67. अगुआओं और कार्यकर्ताओं को पदच्‍युत करने के सिद्धांत

(1) निंदा और अभियोग संबंधी पत्रों की पहले अच्छी तरह से छानबीन की जानी चाहिए; जब तक आरोपों की तथ्यों के आधार पर पूरी तरह से पुष्टि नहीं हो जाती, तब तक इस तरह के मसलों पर कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए, न ही उनकी प्रकृति निर्धारित की जानी चाहिए।

(2) यह जानने के लिए एक सार्वजनिक सर्वेक्षण करना आवश्यक है कि किसी अगुआ या कार्यकर्ता के कार्य के व्यावहारिक परिणाम मिले हैं या नहीं। सिर्फ यह निर्धारित करके ही कि वे झूठे अगुआ या कार्यकर्ता हैं, उन्हें उनके पद से हटाया जा सकता है।

(3) अगुआओं और कार्यकर्ताओं का काम किसी भी समय निरीक्षण किए जाने के अधीन होना चाहिए। किसी भी ऐसी गड़बड़ी से जिससे सिद्धांतों का गंभीर उल्‍लंघन होता हो, तुरंत निपटा जाना चाहिए और उसे सुधारा जाना चाहिए।

(4) तरह-तरह के बुरे कृत्‍यों में लिप्त झूठे अगुआओं और मसीह-विरोधियों को पदच्‍युत करने की कार्रवाई परमेश्‍वर द्वारा सच्‍चे अर्थों में चुने गए लोगों की समुचित संख्‍या द्वारा दो-तीन अगुआओं या कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर की जा सकती है।

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन :

परमेश्वर द्वारा चयनित लोगों को मसीह-विरोधियों के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए? उन्हें चाहिए कि वे उनको पहचानें, उनको बेनकाब करें, उनकी सूचना दें, और उनको बाहर निकालें। मसीह-विरोधी भले ही अगुआ की स्थिति में क्यों न हो, वह सर्वदा परमेश्वर का विरोध करता है। तुम्हें मसीह-विरोधी की अगुवाई स्वीकार नहीं करनी चाहिए, और तुम्हें उसको अपना अगुआ भी नहीं मानना चाहिए, क्योंकि वह जो करता है उससे तुम परमेश्वर के वचनों में प्रवेश नहीं करते; वह तुम्हें नरक में घसीटना चाहता है और तुम्हें मसीह-विरोधियों के रास्ते पर ले जाना चाहता है जिसपर वह ख़ुद चल रहा है। वह परमेश्वर का विरोध करने और परमेश्वर के कार्य को बाधित और नष्ट करने में तुम्हें अपने साथ शामिल करना चाहता है। वह तुम्हें खींचता-घसीटता है ताकि तुम भी उसके साथ दलदल में फँस जाओ। क्या तुम इसकी सहमति दोगे? यदि तुम सहमत होते हो, और उसके साथ समझौता करते हो, उससे दया की भीख माँगते हो, या उसके द्वारा जीत लिए जाते हो, तो तुमने गवाही नहीं दी है, और तुम ऐसे व्यक्ति हो जो सत्य और परमेश्वर दोनों को धोखा देता है—और ऐसे लोगों को बचाया नहीं जा सकता है। अपने उद्धार के लिए व्यक्ति को कौन सी शर्तें पूरी करनी ज़रूरी हैं? सबसे पहले, उसके अंदर शैतानी मसीह-विरोधी को पहचानने की क्षमता होनी चाहिए; उसके अंदर सत्य का यह दृष्टिकोण ज़रूर होना चाहिए। केवल सत्य के इस दृष्टिकोण से ही वह वास्तव में परमेश्वर में विश्वास कर सकता है और मनुष्य की आराधना करने या उसका अनुसरण करने से बच सकता है; केवल वही लोग मसीह विरोधी की पहचान कर सकते हैं जिनके अंदर वास्तव में परमेश्वर में विश्वास करने और उसकी गवाही देने की क्षमता है। मसीह-विरोधियों की पहचान करने के लिए, लोगों को सबसे पहले पूरी स्पष्टता और समझ के साथ लोगों और चीज़ों को देखना सीखना चाहिए; उन्हें मसीह-विरोधियों के सार को महसूस करने में सक्षम होना चाहिए, और उनके तमाम षड्यंत्रों, चालबाजियों, अंतःप्रेरणाओं, और उद्देश्यों को समझना चाहिए। यदि तुम ऐसा कर सकते हो, तो तुम दृढ़ रह सकते हो। यदि तुम उद्धार प्राप्त करना चाहते हो, तो पहली परीक्षा जो तुम्हें पास करनी होगी वह यह सीखना है कि शैतान को कैसे पराजित किया जाए और प्रतिरोधी शक्तियों तथा बाहरी दुनिया के हस्तक्षेप पर कैसे विजय प्राप्त की जाए। यदि तुम शैतान की शक्तियों के ख़िलाफ़ लड़ाई में अंत तक टिके रहने का कद और पर्याप्त सत्य प्राप्त कर लेते हो, और उन्हें पराजित कर देते हो, तब—और केवल तब—तुम अनवरत सत्य का अनुसरण कर सकते हो, और केवल तब तुम सत्य का अनुसरण और उद्धार के रास्ते पर दृढ़तापूर्वक और बिना किसी दुर्घटना के चल सकते हो। यदि तुम यह परीक्षा पास नहीं कर सकते, तब यह कहा जा सकता है कि तुम एक बड़े ख़तरे में हो, और तुम मसीह-विरोधी के कब्जे में आ सकते हो और तुम्हें शैतान के प्रभाव में जीवन व्यतीत करना पड़ सकता है।

— "मसीह-विरोधियों को उजागर करना" में 'सत्य का अनुसरण करने वालों को वे निकाल देते हैं और उन पर आक्रमण करते हैं' से उद्धृत

एक अगुआ या कार्यकर्ता के साथ व्यवहार करने के तरीके के बारे में लोगों का रवैया कैसा होना चाहिए? अगर अगुआ या कार्यकर्ता जो करता है वह सही है, तो तुम उसका पालन कर सकते हो; अगर वह जो करता है वह गलत है, तो तुम उसे उजागर कर सकते हो, यहाँ तक कि उसका विरोध कर सकते हो और एक अलग राय भी ज़ाहिर कर सकते हो। अगर वह व्यावहारिक कार्य करने में असमर्थ है, और खुद को एक झूठे अगुआ, झूठे कार्यकर्ता या मसीह विरोधी के रूप में प्रकट करता है, तो तुम उसकी अगुआई को स्वीकार करने से इनकार कर सकते हो, तुम उसके ख़िलाफ़ शिकायत करके उसे उजागर भी कर सकते हो। हालाँकि, परमेश्वर के कुछ चुने हुए लोग सत्य को नहीं समझते और विशेष रूप से कायर हैं, इसलिए वे कुछ करने की हिम्मत नहीं करते। वे कहते हैं, "अगर अगुआ ने मुझे निकाल दिया, तो मैं बर्बाद हो जाऊँगा; अगर उसने सबको मुझे उजागर करने और मेरा त्याग करने पर मजबूर कर दिया, तो मैं परमेश्वर पर विश्वास नहीं कर पाऊँगा। अगर मैंने कलीसिया को छोड़ दिया, तो परमेश्वर मुझे नहीं चाहेगा और मुझे नहीं बचाएगा। कलीसिया परमेश्वर का प्रतिनिधित्व करता है!" क्या सोचने के ऐसे तरीके उन चीजों के प्रति ऐसे व्यक्ति के रवैये को प्रभावित नहीं करते हैं? क्या वास्तव में ऐसा हो सकता है कि अगर अगुआ ने तुमको निकाल दिया, तो तुमको बचाया नहीं जायेगा? क्या तुम्हारे उद्धार का प्रश्न तुम्हारे प्रति अगुआ के रवैये पर निर्भर है? इतने सारे लोगों में इतना डर क्यों है? अगर कोई झूठा अगुआ या कोई मसीह विरोधी व्यक्ति तुम्हें धमकी देता है, और तुम इसके ख़िलाफ़ ऊँचे स्तर पर जाकर आवाज़ नहीं उठाते और यहाँ तक कि यह गारंटी भी देते हो कि इसके बाद से तुम अगुआ की बातों से सहमत होगे, तो क्या तुम बर्बाद नहीं हो गये? क्या इस तरह का व्यक्ति सत्य का अनुसरण करने वाला व्यक्ति है? तुम न केवल ऐसे दुष्ट व्यवहार को उजागर करने की हिम्मत नहीं करते जो शैतानी मसीह विरोधियों द्वारा किया जा सकता है, बल्कि इसके विपरीत, तुम उनका आज्ञापालन करते हो और यहाँ तक कि उनके शब्दों को सत्य मान लेते हो, जिनके प्रति तुम समर्पित होते हो। क्या यह मूर्खता का प्रतीक नहीं है? फिर, जब तुम्हें क्षति पहुँचती है, तो क्या तुम इसी के योग्य नहीं हो? क्या तुम्हें परमेश्वर के कारण क्षति पहुँची है? तुमने स्वयं ही अपने लिए ऐसा चाहा था। तुमने एक मसीह-विरोधी को अपना अगुआ बनाया, और उसके साथ ऐसा व्यवहार किया मानो वह कोई भाई या बहन हो—और यह तुम्हारी गलती है। किसी मसीह-विरोधी के साथ कैसा रवैया अपनाया जाना चाहिए? उसे बेनकाब करना चाहिए और उसके विरुद्ध संघर्ष करना चाहिए। यदि तुम इसे अकेले नहीं कर सकते, तो कई लोगों को एक साथ आना होगा और उसके बारे में बताना होगा। यह पता लगने पर कि उच्च पदों पर आसीन कुछ अगुआ और कार्यकर्ता मसीह-विरोधी मार्ग पर चल रहे थे, भाइयों और बहनों को कष्ट दे रहे थे, वास्तविक कार्य नहीं कर रहे, और पद के लाभ का लालच कर रहे थे, तो कुछ लोगों ने उन मसीह-विरोधियों को हटाने के लिए एक याचिका पर हस्ताक्षर किए। इन लोगों ने कितना अद्भुत काम किया! यह दिखाता है कि कुछ लोग सत्य को समझते हैं, उनमें थोड़ी महानता बची है, और वे शैतान द्वारा न तो नियंत्रित हैं और न ही धोखा खाए हुए हैं। यह इस बात को भी साबित करता है कि मसीह-विरोधियों और झूठे अगुओं का कलीसिया में कोई प्रमुख स्थान नहीं है, और वे जो कुछ कहते या करते हैं उसमें अपने असली चेहरे को स्पष्ट दिखाने की उनमें हिम्मत नहीं होती। यदि वे अपना चेहरा दिखाते हैं, तो उनकी निगरानी करने, उनको पहचानने, और उन्हें अस्वीकार करने के लिए लोग मौजूद हैं। अर्थात, जो लोग वास्तव में सत्य को समझते हैं, उनके लिए किसी व्यक्ति का पद, प्रतिष्ठा, और अधिकार ऐसी चीज़ें नहीं हैं जो उनके हृदय को प्रभावित कर दें; सत्य को समझने वाले सभी लोगों के अंदर विवेक होता है और वे इस बात पर पुनर्विचार करते और सोचते हैं कि लोगों को परमेश्वर में अपनी आस्था के लिए किस मार्ग का अनुसरण करना चाहिए, और साथ ही उन्हें अगुआ और कार्यकर्ताओं के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए। वे यह सोचना भी शुरू करते हैं कि लोगों को किसका अनुसरण करना चाहिए, किन व्यवहारों से लोगों का अनुसरण होता है, और किन व्यवहारों से परमेश्वर का अनुसरण होता है। कई वर्षों तक इन सत्यों पर विचार करने, और उपदेशों को अकसर सुनने के बाद, वे अनजाने में परमेश्वर में विश्वास करने से जुड़े सत्यों को समझने लगे हैं, और इसलिए उन्हें कुछ कद हासिल हुआ है। वे परमेश्वर में विश्वास करने के सही रास्ते पर निकल पड़े हैं।

— "मसीह-विरोधियों को उजागर करना" में 'सत्य का अनुसरण करने वालों को वे निकाल देते हैं और उन पर आक्रमण करते हैं' से उद्धृत

यदि किसी कलीसिया में मसीह-विरोधियों को आपे से बाहर हो जाने की अनुमति दी जाती है, उन्हें भाई-बहनों को नियंत्रित करने, धमकाने, छलने या भ्रमित करने के लिए मनमाने नारे लगाने और तर्क करने की खुली छूट दी जाती है, और विवेकहीन अगुवा इन मसीह-विरोधियों को तुरंत उजागर करने और उन्हें नियंत्रण में लाने में अक्षम होकर कुछ भी नहीं करते हैं, जिसके परिणामस्वरूप भाइयों और बहनों के साथ इन मसीह-विरोधियों द्वारा अपनी इच्छानुसार छेड़छाड़ की जाती है और उन्हें परेशान किया जाता है, तो फिर इस कलीसिया के अगुवा कूड़ा हैं। यदि कलीसिया में मसीह-विरोधियों और दुष्ट लोगों को भाइयों और बहनों द्वारा तिरस्कृत और घृणित किया जाता है, यदि उन्हें कलीसिया के भीतर बाँधकर रखा जाता है, और हर किसी को उनके प्रति सूझ-बूझ होती है, इस तरह से कि उनकी बातें और खोखले नारे जो भाइयों और बहनों को छलते और धोखा देते हैं कलीसिया में प्रभाव नहीं डाल पाते हैं, और उन्हें नियंत्रण में रखा जाता है, बाँधकर रखा जाता है, तो इस कलीसिया के अगुवा मानक के अनुसार हैं; वे सत्य-वास्तविकता से संपन्न अगुवा हैं। यदि किसी कलीसिया को एक मसीह-विरोधी द्वारा बाधित किया जा रहा हो, और, भाइयों और बहनों द्वारा पहचाने जाने और अस्वीकृत किए जाने के बाद, वह मसीह-विरोधी भाई-बहनों के साथ अत्याचार और दुर्व्यवहार करके बदला लेता हो, और कलीसिया के अगुआ कुछ न करते हों, तो उस कलीसिया के अगुवा कूड़ा हैं, और उन्हें हटा देना चाहिए। एक कलीसिया के अगुवाओं के रूप में, यदि वे सत्य का उपयोग करके समस्याओं को हल करने में असमर्थ होते हैं, अगर वे कलीसिया में मसीह-विरोधियों की पहचान करने, उन्हें नियंत्रित और सीमित करने में असमर्थ हैं, भाइयों और बहनों की रक्षा करने और उन्हें संरक्षित करने में ताकि वे सामान्य रूप से अपने कर्तव्यों को पूरा कर सकें, असमर्थ होते हैं, और वे परमेश्वर के घर के काम के सामान्य निष्पादन को बनाए रखने में असमर्थ हैं, तो फिर इस कलीसिया के अगुवा कूड़ा हैं, और उन्हें हटा देना चाहिए। यदि किसी कलीसिया के अगुवा किसी मसीह-विरोधी के दुष्ट और क्रूर होने के कारण उसका सामना करने या उसे ललकारने से डरते हैं, और इस तरह से उस मसीह-विरोधी को कलीसिया में लोगों पर अत्याचार करने के लिए खुला छोड़ देते हैं, कि वह मनमानी करे और परमेश्वर के घर के अधिकांश कार्य कमज़ोर पड़ जाएं और इसमें गतिरोध आ जाए, तो फिर इस कलीसिया के अगुवा कूड़ा हैं, और उन्हें हटा देना चाहिए। यदि प्रतिशोध के डर से, एक कलीसिया के अगुवाओं में कभी किसी मसीह-विरोधी को उजागर करने का साहस न हो, और कभी उस मसीह-विरोधी के बुरे कृत्यों को रोकने की कोशिश न करते हों, जिससे कलीसिया के जीवन में व्यवधान पैदा होता हो, और भाइयों और बहनों को जीवन में प्रवेश करने में बहुत बाधा और नुकसान पहुँचता हो, तो फिर इस कलीसिया के अगुवा कूड़ा हैं, और उन्हें हटा देना चाहिए। क्या तुम ऐसे अगुआओं को चुनोगे? (नहीं।) यदि ऐसे अगुआओं से तुम्हारा सामना होता है तो तुम्हें क्या करना चाहिए? तुम्हें उनसे पूछना चाहिए, "हमारी कलीसिया में मसीह-विरोधी तरह-तरह की परेशानियाँ पैदा कर रहे हैं, आततायियों की तरह बर्ताव कर रहे हैं और ताकत का दुरुपयोग कर रहे हैं। क्या तुम उन्हें रोकोगे? क्या तुम उन्हें बेनकाब करने की हिम्मत करोगे? यदि नहीं कर सकते तो हट जाओ। यदि तुम अपने दैहिक हितों की रक्षा कर रहे हो, यदि तुम उनसे डरकर अपने भाई-बहनों को मसीह-विरोधियों और दुष्टों के हवाले कर रहे हो, तो तुम्हें धिक्कार है। तुम अगुआ बनने योग्य नहीं हो। पद से हट जाओ!" क्या तुम्हें ऐसे अगुआओं के साथ इसी तरह पेश नहीं आना चाहिए? (हाँ।) तुम्हें उनके साथ ठीक ऐसा ही व्यवहार करना चाहिए। ऐसे अगुआ कोई व्यावहारिक काम नहीं करते। दुष्टों के सामने, वे अपने भाई-बहनों की रक्षा नहीं करते। बल्कि वे तो दुष्टों के आगे झुक जाते हैं, उनसे समझौता कर लेते हैं और उनसे दया की भीख माँगते हैं। ऐसे लोग तुच्छ होते हैं, विश्वासघाती होते हैं, और उन्हें नकार देना चाहिए।

— "मसीह-विरोधियों को उजागर करना" में 'वे अपना कर्तव्य केवल खुद को अलग दिखाने और अपने हितों और महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए निभाते हैं; वे कभी परमेश्वर के घर के हितों की नहीं सोचते, और अपने व्यक्तिगत यश के बदले उन हितों के साथ धोखा तक कर देते हैं (भाग आठ)' से उद्धृत

संदर्भ के लिए धर्मोपदेश और संगति के उद्धरण :

जहाँ तक उन मसीह-विरोधियों, दुष्ट लोगों और धोखेबाजों की बात है जो कलीसिया में अपना दबदबा रखते हैं, परमेश्वर के चुने हुए लोगों को उन्हें उनके पदों से हटाने के और अस्वीकार करने के लिए एकजुट होना चाहिए। ऐसे दो या तीन अगुआ और कार्यकर्ता, जिनके पास पवित्र आत्मा का कार्य है, सीधे उन्हें उनके पदों से हटा सकते हैं और उन पर पाबंदी लगा सकते हैं, और किसी ऐसे व्यक्ति को, जिसके पास भी पवित्र आत्मा का कार्य है, हटाए गए लोगों का कार्य सँभालने के लिए चुना जा सकता है। सिर्फ यही शैतान से सचमुच नफरत करना और उससे मुँह मोड़ना है। परमेश्वर के घर को दुष्ट लोगों, मसीह-विरोधियों या ऐसे लोगों को, जिनके पास पवित्र आत्मा का कार्य नहीं है, कभी भी कलीसिया में सत्ता हासिल करके दूसरों को धोखा देने और नुकसान पहुँचाने नहीं देना चाहिए। जिस पल ऐसे लोग अपना असली रंग दिखाएँ, उन पर पाबंदी लगा देनी चाहिए। यह परमेश्वर की आज्ञा है, और यह उसके धार्मिक स्वभाव का प्रतीक है। परमेश्वर के चुने हुए लोगों को उसके कार्य को बनाए रखते हुए और उसके वचनों के अधिकार के प्रति समर्पित होते हुए मजबूती से उसके पक्ष में खड़े होना चाहिए। मसीह-विरोधियों और दुष्ट लोगों का कलीसिया में सत्ता हासिल करना परमेश्वर की इच्छा के विरुद्ध है, और यह उसकी प्रशासनिक आज्ञाओं के खिलाफ जाता है। जब भी ऐसे किसी व्यक्ति का पता चले, उस पर पाबंदी लगा देनी चाहिए; और किसी को भी ऐसे व्यक्ति का बचाव नहीं करना चाहिए। जो कोई भी किसी मसीह-विरोधी, दुष्ट व्यक्ति या दूसरों को धोखा देने वाले के बचाव में बोलता है, वह शैतान का साथी और उसका प्यादा है, और इसलिए, वह ऐसा व्यक्ति है जिसे परमेश्वर द्वारा उजागर करके हटा दिया जाएगा।

आपदाओं और परीक्षणों के अंतिम वर्षों के दौरान सभी तरह के लोगों को उजागर किया जाएगा। नकली अगुआ और कार्यकर्ता, जिनके पास पवित्र आत्मा का कार्य नहीं है, सभी अगुआओं और कार्यकर्ताओं के लगभग एक-तिहाई हैं। इन नकली अगुआओं और कार्यकर्ताओं में से कुछ मसीह-विरोधी हैं जो सभी तरह के बुरे काम करते हैं, जबकि कुछ लोगों ने ज्यादा बुरे काम न करने पर भी, सत्य का अनुसरण न करने के कारण पवित्र आत्मा का कार्य गँवा दिया है, और इस तरह के लोगों को पश्चात्ताप करने का अवसर दिया जा सकता है। जहाँ तक उन मसीह-विरोधियों की बात है, जो सभी तरह के बुरे काम करते हैं या जो अपना स्वतंत्र राज्य कायम करने की कोशिश करते हैं, सभी स्तरों के अगुआओं और कार्यकर्ताओं के साथ-साथ परमेश्वर के चुने हुए लोगों को भी ऐसे लोगों की दुष्टता का साक्ष्य जुटाना चाहिए और उनके बुरे कर्मों का एक सारांश तैयार करना चाहिए। पर्याप्त साक्ष्य जुटा लिए जाने के बाद इन लोगों को इनके पदों से हटाने और इन पर पाबंदी लगाने के लिए कार्रवाई की जा सकती है—और यह कार्रवाई परमेश्वर के प्रति श्रद्धा दिखाने के लिए बुरे लोगों को निष्कासित करने की कार्रवाई है। कुछ कलीसियाओं में परमेश्वर के चुने हुए लोगों ने पहले ही कुछ नकली अगुआओं, नकली कार्यकर्ताओं या मसीह-विरोधियों के अपराधों का साक्ष्य जुटा लिया है, और उन्हें यह साक्ष्य लिखित सामग्रियों से मिलाना चाहिए। अगर किसी ने मसीह-विरोधियों का एक कार्यबल बना लिया है, तो परमेश्वर के चुने हुए लोगों को ऐसे अगुआओं और कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर, जिनके पास पवित्र आत्मा का कार्य है, ऐसे व्यक्ति को बरखास्त करके बदल देना चाहिए। अगर उसके द्वारा किए गए बुरे कर्मों का साक्ष्य अपर्याप्त है, या वह सिर्फ भ्रष्टता व्यक्त करने की विभिन्न समस्याओं से संबंधित है और सभी तरह के बुरे कर्म करने के दायरे में नहीं आता, तो इस निर्णय को टाला जा सकता है और कुछ समय तक उसकी गतिविधियों पर नजर रखने के बाद उसकी इंसानियत की गुणवत्ता के आधार पर निर्णय लिया जा सकता है। परमेश्वर के घर में सिर्फ ऐसे अगुआओं और कार्यकर्ताओं को ही परमेश्वर द्वारा इस्तेमाल किए जाने की मंजूरी मिलती है, जिनके पास पवित्र आत्मा का कार्य है; जिनके पास पवित्र आत्मा का कार्य नहीं है, वे ऐसे लोग हैं जिन्हें परमेश्वर मंजूरी नहीं देता और जिन पर प्रतिबंध लगा दिया जाना चाहिए। इसलिए, परमेश्वर के चुने हुए लोगों को यह पता लगाना चाहिए कि किसी भी स्तर पर अगुआ या कार्यकर्ता को इस आधार पर रखा गया है या नहीं कि उसके पास पवित्र आत्मा का कार्य है या नहीं। परमेश्वर द्वारा शैतान की पराजय और उसके द्वारा शैतान की नियति की समाप्ति एक निर्णायक पल में आ पहुँची है। परमेश्वर के चुने हुए लोगों को उसकी इच्छा समझनी चाहिए और शैतान से संबंध रखने वाले विभिन्न दुष्ट लोगों और मसीह-विरोधियों को कलीसिया में सत्ता बिलकुल भी हासिल नहीं करने देनी चाहिए—यही परमेश्वर की माँग है, उसकी आज्ञा है और इससे भी अधिक यह उसके धार्मिक स्वभाव का प्रतीक है। दुष्ट लोग और मसीह-विरोधी कलीसिया में बड़े लाल अजगर के चाकर हैं, और वे बड़े लाल अजगर की शक्तियों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसलिए, अगर दुष्ट लोग और मसीह-विरोधी सत्ता हासिल कर लेते हैं, तो इसका मतलब है कि बड़े लाल अजगर ने सत्ता हासिल कर ली है। केवल दुष्ट लोगों और मसीह-विरोधियों को अस्वीकार करके ही लोग बड़े लाल अजगर को त्याग सकते हैं और शैतान के खिलाफ विद्रोह कर सकते हैं। परमेश्वर के प्रति सच्चे और विश्वासी सभी लोगों को सचेत होकर उठना चाहिए और परमेश्वर के कार्य को कायम रखना चाहिए, परमेश्वर के चुने हुए लोगों के हितों की रक्षा करनी चाहिए और शैतान की शक्तियों के खिलाफ निर्णायक लड़ाई शुरू करनी चाहिए—यही वह शक्ति है, जो परमेश्वर ने अपने चुने हुए लोगों को दी है। इस आध्यात्मिक लड़ाई में वे सभी लोग, जो परमेश्वर के साथ खड़े होते हैं और उसके प्रति वफादार रहते हैं, उसके हैं, और जो शैतान के साथ खड़े रहते हैं और परमेश्वर के कार्य को बिगाड़ने और उसे नष्ट करने की हर संभव कोशिश करते हैं, वे सभी शैतान के हैं; इन दोनों तरह के लोगों को उजागर कर दिया गया है, और परमेश्वर के चुने हुए लोगों को इसे साफ तौर पर देखना चाहिए।

— 'कार्य व्यवस्था' से उद्धृत

अगर कुछ नकली अगुआओं और कार्यकर्ताओं को उनके द्वारा बहुत सारे बुरे कर्म किए जाने के बाद भी बदला नहीं जाता, तो परमेश्वर के चुने हुए लोगों को उनकी दुष्टता के तथ्यों का एक सारांश तैयार करना चाहिए और उच्च स्तरों के अगुआओं और कार्यकर्ताओं से उनकी शिकायत करनी चाहिए। अगर जिला अगुआओं ने बहुत सारे बुरे काम किए हैं, तो इसकी शिकायत मंडलीय अगुआओं और कार्यकर्ताओं से की जानी चाहिए। अगर मंडल की निर्णय लेने वाली टीम ने बहुत बुरे काम किए हैं और वे साफ तौर पर कार्य-व्यवस्थाओं का विरोध कर रहे हैं और परमेश्वर के घर के कार्य में रुकावट डाल रहे हैं, तो इसकी शिकायत पादरी स्तर की निर्णय लेने वाली टीम से की जानी चाहिए। अगर पादरी स्तर की निर्णय लेने वाली टीम भी समस्या का समाधान करने के बजाय उनका बचाव करती है, तो स्थिति को लिखित दस्तावेजों में दर्ज किया जाना चाहिए और वेबसाइट के जरिए ऊपर वाले से इसकी शिकायत की जानी चाहिए। इसके अलावा, संयुक्त बरखास्तगी के जरिये नकली अगुआओं और कार्यकर्ताओं को हटाने का तरीका भी अपनाया जा सकता है। संयुक्त बरखास्तगी को लागू करने का सिद्धांत यह है कि सभी स्तरों पर ऐसे अगुआओं और कार्यकर्ताओं द्वारा, जिनके पास पवित्र आत्मा का कार्य है, सभी नकली अगुआओं, नकली कार्यकर्ताओं और मसीह-विरोधियों पर प्रतिबंध लगाए जाने की एक समर्पित कार्रवाई की जानी चाहिए। उदाहरण के लिए, अगर पादरी स्तर की निर्णय लेने वाली टीम के सदस्यों के पास पवित्र आत्मा का कार्य नहीं है, तो पादरी स्तर की निर्णय लेने वाली टीम के ऐसे दूसरे सदस्यों या कार्य-दल के ऐसे सदस्यों को, जिनके पास पवित्र आत्मा का कार्य है, उन्हें हटाने की कार्रवाई में साथ देना चाहिए। अगर मंडल स्तर की निर्णय लेने वाली टीम के सदस्यों के पास पवित्र आत्मा का कार्य नहीं है, तो मंडल स्तर की निर्णय लेने वाली टीम के ऐसे दूसरे सदस्यों को या दो से तीन ऐसे मंडलीय समन्वयकों को, जिनके पास पवित्र आत्मा का कार्य है, उन्हें हटाने की कार्रवाई में साथ देना चाहिए। अगर किसी जिला अगुआ के पास पवित्र आत्मा का कार्य नहीं है, तो दो या तीन दूसरे जिला अगुआओं और कार्यकर्ताओं को उन्हें हटाने की कार्रवाई में साथ देना चाहिए। अगर मंडलीय समन्वयकों या जिला प्रचारकों के पास पवित्र आत्मा का कार्य नहीं है, तो उन्हें मंडल स्तर की निर्णय लेने वाली टीम या जिला अगुआओं द्वारा सीधे तौर पर दूसरा कार्य सौंपा जा सकता है। उन नकली अगुआओं और कार्यकर्ताओं को हटाते समय, जिनके पास पवित्र आत्मा का कार्य नहीं है, सही तरीके से और बिना किसी गलती के यह पता लगाया जाना चाहिए कि उन्होंने कितने बुरे कर्म किए हैं और कैसे परमेश्वर के चुने हुए लोगों ने उनकी शिकायत की है। उन नकली अगुआओं और कार्यकर्ताओं को, जिनमें अपेक्षाकृत बेहतर इंसानियत है, किंतु जिनके पास पवित्र आत्मा का कार्य नहीं है, सिर्फ बरखास्त किया जाना चाहिए और उसके बाद भी उन्हें भाई-बहन माना जाना चाहिए। अगर नकली अगुआ और कार्यकर्ता अधर्म में डूबे दुष्ट लोग हैं, तो उनके दुष्ट व्यवहार की गंभीरता के अनुसार उनका मूल्यांकन करके यह निर्णय लिया जाना चाहिए कि उन्हें निष्कासित किया जाना चाहिए या नहीं। इसके अलावा, किसी नकली अगुआ, नकली कार्यकर्ता और मसीह-विरोधी पर प्रतिबंध लगाने की कार्रवाई करने से पहले, समस्या की प्रकृति तय करने और यह स्पष्ट करने के लिए पहले जाँच की जानी चाहिए कि संबंधित लोगों के पास पवित्र आत्मा का कार्य है या नहीं, और इसमें शामिल पक्षों को नकली अगुआओं, नकली कार्यकर्ताओं या मसीह-विरोधियों की श्रेणी में रखा जा सकता है या नहीं। इसके अलावा, उनके सहकर्मियों और उन भाई-बहनों के साथ पूछताछ और जाँच आयोजित की जानी चाहिए, जिनके प्रति वे जिम्मेदार हैं, ताकि उनके बुरे कर्मों और परमेश्वर के खिलाफ उनके विरोध की बारीकियों को समझा जा सके। उनके बुरे कर्मों की एक सूची भी तैयार की जानी चाहिए और कई लोगों से उसकी पुष्टि करवानी चाहिए, ताकि यह दिखाया जा सके कि साक्ष्य निर्णायक है। कार्रवाई सिर्फ तभी की जा सकती है, जब उनसे परिचित ज़्यादातर लोगों ने साक्ष्य की पुष्टि कर दी हो। कोई भी कार्रवाई सावधानी से, विवेक से और बुद्धिमानी से की जानी चाहिए और उचित अवसर भी चुने जाने चाहिए; विपरीत परिस्थितियों में कभी ऐसा नहीं किया जा सकता। जगह चाहे जो भी हो, अगर वहाँ नकली अगुआ, नकली कार्यकर्ता और मसीह-विरोधी मौजूद हैं, तो उनके साथ इसी तरीके से निपटा जा सकता है। यह परमेश्वर की आज्ञा है और पवित्र आत्मा द्वारा इस्तेमाल किए गए व्यक्ति द्वारा अधिकृत है। उन सभी अगुआओं और कार्यकर्ताओं को, जिनके पास पवित्र आत्मा का कार्य है, नकली अगुआओं, नकली कार्यकर्ताओं और मसीह-विरोधियों के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार है, जिसका आधार सुरक्षा और यह आश्वासन है कि परमेश्वर के चुने हुए लोगों के कलीसियाई जीवन में कोई रुकावट नहीं आएगी। यह वास्तव में एक नेक कर्म और धार्मिकता का सच्चा कार्य है।

— 'कार्य व्यवस्था' से उद्धृत

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