67. अगुआओं और कार्यकर्ताओं को पदच्‍युत करने के सिद्धान्‍त

(1) निन्‍दा और अभियोग सम्‍बन्‍धी पत्रों की पहले अच्‍छी तरह पड़ताल की जानी चाहिए; जब तक आरोपों की पुष्टि पूरी तरह से तथ्‍यों से नहीं हो जाती, तब तक इस तरह के मसलों पर कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए, न ही उनकी प्रकृति निर्धारित की जानी चाहिए;

(2) किसी अगुआ या कार्यकर्ता को मात्र उस स्थिति में भी पदच्‍युत किया जा सकता है अगर उन्‍हें जनमत के आधार पर और परमेश्‍वर द्वारा चुने गये उन लोगों की सहमति से छद्म घोषित कर दिया जाता है जो सत्‍य को समझते हैं;

(3) अगुआओं और कार्यकर्ताओं का काम किसी भी समय निरीक्षण के अधीन होना चाहिए। किसी भी ऐसी गड़बड़ी से जिससे सिद्धान्‍तों का गम्‍भीर उल्‍लंघन होता हो, तुरन्‍त निपटा जाना चाहिए और उसे सुधारा जाना चाहिए;

(4) तरह-तरह के बुरे कृत्‍यों में मुब्तिला छद्म अगुआओं और मसीह-विरोधियों को पदच्‍युत करने की कार्रवाई परमेश्‍वर द्वारा सच्‍चे अर्थों में चुने गये लोगों की समुचित संख्‍या द्वारा दो-तीन अगुआओं या कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर की जा सकती है।

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:

परमेश्वर द्वारा चयनित लोगों को मसीह-विरोधियों के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए? उन्हें चाहिए कि वे उनको पहचानें, उनको बेनकाब करें, उनकी सूचना दें, और उनको बाहर निकालें। मसीह-विरोधी भले ही अगुआ की स्थिति में क्यों न हो, वह सर्वदा परमेश्वर का विरोध करता है। तुम्हें मसीह-विरोधी की अगुवाई स्वीकार नहीं करनी चाहिए, और तुम्हें उसको अपना अगुआ भी नहीं मानना चाहिए, क्योंकि वह जो करता है उससे तुम परमेश्वर के वचनों में प्रवेश नहीं करते; वह तुम्हें नरक में घसीटना चाहता है और तुम्हें मसीह-विरोधियों के रास्ते पर ले जाना चाहता है जिसपर वह ख़ुद चल रहा है। वह परमेश्वर का विरोध करने और परमेश्वर के कार्य को बाधित और नष्ट करने में तुम्हें अपने साथ शामिल करना चाहता है। वह तुम्हें खींचता-घसीटता है ताकि तुम भी उसके साथ दलदल में फँस जाओ। क्या तुम इसकी सहमति दोगे? यदि तुम सहमत होते हो, और उसके साथ समझौता करते हो, उससे दया की भीख माँगते हो, या उसके द्वारा जीत लिए जाते हो, तो तुमने गवाही नहीं दी है, और तुम ऐसे व्यक्ति हो जो सत्य और परमेश्वर दोनों को धोखा देता है—और ऐसे लोगों को बचाया नहीं जा सकता है। अपने उद्धार के लिए व्यक्ति को कौन सी शर्तें पूरी करनी ज़रूरी हैं? सबसे पहले, उसके अंदर शैतानी मसीह-विरोधी को पहचानने की क्षमता होनी चाहिए; उसके अंदर सत्य का यह दृष्टिकोण ज़रूर होना चाहिए। केवल सत्य के इस दृष्टिकोण से ही वह वास्तव में परमेश्वर में विश्वास कर सकता है और मनुष्य की आराधना करने या उसका अनुसरण करने से बच सकता है; केवल वही लोग मसीह विरोधी की पहचान कर सकते हैं जिनके अंदर वास्तव में परमेश्वर में विश्वास करने और उसकी गवाही देने की क्षमता है। मसीह-विरोधियों की पहचान करने के लिए, लोगों को सबसे पहले पूरी स्पष्टता और समझ के साथ लोगों और चीज़ों को देखना सीखना चाहिए; उन्हें मसीह-विरोधियों के सार को महसूस करने में सक्षम होना चाहिए, और उनके तमाम षड्यंत्रों, चालबाजियों, अंतःप्रेरणाओं, और उद्देश्यों को समझना चाहिए। यदि तुम ऐसा कर सकते हो, तो तुम दृढ़ रह सकते हो। यदि तुम उद्धार प्राप्त करना चाहते हो, तो पहली परीक्षा जो तुम्हें पास करनी होगी वह यह सीखना है कि शैतान को कैसे पराजित किया जाए और प्रतिरोधी शक्तियों तथा बाहरी दुनिया के हस्तक्षेप पर कैसे विजय प्राप्त की जाए। यदि तुम शैतान की शक्तियों के ख़िलाफ़ लड़ाई में अंत तक टिके रहने का कद और पर्याप्त सत्य प्राप्त कर लेते हो, और उन्हें पराजित कर देते हो, तब—और केवल तब—तुम अनवरत सत्य की तलाश कर सकते हो, और केवल तब तुम सत्य की तलाश और उद्धार के रास्ते पर दृढ़तापूर्वक और बिना किसी दुर्घटना के चल सकते हो। यदि तुम यह परीक्षा पास नहीं कर सकते, तब यह कहा जा सकता है कि तुम एक बड़े ख़तरे में हो, और तुम मसीह-विरोधी के कब्जे में आ सकते हो और तुम्हें शैतान के प्रभाव में जीवन व्यतीत करना पड़ सकता है।

— "मसीह की बातचीत के अभिलेख" में 'नायकों और कार्यकर्ताओं के लिए, एक मार्ग चुनना सर्वाधिक महत्वपूर्ण है (1)' से उद्धृत

एक अगुआ या कार्यकर्ता के साथ व्यवहार करने के तरीके के बारे में लोगों का रवैया कैसा होना चाहिए? अगर वह जो करता है वह सही है, तो तुम उसका पालन कर सकते हो; अगर वह जो करता है वह गलत है, तो तुम उसे उजागर कर सकते हो, यहाँ तक कि उसका विरोध कर सकते हो और एक अलग राय भी ज़ाहिर कर सकते हो। अगर वह व्यावहारिक कार्य करने में असमर्थ है, और खुद को एक झूठे अगुआ, झूठे कार्यकर्ता या मसीह विरोधी के रूप में प्रकट करता है, तो तुम उसकी अगुआई को स्वीकार करने से इनकार कर सकते हो, तुम उसके ख़िलाफ़ शिकायत करके उसे उजागर भी कर सकते हो। हालाँकि, परमेश्वर के कुछ चुने हुए लोग सत्य को नहीं समझते और विशेष रूप से कायर हैं, इसलिए वे कुछ करने की हिम्मत नहीं करते। वे कहते हैं, "अगर अगुआ ने मुझे निकाल दिया, तो मैं बर्बाद हो जाऊँगा; अगर उसने सबको मुझे उजागर करने और मेरा त्याग करने पर मजबूर कर दिया, तो मैं परमेश्वर पर विश्वास नहीं कर पाऊँगा। अगर मैंने कलीसिया को छोड़ दिया, तो परमेश्वर मुझे नहीं चाहेगा और मुझे नहीं बचाएगा। कलीसिया परमेश्वर का प्रतिनिधित्व करता है!" क्या सोचने के ऐसे तरीके उन चीजों के प्रति ऐसे व्यक्ति के रवैये को प्रभावित नहीं करते हैं? क्या वास्तव में ऐसा हो सकता है कि अगर अगुआ ने तुमको निकाल दिया, तो तुमको बचाया नहीं जायेगा? क्या तुम्हारे उद्धार का प्रश्न तुम्हारे प्रति अगुआ के रवैये पर निर्भर है? इतने सारे लोगों में इतना डर क्यों है? अगर कोई झूठा अगुआ या कोई मसीह विरोधी व्यक्ति तुम्हें धमकी देता है, और तुम इसके ख़िलाफ़ ऊँचे स्तर पर जाकर आवाज़ नहीं उठाते और यहाँ तक कि यह गारंटी भी देते हो कि इसके बाद से तुम अगुआ की बातों से सहमत होगे, तो क्या तुम बर्बाद नहीं हो गये? क्या इस तरह का व्यक्ति सत्य की खोज करने वाला व्यक्ति है? तुम न केवल ऐसे दुष्ट व्यवहार को उजागर करने की हिम्मत नहीं करते जो शैतानी मसीह विरोधियों द्वारा किया जा सकता है, बल्कि इसके विपरीत, तुम उनका आज्ञापालन करते हो और यहाँ तक कि उनके शब्दों को सत्य मान लेते हो, जिनके प्रति तुम समर्पित होते हो। क्या यह मूर्खता का प्रतीक नहीं है? फिर, जब तुम्हें क्षति पहुँचती है, तो क्या तुम इसी के योग्य नहीं हो? क्या तुम्हें परमेश्वर के कारण क्षति पहुँची है? तुमने स्वयं ही अपने लिए ऐसा चाहा था। तुमने एक मसीह-विरोधी को अपना अगुआ बनाया, और उसके साथ ऐसा व्यवहार किया मानो वह कोई भाई या बहन हो—और यह तुम्हारी गलती है। किसी मसीह-विरोधी के साथ कैसा रवैया अपनाया जाना चाहिए? उसे बेनकाब करना चाहिए और उसके विरुद्ध संघर्ष करना चाहिए। यदि तुम इसे अकेले नहीं कर सकते, तो कई लोगों को एक साथ आना होगा और उसके बारे में बताना होगा। यह पता लगने पर कि उच्च पदों पर आसीन कुछ अगुआ और कार्यकर्ता मसीह-विरोधी मार्ग पर चल रहे थे, भाइयों और बहनों को अनुशासित कर रहे थे, वास्तविक कार्य नहीं कर रहे थे, और पद का लाभ उठा रहे थे, तो कुछ लोगों ने उन मसीह-विरोधियों को हटाने के लिए एक याचिका पर हस्ताक्षर किए। इन लोगों ने कितना अद्भुत काम किया! यह दिखाता है कि लोग सत्य को समझते हैं, उनमें थोड़ी महानता बची है, और वे शैतान द्वारा न तो नियंत्रित हैं और न ही धोखा खाए हुए हैं। यह इस बात को भी साबित करता है कि मसीह-विरोधियों और झूठे अगुओं का कलीसिया में कोई प्रमुख स्थान नहीं है, और वे जो कुछ कहते या करते हैं उसमें अपने असली चेहरे को स्पष्ट दिखाने की उनमें हिम्मत नहीं होती। यदि वे अपना चेहरा दिखाते हैं, तो उनकी निगरानी करने, उनको पहचानने, और उन्हें बाहर निकालने के लिए लोग मौजूद हैं। अर्थात, जो लोग वास्तव में सत्य को समझते हैं, उनके लिए किसी व्यक्ति का पद, प्रतिष्ठा, और अधिकार ऐसी चीज़ें नहीं हैं जो उनके हृदय को प्रभावित कर दें; सत्य को समझने वाले सभी लोगों के अंदर विवेक होता है और वे इस बात पर विचार करते हैं कि लोगों को परमेश्वर में अपनी आस्था के लिए किस मार्ग का अनुसरण करना चाहिए, और साथ ही उन्हें अगुआ और कार्यकर्ताओं के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए। वे यह सोचना भी शुरू करते हैं कि लोगों को किसका अनुसरण करना चाहिए, किन व्यवहारों से लोगों का अनुसरण होता है, और किन व्यवहारों से परमेश्वर का अनुसरण होता है। कई वर्षों तक इन सत्यों पर विचार करने, और उपदेशों को अकसर सुनने के बाद, वे अनजाने में परमेश्वर में विश्वास करने से जुड़े सत्यों को समझने लगे हैं, और इसलिए उन्हें कुछ कद हासिल हुआ है। वे परमेश्वर में विश्वास करने के सही रास्ते पर निकल पड़े हैं।

— "मसीह की बातचीत के अभिलेख" में 'नायकों और कार्यकर्ताओं के लिए, एक मार्ग चुनना सर्वाधिक महत्वपूर्ण है (1)' से उद्धृत

संदर्भ के लिए धर्मोपदेश और संगति के उद्धरण:

जहां तक ऐसे मसीह-विरोधियों, दुष्ट लोगों और धोखा देने वालों की बात है जो कलीसिया में अपना दबदबा रखते हैं, परमेश्वर के चुने हुए लोगों को साथ मिलकर उन्हें उनके पदों से हटाना चाहिए और अस्वीकार कर देना चाहिए। जिनके पास पवित्र आत्मा का कार्य ऐसे दो या तीन अगुआ और कार्यकर्ता सीधे उन्हें उनके पदों से हटा सकते हैं और उन पर पाबंदी लगा सकते हैं। साथ ही, जिसके पास पवित्र आत्मा का कार्य है वैसे किसी भी व्यक्ति को हटाये गए लोगों के कार्य की जिम्मेदारी सौंपने के लिए चुना जा सकता है। सिर्फ़ यही सचमुच शैतान से नफ़रत करना और ऐसे लोगों से मुँह मोड़ना है। परमेश्वर के घर को दुष्ट लोगों, मसीह-विरोधियों या ऐसे लोगों को कभी भी कलीसिया में कोई पद हासिल करने की अनुमति कभी नहीं देनी चाहिए जिनके पास पवित्र आत्मा का कार्य नहीं है, वे दूसरों को धोखा देकर नुकसान पहुंचा सकते हैं। जिस पल ऐसे लोग अपना असली रंग दिखाते हैं, उन पर पाबंदी लगा देनी चाहिए। यह परमेश्वर की आज्ञा है और यही उसके धार्मिक स्वभाव का प्रतीक है। परमेश्वर के चुने हुए लोगों को मजबूती से परमेश्वर के पक्ष में खड़े होना चाहिए, उसके कार्य को कायम रखना चाहिए और उसके वचनों के अधिकार के प्रति समर्पित होना चाहिए। मसीह विरोधियों और दुष्ट लोगों का कलीसिया में कोई पद हासिल करना परमेश्वर की इच्छा के ख़िलाफ़ है और यह उसकी प्रशासनिक आज्ञाओं के ख़िलाफ़ जाता है। जब ऐसे लोगों का पता चलता है, उन पर पाबंदी लगा देनी चाहिए; किसी को भी ऐसे लोगों का बचाव नहीं करना चाहिए। जो कोई भी किसी मसीह विरोधी, दुष्ट व्यक्ति या दूसरों को धोखा देने वाले के बचाव में बोलता है वह शैतान का साथी और उसका प्यादा है। इसलिए, वह ऐसा व्यक्ति है जिसे परमेश्वर द्वारा उजागर करके हटा दिया जाएगा।

आपदाओं और परीक्षणों के अंतिम वर्षों के दौरान सभी तरह के लोगों का ख़ुलासा किया जाएगा। झूठे अगुआ और कार्यकर्ता जिनके पास पवित्र आत्मा का कार्य नहीं है, वे सभी अगुआओं और कार्यकर्ताओं का करीब एक तिहाई हिस्सा हैं। इन झूठे अगुआओं और कार्यकर्ताओं में से कुछ लोग मसीह विरोधी हैं जो सभी तरह के बुरे काम करते हैं, जबकि कुछ लोगों ने पवित्र आत्मा का कार्य गँवा दिया है क्योंकि उन्होंने सत्य का अनुसरण नहीं किया, फिर भी उन्होंने ज़्यादा बुरे काम नहीं किये हैं, इस तरह के लोगों को पश्चाताप करने का अवसर दिया जाना चाहिए। जहां तक ऐसे मसीह विरोधियों की बात है जो सभी तरह के बुरे काम करते हैं या जो अपना स्वतंत्र राज्य कायम करने की कोशिश करते हैं, सभी स्तरों पर अगुआओं और कार्यकर्ताओं के साथ-साथ परमेश्वर के चुने हुए लोगों को ऐसे लोगों की दुष्टता का साक्ष्य जुटाना चाहिए और उनके बुरे कर्मों का एक सारांश तैयार करना चाहिए। पर्याप्त साक्ष्य जुटा लिए जाने के बाद, इन लोगों को इनके पदों से हटाने और पाबंदी लगाने के लिए कार्रवाई की जा सकती है। यह कार्रवाई परमेश्वर के प्रति श्रद्धा दिखाने के लिए बुरे लोगों को निष्कासित करने की कार्रवाई है। कुछ कलीसियाओं में, परमेश्वर के चुने हुए लोगों ने पहले ही कुछ झूठे अगुआओं, झूठे कार्यकर्ताओं या मसीह विरोधियों के अपराधों के साक्ष्य जुटा लिए हैं। उन्हें यह साक्ष्य लिखित सामग्रियों के तौर पर जुटाना चाहिए। अगर किसी ने मसीह विरोधियों का एक कार्यबल बना लिया है, तो परमेश्वर के चुने हुए लोगों को ऐसे अगुआओं और कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर, जिनके पास पवित्र आत्मा का कार्य है, ऐसे व्यक्ति को बर्खास्त करके हटा देना चाहिए। अगर उसके द्वारा किये गए बुरे कर्मों के पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं या यह सिर्फ़ भ्रष्टता व्यक्त करने की विभिन्न समस्याओं से संबंधित है और सभी तरह के बुरे कर्म करने के दायरे में नहीं आता है, तो इस निर्णय को टाला जा सकता है, फिर कुछ समय तक उनकी गतिविधियों पर नज़र रखने के बाद उनकी इंसानियत के गुणों के आधार पर निर्णय लिया जा सकता है। परमेश्वर के घर में, सिर्फ़ ऐसे अगुआओं और कार्यकर्ताओं को परमेश्वर द्वारा इस्तेमाल के लिए मंज़ूरी मिलती है जिनके पास पवित्र आत्मा का कार्य है। जिनके पास पवित्र आत्मा का कार्य नहीं है वे ऐसे लोग हैं जिन्हें परमेश्वर मंज़ूरी नहीं देता है और उन पर प्रतिबंध लगा दिया जाना चाहिए। इसलिए, परमेश्वर के चुने हुए लोगों को यह पता लगाना चाहिए कि क्या किसी भी स्तर पर अगुआ या कार्यकर्ता को इस आधार पर रखा गया है कि उसके पास पवित्र आत्मा का कार्य है या नहीं। परमेश्वर द्वारा शैतान की पराजय और उसके द्वारा शैतान की नियति को समाप्त किया जाना एक निर्णायक पल में आ पहुंचा है। परमेश्वर के चुने हुए लोगों को उसकी इच्छा को समझना चाहिए और शैतान से संबंध रखने वाले विभिन्न दुष्ट लोगों और मसीह विरोधियों को कलीसिया में कोई पद हासिल करने की अनुमति बिल्कुल भी नहीं देनी चाहिए; यही परमेश्वर की अपेक्षा है, उसकी आज्ञा है और इससे भी अधिक यह उसके धार्मिक स्वभाव का प्रतीक है। दुष्ट लोग और मसीह विरोधी कलीसिया में बड़े लाल अजगर के चाकर हैं, वे बड़े लाल अजगर की शक्तियों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसलिए, अगर दुष्ट लोग और मसीह विरोधी कोई पद हासिल कर लेते हैं, तो इसका मतलब है कि बड़े लाल अजगर ने सत्ता हासिल कर ली है। केवल दुष्ट लोगों और मसीह विरोधियों को अस्वीकार करके ही लोग बड़े लाल अजगर को त्याग सकते हैं और उसके ख़िलाफ़ विद्रोह कर सकते हैं। परमेश्वर के प्रति सच्चे और विश्वासी सभी लोगों को विवेकपूर्ण तरीके से ऊपर उठकर परमेश्वर के कार्य को कायम रखना चाहिए, परमेश्वर के चुने हुए लोगों के हितों की रक्षा करनी चाहिए और शैतान की शक्तियों के ख़िलाफ़ निर्णायक लड़ाई लडनी चाहिए। यही वह शक्ति है जो परमेश्वर ने अपने चुने हुए लोगों को दी है। इस आध्यात्मिक लड़ाई में, वे सभी लोग जो परमेश्वर के साथ खड़े होते हैं और उसके प्रति वफादार रहते हैं, वे उससे जुड़े रहते हैं, जबकि जो शैतान के साथ खड़े रहते हैं और परमेश्वर के कार्य को बिगाड़ने और उसे नष्ट करने की हर संभव कोशिश करते हैं, वे शैतान से जुड़े होते हैं; इन दो तरह के लोगों का खुलासा किया गया है और परमेश्वर के चुने हुए लोगों को साफ़ तौर पर इसे देखना चाहिए।

— 'कार्य व्यवस्था' से उद्धृत

अगर कुछ झूठे अगुआओं और कार्यकर्ताओं को उनके बहुत सारे बुरे कर्मों के बाद भी नहीं बदला जाता है, तो परमेश्वर के चुने हुए लोगों को उनकी दुष्टता से जुड़े तथ्यों का एक सारांश तैयार करना चाहिए और उनके बारे में उच्च स्तर के अगुआओं और कार्यकर्ताओं के पास शिकायत करनी चाहिए। अगर क्षेत्रीय स्तर पर निर्णय लेने वाली टीम ने बहुत बुरे काम किये हैं और वे साफ़ तौर पर कार्य व्यवस्थाओं का विरोध कर रहे हैं और परमेश्वर के घर के कार्य में रुकावट डाल रहे हैं, तो इसके बारे में पादरी संबंधी निर्णय लेने वाली टीम को सूचित किया जाना चाहिए। अगर पादरी संबंधी निर्णय लेने वाली टीम समस्या का समाधान करने के बजाय अब भी उनका बचाव करती है, तो इन हालात को लिखित दस्तावेज़ों में दर्ज किया जाना चाहिए और वेबसाइट के ज़रिए ऊपर इसकी शिकायत की जानी चाहिए। इसके अलावा, संयुक्त बर्खास्तगी के ज़रिए झूठे अगुआओं और कार्यकर्ताओं को हटाने का तरीका भी अपनाया जा सकता है। संयुक्त बर्खास्तगी को लागू करने का सिद्धांत यह है कि सभी स्तरों पर ऐसे अगुआओं और कार्यकर्ताओं द्वारा, जिनके पास पवित्र आत्मा का कार्य नहीं है, सभी झूठे अगुआओं, झूठे कार्यकर्ताओं और मसीह विरोधियों पर प्रतिबंध लगाये जाने की एक समर्पित कार्रवाई की जानी चाहिए। उदाहरण के लिए, अगर पादरी संबंधी निर्णय लेने वाली टीम के सदस्यों के पास पवित्र आत्मा का कार्य नहीं है, तो पादरी संबंधी निर्णय लेने वाली टीम के दूसरे सदस्यों को या कार्यकारी टीम के ऐसे सदस्यों को, जिनके पास पवित्र आत्मा का कार्य है, उन्हें हटाने की कार्रवाई में साथ देना चाहिए। अगर क्षेत्रीय स्तर पर निर्णय लेने वाली टीम के सदस्यों के पास पवित्र आत्मा का कार्य नहीं है, तो क्षेत्रीय स्तर पर निर्णय लेने वाली टीम के दूसरे सदस्यों को या दो से तीन ऐसे क्षत्रीय समन्वयकों को, जिनके पास पवित्र आत्मा का कार्य है, उन्हें हटाने की कार्रवाई में साथ देना चाहिए। अगर किसी जिला स्तर के अगुआ के पास पवित्र आत्मा का कार्य नहीं है, तो जिला स्तर के दूसरे दो या तीन अगुआओं और कार्यकर्ताओं को उन्हें हटाने की कार्रवाई में साथ देना चाहिए। अगर क्षेत्रीय समन्वयकों या जिला स्तर के प्रचारकों के पास पवित्र आत्मा का कार्य नहीं है, तो क्षेत्रीय स्तर की निर्णय लेने वाली टीम या जिला अगुआओं द्वारा सीधे तौर फिर से कार्य सौंपा जा सकता है। जिन झूठे अगुआओं और कार्यकर्ताओं के पास पवित्र आत्मा का कार्य नहीं है उन्हें हटाये जाते समय बिना किसी गलती के और बिल्कुल सही तरीके से यह पता लगाया जाना चाहिए कि उन्होंने कितने बुरे कर्म किये हैं और कैसे परमेश्वर के चुने हुए लोगों ने उनकी शिकायत की है। अपेक्षाकृत बेहतर इंसानियत वाले ऐसे झूठे अगुआओं और कार्यकर्ताओं को, जिनके पास पवित्र आत्मा का कार्य नहीं है, सिर्फ़ बर्खास्त किया जाना चाहिए और अब भी उनके साथ भाई-बहनों जैसा व्यवहार किया जाना चाहिए। अगर झूठे अगुआ और कार्यकर्ता बहुत अन्यायी और दुष्ट लोग हैं, तो उनके दुष्ट व्यवहार की गंभीरता के अनुसार उनका मूल्यांकन करके यह निर्णय लिया जाना चाहिए कि उन्हें निष्कासित किया जाना चाहिए या नहीं। इसके अलावा, किसी भी झूठे अगुआ, झूठे कार्यकर्ता और मसीह विरोधी पर प्रतिबंध लगाने की कार्रवाई करने से पहले, पहले जांच-पड़ताल करके यह पता लगाया जाना चाहिए कि समस्या की प्रकृति क्या है और यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि ऐसे व्यक्ति के पास पवित्र आत्मा का कार्य है या नहीं, इसें शामिल पक्षों को झूठे अगुआ, झूठे कार्यकर्ता या मसीह विरोधी की श्रेणी में रखा जा सकता है या नहीं। इसके अलावा, उनके सहकर्मियों और भाई-बहनों के साथ पूछताछ और जांच-पड़ताल की जानी चाहिए जिनके प्रति वे जिम्मेदार हैं, ताकि उनके बुरे कर्मों और परमेश्वर के ख़िलाफ़ उनके विरोध से जुड़ी खास बातों की जानकारी हासिल की जा सके। उनके बुरे कर्मों की एक सूची भी तैयार की जानी चाहिए और कई लोगों से इसकी पुष्टि की जानी चाहिए ताकि यह दिखाया जा सके कि साक्ष्य निर्णायक है। उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई सिर्फ़ तभी की जा सकती है जब उनसे परिचित ज़्यादातर लोगों ने साक्ष्य की पुष्टि कर दी हो। कोई भी कार्रवाई सावधानी से, विवेक से और बुद्धिमानी से की जानी चाहिए और उचित अवसर भी चुने जाने चाहिए; किसी भी तरीके से यह कार्रवाई प्रतिकूल हालात में नहीं की जानी चाहिए। जगह चाहे जो भी हो, अगर वहां झूठे अगुआ, झूठे कार्यकर्ता और मसीह विरोधी मौजूद हैं, तो उनके साथ इसी तरीके से निपटा जा सकता है। यह परमेश्वर की आज्ञा है और पवित्र आत्मा द्वारा इस्तेमाल किये गए व्यक्ति की स्वीकृति है। जिन अगुआओं और कार्यकर्ताओं के पास पवित्र आत्मा का कार्य है उन सभी को झूठे अगुआओं, झूठे कार्यकर्ताओं और मसीह विरोधियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने का अधिकार है। इससे परिसर की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और यह पक्का होगा कि परमेश्वर के चुने हुए लोगों के कलीसिया जीवन में कोई रुकावट नहीं आएगी। यह वास्तव में एक नेक कर्म और धार्मिकता का सच्चा कार्य है।

— 'कार्य व्यवस्था' से उद्धृत

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