शून्य हो जाएगा तू। परमेश्वर की बनाई हर चीज़, पाएगी नवजीवन उसके वचन में, होगा उनके पास एक सार्वभौम प्रभु। ओ पुनीत नव-जगत, परमेश्वर की महिमा में सजीव हो उठोगे तुम। ओ सिय्योन पर्वत, ख़त्म कर तू अपनी ख़ामोशी, लौटा है परमेश्वर विजेता होकर। धरती के हर हिस्से पर, हर सृजन पर नज़र है उसकी। मानवता ने धरती पर शुरू किया है नया जीवन एक नई आशा से। थोड़ा-थोड़ा, धीरे-धीरे हो रहा है इंसान वर्गीकृत अपनी किस्म में।

III

ओ परमेश्वर-जनो, क्या नहीं पाओगे पुनर्जीवन परमेश्वर के प्रकाश में तुम? परमेश्वर की अगुवाई, रहनुमाई में, क्या ख़ुशी से कूदोगे, हँसोगे नहीं तुम? धरती-पानी सब हर्षित हैं, सब हँसते हैं। इस्राएल भी हो उठा सजीव फिर से। क्या गर्व न होगा इस्राएल तुम्हें, पूर्वनियत कर दिया है परमेश्वर ने तुम्हें? कौन रोया कभी पहले? किसने किया विलाप कभी पहले? मिट चुका है पुराना इस्राएल। आज का इस्राएल उदित हो चुका है जगत में। बस चुका है ये लोगों के दिलों में। मिलता इसे जीवन-स्रोत परमेश्वर के लोगों से। ओ घृणित मिस्र! क्या अब भी ख़िलाफ़ जाएगा तू परमेश्वर के? परमेश्वर की दया के कारण, कैसे बच पाएगा तू उसकी ताड़ना से? जिसे परमेश्वर का प्रेम मिले, वो सदा रहेगा। जो जाए ख़िलाफ़ परमेश्वर के, वो सदा दंड पाएगा। क्योंकि, परमेश्वर, ईर्ष्यालु परमेश्वर है, वो छोड़ता नहीं कर्म लोगों के आसानी से। वो खोज-बीन करता है धरती के हर हिस्से की। धार्मिकता और प्रताप लेकर, रोष और ताड़ना लेकर, धरती के लोगों के सामने, प्रकट करने ख़ुद को, वो अवतरित होता है, दुनिया के पूरब में, वो अवतरित होता है, दुनिया के पूरब में, वो अवतरित होता है, दुनिया के पूरव में।

“मेमने का अनुसरण करना और नए गीत गाना” से

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