155. सत्ताधारी सरकार से व्यवहार करने के सिद्धांत

(1) यह भेद करना आवश्यक है कि सत्ताधारी सरकार परमेश्वर में विश्वास करने वालों से बनी है, या अविश्वासियों से। यदि वे परमेश्वर का प्रतिरोध करते हैं, तो वे दानव हैं, और उनका आज्ञापालन नहीं करना चाहिए।

(2) राष्ट्रीय नीतियों और कानूनों का पालन किया जाना चाहिए; उनका उल्लंघन नहीं करना चाहिए। तथापि, यदि वे आस्था के सिद्धांतों के विरुद्ध जाते हों, तो उनको नहीं मानना चाहिए।

(3) एक लोकतांत्रिक राष्ट्र की सभी नीतियों और कानूनों का पालन किया जाना चाहिए, सिवाय उनके जो लोगों से परमेश्वर के विरुद्ध पाप करवाते हैं और उसको नाराज करते हैं, और उनका कभी भी आज्ञापालन नहीं करना चाहिए।

(4) किसी तानाशाही की सभी विकृत नीतियों और कानूनों के बारे में विवेक का प्रयोग करना चाहिए। उनके सत्य और उनके सार का पता लगाओ।

संदर्भ के लिए बाइबल के पद :

"जो मेरे साथ नहीं वह मेरे विरोध में है, और जो मेरे साथ नहीं बटोरता वह बिखेरता है" (मत्ती 12:30)।

"मनुष्यों की आज्ञा से बढ़कर परमेश्‍वर की आज्ञा का पालन करना ही हमारा कर्तव्य है" (प्रेरितों 5:29)।

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन :

शैतान कौन है, दुष्टात्माएँ कौन हैं और परमेश्वर के शत्रु कौन हैं, क्या ये वे नहीं, जो परमेश्वर का प्रतिरोध करते और परमेश्वर में विश्वास नहीं रखते? क्या ये वे लोग नहीं, जो परमेश्वर के प्रति अवज्ञाकारी हैं? क्या ये वे नहीं, जो विश्वास करने का दावा तो करते हैं, परंतु उनमें सत्य नहीं है? क्या ये वे लोग नहीं, जो सिर्फ़ आशीष पाने की फ़िराक में रहते हैं जबकि परमेश्वर के लिए गवाही देने में असमर्थ हैं? तुम अभी भी इन दुष्टात्माओं के साथ घुलते-मिलते हो और उनके प्रति साफ़ अंत:करण और प्रेम रखते हो, लेकिन क्या इस मामले में तुम शैतान के प्रति सदिच्छाओं को प्रकट नहीं कर रहे? क्या तुम दुष्टात्माओं के साथ संबद्ध नहीं हो रहे? यदि आज कल भी लोग अच्छे और बुरे में भेद नहीं कर पाते और परमेश्वर की इच्छा जानने का कोई इरादा न रखते हुए या परमेश्वर की इच्छाओं को अपनी इच्छा की तरह मानने में असमर्थ रहते हुए, आँख मूँदकर प्रेम और दया दर्शाते रहते हैं, तो उनके अंत और भी अधिक ख़राब होंगे। यदि कोई देहधारी परमेश्वर पर विश्वास नहीं करता, तो वह परमेश्वर का शत्रु है। यदि तुम शत्रु के प्रति साफ़ अंत:करण और प्रेम रख सकते हो, तो क्या तुममें धार्मिकता की समझ का अभाव नहीं है? यदि तुम उनके साथ सहज हो, जिनसे मैं घृणा करता हूँ, और जिनसे मैं असहमत हूँ और तुम तब भी उनके प्रति प्रेम और निजी भावनाएँ रखते हो, तब क्या तुम अवज्ञाकारी नहीं हो? क्या तुम जानबूझकर परमेश्वर का प्रतिरोध नहीं कर रहे हो? क्या ऐसे व्यक्ति में सत्य होता है? यदि लोग शत्रुओं के प्रति साफ़ अंत:करण रखते हैं, दुष्टात्माओं से प्रेम करते हैं और शैतान पर दया दिखाते हैं, तो क्या वे जानबूझकर परमेश्वर के कार्य में रुकावट नहीं डाल रहे हैं? वे लोग जो केवल यीशु पर विश्वास करते हैं और अंत के दिनों के देहधारी परमेश्वर को नहीं मानते, और जो ज़बानी तौर पर देहधारी परमेश्वर में विश्वास करने का दावा करते हैं, परंतु बुरे कार्य करते हैं, वे सब मसीह-विरोधी हैं, उनकी तो बात ही क्या जो परमेश्वर पर विश्वास नहीं करते। ये सभी लोग विनाश की वस्तु बनेंगे।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'परमेश्वर और मनुष्य साथ-साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे' से उद्धृत

संदर्भ के लिए धर्मोपदेश और संगति के उद्धरण :

राष्ट्रीय कानूनों के प्रति हमारा दृष्टिकोण कैसा होना चाहिए? इसे सत्य के अनुसार समझा जाना चाहिए। कानून सत्य नहीं हैं, वे केवल ऐसे नियम हैं जिनके द्वारा देश शासन की स्थिरता बनाए रखते हैं। परमेश्वर के प्रति अपनी आस्था में हमें परमेश्वर के वचनों को सत्य मानना चाहिए; सब-कुछ परमेश्वर के वचनों पर आधारित होना चाहिए। ईसाइयों को राष्ट्रीय सरकारों द्वारा तय किए गए वैध कानून मानने चाहिए, लेकिन वे कानून बिलकुल नहीं मानने चाहिए जो अनैतिक और अन्यायपूर्ण हैं या जो परमेश्वर के वचन-सत्य का उल्लंघन करते हैं—खासकर वे कानून जो आस्था का विरोध करते हैं, परमेश्वर का विरोध और उसकी निंदा करते हैं। इस तरह के कानूनों को मानना परमेश्वर के साथ विश्वासघात करना और शैतान का पक्ष लेना है। उदाहरण के लिए, परमेश्वर में विश्वास और उसकी आराधना करना स्वर्ग द्वारा आदेशित और पृथ्वी द्वारा स्वीकृत है, और राष्ट्रीय सरकारों द्वारा दबाए और प्रतिबंधित किए जाने पर हमें इन दुष्ट कानूनों का विरोध करने के लिए दृढ़संकल्प होना चाहिए। अनैतिक और अन्यायपूर्ण कानून नहीं मानने चाहिए, बल्कि उनका दृढ़ता से विरोध करना चाहिए।

— 'कार्य व्यवस्था' से उद्धृत

राज्य सरकार के अधिकारियों के प्रति हमारा दृष्टिकोण कैसा होना चाहिए? इसे सत्य के अनुसार समझा जाना चाहिए। अधिकारी भले भी होते हैं और बुरे भी, उदार भी होते हैं और दुष्ट भी। हमें भले, और लोगों के लिए वास्तव में महत्वपूर्ण कार्य करने वाले अधिकारियों का सम्मान करना चाहिए। परमेश्वर का विरोध करने, उसकी निंदा करने और उसे सताने वाले अधिकारी दुष्ट राक्षस हैं, और हमें उनसे घृणा करनी चाहिए और उन्हें शाप देना चाहिए। लेकिन आज भी हम शैतान के बुरे, अंधकारपूर्ण अधिकार-क्षेत्र में रह रहे हैं, इसलिए हमें चतुर होना चाहिए—हमें चतुराई से काम करना चाहिए, और हमें असली तथ्य पता होने चाहिए। अगर कुछ सरकारी अधिकारी और कर्मचारी परमेश्वर पर विश्वास करने और सच्चे मार्ग को स्वीकार करने को तैयार हैं, तो हमें उन्हें सुसमाचार सुनाना चाहिए और उन्हें परमेश्वर के सामने लाना चाहिए, ताकि वे उद्धार पा सकें; यह पूरी तरह से परमेश्वर की इच्छा के अनुसार है।

— 'कार्य व्यवस्था' से उद्धृत

"शैतान का शासन और प्रभाव" किसे संदर्भित करता है? विभिन्न देशों की सत्ताधारी पार्टियाँ परमेश्वर को समर्पित होती हैं या शैतान को? जो शैतान को समर्पित होती हैं, वे शैतान के प्रभाव में होती हैं। अगर तुम शैतान की सत्ताधारी पार्टी की आराधना करते हो, अगर शैतान की सत्ताधारी पार्टी के प्रति तुम परम आज्ञाकारिता रखते हो, और शैतान से संबंधित नेताओं का अनुसरण करते हो, तो तुम शैतान के हो, तुम शैतान के अधिकार-क्षेत्र में रहते हो। उदाहरण के लिए, बड़ा लाल अजगर चीन पर शासन करता है। अगर तुम बड़े लाल अजगर का समर्थन करते हो, बड़े लाल अजगर की आराधना करते हो, बड़े लाल अजगर को समर्पित होते हो, और बड़े लाल अजगर के लिए "जिंदाबाद" के नारे लगाते हो, तो तुम शैतान के अधिकार-क्षेत्र में रहते हो। चाहे तुम जिस भी सामाजिक व्यवस्था की आराधना करो या जिस पर भी अंधविश्वास करो, अगर तुम शैतान की सत्ताधारी पार्टियों और राजनेताओं की आराधना करते हो, उनका अनुसरण करते हो, उनकी आज्ञा मानते हो, तो तुम शैतान के अधिकार-क्षेत्र में रहते हो। ऐसा इसलिए है, क्योंकि ये राजनेता शैतान के हैं, परमेश्वर के नहीं; वे परमेश्वर की आज्ञा नहीं मानते और उसकी आराधना नही करते, इसलिए उनकी आराधना करके तुम शैतान का अनुसरण और उसकी आराधना करते हो। इसलिए, अगर कोई ईसाई शैतान की सत्ताधारी पार्टी में शामिल होता है, तो इसका मतलब है कि वह शैतान के प्रभाव की आराधना करता है, वह शैतान का अनुसरण करता है, और परमेश्वर में उसका विश्वास झूठा है।

— 'जीवन में प्रवेश पर धर्मोपदेश और संगति' से उद्धृत

बड़े लाल अजगर द्वारा तैयार की गई नीतियाँ वास्तव में देश के संचालन के लिए या लोगों की खातिर नहीं हैं। वे पूरी तरह से परमेश्वर के विरोध में और सत्य के बिलकुल विपरीत हैं, इसलिए वे बड़े लाल अजगर के उस दुष्ट सार को प्रकट करती हैं, जो स्वर्ग के प्रतिकूल और विपरीत है। बड़ा लाल अजगर प्रतिक्रियावादियों के एक गिरोह के अतिरिक्त कुछ नहीं है! यदि तुम इस बारे में स्पष्ट हो, तो तुम्हें पता होगा कि उसके साथ कैसा व्यवहार करना है। जब वह तुमसे घृणा करता है, तुम पर हमला करता है और तुम्हें मार डालता है, तो उसका सार एक बुरी आत्मा का सार होता है, और वह दुष्ट है; जब वह तुम्हारे साथ कुछ अच्छा करता है, जब वह तुम पर कुछ छोटे एहसान करता है, जब वह तुम्हें विभिन्न तरीकों से लाभ पहुँचाता है, तब भी उसका सार एक बुरी आत्मा का ही सार होता है, और वह तब भी दुष्ट ही होता है। जब तुम्हें उसका सार स्पष्ट हो जाता है, तो तुम इस बात से लाचार नहीं रह जाते कि वह सतही तौर पर तुम्हारे लिए अच्छा है या बुरा। बड़े लाल अजगर के वास्तविक सार और सच्चे चेहरे को स्पष्ट रूप से देख पाने के लिए तुम्हें उसका आकलन केवल उसकी सार्वजनिक घोषणाओं से नहीं, बल्कि उसके कार्यों और उसके प्रभाव से करना चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण यह देखना है कि वह परमेश्वर के साथ, परमेश्वर द्वारा व्यक्त किए गए सभी सत्यों के साथ और परमेश्वर में विश्वास करने वाले अनुयायियों के साथ कैसा व्यवहार करता है—तभी तुम उसका कुरूप चेहरा स्पष्ट रूप से देखोगे। बड़े लाल अजगर का सही-सही आकलन करने के लिए तुम्हें उसे परमेश्वर द्वारा व्यक्त किए गए सभी सत्यों के अनुसार देखना चाहिए; सत्य की समझ के बिना यह कभी संभव नहीं होगा।

— 'जीवन में प्रवेश पर धर्मोपदेश और संगति' से उद्धृत

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