64. अगुआओं और कार्यकर्ताओं पर अभियोग लगाने के सिद्धांत

(1) अगर कोई अगुआ और कार्यकर्ता व्‍यावहारिक कार्य नहीं करते, तो सत्‍य को समझने वाले बहुत-से लोगों द्वारा इसकी पुष्टि किए जाने पर, उनकी कड़ी निंदा की जानी चाहिए, उन पर अभियोग लगाया जाना चाहिए और उन्‍हें हटा कर अन्य व्यक्तियों को उनकी जगह रख लेना चाहिए।

(2) अगर कोई अगुआ और कार्यकर्ता मनमानी करने लगते हैं और कार्य-व्‍यवस्‍थाओं का उल्‍लंघन करने लगते हैं, तो उनके ऐसे आचरण की सही पुष्टि हो जाने पर उनकी कड़ी निंदा की जानी चाहिए, उन पर अभियोग लगाया जाना चाहिए और उन्‍हें हटाकर किसी और को उनकी जगह रख लेना चाहिए।

(3) जो अगुआ या कार्यकर्ता कोई छोटा-मोटा अपराध करता है या भ्रष्‍टता का प्रदर्शन करता है, उसकी स्‍नेहपूर्वक मदद की जानी चाहिए। अगर ऐसे लोग सत्‍य को स्‍वीकार नहीं करते, तो उनकी कड़ी निंदा की जा सकती है, उन पर अभियोग लगाया जा सकता है, और उन्‍हें हटाकर किसी और को उनकी जगह रखा जा सकता है।

(4) अगर कोई अगुआ या कार्यकर्ता तरह-तरह के दुष्‍कृत्‍य करता है और दूसरों को फँसाकर और उन पर झूठे आरोप लगाकर उन्‍हें कष्ट भुगतने पर मजबूर करता है, तो उन पर अभियोग लगाया जाना चाहिए और उनकी कड़ी निंदा की जानी चाहिए, और उन्‍हें हर हालत में बर्खास्त किया जाना चाहिए।

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन :

एक अगुआ या कार्यकर्ता के साथ व्यवहार करने के तरीके के बारे में लोगों का रवैया कैसा होना चाहिए? अगर अगुआ या कार्यकर्ता जो करता है वह सही है, तो तुम उसका पालन कर सकते हो; अगर वह जो करता है वह गलत है, तो तुम उसे उजागर कर सकते हो, यहाँ तक कि उसका विरोध कर सकते हो और एक अलग राय भी ज़ाहिर कर सकते हो। अगर वह व्यावहारिक कार्य करने में असमर्थ है, और खुद को एक झूठे अगुआ, झूठे कार्यकर्ता या मसीह विरोधी के रूप में प्रकट करता है, तो तुम उसकी अगुआई को स्वीकार करने से इनकार कर सकते हो, तुम उसके ख़िलाफ़ शिकायत करके उसे उजागर भी कर सकते हो। हालाँकि, परमेश्वर के कुछ चुने हुए लोग सत्य को नहीं समझते और विशेष रूप से कायर हैं, इसलिए वे कुछ करने की हिम्मत नहीं करते। वे कहते हैं, "अगर अगुआ ने मुझे निकाल दिया, तो मैं बर्बाद हो जाऊँगा; अगर उसने सबको मुझे उजागर करने और मेरा त्याग करने पर मजबूर कर दिया, तो मैं परमेश्वर पर विश्वास नहीं कर पाऊँगा। अगर मैंने कलीसिया को छोड़ दिया, तो परमेश्वर मुझे नहीं चाहेगा और मुझे नहीं बचाएगा। कलीसिया परमेश्वर का प्रतिनिधित्व करता है!" क्या सोचने के ऐसे तरीके उन चीजों के प्रति ऐसे व्यक्ति के रवैये को प्रभावित नहीं करते हैं? क्या वास्तव में ऐसा हो सकता है कि अगर अगुआ ने तुमको निकाल दिया, तो तुमको बचाया नहीं जायेगा? क्या तुम्हारे उद्धार का प्रश्न तुम्हारे प्रति अगुआ के रवैये पर निर्भर है? इतने सारे लोगों में इतना डर क्यों है? अगर कोई झूठा अगुआ या कोई मसीह विरोधी व्यक्ति तुम्हें धमकी देता है, और तुम इसके ख़िलाफ़ ऊँचे स्तर पर जाकर आवाज़ नहीं उठाते और यहाँ तक कि यह गारंटी भी देते हो कि इसके बाद से तुम अगुआ की बातों से सहमत होगे, तो क्या तुम बर्बाद नहीं हो गये? क्या इस तरह का व्यक्ति सत्य का अनुसरण करने वाला व्यक्ति है? तुम न केवल ऐसे दुष्ट व्यवहार को उजागर करने की हिम्मत नहीं करते जो शैतानी मसीह विरोधियों द्वारा किया जा सकता है, बल्कि इसके विपरीत, तुम उनका आज्ञापालन करते हो और यहाँ तक कि उनके शब्दों को सत्य मान लेते हो, जिनके प्रति तुम समर्पित होते हो। क्या यह मूर्खता का प्रतीक नहीं है? फिर, जब तुम्हें क्षति पहुँचती है, तो क्या तुम इसी के योग्य नहीं हो? क्या तुम्हें परमेश्वर के कारण क्षति पहुँची है? तुमने स्वयं ही अपने लिए ऐसा चाहा था। तुमने एक मसीह-विरोधी को अपना अगुआ बनाया, और उसके साथ ऐसा व्यवहार किया मानो वह कोई भाई या बहन हो—और यह तुम्हारी गलती है। किसी मसीह-विरोधी के साथ कैसा रवैया अपनाया जाना चाहिए? उसे बेनकाब करना चाहिए और उसके विरुद्ध संघर्ष करना चाहिए। यदि तुम इसे अकेले नहीं कर सकते, तो कई लोगों को एक साथ आना होगा और उसके बारे में बताना होगा। यह पता लगने पर कि उच्च पदों पर आसीन कुछ अगुआ और कार्यकर्ता मसीह-विरोधी मार्ग पर चल रहे थे, भाइयों और बहनों को कष्ट दे रहे थे, वास्तविक कार्य नहीं कर रहे, और पद के लाभ का लालच कर रहे थे, तो कुछ लोगों ने उन मसीह-विरोधियों को हटाने के लिए एक याचिका पर हस्ताक्षर किए। इन लोगों ने कितना अद्भुत काम किया! यह दिखाता है कि कुछ लोग सत्य को समझते हैं, उनमें थोड़ी महानता बची है, और वे शैतान द्वारा न तो नियंत्रित हैं और न ही धोखा खाए हुए हैं। यह इस बात को भी साबित करता है कि मसीह-विरोधियों और झूठे अगुओं का कलीसिया में कोई प्रमुख स्थान नहीं है, और वे जो कुछ कहते या करते हैं उसमें अपने असली चेहरे को स्पष्ट दिखाने की उनमें हिम्मत नहीं होती। यदि वे अपना चेहरा दिखाते हैं, तो उनकी निगरानी करने, उनको पहचानने, और उन्हें अस्वीकार करने के लिए लोग मौजूद हैं। अर्थात, जो लोग वास्तव में सत्य को समझते हैं, उनके लिए किसी व्यक्ति का पद, प्रतिष्ठा, और अधिकार ऐसी चीज़ें नहीं हैं जो उनके हृदय को प्रभावित कर दें; सत्य को समझने वाले सभी लोगों के अंदर विवेक होता है और वे इस बात पर पुनर्विचार करते और सोचते हैं कि लोगों को परमेश्वर में अपनी आस्था के लिए किस मार्ग का अनुसरण करना चाहिए, और साथ ही उन्हें अगुआ और कार्यकर्ताओं के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए। वे यह सोचना भी शुरू करते हैं कि लोगों को किसका अनुसरण करना चाहिए, किन व्यवहारों से लोगों का अनुसरण होता है, और किन व्यवहारों से परमेश्वर का अनुसरण होता है। कई वर्षों तक इन सत्यों पर विचार करने, और उपदेशों को अकसर सुनने के बाद, वे अनजाने में परमेश्वर में विश्वास करने से जुड़े सत्यों को समझने लगे हैं, और इसलिए उन्हें कुछ कद हासिल हुआ है। वे परमेश्वर में विश्वास करने के सही रास्ते पर निकल पड़े हैं।

— "मसीह-विरोधियों को उजागर करना" में 'सत्य का अनुसरण करने वालों को वे निकाल देते हैं और उन पर आक्रमण करते हैं' से उद्धृत

परमेश्वर द्वारा चयनित लोगों को मसीह-विरोधियों के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए? उन्हें चाहिए कि वे उनको पहचानें, उनको बेनकाब करें, उनकी सूचना दें, और उनको बाहर निकालें। मसीह-विरोधी भले ही अगुआ की स्थिति में क्यों न हो, वह सर्वदा परमेश्वर का विरोध करता है। तुम्हें मसीह-विरोधी की अगुवाई स्वीकार नहीं करनी चाहिए, और तुम्हें उसको अपना अगुआ भी नहीं मानना चाहिए, क्योंकि वह जो करता है उससे तुम परमेश्वर के वचनों में प्रवेश नहीं करते; वह तुम्हें नरक में घसीटना चाहता है और तुम्हें मसीह-विरोधियों के रास्ते पर ले जाना चाहता है जिसपर वह ख़ुद चल रहा है। वह परमेश्वर का विरोध करने और परमेश्वर के कार्य को बाधित और नष्ट करने में तुम्हें अपने साथ शामिल करना चाहता है। वह तुम्हें खींचता-घसीटता है ताकि तुम भी उसके साथ दलदल में फँस जाओ। क्या तुम इसकी सहमति दोगे? यदि तुम सहमत होते हो, और उसके साथ समझौता करते हो, उससे दया की भीख माँगते हो, या उसके द्वारा जीत लिए जाते हो, तो तुमने गवाही नहीं दी है, और तुम ऐसे व्यक्ति हो जो सत्य और परमेश्वर दोनों को धोखा देता है—और ऐसे लोगों को बचाया नहीं जा सकता है। अपने उद्धार के लिए व्यक्ति को कौन सी शर्तें पूरी करनी ज़रूरी हैं? सबसे पहले, उसके अंदर शैतानी मसीह-विरोधी को पहचानने की क्षमता होनी चाहिए; उसके अंदर सत्य का यह दृष्टिकोण ज़रूर होना चाहिए। केवल सत्य के इस दृष्टिकोण से ही वह वास्तव में परमेश्वर में विश्वास कर सकता है और मनुष्य की आराधना करने या उसका अनुसरण करने से बच सकता है; केवल वही लोग मसीह विरोधी की पहचान कर सकते हैं जिनके अंदर वास्तव में परमेश्वर में विश्वास करने और उसकी गवाही देने की क्षमता है। मसीह-विरोधियों की पहचान करने के लिए, लोगों को सबसे पहले पूरी स्पष्टता और समझ के साथ लोगों और चीज़ों को देखना सीखना चाहिए; उन्हें मसीह-विरोधियों के सार को महसूस करने में सक्षम होना चाहिए, और उनके तमाम षड्यंत्रों, चालबाजियों, अंतःप्रेरणाओं, और उद्देश्यों को समझना चाहिए। यदि तुम ऐसा कर सकते हो, तो तुम दृढ़ रह सकते हो। यदि तुम उद्धार प्राप्त करना चाहते हो, तो पहली परीक्षा जो तुम्हें पास करनी होगी वह यह सीखना है कि शैतान को कैसे पराजित किया जाए और प्रतिरोधी शक्तियों तथा बाहरी दुनिया के हस्तक्षेप पर कैसे विजय प्राप्त की जाए। यदि तुम शैतान की शक्तियों के ख़िलाफ़ लड़ाई में अंत तक टिके रहने का कद और पर्याप्त सत्य प्राप्त कर लेते हो, और उन्हें पराजित कर देते हो, तब—और केवल तब—तुम अनवरत सत्य का अनुसरण कर सकते हो, और केवल तब तुम सत्य का अनुसरण और उद्धार के रास्ते पर दृढ़तापूर्वक और बिना किसी दुर्घटना के चल सकते हो। यदि तुम यह परीक्षा पास नहीं कर सकते, तब यह कहा जा सकता है कि तुम एक बड़े ख़तरे में हो, और तुम मसीह-विरोधी के कब्जे में आ सकते हो और तुम्हें शैतान के प्रभाव में जीवन व्यतीत करना पड़ सकता है।

— "मसीह-विरोधियों को उजागर करना" में 'सत्य का अनुसरण करने वालों को वे निकाल देते हैं और उन पर आक्रमण करते हैं' से उद्धृत

जब तुम लोग किसी मसीह-विरोधी का पता लगा लेते हो, तो क्या तुम उन्हें अस्वीकार कर सकते हो? क्या तुम उठकर खड़े होने और उनकी शिकायत करने, उन्हें उजागर करने की हिम्मत करते हो? (हाँ।) क्या तुम सच में हिम्मत करते हो या यह सिर्फ दिखावा है? जब तुम्हारे पास दूसरों का समर्थन होता है, तो तुम उठकर खड़े होने और उन्हें उजागर करने की हिम्मत करोगे, लेकिन क्या समर्थन के बिना भी तुम उन्हें उजागर करने की हिम्मत करोगे? अभी तुम जहाँ हो, वह सुरक्षित है, वहाँ कोई बड़ा लाल अजगर शासन नहीं कर रहा, इसलिए तुम सोचते हो, "मुझे डरने की क्या जरूरत है? वे बस मसीह-विरोधी ही तो हैं। परमेश्वर के चुने हुए लोगों के पास उसकी आज्ञा है, इसलिए मैं मसीह-विरोधियों को उजागर करने की हिम्मत करता हूँ और डरता नहीं हूँ।" लेकिन बड़े लाल अजगर के देश में स्थिति अलग है। अगर तुम मसीह-विरोधियों को उजागर करते हो और वे अपनी हैसियत खो बैठते हैं, तो वे तुम्हें दंडित करने और तुम्हारी बुरी तरह से आलोचना करने की कोशिश करेंगे, तुम्हें धोखा देकर सरकार के हाथों में सौंप देंगे। क्या तुम अभी भी उन्हें उजागर करने की हिम्मत करोगे? (नहीं, हम हिम्मत नहीं करेंगे।) उस माहौल में, तुम हिम्मत नहीं करोगे। तो क्या हिम्मत न करना सही रवैया है? यह सही नहीं है, और यह गवाही नहीं है। ये ऐसे शब्द नहीं हैं, जो एक विजेता या परमेश्वर के अनुयायी को कहने चाहिए। यहाँ तक कि अगर तुम कुछ नहीं भी कहते, तो भी तुम्हारा दिल बार-बार चिल्लाता है: "तुम मसीह-विरोधी, तुम दानव शैतान, मैं तुम्हें उजागर कर दूँगा। मैं तुम्हें अस्वीकार करने, तुम्हें कलीसिया से बाहर निकालने के लिए बुद्धि का उपयोग करूँगा। तुम परमेश्वर के घर में रहने के योग्य नहीं हो, तुम दानव हो, तुम शैतान हो! भले ही मैं तुम्हें सार्वजनिक रूप से उजागर न करूँ, फिर भी मैं तुम्हें अपने दिल की गहराई से अस्वीकार करता हूँ। मैं ऐसे कई भाई-बहनों की तलाश करूँगा, जो सत्य को समझते हैं और हम मिलकर तुम्हें अस्वीकार कर देंगे। हम तुम्हारी अगुआई या तिकड़म स्वीकार नहीं करेंगे।" क्या यह सही तरीका है? (हाँ।) परिवेश प्रतिकूल हो सकता है और इस तरह से काम करना तुम्हें खतरे में डाल देगा, लेकिन परमेश्वर की आज्ञा, सत्य-सिद्धांत और मनुष्य का कर्तव्य छोड़े या त्यागे नहीं जा सकते। जहाँ तक उन मसीह-विरोधियों की बात है, जो विशेषाधिकारों का आनंद लेते हैं, बिना किसी शर्मिंदगी के हैसियत के लाभों का आनंद लेते हैं, हमें उन्हें अस्वीकार कर देना चाहिए, उन्हें परमेश्वर के घर में परजीवी नहीं बनने देना चाहिए, उन्हें और अधिक भाई-बहनों को नुकसान पहुँचाने या धोखा देने नहीं देना चाहिए। हमें उन्हें निष्कासित कर देना चाहिए। परमेश्वर के घर के संसाधन इन परजीवियों के पोषण के लिए नहीं हैं। वे परमेश्वर के घर में खाने के योग्य नहीं हैं, परमेश्वर के घर में किसी भी चीज का आनंद लेने के योग्य नहीं हैं, क्योंकि वे शैतान हैं। वे अस्वीकार किए जाने के लायक हैं। यह मसीह-विरोधी की एक और अभिव्यक्ति है—विशेषाधिकार का बेशर्मी से आनंद लेना। कुछ भी योगदान किए बिना, वे अगुआई का पद प्राप्त करते ही सत्ता पर कब्जा कर लेते हैं। एक बार अगुआ बना दिए जाने के बाद, वे अपनी हैसियत के लाभों का आनंद लेते हैं, और भाई-बहनों को अपने लिए स्वादिष्ट भोजन पकाने और खरीदने के लिए मजबूर करते हैं, उनके श्रम के फल गबन कर लेते हैं, और उनकी संपत्ति हथिया लेते हैं। उनके लिए यह एक स्वाभाविक बात है, एक अमूल्य अवसर है, एक ऐसा मौका है जो फिर नहीं आएगा। क्या यह शैतान की सोच नहीं है? कैसी बेशर्म सोच है यह। भाई-बहनों को इस प्रकार के व्यक्तियों से निपटना चाहिए, उनकी काट-छाँट करनी चाहिए, उन्हें उजागर करना चाहिए और उन्हें अस्वीकार कर देना चाहिए।

— "मसीह-विरोधियों को उजागर करना" में 'वे व्यवहार और काट-छाँट स्वीकार नहीं करते और न ही गलत काम करने पर उनमें पश्चात्ताप का रवैया होता है, बल्कि इसके बजाय वे धारणाएँ फैलाते हैं और परमेश्वर के बारे में सार्वजनिक रूप से निर्णय सुनाते हैं' से उद्धृत

जब तुम्हें पता चलता है कि कोई मसीह-विरोधी है, तो मैं तुम्हें बताता हूँ, अगर तुम्हें लगे कि उनके पास बहुत शक्ति है और अगर तुम उन्हें उजागर करोगे, तो तुम परिष्कृत किए जा सकते हो, अलग-थलग किए जा सकते हो, या तुम्हारी परमेश्वर के वचनों की पुस्तकें जब्त की जा सकती हैं, तो उनके साथ सीधे मुकाबला मत करो। तुम्हें अपनी पुस्तकें सुरक्षित रखते हुए और कलीसिया के साथ अपन संपर्क न तोड़ते हुए, तुरंत उन्हें उजागर करने, उनकी रिपोर्ट करने और उन्हें त्यागने के तरीकों के बारे में सोचना चाहिए। उनका सीधा सामना मत करो। तुम्हारा उनसे तर्क करना बेकार होगा, तुम्हारा उन्हें प्रेम के माध्यम से सुधारने का प्रयास करना बेकार होगा, और तुम्हारा उनसे सत्य के बारे में संगति करना बेकार होगा। तुम उन्हें बदल नहीं सकते। चूँकि तुम उन्हें बदल नहीं सकते, इसलिए उनके पश्चात्ताप करने की उम्मीद में उनसे किसी व्यक्तिगत बातचीत या तर्क करने का प्रयास करने से बचना तुम्हारे लिए सबसे अच्छा होगा। इसके बजाय, उन्हें इस तरह से उजागर करो और उनकी इस तरह से रिपोर्ट करो कि उन्हें इसका पता न चले। उनसे अपने वरिष्ठों को निपटने दो, या अधिक लोगों को उन्हें उजागर करने, उनकी रिपोर्ट करने और उन्हें त्यागने के लिए प्रेरित करो, और इस तरह कलीसिया को उन्हें अलग करने दो। क्या यह इस काम को करने का एक अच्छा तरीका नहीं है? अगर तुम किसी मसीह-विरोधी को पहचान लेते हो, और वह तुम्हारे आंतरिक विचारों को बाहर निकलवाकर यह देखने की कोशिश करता है कि क्या तुमने उसे पहचान लिया है, तो तुम क्या करोगे? तुम्हें दुष्ट शैतान की चालबाजी को समझना चाहिए; तुम्हें उसके जाल में नहीं फँसना चाहिए या उस गड्ढे में नहीं पड़ना चाहिए, जो उसने तुम्हारे लिए खोदा है। दुष्ट शैतान से सामना होने पर तुम्हें बुद्धिमान होना चाहिए। तुम्हें उनसे सच-सच नहीं बोलना चाहिए। जिनसे तुम सच बोल सकते हो, वे परमेश्वर और तुम्हारे सच्चे भाई-बहन हैं, इसलिए तुम कभी शैतान, दानवों या मसीह-विरोधियों को सच नहीं बता सकते। केवल परमेश्वर ही यह जानने के योग्य है कि तुम अपने दिल में क्या सोचते हो; केवल परमेश्वर ही तुम्हारे दिल की संप्रभुता और जाँच के योग्य है। कोई भी तुम्हारे विचारों को नियंत्रित करने या तुम्हारे दिल की जाँच करने के योग्य नहीं है, दुष्ट शैतान तो बिलकुल भी नहीं। इसलिए, अगर दुष्ट शैतान तुम्हारे सच्चे शब्द निकलवाने का प्रयास करे, तो उत्तर देने से इनकार करने के लिए तुम्हें "नहीं" कहने का, उसे यह न बताने का कि तुम क्या सोच रहे हो, अधिकार है। यह तुम्हारा अधिकार है। अगर तुम कहते हो, "तुम शैतान—मुझसे बातें जानने की कोशिश तो करो, मैं तुम्हें सच नहीं बताऊँगा; मैं तुम्हें नहीं बताऊँगा। मैं तुम्हारी रिपोर्ट करूँगा, इसमें कौन-सी बड़ी बात है? अगर तुम मुझे परेशान करने का साहस करोगे, तो मैं तुम्हारी रिपोर्ट करूँगा। अगर तुम मुझे परेशान करोगे, तो परमेश्वर तुम्हें शाप देगा और दंडित करेगा," क्या यह चलेगा? (नहीं।) बाइबल कहती है, "साँपों के समान बुद्धिमान और कबूतरों के समान भोले बनो" (मत्ती 10:16)। ऐसे समय में, तुम्हें साँपों के समान चतुर होना चाहिए, बुद्धिमान होना चाहिए। हमें केवल परमेश्वर को ही अपने हृदय की जाँच करने देनी चाहिए, और हमें केवल उसे ही उस पर कब्जा करने देना चाहिए। हमें अपना हृदय केवल परमेश्वर को ही देना चाहिए; केवल वह ही हमारे दिलों को पाने के योग्य है—दुष्ट शैतान नहीं! इसलिए, मसीह-विरोधी यह जानने के अयोग्य हैं कि हम कैसे या क्या सोचते हैं, वे तुम्हारी थाह लेने के लिए तुम्हारे भीतर की बातें निकलवाने की कोशिश करते हैं। उनका उद्देश्य तुम्हें नियंत्रित करना है। तुम्हें इसे स्पष्ट रूप से देखना चाहिए। इसलिए किसी मसीह-विरोधी से सच-सच मत बोलो। तुम्हें उन्हें उजागर करने, उन्हें त्यागने और उन्हें उनके पद से गिराने के लिए अपने और अधिक भाई-बहनों के साथ आने का रास्ता खोजना होगा। उन्हें कभी हावी न होने दो। उन्हें कलीसिया से अलग कर दो और परमेश्वर के घर में गड़बड़ी करने या शक्ति हासिल और इस्तेमाल करने का और मौका मत दो।

— "मसीह-विरोधियों को उजागर करना" में 'वे परमेश्वर के घर को अपना निजी क्षेत्र मानते हैं' से उद्धृत

पिछला: 63. अगुआओं और कार्यकर्ताओं के चुनाव के सिद्धांत

अगला: 65. जिम्‍मेदारी स्‍वीकार करने और त्‍यागपत्र देने के सिद्धांत

सभी विश्वासी यीशु मसीह की वापसी के लिए तरस रहे हैं। क्या आप उनमें से एक हैं? हमारी ऑनलाइन सहभागिता में शामिल हों और आपको परमेश्वर से फिर से मिलने का अवसर मिलेगा।

संबंधित सामग्री

775 तुम्हारी पीड़ा जितनी भी हो ज़्यादा, परमेश्वर को प्रेम करने का करो प्रयास

1समझना चाहिये तुम्हें कितना बहुमूल्य है आज कार्य परमेश्वर का।जानते नहीं ये बात ज़्यादातर लोग, सोचते हैं कि पीड़ा है बेकार:अपने विश्वास के...

वचन देह में प्रकट होता है न्याय परमेश्वर के घर से शुरू होता है अंत के दिनों के मसीह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अत्यावश्यक वचन परमेश्वर के दैनिक वचन परमेश्वर का आगमन हो चुका है, वह राजा है सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों का संकलन सत्य का अभ्यास करने के 170 सिद्धांत मेमने का अनुसरण करो और नए गीत गाओ राज्य का सुसमाचार फ़ैलाने के लिए दिशानिर्देश परमेश्वर की भेड़ें परमेश्वर की आवाज को सुनती हैं परमेश्वर की आवाज़ सुनो परमेश्वर के प्रकटन को देखो राज्य के सुसमाचार पर अत्यावश्यक प्रश्न और उत्तर मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवों की गवाहियाँ विजेताओं की गवाहियाँ मैं वापस सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पास कैसे गया

सेटिंग्स

  • इबारत
  • कथ्य

ठोस रंग

कथ्य

फ़ॉन्ट

फ़ॉन्ट आकार

लाइन स्पेस

लाइन स्पेस

पृष्ठ की चौड़ाई

विषय-वस्तु

खोज

  • यह पाठ चुनें
  • यह किताब चुनें