64. अगुआओं और कार्यकर्ताओं पर अभियोग लगाने के सिद्धान्‍त

(1) अगर कोई अगुआ और कार्यकर्ता व्‍यावहारिक कार्य नहीं करते, तो सत्‍य को समझने वाले बहुत-से लोगों द्वारा इसकी पुष्टि किये जाने पर, उनकी कड़ी निन्‍दा की जानी चाहिए, उनपर अभियोग लगाया जाना चाहिए और उन्‍हें हटा कर किसी और को उनकी जगह रख लेना चाहिए;

(2) अगर कोई अगुआ और कार्यकर्ता मनमानी करने लगते हैं और कार्य-व्‍यवस्‍थाओं का उल्‍लंघन करने लगते हैं, तो उनके ऐसे आचरण के एकदम सही साबित हो जाने पर उनकी कड़ी निन्‍दा की जानी चाहिए, उनपर अभियोग लगाया जाना चाहिए और उन्‍हें हटाकर किसी और को उनकी जगह रख लेना चाहिए;

(3) जो अगुआ या कार्यकर्ता कोई छोटा-मोटा अपराध करता है या भ्रष्‍टता का प्रदर्शन करता है, उसकी स्‍नेहपूर्वक मदद की जानी चाहिए। अगर ऐसे लोग सत्‍य को स्‍वीकार नहीं करते, तो उनकी कड़ी निन्‍दा की जा सकती है, उनपर अभियोग लगाया जा सकता है, और उन्‍हें हटाकर किसी और को उनकी जगह रखा जा सकता है;

(4) अगर कोई अगुआ या कार्यकर्ता तरह-तरह के दुष्‍कृत्‍य करता है और दूसरों को फँसा कर और उनपर झूठे आरोप लगाकर उन्‍हें अपने कृत्‍यों के अंजाम भुगतने पर मजबूर करता है, तो उनपर अभियोग लगाया जाना चाहिए और उनकी कड़ी निन्‍दा की जानी चाहिए, और उन्‍हें हर हालत में बरखास्‍त किया जाना चाहिए।

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:

परमेश्वर द्वारा चयनित लोगों को मसीह-विरोधियों के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए? उन्हें चाहिए कि वे उनको पहचानें, उनको बेनकाब करें, उनकी सूचना दें, और उनको बाहर निकालें। मसीह-विरोधी भले ही अगुआ की स्थिति में क्यों न हो, वह सर्वदा परमेश्वर का विरोध करता है। तुम्हें मसीह-विरोधी की अगुवाई स्वीकार नहीं करनी चाहिए, और तुम्हें उसको अपना अगुआ भी नहीं मानना चाहिए, क्योंकि वह जो करता है उससे तुम परमेश्वर के वचनों में प्रवेश नहीं करते; वह तुम्हें नरक में घसीटना चाहता है और तुम्हें मसीह-विरोधियों के रास्ते पर ले जाना चाहता है जिसपर वह ख़ुद चल रहा है। वह परमेश्वर का विरोध करने और परमेश्वर के कार्य को बाधित और नष्ट करने में तुम्हें अपने साथ शामिल करना चाहता है। वह तुम्हें खींचता-घसीटता है ताकि तुम भी उसके साथ दलदल में फँस जाओ। क्या तुम इसकी सहमति दोगे? यदि तुम सहमत होते हो, और उसके साथ समझौता करते हो, उससे दया की भीख माँगते हो, या उसके द्वारा जीत लिए जाते हो, तो तुमने गवाही नहीं दी है, और तुम ऐसे व्यक्ति हो जो सत्य और परमेश्वर दोनों को धोखा देता है—और ऐसे लोगों को बचाया नहीं जा सकता है। अपने उद्धार के लिए व्यक्ति को कौन सी शर्तें पूरी करनी ज़रूरी हैं? सबसे पहले, उसके अंदर शैतानी मसीह-विरोधी को पहचानने की क्षमता होनी चाहिए; उसके अंदर सत्य का यह दृष्टिकोण ज़रूर होना चाहिए। केवल सत्य के इस दृष्टिकोण से ही वह वास्तव में परमेश्वर में विश्वास कर सकता है और मनुष्य की आराधना करने या उसका अनुसरण करने से बच सकता है; केवल वही लोग मसीह विरोधी की पहचान कर सकते हैं जिनके अंदर वास्तव में परमेश्वर में विश्वास करने और उसकी गवाही देने की क्षमता है। मसीह-विरोधियों की पहचान करने के लिए, लोगों को सबसे पहले पूरी स्पष्टता और समझ के साथ लोगों और चीज़ों को देखना सीखना चाहिए; उन्हें मसीह-विरोधियों के सार को महसूस करने में सक्षम होना चाहिए, और उनके तमाम षड्यंत्रों, चालबाजियों, अंतःप्रेरणाओं, और उद्देश्यों को समझना चाहिए। यदि तुम ऐसा कर सकते हो, तो तुम दृढ़ रह सकते हो। यदि तुम उद्धार प्राप्त करना चाहते हो, तो पहली परीक्षा जो तुम्हें पास करनी होगी वह यह सीखना है कि शैतान को कैसे पराजित किया जाए और प्रतिरोधी शक्तियों तथा बाहरी दुनिया के हस्तक्षेप पर कैसे विजय प्राप्त की जाए। यदि तुम शैतान की शक्तियों के ख़िलाफ़ लड़ाई में अंत तक टिके रहने का कद और पर्याप्त सत्य प्राप्त कर लेते हो, और उन्हें पराजित कर देते हो, तब—और केवल तब—तुम अनवरत सत्य की तलाश कर सकते हो, और केवल तब तुम सत्य की तलाश और उद्धार के रास्ते पर दृढ़तापूर्वक और बिना किसी दुर्घटना के चल सकते हो। यदि तुम यह परीक्षा पास नहीं कर सकते, तब यह कहा जा सकता है कि तुम एक बड़े ख़तरे में हो, और तुम मसीह-विरोधी के कब्जे में आ सकते हो और तुम्हें शैतान के प्रभाव में जीवन व्यतीत करना पड़ सकता है।

— "मसीह की बातचीत के अभिलेख" में 'नायकों और कार्यकर्ताओं के लिए, एक मार्ग चुनना सर्वाधिक महत्वपूर्ण है (1)' से उद्धृत

एक अगुआ या कार्यकर्ता के साथ व्यवहार करने के तरीके के बारे में लोगों का रवैया कैसा होना चाहिए? अगर वह जो करता है वह सही है, तो तुम उसका पालन कर सकते हो; अगर वह जो करता है वह गलत है, तो तुम उसे उजागर कर सकते हो, यहाँ तक कि उसका विरोध कर सकते हो और एक अलग राय भी ज़ाहिर कर सकते हो। अगर वह व्यावहारिक कार्य करने में असमर्थ है, और खुद को एक झूठे अगुआ, झूठे कार्यकर्ता या मसीह विरोधी के रूप में प्रकट करता है, तो तुम उसकी अगुआई को स्वीकार करने से इनकार कर सकते हो, तुम उसके ख़िलाफ़ शिकायत करके उसे उजागर भी कर सकते हो। हालाँकि, परमेश्वर के कुछ चुने हुए लोग सत्य को नहीं समझते और विशेष रूप से कायर हैं, इसलिए वे कुछ करने की हिम्मत नहीं करते। वे कहते हैं, "अगर अगुआ ने मुझे निकाल दिया, तो मैं बर्बाद हो जाऊँगा; अगर उसने सबको मुझे उजागर करने और मेरा त्याग करने पर मजबूर कर दिया, तो मैं परमेश्वर पर विश्वास नहीं कर पाऊँगा। अगर मैंने कलीसिया को छोड़ दिया, तो परमेश्वर मुझे नहीं चाहेगा और मुझे नहीं बचाएगा। कलीसिया परमेश्वर का प्रतिनिधित्व करता है!" क्या सोचने के ऐसे तरीके उन चीजों के प्रति ऐसे व्यक्ति के रवैये को प्रभावित नहीं करते हैं? क्या वास्तव में ऐसा हो सकता है कि अगर अगुआ ने तुमको निकाल दिया, तो तुमको बचाया नहीं जायेगा? क्या तुम्हारे उद्धार का प्रश्न तुम्हारे प्रति अगुआ के रवैये पर निर्भर है? इतने सारे लोगों में इतना डर क्यों है? अगर कोई झूठा अगुआ या कोई मसीह विरोधी व्यक्ति तुम्हें धमकी देता है, और तुम इसके ख़िलाफ़ ऊँचे स्तर पर जाकर आवाज़ नहीं उठाते और यहाँ तक कि यह गारंटी भी देते हो कि इसके बाद से तुम अगुआ की बातों से सहमत होगे, तो क्या तुम बर्बाद नहीं हो गये? क्या इस तरह का व्यक्ति सत्य की खोज करने वाला व्यक्ति है? तुम न केवल ऐसे दुष्ट व्यवहार को उजागर करने की हिम्मत नहीं करते जो शैतानी मसीह विरोधियों द्वारा किया जा सकता है, बल्कि इसके विपरीत, तुम उनका आज्ञापालन करते हो और यहाँ तक कि उनके शब्दों को सत्य मान लेते हो, जिनके प्रति तुम समर्पित होते हो। क्या यह मूर्खता का प्रतीक नहीं है? फिर, जब तुम्हें क्षति पहुँचती है, तो क्या तुम इसी के योग्य नहीं हो? क्या तुम्हें परमेश्वर के कारण क्षति पहुँची है? तुमने स्वयं ही अपने लिए ऐसा चाहा था। तुमने एक मसीह-विरोधी को अपना अगुआ बनाया, और उसके साथ ऐसा व्यवहार किया मानो वह कोई भाई या बहन हो—और यह तुम्हारी गलती है। किसी मसीह-विरोधी के साथ कैसा रवैया अपनाया जाना चाहिए? उसे बेनकाब करना चाहिए और उसके विरुद्ध संघर्ष करना चाहिए। यदि तुम इसे अकेले नहीं कर सकते, तो कई लोगों को एक साथ आना होगा और उसके बारे में बताना होगा। यह पता लगने पर कि उच्च पदों पर आसीन कुछ अगुआ और कार्यकर्ता मसीह-विरोधी मार्ग पर चल रहे थे, भाइयों और बहनों को अनुशासित कर रहे थे, वास्तविक कार्य नहीं कर रहे थे, और पद का लाभ उठा रहे थे, तो कुछ लोगों ने उन मसीह-विरोधियों को हटाने के लिए एक याचिका पर हस्ताक्षर किए। इन लोगों ने कितना अद्भुत काम किया! यह दिखाता है कि लोग सत्य को समझते हैं, उनमें थोड़ी महानता बची है, और वे शैतान द्वारा न तो नियंत्रित हैं और न ही धोखा खाए हुए हैं। यह इस बात को भी साबित करता है कि मसीह-विरोधियों और झूठे अगुओं का कलीसिया में कोई प्रमुख स्थान नहीं है, और वे जो कुछ कहते या करते हैं उसमें अपने असली चेहरे को स्पष्ट दिखाने की उनमें हिम्मत नहीं होती। यदि वे अपना चेहरा दिखाते हैं, तो उनकी निगरानी करने, उनको पहचानने, और उन्हें बाहर निकालने के लिए लोग मौजूद हैं। अर्थात, जो लोग वास्तव में सत्य को समझते हैं, उनके लिए किसी व्यक्ति का पद, प्रतिष्ठा, और अधिकार ऐसी चीज़ें नहीं हैं जो उनके हृदय को प्रभावित कर दें; सत्य को समझने वाले सभी लोगों के अंदर विवेक होता है और वे इस बात पर विचार करते हैं कि लोगों को परमेश्वर में अपनी आस्था के लिए किस मार्ग का अनुसरण करना चाहिए, और साथ ही उन्हें अगुआ और कार्यकर्ताओं के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए। वे यह सोचना भी शुरू करते हैं कि लोगों को किसका अनुसरण करना चाहिए, किन व्यवहारों से लोगों का अनुसरण होता है, और किन व्यवहारों से परमेश्वर का अनुसरण होता है। कई वर्षों तक इन सत्यों पर विचार करने, और उपदेशों को अकसर सुनने के बाद, वे अनजाने में परमेश्वर में विश्वास करने से जुड़े सत्यों को समझने लगे हैं, और इसलिए उन्हें कुछ कद हासिल हुआ है। वे परमेश्वर में विश्वास करने के सही रास्ते पर निकल पड़े हैं।

— "मसीह की बातचीत के अभिलेख" में 'नायकों और कार्यकर्ताओं के लिए, एक मार्ग चुनना सर्वाधिक महत्वपूर्ण है (1)' से उद्धृत

संदर्भ के लिए धर्मोपदेश और संगति के उद्धरण:

सभी स्तरों पर अगुआओं और कार्यकर्ताओं के पास सत्य वास्तविकता है या नहीं, इसकी जाँच करने का सबसे सही और उचित तरीका मुख्य रूप से इस बात पर आधारित होना चाहिए कि क्या उन्हें परमेश्वर के चुने हुए ज़्यादातर लोगों ने स्वीकार और मंज़ूर किया है। जिस अगुआ या कार्यकर्ता को परमेश्वर के चुने हुए लोगों का सहयोग और मंज़ूरी नहीं मिलती है उसमें निश्चित रूप से सत्य वास्तविकता नहीं होगी। अगर किसी अगुआ या कार्यकर्ता पर परमेश्वर के चुने हुए कई लोगों ने आरोप लगाया है और वे उससे नफ़रत करते हैं, तो यह इस बात को साबित करने के लिए पर्याप्त है कि वह व्यक्ति एक झूठा अगुआ, मसीह विरोधी और शैतान है। ऐसे झूठे अगुआओं, मसीह विरोधियों और शैतानों का सामना करते समय, परमेश्वर के चुने हुए लोग उस व्यक्ति की निंदा करने, उसे हटाने और निर्वासित करने के लिए साथ आ सकते हैं। परमेश्वर के चुने हुए लोगों की रक्षा करने और शैतान को परमेश्वर के कार्य में दखल देने और रुकावट डालने से रोकने के लिए ऐसी कार्रवाइयां करना आवश्यक है। यह पूरी तरह से सत्य सिद्धांत के अनुरूप और सभी स्तरों पर अगुआओं और कार्यकर्ताओं के पर्यवेक्षण का अभ्यास करने के संबंध में परमेश्वर के चुने हुए लोगों के लिए परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप है, क्योंकि भले ही परमेश्वर लोगों को बचाने के लिए कार्य कर रहा है, मगर सभी स्तरों पर अगुआओं और कार्यकर्ताओं के जीवन स्वभाव में अभी तक पूरा बदलाव नहीं आया है। यह निश्चित है कि कुछ लोग रुतबा, सत्ता, पैसा और प्रतिष्ठा मिलने पर अपना असली रंग दिखाने लगते हैं। जिन झूठे अगुआओं और झूठे कार्यकर्ताओं को निकाल दिया गया है वे इसके प्रमाण हो सकते हैं। पिछले कुछ सालों में, परमेश्वर के चुने हुए काफ़ी लोगों को झूठे अगुआओं और मसीह-विरोधियों ने गुमराह किया, काबू में किया और नुकसान पहुंचाया है, और उन्हें काफ़ी पीड़ा झेलनी पड़ी है। परमेश्वर के चुने हुए लोगों को उनके हाथों काफ़ी तकलीफ़ उठानी पड़ी है और अब उन्होंने समझ लिया है कि जिनके पास सत्य वास्तविकता नहीं है वे अविश्वसनीय हैं और भरोसे के लायक नहीं हैं। इसलिए, सभी स्तरों पर अगुआओं और कार्यकर्ताओं के पर्यवेक्षण का अभ्यास करना बेहद ज़रूरी है। अगर परमेश्वर के चुने हुए लोगों को पता चलता है कि अगुआओं और कार्यकर्ताओं ने बुरा काम किया है, तो वे किसी भी समय उनकी शिकायत कर सकते हैं। अगर उन्हें झूठे अगुआओं और कार्यकर्ताओं के रूप में पहचाना जाता है, तो परमेश्वर के चुने हुए लोग उन्हें अपना दोष स्वीकार करने और पद छोड़ने के लिए राज़ी कर सकते हैं। अगर वे ऐसा करने से इनकार करते हैं, तो उन्होंने यह ख़ुलासा कर दिया है कि वे मसीह विरोधी हैं, तब परमेश्वर के चुने हुए लोगों को एक होकर उन्हें बर्खास्त करने और उन पर पाबंदी लगाने की कार्रवाई में मदद करनी चाहिए। यह पूरी तरह से परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप है।

— 'कार्य व्यवस्था' से उद्धृत

झूठे अगुआओं और झूठे कार्यकर्ताओं के बारे में शिकायत करने की उचित प्रक्रिया

झूठे अगुआओं और झूठे कार्यकर्ताओं में फ़र्क करने और उनकी पहचान करने के तीन सिद्धांत हैं: 1. यह बिल्कुल पक्का होना चाहिए कि पवित्र आत्मा का कार्य नहीं है; 2. उनके पास बुरी इंसानियत और बदनामी है; 3. वे अपने कर्तव्य की अवहेलना करते हैं, व्यावहारिक कार्य नहीं करते हैं और बहुत बुरे काम करते हैं।

झूठे अगुआओं और झूठे कार्यकर्ताओं में फ़र्क करने और उनकी पहचान करने का सबसे सही तरीका उपरोक्त तीन सिद्धांतों के अनुसार काम करना है। परमेश्वर के चुने हुए लोगों के पास इस तथ्य की स्पष्ट समझ होनी चाहिए कि कोई भी परिपूर्ण नहीं है, आम तौर पर अगुआ और कार्यकर्ता अपराध करते हैं और भ्रष्टता दिखाते हैं; हालांकि, इसका अनिवार्य रूप से यह मतलब नहीं है कि वे झूठे अगुआ या झूठे कार्यकर्ता हैं। अपराध करना और बुरे काम करना बुनियादी तौर पर अलग-अलग बातें हैं। अपराध करने का मतलब है कुछ गलत करना, गलत तरीका अपनाना या अस्पष्ट निर्णय के तहत गलत व्यक्ति को चुनना, जबकि बुरे काम करने का मतलब है जानबूझकर और बाध्य होकर इरादतन बुरे काम करना। किसी भी इंसान के लिए अपराध करना सामान्य बात है, लेकिन अगर कोई सभी तरह के बुरे कर्म कर सकता है, तो वह व्यक्ति पक्के तौर पर दुष्ट है। अगर किसी अगुआ या कार्यकर्ता को इन तीन में से किसी भी तरीके से व्यवहार करता हुआ पाया जाता है, तो वह निश्चित रूप से एक झूठा अगुआ या झूठा कार्यकर्ता है।

किसी झूठे अगुआ या झूठे कार्यकर्ता की शिकायत करने की उचित प्रक्रिया इस प्रकार है: जब ऐसे कई लोगों के सहयोग और समर्थन से तीन सिद्धांतों के अनुसार तथ्यों का मूल्यांकन किया जाता है जो अपेक्षाकृत सत्य को समझते हैं और जब पर्याप्त गवाह और साक्ष्य मौजूद होते हैं, तो उक्त अगुआ या कार्यकर्ता के बारे में उच्च स्तर के अगुआओं के पास शिकायत की जा सकती है। जिला स्तर के कई निर्णयकर्ता समूहों के बारे में शिकायत क्षेत्रीय निर्णयकर्ता समूह के पास प्रस्तुत की जा सकती है। क्षेत्रीय स्तर के कई निर्णयकर्ता समूहों के बारे में शिकायत पादरी संबंधी निर्णयकर्ता समूह के पास प्रस्तुत की जा सकती है। अगर सभी स्तर के अगुआ और कार्यकर्ता अपने काम के प्रति गैर-जिम्मेदार और आलसी हैं, तो इसकी शिकायत सीधे तौर पर पवित्र आत्मा द्वारा इस्तेमाल किये गए व्यक्ति के पास की जा सकती है। यह किसी झूठे अगुआ या झूठे कार्यकर्ता के बारे में शिकायत करने की सही प्रक्रिया है जिसका पालन सभी स्तर के अगुआओं और कार्यकर्ताओं के साथ-साथ परमेश्वर के चुने हुए लोगों को करना चाहिए। अगर समस्या विशेष रूप से गंभीर है और किसी को साफ़ तौर पर झूठे अगुआ या झूठे कार्यकर्ता के रूप में उजागर किया गया है जिसने काफ़ी बुरे काम किये हैं और लोगों का गुस्सा बढ़ाया है, तो परमेश्वर के चुने हुए लोगों के पास ऐसे व्यक्ति को सीधे हटा देने का अधिकार है। अगर किसी भी स्तर पर कोई अगुआ या कार्यकर्ता इस व्यक्ति को बचाने की कोशिश करता है, तो उसे भी सीधे तौर पर हटाया जा सकता है। हालांकि, इसे पर्याप्त तथ्यों, पक्के और स्पष्ट साक्ष्य के आधार पर लागू किया जाना चाहिए जिसकी पहचान ज़्यादातर लोग कर सकें। अगर ठोस तथ्य पर्याप्त नहीं हैं, लोग उनसे आश्वस्त नहीं हैं, उसमें दूसरे तत्वों या झूठ की मिलावट है, तो शिकायत करने वाले पक्ष पर सवाल उठाये जा सकते हैं। यह संभव है कि अगुआ या कार्यकर्ता को दुष्ट लोगों द्वारा साजिश के तहत फंसाया जा रहा हो। परमेश्वर के चुने हुए लोगों को दुष्ट लोगों के धोखे और शोषण का शिकार हुए बिना सही और गलत के बीच फ़र्क करने में सक्षम होना चाहिए। उन्हें न तो गलत तरीके से किसी नेक इंसान पर आरोप लगाना चाहिए और न ही किसी दुष्ट इंसान को छोड़ना चाहिए। उन्हें परमेश्वर की इच्छा के अनुसार चलने के लिए सत्य सिद्धांत का पालन करना चाहिए।

— 'कार्य व्यवस्था' से उद्धृत

अगर सभी स्तरों पर चुने गए अगुआ और कार्यकर्ता ऊपर की कार्य व्यवस्थाओं के प्रति पूरी तरह समर्पित हो सकते हैं, अगर वे परमेश्वर के वचन और सत्य के अनुसार कार्य पूरा कर सकते हैं, तो परमेश्वर के चुने हुए लोगों को उसे स्वीकार करके उसका पालन करना चाहिए। अगर अगुआ और कार्यकर्ता कार्य व्यवस्थाओं का पालन नहीं करते हैं और उसके विपरीत काम करते हैं, काम करते समय सत्य सिद्धांत के ख़िलाफ़ जाते हैं और किसी की सलाह नहीं सुनते और मनमर्ज़ी से काम करते हैं, तो वे झूठे अगुआ और कार्यकर्ता हैं, उनमें पक्के तौर पर पवित्र आत्मा का कार्य नहीं है, ऐसे लोगों को बदल दिया जाना चाहिए और फिर से चुनाव कराना चाहिए। अगर वे जिद्दी बनकर अपना पद छोड़ने से इनकार करते हैं, तो परमेश्वर के चुने हुए लोगों के पास उनकी अगुआई को स्वीकार करने से मना करने, उनकी आलोचना और शिकायत करने का अधिकार है। परमेश्वर का घर झूठे अगुआओं और झूठे कार्यकर्ताओं को परमेश्वर के घर के कार्य में रुकावट डालने और परमेश्वर के चुने हुए लोगों को काबू में करने से पूरी तरह रोकता है। जिन लोगों को झूठे अगुआ या मसीह-विरोधी के रूप में पाया गया है, ऐसे सभी लोगों के साथ कोई दया नहीं दिखाई जाएगी। अगर किसी ने झूठे अगुआओं और मसीह विरोधी लोगों को बुरे काम करते हुए और कलीसिया के काम में रुकावट डालते हुए पाया और उनकी शिकायत नहीं की, उन्हें उजागर नहीं किया, तो वह ऐसा व्यक्ति है जिसके पास न्याय की समझ नहीं है और वह परमेश्वर के कार्य की रक्षा नहीं करता है। ऐसे लोगों के पास परमेश्वर का भय मानने वाला हृदय नहीं है, ऐसे लोग परमेश्वर के लिए वफ़ादार नहीं हैं। जो लोग बुरे काम करने वालों को उजागर नहीं करते या उनकी शिकायत नहीं करते, वे सभी उनके द्वारा की गयी बुराई में बराबर के भागीदार हैं, ऐसे लोगों को उनके साथी के रूप में गिना जा सकना चाहिए। कोई भी ऐसे लोगों का दमन नहीं कर सकता है या उनसे बदला नहीं ले सकता है जो झूठे अगुआओं और मसीह विरोधियों की शिकायत करते हैं और उन्हें उजागर करते हैं। अगर कोई भी ऐसे लोगों का दमन करते हुए या उनसे बदला लेते हुए पाया गया, जिनके पास किसी भी कलीसिया के बुरे कर्मों को उजागर करने और उनकी शिकायत करने का साहस है, तो सभी स्तरों के अगुआओं और कार्यकर्ताओं को जांच-पड़ताल करके स्थिति की पुष्टि करनी चाहिए और मामले को गंभीरता से निबटाना चाहिए। परमेश्वर के चुने हुए लोग बुरे काम करने वाले लोगों को उजागर कर सकते हैं और उनकी शिकायत कर सकते हैं; यह एक न्याय का काम है। साथ ही, यह एक नेक काम है जो परमेश्वर के घर के हितों की रक्षा करता है और उसकी इच्छा का ध्यान रखता है। जो कोई भी ऐसे लोगों को दबाता है और इनके ख़िलाफ़ बदला लेने की कोशिश करता है वह परमेश्वर का भय मानने वाला इंसान बिल्कुल भी नहीं है, उसके पास यकीनन सत्य वास्तविकता नहीं है, वह पक्के तौर पर बुरे काम करने वाला और मसीह विरोधी है। हालांकि, सभी स्तरों के अगुआओं और कार्यकर्ताओं के पास जांच-पड़ताल करने और उनसे निबटने का अधिकार है। ऐसे लोगों को कभी माफ़ नहीं किया जा सकता है। क्योंकि, जहां कहीं भी परमेश्वर के चुने हुए लोगों का दमन करने जैसे बुरे कर्म किये जाते हैं, वहाँ कुकर्मी और मसीह विरोधी लोग मौजूद होते हैं। यह एक ऐसा तथ्य है जिससे कोई इनकार नहीं कर सकता।

— 'कार्य व्यवस्था' से उद्धृत

अब सभी कलीसियाओं में उसी तरह के लोग मौजूद हैं जो "कोरह के साथियों" में शामिल थे। उनमें कोई अच्छाई नहीं है, वे सत्ता और लाभ के लिए संघर्ष करते हैं, और हर जगह कलीसियाओं में हँगामा और गड़बड़ी पैदा करते हैं। वे बेशक परमेश्वर के घर की बाधाएं और अड़चनें हैं। ऐसे लोगों के पास सत्य के लिए ज़रा सा भी प्रेम नहीं होता और ये सत्य का अभ्यास भी नहीं करते। शुरू से लेकर अंत तक, किसी भी समय उनके शैतानी स्वभाव में कोई बदलाव नहीं आता है। अपना स्वतंत्र राज्य कायम करने की उनकी महत्वाकांक्षा कभी ख़त्म नहीं होती है। वे परमेश्वर के घर का विरोध करने में महारत रखते हैं। वे साफ़ तौर पर ऐसे लोग हैं जो हर जगह अव्यवस्था का कारण बनाते हैं। जहां कहीं भी अव्यवस्था होती है, वहां मसीह विरोधी राक्षस बुरे काम करते और गड़बड़ी पैदा कर रहे होते हैं। यह बिल्कुल वैसा ही व्यवहार है जो "कोरह के साथियों" द्वारा किया गया था। वे सभी लोग जो सचमुच ऊपर की कार्य व्यवस्थाओं का पालन नहीं कर सकते और जानबूझकर पवित्र आत्मा द्वारा इस्तेमाल किये गए व्यक्ति का विरोध करते हैं। वे अपनी चीज़ों को उसी श्रेणी में रखते हैं जिसमें "कोरह के साथियों" को रखा गया है। ऐसे सभी लोगों को मसीह का शत्रु माना जाता है और परमेश्वर के चुने हुए लोगों को उन राक्षसों की पहचान करने, उनकी शिकायत करने और उन्हें उजागर करने का तरीका सीखना चाहिए। परमेश्वर के कार्य में रुकावट डालने वाले, गड़बड़ी पैदा करने वाले और सभी तरह के बुरे काम करने वाले दुष्ट लोगों को राक्षस माना जाता है। अगर हर जगह कलीसिया की गतिविधि में शामिल दुष्ट लोगों और राक्षसों के बारे में उनके असली रंग को जानने वाले ऐसे लोगों द्वारा की शिकायत नहीं की जाती है और उन्हें उजागर नहीं किया जाता है, तो परमेश्वर के चुने हुए लोग सिर्फ़ लंबी अवधि तक उनकी गतिविधियों पर ध्यान देकर ही उनके बारे में जान सकते हैं, इससे परमेश्वर के घर के कार्य में देरी और रुकावट पैदा होगी और परमेश्वर के चुने हुए लोगों के जीवन को नुकसान पहुँचेगा। इसलिए, ऐसा कोई भी व्यक्ति जो दुष्ट लोगों और राक्षसों के असली रंगों के बार में जानता है उसे मजबूती से खड़े होकर ऐसे लोगों को उजागर करना चाहिए और उनकी शिकायत करनी चाहिए, ताकि परमेश्वर के कार्य की रक्षा की जा सके। उन्हें ऐसा व्यवहार बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए मानो कि ऐसे लोगों से उनका कोई लेना-देना ही न हो और वे अपना मुँह बंद ही रखें। दुष्ट लोग यकीनन पश्चाताप नहीं करेंगे। परमेश्वर दुष्ट लोगों को नहीं बचाता है। इसलिए, ऐसा कोई भी व्यक्ति जो दुष्ट लोगों के असली रंगों के बारे में जानता है या देखता है कि दुष्ट लोग और राक्षस कलीसिया में गड़बड़ी पैदा कर रहे हैं, उसे साहस करके ऐसे लोगों को उजागर करना चाहिए और उनकी शिकायत करनी चाहिए। साथ ही, उन्हें इन दुष्ट लोगों और राक्षसों को दंड दिलाने में परमेश्वर के चुने हुए लोगों के साथ सहयोग करना चाहिए। सिर्फ़ तभी वे ऐसे लोग बन सकते हैं जो परमेश्वर के इरादों पर विचार करते हैं और परमेश्वर के कार्य की रक्षा करते हैं। जो कोई भी दुष्ट लोगों और राक्षसों के असली रंगों को देखता है लेकिन उन्हें उजागर नहीं करता है, वह उनके बुरे कर्मों में बराबर का हिस्सेदार होता है और उनके चक्कर में ही फंसा रहता है। इसलिए, सभी दुष्ट लोगों और राक्षसों को हटाना परमेश्वर के चुने हुए लोगों का एक अनिवार्य दायित्व है। परमेश्वर के चुने हुए लोगों को ऐसा काम करने में कभी संकोच नहीं करना चाहिए जो सही हो, उन्हें सुसमाचार को फ़ैलाने और परमेश्वर की इच्छा पूरी करने के लिए सभी बाधाओं और अड़चनों को हटा देना चाहिए। परमेश्वर के चुने हुए लोगों को यह स्पष्ट होना चाहिए: "कोरह के साथियों" जैसे सभी लोगों को नष्ट कर दिया जाएगा।

— 'कार्य व्यवस्था' से उद्धृत

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