97. परमेश्वर के वचनों का प्रचार करने और उनकी गवाही देने के सिद्धांत

(1) व्यक्ति को सत्य की तलाश करने, उसे व्यवहार में लाने, और परमेश्वर के वचनों की वास्तविकता में प्रवेश करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, उस हद तक कि वह अपने वास्तविक अनुभव का उपयोग परमेश्वर के वचनों के प्रचार करने और उनकी गवाही देने के लिए कर सके।

(2) तलाश करने और जाँच-पड़ताल करने वालों के साथ प्रेम और धैर्य से पेश आना चाहिए। उनके विशिष्ट प्रश्नों के जवाब में परमेश्वर के वचनों का चयन करो और उन्हें बढ़ावा दो, ताकि तुम परमेश्वर की गवाही दो।

(3) जब परमेश्वर के चुने हुए लोगों के बीच समस्याएँ हों, तो व्यक्ति को परमेश्वर के प्रासंगिक वचनों के बारे में और भी अधिक सहभागिता करना चाहिए, ताकि उन समस्याओं का सत्य के माध्यम से समाधान हो सके और वास्तविकता में प्रवेश हो सके।

(4) अपने भाई-बहनों की वास्तविक कठिनाइयों और व्यावहारिक समस्याओं का पता लगाने के बाद, एक अनुस्मारक के रूप में और तुम्हें उनकी परवाह है यह बताने के लिए तुम्हें इसका चयन करना चाहिए कि परमेश्वर के किन वचनों की सहभागिता और सम्प्रेषण किया जाए।

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन :

राज्य के युग में, परमेश्वर नए युग की शुरुआत करने, अपने कार्य के साधन बदलने और संपूर्ण युग के लिए काम करने के लिए अपने वचन का उपयोग करता है। वचन के युग में यही वह सिद्धांत है जिसके द्वारा परमेश्वर कार्य करता है। वह देहधारी हुआ ताकि विभिन्न दृष्टिकोण से बोल सके, मनुष्य वास्तव में परमेश्वर को देख सके, जो देह में प्रकट होने वाला वचन है, उसकी बुद्धि और चमत्कार को जान सके। इस तरह का कार्य मनुष्य को जीतने, उन्हें पूर्ण बनाने और ख़त्म करने के लक्ष्यों को बेहतर ढंग से हासिल करने के लिए किया जाता है। वचन के युग में वचन के उपयोग का यही वास्तविक अर्थ है। वचन के द्वारा परमेश्वर के कार्यों को, परमेश्वर के स्वभाव को मनुष्य के सार और इस राज्य में प्रवेश करने के लिए मनुष्य को क्या करना चाहिए, यह जाना जा सकता है। वचन के युग में परमेश्वर जिन सभी कार्यों को करना चाहता है, वे वचन के द्वारा संपन्न होते हैं। वचन के द्वारा ही मनुष्य की असलियत का पता चलता है, उसे नष्ट किया जाता है और परखा जाता है। मनुष्य ने वचन देखा है, सुना है और वचन के अस्तित्व को जाना है। इसके परिणामस्वरूप वह परमेश्वर के अस्तित्व पर विश्वास करता है, मनुष्य परमेश्वर के सर्वशक्तिमान होने और उसकी बुद्धि पर, साथ ही साथ मनुष्य के लिए परमेश्वर के हृदय के प्रेम और मनुष्य को बचाने की उसकी इच्छा पर विश्वास करता है। यद्यपि "वचन" शब्द सरल और साधारण है, देहधारी परमेश्वर के मुख से निकला वचन संपूर्ण ब्रह्माण्ड को झकझोरता है; और उसका वचन मनुष्य के हृदय को रूपांतरित करता है, मनुष्य के सभी विचारों और पुराने स्वभाव और समस्त संसार के पुराने स्वरूप में परिवर्तन लाता है। युगों-युगों से केवल आज के दिन का परमेश्वर ही इस प्रकार से कार्य करता है और केवल वही इस प्रकार से बोलता और मनुष्य का उद्धार करता है। इसके बाद मनुष्य वचन के मार्गदर्शन में, उसकी चरवाही में और उससे प्राप्त आपूर्ति में जीवन जीता है। वह वचन के संसार में जीता है, परमेश्वर के वचन के कोप और आशीषों के बीच जीता है, तथा और भी अधिक लोग अब परमेश्वर के वचन के न्याय और ताड़ना के अधीन जीने लगे हैं। ये वचन और यह कार्य सब कुछ मनुष्य के उद्धार, परमेश्वर की इच्छा को पूरा करने और पुरानी सृष्टि के संसार के मूल स्वरूप को बदलने के लिए है। परमेश्वर ने संसार की सृष्टि वचन से की, वह समस्त ब्रह्माण्ड में मनुष्य की अगुवाई वचन के द्वारा करता है, उन्हें वचन के द्वारा जीतता और उनका उद्धार करता है। अंत में, वह इसी वचन के द्वारा समस्त प्राचीन जगत का अंत कर देगा। तभी उसके प्रबंधन की योजना पूरी होगी। राज्य के युग के शुरू से अंत तक, परमेश्वर अपना कार्य करने और अपने कार्यों का परिणाम प्राप्त करने के लिए वचन का उपयोग करता है। वह अद्भुत कार्य या चमत्कार नहीं करता, वह अपने कार्य को केवल वचन के द्वारा संपन्न करता है। वचन के कारण मनुष्य संपोषण और आपूर्ति पाता है। वचन के कारण मनुष्य ज्ञान और वास्तविक अनुभव प्राप्त करता है। वचन के युग में मनुष्य ने वास्तव में अति विशेष आशीषें पाई हैं। मनुष्य को शरीर में कोई कष्ट नहीं होता और वह परमेश्वर के वचन की भरपूर आपूर्ति का आनंद उठाता है; उन्हें अंधवत तलाश करने या अंधवत यात्रा करने की आवश्यकता नहीं और अपनी निश्चिंतता के बीच वे परमेश्वर के मुख को निहारते हैं, उसे उसके मुख से बातें करते हुए सुनते हैं, वह प्राप्त करते हैं जो परमेश्वर आपूर्ति करता है, और उसे व्यक्तिगत रूप में अपना काम करते हुए देखते हैं। बीते दिनों में मनुष्य को इन सब बातों का आनंद प्राप्त नहीं था और वे इन आशीषों को कभी प्राप्त नहीं कर सकते थे।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'राज्य का युग वचन का युग है' से उद्धृत

मैं पूरे ब्रह्मांड में अपना कार्य कर रहा हूँ, और पूरब से असंख्य गर्जनाएं निरंतर गूँज रही हैं, जो सभी राष्ट्रों और संप्रदायों को झकझोर रही हैं। यह मेरी वाणी है जो सभी मनुष्यों को वर्तमान में लाई है। मैं अपनी वाणी से सभी मनुष्यों को जीत लेता हूँ, उन्हें धारा में बहाता और अपने सामने समर्पण करवाता हूँ, क्योंकि मैंने बहुत पहले पूरी पृथ्वी से अपनी महिमा को वापस लेकर इसे नये सिरे से पूरब में जारी किया है। भला कौन मेरी महिमा को देखने के लिए लालायित नहीं है? कौन बेसब्री से मेरे लौटने का इंतज़ार नहीं कर रहा है? किसे मेरे पुनः प्रकटन की प्यास नहीं है? कौन मेरी सुंदरता को देखने के लिए तरस नहीं रहा है? कौन प्रकाश में नहीं आना चाहता? कौन कनान की समृद्धि को नहीं देखना चाहता? किसे उद्धारकर्ता के लौटने की लालसा नहीं है? कौन उसकी आराधना नहीं करता जो सामर्थ्य में महान है? मेरी वाणी पूरी पृथ्वी पर फैल जाएगी; मैं अपने चुने हुए लोगों के सामने आकर और अधिक वचन बोलूँगा। मैं पूरे ब्रह्मांड के लिए और पूरी मानवजाति के लिए अपने वचन बोलता हूँ, उन शक्तिशाली गर्जनाओं की तरह जो पर्वतों और नदियों को हिला देती हैं। इस प्रकार, मेरे मुँह से निकले वचन मनुष्य का खज़ाना बन गए हैं, और सभी मनुष्य मेरे वचनों को सँजोते हैं। बिजली पूरब से चमकते हुए दूर पश्चिम तक जाती है। मेरे वचन ऐसे हैं कि मनुष्य उन्हें छोड़ना बिलकुल पसंद नहीं करता, पर साथ ही उनकी थाह भी नहीं ले पाता, लेकिन फिर भी उनमें और अधिक आनंदित होता है। सभी मनुष्य खुशी और आनंद से भरे होते हैं और मेरे आने की खुशी मनाते हैं, मानो किसी शिशु का जन्म हुआ हो। अपनी वाणी के माध्यम से मैं सभी मनुष्यों को अपने समक्ष ले आऊँगा। उसके बाद, मैं औपचारिक तौर पर मनुष्य जाति में प्रवेश करूँगा ताकि वे मेरी आराधना करने लगें। मुझमें से झलकती महिमा और मेरे मुँह से निकले वचनों से, मैं ऐसा करूँगा कि सभी मनुष्य मेरे समक्ष आएंगे और देखेंगे कि बिजली पूरब से चमकती है और मैं भी पूरब में "जैतून के पर्वत" पर अवतरित हो चुका हूँ। वे देखेंगे कि मैं बहुत पहले से पृथ्वी पर मौजूद हूँ, यहूदियों के पुत्र के रूप में नहीं, बल्कि पूरब की बिजली के रूप में। क्योंकि बहुत पहले मेरा पुनरुत्थान हो चुका है, और मैं मनुष्यों के बीच से जा चुका हूँ, और फिर अपनी महिमा के साथ लोगों के बीच पुनः प्रकट हुआ हूँ। मैं वही हूँ जिसकी आराधना असंख्य युगों पहले की गई थी, और मैं वह शिशु भी हूँ जिसे असंख्य युगों पहले इस्राएलियों ने त्याग दिया था। इसके अलावा, मैं वर्तमान युग का संपूर्ण-महिमामय सर्वशक्तिमान परमेश्वर हूँ! सभी लोग मेरे सिंहासन के सामने आएँ और मेरे महिमामयी मुखमंडल को देखें, मेरी वाणी सुनें और मेरे कर्मों को देखें। यही मेरी संपूर्ण इच्छा है; यही मेरी योजना का अंत और उसका चरमोत्कर्ष है, यही मेरे प्रबंधन का उद्देश्य भी है : कि सभी राष्ट्र मेरी आराधना करें, हर ज़बान मुझे स्वीकार करे, हर मनुष्य मुझमें आस्था रखे और सभी लोग मेरी अधीनता स्वीकार करें!

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'सात गर्जनाएँ गूँजती हैं—भविष्यवाणी करती हैं कि राज्य के सुसमाचार पूरे ब्रह्मांड में फैल जाएँगे' से उद्धृत

वचन के युग अर्थात सहस्राब्दिक राज्य के युग में प्रवेश करना वह कार्य है जो अभी पूरा किया जा रहा है। अब से परमेश्वर के वचन के बारे में सहभागिता करने का अभ्यास करो। केवल परमेश्वर के वचन को खाने-पीने और अनुभव करने से ही तुम परमेश्वर के वचन को जीने में समर्थ होगे। दूसरे लोगों को आश्वस्त करने के लिए तुम्हें कुछ व्यावहारिक अनुभव पेश करने होंगे। यदि तुम परमेश्वर के वचन की वास्तविकता को नहीं जी सकते तो किसी को भी यकीन नहीं दिलाया जा सकता! परमेश्वर द्वारा उपयोग किए जाने वाले सभी लोग वे हैं जो परमेश्वर के वचनों की वास्तविकता को जी सकते हैं। यदि तुम परमेश्वर की गवाही देने के लिए इस वास्तविकता को पेश नहीं कर सकते तो यह दर्शाता है कि पवित्र आत्मा ने तुममें काम नहीं किया है और तुम पूर्ण नहीं बनाए गए हो। यह परमेश्वर के वचन का महत्व है। क्या तुम्हारे पास ऐसा हृदय है जो परमेश्वर के वचन की प्यास रखता हो? जो परमेश्वर के वचन के प्यासे हैं, उनमें सत्य की प्यास है और केवल ऐेसे ही लोगों को परमेश्वर का अशीष प्राप्त है। भविष्य में, परमेश्वर सभी पंथों और संप्रदायों से बहुत सारी अन्य बातें भी कहेगा। वह सबसे पहले तुम लोगों के बीच बोलता और अपनी वाणी सुनाता है और तुम्हें पूरा करता है और उसके बाद वह नास्तिकों के बीच अपनी बात रखता है और उन्हें जीतता है। वचन के द्वारा सभी लोग ईमानदारी से और पूरी तरह से कायल किए जाएँगे। परमेश्वर के वचन के द्वारा और उसके प्रकाशनों के द्वारा मनुष्य के भ्रष्ट स्वभाव में कमी आती है, उसमें इंसानियत का प्रकटन होता है और मनुष्य के विद्रोही स्वभाव में कमी आती है। वचन मनुष्य में अधिकार के साथ काम करता है और परमेश्वर की ज्योति के भीतर मनुष्य को जीतता है। परमेश्वर वर्तमान युग में जो कार्य करता है, साथ ही उसके कार्य के निर्णायक मोड़, ये सब कुछ परमेश्वर के वचन के भीतर मिल सकते हैं। यदि तुम उसके वचन को नहीं पढ़ते तो तुम कुछ नहीं समझोगे। उसके वचन को खाने-पीने से, भाइयों और बहनों के साथ सहभागिता करके और अपने वास्तविक अनुभव से परमेश्वर के वचन का तुम्हारा ज्ञान व्यापक हो जाएगा। केवल इसी प्रकार से तुम सचमुच वास्तविक जीवन में उसे जी सकते हो।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'राज्य का युग वचन का युग है' से उद्धृत

तुम लोगों में में से प्रत्येक अब जिस कर्तव्य का पालन कर रहा है, चाहे वह किसी फिल्म का फिल्मांकन करना हो या परमेश्वर की गवाही देने के लिए भजन गाना, क्या इंसान के लिए उनका कोई मूल्य है? उनका मूल्य कहाँ होता है? उनका मूल्य लोगों को परमेश्वर के वचनों को पढ़ने और सही रास्ते पर चलने के लिए लाने में है, ताकि वे सभी समझ सकें कि वे सृजित प्राणियों में गिने जाते हैं और सभी सृष्टिकर्ता के सामने आते हैं। क्या उन्हें कई ऐसी समस्याएँ नहीं हैं, जो उन्हें समझ में नहीं आतीं? क्या वे असहाय महसूस नहीं करते? क्या उन्हें खोखलापन महसूस नहीं होता? क्या उन्हें ऐसा नहीं लगता कि वे बिना आध्यात्मिक सहारे के जी रहे हैं? क्या उन्हें जीवन उबाऊ नहीं लगता? इस सब की जड़ क्या है? इसका उत्तर परमेश्वर के वचनों में है। तुम लोग इस आशय से इन कर्तव्यों का पालन करते हो : अपनी सोच को दिशा देने के लिए, परमेश्वर की खोज में मार्गदर्शन पाने के लिए, सही मार्ग खोजने के लिए, सृष्टिकर्ता को खोजने और उसकी संप्रभुता और आयोजनों को स्वीकारने, उनका पालन करने, उन्हें समझने और जानने के लिए। केवल इसी तरह वे समझ पाएँगे कि वे किसलिए जी रहे हैं, उनके जीवन का मूल्य और अर्थ क्या है, और उन्हें कैसे जीना चाहिए। इसलिए, जब तुम लोग अपने कर्तव्यों का पालन करो, तो तुम्हें अपनी प्रार्थना दोगुनी कर देनी चाहिए और खूब मेहनत करनी चाहिए; मेहनती बनो, आलसी नहीं; और सिद्धांतों के अनुसार कार्य करते हुए ज्यादा बार संगति करो। जब परमेश्वर ने इस मानवजाति का सृजन किया, तो उसकी एक प्रबंधन-योजना थी। पिछले कई हजार वर्षों में मानवजाति ने सृष्टिकर्ता की गवाही देने के लिए कोई बड़ी जिम्मेदारी या कर्तव्य नहीं निभाया, और परमेश्वर ने मानवजाति के बीच जो काम किया, वह अपेक्षाकृत विवेकपूर्ण और सरल था। लेकिन अंत के दिनों में चीजें अलग हैं—तुम लोग बड़ी जिम्मेदारी निभाते हो! वह किस रूप में बड़ी है? परमेश्वर के वचनों का प्रचार करने से भी अधिक महत्वपूर्ण यह है कि तुम हर सृजित मनुष्य के सामने परमेश्वर की गवाही दो। इसके अलावा, तुम्हें हर उस सृजित इंसान को सृष्टिकर्ता के सामने लाना भी चाहिए, जिसने परमेश्वर का सुसमाचार सुना है, ताकि वे लोग समझ सकें कि उसने मानवजाति को क्यों बनाया है और एक सृजित मनुष्य के रूप में उन्हें सृष्टिकर्ता के समक्ष वापस आकर उसकी संप्रभुता, व्यवस्थाएँ और आयोजन स्वीकार करने चाहिए। क्या तुम इसे केवल नाचकर या भजन गाकर प्राप्त कर सकते हो? किसी काम के केवल एक पहलू को संपन्न करना पर्याप्त नहीं होगा। तुम्हें सृष्टिकर्ता के कर्मों, संप्रभुता और व्यवस्थाओं की गवाही देने के लिए विविध तरीके अपनाने चाहिए। इस तरह, तब तुम सृष्टिकर्ता के सामने और ज्यादा लोगों को लाने में सक्षम हो पाओगे, ताकि वे उसकी संप्रभुता और व्यवस्थाओं को स्वीकार कर सकें।

— "अंत के दिनों के मसीह की बातचीत के अभिलेख" में 'सृजित प्राणी के रूप में अपने कर्तव्‍यों का भलीभाँति निर्वहन करके ही व्‍यक्ति अपने जीवन को सार्थक बनाता है' से उद्धृत

परमेश्वर के वचन असंख्य घरों में फैलेंगे, वे सबको ज्ञात हो जाएँगे और केवल तभी उसका कार्य संपूर्ण ब्रह्मांड में फैलेगा। कहने का अर्थ है कि परमेश्वर का कार्य संपूर्ण ब्रह्मांड में फैलने के लिए उसके वचनों का फैलना आवश्यक है। परमेश्वर की महिमा के दिन, परमेश्वर के वचन अपना सामर्थ्य और अधिकार प्रदर्शित करेंगे। अनादि काल से लेकर आज तक का उसका हर एक वचन पूरा और घटित होगा। इस प्रकार से, पृथ्वी पर परमेश्वर की महिमा होगी—कहने का अर्थ है, कि उसके वचन पृथ्वी पर शासन करेंगे। सभी दुष्ट लोगों को परमेश्वर के मुँह से बोले गए वचनों से ताड़ित किया जाएगा, और सभी धार्मिक लोग उसके मुँह से बोले गए वचनों से धन्य होंगे, और उसके मुँह से बोले गए वचनों द्वारा स्थापित और पूर्ण किए जाएँगे। वह कोई चिह्न या चमत्कार नहीं दिखाएगा; सब-कुछ उसके वचनों के द्वारा पूर्ण होगा, और उसके वचन तथ्यों को उत्पन्न करेंगे। पृथ्वी पर हर कोई परमेश्वर के वचनों का उत्सव मनाएगा, चाहे वे वयस्क हों या बच्चे, पुरुष, स्त्री, वृद्ध या युवा हों, सभी लोग परमेश्वर के वचनों के नीचे झुक जाएँगे। परमेश्वर के वचन देह में प्रकट होते हैं, और स्वयं को पृथ्वी पर मनुष्यों को ज्वलंत और सजीव रूप में देखने देते हैं। वचन के देहधारी होने का यही अर्थ है। परमेश्वर पृथ्वी पर मुख्य रूप से "वचन देहधारी हुआ" के तथ्य को पूर्ण करने आया है, जिसका अर्थ है कि वह इसलिए आया है, ताकि उसके वचन देह से निर्गत हों (पुराने नियम में मूसा के समय की तरह नहीं, जब परमेश्वर की वाणी सीधे स्वर्ग से निर्गत होती थी)। इसके बाद, उसके समस्त वचन सहस्राब्दि राज्य के युग के दौरान पूर्ण होंगे, वे मनुष्यों की आँखों के सामने दिखाई देने वाले तथ्य बन जाएँगे, और लोग उन्हें अपनी आँखों से बिना किसी विषमता के देखेंगे। यही परमेश्वर के देहधारण का सर्वोच्च अर्थ है। कहने का अर्थ है कि पवित्रात्मा का कार्य देह के माध्यम से, और वचनों के माध्यम से पूर्ण होता है। यही "वचन देहधारी हुआ" और "वचन का देह में प्रकट होना" का सही अर्थ है। केवल परमेश्वर ही पवित्रात्मा की इच्छा को कह सकता है, और देह में परमेश्वर ही पवित्रात्मा की ओर से बात कर सकता है; परमेश्वर के वचन देहधारी परमेश्वर में स्पष्ट किए जाते हैं और अन्य सभी उनके द्वारा मार्गदर्शित होते हैं। कोई भी इससे छूटा नहीं है, सभी इसके दायरे के भीतर मौजूद हैं। केवल इन कथनों से ही लोग जागरूक हो सकते हैं; जो लोग इस तरह से लाभ नहीं उठाते, वे दिवास्वप्न देखते हैं, यदि वे सोचते हैं कि वे कथनों को स्वर्ग से प्राप्त कर सकते हैं। देहधारी परमेश्वर की देह में इस तरह का अधिकार प्रदर्शित होता है, जिससे सभी लोग उस पर पूरी आस्था के साथ विश्वास करते हैं। यहाँ तक कि सर्वाधिक सम्मानित विशेषज्ञ और धार्मिक पादरी भी इन वचनों को नहीं बोल सकते। उन सबको इनके नीचे झुकना चाहिए, और अन्य कोई भी दूसरी शुरुआत करने में सक्षम नहीं होगा। परमेश्वर ब्रह्मांड को जीतने के लिए वचनों का उपयोग करेगा। वह ऐसा अपने देहधारी शरीर के द्वारा नहीं, बल्कि संपूर्ण ब्रह्मांड के सभी लोगों को जीतने के लिए देहधारी हुए परमेश्वर के मुँह से कथनों के उपयोग द्वारा करेगा; केवल यही है वचन का देह बनना, और केवल यही है वचन का देह में प्रकट होना। शायद लोगों को ऐसा प्रतीत होता है, मानो परमेश्वर ने अधिक कार्य नहीं किया है—किंतु परमेश्वर को बस अपने वचन कहने हैं, और लोग पूरी तरह से आश्वस्त और स्तब्ध हो जाएँगे। बिना तथ्यों के, लोग चीखते और चिल्लाते हैं; परमेश्वर के वचनों से वे शांत हो जाते हैं। परमेश्वर इस तथ्य को निश्चित रूप से पूरा करेगा, क्योंकि यह परमेश्वर की लंबे समय से स्थापित योजना है : पृथ्वी पर वचन के आगमन के तथ्य का पूर्ण होना। वास्तव में, मुझे समझाने की कोई आवश्यकता नहीं है—पृथ्वी पर सहस्राब्दि राज्य का आगमन ही पृथ्वी पर परमेश्वर के वचनों का आगमन है। स्वर्ग से नए यरूशलेम का अवरोहण मनुष्य के बीच रहने, मनुष्य के प्रत्येक कार्य और उसके समस्त अंतरतम विचारों में साथ देने के लिए परमेश्वर के वचन का आगमन है। यह भी एक तथ्य है, जिसे परमेश्वर पूरा करेगा; यह सहस्राब्दि राज्य का सौंदर्य है। यह परमेश्वर द्वारा निर्धारित योजना है : उसके वचन एक हज़ार वर्षों तक पृथ्वी पर प्रकट होंगे, और वे उसके सभी कर्मों को व्यक्त करेंगे, और पृथ्वी पर उसके समस्त कार्य को पूरा करेंगे, जिसके बाद मानवजाति के इस चरण का अंत हो जाएगा।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'सहस्राब्दि राज्य आ चुका है' से उद्धृत

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