13. पवित्र आत्मा के कार्य को प्राप्त करने के सिद्धांत

(1) अपने दिल में सत्य को समझने की एक लालसा के साथ के परमेश्वर के वचनों को अक्सर पढ़ना और उन पर चिंतन करना, तथा परमेश्वर से नेकी से प्रार्थना करना और उसके साथ समागम करना, आवश्यक है;

(2) एक ईमानदार व्यक्ति बनने का प्रयास करो, परमेश्वर के लिए खुद को खपाने के लिए निष्ठापूर्वक सक्षम बनो, और अपने कर्तव्य को अच्छी तरह से निभाने की पूरी कोशिश करो, ताकि परमेश्वर को संतुष्ट कर सको;

(3) अपने अतिक्रमणों और तुम में उजागर की गई भ्रष्टता पर अक्सर चिंतन करो। उन्हें सत्य के साथ हल करने की कोशिश करो, और परमेश्वर को एकनिष्ठ आभार और प्रशंसा देने की पेशकश करो;

(4) परमेश्वर के साथ एक सामान्य संबंध स्थापित करना आवश्यक है। जब किसी के पास परमेश्वर के बारे में अवधारणाएँ होती हैं या वह उसकी अवज्ञा करता है, तो उस व्यक्ति को इस मुद्दे को सुलझाने के लिए सत्य की तलाश करनी चाहिए और सचमुच पश्चाताप करना चाहिए।

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:

परमेश्वर का कार्य, अपने वचनों से तुम्हें पोषण देना है। यदि तुम उसके वचनों का पालन करोगे, उन्हें स्वीकारोगे, तो पवित्र आत्मा निश्चित रूप से तुम में कार्य करेगा। पवित्र आत्मा बिलकुल उसी तरह कार्य करता है जिस तरह से मैं बता रहा हूँ; जैसा मैंने कहा है वैसा ही करो और पवित्र आत्मा शीघ्रता से तुम में कार्य करेगा। मैं तुम लोगों के अवलोकन के लिए नया प्रकाश देता हूँ और तुम लोगों को आज के प्रकाश में लाता हूँ, और जब तुम इस प्रकाश में चलोगे, तो पवित्र आत्मा तुरन्त ही तुममें कार्य करेगा। कुछ लोग हैं जो अड़ियल हो सकते हैं, वे कहेंगे, "तुम जैसा कहते हो मैं वैसा बिलकुल नहीं करूँगा।" ऐसी स्थिति में, मैं कहूँगा कि तुम्हारा खेल खत्म हो चुका है; तुम पूरी तरह से सूख गए हो, और तुममें जीवन नहीं बचा है। इसलिए, अपने स्वभाव के रूपांतरण का अनुभव करने के लिए, आज के प्रकाश के साथ तालमेल बिठाए रखना बहुत आवश्यक है। पवित्र आत्मा न केवल उन खास लोगों में कार्य करता है जो परमेश्वर द्वारा प्रयुक्त किए जाते हैं, बल्कि कलीसिया में भी कार्य करता है। वह किसी में भी कार्य कर रहा हो सकता है। शायद वह वर्तमान समय में, तुममें कार्य करे, और तुम इस कार्य का अनुभव करोगे। किसी अन्य समय शायद वह किसी और में कार्य करे, और ऐसी स्थिति में तुम्हें शीघ्र अनुसरण करना चाहिए; तुम वर्तमान प्रकाश का अनुसरण जितना करीब से करोगे, तुम्हारा जीवन उतना ही अधिक विकसित होकर उन्नति कर सकता है। कोई व्यक्ति कैसा भी क्यों न हो, यदि पवित्र आत्मा उसमें कार्य करता है, तो तुम्हें अनुसरण करना चाहिए। उसी प्रकार अनुभव करो जैसा उसने किया है, तो तुम्हें उच्चतर चीजें प्राप्त होंगी। ऐसा करने से तुम तेजी से प्रगति करोगे। यह मनुष्य के लिए पूर्णता का ऐसा मार्ग है जिससे जीवन विकसित होता है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'जो सच्चे हृदय से परमेश्वर की आज्ञा का पालन करते हैं वे निश्चित रूप से परमेश्वर द्वारा हासिल किए जाएँगे' से उद्धृत

परमेश्वर उसमें कार्य करता है जो परमेश्वर के वचनों को संजोते और उसका अनुसरण करते हैं। जितना तू परमेश्वर के वचनों को संजोयेगा, उतना ही उसका आत्मा तुझमें कार्य करेगा। कोई व्यक्ति परमेश्वर के वचन को जितना ज्यादा संजोता है, उसका परमेश्वर के द्वारा पूर्ण बनाए जाने का मौका उतना ही ज्यादा होता है। परमेश्वर उसे पूर्ण बनाता है, जो वास्तव में उससे प्यार करता है। वह उसको पूर्ण बनाता है, जिसका हृदय उसके सम्मुख शांत रहता है। परमेश्वर के सभी कार्य को संजोना, उसकी प्रबुद्धता को संजोना, परमेश्वर की उपस्थिति को संजोना, परमेश्वर की देखभाल और सुरक्षा को संजोना, इस बात को संजोना कि कैसे परमेश्वर के वचन तेरे जीवन की वास्तविकता बन जाते हैं और तेरे जीवन की आपूर्ति करते हैं—यह सब परमेश्वर के दिल के सबसे अनुरूप है। यदि तू परमेश्वर के कार्य को संजोता है, अर्थात यदि उसने तुझ पर जो सारे कार्य किए हैं, तू उसे संजोता है, तो वह तुझे आशीष देगा और जो कुछ तेरा है उसे बहुगुणित करेगा। यदि तू परमेश्वर के वचनों को नहीं संजोता है, तो परमेश्वर तुझ पर कार्य नहीं करेगा, बल्कि वह केवल तेरे विश्वास के लिए ज़रा-सा अनुग्रह देगा, या तुझे कुछ धन की आशीष या तेरे परिवार के लिए थोड़ी सुरक्षा देगा। परमेश्वर के वचनों को अपनी वास्तविकता बनाने, उसे संतुष्ट करने और उसके दिल के अनुसार होने के लिए तुझे कडा प्रयास करना चाहिए; तुझे केवल परमेश्वर के अनुग्रह का आनंद लेने का ही प्रयास नहीं करना चाहिए। विश्वासियों के लिए परमेश्वर के कार्य को प्राप्त करने, पूर्णता पाने, और परमेश्वर की इच्छा पर चलनेवालों में से एक बनने की अपेक्षा कुछ भी अधिक महत्वपूर्ण नहीं है। यह वो लक्ष्य है जिसे पूरा करने का तुझे प्रयास करना चाहिए।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'परमेश्वर उन्हें पूर्ण बनाता है, जो उसके हृदय के अनुसार हैं' से उद्धृत

पवित्र आत्मा इस सिद्धांत के द्वारा काम करता है : लोगों के सहयोग से, उनके द्वारा सक्रियतापूर्वक परमेश्वर की प्रार्थना करने, उसे खोजने और उसके अधिक निकट आने से परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं, और पवित्र आत्मा द्वारा उन्हें प्रबुद्ध और रोशन किया जा सकता है। ऐसा नहीं है कि पवित्र आत्मा एकतरफ़ा कार्य करता है, या मनुष्य एकतरफ़ा कार्य करता है। दोनों ही अपरिहार्य हैं, और लोग जितना अधिक सहयोग करते हैं, और वे जितना अधिक परमेश्वर की अपेक्षाओं के मानकों को प्राप्त करने की कोशिश करते हैं, पवित्र आत्मा का कार्य उतना ही अधिक बड़ा होता है। पवित्र आत्मा के कार्य के साथ जुड़कर लोगों का वास्तविक सहयोग ही परमेश्वर के वचनों का वास्तविक अनुभव और सारभूत ज्ञान उत्पन्न कर सकता है। इस तरह अनुभव करके, धीरे-धीरे, अंततः एक पूर्ण व्यक्ति बनता है। परमेश्वर अलौकिक काम नहीं करता; लोगों की धारणाओं के अनुसार, परमेश्वर सर्वशक्तिमान है, और सब-कुछ परमेश्वर के द्वारा किया जाता है—परिणामस्वरूप लोग निष्क्रिय रहकर प्रतीक्षा करते हैं, वे न तो परमेश्वर के वचनों को पढ़ते हैं, और न ही प्रार्थना करते हैं, और पवित्र आत्मा के स्पर्श की प्रतीक्षा मात्र करते रहते हैं। हालाँकि, जिनकी समझ सही है, वे यह मानते हैं : परमेश्वर के कार्यकलाप उतनी ही दूर तक जा सकते हैं, जहाँ तक मेरा सहयोग होता है, और मुझमें परमेश्वर के कार्य का प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि मैं किस प्रकार सहयोग करता हूँ। जब परमेश्वर बोलता है, तो परमेश्वर के वचनों को खोजने और उनकी ओर बढ़ने का प्रयत्न करने के लिए मुझे वह सब करना चाहिए, जो मैं कर सकता हूँ; यही है वह, जो मुझे प्राप्त करना चाहिए।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'वास्तविकता को कैसे जानें' से उद्धृत

परमेश्वर द्वारा लोगों को पूर्ण किए जाने का एक नियम है, जो यह है कि वह तुम्हारी आत्मा को मुक्ति पाने और तुम्हें इस योग्य बनाने में मदद करते हुए, कि तुम उसे प्रेम करने में अधिक सक्षम हो सको, तुम्हारे किसी वांछनीय भाग का प्रयोग करके तुम्हें प्रबुद्ध करता है, जिससे तुम्हारे पास अभ्यास करने के लिए एक मार्ग हो और तुम समस्त नकारात्मक अवस्थाओं से खुद को अलग कर सको। इस तरह से तुम शैतान के भ्रष्ट स्वभाव को उतार फेंकने में सक्षम हो जाते हो। तुम सरल और उदार हो, और स्वयं को जानने और सत्य का अभ्यास करने के इच्छुक हो। परमेश्वर निश्चित रूप से तुम्हें आशीष देगा, अतः जब तुम दुर्बल और नकारात्मक होते हो, तो वह तुम्हें दोगुना प्रबुद्ध करता है, स्वयं को और अधिक जानने में तुम्हारी सहायता करता है, स्वयं के लिए पश्चात्ताप करने के और अधिक इच्छुक होने और उन चीज़ों का अभ्यास करने के योग्य बनाता है, जिनका तुम्हें अभ्यास करना चाहिए। केवल इसी तरह से तुम्हारा हृदय शांत और सहज हो सकता है। जो व्यक्ति साधारणतः परमेश्वर को जानने पर ध्यान देता है, स्वयं को जानने पर ध्यान देता है, अपने अभ्यास पर ध्यान देता है, वह निरंतर परमेश्वर का कार्य, और साथ ही परमेश्वर का मार्गदर्शन और प्रबुद्धता प्राप्त करने के भी योग्य होगा। एक नकारात्मक अवस्था में होने पर भी ऐसा व्यक्ति चीज़ों को उलट देने में सक्षम हो जाता है, चाहे वह ऐसा अंत:करण की कार्रवाई के कारण करे या परमेश्वर के वचन से प्राप्त प्रबुद्धता के कारण।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'केवल उन्हें ही पूर्ण बनाया जा सकता है जो अभ्यास पर ध्यान देते हैं' से उद्धृत

पवित्र आत्मा के कार्य के अपने सिद्धांत हैं और यह सशर्त है। किस तरह के लोगों में पवित्र आत्मा आमतौर से कार्य करता है? पवित्र आत्मा का कार्य प्राप्त करने के लिए व्यक्ति में क्या गुण होना चाहिए? अपने विश्वास में, व्यक्ति को सफ तौर पर यह समझना चाहिए कि उसके पास कम से कम एक ईमानदार हृदय और चेतना का होना जरूरी है। जब तुम्हारे पास एक ईमानदार हृदय के साथ-साथ वह चेतना और तर्क होगा जो मानवीय प्रकृति में होने जरूरी हैं, तभी पवित्र आत्मा तुम पर कार्य कर सकता है। लोग हमेशा कहते हैं कि परमेश्वर इंसान के दिल के अंदर गहराई से देखता है और हर चीज का निरीक्षण करता है। लेकिन लोग कभी नहीं जान पाते कि कुछ लोग पवित्र आत्मा से प्रबुद्धता क्यों प्राप्त नहीं कर पाते, क्यों वे कभी अनुग्रह हासिल नहीं कर पाते, क्यों कभी आनंदित नहीं होते, क्यों वे हमेशा निराश और उदास रहते हैं, क्यों वे सकारात्मक होने के काबिल नहीं हो पाते? उनके अस्तित्व की दशाओं पर नज़र डालो। मैं तुम्हें गारंटी देता हूँ कि इनमें से हरेक इंसान के पास एक सक्रिय चेतना या ईमानदार दिल नहीं है। जिनके मन में शांति और आनंद है, जो अपने कर्तव्यों के पालन में हमेशा सक्रिय रहते हैं और बेहतर से बेहतर करने की कोशिश करते हैं, जो हमेशा कुछ-न-कुछ प्राप्त करते रहते हैं, जो हमेशा एक समझ रखते हैं और जो हमेशा एक अवधि के बाद अपने प्रयासों से कुछ-न-कुछ प्राप्त कर लेते हैं—क्या वे ये चीजें अपनी कल्पनाशीलता से प्राप्त करते हैं? क्या ये चीजें किताबें पढ़कर सीखी जाती हैं? ये कैसे प्राप्त होती हैं? क्या पवित्र आत्मा के कार्य से छुटकारा पाया जा सकता है? (नहीं।) पवित्र आत्मा का कार्य सर्वप्रमुख है। जब तुम्हारे अंदर एक ईमानदार दिल होता है, चेतना और विवेक होता है, जो एक व्यक्ति की मानवीयता के लिए जरूरी शर्तें हैं, तो परमेश्वर तुम पर ध्यान देगा। क्या तुम लोगों ने उस खाके को समझ लिया है जिसमें पवित्र आत्मा कार्य करता है? पवित्र आत्मा आम तौर पर उन लोगों पर कार्य करता है जिनके दिल ईमानदार हैं, वह तभी कार्य करता है जब लोग मुश्किल में होते हैं और सत्य की खोज करते हैं। परमेश्वर उन लोगों पर ध्यान नहीं देगा जिनके पास इंसानी तर्क या चेतना का ज़रा सा भी अंश नहीं है। अगर कोई व्यक्ति बहुत ईमानदार है, पर कुछ समय के लिए उसका मन परमेश्वर से हट गया है, उसकी सुधरने की इच्छा नहीं रहती, वह नकारात्मक दशा में चला जाता है और इससे बाहर नहीं निकल पाता, जब वह अपनी दशा से उबरने के लिए प्रार्थना नहीं करता या सत्य की खोज नहीं करता और सहयोग नहीं करता, तो पवित्र आत्मा उसकी इस सामयिक कालिमायुक्त दशा के दौरान या उसकी अस्थायी पतनशीलता के दौरान उसके भीतर कार्य नहीं करेगा। तो फिर मानवता की चेतना से विहीन ऐसे व्यक्ति पर पवित्र आत्मा द्वारा कैसे कार्य किया जा सकता है? यह तो और भी असंभव है। फिर ऐसे लोगों को क्या करना चाहिए? उन्हें सच्चे दिल से पश्चाताप करना चाहिए। सबसे पहले, तुम्हारा हृदय परमेश्वर के लिए खुला होना चाहिए और तुम्हें परमेश्वर के सत्य की खोज करनी चाहिए; जब तुम सत्य को समझ लोगे, तब तुम इसका अभ्यास कर पाओगे। फिर तुम परमेश्वर की व्यवस्था के प्रति समर्पित हो जाओगे और परमेश्वर को अपना नियंत्रण लेने दोगे। सिर्फ़ इसी तरीके से तुम परमेश्वर की प्रशंसा पा सकोगे। सबसे पहले तुम्हें अपनी प्रतिष्ठा और दंभ को अलग रखना होगा और अपने हितों को त्यागना होगा। इसके बाद, अपने पूरे शरीर और आत्मा को अपना दायित्व पूरा करने और परमेश्वर के लिए गवाही देने के काम में लगाना होगा। तुम्हें पहले आत्म-समर्पण करना होगा, परमेश्वर के लिए अपने हृदय को खोलना होगा और उन चीजों को अलग करना होगा जिन्हें तुम प्रेम करते हो और संजो कर रखते हो। अगर तुम परमेश्वर से अनुरोध करते समय उन चीजों से चिपके रहते हो, तो क्या तुम पवित्र आत्मा के कार्य को प्राप्त कर पाओगे? पवित्र आत्मा का कार्य सशर्त है, और परमेश्वर वह परमेश्वर है जो दुष्टों से नफरत करता है और जो स्वयं पवित्र है। अगर लोग हमेशा इन चीजों से चिपके रहते हैं, लगातार अपने आपको परमेश्वर से दूर करते हैं और परमेश्वर के कार्य एवं मार्गदर्शन को अस्वीकार करते हैं, तो परमेश्वर उन पर कार्य करना बंद कर देगा। ऐसा नहीं है कि परमेश्वर को हर व्यक्ति के भीतर कार्य करना चाहिए या वह तुम्हें ऐसा-वैसा कुछ करने के लिए बाध्य करेगा। वह तुम्हारे साथ जबर्दस्ती नहीं करता। मनुष्यों को ऐसा-वैसा करने के लिए बाध्य करना दुष्ट आत्माओं का काम होता है, बल्कि लोगों पर कब्जा करके उन्हें नियंत्रित करना भी। पवित्र आत्मा तो बहुत शालीनता के साथ कार्य करता है; वह तुम्हें प्रेरित करता है और तुम्हें महसूस भी नहीं होता। तुम्हें ऐसा लगता है जैसे तुम्हें अनजाने में ही कुछ समझ में आ गया है या उसका अहसास हो गया है। पवित्र आत्मा इसी तरीके से लोगों को प्रेरित करता है और अगर वे समर्पण करते हैं तो वे प्रायश्चित करने की स्थित होते हैं।

— "मसीह की बातचीत के अभिलेख" में 'अपना सच्चा हृदय परमेश्वर को दो, और तुम सत्य को प्राप्त कर सकते हो' से उद्धृत

और तुम पवित्र आत्मा द्वारा स्पर्श किए जाने की कोशिश कैसे करते हो? अत्यंत महत्वपूर्ण है परमेश्वर के वर्तमान वचनों में जीना और परमेश्वर की अपेक्षाओं की नींव पर प्रार्थना करना। इस तरह प्रार्थना कर चुकने के बाद, पवित्र आत्मा द्वारा तुम्हें स्पर्श करना निश्चित है। यदि तुम आज परमेश्वर द्वारा कहे गए वचनों की नींव के आधार पर कोशिशनहीं करते, तो यह व्यर्थ है। तुम्हें प्रार्थना करनी चाहिए और कहना चाहिए: "हे परमेश्वर! मैं तुम्हारा विरोध करता हूँ और मैं तुम्हारा बहुत ऋणी हूँ; मैं बहुत ही अवज्ञाकारी हूँ और तुम्हें कभी भी संतुष्ट नहीं कर सकता। हे परमेश्वर, मैं चाहता हूँ कि तुम मुझे बचा लो, मैं अंत तक तुम्हारी सेवा करना चाहता हूँ, मैं तुम्हारे लिए मर जाना चाहता हूँ। तुम मुझे न्याय और ताड़ना देते हो और मुझे कोई शिकायत नहीं है; मैं तुम्हारा विरोध करता हूँ और मैं मर जाने लायक हूँ ताकि मेरी मृत्यु में सभी लोग तुम्हारा धार्मिक स्वभाव देख सकें।" जब तुम इस तरह अपने दिल से प्रार्थना करते हो, तो परमेश्वर तुम्हारी सुनेगा और तुम्हारा मार्गदर्शन करेगा; यदि तुम आज पवित्र आत्मा के वचनों के आधारपर प्रार्थना नहीं करते, तो पवित्र आत्मा द्वारा तुम्हें छूने की कोई संभावना नहीं है। यदि तुम परमेश्वर की इच्छा के अनुसार और आज परमेश्वर जो करना चाहते हैं, उसके अनुसार प्रार्थना करते हो, तो तुम कहोगे "हे परमेश्वर! मैं तुम्हारे आदेशों को स्वीकार करना चाहता हूँ और तुम्हारे आदेशों के प्रति निष्ठा रखना चाहता हूँ, और मैं अपना पूरा जीवन तुम्हारी महिमा को समर्पित करने के लिए तैयार हूँ ताकि मैं जो कुछ भी करता हूँ वह परमेश्वर के लोगों के मानकों तक पहुँच सके। काश मेरा दिल तुम्हारे स्पर्श को पा ले। मैं चाहता हूँ कि तुम्हारी आत्मा सदैव मेरा प्रबोधन करे ताकि मैं जो कुछ भी करूँ वह शैतान को शर्मिंदा करे ताकि मैं अंततः तुम्हारे द्वारा प्राप्त किया जाऊँ।" यदि तुम इस तरह प्रार्थना करते हो, परमेश्वर की इच्छा के आसपास केंद्रित रहकर, तो पवित्र आत्मा अपरिहार्य रूप से तुम में कार्य करेगी। यह महत्वपूर्ण नहीं है कि तुम्हारी प्रार्थनाओं में कितने शब्द हैं—कुंजी यह है कि तुम परमेश्वर की इच्छा समझते हो या नहीं। तुम सभी के पास निम्नलिखित अनुभव हो सकता है: कभी-कभी किसीसभा में प्रार्थना करते समय, पवित्र आत्मा के कार्य का गति-सिद्धांत अपने चरम बिंदु तक पहुँच जाता है, जिससे सभी की ताकत बढ़ती है। परमेश्वर के सामने पश्चाताप से अभिभूत होकर कुछ लोग फूट-फूटकर रोते हैं और प्रार्थना करते हुए आँसू बहाते हैं, तो कुछ लोग अपना संकल्प दिखाते हैं और प्रतिज्ञा करते हैं। पवित्र आत्मा के कार्य से प्राप्त होने वाला प्रभाव ऐसा है। आज यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि सभी लोग परमेश्वर के वचनों में पूरी तरह अपना मन लगाएँ। उन शब्दों पर ध्यान न दो, जो पहले बोले गए थे; यदि तुम अभी भी उसे थामे रहोगे जो पहले आया था, तो पवित्र आत्मा तुम्हारे भीतर कार्य नहीं करेगी। क्या तुम देखते हो कि यह कितना महत्वपूर्ण है?

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'परमेश्वर के सबसे नए कार्य को जानो और उसके पदचिह्नों का अनुसरण करो' से उद्धृत

परमेश्वर ने बहुत कुछ कहा है इसलिए उसके वचन को खाने-पीने के लिए तुम्हें अधिक से अधिक प्रयास करना चाहिए। तुम्हें पता भी नहीं चलेगा और तुम समझने लगोगे, पवित्र आत्मा तुम्हें प्रबुद्ध करेगा। जब पवित्र आत्मा मनुष्य को प्रबुद्ध करता है, तब अक्सर मुनुष्य को उसका ज्ञान नहीं होता। वह तुम्हें प्रबुद्ध करता है और मार्गदर्शन देता है जब तुम उसके प्यासे होते हो, उसे खोजते हो। पवित्र आत्मा जिस सिद्धांत पर कार्य करता है वह परमेश्वर के वचन पर केंद्रित होता है जिसे तुम खाते और पीते हो। वे सब जो परमेश्वर के वचन को महत्व नहीं देते और उसके प्रति सदैव एक अलग तरह का दृष्टिकोण रखते हैं―अपनी संभ्रमित सोच में यह विश्वास करते हुए कि वे वचन को पढ़ें या न पढ़ें कुछ फर्क नहीं पड़ता―ऐसे लोग हैं जो वास्तविकता नहीं जानते। ऐसे व्यक्ति में न तो पवित्र आत्मा का कार्य और न ही उसके द्वारा दी गई प्रबुद्धता दिखाई देती है। ऐसे व्यक्ति बस साथ-साथ चलते हैं, वे बिना उचित योग्यताओं के मात्र दिखावा करने वाले लोग हैं, जैसे कि एक नीतिकथा में[क] नैनगुओ थे।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'राज्य का युग वचन का युग है' से उद्धृत

आगे बढ़ने पर, परमेश्वर के वचन के बारे में बात करना तुम्हारी बातचीत का सिद्धांत होना चाहिए। आमतौर पर, जब तुम लोग आपस में मिलते हो, तुम लोगों को परमेश्वर के वचन के बारे में बातचीत करनी चाहिए, उसके वचन को बातचीत का विषय बनाना चाहिए; बात करना चाहिए कि परमेश्वर के वचन के बारे में तुम लोग क्या जानते हो, उसके वचन को अभ्यास में कैसे लाते हो और पवित्र आत्मा कैसे काम करता है। जबतक तुम परमेश्वर के वचन के बारे में सहभागिता करोगे, पवित्र आत्मा तुम्हें प्रकाशित करेगा। परमेश्वर के वचन के संसार को प्राप्त करने के लिए मनुष्य के सहयोग की आवश्यकता है। यदि तुम इसमें प्रवेश नहीं करते हो तो परमेश्वर अपना काम नहीं कर पाएगा। यदि तुम अपना मुँह बंद रखोगे और परमेश्वर के वचन के बारे में बातचीत नहीं करोगे तो वह तुम्हें रोशन नहीं कर पाएगा। जब भी तुम कोई दूसरा काम नहीं कर रहे, परमेश्वर के वचन के बारे में बात करो। व्यर्थ की बातें मत करो! अपने जीवन को परमेश्वर के वचन से भर जाने दो; तभी तुम एक समर्पित विश्वासी होते हो। कोई बात नहीं यदि तुम्हारी सहभागिता सतही है। सतह के बिना कोई गहराई नहीं हो सकती। एक प्रक्रिया का होना ज़रूरी है। अपने प्रशिक्षण द्वारा तुम पवित्र आत्मा से प्राप्त रोशनी को समझ लोगे और यह भी जान लोगे कि परमेश्वर के वचन को प्रभावी तरीके से कैसे खाएँ-पिएँ। इस प्रकार खोजबीन में कुछ समय देने के बाद तुम परमेश्वर के वचन की वास्तविकता में प्रवेश कर जाओगे। केवल जब तुम सहयोग करने का संकल्प करोगे तभी पवित्र आत्मा के कार्य को प्राप्त करने में तुम समर्थ होगे।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'राज्य का युग वचन का युग है' से उद्धृत

यदि तुम अक्सर परमेश्वर के वचनों को खा और पी सको, साथ ही परमेश्वर की इच्छाओं के प्रति सजग रह सको और परमेश्वर के वचनों का अभ्यास कर सको, तो तुम परमेश्वर के हो, तुम ऐसे व्यक्ति हो जो परमेश्वर के वचनों में जी रहा है। क्या तुम शैतान के कब्ज़े से निकलने और परमेश्वर के प्रकाश में रहने के लिए तैयार हो? यदि तुम परमेश्वर के वचनों में रहते हो, तो पवित्र आत्मा को अपना काम करने का अवसर मिलेगा; यदि तुम शैतान के प्रभाव में रहते हो, तो तुम पवित्र आत्मा को काम करने का ऐसा कोई अवसर नहीं दोगे। पवित्र आत्मा मनुष्यों पर जो काम करता है, वह जो प्रकाश उन पर डालता है, और वह जो विश्वास उन्हें देता है, वह केवल एक ही पल तक रहता है; यदि लोग सावधान न रहें और ध्यान न दें, तो पवित्र आत्मा द्वारा किया गया कार्य उन्हें छुए बिना ही निकल जाएगा। यदि मनुष्य परमेश्वर के वचनों में रहता है, तो पवित्र आत्मा उनके साथ रहेगा और उन पर काम करेगा; अगर मनुष्य परमेश्वर के वचनों में नहीं रहता, तो वह शैतान के बंधन में रहता है। यदि इंसान भ्रष्ट स्वभाव के साथ जीता है, तो उसमें पवित्र आत्मा की उपस्थिति या पवित्र आत्मा का काम नहीं होता। यदि तुम परमेश्वर के वचनों की सीमाओं में रह रहे हो, यदि तुम परमेश्वर द्वारा अपेक्षित परिस्थिति में जी रहे हो, तो तुम परमेश्वर के हो, और उसका काम तुम पर किया जाएगा; अगर तुम परमेश्वर की अपेक्षाओं के दायरे में नहीं जी रहे, बल्कि शैतान के अधीन रह रहे हो, तो निश्चित रूप से तुम शैतान के भ्रष्टाचार के अधीन जी रहे हो। केवल परमेश्वर के वचनों में रहकर अपना हृदय परमेश्वर को समर्पित करके, तुम परमेश्वर की अपेक्षाओं को पूरा कर सकते हो; तुम्हें वैसा ही करना चाहिए जैसा परमेश्वर कहता है, तुम्हें परमेश्वर के वचनों को अपने अस्तित्व की बुनियाद और अपने जीवन की वास्तविकता बनाना चाहिए; तभी तुम परमेश्वर के होगे। यदि तुम सचमुच परमेश्वर की इच्छा के अनुसार ईमानदारी से अभ्यास करते हो, तो परमेश्वर तुम में काम करेगा, और फिर तुम उसके आशीष में रहोगे, उसके मुखमंडल की रोशनी में रहोगे; तुम पवित्र आत्मा द्वारा किए जाने वाले कार्य को समझोगे, और तुम परमेश्वर की उपस्थिति का आनंद महसूस करोगे।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'अंधकार के प्रभाव से बच निकलो और तुम परमेश्वर द्वारा प्राप्त किए जाओगे' से उद्धृत

अनुभव से यह देखा जा सकता है कि सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक, परमेश्वर के सामने अपने हृदय को शांत करना है। यह एक ऐसा मुद्दा है, जो लोगों के आध्यात्मिक जीवन से, और उनके जीवन में उनके विकास से संबंधित है। जब तुम्हारा हृदय परमेश्वर के सामने शांत रहेगा, केवल तभी सत्य की तुम्हारी खोज और तुम्हारे स्वभाव में आए परिवर्तन सफल होंगे। चूँकि तुम परमेश्वर के सामने बोझ से दबे हुए आते हो, और चूँकि तुम हमेशा महसूस करते हो कि तुममें कई तरह की कमियाँ हैं, कि ऐसे कई सत्य हैं जिन्हें जानना तुम्हारे लिए जरूरी है, तुम्हें बहुत सारी वास्तविकता का अनुभव करने की आवश्यकता है, और कि तुम्हें परमेश्वर की इच्छा का पूरा ध्यान रखना चाहिए—ये बातें हमेशा तुम्हारे दिमाग़ में रहती हैं। ऐसा लगता है, मानो वे तुम पर इतना ज़ोर से दबाव डाल रही हों कि तुम्हारे लिए साँस लेना मुश्किल हो गया हो, और इस प्रकार तुम्हारा हृदय भारी-भारी महसूस करता हो (हालाँकि तुम नकारात्मक स्थिति में नहीं होते)। केवल ऐसे लोग ही परमेश्वर के वचनों की प्रबुद्धता स्वीकार करने और परमेश्वर के आत्मा द्वारा प्रेरित किए जाने के योग्य हैं। यह उनके बोझ के कारण है, क्योंकि उनका हृदय भारी-भारी महसूस करता है, और, यह कहा जा सकता है कि परमेश्वर के सामने जो कीमत वे अदा कर चुके हैं और जो पीड़ा उन्होंने झेली है, उसके कारण वे उसकी प्रबुद्धता और रोशनी प्राप्त करते हैं, क्योंकि परमेश्वर किसी के साथ विशेष व्यवहार नहीं करता। लोगों के प्रति अपने व्यवहार में वह हमेशा निष्पक्ष रहता है, लेकिन वह लोगों को मनमाने ढंग से और बिना किसी शर्त के भी नहीं देता। यह उसके धर्मी स्वभाव का एक पहलू है। वास्तविक जीवन में, अधिकांश लोगों को अभी इस क्षेत्र को हासिल करना बाक़ी है। कम से कम, उनका हृदय अभी भी पूरी तरह से परमेश्वर की ओर मुड़ना बाक़ी है, और इसलिए उनके जीवन-स्वभाव में अभी भी कोई बड़ा परिवर्तन नहीं आया है। इसका कारण यह है कि वे केवल परमेश्वर के अनुग्रह में रहते हैं और उन्हें अभी भी पवित्र आत्मा का कार्य हासिल करना शेष है। परमेश्वर द्वारा उपयोग किए जाने के लिए लोगों को जो मानदंड पूरे करने चाहिए, वे इस प्रकार हैं : उनका हृदय परमेश्वर की ओर मुड़ जाता है, वे परमेश्वर के वचनों का दायित्व उठाते हैं, उनके पास तड़पता हुआ हृदय और सत्य को तलाशने का संकल्प होता है। केवल ऐसे लोग ही पवित्र आत्मा के कार्य को प्राप्त कर सकते हैं और वे अकसर प्रबुद्धता और रोशनी प्राप्त करते हैं।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'परमेश्वर के साथ सामान्य संबंध स्थापित करना बहुत महत्वपूर्ण है' से उद्धृत

अपने दैनिक जीवन में तुम्हें यह समझना आवश्यक है कि तुम्हारे द्वारा कहे जाने वाले कौन-से शब्द और तुम्हारे द्वारा किए जाने वाले कौन-से कार्य परमेश्वर के साथ तुम्हारा संबंध सामान्य नहीं रहने देंगे, और फिर सही तरीका अपनाने के लिए स्वयं को सुधारो। हर वक्त अपने शब्दों, अपने कार्यों, अपने हर कदम और अपने समस्त विचारों और भावों की जाँच करो। अपनी वास्तविक स्थिति की सही समझ हासिल करो और पवित्र आत्मा के कार्य के तरीके में प्रवेश करो। परमेश्वर के साथ सामान्य संबंध रखने का यही एकमात्र तरीका है। इसका आकलन करके कि परमेश्वर के साथ तुम्हारा संबंध सामान्य है या नहीं, तुम अपने इरादों को सुधार पाओगे, मनुष्य की प्रकृति और सार को समझ पाओगे, और स्वयं को वास्तव में समझ पाओगे, और ऐसा करने पर तुम वास्तविक अनुभवों में प्रवेश कर पाओगे, स्वयं को सही रूप में त्याग पाओगे, और इरादे के साथ समर्पण कर पाओगे। जब तुम इस बात से संबंधित इन मामलों के तथ्य का अनुभव करते हो कि परमेश्वर के साथ तुम्हारा संबंध सामान्य है या नहीं, तो तुम परमेश्वर द्वारा पूर्ण किए जाने के अवसर प्राप्त करोगे और पवित्र आत्मा के कार्य की कई स्थितियों को समझने में सक्षम होगे। तुम शैतान की कई चालों को भी देख पाओगे और उसके षड्यंत्रों को समझ पाओगे। केवल यही मार्ग परमेश्वर द्वारा पूर्ण किए जाने की ओर ले जाता है। परमेश्वर के साथ अपना संबंध सही करके तुम अपने आपको परमेश्वर के सभी प्रबंधनों के प्रति उनकी पूर्णता में समर्पित कर सकते हो, और वास्तविक अनुभवों में और भी गहराई से प्रवेश कर सकते हो और पवित्र आत्मा का कार्य और अधिक प्राप्त कर सकते हो।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'परमेश्वर के साथ तुम्हारा संबंध कैसा है?' से उद्धृत

फुटनोट :

क. मूल पाठ में, "नीतिकथा में" यह वाक्यांश नहीं है।

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610 प्रभु यीशु का अनुकरण करो

Iपूरा किया परमेश्वर के आदेश को यीशु ने,हर इंसान के छुटकारे के काम को,क्योंकि उसने परमेश्वर की इच्छा की परवाह की,इसमें न उसका स्वार्थ था, न...

वचन देह में प्रकट होता है न्याय परमेश्वर के घर से शुरू होता है अंत के दिनों के मसीह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अत्यावश्यक वचन परमेश्वर के दैनिक वचन सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों का संकलन सत्य का अभ्यास करने के 170 सिद्धांत मेमने का अनुसरण करो और नए गीत गाओ जीवन में प्रवेश पर धर्मोपदेश और संगति अंत के दिनों के मसीह—उद्धारकर्ता का प्रकटन और कार्य राज्य का सुसमाचार फ़ैलाने के लिए दिशानिर्देश परमेश्वर की भेड़ें परमेश्वर की आवाज को सुनती हैं (नये विश्वासियों के लिए अनिवार्य चीजें) परमेश्वर की आवाज़ सुनो परमेश्वर के प्रकटन को देखो राज्य के सुसमाचार पर अत्यावश्यक प्रश्न और उत्तर (संकलन) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवों की गवाहियाँ विजेताओं की गवाहियाँ (खंड I) मैं वापस सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पास कैसे गया

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