120. किसी के प्रकृति सार की पहचान करने के सिद्धांत

(1) किसी व्यक्ति के प्रकृति सार को पहचानने के लिए, यह देखो कि अपनी पसंद के मुताबिक वह अपनी तलाश में क्या हासिल करना चाहता है, किसकी आराधना करता है, और किस मार्ग पर चलता है।

(2) किसी व्यक्ति के प्रकृति सार की पहचान करने के लिए, उसके सिलसिलेवार व्यवहार और स्वभाव के उन पहलुओं को देखो जिन्हें वह अक्सर प्रकट करता है, साथ ही साथ वह किसकी संगत में रहता है।

(3) किसी व्यक्ति के प्रकृति सार की पहचान करने के लिए, उसकी कमजोरियों को, उसके मर्म बिंदु को, और उस पर जिस चीज का सबसे अधिक नियंत्रण है, उसे देखो।

(4) किसी व्यक्ति के प्रकृति सार को निर्धारित करने के लिए, चीजों पर उसके विचारों को, दुनिया के बारे में उसके नजरिए को, जीवन के बारे में उसकी दृष्टि को, और जिन मूल्यों में वह विश्वास रखता है, उन्हें देखो।

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन :

मनुष्य की प्रकृति उसका जीवन है; यह एक सिद्धांत है जिस पर वह जीवित रहने के लिए निर्भर करता है और वह इसे बदलने में असमर्थ है। विश्वासघात की प्रकृति का उदाहरण लो। यदि तुम किसी रिश्तेदार या मित्र को धोखा देने के लिए कुछ कर सकते हो, तो यह साबित करता है कि यह तुम्हारे जीवन और तुम्हारी प्रकृति का हिस्सा है जिसके साथ तुम पैदा हुए थे। यह कुछ ऐसा है जिससे कोई भी इनकार नहीं कर सकता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति अन्य लोगों की चीजें चुराना पसंद करता है, तो यह चुराना पसंद करना उसके जीवन का एक हिस्सा है, भले ही कभी-कभी वह चोरी करता है, और अन्य समय वह नहीं करता है। चाहे वह चोरी करता है अथवा नहीं, इससे यह साबित नहीं हो सकता कि उसका चोरी करना केवल एक प्रकार का व्यवहार है। बल्कि, इससे साबित होता है कि उसका चोरी करना उसके जीवन का एक हिस्सा, अर्थात्, उसकी प्रकृति है। कुछ लोग पूछेंगे : चूँकि यह उसकी प्रकृति है, तो ऐसा क्यों है कि वह कभी-कभी अच्छी चीजें देखता है लेकिन उन्हें चोरी नहीं करता है? उत्तर बहुत आसान है। उसके चोरी नहीं करने के कई कारण हैं। हो सकता है कि वह इसलिए चोरी न करता हो क्‍योंकि चौकस निगाहों के नीचे से निकाल ले जाने के लिए वस्तु बहुत बड़ी हो, या चोरी करने के लिए उपयुक्त समय न हो, या वस्तु बहुत महँगी हो, बहुत कड़े पहरे में हो, या शायद उसकी इस चीज में विशेष रूप से रुचि न हो, या उसे यह न समझ आये कि उसके लिए इसका क्‍या उपयोग है, इत्यादि। ये सभी कारण संभव हैं। लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह कोई वस्तु चुराता है या नहीं, इससे यह साबित नहीं होता है कि यह विचार उसके अंदर केवल क्षण भर के लिये रहता है, एक पल के लिए कौंधता है। इसके विपरीत, यह उसकी प्रकृति का एक हिस्सा है जिसमें सुधार लाना कठिन है। ऐसा व्यक्ति केवल एक बार चोरी करके संतुष्ट नहीं होता है; बल्कि जब भी कोई अच्छी वस्तु या उपयुक्त स्थिति उसके सामने आती है, तो दूसरों की चीजों को अपनी बना लेने के ऐसे विचार उसमें जाग जाते हैं। यही कारण है कि मैं कहता हूँ कि यह विचार केवल समय-समय पर नहीं उठता है, बल्कि इस व्यक्ति की स्वयं की प्रकृति में ही शामिल है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'एक बहुत गंभीर समस्या : विश्वासघात (1)' से उद्धृत

कोई भी अपना सच्चा चेहरा दर्शाने के लिए अपने स्वयं के शब्दों और क्रियाओं का उपयोग कर सकता है। यह सच्चा चेहरा निश्चित रूप से उसकी प्रकृति है। यदि तुम बहुत कुटिल ढंग से बोलने वाले व्यक्ति हो, तो तुम कुटिल प्रकृति के हो। यदि तुम्हारी प्रकृति धूर्त है, तो तुम कपटी ढंग से काम करते हो, और इससे तुम बहुत आसानी से लोगों को धोखा दे देते हो। यदि तुम्हारी प्रकृति अत्यंत कुटिल है, तो हो सकता है कि तुम्हारे वचन सुनने में सुखद हों, लेकिन तुम्हारे कार्य तुम्हारी कुटिल चालों को छिपा नहीं सकते हैं। यदि तुम्हारी प्रकृति आलसी है, तो तुम जो कुछ भी कहते हो, उस सबका उद्देश्य तुम्हारी लापरवाही और अकर्मण्यता के लिए उत्तरदायित्व से बचना है, और तुम्हारे कार्य बहुत धीमे और लापरवाह होंगे, और सच्चाई को छिपाने में बहुत माहिर होंगे। यदि तुम्हारी प्रकृति सहानुभूतिपूर्ण है, तो तुम्हारे वचन तर्कसंगत होंगे और तुम्हारे कार्य भी सत्य के अत्यधिक अनुरूप होंगे। यदि तुम्हारी प्रकृति निष्ठावान है, तो तुम्हारे वचन निश्‍चय ही खरे होंगे और जिस तरीके से तुम कार्य करते हो, वह भी व्यावहारिक और यथार्थवादी होगा, जिसमें ऐसा कुछ न होगा जिससे तुम्हारे मालिक को असहजता महसूस हो। यदि तुम्हारी प्रकृति कामुक या धन लोलुप है, तो तुम्हारा हृदय प्रायः इन चीजों से भरा होगा और तुम बेइरादा कुछ विकृत, अनैतिक काम करोगे, जिन्हें भूलना लोगों के लिए कठिन होगा और वे काम उनमें घृणा पैदा करेंगे।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'एक बहुत गंभीर समस्या : विश्वासघात (1)' से उद्धृत

तुम यह कैसे बता सकते हो कि किसी व्यक्ति का सार क्या है? यदि कोई व्यक्ति कुछ भी न करे या कोई मामूली काम करे तो तुम यह नहीं बता सकते कि उस व्यक्ति की प्रकृति और उसका सार क्या है। इन्हें उनके द्वारा उन बातों में दिखाया जाता है जिन्हें वे निरंतर उनके कार्यों के पीछे रहे इरादों में, वे जो भी करते हैं उनके पीछे रहे उद्देश्यों में, वे जो इच्छाएं रखते हैं और वे जिस राह पर चलते हैं उसमें दिखाया जाता है। उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है कि इन चीज़ों को उन प्रतिक्रियाओं में दिखाया जाता है जो वे तब देते हैं जब वे परमेश्वर द्वारा व्यवस्थित किसी परिवेश का सामना करते हैं, जब परमेश्वर द्वारा व्यक्तिगत रूप से उनके साथ कुछ जाता है, जब उनका परीक्षण और शुद्धिकरण किया जाता है, या उनसे निपटा जाता है या उनकी काट-छाँट की जाती है, या जब परमेश्वर व्यक्तिगत रूप से उनका प्रकाशन और मार्गदर्शन करता है। यह सब किन बातों से संबंधित है? यह एक व्यक्ति के कार्यों, उनके जीने के तरीक़ों और उन सिद्धांतों से संबंधित है जिनके द्वारा वे स्वयं का संचालन करते हैं। यह उनकी खोज की दिशा और लक्ष्यों से, और उन साधनों से जिनके माध्यम से वे आगे बढ़ते हैं से संबंधित है। दूसरे शब्दों में, यह उस राह से जिस पर वे चलते हैं, कैसे जीते हैं, वे किसके सहारे जीते हैं, और उनके अस्तित्व का आधार क्या है, इन सभी बातों से भी संबंधित है।

— "अंत के दिनों के मसीह की बातचीत के अभिलेख" में 'पौलुस के प्रकृति-स्‍वभाव को कैसे पहचाना जाए' से उद्धृत

जब मनुष्य की प्रकृति को पहचानने की बात आती है, तो सबसे महत्वपूर्ण बात इसे मनुष्य के विश्व दृष्टिकोण, जीवन के दृष्टिकोण, और मूल्यों के परिप्रेक्ष्य से देखना है। जो लोग शैतान के हैं वे स्वयं के लिए जीते हैं। उनके जीवन के दृष्टिकोण और सिद्धांत मुख्यत: शैतान की कहावतों से आते हैं, जैसे कि "स्वर्ग उन लोगों को नष्ट कर देता है जो स्वयं के लिए नहीं हैं।" पृथ्वी के उन पिशाच राजाओं, महान लोगों और दार्शनिकों द्वारा बोले गए वचन मनुष्य का जीवन बन गए हैं। विशेष रूप से, कन्फ़्यूशियस, जिसके बारे में चीनी लोगों द्वारा "ऋषि" के रूप में शेखी बघारी जाती है, के अधिकांश वचन, मनुष्य का जीवन बन गए हैं। बौद्ध धर्म और ताओवाद की मशहूर कहावतें, और प्रसिद्ध व्यक्तियों की अक्सर उद्धृत की गई विशेष कहावते हैं; ये सभी शैतान के फ़लसफों और शैतान की प्रकृति की रूपरेखाएँ हैं। वे शैतान की प्रकृति के सबसे अच्छे उदाहरण और स्पष्टीकरण भी हैं। ये विष, जिन्हें मनुष्य के हृदय में डाल दिया गया है, सब शैतान से आते हैं; उनमें से एक छोटा सा अंश भी परमेश्वर से नहीं आता है। ये शैतानी वचन भी परमेश्वर के वचन के बिल्कुल विरुद्ध हैं। यह पूरी तरह से स्पष्ट है कि सभी सकारात्मक चीज़ों की वास्तविकता परमेश्वर से आती है, और वे सभी नकारात्मक चीज़ें जो मनुष्य में विष भरती हैं, वे शैतान से आती हैं। इसलिए, तुम किसी व्यक्ति की प्रकृति को और वह किससे संबंधित है इस बात को उसके जीवन के दृष्टिकोण और मूल्यों से जान सकते हो। शैतान राष्ट्रीय सरकारों और प्रसिद्ध एवं महान व्यक्तियों की शिक्षा और प्रभाव के माध्यम से लोगों को दूषित करता है। उनके शैतानी शब्द मनुष्य के जीवन-प्रकृति बन गए हैं। "स्वर्ग उन लोगों को नष्ट कर देता है जो स्वयं के लिए नहीं हैं" एक प्रसिद्ध शैतानी कहावत है जिसे हर किसी में डाल दिया गया है और यह मनुष्य का जीवन बन गया है। जीने के लिए दर्शन के कुछ अन्य शब्द भी हैं जो इसी तरह के हैं। शैतान प्रत्येक देश की उत्तम पारंपरिक संस्कृति के माध्यम से लोगों को शिक्षित करता है और मानवजाति को विनाश की विशाल खाई में गिरने और उसके द्वारा निगल लिए जाने पर मजबूर कर देता है, और अंत में परमेश्वर लोगों को नष्ट कर देता है क्योंकि वे शैतान की सेवा करते हैं और परमेश्वर का विरोध करते हैं। कल्पना करो कि समाज में कई वर्षों से सक्रिय व्यक्ति से कोई यह प्रश्न पूछे : "चूँकि तुम इतने लंबे समय से दुनिया में रहे हो और इतना कुछ हासिल किया है, ऐसी कौन-सी मुख्य प्रसिद्ध कहावतें हैं जिनके अनुसार तुम लोग जीते हो?" शायद वह कहे, "सबसे महत्वपूर्ण कहावतें यह हैं कि 'अधिकारी उपहार देने वालों को नहीं मार गिराते, और जो चापलूसी नहीं करते हैं वे कुछ भी हासिल नहीं करते हैं।'" क्या ये शब्द उस व्यक्ति की प्रकृति के स्वभाव का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं? पद पाने के लिए अनैतिक साधनों का इस्तेमाल करना उसकी प्रकृति बन गयी है, और अधिकारी होना ही उसे जीवन देता है। अभी भी लोगों के जीवन में, और उनके आचरण और व्यवहार में कई शैतानी विष उपस्थित हैं—उनमें बिलकुल भी कोई सत्य नहीं है। उदाहरण के लिए, उनके जीवन दर्शन, काम करने के उनके तरीके, और उनकी सभी कहावतें बड़े लाल अजगर के विष से भरी हैं, और ये सभी शैतान से आते हैं। इस प्रकार, सभी चीजें जो लोगों की हड्डियों और रक्त में बहें, वह सभी शैतान की चीज़ें हैं। उन सभी अधिकारियों, सत्ताधारियों और प्रवीण लोगों के सफलता पाने के अपने ही मार्ग और रहस्य होते हैं, तो क्या ऐसे रहस्य उनकी प्रकृति का उत्तम रूप से प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं? वे दुनिया में कई बड़ी चीज़ें कर चुके हैं और उन के पीछे उनकी जो चालें और षड्यंत्र हैं उन्हें कोई समझ नहीं पाता है। यह दिखाता है कि उनकी प्रकृति आखिर कितनी कपटी और विषैली है। शैतान ने मनुष्य को गंभीर ढंग से दूषित कर दिया है। शैतान का विष हर व्यक्ति के रक्त में बहता है, और यह देखा जा सकता है कि मनुष्य की प्रकृति दूषित, बुरी और प्रतिक्रियावादी है, शैतान के दर्शन से भरी हुई और उसमें डूबी हुई है—अपनी समग्रता में यह प्रकृति परमेश्वर के साथ विश्वासघात करती है। इसीलिए लोग परमेश्वर का विरोध करते हैं और परमेश्वर के विरूद्ध खड़े रहते हैं।

— "अंत के दिनों के मसीह की बातचीत के अभिलेख" में 'मनुष्य का स्वभाव कैसे जानें' से उद्धृत

जब तक लोग परमेश्वर के कार्य का अनुभव नहीं कर लेते हैं और सत्य को प्राप्त नहीं कर लेते हैं, तब तक यह शैतान की प्रकृति है जो भीतर से इन पर नियंत्रण कर लेती है और उन पर हावी हो जाती है। वह प्रकृति विशिष्ट रूप से किस चीज़ को अपरिहार्य बनाती है? उदाहरण के लिए, तुम स्वार्थी क्यों हो? तुम अपने पद की रक्षा क्यों करते हो? तुम्हारी भावनाएँ इतनी प्रबल क्यों हैं? तुम उन अधार्मिक चीज़ों से प्यार क्यों करते हो? ऐसी बुरी चीज़ें तुम्हें अच्छी क्यों लगती हैं? ऐसी चीजों को पसंद करने का आधार क्या है? ये चीज़ें कहाँ से आती हैं? तुम इन्हें स्वीकारकर इतने खुश क्यों हो? अब तक, तुम सब लोगों ने समझ लिया है कि इन सभी चीजों के पीछे मुख्य कारण यह है कि वे शैतान के जहर से युक्त हैं। जहाँ तक इस बात का प्रश्न है कि शैतान का जहर क्या है, इसे वचनों के माध्यम से पूरी तरह से व्यक्त किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, यदि तुम कुछ कुकर्मियों से पूछते हो उन्होंने बुरे कर्म क्यों किए, तो वे जवाब देंगे: "हर व्यक्ति अपनी सोचे बाकियों को शैतान ले जाये।" यह अकेला वाक्यांश समस्या की जड़ को व्यक्त करता है। शैतान का तर्क लोगों का जीवन बन गया है। भले वे चीज़ों को इस या उस उद्देश्य से करें, वे इसे केवल अपने लिए ही कर रहे होते हैं। सब लोग सोचते हैं चूँकि जीवन का नियम, हर कोई बस अपना सोचे, और बाकियों को शैतान ले जाए, यही है, इसलिए उन्हें बस अपने लिए ही जीना चाहिए, एक अच्छा पद और ज़रूरत के खाने-कपड़े हासिल करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा देनी चाहिए। "हर व्यक्ति अपनी सोचे बाकियों को शैतान ले जाये"—यही मनुष्य का जीवन और फ़लसफ़ा है, और इंसानी प्रकृति का भी प्रतिनिधित्व करता है। यह कथन वास्तव में शैतान का जहर है और जब इसे मनुष्य के द्वारा आत्मसात कर लिया जाता है तो यह उनकी प्रकृति बन जाता है। इन वचनों के माध्यम से शैतान की प्रकृति उजागर होती है; ये पूरी तरह से इसका प्रतिनिधित्व करते हैं। और यही ज़हर मनुष्य के अस्तित्व की नींव बन जाता है और उसका जीवन भी, यह भ्रष्ट मानवजाति पर लगातार हजारों सालों से इस ज़हर के द्वारा हावी रहा है। शैतान जो कुछ भी करता है, वह उसके स्वयं के लिए होता है। यह परमेश्वर से परे जाना, परमेश्वर से मुक्त होना और स्वयं सामर्थ्य का प्रयोग करना, और उन सभी चीज़ों पर अपना आधिपत्य जमाना चाहता है जो परमेश्वर ने रची हैं। इसलिए, मनुष्यों की प्रकृति शैतान की प्रकृति है। वास्तव में, बहुत से लोगों के नीति-वाक्य उनकी प्रकृति के प्रतिनिधि और प्रतिबिंब बन सकते हैं। चाहे लोग खुद को छिपाने की कितनी भी कोशिश करें, जो कुछ भी वे करते हैं और हर बात जो वे कहते हैं, उनमें वे अपनी प्रकृति को छिपा नहीं सकते हैं। कुछ लोग ऐसे होते हैं जो कभी सच नहीं बोलते हैं और वे दिखावा करने में अच्छे होते हैं, लेकिन एक बार जब दूसरे लोग उनसे साथ थोड़ी देर बातचीत करते हैं, तो उनकी कपटी प्रकृति और अतिशय बेईमानी का खुलासा हो जाता है। अंत में, लोग एक निष्कर्ष पर पहुंचेंगे : ये लोग कभी एक शब्द भी सच नहीं बोलते, और वे धोखेबाज़ लोग हैं। यह कथन ऐसे व्यक्ति की प्रकृति को दर्शाता है; यह उनकी प्रकृति और सार का सर्वोत्तम चित्रण और प्रमाण है। उनके जीवन का फलसफ़ा है किसी को सच नहीं बताना, और किसी पर भी विश्वास नहीं करना। मनुष्य की शैतानी प्रकृति बड़ी मात्रा में फ़लसफ़े से युक्त है। कभी-कभी तुम स्वयं ही इसके बारे में अवगत नहीं होते हो और इसे नहीं समझते हो, मगर तुम्हारे जीवन का हर पल इस पर आधारित है। इसके अलावा तुम्हें लगता है कि यह फ़लसफ़ा बहुत सही है, बहुत उचित है और गलत नहीं है। यह इसका चित्रण करने के लिए काफी है कि शैतान का फ़लसफ़ा लोगों की प्रकृति बन गया है और वे पूरी तरह से शैतान के फ़लसफ़े के अनुसार जी रहे हैं और इसका जरा सा भी विद्रोह नहीं करते। इसलिए, वे लगातार शैतानी प्रकृति को प्रकट कर रहे हैं, और हर लिहाज़ से वे निरंतर शैतानी फ़लसफ़े के अनुसार जी रहे हैं। शैतान की प्रकृति मनुष्य का जीवन है।

— "अंत के दिनों के मसीह की बातचीत के अभिलेख" में 'पतरस के मार्ग पर कैसे चलें' से उद्धृत

तुम मानव प्रकृति को कैसे समझते हो? अपनी प्रकृति को समझने का वास्तविक अर्थ है अपनी आत्मा की गहराई का विश्लेषण करना; इसमें वह शामिल है जो तुम्हारे जीवन में है। यही शैतान का तर्क और शैतान के दृष्टिकोण हैं जिनके अनुसार तुम जीते आ रहे हो। केवल अपने आत्मा के गहरे हिस्सों को निकाल करके ही तुम अपनी प्रकृति को समझ सकते हो। इन चीज़ों को कैसे निकाला जा सकता है? मात्र एक या दो घटनाओं द्वारा, उन्हें निकाला और विश्लेषित नहीं किया जा सकता; कई बार काम ख़त्म कर लेने के बाद भी तुम्हारे पास कोई समझ नहीं होती। थोड़ी-सी भी पहचान और समझ प्राप्त कर सकने में तीन या पाँच वर्ष लग सकते हैं। बहुत सी परिस्थितियों में, तुम्हें खुद पर मनन कर खुद को जानना चाहिए। जब तुम गहराई तक खोदने का अभ्यास करोगे तभी तुम परिणाम पाओगे। जैसे-जैसे सत्य की तुम्हारी समझ ज़्यादा से ज़्यादा गहरी होती जायेगी, तुम धीरे-धीरे अपने सार और प्रकृति को आत्म-मंथन एवं आत्मज्ञान द्वारा जान जाओगे। अपनी प्रकृति को समझने के लिए, तुम्हें कुछ चीज़ों को अवश्य करना चाहिए: सबसे पहले, तुम्हें इस बात की स्पष्ट समझ होनी चाहिए कि तुम्हें क्या पसंद है। इसका तात्पर्य यह नहीं है कि तुम क्या खाना या पहनना पसंद करते हो; बल्कि इसका मतलब है कि तुम किस तरह की चीज़ों का आनन्द लेते हो, किन चीज़ों से तुम ईर्ष्या करते हो, किन चीज़ों की तुम आराधना करते हो, किन चीज़ों की तुम्हें तलाश है, और किन चीज़ों की ओर तुम अपने हृदय में ध्यान देते हो, जिस प्रकार के लोगों के संपर्क में आने का तुम आनन्द लेते हो, जिस प्रकार की चीज़ें तुम करना चाहते हो, और जिस प्रकार के लोगों को तुम अपने हृदय में आदर्श मानते हो। उदाहरण के लिए, ज्यादातर लोग ऐसे लोगों को पसंद करते हैं जो महान हों, जो अपनी बोल-चाल में शानदार हों, या ऐसे हों जो वाक्पटु चापलूसी से बात करते हों या कुछ लोग ऐसे व्यक्तियों को पसंद करते हैं जो एक ढोंग करते हैं। यह पूर्वोक्त उस बारे में है कि वे कैसे लोगों के साथ बातचीत करना पसंद करते हैं। जहाँ तक लोग जिन चीज़ों को पसंद करते हैं इस बात का प्रश्न है, इसमें शामिल है कुछ चीज़ों को करने के लिए तैयार होना जिन्हें करना आसान है, उन चीज़ों को करने का आनन्द लेना जिन्हें दूसरे अच्छा मानते हैं, और जिनके कारण लोगों की प्रशंसा और सराहनाएँ मिलेंगी। लोगों की प्रकृति में, जिन चीज़ों को वे पसंद करते हैं, उनकी एक जैसी विशिष्टता होती है। अर्थात, वे उन लोगों, घटनाओं और चीज़ों को पसंद करते हैं जिनके बाहरी दिखावे की वजह से अन्य लोग उनसे ईर्ष्या करते हैं, वे उन लोगों, घटनाओं और चीजों को पसंद करते हैं जो सुंदर और शानदार दिखते हैं, और वे उन लोगों, घटनाओं और चीज़ों को पसंद करते हैं जो अपनी दिखावट के कारण अन्य लोगों से अपनी आराधना करवाते हैं। ये चीज़ें जिन्हें लोग अत्यधिक पसंद करते हैं वे बढ़िया, चमकदार, भव्य और आलीशान होती हैं। सभी लोग इन चीज़ों की आराधना करते हैं। यह देखा जा सकता है कि लोगों में कोई सच्चाई नहीं होती है, न ही उनमें वास्तविक मानव की सदृशता होती है। इन चीज़ों की आराधना करने का लेशमात्र भी महत्व नहीं है, मगर लोग तब भी इन चीजों को पसंद करते हैं। ये चीजें, जिन्हें लोग पसंद करते हैं, उन लोगों को विशेष रूप से अच्छी लगती प्रतीत होती हैं, जो परमेश्वर में विश्वास नहीं करते, और वे इन चीजों का विशेष रूप से अनुसरण करने के इच्छुक होते हैं। ... इन चीजों की आकांक्षा करना सांसारिक लोगों के साथ कीचड़ में लोटना है। परमेश्वर इससे घृणा करता है। इसमें सत्य का अभाव है, इसमें मानवता का अभाव है, और यह शैतानी है। यह किसी व्यक्ति की प्रकृति का उसकी प्राथमिकताओं के भीतर से पता लगाना है। लोगों की पसंद उनके कपड़े पहनने के तरीके से देखी जा सकती है : कुछ लोग ध्यान खींचने वाले रंगीन कपड़े या विचित्र पोशाक पहनने के इच्छुक होते हैं। वे ऐसी चीजें ले जाएँगे, जो पहले किसी और ने नहीं लीं, और वे ऐसी चीजें पसंद करते हैं जो विपरीत लिंग को आकर्षित कर सकें। उनका ये कपड़े और चीजें पहनना उनके जीवन और दिल की गहराइयों में इन चीजों के लिए उनकी प्राथमिकता दर्शाता है। जो चीजें वे पसंद करते हैं, वे गरिमापूर्ण या शालीन नहीं होतीं। वे असल में वास्तविक व्यक्ति की चीजें नहीं होतीं। उनके द्वारा इन चीजों को पसंद करने में अधार्मिकता है। उनका दृष्टिकोण ठीक वैसा ही है, जैसा सांसारिक लोगों का होता है। व्यक्ति उनमें जरा भी सच्चाई नहीं देख सकता। इसलिए, तुम क्या पसंद करते हो, तुम किस पर ध्यान केंद्रित करते हो, तुम किसकी आराधना करते हो, तुम किसकी ईर्ष्या करते हो, और रोज तुम अपने दिल में क्या सोचते हो, ये सब तुम्हारी अपनी प्रकृति का प्रतिनिधित्व करती हैं। यह इसे साबित करने के लिए पर्याप्त है कि तुम्हारी प्रकृति अधार्मिकता की शौकीन है, और गंभीर परिस्थितियों में, तुम्हारी प्रकृति बुरी और असाध्य है। तुम्हें इस तरह अपनी प्रकृति का विश्लेषण करना चाहिए; अर्थात्, यह जाँचो कि तुम क्या पसंद करते हो और तुम अपने जीवन में क्या त्यागते हो। शायद तुम कुछ समय के लिए किसी के प्रति अच्छे हो, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि तुम उन के चाहने वाले हो। जिसके तुम वाकई शौकीन हो, वह ठीक वो है जो तुम्हारी प्रकृति में है; भले ही तुम्हारी हड्डियाँ टूट गयी हों, तुम फिर भी उसका आनंद लोगे और कभी भी इसे त्याग नहीं पाओगे। इसे बदलना आसान नहीं है। उदाहरण के लिए एक साथी को ढूँढने की बात लो। यदि कोई महिला वास्तव में किसी के प्यार में पड़ जाए, तो कोई भी उसे रोक नहीं पाएगा। यहाँ तक कि अगर उसकी टांग भी तोड़ दी जाये, तब भी वह उसके साथ ही रहना चाहेगी; अगर उसे उसके साथ विवाह करने का अर्थ उस महिला की मृत्यु हो तो भी वह विवाह करना चाहेगी। यह कैसे हो सकता है? इसका कारण यह है कि कोई भी व्यक्ति उसे नहीं बदल सकता जो लोगों के अंदर गहराई में होता है। यहाँ तक कि अगर कोई मर भी जाए, तो भी उसकी आत्मा बस वही चीज़ें ले जाएगी; ये चीजें मानव प्रकृति की हैं, और वे किसी व्यक्ति के सार का प्रतिनिधित्व करती हैं।

— "अंत के दिनों के मसीह की बातचीत के अभिलेख" में 'स्वभाव बदलने के बारे में क्या जानना चाहिए' से उद्धृत

अपने स्वयं के स्वभाव को समझना क्या है? इसे कैसे जाना जा सकता है? किन पहलुओं से इसे जाना जा सकता है? इसके अलावा, एक व्यक्ति जिन चीज़ों को प्रकट करता है, उसके माध्यम से किसी की प्रकृति को विशिष्ट रूप से कैसे देखा जाना चाहिए? सबसे पहले, तुम मनुष्य की प्रकृति को उसकी रुचि के माध्यम से देख सकते हो। उदाहरण के लिए, कुछ लोगों को नृत्य करना विशेष रूप से पसंद है, कुछ लोगों को विशेष रूप से गायक या फ़िल्मी सितारे पसंद हैं, कुछ लोग विशेष रूप से कुछ निश्चित प्रसिद्ध लोगों को आदर्श मानते हैं। इन रुचियों से हम देख सकते हैं कि इन लोगों की प्रकृति क्या है। उदाहरण के तौर पर : कुछ लोग किसी गायक को आदर्श मान सकते हैं, यहाँ तक कि इस हद तक कि जहाँ वे गायक की हर हरकत, हर मुस्कान, और हर शब्द के प्रति आसक्त हो जाते हैं। वे गायक पर ध्यान लगाए रहते हैं, उस हर चीज़ की तस्वीर खींचते हैं जो गायक पहनता है और उसकी नक़ल करते हैं। इस स्तर का आदर्शीकरण इस व्यक्ति की प्रकृति के बारे में क्या दर्शाता है? यह दर्शाता है कि ऐसे व्यक्ति के हृदय में केवल वही चीज़ें हैं, परमेश्वर नहीं। वे सभी बातें जो यह व्यक्ति सोचता है, प्यार करता है, और खोजता है, पूरी तरह से शैतान की हैं; वे इस व्यक्ति के हृदय पर कब्ज़ा कर लेती हैं, जिसे उन चीज़ों को अर्पित कर दिया जाता है। यहाँ क्या समस्या है? अगर किसी चीज़ को चरम सीमा तक प्रेम किया जाता है, तो वह चीज़ किसी का जीवन बन सकती है और उसके हृदय पर कब्ज़ा कर सकती है, पूरी तरह से यह साबित करती है कि वह व्यक्ति एक मूर्ति पूजक है जो परमेश्वर को नहीं चाहता है और उसके बजाय शैतान से प्यार करता है। इसलिए, हम यह निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि ऐसे व्यक्ति की प्रकृति ऐसे व्यक्ति की होती है जो शैतान से प्रेम करता है और उसकी आराधना करता है, सच्चाई से प्रेम नहीं करता है, और परमेश्वर को नहीं चाहता है। क्या यह किसी व्यक्ति की प्रकृति को देखने का सही तरीका नहीं है? यह पूरी तरह सही है। यही वह तरीका है जिससे मनुष्य की प्रकृति का विश्लेषण किया जाता है। उदाहरण के लिए, कुछ लोग विशेष रूप से पौलुस को आदर्श मानते हैं। उन्हें बाहर जा कर भाषण देना और कार्य करना पसंद होता है, उन्हें सभाओं में भाग लेना और प्रचार करना पसंद होता है; उन्हें अच्छा लगता है जब लोग उन्हें सुनते हैं, उनकी आराधना करते हैं और उनके चारों ओर घूमते हैं। उन्हें पसंद होता है कि दूसरों के मन में उनकी एक हैसियत हो, और जब दूसरे उनके द्वारा प्रदर्शित छवि को महत्व देते हैं, तो वे उसकी सराहना करते हैं। आओ हम इन व्यवहारों से उनकी प्रकृति का विश्लेषण करें: उनकी प्रकृति कैसी है? यदि वे वास्तव में इस तरह से व्यवहार करते हैं, तो यह इस बात को दर्शाने के लिए पर्याप्त है कि वे अहंकारी और दंभी हैं। वे परमेश्वर की आराधना तो बिल्कुल नहीं करते हैं; वे ऊँची हैसियत की तलाश में रहते हैं और दूसरों पर अधिकार रखना चाहते हैं, उन पर अपना कब्ज़ा रखना चाहते हैं, उनके दिमाग में एक हैसियत प्राप्त करना चाहते हैं। यह शैतान की विशेष छवि है। उनकी प्रकृति के पहलू जो अलग से दिखाई देते हैं, वे हैं उनका अहंकार और दंभ, परेमश्वर की आराधना करने की अनिच्छा, और दूसरों के द्वारा आराधना किए जाने की इच्छा। ऐसे व्यवहारों से तुम उनकी प्रकृति को स्पष्ट रूप से देख सकते हो। एक और उदाहरण लें तो, कुछ लोगों को दूसरों का अनुचित लाभ उठाना विशेष रूप से पसंद होता है और वे हर चीज में अपना ही हित साधना चाहते हैं। वे जो कुछ भी करें उससे उन्हें लाभ मिलना चाहिए, वरना वे उसे नहीं करेंगे। जब तक उन्हें किसी चीज में लाभ न मिलता हो, वे उस पर ध्यान नहीं देते हैं, और उनके हर कृत्य के पीछे एक लुका-छिपा उद्देश्य होता है। जो व्यक्ति उनके लिए लाभदायक होता है, वे उसकी प्रशंसा करते हैं, और जो उनकी चापलूसी करता है, वे उसका गुणगान करते नहीं थकते। यहाँ तक कि अगर उनके पसंदीदा लोगों में कुछ समस्या होती है, तो भी वे कहते हैं कि उनके पसंदीदा व्यक्ति सही हैं और उनकी रक्षा और बचाव करने के लिए वे पूरा प्रयास करते हैं। इस तरह के व्यक्तियों का क्या स्वभाव होता है? तुम उनके स्वभाव को इन व्यवहारों के आधार पर पूरी तरह से देख सकते हो, ठीक है न? वे अपने कार्यों के माध्यम से अनुचित लाभ लेने का प्रयास करते हैं और हर स्थिति में लेन-देन के व्यवहार में संलग्न रहते हैं, इसलिए तुम यह निश्चित रूप से कह सकते हो कि उनका स्वभाव लाभ के लिए ललचाते रहना है। वे हर चीज में स्वयं के बारे में सोचते हैं। अगर उन्हें कोई लाभ नहीं होगा, तो वे जल्दी नहीं उठेंगे। वे सबसे स्वार्थी, बेहद अतृप्त लोगों में से होते हैं, इसलिए उनका स्वभाव धन से प्रेम करने का होता है, सत्य से प्रेम करने का नहीं। कुछ लोग महिलाओं से मोहित रहते हैं, हमेशा हर चीज में महिलाओं के बारे में सोचते हैं, और जहाँ वे जाती हैं उनका पीछा करते हैं। सुंदर महिलाएं ऐसे व्यक्तियों की चाहत का लक्ष्य होती हैं और उनके दिल में उनके लिए अत्यधिक सम्मान होता है। वे सुंदर महिलाओं के लिए अपना जीवन देने और सब कुछ त्यागने के लिए तैयार रहते हैं। केवल महिलाएं ही उनके दिल में रहती हैं। ऐसे पुरुषों का क्या स्वभाव होता है? उनका स्वभाव है सुंदर महिलाओं से प्रेम करना और उनकी पूजा करना, इसलिए वे बुरे, लालची स्वभाव वाले अय्याश व्यक्ति होते हैं। उनके कृत्य एक लालची स्वभाव प्रकट करते हैं—ऐसा व्यवहार केवल कभी-कभी गलत राह पर नहीं बहकता या ऐसे लोग केवल कभी-कभी सामान्य लोगों से ज्यादा बदतर नहीं होते—बल्कि उनका दिल पहले से ही इन चीजों से पूरी तरह से भरा होता है, जो उनका स्वभाव, उनका सार बन जाती हैं। इस प्रकार, ये चीजें उनके स्वभाव की अभिव्यक्तियां बन जाती हैं।

किसी व्यक्ति के स्वभाव के विशिष्ट अंश हर क्षण लगातार प्रकट होते रहते हैं। कोई व्यक्ति चाहे कुछ भी करे, उससे उस व्यक्ति का स्वभाव प्रकट हो सकता है। लोगों के कुछ भी करने के अपने मंतव्य और उद्देश्य होते हैं, चाहे वह आतिथ्य प्रदान करना हो, सुसमाचार का प्रचार करना हो, या किसी भी अन्य तरह का कार्य हो, वे अनजाने में अपने स्वभाव के कुछ हिस्सों को प्रकट कर सकते हैं, क्योंकि हर किसी का स्वभाव उसका जीवन होता है, और लोग जब तक जीवित रहते हैं, तब तक अपने स्वभाव के अनुसार चलते रहते हैं। किसी व्यक्ति का स्वभाव केवल कुछ अवसरों पर या संयोग से प्रकट नहीं होता है; बल्कि, यह पूरी तरह से व्यक्ति के सार का प्रतिनिधित्व कर सकता है, और जो भी व्यक्ति की हड्डियों और रक्त के भीतर बहता है, वह उसके स्वभाव और जीवन का प्रतिनिधित्व करता है। कुछ लोगों को सुंदर महिलाएं पसंद होती हैं। कुछ लोगों को पैसे से प्रेम होता है। कुछ विशेष रूप से हैसियत को पसंद करते हैं। कुछ विशेष रूप से प्रतिष्ठा और व्यक्तिगत छवि को मूल्यवान समझते हैं। कुछ विशेष रूप से अपने आदर्श नायक-नायिकाओं से प्रेम करते हैं या उनकी आराधना करते हैं। और कुछ लोग, विशेष रूप से अहंकारी और दंभी होते हैं, वे अपने दिल में किसी को स्थान नहीं देते और ऊँची हैसियत प्राप्त करने का प्रयास करते हैं, वे दूसरों से अलग दिखना चाहते हैं और उन पर अधिकार प्राप्त करना चाहते हैं। स्वभावों के विभिन्न प्रकार होते हैं, और वे लोगों के बीच भिन्न-भिन्न हो सकते हैं, लेकिन उनके साझे तत्व परमेश्वर का प्रतिरोध और और उससे विश्वासघात है। इस मामले में वे सभी समान हैं।

— "अंत के दिनों के मसीह की बातचीत के अभिलेख" में 'मनुष्य का स्वभाव कैसे जानें' से उद्धृत

मानवीय प्रकृति में कुछ विशेषताएँ होती हैं, जो सभी लोगों में समान होती हैं : इन्हें तुम्हें अवश्य जानना चाहिए। सभी लोग परमेश्वर के साथ विश्वासघात करने में सक्षम हैं, यह एक साझी विशेषता है, लेकिन हर किसी की अपनी विशेष बड़ी कमजोरी होती है। कुछ लोग इसे पसंद करते हैं तो कुछ लोग उसे पसंद करते हैं, कुछ लोग इसका सम्मान करते हैं तो कुछ लोग उसका सम्मान करते हैं। ये लोगों की प्रकृति में पाए जाने वाले अंतर हैं। कुछ लोग बहुत अधिक कष्ट सहने में सक्षम होते हैं, तो कुछ लोग थोड़ी-सी पीड़ा के बाद ही नकारात्मक हो जाते हैं और शिकायत करना शुरू कर देते हैं और उन्हें सहन करने में कठिनाई होती है। ऐसा क्यों है कि एक ही घटना का सामना करने पर हर कोई अलग तरह से प्रतिक्रिया व्यक्त करता है? ऐसा इसलिए है, क्योंकि उनकी प्रकृति में अलग चीजें हैं। कुछ लोगों के भ्रष्ट स्वभाव अपनी अभिव्यक्ति में अधिक गंभीर होते हैं, जबकि अन्य लोगों के स्वभाव अधिक मृदु होते हैं; लेकिन होते वे अनिवार्य रूप से एक ही हैं। यह एक साझी विशेषता है। किसी व्यक्ति की प्रकृति कैसी है, यह तय करता है कि वह किस तरह का व्यक्ति है। भले ही उनमें दूसरों के समान विशेषताएँ हों, लेकिन आवश्यक नहीं कि वे एक ही जैसे लोग हों। मैं क्यों कहता हूँ कि वे एक ही जैसे लोग नहीं हैं? क्योंकि यह चीज जो उनकी प्रकृति में है, हो सकता है उतनी स्पष्ट या तीव्र न हो। उदाहरण के लिए, वासना एक साझी मानवीय विशेषता है। यह सबमें होती है। इतना ही नहीं, इस पर काबू पाना बहुत मुश्किल है। लेकिन कुछ लोगों में यह विशेष रूप से तीव्र होती है। जब यह समस्या सामने आती है, तो वे इस पर काबू पाने में असमर्थ होते हैं, और फिर वे दूसरे के साथ भाग सकते हैं या दूसरे को भगा ले जा सकते हैं। कहा जा सकता है कि ये लोग प्रकृति से दुष्ट होते हैं। कुछ लोग इस समस्या का सामना करने में थोड़े कमजोर होते हैं, या वे वासना के आवेग के प्रति थोड़े संवेदनशील होते हैं, लेकिन वे शर्मनाक कृत्य नहीं करते, वे खुद को नियंत्रित करने और इन कृत्यों से दूर रहने में सक्षम होते हैं। उस स्थिति में तुम यह नहीं कह सकते कि ये लोग अपनी प्रकृति से दुष्ट हैं। जब तक देह है, तब तक वासना युक्त जुनून रहेगा। कुछ लोग अपनी वासना में लिप्त हो जाते हैं और कामुकता में जो मन में आए वह करते हैं। लेकिन कुछ लोग ऐसे बिलकुल नहीं होते। वे सत्य का अनुसरण करने, अपने कार्यों को सत्य पर आधारित करने और देह-सुख त्यागने में सक्षम होते हैं। भले ही उनमें भी देह की वासनाएँ होती हैं, लेकिन वे अलग तरह से व्यवहार करते हैं। यहीं लोग एक-दूसरे से भिन्न होते हैं। कुछ लोग पैसे का लालच करते हैं; जब वे पैसा और अच्छी चीजें देखते हैं, तो उन्हें पाना चाहते हैं, और उनकी उन्हें पाने की इच्छा असाधारण रूप से प्रबल होती है। इन लोगों की प्रकृति लालची और लोभी होती है। कोई चीज देखते ही वे लोभी हो जाते हैं; वे कलीसिया का पैसा तक खर्च और चोरी करने का साहस कर डालते हैं, यहाँ तक कि दसियों हजार युआन भी; जितना अधिक पैसा होता है, उतनी ही अधिक वे इसे करने की हिम्मत करते हैं; वे परमेश्वर से बिलकुल नहीं डरते। यह लालची प्रकृति है। कलीसिया के 10 या 20 युआन खर्च करने पर भी कुछ लोगों का विवेक उन्हें सालता है। वे जल्दी से परमेश्वर की उपस्थिति में प्रार्थना करने के लिए घुटने टेक देते हैं, और पश्चात्ताप के आँसू बहाते हुए परमेश्वर से क्षमा माँगते हैं। हर किसी में कमजोरियाँ होती हैं : तुम यह नहीं कह सकते कि यह एक लालची व्यक्ति है—यह केवल एक भ्रष्ट स्वभाव प्रदर्शित होने का मामला है। कुछ लोग दूसरों की आलोचना करना पसंद करते हैं। वे कहेंगे : "इस आदमी ने कलीसिया के पैसे में से कुछ युआन खर्च कर दिए, लेकिन वह अभी भी परमेश्वर की उपस्थिति में प्रार्थना करने नहीं आया। अगली बार वह दर्जनों युआन खर्च करेगा। यह एक लालची आदमी है!" इस तरह से बात करना ठीक नहीं है। जब लोगों के स्वभाव भ्रष्ट हैं, तो उनमें सामान्य कमजोरियाँ होना तय है। कुछ मानवीय कमजोरियाँ भी उनके भ्रष्ट स्वभाव का हिस्सा होती हैं, लेकिन एक भ्रष्ट स्वभाव और उस तरह की प्रकृति के बीच अंतर होता है। तुम इन दोनों को एक ही लाठी से नहीं हाँक सकते या मनमाने ढंग से लोगों की आलोचना नहीं कर सकते। दूसरों की आलोचना करना उन्हें सबसे ज्यादा नुकसान पहुँचाता है। अगर तुम चीजों में स्पष्ट रूप से भेद नहीं कर सकते या उन्हें स्पष्ट रूप से नहीं देख सकते, तो निराधार दावे करने से बचो, ताकि लोगों को चोट न पहुँचे। सत्य को समझे बिना बोलना और कार्य करना असैद्धांतिक है और इससे न तो दूसरों को और न ही स्वयं को कोई लाभ होता है।

— "अंत के दिनों के मसीह की बातचीत के अभिलेख" में 'समझना ही होगा कि लोगों की प्रकृतियों में समानताएँ भी हैं और भिन्नताएँ भी' से उद्धृत

प्रकृति के मामले केवल कमजोरी के क्षण में की गई चीजें नहीं होते, बल्कि पूरे जीवन में बने रहते हैं। व्यक्ति जो कुछ भी करता है, उसमें उसकी गंध होती है, उसकी प्रकृति के तत्त्व होते हैं। भले ही वे तत्त्व कभी-कभी स्पष्ट न दिखते हों, तो भी वे उसके भीतर मौजूद होते हैं। उदाहरण के लिए, जब कोई धोखेबाज व्यक्ति कभी ईमानदारी से बोलता है, तो भी उसकी बोली में वास्तव में एक दूसरी बोली होती है और उसमें धोखेबाजी मिश्रित होती है। एक धोखेबाज़ व्यक्ति किसी पर भी अपनी चालें आज़माता है, वह अपने रिश्तेदारों—यहां तक कि अपने बच्चे भी नहीं छोड़ता है। भले ही तू उसके साथ कितने भी साफ़दिल से पेश आ, वह तेरे साथ चाल चलने की कोशिश करेगा। यह उसके स्वभाव का असली चेहरा है, और वह इसी प्रकृति का व्यक्ति है। इसे बदलना मुश्किल है और वह हर समय इसी तरह रहता है। ईमानदार लोग कभी-कभी धूर्त और धोखेबाज़ शब्द कह सकते हैं, लेकिन ऐसा व्यक्ति आम तौर पर ईमानदार रहता है; वह दूसरों के साथ अपने संबंधों में बिना उनका अनुचित लाभ उठाए ईमानदारी से काम करता है। जब वह अन्य लोगों के साथ बात करता है, तो वह उन्हें आज़माने के लिए जानबूझकर कुछ बातें नहीं बोलता है; वह खुले दिल से दूसरों के साथ संवाद कर सकता है और हर कोई कहता है कि वह काफ़ी ईमानदार है। कभी ऐसे समय होते हैं जब वह थोड़ी-बहुत धोखेबाज़ी से बात करता है; वह केवल एक दूषित स्वभाव का प्रकटन है और यह उसकी प्रकृति का प्रतिनिधित्व नहीं करता, क्योंकि वह कोई धोखेबाज़ व्यक्ति नहीं है। जब किसी व्यक्ति के स्वभाव की बात आती है तो तुम्हें यह समझना चाहिए कि उस स्वभाव के क्या तत्व हैं और भ्रष्ट स्वभाव क्या होता है; तुम्हें दोनों के बीच स्पष्ट रूप से अंतर करने में सक्षम होना चाहिए।

— "अंत के दिनों के मसीह की बातचीत के अभिलेख" में 'मनुष्य का स्वभाव कैसे जानें' से उद्धृत

अपने स्वभाव को समझना मुख्य रूप से यह समझना है कि तुम किस प्रकार के व्यक्ति हो। तुम जिस तरह के व्यक्ति हो उससे पता चलता है कि तुम्हारा किस प्रकार का स्वभाव है। उदाहरण के लिए, यह कहना कि वह व्यक्ति ऐसा या वैसा है उसके स्वभाव का वर्णन करता है। किसी व्यक्ति के स्वभाव का प्रकार यह निर्धारित करता है कि वह किस प्रकार का व्यक्ति है। किसी व्यक्ति का स्वभाव उसका जीवन है। तुम यह कैसे देखते हो कि किसी व्यक्ति का स्वभाव कैसा है? तुम्हें उसके संपर्क में अधिक आना पड़ता है और यह आकलन करने में अधिक समय खर्च करना पड़ता है कि वह किस प्रकार का व्यक्ति है। जो कुछ भी उसमें सबसे प्रमुख है और उसके सार और विशेषताओं का प्रतिनिधित्व करता है, उसे उसका स्वभाव और सार कहा जा सकता है। एक मनुष्य के सार का चरित्र उसके स्वभाव का चरित्र है। जब हम यह देखना चाहते हैं कि कोई व्यक्ति वास्तव में किस तरह का है, तो उसे इस तरह से देखना अधिक सही होता है। जो भी मनुष्य का सार है, वह उसका स्वभाव है। कोई व्यक्ति किस प्रकार का है, यह उसके स्वभाव द्वारा निर्धारित किया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी व्यक्ति की सबसे प्रमुख विशेषता यह है कि उसे विशेष रूप से पैसों से प्रेम है, तो उसके स्वभाव का सारांश करके उसे दो शब्दों में धन-प्रेमी कहा जा सकता है। यदि किसी व्यक्ति की सबसे प्रमुख विशेषता महिलाओं से प्रेम करना है—और वह हमेशा औरतबाजी में लिप्त रहता है—तो उसे बुराई से प्रेम है और उसका स्वभाव बुरा है। कुछ लोगों को खाना-पीना सबसे अधिक पसंद होता है। यदि तुम ऐसे व्यक्ति को थोड़ी मदिरा पिला दोगे और कुछ मांस खाने को दे दोगे या उसके लिए कुछ अच्छे भोजन की व्यवस्था कर दोगे, तो वह तुम्हारे पक्ष में काम करेगा; तो इस व्यक्ति का पेटू स्वभाव है। हर व्यक्ति का अपना एक घातक दोष होता है, जो उसके जीवन के हर पल में अपना प्रभाव डालता है और उस व्यक्ति की हर चीज में सम्मिलित रहता है, और जो कुछ भी वह करता है उसका लक्ष्य बन जाता है। वह चीज उस व्यक्ति के स्वभाव का प्रतिनिधित्व करने लगती है और ऐसा कहा जा सकता है कि उसका स्वभाव उसका सबसे घातक पक्ष है। उसका घातक दोष उसका स्वभाव है। कुछ लोगों में संतोषजनक मानवता होती है और वे ऊपर से किसी भी प्रमुख खामी को नहीं दिखाते हैं, लेकिन उनका विशिष्ट गुण दुर्बलता होता है। उनके जीवन के कोई लक्ष्य या आकांक्षाएं नहीं होती हैं और वे केवल अव्यवस्थित रूप से जीवन जीते रहते हैं। यदि कोई उनको कुछ चोट पहुँचाने वाली बात बोल दे, तो वे झट-से धराशायी हो जाते हैं, और वे किसी भी बात के कारण किसी भी समय नकारात्मक हो जाते हैं, इस हद तक कि वे अब परमेश्वर पर भी विश्वास नहीं करना चाहते। ऐसे लोगों का अनोखा गुण क्षण-भंगुरता होता है, और उनका स्वभाव एक असहाय कायर की तरह होता है। कुछ लोग बेहद भावुक स्वभाव के होते हैं। वे हर दिन जो कुछ कहते हैं और करते हैं, और अपने समूचे व्यवहार में, वे भावनाओं की दुनिया में रहते हैं। वे किसी न किसी व्यक्ति के लिए स्नेह महसूस करते रहते हैं और उन्हें हर दिन उस व्यक्ति का एहसान चुकाना होता है और उसके लिए अच्छी भावनाएं प्रकट करनी होती हैं; वे जो कुछ भी करते हैं एक भावनात्मक दुनिया में जीते हुए करते हैं। जब ऐसे व्यक्ति का कोई अविश्वासी रिश्तेदार मर जाता है तो भी वे तीन दिन तक रोते रहते हैं। अन्य व्यक्ति उसे दफ़नाना चाहते हैं, लेकिन वह उन्हें ऐसा नहीं करने देता, उसके मन में अब भी मृतक के लिए भावनाएं हैं : उसकी भावनाएं बहुत तीव्र होती हैं। तुम कह सकते हो कि भावनाएं उसके घातक दोष हैं, उसकी सबसे बड़ी कमजोरी जो पूरी तरह से उसका विनाश कर सकती हैं और उसे बर्बाद कर सकती है। अत्यधिक तीव्र भावनाएँ उसे सत्य का अभ्यास करने से रोकती हैं, और यह दिखाता है कि वह सत्य के बिना है और सिद्धांत के बिना कार्य करता है। वह केवल देह के लिए चिंता दर्शाता है; वह मूर्ख और उलझा हुआ है। भावनाओं को विशेष महत्व देना और भावावेश के अनुसार जीना उसकी प्रकृति है। इसलिए यदि तुम अपने स्वभाव में बदलाव लाना चाहते हो, तो तुम्हें अपने स्वभाव को पहचानना होगा। "नदियों और पहाड़ों को बदलना आसान है, लेकिन किसी व्यक्ति के स्वभाव को बदलना बहुत मुश्किल है।" यदि किसी का स्वभाव बहुत बुरा है तो वह कभी नहीं बदलेगा, और परमेश्वर उसे नहीं बचाएगा।

— "अंत के दिनों के मसीह की बातचीत के अभिलेख" में 'मनुष्य का स्वभाव कैसे जानें' से उद्धृत

दुष्टात्मा लोग वे हैं, जो सत्य का अभ्यास नहीं करते; उनका सार प्रतिरोध करना और परमेश्वर की अवज्ञा करना है और उनमें परमेश्वर के समक्ष समर्पण की लेशमात्र भी इच्छा नहीं है। ऐसे सभी लोग नष्ट किए जाएँगे। तुम्हारे पास सत्य है या नहीं और तुम परमेश्वर का प्रतिरोध करते हो या नहीं, यह तुम्हारे प्रकटन पर या तुम्हारी कभीकभार की बातचीत और आचरण पर नहीं बल्कि तुम्हारे सार पर निर्भर है। प्रत्येक व्यक्ति का सार तय करता है कि उसे नष्ट किया जाएगा या नहीं; यह किसी के व्यवहार और किसी की सत्य की खोज द्वारा उजागर हुए सार के अनुसार तय किया जाता है। उन लोगों में जो कार्य करने में एक दूसरे के समान हैं, और जो समान मात्रा में कार्य करते हैं, जिनके मानवीय सार अच्छे हैं और जिनके पास सत्य है, वे लोग हैं जिन्हें रहने दिया जाएगा, जबकि वे जिनका मानवीय सार दुष्टता भरा है और जो दृश्यमान परमेश्वर की अवज्ञा करते हैं, वे विनाश की वस्तु होंगे। परमेश्वर के सभी कार्य या मानवता के गंतव्य से संबंधित वचन प्रत्येक व्यक्ति के सार के अनुसार उचित रूप से लोगों के साथ व्यवहार करेंगे; थोड़ी-सी भी त्रुटि नहीं होगी और एक भी ग़लती नहीं की जाएगी। केवल जब लोग कार्य करते हैं, तब ही मनुष्य की भावनाएँ या अर्थ उसमें मिश्रित होते हैं। परमेश्वर जो कार्य करता है, वह सबसे अधिक उपयुक्त होता है; वह निश्चित तौर पर किसी प्राणी के विरुद्ध झूठे दावे नहीं करता। अभी बहुत से लोग हैं, जो मानवता के भविष्य के गंतव्य को समझने में असमर्थ हैं और वे उन वचनों पर विश्वास नहीं करते, जो मैं कहता हूँ। वे सभी जो विश्वास नहीं करते और वे भी जो सत्य का अभ्यास नहीं करते, दुष्टात्मा हैं!

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'परमेश्वर और मनुष्य साथ-साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे' से उद्धृत

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