149. छुट्टियों और सामाजिक रीति-रिवाजों के साथ व्यवहार करने के सिद्धांत

(1) पारंपरिक सामाजिक रीति-रिवाज भ्रष्ट मानवजाति से लिए गए हैं। ये वो चालें हैं जिन्हें शैतान मनुष्य के साथ खेलता है, और ये परमेश्वर के आदेश नहीं थे;

(2) परमेश्वर में विश्वास करने वालों को भ्रष्ट मानव जाति के सामाजिक रीति-रिवाजों का पालन करना, या उनकी ओर ध्यान देना, नहीं चाहिए। इसके बजाय उन्हें सकारात्मक चीज़ों को बढ़ावा देना चाहिए, और सत्य को विकसित होने, और अपने वैभव को प्रकट करने, की अनुमति देनी चाहिए;

(3) छुट्टी मनाते समय उचित रूप से आनंदित होना अनुमत है, लेकिन किसी को भी इसे अपने कर्तव्य को निभाने के उचित कार्य को बाधित करने नहीं देना चाहिए। ऐसा करना जो परमेश्वर को प्रसन्न करे, वास्तव में आनंदित होना है;

(4) जब तुम अपना कर्तव्य निभाने के लिए विभिन्न स्थानों पर जाओ, प्रत्येक जगह के स्थानीय सामाजिक रीति-रिवाजों को अपनाओ और अपने वातावरण के अनुकूल बनो। बहरहाल, उन चीज़ों को तुम पर हावी न होने दो।

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:

जिन अंधविश्वासी गतिविधियों में लोग संलग्न रहते हैं, परमेश्वर उनसे सबसे ज्यादा घृणा करता है, परंतु बहुत-से लोग अभी भी यह सोचकर उन्हें त्यागने में असमर्थ हैं कि अंधविश्वास की इन गतिविधियों की आज्ञा परमेश्वर द्वारा दी गई है, और आज भी उन्हें पूरी तरह से त्यागा जाना बाकी है। ऐसी चीज़ें, जैसे कि युवा लोगों द्वारा विवाह के भोज और दुल्हन के साज-सामान का प्रबंध; नकद उपहार, प्रीतिभोज, और ऐसे ही अन्य तरीके, जिनसे आनंद के अवसर मनाए जाते हैं; प्राचीन फार्मूले, जो पूर्वजों से मिले हैं; अंधविश्वास की वे सारी गतिविधियाँ, जो मृतकों तथा उनके अंतिम संस्कार के लिए की जाती हैं : ये परमेश्वर के लिए और भी ज्यादा घृणास्पद हैं। यहाँ तक कि आराधना का दिन (धार्मिक जगत द्वारा मनाए जाने वाले सब्त समेत) भी उसके लिए घृणास्पद है; और मनुष्यों के बीच के सामाजिक संबंध और सांसारिक अंत:क्रियाएँ, सब परमेश्वर द्वारा तुच्छ समझे जाते और अस्वीकार किए जाते हैं। यहाँ तक कि वसंतोत्सव और क्रिसमस भी, जिनके बारे में सब जानते हैं, परमेश्वर की आज्ञा से नहीं मनाए जाते, इन त्योहारों की छुट्टियों के लिए खिलौनों और सजावट, जैसे कि गीत, पटाखे, लालटेनें, पवित्र समागम, क्रिसमस के उपहार और क्रिसमस के उत्सव, और परम समागम की तो बात ही छोड़ो—क्या वे मनुष्यों के मन की मूर्तियाँ नहीं हैं? सब्त के दिन रोटी तोड़ना, शराब और बढ़िया लिनन और भी अधिक प्रभावी मूर्तियाँ हैं। चीन में लोकप्रिय सभी पारंपरिक पर्व-दिवस, जैसे ड्रैगन के सिर उठाने का दिन, ड्रैगन नौका महोत्सव, मध्य-शरद महोत्सव, लाबा महोत्सव और नव वर्ष उत्सव, और धार्मिक जगत के त्योहार जैसे ईस्टर, बपतिस्मा दिवस और क्रिसमस, ये सभी अनुचित त्योहार प्राचीन काल से बहुत लोगों द्वारा मनाए जा रहे हैं और आगे सौंपे जाते रहे हैं। यह मनुष्यजाति की समृद्ध कल्पना और प्रवीण धारणा ही है, जिसने उन्हें तब से लेकर आज तक आगे बढ़ाया है। ये निर्दोष प्रतीत होते हैं, परंतु वास्तव में ये शैतान द्वारा मनुष्यजाति के साथ खेली जाने वाली चालें हैं। जो स्थान शैतानों से जितना ज्यादा भरा होगा, और जितना वह पुराने ढंग का और पिछड़ा हुआ होगा, उतनी ही गहराई से वह सामंती रीति-रिवाजों से घिरा होगा। ये चीज़ें लोगों को कसकर बाँध देती हैं और उनके हिलने-डुलने की भी गुंजाइश नहीं छोड़तीं। धार्मिक जगत के कई त्योहार बड़ी मौलिकता प्रदर्शित करते हैं और परमेश्वर के कार्य के लिए एक सेतु का निर्माण करते प्रतीत होते हैं; किंतु वास्तव में वे शैतान के अदृश्य बंधन हैं, जिनसे वह लोगों को बाँध देता है और परमेश्वर को जानने से रोक देता है—वे सब शैतान की धूर्त चालें हैं। वास्तव में, जब परमेश्वर के कार्य का एक चरण समाप्त हो जाता है, तो वह उस समय के साधन और शैली नष्ट कर चुका होता है और उनका कोई निशान नहीं छोड़ता। परंतु "सच्चे विश्वासी" उन मूर्त भौतिक वस्तुओं की आराधना करना जारी रखते हैं; इस बीच वे परमेश्वर की सत्ता को अपने मस्तिष्क के पिछले हिस्से में खिसका देते हैं और उसके बारे में आगे कोई अध्ययन नहीं करते, और यह समझते हैं कि वे परमेश्वर के प्रति प्रेम से भरे हुए हैं, जबकि वास्तव में वे उसे बहुत पहले ही घर के बाहर धकेल चुके होते हैं और शैतान को आराधना के लिए मेज पर रख चुके होते हैं। यीशु, क्रूस, मरियम, यीशु का बपतिस्मा, अंतिम भोज के चित्र—लोग इन्हें स्वर्ग के प्रभु के रूप में आदर देते हैं, जबकि पूरे समय बार-बार "प्रभु, स्वर्गिक पिता" पुकारते हैं। क्या यह सब मज़ाक नहीं है? आज तक पूर्वजों द्वारा मनुष्यजाति को सौंपी गई ऐसी कई बातों और प्रथाओं से परमेश्वर को घृणा है; वे गंभीरता से परमेश्वर के लिए आगे के मार्ग में बाधा डालती हैं और, इतना ही नहीं, वे मनुष्यजाति के प्रवेश में भारी अड़चन पैदा करती हैं। ...

मनुष्य के स्वभाव को बदलने का सबसे अच्छा तरीका लोगों के अंतर्मन के उन हिस्सों को ठीक करना है, जिन्हें गहराई से विषैला कर दिया गया है, ताकि लोग अपनी सोच और नैतिकता को बदल सकें। सबसे पहले, लोगों को स्पष्ट रूप से यह देखने की ज़रूरत है कि परमेश्वर के लिए धार्मिक संस्कार, धार्मिक गतिविधियाँ, वर्ष और महीने, और त्योहार घृणास्पद हैं। उन्हें सामंती विचारधारा के इन बंधनों से मुक्त होना चाहिए और अंधविश्वास की गहरी जमी बैठी प्रवृत्ति के हर निशान को जड़ से उखाड़ देना चाहिए। ये सब मनुष्यजाति के प्रवेश में सम्मिलित हैं। तुम लोगों को यह समझना चाहिए कि क्यों परमेश्वर मनुष्यजाति को सांसारिक जगत से बाहर ले जाता है, और फिर क्यों वह मनुष्यजाति को नियमों और विनियमों से दूर ले जाता है। यही वह द्वार है, जिससे तुम लोग प्रवेश करोगे, और यद्यपि इन चीज़ों का तुम्हारे आध्यात्मिक अनुभव के साथ कोई संबंध नहीं है, फिर भी ये तुम लोगों का प्रवेश और परमेश्वर को जानने का मार्ग अवरुद्ध करने वाली सबसे बड़ी अड़चनें हैं। वे एक जाल बुनती हैं, जो लोगों को फँसा लेता है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'कार्य और प्रवेश (3)' से उद्धृत

पारंपरिक संस्कृति में क्या चीज़ें शामिल हैं? क्या इसमें वे त्योहार शामिल हैं, जिन्हें लोग मनाते हैं? उदाहरण के लिए : वसंत महोत्सव, दीप-महोत्सव, चिंगमिंग दिवस, ड्रैगन नौका महोत्सव, और साथ ही, भूत महोत्सव और मध्य-हेमंत महोत्सव। कुछ परिवार तब भी उत्सव मनाते हैं, जब वरिष्ठ लोग एक निश्चित उम्र पर पहुँच जाते हैं, या जब बच्चे एक माह या सौ दिन की उम्र के हो जाते हैं। और इसी तरह चलता रहता है। ये सब पारंपरिक त्योहार हैं। क्या इन त्योहारों में पारंपरिक संस्कृति अंतर्निहित नहीं है? पारंपरिक संस्कृति का मूल क्या है? क्या इनका परमेश्वर की उपासना से कुछ लेना-देना है? क्या इनका लोगों को सत्य का अभ्यास करने के लिए कहने से कुछ लेना-देना है? क्या परमेश्वर को भेंट चढ़ाने, परमेश्वर की वेदी पर जाने और उसकी शिक्षाएँ प्राप्त करने के लिए भी लोगों के कोई त्योहार हैं? क्या इस तरह के कोई त्योहार हैं? (नहीं।) इन सभी त्योहारों में लोग क्या करते हैं? आधुनिक युग में इन्हें खाने, पीने और मज़े करने के अवसरों के रूप में देखा जाता है। पारंपरिक संस्कृति का अंतर्निहित स्रोत क्या है? पारंपरिक संस्कृति किससे आती है? (शैतान से।) यह शैतान से आती है। इन पारंपरिक त्योहारों के दृश्यों के पीछे शैतान मनुष्यों में कुछ खास चीजें भर देता है। वे चीज़ें क्या हैं? यह सुनिश्चित करना कि लोग अपने पूर्वजों को याद रखें—क्या यह उनमें से एक है? उदाहरण के लिए, चिंगमिंग महोत्सव के दौरान लोग कब्रों की सफ़ाई करते हैं और अपने पूर्वर्जों को भेंट चढ़ाते हैं, ताकि वे अपने पूर्वजों को भूलें नहीं। साथ ही, शैतान सुनिश्चित करता है कि लोग देशभक्त होना याद रखें, जिसका एक उदाहरण ड्रैगन नौका महोत्सव है। मध्य-हेमंत उत्सव किसलिए मनाया जाता है? (पारिवारिक पुनर्मिलन के लिए।) पारिवारिक पुनर्मिलनों की पृष्ठभूमि क्या है? इसका क्या कारण है? यह भावनात्मक रूप से संवाद करने और जुड़ने के लिए है। निस्संदेह, चाहे वह चांद्र नववर्ष की पूर्व संध्या मनाना हो या दीप-महोत्सव, उन्हें मनाने के पीछे के कारणों का वर्णन करने के कई तरीके हैं। लेकिन कोई उन कारणों का वर्णन कैसे भी करे, उनमें से प्रत्येक कारण शैतान द्वारा लोगों में अपना फ़लसफ़ा और सोच भरने का तरीका है, ताकि वे परमेश्वर से भटक जाएँ और यह न जानें कि परमेश्वर है, और वे भेंटें या तो अपने पूर्वजों को चढ़ाएँ या फिर शैतान को, या देह-सुख की इच्छाओं के वास्ते खाएँ, पीएँ और मज़ा करें। जब भी ये त्योहार मनाए जाते हैं, तो इनमें से हर त्योहार में लोगों के जाने बिना ही उनके मन में शैतान के विचार और दृष्टिकोण गहरे जम जाते हैं। जब लोग अपनी उम्र के पचासवें या साठवें दशक में या उससे भी बड़ी उम्र में पहुँचते हैं, तो शैतान के ये विचार और दृष्टिकोण पहले से ही उनके मन में गहरे जम चुके होते हैं। इतना ही नहीं, लोग इन विचारों को, चाहे वे सही हों या गलत, अविवेकपूर्ण ढंग से और बिना दुराव-छिपाव के, अगली पीढ़ी में संचारित करने का भरसक प्रयास करते हैं। क्या ऐसा नहीं है? (है।) पारंपरिक संस्कृति और ये त्योहार लोगों को कैसे भ्रष्ट करते हैं? क्या तुम जानते हो? (लोग इन परंपराओं के नियमों से इतना विवश और बाध्य हो जाते हैं कि उनमें परमेश्वर को खोजने का समय और ऊर्जा नहीं बचती।) यह एक पहलू है। उदाहरण के लिए, चांद्र नव वर्ष के दौरान हर कोई उत्सव मनाता है—अगर तुमने नहीं मनाया, तो क्या तुम दुःखी महसूस नहीं करोगे? क्या तुम अपने दिल में कोई अंधविश्वास रखते हो? शायद तुम ऐसा महसूस करो : "मैंने नववर्ष का उत्सव नहीं मनाया, और चूँकि चांद्र नव वर्ष का दिन एक खराब दिन था; तो कहीं बाकी पूरा वर्ष भी खराब ही न बीते"? क्या तुम बुरा और थोड़ा डरा हुआ महसूस नहीं करोगे? ऐसे भी कुछ लोग हैं, जिन्होंने वर्षों से अपने पुरखों को भेंट नहीं चढ़ाई है और वे अचानक स्वप्न देखते हैं, जिसमें कोई मृत व्यक्ति उनसे पैसा माँगता है। वे कैसा महसूस करेंगे? "कितने दुःख की बात है कि इस मृत व्यक्ति को खर्च करने के लिए पैसा चाहिए! मैं उसके लिए कुछ कागज़ी मुद्रा जला दूँगा। अगर मैं ऐसा नहीं करता हूँ, तो यह बिलकुल भी सही नहीं होगा। इससे हम जीवित लोग किसी मुसीबत में पड़ सकते हैं—कौन कह सकता है, दुर्भाग्य कब आ पड़ेगा?" उनके मन में डर और चिंता का यह छोटा-सा बादल हमेशा मँडराता रहेगा। उन्हें यह चिंता कौन देता है? (शैतान।) शैतान इस चिंता का स्रोत है। क्या यह शैतान द्वारा मनुष्य को भ्रष्ट करने का एक तरीका नहीं है? वह तुम्हें भ्रष्ट करने, तुम्हें धमकाने और तुम्हें बाँधने के लिए विभिन्न तरीके और बहाने इस्तेमाल करता है, ताकि तुम स्तब्ध रह जाओ और झुक जाओ और उसके सामने समर्पण कर दो; शैतान इसी तरह मनुष्य को भ्रष्ट करता है। प्रायः जब लोग कमज़ोर होते हैं या परिस्थितियों से पूर्णतः अवगत नहीं होते, तब वे असावधानीवश, भ्रमित तरीके से कुछ कर सकते हैं; अर्थात्, वे अनजाने में शैतान के चंगुल में फँस जाते हैं और वे बेइरादा कुछ कर सकते हैं, कुछ ऐसी चीज़ें कर सकते हैं, जिनके बारे में वे नहीं जानते कि वे क्या कर रहे हैं। शैतान इसी तरह से मनुष्य को भ्रष्ट करता है। यहाँ तक कि अब कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो गहरे जड़ जमाई हुई पारंपरिक संस्कृति से अलग होने के अनिच्छुक हैं, और उसे नहीं छोड़ सकते हैं। विशेष रूप से जब वे कमज़ोर और निष्क्रिय होते हैं, तब वे इस प्रकार के उत्सव मनाना चाहते हैं और वे फिर से शैतान से मिलना और उसे संतुष्ट करना चाहते हैं, ताकि उनके दिलों को सुकून मिल जाए। पारंपरिक संस्कृति की पृष्ठभूमि क्या है? क्या पर्दे के पीछे से शैतान का काला हाथ डोर खींच रहा है? क्या शैतान की दुष्ट प्रकृति जोड़-तोड़ और नियंत्रण कर रही है? क्या शैतान इन सभी चीज़ों को नियंत्रित कर रहा है? (हाँ।) जब लोग इस पारंपरिक संस्कृति में जीते हैं और इस प्रकार के पारंपरिक त्योहार मनाते हैं, तो क्या हम कह सकते हैं कि यह एक ऐसा परिवेश है, जिसमें वे शैतान द्वारा मूर्ख बनाए और भ्रष्ट किए जा रहे हैं, और इतना ही नहीं, वे शैतान द्वारा मूर्ख बनाए जाने और भ्रष्ट किए जाने से खुश हैं? (हाँ।) यह एक ऐसी चीज़ है, जिसे तुम सब स्वीकार करते हो, जिसके बारे में तुम जानते हो।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है V' से उद्धृत

संदर्भ के लिए धर्मोपदेश और संगति के उद्धरण:

कुछ चीज़ें जिनका भ्रष्ट मानव जाति आनंद उठाती है और लोग जिनके पीछे भागते हैं, वे हैं दुष्ट प्रवृत्तियाँ और पाप के सुख; वे पूरी तरह से अनर्थक हैं, और तो और वे मूर्खतापूर्ण और अपमानजनक हैं। क्या तुमने उन चीज़ों को छोड़ दिया है, या अभी भी उनके भीतर रह रहे हो? उदाहरण के लिए, वेलेंटाइन डे या हैलोवीन का धर्मनिरपेक्ष उत्सव—क्या तुम अभी भी उन्हें मनाते हो? ये उत्सव सत्य के अनुरूप नहीं हैं, और वे केवल लोगों को और अधिक भ्रष्ट ही बना सकते हैं। अगर लोग इन चीज़ों को छोड़ नहीं सकते, तो यह दर्शाता है कि उनके दिल में परमेश्वर नहीं है। जिन्हें इन चीज़ों में रुचि नहीं होती है वे उन्हें त्यागने में सक्षम होते हैं; वे दुनियावी प्रवृत्तियों का पालन करने से परहेज कर सकते हैं और सामान्य मानवता के जीवन का अनुसरण कर सकते हैं। वे सभी चीज़ें जो मानवजाति को भ्रष्ट करती हैं, ऐसी चीज़ें हैं जो हमें पसंद नहीं हैं, जिनसे हम खुद को दूर करते हैं। जब हम उन चीज़ों को देखते हैं, तो हम चिड़चिड़े हो जाते हैं, हमारा जी मिचलाने लगता है और हम घृणा से भर जाते हैं; वे अर्थहीन हैं। लेकिन सभी अविश्वासी उन चीज़ों को पसंद करते हैं—वे सभी उनके भीतर रहते हैं और उन्हें वे बहुत ही सुखद, फैशनेबल, उत्कृष्ट और अद्भुत लगते हैं। यह क्या दिखाता है? क्या यह नहीं दिखाता कि उनकी आत्माएँ अशुद्ध हैं? कुछ विशेष छुट्टियों पर दुनिया के लोग कुछ खास तरह के फूल भेजते हैं—क्या इस तरह की चीज़ें करना सार्थक है? यह बिल्कुल भी सार्थक नहीं है। हम इस तरह की चीज़ों के प्रति अरुचि महसूस करते हैं, और चूँकि हम परमेश्वर में विश्वास करते हैं इसलिए हमें एक नए तरह के जीवन की स्थापना करनी चाहिए। अविश्वासी अपनी जीवन-शैली रखें, और हमारी अपनी जीवन-शैली होगी। क्योंकि हम कई सत्यों को समझते हैं और बहुत-सी सार्थक चीज़ें कर सकते हैं, ऐसी चीज़ें कर सकते हैं जो परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप हैं, इसलिए हमारा जीवन समृद्ध है। ऐसे कई लोग हैं जिनकी अविश्वासियों के जीवन में रुचि नहीं होती, लेकिन उनके पास एक नया जीवन भी नहीं होता, इसलिए उन्हें लगता है कि उनका जीवन बहुत उबाऊ है। अगर वे कुछ सत्यों को समझ जायें, तो उन्हें पता चल जाएगा कि उनके करने के लिए सार्थक चीज़ें कौन सी हैं और फिर वे कुछ सार्थक चीज़ें करेंगे। कौन-सी चीज़ें लोगों को उनके जीवन में विविधता का अनुभव करने और पूरी तरह से खुशी और आनंद के साथ जीने दे सकती हैं? जब हम परमेश्वर के वचनों को खाने-पीने, सत्य पर संगति करने और परमेश्वर की स्तुति में भजन गाने जैसी सार्थक चीज़ें करते हैं, तो हमें लगता है कि हम बहुत खुशी से और अविश्वासियों की तुलना में बेहतर ढंग से जीते हैं। जब तक हम उन सभी चीज़ों में परमेश्वर की इच्छा की तलाश कर सकते हैं जो सत्य से संबंधित हैं और परमेश्वर के प्रति आज्ञाकारिता पा सकते हैं, तो यह उस व्यक्ति के समान होना है जिसने उद्धार पा लिया है। उद्धार पाने वाले व्यक्ति के समान होने का अर्थ है सामान्य मानव जीवन से और परमेश्वर की आज्ञा का पालन एवं उसकी आराधना करने के जीवन से युक्त होना। तब लोग अपने हृदय की गहराई में सच्ची खुशी और आनंद प्राप्त कर सकेंगे। हम सत्य को समझकर और उसे अमल में लाकर खुशी और आनंद पाते हैं, और अपने हृदयों में सच्चे आनंद के लिए हम परमेश्वर के सामने जीने पर भरोसा करते हैं। यह आनंद पाप में रहने और पाप के सुख का आनंद लेने की तुलना में कहीं अधिक बड़ा और तृप्त करने वाला है। पाप में जीने का आनंद सतही है, और यह आध्यात्मिक रूप से खोखला और पीड़ादायक है। परमेश्वर के वचनों का आनंद लेने, उनके भीतर रहने, सत्य का अभ्यास करने और परमेश्वर को संतुष्ट करने में सक्षम होना, ऐसे आनंद हैं जो हृदय की गहराई में होते हैं और वे सुकून देते हैं। इसीलिए एक व्यक्ति सत्य का अभ्यास करने और परमेश्वर के सामने जीने में जितना अधिक सक्षम होता है, उतना ही वह इंसान के समान होता है। इंसान के समान कैसे जिया जा सकता है? परमेश्वर के वचनों पर निर्भर होकर, और परमेश्वर के सामने रहने द्वारा इंसान के समान जिया जा सकता है। यदि तुम सत्य समझते हो, तुम्हारे दिल में गहरी तृप्ति और सुकून है, और महसूस करते हो कि परमेश्वर तुम्हारे साथ है, तो तुम्हारे दिल में सच्चा आनंद और शांति होगी। यदि तुम्हारे दिल की गहराई में आनंद और शांति है, तो यह तुम्हारे चेहरे पर दिखाई देगा, और तुम्हारा जीवन स्वभाव बदल जाएगा। इस समय, अन्य लोग यह देख पाएंगे कि तुम्हारी मानसिकता और तुम्हारा आध्यात्मिक दृष्टिकोण सामान्य है, और तुम्हारे भाव गरिमापूर्ण और शालीन हैं—एक इंसान होना यही होता है।

— 'जीवन में प्रवेश पर धर्मोपदेश और संगति' से उद्धृत

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