33. बड़े लाल अजगर को त्यागने के सिद्धांत

(1) केवल उत्पीड़न और क्लेशों में डाले जाने के माध्यम से, कोई व्यक्ति स्पष्ट रूप से बड़े लाल अजगर के घिनौने चेहरे और उसके बुरे, प्रतिक्रियावादी सार को देख सकता है और अपने दिल से उससे घृणा कर सकता है।

(2) यह पहचानना आवश्यक है कि बड़े लाल अजगर के नास्तिकता, भौतिकवाद और विकास जैसे सभी सिद्धांत बुरे, प्रतिक्रियावादी और विकृत होते हैं।

(3) यह स्पष्ट रूप से देखने की आवश्यकता है कि बड़े लाल अजगर की असंख्य भ्रांतियों और उसके जहर ने चीन के लोगों को इस तरह छला है और भ्रष्ट कर दिया है कि वे घिनौने रूप से बदसूरत हो गए हैं और अब राक्षस और जानवर बन गए हैं।

(4) बड़े लाल अजगर को त्यागने के लिए, सत्य के एक बड़े अंश को समझना, बड़े लाल अजगर की चालाकियों को समझने में सक्षम होना, और अनुभव की सच्ची गवाही के साथ शैतान को अपमानित करना आवश्यक है।

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन :

बड़े लाल अजगर की अभिव्यक्ति मेरे प्रति प्रतिरोध, मेरे वचनों के अर्थों की समझ और बोध की कमी, बार-बार मेरा उत्पीड़न और मेरे प्रबंधन को बाधित करने के लिए षड़यंत्र करने की कोशिश करना है। शैतान इस प्रकार से अभिव्यक्त होता है: सामर्थ्य के लिए मेरे साथ संघर्ष करना, मेरे चुने हुए लोगों पर कब्ज़ा करने की इच्छा करना और मेरे लोगों को धोखा देने के लिए नकारात्मक बातें करना। शैतान (जो लोग मेरे नाम को स्वीकार नहीं करते, जो विश्वास नहीं करते, वे सभी शैतान हैं) की अभिव्यक्तियाँ इस प्रकार हैं: देह के सुखों की अभिलाषा करना, वासनाओं में लिप्त होना, शैतान के बंधन में रहना, कुछ लोगों द्वारा मेरा विरोध करना और कुछ के द्वारा मेरा समर्थन किया जाना (किन्तु यह साबित नहीं करना कि वे मेरे प्रिय पुत्र हैं)। महादूत की अभिव्यक्तियाँ इस प्रकार है: गुस्ताखी से बोलना, धर्मभ्रष्ट होना, लोगों को व्याख्यान देने के लिए प्रायः मेरा स्वर अपनाना, केवल बाहरी तौर पर मेरी नकल करना, जो मैं खाता हूँ वह खाना और जो मैं उपयोग करता हूँ उसका उपयोग करना; संक्षेप में, मेरे साथ बराबरी करने की इच्छा करना, महत्वाकांक्षी होना, किन्तु मेरी काबिलियत का अभाव और मेरा जीवन नहीं होना, और निकम्मा होना। शैतान, दुष्ट और महादूत, सभी बड़े लाल अजगर के विशिष्ट प्रदर्शन हैं, इसलिए जो लोग मेरे द्वारा पूर्वनियत और चयनित नहीं हैं, वे सभी बड़े लाल अजगर की संतान हैं: यह बिल्कुल ऐसा ही है! ये सभी मेरे दुश्मन हैं। (हालाँकि शैतान के व्यवधानों को बाहर रखा गया है। यदि तुम्हारी प्रकृति मेरी खूबी है, तो इसे कोई भी बदल नहीं सकता। क्योंकि तुम अभी भी देह में रहते हो, इसलिए कभी-कभी तुम्हें शैतान के प्रलोभनों का सामना करना पड़ेगा—यह अपरिहार्य है—किन्तु तुम्हें सदा सावधान रहना चाहिए।) इसलिए, मैं अपनी प्रथम संतानों के अतिरिक्त, बड़े लाल अजगर की सभी संतानों को त्याग दूँगा। उनकी प्रकृति कभी नहीं बदल सकती और यह शैतान का गुण है। वे लोग शैतान को अभिव्यक्त करते हैं और महादूत को जीते हैं। यह पूरी तरह सच है। जिस बड़े लाल अजगर की मैं बात करता हूँ वह बड़ा लाल अजगर नहीं है; बल्कि यह मेरी विरोधी दुष्ट आत्मा है, जिसके लिए "बड़ा लाल अजगर" एक समानार्थी है। इसलिए पवित्र आत्मा के अतिरिक्त सभी आत्माएँ दुष्ट आत्माएँ हैं और उन्हें बड़े लाल अजगर की संतान भी कहा जा सकता है। सभी को यह बात बिल्कुल स्पष्ट हो जाना चाहिए।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'आरंभ में मसीह के कथन' के 'अध्याय 96' से उद्धृत

चीन सभी देशों में सबसे पिछड़ा है; यह वह देश है जहाँ बड़ा लाल अजगर कुण्डली मारकर बैठा है, इसके पास ऐसे लोग सबसे अधिक हैं जो मूर्तियों की पूजा और जादू-टोने करते हैं, सबसे ज़्यादा मंदिर हैं, और यह ऐसा स्थान है जहाँ गंदी दुष्टात्माएँ निवास करती हैं। तुम इसी से जन्मे थे, तुम इसी के द्वारा शिक्षित हुए हो और इसके प्रभाव से तरबतर हुए थे; तुम इसके द्वारा भ्रष्ट और पीड़ित किए गए हो, परंतु जागृत होने के पश्चात तुम इसे त्याग देते हो और परमेश्वर द्वारा पूर्णत: प्राप्त कर लिए जाते हो। यह परमेश्वर की महिमा है, और यही कारण है कि कार्य के इस चरण का अत्यधिक महत्व है। परमेश्वर ने इतने बड़े पैमाने का कार्य किया है, इतने अधिक वचन बोले हैं, और वह अंततः तुम लोगों को पूरी तरह प्राप्त कर लेगा—यह परमेश्वर के प्रबंधन के कार्य का एक भाग है, और तुम शैतान के साथ परमेश्वर की लड़ाई के "विजय के उपहार" हो। तुम लोग सत्य को जितना अधिक समझते हो और कलीसिया का तुम्हारा जीवन जितना बेहतर होता है, उतना ही अधिक वह बड़ा लाल अजगर उसके घुटनों पर लाया जाता है। ये सब आध्यात्मिक संसार के विषय हैं—वे आध्यात्मिक संसार की लड़ाइयाँ हैं, और जब परमेश्वर विजयी होता है, तब शैतान लज्जित और धराशायी होगा। परमेश्वर के कार्य के इस चरण का विशालकाय महत्व है। परमेश्वर इतने विशाल पैमाने पर कार्य इसलिए करता है और लोगों के इस समूह को पूरी तरह इसलिए बचाता है ताकि तुम शैतान के प्रभाव से बच सको, पवित्र देश में रह सको, परमेश्वर की ज्योति में रह सको, और ज्योति की अगुआई और मार्गदर्शन पा सको। तब तुम्हारे जीवन का अर्थ है। तुम लोग जो खाते और पहनते हो, वह अविश्वासियों से भिन्न है; तुम लोग परमेश्वर के वचनों का आनंद लेते हो और सार्थक जीवन जीते हो—और वे किसका आनंद लेते हैं? वे बस अपने "पूर्वजों की विरासत" और अपनी "राष्ट्रीय भावना" का आनंद लेते हैं। उनमें लेश मात्र भी मानवता नहीं है! तुम लोगों के वस्त्र, शब्द और कार्य सब उनसे भिन्न हैं। तुम लोग अंततः गंदगी से पूरी तरह बच जाओगे, शैतान के प्रलोभन के फंदे में अब और नहीं फँसोगे, और प्रतिदिन परमेश्वर का पोषण प्राप्त करोगे। तुम लोगों को सदैव चौकन्ना रहना चाहिए। यद्यपि तुम गंदी जगह में रहते हो, किंतु तुम गंदगी से बेदाग़ हो और परमेश्वर के निकट रह सकते हो, उसकी उत्कृष्ट सुरक्षा प्राप्त कर सकते हो। परमेश्वर ने इस पीले देश के समस्त लोगों में से तुम लोगों को चुना है। क्या तुम सबसे धन्य लोग नहीं हो? तुम सृजित प्राणी हो—तुम्हें निस्संदेह परमेश्वर की आराधना और सार्थक जीवन का अनुसरण करना चाहिए। यदि तुम परमेश्वर की आराधना नहीं करते हो बल्कि अपनी अशुद्ध देह के भीतर रहते हो, तो क्या तुम बस मानव भेष में जानवर नहीं हो? चूँकि तुम मानव प्राणी हो, इसलिए तुम्हें स्वयं को परमेश्वर के लिए खपाना और सारे कष्ट सहने चाहिए! आज तुम्हें जो थोड़ा-सा कष्ट दिया जाता है, वह तुम्हें प्रसन्नतापूर्वक और दृढ़तापूर्वक स्वीकार करना चाहिए और अय्यूब तथा पतरस के समान सार्थक जीवन जीना चाहिए। इस संसार में, मनुष्य शैतान का भेष धारण करता है, शैतान का दिया भोजन खाता है, और शैतान के अँगूठे के नीचे कार्य और सेवा करता है, उसकी गंदगी में पूरी तरह रौंदा जाता है। यदि तुम जीवन का अर्थ नहीं समझते हो या सच्चा मार्ग प्राप्त नहीं करते हो, तो इस तरह जीने का क्या महत्व है? तुम सब वे लोग हो, जो सही मार्ग का अनुसरण करते हो, जो सुधार की खोज करते हो। तुम सब वे लोग हो, जो बड़े लाल अजगर के देश में ऊपर उठते हो, जिन्हें परमेश्वर धार्मिक कहता है। क्या यह सबसे सार्थक जीवन नहीं है?

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'अभ्यास (2)' से उद्धृत

ऊपर से नीचे तक और शुरू से अंत तक शैतान परमेश्वर के कार्य को बाधित करता रहा है और उसके विरोध में काम करता रहा है। "प्राचीन सांस्कृतिक विरासत", मूल्यवान "प्राचीन संस्कृति के ज्ञान", "ताओवाद और कन्फ्यूशीवाद की शिक्षाओं" और "कन्फ्यूशियन क्लासिक्स और सामंती संस्कारों" की इस सारी चर्चा ने मनुष्य को नरक में पहुँचा दिया है। उन्नत आधुनिक विज्ञान और प्रौद्योगिकी के साथ-साथ अत्यधिक विकसित उद्योग, कृषि और व्यवसाय कहीं नज़र नहीं आते। इसके बजाय, यह सिर्फ़ प्राचीन काल के "वानरों" द्वारा प्रचारित सामंती संस्कारों पर जोर देता है, ताकि परमेश्वर के कार्य को जानबूझकर बाधित कर सके, उसका विरोध कर सके और उसे नष्ट कर सके। न केवल इसने आज तक मनुष्य को सताना जारी रखा है, बल्कि वह उसे पूरे का पूरा निगल[1] भी जाना चाहता है। सामंतवाद की नैतिक और आचार-विचार विषयक शिक्षाओं के प्रसारण और प्राचीन संस्कृति के ज्ञान की विरासत ने लंबे समय से मनुष्य को संक्रमित किया है और उन्हें छोटे-बड़े शैतानों में बदल दिया है। कुछ ही लोग हैं, जो ख़ुशी से परमेश्वर को स्वीकार करते हैं, और कुछ ही लोग हैं, जो उसके आगमन का उल्लासपूर्वक स्वागत करते हैं। समस्त मानवजाति का चेहरा हत्या के इरादे से भर गया है, और हर जगह हत्यारी साँस हवा में व्याप्त है। वे परमेश्वर को इस भूमि से निष्कासित करना चाहते हैं; हाथों में चाकू और तलवारें लिए वे परमेश्वर का "विनाश" करने के लिए खुद को युद्ध के विन्यास में व्यवस्थित करते हैं। शैतान की इस सारी भूमि पर, जहाँ मनुष्य को लगातार सिखाया जाता है कि कहीं कोई परमेश्वर नहीं है, मूर्तियाँ फैली हुई हैं, और ऊपर हवा जलते हुए कागज और धूप की वमनकारी गंध से तर है, इतनी घनी कि दम घुटता है। यह उस कीचड़ की बदबू की तरह है, जो जहरीले सर्प के कुलबुलाते समय ऊपर उठती है, जिससे व्यक्ति उलटी किए बिना नहीं रह सकता। इसके अलावा, वहाँ अस्पष्ट रूप से दुष्ट दानवों के मंत्रोच्चार की ध्वनि सुनी जा सकती है, जो दूर नरक से आती हुई प्रतीत होती है, जिसे सुनकर आदमी काँपे बिना नहीं रह सकता। इस देश में हर जगह इंद्रधनुष के सभी रंगों वाली मूर्तियाँ रखी हैं, जिन्होंने इस देश को कामुक आनंद की दुनिया में बदल दिया है, और शैतानों का राजा दुष्टतापूर्वक हँसता रहता है, मानो उसका नीचतापूर्ण षड्यंत्र सफल हो गया हो। इस बीच, मनुष्य पूरी तरह से बेखबर रहता है, और उसे यह भी पता नहीं कि शैतान ने उसे पहले ही इस हद तक भ्रष्ट कर दिया है कि वह बेसुध हो गया है और उसने हार में अपना सिर लटका दिया है। शैतान चाहता है कि एक ही झपट्टे में परमेश्वर से संबंधित सब-कुछ साफ़ कर दे, और एक बार फिर उसे अपवित्र कर उसका हनन कर दे; वह उसके कार्य को टुकड़े-टुकड़े करने और उसे बाधित करने का इरादा रखता है। वह कैसे परमेश्वर को समान दर्जा दे सकता है? कैसे वह पृथ्वी पर मनुष्यों के बीच अपने काम में परमेश्वर का "हस्तक्षेप" बरदाश्त कर सकता है? कैसे वह परमेश्वर को उसके घिनौने चेहरे को उजागर करने दे सकता है? शैतान कैसे परमेश्वर को अपने काम को अव्यवस्थित करने की अनुमति दे सकता है? क्रोध के साथ भभकता यह शैतान कैसे परमेश्वर को पृथ्वी पर अपने शाही दरबार पर नियंत्रण करने दे सकता है? कैसे वह स्वेच्छा से परमेश्वर के श्रेष्ठतर सामर्थ्य के आगे झुक सकता है? इसके कुत्सित चेहरे की असलियत उजागर की जा चुकी है, इसलिए किसी को पता नहीं है कि वह हँसे या रोए, और यह बताना वास्तव में कठिन है। क्या यही इसका सार नहीं है? अपनी कुरूप आत्मा के बावजूद वह यह मानता है कि वह अविश्वसनीय रूप से सुंदर है। यह सहअपराधियों का गिरोह![2] वे भोग में लिप्त होने के लिए मनुष्यों के देश में उतरते हैं और हंगामा करते हैं, और चीज़ों में इतनी हलचल पैदा कर देते हैं कि दुनिया एक चंचल और अस्थिर जगह बन जाती है और मनुष्य का दिल घबराहट और बेचैनी से भर जाता है, और उन्होंने मनुष्य के साथ इतना खिलवाड़ किया है कि उसका रूप उस क्षेत्र के एक अमानवीय जानवर जैसा अत्यंत कुरूप हो गया है, जिससे मूल पवित्र मनुष्य का आखिरी निशान भी खो गया है। इतना ही नहीं, वे धरती पर संप्रभु सत्ता ग्रहण करना चाहते हैं। वे परमेश्वर के कार्य को इतना बाधित करते हैं कि वह मुश्किल से बहुत धीरे आगे बढ़ पाता है, और वे मनुष्य को इतना कसकर बंद कर देते हैं, जैसे कि तांबे और इस्पात की दीवारें हों। इतने सारे गंभीर पाप करने और इतनी आपदाओं का कारण बनने के बाद भी क्या वे ताड़ना के अलावा किसी अन्य चीज़ की उम्मीद कर रहे हैं? राक्षस और बुरी आत्माएँ काफी समय से पृथ्वी पर अंधाधुंध विचरण कर रही हैं, और उन्होंने परमेश्वर की इच्छा और कष्टसाध्य प्रयास दोनों को इतना कसकर बंद कर दिया है कि वे अभेद्य बन गए हैं। सचमुच, यह एक घातक पाप है! ऐसा कैसे हो सकता है कि परमेश्वर चिंतित महसूस न करे? परमेश्वर कैसे क्रोधित महसूस न करे? उन्होंने परमेश्वर के कार्य में गंभीर बाधा पहुँचाई है और उसका घोर विरोध किया है : कितने विद्रोही हैं वे! यहाँ तक कि वे छोटे-बड़े राक्षस भी शेर के पीछे चलते गीदड़ों जैसा व्यवहार करते हैं और बुराई की धारा में बहते हैं, और चलते हुए गड़बड़ी पैदा करते हैं। सत्य को जानने के बावजूद उसका जानबूझकर विरोध करते हैं, ये विद्रोह के बेटे! यह ऐसा है, मानो अब जबकि नरक का राजा राजसी सिंहासन पर चढ़ गया है, तो वे दंभी और बेपरवाह हो गए हैं और अन्य सभी की अवमानना करने लगे हैं। उनमें से कितने सत्य की खोज करते हैं और धार्मिकता का पालन करते हैं? वे सभी जानवर हैं, जो सूअरों और कुत्तों से बेहतर नहीं हैं, वे गोबर के एक ढेर के बीच में बदबूदार मक्खियों के एक समूह के ऊपर दंभपूर्ण आत्म-बधाई में अपने सिर हिलाते हैं और हर तरह का उपद्रव भड़काते[3] हैं। उनका मानना है कि नरक का उनका राजा सबसे बड़ा राजा है, और इतना भी नहीं जानते कि वे खुद बदबूदार मक्खियों से ज्यादा कुछ नहीं हैं। और फिर भी, वे अपने माता-पिता रूपी सूअरों और कुत्तों की ताकत का लाभ उठाकर परमेश्वर के अस्तित्व को बदनाम करते हैं। वे तुच्छ मक्खियाँ मानती हैं कि उनके माता-पिता बड़े-बड़े दाँतों वाली व्हेल[4] की तरह विशाल हैं। वे इतना भी नहीं जानते कि वे खुद बहुत छोटे हैं, और उनके माता-पिता उनसे लाखों गुना बड़े गंदे सूअर और कुत्ते हैं। अपनी नीचता से अनजान वे अंधाधुंध दौड़ने के लिए उन सूअरों और कुत्तों द्वारा छोड़ी गई सड़न की बदबू पर भरोसा करते हैं और शर्मिंदगी से बेखबर वे व्यर्थ ही भविष्य की पीढ़ियों को पैदा करने के बारे में सोचते हैं! अपनी पीठ पर हरे पंख लगाए (जो उनके परमेश्वर पर विश्वास करने के दावे का सूचक है), वे आत्मतुष्ट हैं और हर जगह अपनी सुंदरता और आकर्षण की डींग हाँकते हैं, जबकि वे चुपके से अपने शरीर की मलिनताओं को मनुष्य पर फेंक देते हैं। इतना ही नहीं, वे स्वयं से अत्यधिक प्रसन्न होते हैं, मानो वे इंद्रधनुष के रंगों वाले एक जोड़ी पंखों का इस्तेमाल कर अपनी मलिनताएँ छिपा सकते हों, और इस तरह वे सच्चे परमेश्वर के अस्तित्व पर अपना कहर बरपाते हैं (यह धार्मिक दुनिया में परदे के पीछे चलने वाली हकीकत बताता है)। मनुष्य को कैसे पता चलेगा कि मक्खी के पंख कितने भी खूबसूरत और आकर्षक हों, मक्खी एक अत्यंत छोटे प्राणी से बढ़कर कुछ नहीं है, जिसका पेट गंदगी से भरा हुआ और शरीर रोगाणुओं से ढका हुआ है? अपने माता-पिता रूपी सूअर और कुत्तों के बल पर वे देश-भर में हैवानियत में निरंकुश होकर अंधाधुंध दौड़ते हैं (यह उस तरीके को संदर्भित करता है, जिससे परमेश्वर को सताने वाले धार्मिक अधिकारी सच्चे परमेश्वर और सत्य से विद्रोह करने के लिए राष्ट्र की सरकार से मिले मजबूत समर्थन पर भरोसा करते हैं)। ऐसा लगता है, मानो यहूदी फरीसियों के भूत परमेश्वर के साथ बड़े लाल अजगर के देश में, अपने पुराने घोंसले में लौट आए हों। उन्होंने हजारों साल पहले का अपना काम फिर करते हुए उत्पीड़न का दूसरा दौर शुरू कर दिया है। पतितों के इस समूह का अंततः पृथ्वी पर नष्ट हो जाना निश्चित है! ऐसा प्रतीत होता है कि कई सहस्राब्दियों के बाद अशुद्ध आत्माएँ और भी चालाक और धूर्त हो गई हैं। वे गुप्त रूप से लगातार परमेश्वर के काम को क्षीण करने के तरीकों के बारे में सोच रही हैं। प्रचुर छल-कपट के साथ वे अपनी मातृभूमि में कई हजार साल पहले की त्रासदी की पुनरावृत्ति करना चाहती हैं और परमेश्वर को लगभग पुकार उठने की कगार तक ले आती हैं। परमेश्वर उन्हें नष्ट करने के लिए तीसरे स्वर्ग में लौट जाने से खुद को मुश्किल से रोक पाता है। परमेश्वर से प्रेम करने के लिए मनुष्य को उसकी इच्छा, उसकी खुशी और उसके दुःख को जानना चाहिए, और यह समझना चाहिए कि वह किस चीज़ से घृणा करता है। ऐसा करने से मनुष्य के प्रवेश में और तेज़ी आएगी। मनुष्य का प्रवेश जितना तेज़ होगा, उतनी ही शीघ्र परमेश्वर की इच्छा पूर्ण होगी; और उतनी ही स्पष्टता से मनुष्य शैतानों के राजा को जान पाएगा और उतना ही वह परमेश्वर के नज़दीक आएगा, ताकि उसकी इच्छा फलित हो सके।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'कार्य और प्रवेश (7)' से उद्धृत

मैंने कई बार कहा है कि परमेश्वर का अंत के दिनों का कार्य प्रत्येक व्यक्ति की आत्मा को परिवर्तित करने, उसकी रूह को बदलने के लिए इस प्रकार किया जाता है कि बहुत बड़ा आघात सह चुके उसके दिल को बेहतर बनाया जा सके और इस प्रकार उसकी उस आत्मा को बचाया जा सके जिसे बुराई द्वारा अत्यंत गंभीर रूप से हानि पहुंचाई गई है; इसका उद्देश्य लोगों की आत्मा को जगाना है, उनके उदासीन दिलों को पिघलाना है और उनका कायाकल्प होने देना है। यही परमेश्वर की सबसे बड़ी इच्छा है। मनुष्य का जीवन और उसके अनुभव कितने ऊँचे या गहरे हैं, इसकी बात करना छोड़ दो; जब लोगों के हृदय जाग्रत कर दिए जाएँगे, जब उन्हें उनके सपनों से जगा दिया जाएगा और वे बड़े लाल अजगर द्वारा पहुँचाई गई हानि से पूरी तरह से अवगत हो जाएँगे, तो परमेश्वर की सेवकाई का काम पूरा हो जाएगा। परमेश्वर का कार्य पूरा होने का दिन वह दिन भी है जब मनुष्य आधिकारिक तौर पर परमेश्वर पर विश्वास की सही राह पर चलना शुरू करेगा। इस समय, परमेश्वर की सेवकाई समाप्त हो चुकी होगी: देहधारी परमेश्वर का कार्य पूरी तरह समाप्त हो चुका होगा, और मनुष्य आधिकारिक तौर पर उस कर्तव्य को निभाना शुरू कर देगा, जो उसे निभाना चाहिए—वह अपनी सेवकाई का कार्य करेगा। ये परमेश्वर के कार्य के कदम हैं। इस प्रकार, तुम लोगों को इन बातों की जानकारी की नींव पर अपने प्रवेश का मार्ग खोजना चाहिए। यह सब तुम लोगों को समझना चाहिए। मनुष्य के प्रवेश में तभी सुधार आएगा, जब परिवर्तन उसके दिल की गहराई में होंगे, क्योंकि परमेश्वर का कार्य राक्षसों के एकत्र होने के इस स्थान से मनुष्य का पूर्ण उद्धार करना है—जिसे छुड़ा लिया गया है, जो अभी भी अंधकार की शक्तियों के अधीन रहता है, और जो कभी जागा नहीं है; ऐसा इसलिए ताकि मनुष्य हज़ारों साल के पापों से मुक्त होकर परमेश्वर का चहेता बन सके, बड़े लाल अजगर को मारकर परमेश्वर का राज्य स्थापित करे और जल्दी ही परमेश्वर के दिल को आराम पहुँचाए; ऐसा इसलिये है ताकि तुम अपने सीने में भरी घृणा को बिना अड़चन के निकाल सको, उन फफूंदग्रस्त रोगाणुओं का उन्मूलन कर सको, तुम लोग इस जीवन को छोड़ सको जो एक बैल या घोड़े के जीवन से कुछ अलग नहीं है, अब दास बनकर न रहो, बड़े लाल अजगर द्वारा आसानी से कुचले न जाओ या उसके द्वारा तुम्हें आज्ञा न दी जाए; तुम लोग अब इस असफल राष्ट्र का हिस्सा नहीं रहोगे, तुम अब घृणित बड़े लाल अजगर के नहीं रहोगे, और तुम अब उसके दास नहीं रहोगे। परमेश्वर द्वारा निश्चित रूप से राक्षसों के घरौंदों के टुकड़े-टुकड़े कर दिए जाएँगे, तुम लोग परमेश्वर के साथ खड़े होंगे—तुम लोग परमेश्वर के हो, दासों के इस साम्राज्य के नहीं हो। परमेश्वर लंबे समय से इस अंधेरे समाज से अत्यधिक घृणा करता आया है। वह इस दुष्ट, घिनौने बूढ़े सर्प पर अपने पैर रखने के लिए अपने दांत पीसता है, ताकि वह फिर से कभी उठ न पाए और फिर कभी मनुष्य के साथ दुर्व्यवहार न कर पाए; वह उसके अतीत के दुष्कर्मों को क्षमा नहीं करेगा, वह उसके द्वारा मनुष्य को दिए गए धोखे को बर्दाश्त नहीं करेगा और वह विभिन्न युगों में उसके द्वारा किए गए हर पाप का हिसाब चुकता करेगा। परमेश्वर समस्त बुराइयों के सरगना[5] को जरा भी नहीं छोड़ेगा, वह इसे पूरी तरह से इसे नष्ट कर देगा।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'कार्य और प्रवेश (8)' से उद्धृत

कई जगहों पर परमेश्वर ने सीनियों के देश में विजेताओं के एक समूह को प्राप्त करने की भविष्यवाणी की है। चूँकि विजेताओं को दुनिया के पूर्व में प्राप्त किया जाना है, इसलिए परमेश्वर अपने दूसरे देहधारण में जहाँ कदम रखता है, वह बिना किसी संदेह के सीनियों का देश है, ठीक वह स्थान, जहाँ बड़ा लाल अजगर कुंडली मारे पड़ा है। वहाँ परमेश्वर बड़े लाल अजगर के वंशजों को प्राप्त करेगा, ताकि वह पूर्णतः पराजित और शर्मिंदा हो जाए। परमेश्वर पीड़ा के बोझ से अत्यधिक दबे इन लोगों को जगाने जा रहा है, जब तक कि वे पूरी तरह से जाग नहीं जाते, वह उन्हें कोहरे से बाहर निकालेगा, और उनसे उस बड़े लाल अजगर को अस्वीकार करवाएगा। वे अपने सपने से जागेंगे, बड़े लाल अजगर के सार को जानेंगे, परमेश्वर को अपना संपूर्ण हृदय देने में सक्षम होंगे, अँधेरे की ताक़तों के दमन से बाहर निकलेंगे, दुनिया के पूर्व में खड़े होंगे, और परमेश्वर की जीत का सबूत बनेंगे। केवल इसी तरीके से परमेश्वर महिमा प्राप्त करेगा।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'कार्य और प्रवेश (6)' से उद्धृत

हज़ारों सालों से यह भूमि मलिन रही है। यह गंदी और दुःखों से भरी हुई है, चालें चलते और धोखा देते हुए, निराधार आरोप लगाते हुए,[6] क्रूर और दुष्ट बनकर इस भुतहा शहर को कुचलते हुए और लाशों से पाटते हुए प्रेत यहाँ हर जगह बेकाबू दौड़ते हैं; सड़ांध ज़मीन पर छाकर हवा में व्याप्त हो गई है, और इस पर ज़बर्दस्त पहरेदारी[7] है। आसमान से परे की दुनिया कौन देख सकता है? शैतान मनुष्य के पूरे शरीर को कसकर बांध देता है, अपनी दोनों आंखों पर पर्दा डालकर, अपने होंठ मजबूती से बंद कर देता है। शैतानों के राजा ने हज़ारों वर्षों तक उपद्रव किया है, और आज भी वह उपद्रव कर रहा है और इस भुतहा शहर पर बारीक नज़र रखे हुए है, मानो यह राक्षसों का एक अभेद्य महल हो; इस बीच रक्षक कुत्ते चमकती हुई आंखों से घूरते हैं, वे इस बात से अत्यंत भयभीत रहते हैं कि कहीं परमेश्वर अचानक उन्हें पकड़कर समाप्त न कर दे, उन्हें सुख-शांति के स्थान से वंचित न कर दे। ऐसे भुतहा शहर के लोग परमेश्वर को कैसे देख सके होंगे? क्या उन्होंने कभी परमेश्वर की प्रियता और मनोहरता का आनंद लिया है? उन्हें मानव-जगत के मामलों की क्या कद्र है? उनमें से कौन परमेश्वर की उत्कट इच्छा को समझ सकता है? फिर, यह कोई आश्चर्य की बात नहीं कि देहधारी परमेश्वर पूरी तरह से छिपा रहता है : इस तरह के अंधकारपूर्ण समाज में, जहां राक्षस बेरहम और अमानवीय हैं, पलक झपकते ही लोगों को मार डालने वाला शैतानों का सरदार, ऐसे मनोहर, दयालु और पवित्र परमेश्वर के अस्तित्व को कैसे सहन कर सकता है? वह परमेश्वर के आगमन की सराहना और जयजयकार कैसे कर सकता है? ये अनुचर! ये दया के बदले घृणा देते हैं, ये लंबे समय से परमेश्वर का तिरस्कार करते रहे हैं, ये परमेश्वर को अपशब्द बोलते हैं, ये बेहद बर्बर हैं, इनमें परमेश्वर के प्रति थोड़ा-सा भी सम्मान नहीं है, ये लूटते और डाका डालते हैं, इनका विवेक मर चुका है, ये विवेक के विरुद्ध कार्य करते हैं, और ये लालच देकर निर्दोषों को अचेत देते हैं। प्राचीन पूर्वज? प्रिय अगुवा? वे सभी परमेश्वर का विरोध करते हैं! उनके हस्तक्षेप ने स्वर्ग के नीचे की हर चीज़को अंधेरे और अराजकता की स्थिति में छोड़ दिया है! धार्मिक स्वतंत्रता? नागरिकों के वैध अधिकार और हित? ये सब पाप को छिपाने की चालें हैं! किसने परमेश्वर के कार्य को स्वीकार कियाहै? किसने परमेश्वर के कार्य के लिए अपना जीवन अर्पित किया है या रक्त बहाया है? पीढ़ी-दर-पीढ़ी, माता-पिता से लेकर बच्चों तक, गुलाम बनाए गए मनुष्य ने परमेश्वर को बड़ी बेरुखी से गुलाम बना लिया है—ऐसा कैसे हो सकता है कि यह रोष न भड़काए? दिल में हज़ारों वर्ष की घृणा भरी हुई है, हज़ारों साल का पाप दिल पर अंकित है—इससे कैसे न घृणा पैदा होगी? परमेश्वर का बदला लो, उसके शत्रु को पूरी तरह से समाप्त कर दो, उसे अब और बेकाबू न दौड़ने दो, और अब उसे मनचाहे तरीके से परेशानी मत बढ़ाने दो! यही समय है : मनुष्य अपनी सभी शक्तियाँ लंबे समय से इकट्ठा करता आ रहा है, उसने इसके लिए सभी प्रयास किए हैं, हर कीमत चुकाई है, ताकि वह इस दानव के घृणित चेहरे से नकाब उतार सके और जो लोग अंधे हो गए हैं, जिन्होंने हर प्रकार की पीड़ा और कठिनाई सही है, उन्हें अपने दर्द से उबरने और इस दुष्ट प्राचीन शैतान से मुँह मोड़ने दे। परमेश्वर के कार्य में ऐसी अभेद्य बाधा क्यों खड़ी की जाए? परमेश्वर के लोगों को धोखा देने के लिए विभिन्न चालें क्यों चली जाएँ? वास्तविक स्वतंत्रता और वैध अधिकार एवं हित कहां हैं? निष्पक्षता कहां है? आराम कहां है? गर्मजोशी कहां है? परमेश्वर के लोगों को छलने के लिए धोखेभरी योजनाओं का उपयोग क्यों किया जाए? परमेश्वर के आगमन को दबाने के लिए बल का उपयोग क्यों किया जाए? क्यों नहीं परमेश्वर को उस धरती पर स्वतंत्रता से घूमने दिया जाए, जिसे उसने बनाया? क्यों परमेश्वर को इस हद तक खदेड़ा जाए कि उसके पास आराम से सिर रखने के लिए जगह भी न रहे? मनुष्यों की गर्मजोशी कहां है? लोगों की स्वागत की भावना कहां है? परमेश्वर में ऐसी तड़प क्यों पैदा की जाए? परमेवर को बार-बार पुकारने पर मजबूर क्यों किया जाए? परमेश्वर को अपने प्रिय पुत्र के लिए चिंता करने पर मजबूर क्यों किया जाए? इस अंधकारपूर्ण समाज में इसके घटिया रक्षक कुत्ते परमेश्वर को उसकी बनायी दुनिया में स्वतंत्रता से आने-जाने क्यों नहीं देते? दुख-दर्द में रहने वाला इंसान यह सब क्यों नहीं समझता? तुम लोगों के लिए परमेश्वर ने बहुत यातना सही है, और अत्यंत पीड़ा के साथ अपना प्यारा पुत्र, अपना देह और रक्त तुम लोगों को सौंपा है—तो फिर तुम लोग अभी भी उससे नज़रें क्यों फेर लेते हो? हर किसी के सामने तुम लोग परमेश्वर के आगमन को अस्वीकार कर देते हो, और परमेश्वर की दोस्ती को नकार देते हो। तुम लोग इतने निर्लज्ज क्यों हो? क्या तुम लोग ऐसे अंधकारपूर्ण समाज में अन्याय सहन करना चाहते हो? तुम अपने आपको हज़ारों साल की शत्रुता से भरने के बजाय शैतानों के सरदार के "मल" से भर लेते हो?

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'कार्य और प्रवेश (8)' से उद्धृत

परमेश्वर के कार्य की बाधाएं कितनी बड़ी हैं? क्या कभी किसी ने जाना है? गहरे जमे अंधविश्वासों द्वारा बंदी बनाए लोगों में से कौन परमेश्वर के सच्चे चेहरे को जानने में सक्षम है? इतने उथले और बेतुके पिछड़े सांस्कृतिक ज्ञान के साथ वे कैसे परमेश्वर द्वारा बोले गए वचनों को पूरी तरह से समझ सकते हैं? यहां तक कि आमने-सामने बोलने और अच्छी तरह से बोलकर समझाने पर भी वे कैसे समझ सकते हैं? कभी-कभी ऐसा लगता है, मानो परमेश्वर के वचन बहरे कानों में पड़े हों : लोगों की थोड़ी-सी भी प्रतिक्रिया नहीं होती, वे बस अपना सिर हिलाते हैं और समझते कुछ नहीं। यह चिंताजनक कैसे न हो? इस "दूरस्थ,[8] प्राचीन सांस्कृतिक इतिहास और सांस्कृतिक ज्ञान" ने लोगों के ऐसे नाकाबिल समूह को पोषित किया है। यह प्राचीन संस्कृति—बहुमूल्य विरासत—कबाड़ का ढेर है! यह बहुत पहले ही एक चिरस्थायी शर्मिंदगी बन गई, और उल्लेख करने लायक भी नहीं है! इसने लोगों को परमेश्वर का विरोध करने की चालें और तकनीकें सिखा दी हैं, और राष्ट्रीय शिक्षा के "सुव्यवस्थित, सौम्य मार्गदर्शन"[9] ने लोगों को परमेश्वर के प्रति और भी अधिक अवज्ञाकारी बना दिया है। परमेश्वर के कार्य का हर हिस्सा अत्यंत कठिन है, और पृथ्वी पर अपने कार्य का हर कदम परमेश्वर के लिए परेशान करने वाला रहा है। पृथ्वी पर उसका कार्य कितना कठिन है! पृथ्वी पर परमेश्वर के कार्य के कदम बहुत कष्टसाध्य हैं: मनुष्य की कमजोरियों, कमियों, बचपने, अज्ञानता और मनुष्य की हर चीज़ के लिए परमेश्वर सूक्ष्म योजनाएँ बनाता है और ध्यानपूर्वक विचार करता है। मनुष्य एक कागज़ी बाघ की तरह है, जिसे कोई छेड़ने या भड़काने की हिम्मत नहीं करता; हल्के-से स्पर्श से ही वह पलटकर काट लेता है, या फिर नीचे गिर जाता है और अपना रास्ता भूल जाता है, और ऐसा लगता है, मानो एकाग्रता की थोड़ी-सी कमी होने पर वह पुनः वापस चला जाता है, या फिर परमेश्वर की उपेक्षा करता है, या अपने शरीर की अशुद्ध चीज़ों में लिप्त होने के लिए अपने सूअरों और कुत्तों जैसे माता-पिताओं की ओर भागता है। यह कितनी बड़ी बाधा है! व्यावहारिक रूप से परमेश्वर के कार्य के प्रत्येक कदम पर उसे प्रलोभन दिया जाता है, और लगभग हर कदम पर परमेश्वर को बड़े खतरे का जोखिम होता है। उसके वचन निष्कपट, ईमानदार और द्वेषरहित हैं, फिर भी कौन उन्हें स्वीकार करने के लिए तैयार है? कौन पूरी तरह से समर्पित होने के लिए तैयार है? इससे परमेश्वर का दिल टूट जाता है। वह मनुष्य के लिए दिन-रात कड़ी मेहनत करता है, वह मनुष्य के जीवन के लिए चिंता से घिरा रहता है, और वह मनुष्य की कमज़ोरी के साथ सहानुभूति रखता है। उसने अपने द्वारा बोले गए सभी वचनों के लिए अपने कार्य के प्रत्येक चरण में कई उतार-चढ़ावों का सामना किया है; वह हमेशा आगे कुआं और पीछे खाई वाली परिस्थिति में फंसा रहता है, और दिन-रात बार-बार मनुष्य की कमज़ोरी, अवज्ञा, बचपने और भेद्यता ... के बारे में सोचता है। इसे किसने कभी भी जाना है? वह किस पर विश्वास कर सकता है? कौन समझ पाएगा? वह हमेशा मनुष्य के पापों, हिम्मत की कमी और दुर्बलता से घृणा करता है, और वह हमेशा मनुष्य की भेद्यता के बारे में चिंता करता है, और वह मनुष्य के आगे के मार्ग के बारे में विचार करता है। हमेशा, जब वह मनुष्य के वचनों और कर्मों को देखता है, तो वह दया और क्रोध से भर जाता है, और हमेशा इन चीज़ों को देखने से उसके दिल में दर्द पैदा होता है। निर्दोष, आखिरकार, सुन्न हो चुके हैं; परमेश्वर क्यों हमेशा उनके लिए चीज़ों को मुश्किल करे? कमज़ोर मनुष्य में दृढ़ता की बहुत कमी होती है; परमेश्वर क्यों हमेशा उसके लिए अदम्य क्रोध रखे? कमज़ोर और निर्बल मनुष्य में थोड़ा-सा भी जीवट नहीं है; परमेश्वर क्यों हमेशा उसकी अवज्ञा के लिए उसे झिड़के? स्वर्ग में परमेश्वर की धमकियों का कौन सामना कर सकता है? आखिरकार, मनुष्य नाज़ुक है, और हताशा की स्थितियों में है, परमेश्वर ने अपना क्रोध अपने दिल की गहराई में धकेल दिया है, ताकि मनुष्य धीरे-धीरे आत्म-चिंतन कर सके। फिर भी मनुष्य, जो गंभीर संकट में है, परमेश्वर की इच्छा की थोड़ी-सी भी कद्र नहीं करता; मनुष्य को शैतानों के बूढ़े सम्राट द्वारा अपने पैरों तले कुचल दिया गया है, फिर भी वह पूरी तरह से अनजान है, वह हमेशा स्वयं को परमेश्वर के विरुद्ध रखता है, या फिर वह न तो उसके प्रति उत्साहित है, न उदासीन। परमेश्वर ने कई वचन कहे हैं, फिर भी किसने उन्हें कभी भी गंभीरता से लिया है? मनुष्य परमेश्वर के वचनों को नहीं समझता, फिर भी वह बेफ़िक्र और उत्कंठा-रहित रहता है, और उसने वास्तव में कभी भी बूढ़े शैतान का सार नहीं जाना है। लोग अधोलोक में, नरक में रहते हैं, लेकिन मानते हैं कि वे समुद्र-तल के महल में रहते हैं; उन्हें बड़े लाल अजगर द्वारा सताया जाता है, पर वे स्वयं को देश के "कृपापात्र"[10] समझते हैं; शैतान द्वारा उनका उपहास किया जाता है, पर उन्हें लगता है कि वे देह के उत्कृष्ट कला-कौशल का आनंद ले रहे हैं। कैसा मलिन, नीच अभागों का समूह है यह! मनुष्य का दुर्भाग्य से पाला पड़ चुका है, लेकिन उसे इसका पता नहीं है, और इस अंधेरे समाज में वह एक के बाद एक दुर्घटनाओं का सामना करता है,[11] फिर भी वह इसके प्रति जागृत नहीं हुआ है। कब वह आत्म-दया और दासता के स्वभाव से छुटकारा पाएगा? क्यों वह परमेश्वर के दिल के प्रति इतना लापरवाह है? क्या वह चुपचाप इस दमन और कठिनाई को माफ़ कर देता है? क्या वह उस दिन की कामना नहीं करता, जब वह अंधेरे को प्रकाश में बदल सके? क्या वह एक बार फिर धार्मिकता और सत्य के विरुद्ध हो रहे अन्याय को दूर नहीं करना चाहता? क्या वह लोगों द्वारा सत्य का त्याग किए जाने और तथ्यों को तोड़े-मरोड़े जाने को देखते रहने और कुछ न करने का इच्छुक है? क्या वह इस दुर्व्यवहार को सहते रहने में खुश है? क्या वह गुलाम होने के लिए तैयार है? क्या वह इस असफल राज्य के गुलामों के साथ परमेश्वर के हाथों नष्ट होने को तैयार है? कहां है तुम्हारा संकल्प? कहां है तुम्हारी महत्वाकांक्षा? कहां है तुम्हारी गरिमा? कहां है तुम्हारी सत्यनिष्ठा? कहां है तुम्हारी स्वतंत्रता? क्या तुम शैतानों के सम्राट, बड़े लाल अजगर को अपना पूरा जीवन अर्पित करना[12] चाहते हो? क्या तुम ख़ुश हो कि वह तुम्हें यातना देते-देते मौत के घाट उतार दे? गहराई का चेहरा अराजक और काला है, जबकि सामान्य लोग ऐसे दुखों का सामना करते हुए स्वर्ग की ओर देखकर रोते हैं और पृथ्वी से शिकायत करते हैं। मनुष्य कब अपने सिर को ऊँचा रख पाएगा? मनुष्य दुर्बल और क्षीण है, वह इस क्रूर और अत्याचारी शैतान से कैसे मुकाबला कर सकता है? वह क्यों नहीं जितनी जल्दी हो सके, परमेश्वर को अपना जीवन सौंप देता? वह क्यों अभी भी डगमगाता है? वह कब परमेश्वर का कार्य समाप्त कर सकता है? इस प्रकार निरुद्देश्य ढंग से तंग और प्रताड़ित किए जाते हुए उसका पूरा जीवन अंततः व्यर्थ ही व्यतीत हो जाएगा; उसे आने और विदा होने की इतनी जल्दी क्यों है? वह परमेश्वर को देने के लिए कोई अनमोल चीज़ क्यों नहीं रखता? क्या वह घृणा की सहस्राब्दियों को भूल गया है?

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'कार्य और प्रवेश (8)' से उद्धृत

कई हजार वर्षों की प्राचीन संस्कृति और इतिहास के ज्ञान ने मनुष्य की सोच और धारणाओं तथा उसके मानसिक दृष्टिकोण को इतना कसकर बंद कर दिया है कि वे अभेद्य और प्राकृतिक रूप से नष्ट न होने वाले[13] बन गए हैं। लोग नरक के अठारहवें घेरे में रहते हैं, मानो उन्हें परमेश्वर द्वारा काल-कोठरियों में निर्वासित कर दिया गया हो, जहाँ प्रकाश कभी दिखाई नहीं दे सकता। सामंती सोच ने लोगों का इस तरह उत्पीड़न किया है कि वे मुश्किल से साँस ले पाते हैं और उनका दम घुट रहा है। उनमें प्रतिरोध करने की थोड़ी-सी भी ताकत नहीं है; वे बस सहते हैं और चुपचाप सहते हैं...। कभी किसी ने धार्मिकता और न्याय के लिए संघर्ष करने या खड़े होने का साहस नहीं किया; लोग बस दिन-ब-दिन और साल-दर-साल सामंती नीति-शास्त्र के प्रहारों और दुर्व्यवहारों तले जानवर से भी बदतर जीवन जीते हैं। उन्होंने कभी मानव-जगत में खुशी पाने के लिए परमेश्वर की तलाश करने के बारे में नहीं सोचा। ऐसा लगता है, मानो लोगों को पीट-पीटकर इस हद तक तोड़ डाला गया है कि वे पतझड़ में गिरे पत्तों की तरह हो गए हैं, मुरझाए हुए, सूखे और पीले-भूरे रंग के। लोग लंबे समय से अपनी याददाश्त खो चुके हैं; वे असहाय-से उस नरक में रहते हैं, जिसका नाम है मानव-जगत, अंत के दिन आने का इंतज़ार करते हुए, ताकि वे इस नरक के साथ ही नष्ट हो जाएँ, मानो वह अंत का दिन, जिसके लिए वे लालायित रहते हैं, वह दिन हो, जब मनुष्य आरामदायक शांति का आनंद लेगा। सामंती नैतिकता ने मनुष्य का जीवन "अधोलोक" में पहुँचा दिया है, जिससे उसकी प्रतिरोध करने की शक्ति और भी कम हो गई है। सभी प्रकार के उत्पीड़न मनुष्य को धीरे-धीरे अधोलोक में धकेल रहे हैं, जिससे वह अधोलोक की और अधिक गहराई में पहुँच रहा है और परमेश्वर से अधिकाधिक दूर होता गया है, आज तो परमेश्वर उसके लिए पूर्णत: अजनबी बन गया है, और जब वे मिलते हैं, तो वह उससे बचने के लिए जल्दी से निकल जाता है। मनुष्य उस पर ध्यान नहीं देता और उसे एक तरफ अकेला खड़ा छोड़ देता है, जैसे कि उसने उसे कभी जाना ही न हो या उसने उसे पहले कभी देखा ही न हो। फिर भी परमेश्वर अपना अदम्य रोष उस पर प्रकट न करते हुए मानव-जीवन की लंबी यात्रा के दौरान लगातार मनुष्य की प्रतीक्षा करता रहा है और इस दौरान बिना एक भी शब्द बोले, केवल मनुष्य के पश्चात्ताप करने और नए सिरे से शुरुआत करने की मौन प्रतीक्षा करता रहा है। मनुष्य के साथ मानव-जगत की पीड़ाएँ साझा करने के लिए परमेश्वर बहुत पहले मानव-जगत में आया था। मनुष्य के साथ गुज़ारे इन तमाम वर्षों में कोई भी उसके अस्तित्व को खोज नहीं पाया है। परमेश्वर स्वयं द्वारा लाया गया कार्य पूरा करते हुए मानव-जगत की दुर्दशा का कष्ट चुपचाप सहन करता रहता है। ऐसे कष्टों से गुजरते हुए, जिनका अनुभव मनुष्य ने पहले कभी नहीं किया, वह पिता परमेश्वर की इच्छा और मानवजाति की ज़रूरतों की खातिर कष्ट सहना जारी रखता है। पिता परमेश्वर की इच्छा की खातिर, और मानवजाति की ज़रूरतों की खातिर भी, मनुष्य की उपस्थिति में वह चुपचाप उसकी सेवा में खड़ा रहा है, और मनुष्य की उपस्थिति में उसने खुद को नम्र किया है। प्राचीन संस्कृति के ज्ञान ने मनुष्य को चुपके से परमेश्वर की उपस्थिति से चुरा लिया है और मनुष्य को शैतानों के राजा और उसकी संतानों को सौंप दिया है। चार पुस्तकों और पाँच क्लासिक्स[क] ने मनुष्य की सोच और धारणाओं को विद्रोह के एक अलग युग में पहुँचा दिया है, जिससे वह उन पुस्तकों और क्लासिक्स के संकलनकर्ताओं की पहले से भी ज्यादा खुशामदी करने लगा है, और परिणामस्वरूप परमेश्वर के बारे में उसकी धारणाएँ और ज्यादा ख़राब हो गई हैं। शैतानों के राजा ने बिना मनुष्य के जाने ही उसके दृदय से निर्दयतापूर्वक परमेश्वर को बाहर निकाल दिया और फिर विजयी उल्लास के साथ खुद उस पर कब्ज़ा जमा लिया। तब से मनुष्य एक कुरूप और दुष्ट आत्मा तथा शैतानों के राजा के चेहरे के अधीन हो गया। उसके सीने में परमेश्वर के प्रति घृणा भर गई, और शैतानों के राजा की द्रोहपूर्ण दुर्भावना दिन-ब-दिन तब तक मनुष्य के भीतर फैलती गई, जब तक कि वह पूरी तरह से बरबाद नहीं हो गया। उसके पास ज़रा-भी स्वतंत्रता नहीं रह गयी और उसके पास शैतानों के राजा के चंगुल से छूटने का कोई उपाय नहीं था। उसके पास वहीं के वहीं उसकी उपस्थिति में बंदी बनने, आत्मसमर्पण करने और उसकी अधीनता में घुटने टेक देने के सिवा कोई चारा नहीं था। बहुत पहले जब मनुष्य का हृदय और आत्मा अभी शैशवावस्था में ही थे, शैतानों के राजा ने उनमें नास्तिकता के फोड़े का बीज बो दिया था, और उसे इस तरह की भ्रांतियाँ सिखा दीं, जैसे कि "विज्ञान और प्रौद्योगिकी को पढ़ो; चार आधुनिकीकरणों को समझो; और दुनिया में परमेश्वर जैसी कोई चीज़ नहीं है।" यही नहीं, वह हर अवसर पर चिल्लाता है, "आओ, हम एक सुंदर मातृभूमि का निर्माण करने के लिए अपने कठोर श्रम पर भरोसा करें," और बचपन से ही हर व्यक्ति को अपने देश की सेवा करने के लिए तैयार रहने के लिए कहता है। बेख़बर मनुष्य, इसके सामने लाया गया, और इसने बेझिझक सारा श्रेय (अर्थात् समस्त मनुष्यों को अपने हाथों में रखने का परमेश्वर का श्रेय) हथिया लिया। कभी भी इसे शर्म का बोध नहीं हुआ। इतना ही नहीं, इसने निर्लज्जतापूर्वक परमेश्वर के लोगों को पकड़ लिया और उन्हें अपने घर में खींच लिया, जहाँ वह मेज पर एक चूहे की तरह उछलकर चढ़ गया और मनुष्यों से परमेश्वर के रूप में अपनी आराधना करवाई। कैसा आततायी है! वह चीख-चीखकर ऐसी शर्मनाक और घिनौनी बातें कहता है : "दुनिया में परमेश्वर जैसी कोई चीज़ नहीं है। हवा प्राकृतिक नियमों के कारण होने वाले रूपांतरणों से चलती है; बारिश तब होती है, जब पानी भाप बनकर ठंडे तापमानों से मिलता है और बूँदों के रूप में संघनित होकर पृथ्वी पर गिरता है; भूकंप भूगर्भीय परिवर्तनों के कारण पृथ्वी की सतह का हिलना है; सूखा सूरज की सतह पर नाभिक विक्षोभ के कारण हवा के शुष्क हो जाने से पड़ता है। ये प्राकृतिक घटनाएँ हैं। इस सबमें परमेश्वर का किया कौन-सा काम है?" ऐसे लोग भी हैं, जो कुछ ऐसे बयान भी देते हैं, जिन्हें स्वर नहीं दिया जाना चाहिए, जैसे कि : "मनुष्य प्राचीन काल में वानरों से विकसित हुआ था, और आज की दुनिया लगभग एक युग पहले शुरू हुए आदिम समाजों के अनुक्रमण से विकसित हुई है। किसी देश का उत्थान या पतन पूरी तरह से उसके लोगों के हाथों में है।" पृष्ठभूमि में, शैतान लोगों को उसे दीवार पर लटकाकर या मेज पर रखकर श्रद्धांजलि अर्पित करने और भेंट चढ़ाने के लिए बाध्य करता है। जब वह चिल्लाता है कि "कोई परमेश्वर नहीं है," उसी समय वह खुद को परमेश्वर के रूप में स्थापित भी करता है और परमेश्वर के स्थान पर खड़ा होकर तथा शैतानों के राजा की भूमिका ग्रहण कर अशिष्टता के साथ परमेश्वर को धरती की सीमाओं से बाहर धकेल देता है। कितनी बेहूदा बात है! यह आदमी को उससे गहरी घृणा करने के लिए बाध्य कर देता है। ऐसा लगता है कि परमेश्वर और वह कट्टर दुश्मन हैं, और दोनों सह-अस्तित्व में नहीं रह सकते। वह व्यवस्था की पहुँच से बाहर आज़ाद घूमता है[14] और परमेश्वर को दूर भगाने की योजना बनाता है। ऐसा है यह शैतानों का राजा! इसके अस्तित्व को कैसे बरदाश्त किया जा सकता है? यह तब तक चैन से नहीं बैठेगा, जब तक परमेश्वर के काम को ख़राब नहीं कर देता और उसे पूरा खंडहर[15] नहीं बना देता, मानो वह अंत तक परमेश्वर का विरोध करना चाहता हो, जब तक कि या तो मछली न मर जाए या जाल न टूट जाए। वह जानबूझकर खुद को परमेश्वर के ख़िलाफ़ खड़ा कर लेता है और उसके करीब आता जाता है। इसका घिनौना चेहरा बहुत पहले से पूरी तरह से बेनक़ाब हो गया है, जो अब आहत और क्षत-विक्षत[16] है और एक खेदजनक स्थिति में है, फिर भी वह परमेश्वर से नफ़रत करने से बाज़ नहीं आएगा, मानो परमेश्वर को एक कौर में निगलकर ही वह अपने दिल में बसी घृणा से मुक्ति पा सकेगा। परमेश्वर के इस शत्रु को हम कैसे बरदाश्त कर सकते हैं! केवल इसके उन्मूलन और पूर्ण विनाश से ही हमारे जीवन की इच्छा फलित होगी। इसे उच्छृंखल रूप से कैसे दौड़ते फिरने दिया जा सकता है? यह मनुष्य को इस हद तक भ्रष्ट कर चुका है कि मनुष्य स्वर्ग सूर्य को नहीं जानता, और वह अचेत और भावनाशून्य हो गया है। मनुष्य ने सामान्य मानवीय विवेक खो दिया है। शैतान को नष्ट और भस्म करने के लिए क्यों नहीं हम अपनी पूरी हस्ती का बलिदान कर दें, ताकि भविष्य की सारी चिंताएँ दूर कर सकें और परमेश्वर के कार्य को जल्दी से अभूतपूर्व भव्यता तक पहुँचने दें? बदमाशों का यह गिरोह मनुष्यों की दुनिया में आ गया है और यहाँ उथल-पुथल मचा दी है। वे सभी मनुष्यों को एक खड़ी चट्टान की कगार पर ले आए हैं और गुप्त रूप से उन्हें वहाँ से धकेलकर टुकड़े-टुकड़े करने की योजना बना रहे हैं, ताकि फिर वे उनके शवों को निगल सकें। वे व्यर्थ ही परमेश्वर की योजना को खंडित करने और उसके साथ जुआ खेलकर पासे की एक ही चाल में सब-कुछ दाँव पर लगाने[17] की आशा करते हैं। यह किसी भी तरह से आसान नहीं है! अंतत: शैतानों के राजा के लिए सलीब तैयार कर दिया गया है, जो सबसे घृणित अपराधों का दोषी है। परमेश्वर सलीब का नहीं है। वह पहले ही शैतान के लिए उसे किनारे रख चुका है। परमेश्वर अब से बहुत पहले ही विजयी होकर उभर चुका है और अब मानवजाति के पापों पर दुख महसूस नहीं करता, लेकिन वह समस्त मानवजाति के लिए उद्धार लाएगा।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'कार्य और प्रवेश (7)' से उद्धृत

क्या तुम लोग सच में विशाल लाल अजगर से घृणा करते हो? क्या तुम सच में, दिल से इससे घृणा करते हो? मैंने तुम लोगों से इतनी बार क्यों पूछा है? मैं तुमसे यह प्रश्न बार-बार क्यों पूछता हूँ? तुम सबके हृदय में उस बड़े लाल अजगर की क्या छवि है? क्या उसे वास्तव में हटा दिया गया है? क्या तुम लोग सचमुच उसे अपना पिता नहीं मानते हो। सभी लोगों को मेरे प्रश्नों में मेरे अभिप्राय को जानना चाहिए। यह लोगों के क्रोध को भड़काने के लिए नहीं है, न ही मनुष्यों के मध्य विद्रोह को उत्तेजित करने के लिए है, न ही इसलिए है कि मनुष्य अपना मार्ग स्वयं ढूँढ़ सके, परन्तु यह इसलिए है कि लोग अपने आपको उस बड़े लाल अजगर के बंधन से छुड़ा लें। फिर भी किसी को चिंता नहीं करनी चाहिए। सब कुछ मेरे वचनों के द्वारा पूरा हो जाएगा; कोई मनुष्य भागी न हो, और कोई मनुष्य वह काम नहीं कर सकता है जिसे मैं करूँगा। मैं सारी भूमि की हवा को स्वच्छ करूँगा और पृथ्वी पर से दुष्टात्माओं का पूर्ण रूप से नाश कर दूँगा। मैं पहले से ही शुरू कर चुका हूँ, और अपने ताड़ना कार्य के पहले कदम को उस बड़े लाल अजगर के निवास स्थान में आरम्भ करूँगा। इस प्रकार यह देखा जा सकता है कि मेरी ताड़ना पूरे ब्रह्माण्ड के ऊपर आ गई है, और बड़ा लाल अजगर और सभी प्रकार की अशुद्ध आत्माएँ मेरी ताड़ना से बच पाने में असमर्थ होंगी क्योंकि मैं समूची भूमि पर निगाह रखता हूँ। जब मेरा कार्य पृथ्वी पर पूरा हो जाएगा अर्थात्, जब न्याय का युग समाप्त होगा, तब मैं औपचारिक रूप से उस बड़े लाल अजगर को ताड़ना दूँगा। मेरे लोग उस बड़े लाल अजगर की धर्मी ताड़ना को अवश्य देखेंगे, मेरी धार्मिकता के कारण स्तुति बरसाएँगे, और मेरी धार्मिकता के कारण सदा सर्वदा मेरे पवित्र नाम की बड़ाई करते रहेंगे। अब से तुम लोग अपने कर्तव्यों को औपचारिक तौर पर निभा पाओगे, और सारी धरती पर औपचारिक तौर पर मेरी स्तुति करोगे, हमेशा-हमेशा के लिए!

जब न्याय का युग अपने शिखर पर पहुँचेगा, तो मैं अपने कार्य को समाप्त करने में जल्दबाजी नहीं करूँगा, बल्कि मैं उसमें ताड़ना के युग के प्रमाण को जोडूँगा और अपने सभी लोगों को इस प्रमाण को देखने दूँगा; और इस से अत्यधिक फल उत्पन्न होंगे। यह प्रमाण वह माध्यम है जिसके द्वारा मैं उस बड़े लाल अजगर को ताड़ना दूँगा, और मैं अपने लोगों को उनकी आँखों से यह सब देखने दूँगा ताकि वे मेरे स्वभाव को और भी अच्छी तरह से जान सकें। जब उस बड़े लाल अजगर को ताड़ना दी जाती है, तब उस समय मेरे लोग मुझ में आनंद करते हैं। उस बड़े लाल अजगर के लोगों को उसके ही विरुद्ध उभारना और विद्रोह करवाना मेरी योजना है, और वह तरीका है जिस से मैं अपने लोगों को पूर्ण करता हूँ, और मेरे सभी लोगों के लिए जीवन में आगे बढ़ने के लिए यह एक बड़ा अवसर है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन' के 'अध्याय 28' से उद्धृत

परमेश्वर बुरी आत्माओं के कार्य के एक हिस्से का उपयोग मानव-जाति के एक हिस्से को पूर्ण बनाने के लिए करने का इरादा रखता है, ताकि ये लोग हैवानों के अन्यायपूर्ण कार्यों को पूरी तरह देखने में सक्षम हो सकें, और पूरी मानव-जाति वास्तव में अपने "पूर्वजों" को जान सकें। केवल इसी तरह से, न केवल शैतान के वंशजों को बल्कि शैतान के पूर्वजों को भी त्यागकर, मनुष्य पूरी तरह से स्वतंत्र हो सकते हैं। बड़े लाल अजगर को पूरी तरह से हराने के पीछे यह परमेश्वर का मूल इरादा है, ताकि सभी मनुष्य बड़े लाल अजगर का असली स्वरूप जान लें, उसका मुखौटा पूरी तरह से नोचकर उसका वास्तविक रूप देख सकें। परमेश्वर यही प्राप्त करना चाहता है, और यही पृथ्वी पर उसके द्वारा किए गए समस्त कार्य का अंतिम लक्ष्य है; और यही वह सभी मनुष्यों में संपन्न करना चाहता है। इसे परमेश्वर के प्रयोजन के लिए सभी चीजों को जुटाने के रूप में जाना जाता है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचनों के रहस्य की व्याख्या' के 'अध्याय 41' से उद्धृत

परमेश्वर की गवाही देने के लिए और विशाल लाल अजगर को शर्मिंदा करने के लिए व्यक्ति के पास एक सिद्धांत का होना जरूरी है, और जरूरी है एक शर्त को पूरा करना : उसे परमेश्वर को दिल से प्रेम करना चाहिए और परमेश्वर के वचनों में प्रवेश करना चाहिए। यदि तुम लोग परमेश्वर के वचनों में प्रवेश नहीं करते तो तुम्हारे पास शैतान को शर्मिंदा करने का कोई तरीका नहीं होगा। अपने जीवन के विकास द्वारा, तुम विशाल लाल अजगर को त्यागते हो और उसका घोर तिरस्कार करते हो; केवल इसी तरह विशाल लाल अजगर को सही में शर्मिंदा किया जा सकता है। जितना अधिक तुम परमेश्वर के वचनों को अभ्यास में लाने के इच्छुक होगे, उतना ही अधिक यह परमेश्वर के प्रति तुम्हारे प्रेम और उस विशाल लाल अजगर के प्रति तुम्हारी घृणा का सबूत होगा; जितना अधिक तुम परमेश्वर के वचनों का पालन करोगे, उतना ही अधिक यह सत्य के लिए तुम्हारी लालसा का सबूत होगा। जो लोग परमेश्वर के वचन की लालसा नहीं करते हैं वे बिना जीवन के होते हैं। ऐसे लोग वे लोग होते हैं जो परमेश्वर के वचनों से बाहर ही रहते हैं और जो सिर्फ धर्म से जुड़े होते हैं। जो लोग सचमुच परमेश्वर पर विश्वास करते हैं उनकी परमेश्वर के वचनों की समझ ज्यादा गहरी होती है, क्योंकि वे परमेश्वर के वचनों को खाते और पीते हैं। यदि तुम परमेश्वर के वचनों के लिए लालायित नहीं हो तो तुम उसके वचनों को सचमुच खा और पी नहीं सकते हो, और यदि तुम्हें परमेश्वर के वचनों का ज्ञान नहीं है, तो तुम्हारे पास परमेश्वर की गवाही देने या उसे संतुष्ट करने का कोई साधन नहीं है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'जो परमेश्वर के आज के कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर की सेवा कर सकते हैं' से उद्धृत

आज तुम पूर्ण बनाए जाने का प्रयास कर सकते हो या अपने बाहरी मनुष्यत्व में बदलाव और क्षमता में विकास के लिए कोशिश कर सकते हो, परंतु प्रमुख महत्व की बात यह है कि तुम यह समझ सको कि जो कुछ आज परमेश्वर कर रहा है, वह सार्थक और लाभकारी है : यह तुम्हें, जो गंदगी की धरती पर पैदा हुए हो, उस गंदगी से बच निकलने और उसे झटक देने में सक्षम बनाता है, यह तुम्हें शैतान के प्रभाव से पार पाने और शैतान के अंधकारमय प्रभाव को पीछे छोड़ने में सक्षम बनाता है। इन बातों पर ध्यान देने से तुम इस अपवित्र भूमि पर सुरक्षा प्राप्त करते हो। आखिरकार तुम्हें क्या गवाही देने को कहा जाएगा? तुम एक गंदगी की भूमि पर पैदा होते हो किंतु पवित्र बनने में, पुन: कभी गंदगी से ओतप्रोत न होने के लिए, शैतान के अधिकार-क्षेत्र में रहकर भी अपने आपको उसके प्रभाव से छुड़ा लेने के लिए, शैतान द्वारा न तो ग्रसित किए जाने के लिए और न ही सताए जाने के लिए, और सर्वशक्तिमान के हाथों में रहने के योग्य हो। यही गवाही और शैतान से युद्ध में विजय का साक्ष्य है। तुम शैतान को त्यागने में सक्षम हो, अपने जीवन में अब और शैतानी स्वभाव प्रकट नहीं करते, इसके बजाय उस स्थिति को जीते हो, जिसे परमेश्वर ने मनुष्य के सृजन के समय चाहा था कि मनुष्य प्राप्त करे : सामान्य मानवता, सामान्य विवेक, सामान्य अंतर्दृष्टि, परमेश्वर से प्रेम करने का सामान्य संकल्प, और परमेश्वर के प्रति निष्ठा। यह परमेश्वर के प्राणी द्वारा दी जाने वाली गवाही है। तुम कहते हो, "हम गंदगी की भूमि पर पैदा हुए हैं, परंतु परमेश्वर की सुरक्षा के कारण, उसकी अगुआई के कारण, और क्योंकि उसने हम पर विजय प्राप्त की है इसलिए, हमने शैतान के प्रभाव से मुक्ति पाई है। हम आज आज्ञा मान पाते हैं, तो यह भी इस बात का प्रभाव है कि परमेश्वर ने हम पर विजय पाई है, और यह इसलिए नहीं है कि हम अच्छे हैं, या हम स्वभावत: परमेश्वर से प्रेम करते थे। चूँकि परमेश्वर ने हमें चुना और हमें पूर्वनिर्धारित किया, इसीलिए आज हम पर विजय पाई गई है, और इसीलिए हम उसकी गवाही देने में समर्थ हुए हैं, और उसकी सेवा कर सकते हैं, ऐसा इसलिए भी है कि उसने हमें चुना और हमारी रक्षा की, इसी कारण हमें शैतान के अधिकार-क्षेत्र से बचाया और छुड़ाया गया है, और हम गंदगी को पीछे छोड़, लाल अजगर के देश में शुद्ध किए जा सकते हैं।" इसके अतिरिक्त, जिसे आज तुम बाहरी रूप से जीते हो, वह यह प्रकट करेगा कि क्या तम्हारे अंदर सामान्य मानवता है, तुम्हारे कहने का कोई अर्थ है, और क्या तुम एक सामान्य व्यक्ति के सदृश जीते हो। जब दूसरे तुम्हें देखें, तो तुम्हें उन्हें यह कहने का मौका नहीं देना चाहिए, "क्या यह बड़े लाल अजगर का स्वरूप नहीं है?" बहनों का आचरण बहनों के लिए शोभनीय नहीं है, भाइयों का आचरण भाइयों के लिए शोभनीय नहीं है, और तुममें संतों जैसा ज़रा भी शिष्टाचार नहीं है। फिर लोग कहेंगे, "कोई आश्चर्य नहीं कि परमेश्वर ने कहा कि वे मोआब के वंशज हैं, वह बिल्कुल सही था!" अगर लोग तुम लोगों को देखें और कहें, "हालाँकि परमेश्वर ने कहा था कि तुम मोआब के वंशज हो, परंतु जिस तरह का जीवन तुम जीते हो, उसने यह साबित कर दिया कि तुमने शैतान के प्रभाव को पीछे छोड़ दिया है; हालाँकि ये चीज़ें अभी भी तुम लोगों के अंदर हैं, लेकिन तुम लोग उनकी ओर से मुँह मोड़ने में सक्षम हो, यह दिखाता है कि तुम लोगों पर पूरी तरह से विजय प्राप्त कर ली गई है।" तुम लोग, जो जीत लिए गए और बचा लिए गए हो, कहोगे, "यह सत्य है कि हम मोआब के वंशज हैं, परंतु हमें परमेश्वर द्वारा बचा लिया गया है, और हालाँकि अतीत में मोआब के वंशज त्यागे और शापित किए गए थे, और इस्राएल के लोगों द्वारा अन्यजातियों में निर्वासित कर दिए गए थे, किंतु आज परमेश्वर ने हमें बचा लिया है। यह सच है कि हम सभी लोगों में सबसे भ्रष्ट हैं—यह परमेश्वर की आज्ञानुसार था, यह सत्य है, और सबके द्वारा मान्य है। परंतु आज हम उस प्रभाव से बच निकले हैं। हम अपने पुरखे का तिरस्कार करते हैं, हम अपने पुरखे से पीठ फेरने को तैयार हैं, उसे पूर्णतः त्यागकर परमेश्वर की समस्त व्यवस्थाओं का पालन करना चाहते हैं, परमेश्वर की इच्छानुसार चलना चाहते हैं और वह हमसे जिन बातों की अपेक्षा करता है, उन्हें हासिल करना चाहते हैं और परमेश्वर की इच्छा पूरी करना चाहते हैं। मोआब ने परमेश्वर को धोखा दिया, उसने परमेश्वर की इच्छा के अनुसार कार्य नहीं किया और परमेश्वर ने उससे घृणा की। परंतु हमें परमेश्वर के हृदय का ख्याल रखना चाहिए, और आज चूँकि हम परमेश्वर की इच्छा को समझते हैं, इसलिए हम परमेश्वर को धोखा नहीं दे सकते, और हमें अपने पुरखे को त्याग देना चाहिए!" पहले मैंने बड़े लाल अजगर को त्यागने के बारे में बात की, और यह मुख्य रूप से लोगों के पुराने पुरखे को त्यागने के बारे में है। यह लोगों पर विजय पाने की एक गवाही है, और बिना इस पर ध्यान दिए कि आज तुम कैसे प्रवेश करते हो, इस क्षेत्र में तुम्हारी गवाही में कमी नहीं होनी चाहिए।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'विजय के कार्य की आंतरिक सच्चाई (2)' से उद्धृत

फुटनोट :

1. "निगल" जाना शैतानों के राजा के शातिर व्यवहार के बारे में बताता है, जो लोगों को पूरी तरह से मोह लेता है।

2. "सहअपराधियों का गिरोह" का वही अर्थ है, जो "गुंडों के गिरोह" का है।

3. "हर तरह का उपद्रव भड़काते" का मतलब है कि कैसे वे लोग, जो राक्षसी किस्म के होते हैं, दंगा फैलाते हैं और परमेश्वर के कार्य को बाधित करते हैं तथा उसका विरोध करते हैं।

4. "दाँतों वाली व्हेल" का इस्तेमाल उपहास के रूप में किया गया है। यह एक रूपक है, जो बताता है कि कैसे मक्खियाँ इतनी छोटी होती हैं कि सूअर और कुत्ते भी उन्हें व्हेल की तरह विशाल नज़र आते हैं।

5. "समस्त बुराइयों के सरगना" बूढ़े शैतान को संदर्भित करता है। यह वाक्यांश चरम नापसंदगी व्यक्त करता है।

6. "निराधार आरोप लगाते हुए" उन तरीकों को संदर्भित करता है, जिनके द्वारा शैतान लोगों को नुकसान पहुँचाता है।

7. "ज़बर्दस्त पहरेदारी" दर्शाता है कि वे तरीके, जिनके द्वारा शैतान लोगों को यातना पहुँचाता है, बहुत ही शातिर होते हैं, और लोगों को इतना नियंत्रित करते हैं कि उन्हें हिलने-डुलने की भी जगह नहीं मिलती।

8. "दूरस्थ" का प्रयोग उपहास में किया गया है।

9. "सुव्यवस्थित, सौम्य मार्गदर्शन" का प्रयोग उपहास में किया गया है।

10. "कृपापात्र" शब्द का प्रयोग उन लोगों का उपहास करने के लिए किया गया है, जो काठ जैसे होते हैं और जिन्हें स्वयं के बारे में कोई जानकारी नहीं होती।

11. "एक के बाद एक दुर्घटनाओं का सामना करता है" इस ओर इशारा करता है कि लोग बड़े लाल अजगर के देश में पैदा हुए थे, और वे अपना सिर ऊँचा रखने में असमर्थ हैं।

12. "पूरा जीवन अर्पित करना" अपमानजनक अर्थ में कहा गया है।

13. "प्राकृतिक रूप से नष्ट न होने वाले" का प्रयोग यहाँ व्यंग्य के रूप में किया गया है, जिसका अर्थ है कि लोग अपने ज्ञान, संस्कृति और आध्यात्मिक दृष्टिकोण में कठोर हैं।

14. "व्यवस्था की पहुँच से बाहर आज़ाद घूमता है" इंगित करता है कि शैतान उन्मत्त होकर आपे से बाहर हो जाता है।

15. "पूरा खंडहर" बताता है कि कैसे उस शैतान का हिंसक व्यवहार देखने में असहनीय है।

16. "आहत और क्षत-विक्षत" शैतानों के राजा के बदसूरत चेहरे के बारे में बताता है।

17. "पासे की एक ही चाल में सब-कुछ दाँव पर लगाने" का अर्थ है अंत में जीतने की उम्मीद में अपना सारा धन एक ही दाँव पर लगा देना। यह शैतान की भयावह और कुटिल योजनाओं के लिए एक रूपक है। इस अभिव्यक्ति का प्रयोग उपहास में किया जाता है।

क. चार पुस्तकें और पाँच क्लासिक्स चीन में कन्फ्यूशीवाद की प्रामाणिक किताबें हैं।

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