31. उत्पीड़न और क्लेशों से गुज़रने के सिद्धांत

(1) यह जान लो कि परमेश्वर की बुद्धि शैतान के छल-कपट से ऊपर है, और उत्पीड़न और क्लेश परमेश्वर की अनुमति से होते हैं। वे मनुष्य को उजागर और परिपूर्ण करने का काम करते हैं;

(2) उत्पीड़ित किये जाने और क्लेशों के अधीन होने का अनुभव व्यक्ति को स्पष्ट रूप से बड़े लाल अजगर, शैतान, के राक्षसी सार और घिनौने चेहरे को देखने में, और उसके द्वारा, परमेश्वर की पवित्रता और धार्मिकता को जानने में, सक्षम बनाता है;

(3) उत्पीड़न और क्लेश के माध्यम से, कोई अपनी स्वयं की भीरूता, कमी, और भेद्यता की झलक प्राप्त करता है, जिसकी लज्जा उसे इस तथ्य के प्रति जागृत करती है कि सत्य के बिना, व्यक्ति असहाय होता है;

(4) उत्पीड़न और क्लेश लोगों को उजागर करने और हटाने में विशिष्ट रूप से सक्षम होते हैं। वे उन लोगों को जो वास्तव में परमेश्वर से प्रेम करते हैं, शैतान से नफ़रत करने और बड़े लाल अजगर का त्याग करने के साथ-साथ परमेश्वर की धार्मिकता और पवित्रता की प्रशंसा करने में, परिपूर्ण बना सकते है।

संदर्भ के लिए बाइबल के पद:

“जो शरीर को घात करते हैं, पर आत्मा को घात नहीं कर सकते, उनसे मत डरना; पर उसी से डरो, जो आत्मा और शरीर दोनों को नरक में नष्‍ट कर सकता है” (मत्ती 10:28)।

“जो अपने प्राण बचाता है, वह उसे खोएगा; और जो मेरे कारण अपना प्राण खोता है, वह उसे पाएगा” (मत्ती 10:39)।

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:

तुम सब लोगों को शायद ये वचन स्मरण हों : "क्योंकि हमारा पल भर का हल्का सा क्लेश हमारे लिये बहुत ही महत्वपूर्ण और अनन्त महिमा उत्पन्न करता जाता है।" तुम सब लोगों ने पहले भी ये वचन सुने हैं, किंतु तुममें से कोई भी इनका सच्चा अर्थ नहीं समझा। आज, तुम उनकी सच्ची महत्ता से गहराई से अवगत हो। ये वचन परमेश्वर द्वारा अंत के दिनों के दौरान पूरे किए जाएँगे, और वे उन लोगों में पूरे किए जाएँगे जिन्हें बड़े लाल अजगर द्वारा निर्दयतापूर्वक उत्पीड़ित किया गया है, उस देश में जहाँ वह कुण्डली मारकर बैठा है। बड़ा लाल अजगर परमेश्वर को सताता है और परमेश्वर का शत्रु है, और इसीलिए, इस देश में, परमेश्वर में विश्वास करने वाले लोगों को इस प्रकार अपमान और अत्याचार का शिकार बनाया जाता है, और परिणामस्वरूप, ये वचन तुम लोगों में, लोगों के इस समूह में, पूरे किए जाते हैं। चूँकि परमेश्वर का कार्य उस देश में आरंभ किया जाता है जो परमेश्वर का विरोध करता है, इसलिए परमेश्वर के कार्य को भयंकर बाधाओं का सामना करना पड़ता है, और उसके बहुत-से वचनों को संपन्न करने में समय लगता है; इस प्रकार, परमेश्वर के वचनों के परिणामस्वरूप लोग शुद्ध किए जाते हैं, जो कष्ट झेलने का भाग भी है। परमेश्वर के लिए बड़े लाल अजगर के देश में अपना कार्य करना अत्यंत कठिन है—परंतु इसी कठिनाई के माध्यम से परमेश्वर अपने कार्य का एक चरण पूरा करता है, अपनी बुद्धि और अपने अद्भुत कर्म प्रत्यक्ष करता है, और लोगों के इस समूह को पूर्ण बनाने के लिए इस अवसर का उपयोग करता है। लोगों की पीड़ा के माध्यम से, उनकी क्षमता के माध्यम से, और इस कुत्सित देश के लोगों के समस्त शैतानी स्वभावों के माध्यम से परमेश्वर अपना शुद्धिकरण और विजय का कार्य करता है, ताकि इससे वह महिमा प्राप्त सके, और ताकि उन्हें प्राप्त कर सके जो उसके कर्मों की गवाही देंगे। इस समूह के लोगों के लिए परमेश्वर द्वारा किए गए सारे त्यागों का संपूर्ण महत्व ऐसा ही है। अर्थात, परमेश्वर विजय का कार्य उन्हीं लोगों के माध्यम से करता है जो उसका विरोध करते हैं, और केवल इसी प्रकार परमेश्वर की महान सामर्थ्य प्रत्यक्ष की जा सकती है। दूसरे शब्दों में, केवल अशुद्ध देश के लोग ही परमेश्वर की महिमा का उत्‍तराधिकार पाने के योग्य हैं, और केवल यही परमेश्वर की महान सामर्थ्‍य को उभारकर सामने ला सकता है। इसी कारण मैं कहता हूँ कि अशुद्ध देश से ही, और अशुद्ध देश में रहने वालों से ही परमेश्वर की महिमा प्राप्त की जाती है। ऐसी ही परमेश्वर की इच्छा है। यीशु के कार्य का चरण भी ऐसा ही था : उसे केवल उन्हीं फरीसियों के बीच महिमामंडित किया जा सका था जिन्होंने उसे सताया था; यदि फरीसियों द्वारा किया गया उत्पीड़न और यहूदा द्वारा दिया गया धोखा नहीं होता, तो यीशु का उपहास नहीं उड़ाया जाता या उसे लांछित नहीं किया जाता, सलीब पर तो और भी नहीं चढ़ाया जाता, और इस प्रकार उसे कभी महिमा प्राप्त नहीं हो सकती थी। जहाँ परमेश्वर प्रत्येक युग में कार्य करता है, और जहाँ वह देह में काम करता है, वहीं वह महिमा प्राप्त करता है और वहीं वह उन्हें प्राप्त करता है जिन्हें वह प्राप्त करना चाहता है। यही परमेश्वर के कार्य की योजना है, और यही उसका प्रबंधन है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'क्या परमेश्वर का कार्य उतना सरल है जितना मनुष्य कल्पना करता है?' से उद्धृत

जब मैं औपचारिक रूप से अपना कार्य शुरू करता हूँ, तो सभी लोग वैसे ही चलते हैं जैसे मैं चलता हूँ, इस तरह कि समस्त संसार के लोग मेरे साथ कदम मिलाते हुए चलने लगते हैं, संसार भर में "उल्लास" होता है, और मनुष्य को मेरे द्वारा आगे की ओर प्रेरित किया जाता है। परिणामस्वरूप, स्वयं बड़ा लाल अजगर मेरे द्वारा उन्माद और व्याकुलता की स्थिति में डाल दिया जाता है, और वह मेरा कार्य करता है और अनिच्छुक होने के बावजूद अपनी स्वयं की इच्छाओं का अनुसरण करने में समर्थ नहीं होता, और उसके पास मेरे नियंत्रण में समर्पित होने के अलावा कोई विकल्प नहीं रहता। मेरी सभी योजनाओं में बड़ा लाल अजगर मेरी विषमता, मेरा शत्रु, और साथ ही मेरा सेवक भी है; उस हैसियत से मैंने उससे अपनी "अपेक्षाओं" को कभी भी शिथिल नहीं किया है। इसलिए, मेरे देहधारण के काम का अंतिम चरण उसके घराने में पूरा होता है। इस तरह से बड़ा लाल अजगर मेरी उचित तरीके से सेवा करने में अधिक समर्थ है, जिसके माध्यम से मैं उस पर विजय पाऊँगा और अपनी योजना पूरी करूँगा।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन' के 'अध्याय 29' से उद्धृत

परमेश्वर बुरी आत्माओं के कार्य के एक हिस्से का उपयोग मानव-जाति के एक हिस्से को पूर्ण बनाने के लिए करने का इरादा रखता है, ताकि ये लोग हैवानों के अन्यायपूर्ण कार्यों को पूरी तरह देखने में सक्षम हो सकें और वास्तव में अपने "पूर्वजों" को जान सकें। केवल इसी तरह से मनुष्य पूरी तरह से स्वतंत्र हो सकते हैं, न केवल शैतान के वंशजों को, बल्कि शैतान के पूर्वजों को भी त्यागकर। बड़े लाल अजगर को पूरी तरह से हराने में यह परमेश्वर का मूल इरादा है : ताकि सभी मनुष्य बड़े लाल अजगर का असली स्वरूप जानें, उसका मुखौटा पूरी तरह से उतारकर उसका वास्तविक स्वरूप देख सकें। परमेश्वर यही प्राप्त करना चाहता है, और यही पृथ्वी पर उसके द्वारा किए गए समस्त कार्य का अंतिम लक्ष्य है; और यही उसका सभी मनुष्यों में हासिल करने का उद्देश्य है। इसे परमेश्वर के प्रयोजन के लिए सभी चीज़ों को जुटाने के रूप में जाना जाता है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचनों के रहस्य की व्याख्या' के 'अध्याय 41' से उद्धृत

अंत के दिनों के लोगों के समूह के बीच मेरा कार्य एक अभूतपूर्व उद्यम है, और इस प्रकार, मेरी खातिर सभी लोगों को आखिरी कठिनाई का सामना करना है, ताकि मेरी महिमा सारे ब्रह्मांड को भर सके। क्या तुम लोग मेरी इच्छा को समझते हो? यह आखिरी अपेक्षा है जो मैं मनुष्य से करता हूँ, जिसका अर्थ है, मुझे आशा है कि सभी लोग बड़े लाल अजगर के सामने मेरे लिए सशक्त और शानदार ज़बर्दस्त गवाही दे सकते हैं, कि वे मेरे लिए अंतिम बार स्वयं को समर्पित कर सकते हैं और एक आखिरी बार मेरी अपेक्षाओं को पूरा कर सकते हैं। क्या तुम लोग वाकई ऐसा कर सकते हो? तुम लोग अतीत में मेरे दिल को संतुष्ट करने में असमर्थ थे—क्या तुम लोग अंतिम बार इस प्रतिमान को तोड़ सकते हो? मैं लोगों को आत्म-चिंतन करने का मौका देता हूँ; मुझे अंतिम जवाब देने से पहले, मैं उन्हें सावधानी से विचार करने का अवसर देता हूँ—क्या ऐसा करना गलत है? मैं मनुष्य की प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा करता हूँ, मैं उसके "प्रत्युत्तर पत्र" का इंतज़ार करता हूँ—क्या तुम लोगों को मेरी अपेक्षाओं को साकार कर पाने का भरोसा है?

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन' के 'अध्याय 34' से उद्धृत

तुम में मेरी हिम्मत होनी चाहिए, जब उन रिश्तेदारों का सामना करने की बात आए जो विश्वास नहीं करते, तो तुम्हारे पास सिद्धांत होने चाहिए। लेकिन तुम्हें मेरी खातिर किसी भी अन्धकार की शक्ति से हार नहीं माननी चाहिए। पूर्ण मार्ग पर चलने के लिए मेरी बुद्धि पर भरोसा रखो; शैतान के किसी भी षडयंत्र को काबिज़ न होने दो। अपने हृदय को मेरे सम्मुख रखने हेतु पूरा प्रयास करो, मैं तुम्हें आराम दूँगा, तुम्हें शान्ति और आनंद प्रदान करूँगा। दूसरों के सामने एक विशेष तरह का होने का प्रयास मत करो; क्या मुझे संतुष्ट करना अधिक मूल्य और महत्व नहीं रखता? मुझे संतुष्ट करने से क्या तुम और भी अनंत और जीवनपर्यंत शान्ति या आनंद से नहीं भर जाओगे? तुम्हारी आज की तकलीफ़ें बताती हैं कि तुम्हारी आशीष भविष्य में कितनी बड़ी होगी; वे अवर्णनीय हैं। तुम्हें जो आशीष प्राप्त होगी, वे कितनी बड़ी होंगी, ये तुम नहीं जानते; तुम उसकी कल्पना भी नहीं कर सकते। आज वह साकार हो गयी है; बिल्कुल वास्तविक! यह बहुत दूर नहीं है—क्या तुम उसे देख सकते हो? इसका हर अंतिम अंश मुझमें है; आगे का मार्ग कितना रोशन है! अपने आंसू पोंछो, तथा दुःख और दर्द महसूस मत करो। सब-कुछ मेरे हाथों से व्यवस्थित किया जाता है, और मेरा लक्ष्य यह है कि तुम्हें जल्द विजेता बनाऊं और तुम्हें अपने साथ महिमा में ले चलूँ। तुम्हारे साथ जो कुछ होता है, उसके अनुरूप तुम्हें आभारी होना चाहिए और भरपूर स्तुति करनी चाहिए; इससे मुझे गहरी संतुष्टि मिलेगी।

मसीह का सर्वोत्कृष्ट जीवन पहले ही प्रकट हो चुका है; ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे तुम डरो। शैतान हमारे पैरों के नीचे हैं, और उनका समय अधिक लंबा नहीं होगा। जागो! अनैतिकता के संसार को त्यागो; मृत्यु के गर्त से खुद को स्वतंत्र करो! चाहे कुछ भी हो जाए, मेरे प्रति निष्ठावान रहो, और बहादुरी से आगे बढ़ो; मैं तुम्हारी शक्ति की चट्टान हूँ, इसलिए मुझ पर भरोसा रखो!

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'आरंभ में मसीह के कथन' के 'अध्याय 10' से उद्धृत

इसके बावजूद कि शैतान कितना "सामर्थी" है, इसके बावजूद कि वह कितना ढीठ और महत्वाकांक्षी है, इसके बावजूद कि नुकसान पहुँचाने की उसकी क्षमता कितनी बड़ी है, इसके बावजूद कि उसकी तकनीक का दायरा कितना व्यापक है जिससे वह मनुष्य को भ्रष्ट करता और लुभाता है, इसके बावजूद कि उसके छल और प्रपंच कितने चतुर हैं जिससे वह मनुष्य को डराता है, इसके बावजूद कि वह रूप जिसमें वह अस्तित्व में रहता है कितना परिवर्तनशील है, वह एक भी जीवित प्राणी को बनाने में कभी सक्षम नहीं हुआ है, सभी चीज़ों के अस्तित्व के लिए व्यवस्थाओं और नियमों को निर्धारित करने में कभी सक्षम नहीं हुआ है, किसी भी जीवित या निर्जीव वस्तु पर शासन और नियन्त्रण करने में कभी सक्षम नहीं हुआ है। ब्रह्मांड और नभमंडल के भीतर, एक भी व्यक्ति या वस्तु नहीं है जो उससे उत्पन्न हुआ हो या उसके द्वारा अस्तित्व में बना हुआ हो; एक भी व्यक्ति या वस्तु नहीं है जिस पर उसके द्वारा शासन किया जाता हो या उसके द्वारा नियन्त्रण किया जाता हो। इसके विपरीत, उसे न केवल परमेश्वर के प्रभुत्व के अधीन जीना है, बल्कि, उसे परमेश्वर के सारे आदेशों और आज्ञाओं को भी मानना होगा। परमेश्वर की अनुमति के बिना शैतान के लिए भूमि की सतह पर पानी की एक बूँद या रेत के एक कण को भी छूना कठिन है; परमेश्वर की अनुमति के बिना, शैतान के पास इतनी भी आज़ादी नहीं है कि वह भूमि की सतह पर से एक चींटी को हटा सके, परमेश्वर द्वारा सृजित इंसान को हटाने की तो बात ही क्या है। परमेश्वर की नज़रों में शैतान पहाड़ों के सोसन फूलों, हवा में उड़ते हुए पक्षियों, समुद्र की मछलियों और पृथ्वी के कीड़े-मकौड़ों से भी कमतर है। सभी चीज़ों के बीच में उसकी भूमिका यह है कि वह सभी चीज़ों की सेवा करे, मानवजाति के लिए कार्य करे, परमेश्वर और उसकी प्रबंधकीय योजना के कार्य करे। इसके बावजूद कि उसका स्वभाव कितना ईर्ष्यालु है, उसका सार कितना बुरा है, एकमात्र कार्य जो वो कर सकता है वह है आज्ञाकारिता से अपने कार्यों को करना : परमेश्वर की सेवाके योग्य होना, परमेश्वर के कार्यों में पूरक होना। शैतान का सार-तत्व और हैसियत ऐसे ही हैं। उसका सार जीवन से जुड़ा हुआ नहीं है, सामर्थ्‍य से जुड़ा हुआ नहीं है, अधिकार से जुड़ा हुआ नहीं है; वह परमेश्वर के हाथों में मात्र एक खिलौना है, परमेश्वर की सेवा में लगा मात्र एक मशीन है!

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I' से उद्धृत

इस समय वे दर्शन और वे सत्य जिन्हें तुम समझते हो, वे तुम्हारे भविष्य के अनुभवों की एक नींव की रचना कर रहे हैं; भविष्य के क्लेश में तुम सब इन वचनों के व्यावहारिक अनुभव को प्राप्त करोगे। बाद में, जब परीक्षाएँ तुम्हारे ऊपर आएँगी और तुम क्लेश से होकर जाओगे, तो तुम उन वचनों के बारे में सोचोगे जिन्हें तुम आज कहते हो: चाहे कैसे भी क्लेश, परीक्षाओं, या बड़े कष्टों का मैं अनुभव करूँ, मुझे परमेश्वर को संतुष्ट करना आवश्यक है। पतरस के अनुभव के बारे में सोचें, और अय्यूब के अनुभव के बारे में सोचें—तुम आज के वचनों के द्वारा उत्तेजित हो जाओगे। केवल इस प्रकार से तुम्हारा विश्वास प्रेरित हो सकता है। उस समय, पतरस ने कहा कि वह परमेश्वर के दंड और उसकी ताड़ना को प्राप्त करने के योग्य नहीं था, और तब तक तुम भी सब लोगों को अपने द्वारा परमेश्वर के धर्मी स्वभाव को दिखाने के लिए तैयार हो जाओगे। तुम तत्परता के साथ उसके दंड और उसकी ताड़ना को स्वीकार करने के लिए तैयार हो जाओगे, और उसका दंड, उसकी ताड़ना, और उसका श्राप तुम्हारे लिए राहत का कारण होगा। अब, तुम्हारा सत्य से लैस न होना बिलकुल स्वीकार्य नहीं है। न केवल तुम भविष्य में दृढ़ खड़े रहने में असमर्थ होओगे, बल्कि वर्तमान कार्य में से होकर जाने में भी शायद सक्षम नहीं होओगे। इस रीति से, क्या तुम निष्कासन और सजा के पात्र नहीं होओगे? अभी ऐसी कोई वास्तविकताएँ नहीं हैं जो तुम पर आ पड़ी हों, और जिन किन्हीं पहलुओं में तुममें घटी है, मैंने उनमें तुम्हारी पूर्ति की है; मैं हर पहलू से बात करता हूँ। तुम लोगों ने वास्तव में अधिक दुःख नहीं सहे हैं; तुम लोग केवल वही ले लेते हो जो उपलब्ध होता है, तुम लोगों ने कोई मूल्य नहीं चुकाया है, और इससे बढ़कर तुम लोगों के पास अपने सच्चे अनुभव और अंतर्दृष्टियाँ भी नहीं हैं। इसलिए, जो तुम समझते हो वह तुम्हारी सच्ची क्षमता नहीं है। तुम लोग केवल समझ, ज्ञान और दृष्टि तक सीमित हो, परंतु तुमने अधिकाँश कटनी नहीं काटी है। यदि मैंने तुम लोगों पर कभी ध्यान नहीं दिया होता बल्कि तुम्हें तुम्हारे अपने घर में अनुभवों से होकर जाने देता, तो तुम बहुत पहले ही निकलकर इस बड़े संसार में वापस चले गए होते। जिस मार्ग पर तुम लोग भविष्य में चलोगे वह दुःख का मार्ग होगा, और यदि तुम लोग मार्ग के वर्तमान चरण में अच्छी तरह से चलते हो, और जब बाद में तुम बड़े क्लेश से होकर जाते हो, तो तुम लोगों के पास एक साक्षी होगी। अगर तुम मानवीय जीवन के महत्व को समझते हो, और तुमने मानवीय जीवन के सही मार्ग को अपनाया है, और अगर भविष्य में परमेश्वर तुमसे जैसा भी व्यवहार करे, तुम बिना किन्हीं शिकायतों या विकल्पों के परमेश्वर की योजनाओं के प्रति समर्पित हो जाओगे, और तुम्हें परमेश्वर से कोई मांगें भी नहीं रहेंगी, इस रीति से तुम महत्व से युक्त एक व्यक्ति होगे। अभी तक तुम क्लेश से होकर नहीं गए हो, इसलिए तुम किसी भी बात का पालन कर सकते हो। तुम कहते हो कि परमेश्वर जैसे भी अगुवाई करता है ठीक है, और कि तुम उसकी सारी योजनाओं के प्रति समर्पित रहोगे। परमेश्वर चाहे तुम्हें ताड़ना देता है या श्राप, तुम उसे संतुष्ट करने के लिए तैयार रहोगे। ऐसा कहकर जो अब तुम कहते हो वह जरुरी नहीं है कि तुम्हारी क्षमता को प्रस्तुत करे। अब तुम जो करने के लिए तैयार हो वह यह नहीं दर्शा सकता कि तुम अंत तक अनुसरण करने में सक्षम हो। जब बड़े क्लेश तुम पर आते हैं या जब तुम किसी सताव या उत्पीड़न से, या फिर बड़ी परीक्षाओं से होकर जाते हो, तो तुम उन शब्दों को नहीं कह पाओगे। यदि तुम उस प्रकार की समझ रख सकते हो तब तुम दृढ़ खड़े रहोगे, केवल यही तुम्हारी क्षमता होगी। उस समय पतरस कैसा था? उसने कहा: "प्रभु, मैं तेरे लिए अपना जीवन बलिदान कर दूँगा। यदि तू कहे कि मैं मरूँ, तो मैं मर जाऊँगा!" उस समय भी उसने इस रीति से प्रार्थना की थी, और उसने यह भी कहा था, "यदि दूसरे तुझसे प्रेम नहीं भी करते हैं तो भी मैं तुझसे अंत तक अवश्य प्रेम करूँगा। मैं हर समय तेरा अनुसरण करूँगा।" उस समय उसने यह कहा, परंतु जैसे ही परीक्षाएँ उस पर आईं, तो वह टूट गया और रोने लगा। तुम सब जानते हो कि पतरस ने तीन बार प्रभु का इनकार किया, है ना? ऐसे बहुत से लोग हैं जो तब रोएँगे और मानवीय निर्बलताओं को व्यक्त करेंगे जब परीक्षाएँ उन पर आ पड़ती हैं। तुम अपने स्वामी नहीं हो। इसमें, तुम स्वयं को नियंत्रित नहीं कर सकते। शायद आज तुम वास्तव में अच्छा कर रहे हो, परंतु वह इसलिए है क्योंकि तुम्हारे पास एक उपयुक्त वातावरण है। यदि कल यह बदल जाए, तो तुम अपनी कायरता और अयोग्यता को दिखाओगे, और तुम अपनी तुच्छता और अनुपयुक्तता को भी दिखाओगे। तुम्हारी "मर्दानगी" बहुत पहले ही बरबाद हो गई होगी, और कभी—कभी तुम हार मानकर बाहर भी निकल जाओगे। यह दिखाता है कि उस समय जो तुम समझते थे वह तुम्हारी वास्तविक क्षमता नहीं थी। एक व्यक्ति को लोगों की वास्तविक क्षमता को देखना आवश्यक होता है कि वे परमेश्वर से प्रेम करते हैं या नहीं, क्या वे वास्तव में परमेश्वर की योजना के प्रति समर्पित होने के योग्य हैं या नहीं, और क्या वे इस योग्य हैं या नहीं कि अपने सारे बल को वह प्राप्त करने में लगा दें जिसकी माँग परमेश्वर करता है और फिर भी परमेश्वर के प्रति समर्पित रहें और परमेश्वर को अपना सर्वोत्तम दें, फिर चाहे इसका अर्थ उनके द्वारा स्वयं को बलिदान चढ़ाना ही क्यों न हो।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'अपने मार्ग के अंतिम दौर में तुम्हें कैसे चलना चाहिए' से उद्धृत

राज्य के युग में मनुष्य को पूरी तरह से पूर्ण किया जाएगा। विजय के कार्य के पश्चात् मनुष्य को शुद्धिकरण और क्लेश का भागी बनाया जाएगा। जो लोग विजय प्राप्त कर सकते हैं और इस क्लेश के दौरान गवाही दे सकते हैं, वे वो लोग हैं जिन्हें अंततः पूर्ण बनाया जाएगा; वे विजेता हैं। इस क्लेश के दौरान मनुष्य से अपेक्षा की जाती है कि वह इस शुद्धिकरण को स्वीकार करे, और यह शुद्धिकरण परमेश्वर के कार्य की अंतिम घटना है। यह अंतिम बार है कि परमेश्वर के प्रबंधन के समस्त कार्य के समापन से पहले मनुष्य को शुद्ध किया जाएगा, और जो परमेश्वर का अनुसरण करते हैं, उन सभी को यह अंतिम परीक्षा स्वीकार करनी चाहिए, और उन्हें यह अंतिम शुद्धिकरण स्वीकार करना चाहिए। जो लोग क्लेश से व्याकुल हैं, वे पवित्र आत्मा के कार्य और परमेश्वर के मार्गदर्शन से रहित हैं, किंतु जिन्हें सच में जीत लिया गया है और जो सच में परमेश्वर की खोज करते हैं, वे अंततः डटे रहेंगे; ये वे लोग हैं, जिनमें मानवता है, और जो सच में परमेश्वर से प्रेम करते हैं। परमेश्वर चाहे कुछ भी क्यों न करे, इन विजयी लोगों को दर्शनों से वंचित नहीं किया जाएगा, और ये फिर भी अपनी गवाही में असफल हुए बिना सत्य को अभ्यास में लाएँगे। ये वे लोग हैं, जो अंततः बड़े क्लेश से उभरेंगे। भले ही आपदा को अवसर में बदलने वाले आज भी मुफ़्तख़ोरी कर सकते हों, किंतु अंतिम क्लेश से बच निकलने में कोई सक्षम नहीं है, और अंतिम परीक्षा से कोई नहीं बच सकता। जो लोग विजय प्राप्त करते हैं, उनके लिए ऐसा क्लेश जबरदस्त शुद्धिकरण हैं; किंतु आपदा को अवसर में बदलने वालों के लिए यह पूरी तरह से उनके उन्मूलन का कार्य है। जिनके हृदय में परमेश्वर है, उनकी चाहे किसी भी प्रकार से परीक्षा क्यों न ली जाए, उनकी निष्ठा अपरिवर्तित रहती है; किंतु जिनके हृदय में परमेश्वर नहीं है, वे अपने देह के लिए परमेश्वर का कार्य लाभदायक न रहने पर परमेश्वर के बारे में अपना दृष्टिकोण बदल लेते हैं, यहाँ तक कि परमेश्वर को छोड़कर चले जाते हैं। इस प्रकार के लोग ऐसे होते हैं जो अंत में डटे नहीं रहेंगे, जो केवल परमेश्वर के आशीष खोजते हैं और उनमें परमेश्वर के लिए अपने आपको व्यय करने और उसके प्रति समर्पित होने की कोई इच्छा नहीं होती। ऐसे सभी अधम लोगों को परमेश्वर का कार्य समाप्ति पर आने पर बहिष्कृत कर दिया जाएगा, और वे किसी भी प्रकार की सहानुभूति के योग्य नहीं हैं। जो लोग मानवता से रहित हैं, वे सच में परमेश्वर से प्रेम करने में अक्षम हैं। जब परिवेश सही-सलामत और सुरक्षित होता है, या जब लाभ कमाया जा सकता है, तब वे परमेश्वर के प्रति पूरी तरह से आज्ञाकारी रहते हैं, किंतु जब जो वे चाहते हैं, उसमें कमी-बेशी की जाती है या अंतत: उसके लिए मना कर दिया जाता है, तो वे तुरंत बगावत कर देते हैं। यहाँ तक कि एक ही रात के अंतराल में वे अपने कल के उपकारियों के साथ अचानक बिना किसी तुक या तर्क के अपने घातक शत्रु के समान व्यवहार करते हुए, एक मुसकराते, "उदार-हृदय" व्यक्ति से एक कुरूप और जघन्य हत्यारे में बदल जाते हैं। यदि इन पिशाचों को निकाला नहीं जाता, तो ये पिशाच बिना पलक झपकाए हत्या कर देंगे, तो क्या वे एक छिपा हुआ ख़तरा नहीं बन जाएँगे? विजय के कार्य के समापन के बाद मनुष्य को बचाने का कार्य हासिल नहीं किया जाता। यद्यपि विजय का कार्य समाप्ति पर आ गया है, किंतु मनुष्य को शुद्ध करने का कार्य नहीं; वह कार्य केवल तभी समाप्त होगा, जब मनुष्य को पूरी तरह से शुद्ध कर दिया जाएगा, जब परमेश्वर के प्रति वास्तव में समर्पण करने वाले लोगों को पूर्ण कर दिया जाएगा, और जब अपने हृदय में परमेश्वर से रहित छद्मवेशियों को शुद्ध कर दिया जाएगा। जो लोग परमेश्वर के कार्य के अंतिम चरण में उसे संतुष्ट नहीं करते, उन्हें पूरी तरह से निष्कासित कर दिया जाएगा, और जिन्हें निष्कासित कर दिया जाता है, वे शैतान के हो जाते हैं। चूँकि वे परमेश्वर को संतुष्ट करने में अक्षम हैं, इसलिए वे परमेश्वर के प्रति विद्रोही हैं, और भले ही वे लोग आज परमेश्वर का अनुसरण करते हों, फिर भी इससे यह साबित नहीं होता कि ये वो लोग हैं, जो अंततः बने रहेंगे। "जो लोग अंत तक परमेश्वर का अनुसरण करेंगे, वे उद्धार प्राप्त करेंगे," इन वचनों में "अनुसरण" का अर्थ क्लेश के बीच डटे रहना है। आज बहुत-से लोग मानते हैं कि परमेश्वर का अनुसरण करना आसान है, किंतु जब परमेश्वर का कार्य समाप्त होने वाला होगा, तब तुम "अनुसरण करने" का असली अर्थ जानोगे। सिर्फ इस बात से कि जीत लिए जाने के पश्चात् तुम आज भी परमेश्वर का अनुसरण करने में समर्थ हो, यह प्रमाणित नहीं होता कि तुम उन लोगों में से एक हो, जिन्हें पूर्ण बनाया जाएगा। जो लोग परीक्षणों को सहने में असमर्थ हैं, जो क्लेशों के बीच विजयी होने में अक्षम हैं, वे अंततः डटे रहने में अक्षम होंगे, और इसलिए वे बिलकुल अंत तक अनुसरण करने में असमर्थ होंगे। जो लोग सच में परमेश्वर का अनुसरण करते हैं, वे अपने कार्य की परीक्षा का सामना करने में समर्थ हैं, जबकि जो लोग सच में परमेश्वर का अनुसरण नहीं करते, वे परमेश्वर के किसी भी परीक्षण का सामना करने में अक्षम हैं। देर-सवेर उन्हें निर्वासित कर दिया जाएगा, जबकि विजेता राज्य में बने रहेंगे। मनुष्य वास्तव में परमेश्वर को खोजता है या नहीं, इसका निर्धारण उसके कार्य की परीक्षा द्वारा किया जाता है, अर्थात्, परमेश्वर के परीक्षणों द्वारा, और इसका स्वयं मनुष्य द्वारा लिए गए निर्णय से कोई लेना-देना नहीं है। परमेश्वर सनक के आधार पर किसी मनुष्य को अस्वीकार नहीं करता; वह जो कुछ भी करता है, वह मनुष्य को पूर्ण रूप से आश्वस्त कर सकता है। वह ऐसा कुछ नहीं करता, जो मनुष्य के लिए अदृश्य हो, या कोई ऐसा कार्य जो मनुष्य को आश्वस्त न कर सके। मनुष्य का विश्वास सही है या नहीं, यह तथ्यों द्वारा साबित होता है, और इसे मनुष्य द्वारा तय नहीं किया जा सकता। इसमें कोई संदेह नहीं कि "गेहूँ को जंगली दाने नहीं बनाया जा सकता, और जंगली दानों को गेहूँ नहीं बनाया जा सकता"। जो सच में परमेश्वर से प्रेम करते हैं, वे सभी अंततः राज्य में बने रहेंगे, और परमेश्वर किसी ऐसे व्यक्ति के साथ दुर्व्यवहार नहीं करेगा, जो वास्तव में उससे प्रेम करता है। अपने विभिन्न कार्यों और गवाहियों के आधार पर राज्य के भीतर विजेता लोग याजकों और अनुयायियों के रूप में सेवा करेंगे, और जो क्लेश के बीच विजेता होंगे, वे राज्य के भीतर याजकों का एक निकाय बन जाएँगे। याजकों का निकाय तब बनाया जाएगा, जब संपूर्ण विश्व में सुसमाचार का कार्य समाप्ति पर आ जाएगा। जब वह समय आएगा, तब जो मनुष्य के द्वारा किया जाना चाहिए, वह परमेश्वर के राज्य के भीतर अपने कर्तव्य का निष्पादन होगा, और राज्य के भीतर परमेश्वर के साथ उसका जीना होगा। याजकों के निकाय में महायाजक और याजक होंगे, और शेष लोग परमेश्वर के पुत्र और उसके लोग होंगे। यह सब क्लेश के दौरान परमेश्वर के प्रति उनकी गवाहियों से निर्धारित होता है, ये ऐसी उपाधियाँ नहीं हैं जो सनक के आधार पर दी जाती हैं। जब मनुष्य की हैसियत स्थापित कर दी जाएगी, तो परमेश्वर का कार्य रुक जाएगा, क्योंकि प्रत्येक को उसके प्रकार के अनुसार वर्गीकृत कर दिया जाएगा और उसकी मूल स्थिति में लौटा दिया जाएगा, और यह परमेश्वर के कार्य के समापन का चिह्न है, यह परमेश्वर के कार्य और मनुष्य के अभ्यास का अंतिम परिणाम है, और यह परमेश्वर के कार्य के दर्शनों और मनुष्य के सहयोग का स्फटिकवत् ठोस रूप है। अंत में, मनुष्य परमेश्वर के राज्य में विश्राम पाएगा, और परमेश्वर भी विश्राम करने के लिए अपने निवास-स्थान में लौट जाएगा। यह परमेश्वर और मनुष्य के बीच 6,000 वर्षों के सहयोग का अंतिम परिणाम होगा।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का अभ्यास' से उद्धृत

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775 तुम्हारी पीड़ा जितनी भी हो ज़्यादा, परमेश्वर को प्रेम करने का करो प्रयास

Iसमझना चाहिये तुम्हें कितना बहुमूल्य है आज कार्य परमेश्वर का।जानते नहीं ये बात ज़्यादातर लोग,सोचते हैं कि पीड़ा है बेकार:अपने विश्वास के लिए...

610 प्रभु यीशु का अनुकरण करो

Iपूरा किया परमेश्वर के आदेश को यीशु ने,हर इंसान के छुटकारे के काम को,क्योंकि उसने परमेश्वर की इच्छा की परवाह की,इसमें न उसका स्वार्थ था, न...

वचन देह में प्रकट होता है न्याय परमेश्वर के घर से शुरू होता है अंत के दिनों के मसीह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अत्यावश्यक वचन परमेश्वर के दैनिक वचन सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों का संकलन सत्य का अभ्यास करने के 170 सिद्धांत मेमने का अनुसरण करो और नए गीत गाओ जीवन में प्रवेश पर धर्मोपदेश और संगति अंत के दिनों के मसीह—उद्धारकर्ता का प्रकटन और कार्य राज्य का सुसमाचार फ़ैलाने के लिए दिशानिर्देश परमेश्वर की भेड़ें परमेश्वर की आवाज को सुनती हैं (नये विश्वासियों के लिए अनिवार्य चीजें) परमेश्वर की आवाज़ सुनो परमेश्वर के प्रकटन को देखो राज्य के सुसमाचार पर अत्यावश्यक प्रश्न और उत्तर (संकलन) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवों की गवाहियाँ विजेताओं की गवाहियाँ (खंड I) मैं वापस सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पास कैसे गया

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