120. किसी की प्रकृति और सार की पहचान करने के सिद्धांत

(1) किसी व्यक्ति की प्रकृति और सार को पहचानने के लिए, यह देखो कि अपनी पसंदों के मुताबिक वह अपनी तलाश में क्या हासिल करना चाहता है, किसकी उपासना करता है, और किस मार्ग पर चलता है;

(2) किसी व्यक्ति के स्वभाव और सार की पहचान करने के लिए, उसके सिलसिलेवार व्यवहार और स्वभाव के उन पहलुओं को देखो जिन्हें वह अक्सर प्रकट करता है, साथ ही साथ वह किसकी संगत में रहता है;

(3) किसी व्यक्ति के स्वभाव और सार की पहचान करने के लिए, उसकी कमज़ोरियों को, उसकी कण्डरा एड़ी को, और उस पर सबसे अधिक नियंत्रण जिस चीज़ का होता है, उसको देखो;

(4) किसी व्यक्ति के स्वभाव और सार को निर्धारित करने के लिए, चीज़ों पर उसके विचारों को, दुनिया के बारे में उसके नज़रिए को, जीवन के बारे में दृष्टिकोणों को, और जिन मूल्यों को वह कायम रखता है, उनको देखो।

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:

कोई भी अपना सच्चा चेहरा दर्शाने के लिए अपने स्वयं के शब्दों और क्रियाओं का उपयोग कर सकता है। यह सच्चा चेहरा निश्चित रूप से उसकी प्रकृति है। यदि तुम बहुत कुटिल ढंग से बोलने वाले व्यक्ति हो, तो तुम कुटिल प्रकृति के हो। यदि तुम्हारी प्रकृति धूर्त है, तो तुम कपटी ढंग से काम करते हो, और इससे तुम बहुत आसानी से लोगों को धोखा दे देते हो। यदि तुम्हारी प्रकृति अत्यंत कुटिल है, तो हो सकता है कि तुम्हारे वचन सुनने में सुखद हों, लेकिन तुम्हारे कार्य तुम्हारी कुटिल चालों को छिपा नहीं सकते हैं। यदि तुम्हारी प्रकृति आलसी है, तो तुम जो कुछ भी कहते हो, उस सबका उद्देश्य तुम्हारी लापरवाही और अकर्मण्यता के लिए उत्तरदायित्व से बचना है, और तुम्हारे कार्य बहुत धीमे और लापरवाह होंगे, और सच्चाई को छिपाने में बहुत माहिर होंगे। यदि तुम्हारी प्रकृति सहानुभूतिपूर्ण है, तो तुम्हारे वचन तर्कसंगत होंगे और तुम्हारे कार्य भी सत्य के अत्यधिक अनुरूप होंगे। यदि तुम्हारी प्रकृति निष्ठावान है, तो तुम्हारे वचन निश्‍चय ही खरे होंगे और जिस तरीके से तुम कार्य करते हो, वह भी व्यावहारिक और यथार्थवादी होगा, जिसमें ऐसा कुछ न होगा जिससे तुम्हारे मालिक को असहजता महसूस हो। यदि तुम्हारी प्रकृति कामुक या धन लोलुप है, तो तुम्हारा हृदय प्रायः इन चीजों से भरा होगा और तुम बेइरादा कुछ विकृत, अनैतिक काम करोगे, जिन्हें भूलना लोगों के लिए कठिन होगा और वे काम उनमें घृणा पैदा करेंगे।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'एक बहुत गंभीर समस्या : विश्वासघात (1)' से उद्धृत

तुम यह कैसे बता सकते हो कि किसी व्यक्ति का सार क्या है? यदि कोई व्यक्ति कुछ भी न करे या कोई मामूली काम करे तो तुम यह नहीं बता सकते कि उस व्यक्ति की प्रकृति और उसका सार क्या है। इन्हें उनके द्वारा उन बातों में दिखाया जाता है जिन्हें वे निरंतर उनके कार्यों के पीछे रहे इरादों में, वे जो भी करते हैं उनके पीछे रहे उद्देश्यों में, वे जो इच्छाएं रखते हैं और वे जिस राह पर चलते हैं उसमें दिखाया जाता है। उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है कि इन चीज़ों को उन प्रतिक्रियाओं में दिखाया जाता है जो वे तब देते हैं जब वे परमेश्वर द्वारा व्यवस्थित किसी परिवेश का सामना करते हैं, जब परमेश्वर द्वारा व्यक्तिगत रूप से उनके साथ कुछ जाता है, जब उनका परीक्षण और शुद्धिकरण किया जाता है, या उनसे निपटा जाता है या उनकी काट-छाँट की जाती है, या जब परमेश्वर व्यक्तिगत रूप से उनका प्रकाशन और मार्गदर्शन करता है। यह सब किन बातों से संबंधित है? यह एक व्यक्ति के कार्यों, उनके जीने के तरीक़ों और उन सिद्धांतों से संबंधित है जिनके द्वारा वे स्वयं का संचालन करते हैं। यह उनकी खोज की दिशा और लक्ष्यों से, और उन साधनों से जिनके माध्यम से वे आगे बढ़ते हैं से संबंधित है। दूसरे शब्दों में, यह उस राह से जिस पर वे चलते हैं, कैसे जीते हैं, वे किसके सहारे जीते हैं, और उनके अस्तित्व का आधार क्या है, इन सभी बातों से भी संबंधित है।

— "मसीह की बातचीत के अभिलेख" में 'पौलुस की प्रकृति और स्‍वभाव को कैसे पहचाना जाए' से उद्धृत

तुम मानव प्रकृति को कैसे समझते हो? अपनी प्रकृति को समझने का वास्तविक अर्थ है अपनी आत्मा की गहराई का विश्लेषण करना; इसमें वह शामिल है जो तुम्हारे जीवन में है। यही शैतान का तर्क और शैतान के दृष्टिकोण हैं जिनके अनुसार तुम जीते आ रहे हो। केवल अपने आत्मा के गहरे हिस्सों को निकाल करके ही तुम अपनी प्रकृति को समझ सकते हो। इन चीज़ों को कैसे निकाला जा सकता है? मात्र एक या दो घटनाओं द्वारा, उन्हें निकाला और विश्लेषित नहीं किया जा सकता; कई बार काम ख़त्म कर लेने के बाद भी तुम्हारे पास कोई समझ नहीं होती। थोड़ी-सी भी पहचान और समझ प्राप्त कर सकने में तीन या पाँच वर्ष लग सकते हैं। बहुत सी परिस्थितियों में, तुम्हें खुद पर मनन कर खुद को जानना चाहिए। जब तुम गहराई तक खोदने का अभ्यास करोगे तभी तुम परिणाम पाओगे। जैसे-जैसे सत्य की तुम्हारी समझ ज़्यादा से ज़्यादा गहरी होती जायेगी, तुम धीरे-धीरे अपने सार और प्रकृति को आत्म-मंथन एवं आत्मज्ञान द्वारा जान जाओगे। अपनी प्रकृति को समझने के लिए, तुम्हें कुछ चीज़ों को अवश्य करना चाहिए: सबसे पहले, तुम्हें इस बात की स्पष्ट समझ होनी चाहिए कि तुम्हें क्या पसंद है। इसका तात्पर्य यह नहीं है कि तुम क्या खाना या पहनना पसंद करते हो; बल्कि इसका मतलब है कि तुम किस तरह की चीज़ों का आनन्द लेते हो, किन चीज़ों से तुम ईर्ष्या करते हो, किन चीज़ों की तुम आराधना करते हो, किन चीज़ों की तुम्हें तलाश है, और किन चीज़ों की ओर तुम अपने हृदय में ध्यान देते हो, जिस प्रकार के लोगों के संपर्क में आने का तुम आनन्द लेते हो, जिस प्रकार की चीज़ें तुम करना चाहते हो, और जिस प्रकार के लोगों को तुम अपने हृदय में आदर्श मानते हो। ... शायद तुम कुछ समय के लिए किसी के प्रति अच्छे हो, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि तुम उन के चाहने वाले हो। जिसके तुम वाकई शौकीन हो, वह ठीक वो है जो तुम्हारी प्रकृति में है; भले ही तुम्हारी हड्डियाँ टूट गयी हों, तुम फिर भी उसका आनंद लोगे और कभी भी इसे त्याग नहीं पाओगे। इसे बदलना आसान नहीं है। उदाहरण के लिए एक साथी को ढूँढने की बात लो। यदि कोई महिला वास्तव में किसी के प्यार में पड़ जाए, तो कोई भी उसे रोक नहीं पाएगा। यहाँ तक कि अगर उसकी टांग भी तोड़ दी जाये, तब भी वह उसके साथ ही रहना चाहेगी; अगर उसे उसके साथ विवाह करने का अर्थ उस महिला की मृत्यु हो तो भी वह विवाह करना चाहेगी। यह कैसे हो सकता है? इसका कारण यह है कि कोई भी व्यक्ति उसे नहीं बदल सकता जो लोगों के अंदर गहराई में होता है। यहाँ तक कि अगर कोई मर भी जाए, तो भी उसकी आत्मा बस वही चीज़ें ले जाएगी; ये चीजें मानव प्रकृति की हैं, और वे किसी व्यक्ति के सार का प्रतिनिधित्व करती हैं।

— "मसीह की बातचीत के अभिलेख" में 'स्वभाव बदलने के बारे में क्या जानना चाहिए' से उद्धृत

अपने स्वयं के स्वभाव को समझना क्या है? इसे कैसे जाना जा सकता है? किन पहलुओं से इसे जाना जा सकता है? इसके अलावा, एक व्यक्ति जिन चीज़ों को प्रकट करता है, उसके माध्यम से किसी की प्रकृति को विशिष्ट रूप से कैसे देखा जाना चाहिए? सबसे पहले, तुम मनुष्य की प्रकृति को उसकी रुचि के माध्यम से देख सकते हो। उदाहरण के लिए, कुछ लोगों को नृत्य करना विशेष रूप से पसंद है, कुछ लोगों को विशेष रूप से गायक या फ़िल्मी सितारे पसंद हैं, कुछ लोग विशेष रूप से कुछ निश्चित प्रसिद्ध लोगों को आदर्श मानते हैं। इन रुचियों से हम देख सकते हैं कि इन लोगों की प्रकृति क्या है। उदाहरण के तौर पर : कुछ लोग किसी गायक को आदर्श मान सकते हैं, यहाँ तक कि इस हद तक कि जहाँ वे गायक की हर हरकत, हर मुस्कान, और हर शब्द के प्रति आसक्त हो जाते हैं। वे गायक पर ध्यान लगाए रहते हैं, उस हर चीज़ की तस्वीर खींचते हैं जो गायक पहनता है और उसकी नक़ल करते हैं। इस स्तर का आदर्शीकरण इस व्यक्ति की प्रकृति के बारे में क्या दर्शाता है? यह दर्शाता है कि ऐसे व्यक्ति के हृदय में केवल वही चीज़ें हैं, परमेश्वर नहीं। वे सभी बातें जो यह व्यक्ति सोचता है, प्यार करता है, और खोजता है, पूरी तरह से शैतान की हैं; वे इस व्यक्ति के हृदय पर कब्ज़ा कर लेती हैं, जिसे उन चीज़ों को अर्पित कर दिया जाता है। यहाँ क्या समस्या है? अगर किसी चीज़ को चरम सीमा तक प्रेम किया जाता है, तो वह चीज़ किसी का जीवन बन सकती है और उसके हृदय पर कब्ज़ा कर सकती है, पूरी तरह से यह साबित करती है कि वह व्यक्ति एक मूर्ति पूजक है जो परमेश्वर को नहीं चाहता है और उसके बजाय शैतान से प्यार करता है। इसलिए, हम यह निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि ऐसे व्यक्ति की प्रकृति ऐसे व्यक्ति की होती है जो शैतान से प्रेम करता है और उसकी आराधना करता है, सच्चाई से प्रेम नहीं करता है, और परमेश्वर को नहीं चाहता है। क्या यह किसी व्यक्ति की प्रकृति को देखने का सही तरीका नहीं है? यह पूरी तरह सही है। यही वह तरीका है जिससे मनुष्य की प्रकृति का विश्लेषण किया जाता है। उदाहरण के लिए, कुछ लोग विशेष रूप से पौलुस को आदर्श मानते हैं। उन्हें बाहर जा कर भाषण देना और कार्य करना पसंद होता है, उन्हें सभाओं में भाग लेना और प्रचार करना पसंद होता है; उन्हें अच्छा लगता है जब लोग उन्हें सुनते हैं, उनकी आराधना करते हैं और उनके चारों ओर घूमते हैं। उन्हें पसंद होता है कि दूसरों के मन में उनकी एक हैसियत हो, और जब दूसरे उनके द्वारा प्रदर्शित छवि को महत्व देते हैं, तो वे उसकी सराहना करते हैं। आओ हम इन व्यवहारों से उनकी प्रकृति का विश्लेषण करें: उनकी प्रकृति कैसी है? यदि वे वास्तव में इस तरह से व्यवहार करते हैं, तो यह इस बात को दर्शाने के लिए पर्याप्त है कि वे अहंकारी और दंभी हैं। वे परमेश्वर की आराधना तो बिल्कुल नहीं करते हैं; वे ऊँची हैसियत की तलाश में रहते हैं और दूसरों पर अधिकार रखना चाहते हैं, उन पर अपना कब्ज़ा रखना चाहते हैं, उनके दिमाग में एक हैसियत प्राप्त करना चाहते हैं। यह शैतान की विशेष छवि है। उनकी प्रकृति के पहलू जो अलग से दिखाई देते हैं, वे हैं उनका अहंकार और दंभ, परेमश्वर की आराधना करने की अनिच्छा, और दूसरों के द्वारा आराधना किए जाने की इच्छा। ऐसे व्यवहारों से तुम उनकी प्रकृति को स्पष्ट रूप से देख सकते हो। उदाहरण के लिए, कुछ लोगों को दूसरों का लाभ उठाना विशेष रूप से पसंद है और वे हर चीज़ में अपना ही हित देखते हैं। जो भी वे करें उस से उन्हें लाभ मिलना चाहिए वरना वे उसे नहीं करेंगे। जब तक कि किसी चीज़ में उन्हें लाभ न मिलता हो, वे उस पर ध्यान नहीं देते हैं, और हर चीज़ के लिए उनका उद्देश्य गलत होता है। जो उनके लिए लाभदायक होता है, वे उसकी प्रशंसा करते हैं और जो उनकी चापलूसी करता है, वे उसकी तारीफ़ करते नहीं थकते। यहाँ तक कि अगर उनके पसंदीदा लोगों में कुछ समस्या होती है, तो भी वे कहते हैं कि उनके पसंदीदा व्यक्ति सही हैं और उनकी रक्षा करने में और उनका बचाव करने के लिए पूरा प्रयास करते हैं। इस तरह के व्यक्ति का क्या स्वभाव है? क्या तुम उनके स्वभाव को स्पष्ट रूप से इन व्यवहारों में देख सकते हो? वे अपने कार्यों के माध्यम से अनुचित लाभ लेने का प्रयास करते हैं और हर समय और हर जगह लेन-देन के व्यवहार में संलग्न रहते हैं, इसलिए तुम यह निश्चित रूप से कह सकते हो कि उनके स्वभाव में लाभ के लिए तहेदिल से लालच है। वे हर चीज़ में स्वयं के बारे में सोचते हैं। अगर उन्हें कोई लाभ नहीं होगा, तो वे जल्दी नहीं उठेंगे। वे सबसे स्वार्थी, अतृप्त लोगों में से होते हैं, इसलिए उनका स्वभाव धन से प्रेम करने का होता है और सत्य से प्रेम करने का नहीं। क्या यह उनके स्वभाव का प्रतिनिधित्व नहीं करता है? कुछ लोग महिलाओं से मोहित रहते हैं, हमेशा हर चीज़ में महिलाओं के बारे में सोचते हैं, जहाँ वे जाती हैं उनका पीछा करते हैं। सुंदर महिलाएं ऐसे व्यक्ति की चाहत का उद्देश्य होती हैं और उसके दिल में उनका सम्मान बहुत अधिक होता है। वह सुंदर महिलाओं के लिए अपना जीवन देने के लिए तैयार रहता है। वह कुछ भी त्याग कर सकता है—केवल महिलाएं ही उसके दिल में रहती हैं। उसका स्वभाव क्या है? उसका स्वभाव है महिलाओं से प्रेम करना और उनकी पूजा करना, इसलिए वह बुरे, लालची स्वभाव वाला एक अय्याश व्यक्ति है। क्या यह उसका स्वभाव नहीं है? उसका व्यवहार एक लालची स्वभाव प्रकट करता है—वह केवल कभी-कभी गलत राह पर नहीं चलता या केवल कभी-कभी सामान्य लोगों से ज़्यादा बदतर व्यवहार नहीं करता—बल्कि उसका दिल पहले से ही इन चीज़ों से पूरी तरह से भरा रहता है, जो उसका स्वभाव, उसका सार बन गई हैं। इस प्रकार, ये चीज़ें उसके स्वभाव की अभिव्यक्तियां बन गई हैं।

— "मसीह की बातचीत के अभिलेख" में 'मनुष्य का स्वभाव कैसे जानें' से उद्धृत

अपने स्वभाव को समझना मूल रूप से यह समझना है कि तुम किस प्रकार के व्यक्ति हो। तुम जिस तरह के व्यक्ति हो उस प्रकार का तुम्हारा स्वभाव है। उदाहरण के लिए, यह कहना कि वह व्यक्ति उस प्रकार का है उसके स्वभाव का वर्णन करता है। उसके स्वभाव का प्रकार यह निर्धारित करता है कि वह किस प्रकार का व्यक्ति है। एक व्यक्ति का जीवन केवल उसका स्वभाव है। तुम कैसे देखते हो कि एक व्यक्ति का स्वभाव कैसा है? तुम्हें उसके संपर्क में अधिक आना चाहिए और अधिक देखना चाहिए कि वह कैसा व्यक्ति है। जो कुछ भी उसमें सबसे प्रमुख है और उसके सार और विशेषताओं का प्रतिनिधित्व करता है, उसे उसका स्वभाव और सार कहा जा सकता है। एक मनुष्य के सार का चरित्र उसके स्वभाव का चरित्र है। जब हम यह देखना चाहते हैं कि कोई व्यक्ति वास्तव में किस तरह का है, तो उसे इस तरह से देखना अधिक सटीक होता है। जो भी मनुष्य का सार है, वह उसका स्वभाव है। एक व्यक्ति किस प्रकार का है, वह उसके स्वभाव द्वारा निर्धारित किया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी व्यक्ति की सबसे प्रमुख विशेषता यह है कि वह विशेष रूप से पैसा पसंद करता है, तो उसके स्वभाव का सारांश करके दो शब्दों में धन-प्रेमी कहा जा सकता है। यदि किसी व्यक्ति की सबसे प्रमुख विशेषता महिलाओं से प्रेम करना है—वह हमेशा व्याभिचार में लिप्त रहता है—तो उसे बुराई से प्रेम है और उसका स्वभाव बुरा है। कुछ लोगों को सबसे अधिक खाना पसंद है। यदि तुम ऐसे व्यक्ति को थोड़ी मदिरा पिला दोगे और कुछ मांस खाने को दे दोगे या उसके लिए कुछ अच्छे भोजन की व्यवस्था कर दोगे, तो वह तुम्हारे पक्ष में काम करेगा; तो इस व्यक्ति का पेटू स्वभाव है, बिल्कुल सुअर की तरह। हर व्यक्ति का अपना घातक दोष है, जो उसके जीवन के हर पल में अपना प्रभाव रखता है और उस व्यक्ति के बारे में हर चीज़ में सम्मिलित होता है और जो कुछ वह करता है वह उसका उद्देश्य बन जाता है। वह चीज़ उस व्यक्ति के स्वभाव का प्रतिनिधित्व करती है और तुम कह सकते हो कि उसका स्वभाव उसकी सबसे बड़ी कमज़ोरी है। उसका घातक दोष उसका स्वभाव है। कुछ लोगों में अच्छी मानवता होती है और वे सतह पर किसी भी प्रमुख खामी को नहीं दिखाते हैं, लेकिन उनका उत्कृष्ट गुण नाज़ुकपन होता है। उनके जीवन के कोई लक्ष्य या आकांक्षाएं नहीं होती हैं और वे केवल अव्यवस्थित रूप से जीवन काटते हैं। यदि तुम उनको कुछ चोट पहुँचाने वाली बातें बोल देते हो, तो वे अलग हो जाते हैं, और वे एक या दूसरी बात के कारण किसी भी समय नकारात्मक हो जाते हैं, इस हद तक कि वे अब विश्वास नहीं करना चाहते। ऐसे लोगों का अनोखा गुण नाज़ुकपन होता है, और उनका स्वभाव एक असहाय कायर की तरह होता है। कुछ लोग बेहद भावुक स्वभाव के होते हैं। वे हर दिन जो कहते हैं और करते हैं और उनका आचरण भावनाओं की दुनिया में रहता है। वे किसी न किसी व्यक्ति के लिए स्नेह महसूस करते हैं और उन्हें हर दिन उस व्यक्ति का एहसान चुकाना होता है और उसके लिए अच्छी भावनाएं प्रकट करनी होती हैं; जो कुछ वे करते हैं वे भावनात्मक दायरे में होती हैं। ऐसे व्यक्ति की भावना कितनी भारी होती है! कुछ औरतें ऐसी होती हैं, जब उनका अविश्वासी पति मर जाता है तो भी वे तीन दिन तक रोती हैं। अन्य व्यक्ति उसे दफ़नाना चाहते हैं, लेकिन वह फिर भी कहती है, "नहीं, वह मेरा पति है।" वह एक मरे हुए व्यक्ति के लिए भी भावनाएं रखती है, उसकी भावनाएं बहुत तीव्र होती हैं। तुम कह सकते हो कि भावनाएं उसके घातक दोष हैं, उसकी सबसे बड़ी कमज़ोरी जो पूरी तरह से उसका विनाश कर सकती हैं और उसे बर्बाद कर सकती है। अत्यधिक तीव्र भावनाओं का मतलब है कि वह सत्य के बिना है और सिद्धांत के बिना कार्य करती है। वह केवल देह के लिए चिंता दर्शाती है और एक मूर्ख और उलझी हुई व्यक्ति है। भावनाओं को विशेष महत्व देना उसका स्वभाव है। यदि तुम अपने स्वभाव को बदलना चाहते हो, तो तुम्हें अपने स्वभाव को पहचानना होगा।

— "मसीह की बातचीत के अभिलेख" में 'मनुष्य का स्वभाव कैसे जानें' से उद्धृत

जब मनुष्य की प्रकृति को पहचानने की बात आती है, तो सबसे महत्वपूर्ण बात इसे मनुष्य के विश्व दृष्टिकोण, जीवन के दृष्टिकोण, और मूल्यों के परिप्रेक्ष्य से देखना है। जो लोग शैतान के हैं वे स्वयं के लिए जीते हैं। उनके जीवन के दृष्टिकोण और सिद्धांत मुख्यत: शैतान की कहावतों से आते हैं, जैसे कि "स्वर्ग उन लोगों को नष्ट कर देता है जो स्वयं के लिए नहीं हैं।" पृथ्वी के उन पिशाच राजाओं, महान लोगों और दार्शनिकों द्वारा बोले गए वचन मनुष्य का जीवन बन गए हैं। विशेष रूप से, कन्फ़्यूशियस, जिसके बारे में चीनी लोगों द्वारा "ऋषि" के रूप में शेखी बघारी जाती है, के अधिकांश वचन, मनुष्य का जीवन बन गए हैं। बौद्ध धर्म और ताओवाद की मशहूर कहावतें, और प्रसिद्ध व्यक्तियों की अक्सर उद्धृत की गई विशेष कहावते हैं; ये सभी शैतान के फ़लसफों और शैतान की प्रकृति की रूपरेखाएँ हैं। वे शैतान की प्रकृति के सबसे अच्छे उदाहरण और स्पष्टीकरण भी हैं। ये विष, जिन्हें मनुष्य के हृदय में डाल दिया गया है, सब शैतान से आते हैं; उनमें से एक छोटा सा अंश भी परमेश्वर से नहीं आता है। ये शैतानी वचन भी परमेश्वर के वचन के बिल्कुल विरुद्ध हैं। यह पूरी तरह से स्पष्ट है कि सभी सकारात्मक चीज़ों की वास्तविकता परमेश्वर से आती है, और वे सभी नकारात्मक चीज़ें जो मनुष्य में विष भरती हैं, वे शैतान से आती हैं। इसलिए, तुम किसी व्यक्ति की प्रकृति को और वह किससे संबंधित है इस बात को उसके जीवन के दृष्टिकोण और मूल्यों से जान सकते हो। शैतान राष्ट्रीय सरकारों और प्रसिद्ध एवं महान व्यक्तियों की शिक्षा और प्रभाव के माध्यम से लोगों को दूषित करता है। उनके शैतानी शब्द मनुष्य के जीवन-प्रकृति बन गए हैं। "स्वर्ग उन लोगों को नष्ट कर देता है जो स्वयं के लिए नहीं हैं" एक प्रसिद्ध शैतानी कहावत है जिसे हर किसी में डाल दिया गया है और यह मनुष्य का जीवन बन गया है। जीने के लिए दर्शन के कुछ अन्य शब्द भी हैं जो इसी तरह के हैं। शैतान प्रत्येक देश की उत्तम पारंपरिक संस्कृति के माध्यम से लोगों को शिक्षित करता है और मानवजाति को विनाश की विशाल खाई में गिरने और उसके द्वारा निगल लिए जाने पर मजबूर कर देता है, और अंत में परमेश्वर लोगों को नष्ट कर देता है क्योंकि वे शैतान की सेवा करते हैं और परमेश्वर का विरोध करते हैं। कल्पना करो कि समाज में कई वर्षों से सक्रिय व्यक्ति से कोई यह प्रश्न पूछे : "चूँकि तुम इतने लंबे समय से दुनिया में रहे हो और इतना कुछ हासिल किया है, ऐसी कौन-सी मुख्य प्रसिद्ध कहावतें हैं जिनके अनुसार तुम लोग जीते हो?" शायद वह कहे, "सबसे महत्वपूर्ण कहावतें यह हैं कि 'अधिकारी उपहार देने वालों को नहीं मार गिराते, और जो चापलूसी नहीं करते हैं वे कुछ भी हासिल नहीं करते हैं।'" क्या ये शब्द उस व्यक्ति की प्रकृति के स्वभाव का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं? पद पाने के लिए अनैतिक साधनों का इस्तेमाल करना उसकी प्रकृति बन गयी है, और अधिकारी होना ही उसे जीवन देता है। अभी भी लोगों के जीवन में, और उनके आचरण और व्यवहार में कई शैतानी विष उपस्थित हैं—उनमें बिलकुल भी कोई सत्य नहीं है। उदाहरण के लिए, उनके जीवन दर्शन, काम करने के उनके तरीके, और उनकी सभी कहावतें बड़े लाल अजगर के विष से भरी हैं, और ये सभी शैतान से आते हैं। इस प्रकार, सभी चीजें जो लोगों की हड्डियों और रक्त में बहें, वह सभी शैतान की चीज़ें हैं। उन सभी अधिकारियों, सत्ताधारियों और प्रवीण लोगों के सफलता पाने के अपने ही मार्ग और रहस्य होते हैं, तो क्या ऐसे रहस्य उनकी प्रकृति का उत्तम रूप से प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं? वे दुनिया में कई बड़ी चीज़ें कर चुके हैं और उन के पीछे उनकी जो चालें और षड्यंत्र हैं उन्हें कोई समझ नहीं पाता है। यह दिखाता है कि उनकी प्रकृति आखिर कितनी कपटी और विषैली है। शैतान ने मनुष्य को गंभीर ढंग से दूषित कर दिया है। शैतान का विष हर व्यक्ति के रक्त में बहता है, और यह देखा जा सकता है कि मनुष्य की प्रकृति दूषित, बुरी और प्रतिक्रियावादी है, शैतान के दर्शन से भरी हुई और उसमें डूबी हुई है—अपनी समग्रता में यह प्रकृति परमेश्वर के साथ विश्वासघात करती है। इसीलिए लोग परमेश्वर का विरोध करते हैं और परमेश्वर के विरूद्ध खड़े रहते हैं।

— "मसीह की बातचीत के अभिलेख" में 'मनुष्य का स्वभाव कैसे जानें' से उद्धृत

जब तक लोग परमेश्वर के कार्य का अनुभव नहीं कर लेते हैं और सत्य को प्राप्त नहीं कर लेते हैं, तब तक यह शैतान की प्रकृति है जो भीतर से इन पर नियंत्रण कर लेती है और उन पर हावी हो जाती है। वह प्रकृति विशिष्ट रूप से किस चीज़ को अपरिहार्य बनाती है? उदाहरण के लिए, तुम स्वार्थी क्यों हो? तुम अपने पद की रक्षा क्यों करते हो? तुम्हारी भावनाएँ इतनी प्रबल क्यों हैं? तुम उन अधार्मिक चीज़ों से प्यार क्यों करते हो? ऐसी बुरी चीज़ें तुम्हें अच्छी क्यों लगती हैं? ऐसी चीजों को पसंद करने का आधार क्या है? ये चीज़ें कहाँ से आती हैं? तुम इन्हें स्वीकारकर इतने खुश क्यों हो? अब तक, तुम सब लोगों ने समझ लिया है कि इन सभी चीजों के पीछे मुख्य कारण यह है कि वे शैतान के जहर से युक्त हैं। जहाँ तक इस बात का प्रश्न है कि शैतान का जहर क्या है, इसे वचनों के माध्यम से पूरी तरह से व्यक्त किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, यदि तुम कुछ कुकर्मियों से पूछते हो उन्होंने बुरे कर्म क्यों किए, तो वे जवाब देंगे: "हर व्यक्ति अपनी सोचे बाकियों को शैतान ले जाये।" यह अकेला वाक्यांश समस्या की जड़ को व्यक्त करता है। शैतान का तर्क लोगों का जीवन बन गया है। भले वे चीज़ों को इस या उस उद्देश्य से करें, वे इसे केवल अपने लिए ही कर रहे होते हैं। सब लोग सोचते हैं चूँकि जीवन का नियम, हर कोई बस अपना सोचे, और बाकियों को शैतान ले जाए, यही है, इसलिए उन्हें बस अपने लिए ही जीना चाहिए, एक अच्छा पद और ज़रूरत के खाने-कपड़े हासिल करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा देनी चाहिए। "हर व्यक्ति अपनी सोचे बाकियों को शैतान ले जाये"—यही मनुष्य का जीवन और फ़लसफ़ा है, और इंसानी प्रकृति का भी प्रतिनिधित्व करता है। यह कथन वास्तव में शैतान का जहर है और जब इसे मनुष्य के द्वारा आत्मसात कर लिया जाता है तो यह उनकी प्रकृति बन जाता है। इन वचनों के माध्यम से शैतान की प्रकृति उजागर होती है; ये पूरी तरह से इसका प्रतिनिधित्व करते हैं। और यही ज़हर मनुष्य के अस्तित्व की नींव बन जाता है और उसका जीवन भी, यह भ्रष्ट मानवजाति पर लगातार हजारों सालों से इस ज़हर के द्वारा हावी रहा है। शैतान जो कुछ भी करता है, वह उसके स्वयं के लिए होता है। यह परमेश्वर से परे जाना, परमेश्वर से मुक्त होना और स्वयं सामर्थ्य का प्रयोग करना, और उन सभी चीज़ों पर अपना आधिपत्य जमाना चाहता है जो परमेश्वर ने रची हैं। इसलिए, मनुष्यों की प्रकृति शैतान की प्रकृति है। वास्तव में, बहुत से लोगों के नीति-वाक्य उनकी प्रकृति के प्रतिनिधि और प्रतिबिंब बन सकते हैं। चाहे लोग खुद को छिपाने की कितनी भी कोशिश करें, जो कुछ भी वे करते हैं और हर बात जो वे कहते हैं, उनमें वे अपनी प्रकृति को छिपा नहीं सकते हैं। कुछ लोग ऐसे होते हैं जो कभी सच नहीं बोलते हैं और वे दिखावा करने में अच्छे होते हैं, लेकिन एक बार जब दूसरे लोग उनसे साथ थोड़ी देर बातचीत करते हैं, तो उनकी कपटी प्रकृति और अतिशय बेईमानी का खुलासा हो जाता है। अंत में, लोग एक निष्कर्ष पर पहुंचेंगे : ये लोग कभी एक शब्द भी सच नहीं बोलते, और वे धोखेबाज़ लोग हैं। यह कथन ऐसे व्यक्ति की प्रकृति को दर्शाता है; यह उनकी प्रकृति और सार का सर्वोत्तम चित्रण और प्रमाण है। उनके जीवन का फलसफ़ा है किसी को सच नहीं बताना, और किसी पर भी विश्वास नहीं करना। मनुष्य की शैतानी प्रकृति बड़ी मात्रा में फ़लसफ़े से युक्त है। कभी-कभी तुम स्वयं ही इसके बारे में अवगत नहीं होते हो और इसे नहीं समझते हो, मगर तुम्हारे जीवन का हर पल इस पर आधारित है। इसके अलावा तुम्हें लगता है कि यह फ़लसफ़ा बहुत सही है, बहुत उचित है और गलत नहीं है। यह इसका चित्रण करने के लिए काफी है कि शैतान का फ़लसफ़ा लोगों की प्रकृति बन गया है और वे पूरी तरह से शैतान के फ़लसफ़े के अनुसार जी रहे हैं और इसका जरा सा भी विद्रोह नहीं करते। इसलिए, वे लगातार शैतानी प्रकृति को प्रकट कर रहे हैं, और हर लिहाज़ से वे निरंतर शैतानी फ़लसफ़े के अनुसार जी रहे हैं। शैतान की प्रकृति मनुष्य का जीवन है।

— "मसीह की बातचीत के अभिलेख" में 'पतरस के मार्ग पर कैसे चलें' से उद्धृत

दुष्टात्मा लोग वे हैं, जो सत्य का अभ्यास नहीं करते; उनका सार प्रतिरोध करना और परमेश्वर की अवज्ञा करना है और उनमें परमेश्वर के समक्ष समर्पण की लेशमात्र भी इच्छा नहीं है। ऐसे सभी लोग नष्ट किए जाएँगे। तुम्हारे पास सत्य है या नहीं और तुम परमेश्वर का प्रतिरोध करते हो या नहीं, यह तुम्हारे प्रकटन पर या तुम्हारी कभीकभार की बातचीत और आचरण पर नहीं बल्कि तुम्हारे सार पर निर्भर है। प्रत्येक व्यक्ति का सार तय करता है कि उसे नष्ट किया जाएगा या नहीं; यह किसी के व्यवहार और किसी की सत्य की खोज द्वारा उजागर हुए सार के अनुसार तय किया जाता है। उन लोगों में जो कार्य करने में एक दूसरे के समान हैं, और जो समान मात्रा में कार्य करते हैं, जिनके मानवीय सार अच्छे हैं और जिनके पास सत्य है, वे लोग हैं जिन्हें रहने दिया जाएगा, जबकि वे जिनका मानवीय सार दुष्टता भरा है और जो दृश्यमान परमेश्वर की अवज्ञा करते हैं, वे विनाश की वस्तु होंगे। परमेश्वर के सभी कार्य या मानवता के गंतव्य से संबंधित वचन प्रत्येक व्यक्ति के सार के अनुसार उचित रूप से लोगों के साथ व्यवहार करेंगे; थोड़ी-सी भी त्रुटि नहीं होगी और एक भी ग़लती नहीं की जाएगी। केवल जब लोग कार्य करते हैं, तब ही मनुष्य की भावनाएँ या अर्थ उसमें मिश्रित होते हैं। परमेश्वर जो कार्य करता है, वह सबसे अधिक उपयुक्त होता है; वह निश्चित तौर पर किसी प्राणी के विरुद्ध झूठे दावे नहीं करता। अभी बहुत से लोग हैं, जो मानवता के भविष्य के गंतव्य को समझने में असमर्थ हैं और वे उन वचनों पर विश्वास नहीं करते, जो मैं कहता हूँ। वे सभी जो विश्वास नहीं करते और वे भी जो सत्य का अभ्यास नहीं करते, दुष्टात्मा हैं!

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'परमेश्वर और मनुष्य साथ-साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे' से उद्धृत

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775 तुम्हारी पीड़ा जितनी भी हो ज़्यादा, परमेश्वर को प्रेम करने का करो प्रयास

Iसमझना चाहिये तुम्हें कितना बहुमूल्य है आज कार्य परमेश्वर का।जानते नहीं ये बात ज़्यादातर लोग,सोचते हैं कि पीड़ा है बेकार:अपने विश्वास के लिए...

वचन देह में प्रकट होता है न्याय परमेश्वर के घर से शुरू होता है अंत के दिनों के मसीह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अत्यावश्यक वचन परमेश्वर के दैनिक वचन सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों का संकलन सत्य का अभ्यास करने के 170 सिद्धांत मेमने का अनुसरण करो और नए गीत गाओ जीवन में प्रवेश पर धर्मोपदेश और संगति अंत के दिनों के मसीह—उद्धारकर्ता का प्रकटन और कार्य राज्य का सुसमाचार फ़ैलाने के लिए दिशानिर्देश परमेश्वर की भेड़ें परमेश्वर की आवाज को सुनती हैं (नये विश्वासियों के लिए अनिवार्य चीजें) परमेश्वर की आवाज़ सुनो परमेश्वर के प्रकटन को देखो राज्य के सुसमाचार पर अत्यावश्यक प्रश्न और उत्तर (संकलन) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवों की गवाहियाँ विजेताओं की गवाहियाँ (खंड I) मैं वापस सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पास कैसे गया

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