65. ज़ि‍म्‍मेदारी स्‍वीकार करने और त्‍यागपत्र देने के सिद्धान्‍त

(1) अगर कोई छद्म अगुआ या कार्यकर्ता सत्‍य को स्‍वीकार नहीं करता, व्‍यावहारिक कार्य नहीं कर सकता, और जो लम्‍बे समय तक पवित्र आत्‍मा के कार्य से अलग बना रहा है, उसे ज़ि‍म्‍मेदारी स्‍वीकार करनी चाहिए और त्‍यागपत्र दे देना चाहिए;

(2) जो भी कोई कार्य-व्‍यवस्‍थाओं या उपदेशों और सहभागिता को जारी रखने या अमल में लाने से इन्‍कार कर उस मार्ग में बाधा बनता है जिस पर परमेश्‍वर के चुने हुए लोगों को ले जाया जा रहा है और जिन्‍हें ऊपर से मार्गदर्शन दिया जा रहा है, उसे ज़ि‍म्‍मेदारी स्‍वीकार कर त्‍यागपत्र दे देना चाहिए;

(3) जो भी कोई कार्य-व्‍यवस्‍थाओं का उल्‍लंघन कर और मनमाने ढंग से परमेश्‍वर के घर के कार्य और उसके चुने लोगों को बहुत बड़ी क्षति पहुँचाता है और उनकी तबाही का कारण बनाता है, उसे ज़ि‍म्‍मेदारी स्‍वीकार कर त्‍यागपत्र दे देना चाहिए;

(4) अगर किसी नेता या कार्यकर्ता की, उसके द्वारा किये गये अपराध या बुरे कृत्‍य के लिए, काट-छाँट की जाती है और उससे निपटा जाता है, और वह सच्‍चा पश्‍चाताप कर भविष्‍य में अच्‍छे कार्य का आश्‍वासन देता है, तो ऐसे लोगों को कुछ समय के लिए उनके पदों पर बने रहने देना चाहिए।

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:

जैसे-जैसे तुम्हारा जीवन प्रगति करेगा, तुम्हारे अंदर नया प्रवेश और नयी उच्चतर अंतर्दृष्टि होनी होनी चाहिए, जो हर कदम के साथ और गहरा होता जाता है। इसी में हर इंसान को प्रवेश करना चाहिए। संवाद करने, उपदेश सुनने, परमेश्वर का वचन पढ़ने, या किसी मसले को सँभालकर तुम्हें नयी अंतर्दृष्टि और नई प्रबुद्धता प्राप्त होगी, और तुम पुराने नियमों और पुराने समय में नहीं जियोगे; तुम हमेशा नई ज्योति में जियोगे, और परमेश्वर के वचन से भटकोगे नहीं। इसी को सही पथ पर आना कहते हैं। सतही तौर पर कीमत चुकाने से काम नहीं चलेगा; परमेश्वर का वचन दिन-प्रतिदिन एक उच्चतर क्षेत्र में प्रवेश करता है, और हर दिन नई चीज़ें दिखाई देती हैं, इंसान को भी हर दिन नया प्रवेश करना चाहिए। जब परमेश्वर बोलता है, तो वह उस सबको साकार करता है जो उसने बोला है, और यदि तुम ताल मिलाकर नहीं चलोगे, तो पीछे रह जाओगे। अपनी प्रार्थनाओं में और गहराई लाओ; रुक-रुक कर परमेश्वर के वचनों को खाया-पिया नहीं जा सकता। प्राप्त होने वाली प्रबुद्धता एवं प्रकाशन को और गहरा करो, इससे तुम्हारी धारणाएं और कल्पनाएं धीरे-धीरे कम होती जाएँगी। अपने आकलन को और मज़बूत करो, और जो भी समस्याएँ आएँ, उनके बारे में तुम्हारे अपने विचार और अपना दृष्टिकोण होना चाहिए। अपनी आत्मा में कुछ चीज़ों को समझ कर, तुम्हें बाहरी चीज़ों में परिज्ञान प्राप्त करना और समस्या के मूल को समझने में सक्षम होना चाहिए। यदि तुममें ये चीज़ें न हों, तो तुम कलीसिया की अगुवाई कैसे कर पाओगे? यदि तुम किसी वास्तविकता और अभ्यास के मार्ग के बिना, केवल शब्दों और सिद्धांतों की बात करोगे, तो तुम केवल थोड़े समय के लिए ही काम चला पाओगे। नए विश्वासी इसे थोड़ा-बहुत ही स्वीकार कर पाएँगे, लेकिन कुछ समय बाद, जब नए विश्वासी कुछ वास्तविक अनुभव प्राप्त कर लेंगे, तो तुम उन्हें पोषण नहीं दे पाओगे। फिर तुम परमेश्वर के इस्तेमाल के लिए उपयुक्त कैसे हुए? नई प्रबुद्धता के बिना तुम कार्य नहीं कर सकते। जो लोग नई प्रबुद्धता से रहित हैं, वे नहीं जानते कि अनुभव कैसे करना है, और ऐसे लोग कभी भी नया ज्ञान या नया अनुभव प्राप्त नहीं कर पाते। जीवन आपूर्ति करने के मामले में, वे न तो कभी अपना कार्य कर सकते हैं, न ही परमेश्वर द्वारा इस्तेमाल के लिए उपयुक्त हो सकते हैं। ऐसा व्यक्ति एकदम बेकार होता है, बस रद्दी माल होता है। दरअसल, ऐसे लोग अपने काम में पूरी तरह से अयोग्य होते हैं, और एकदम अनुपयोगी होते हैं। वे लोग अपना काम तो करते ही नहीं, ऊपर से कलीसिया पर अनावश्यक दबाव भी डालते हैं। मैं इन "आदरणीय वृद्ध जनों" को जल्दी से जल्दी कलीसिया छोड़ने के लिए प्रोत्साहित करता हूँ ताकि फिर लोग तुम्हें न देखें।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'जो सच्चे हृदय से परमेश्वर की आज्ञा का पालन करते हैं वे निश्चित रूप से परमेश्वर द्वारा हासिल किए जाएँगे' से उद्धृत

संदर्भ के लिए धर्मोपदेश और संगति के उद्धरण:

सभी झूठे नेताओं, झूठे कार्यकर्ताओं और मसीह-विरोधियों की छँटनी करने और उन्हें हटाने के लिए सर्वोच्च सत्ता द्वारा निम्नलिखित सूचना जारी की जाती है:

जिन भी कुकर्मियों ने निम्नलिखित सात कार्यों में से कोई भी कार्य किया है, उन्हें उसकी ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए, इस्तीफ़ा देना चाहिए और परमेश्वर के चुने हुए लोगों के प्रति अपने पापों को ज़रूर कबूल करना चाहिए ताकि लोगों के गुस्से को ठंडा किया जा सके और परमेश्वर को सुकून दिया जा सके।

1. जिनके पास भी पवित्र आत्मा का कार्य नहीं है, जिनकी संगति में सत्य-वास्तविकता का अभाव है, जो परमेश्वर के चुने हुए लोगों के लिए जीवन में प्रवेश की व्यावहारिक समस्याओं को नहीं सुलझा सकते और जो कोई व्यावहारिक कार्य नहीं कर सकते, उन्हें ज़िम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए और इस्तीफ़ा देना चाहिए।

2. जिन्होंने भी सर्वोच्च सत्ता की कार्य व्यवस्था की निंदा की है, जो कार्य व्यवस्था, उपदेशों और संगति के वितरण से पीछे हटे हैं या जिन्होंने इन्हें करने से इनकार किया है, जिन्होंने दूसरों द्वारा वितरित कार्य व्यवस्था, उपदेशों और संगति को ग्रहण करने की परमेश्वर के चुने हुए लोगों की क्षमता को सीमित किया है और जिन्होंने कलीसिया में प्रवेश अवरुद्ध किया है, उन्हें ज़िम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए और इस्तीफ़ा देना चाहिए।

3. जो भी कार्य व्यवस्थाओं को कार्यान्वित करने से इनकार करते हैं और कलीसिया के नेताओं और उपयाजकों के चुनाव को प्रतिबंधित करते हैं—जिसमें नाममात्र की अनुमति वाले चुनाव भी शामिल हैं—बल्कि जो उम्मीदवारों को बलपूर्वक या गुप्त रूप से नियुक्त करने की कोशिश भी करते हैं, उन्हें ज़िम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए और इस्तीफ़ा देना चाहिए।

4. जिन्होंने कलीसिया से सलाह-मशविरा किए बिना ही, गलती से, परमेश्वर के बहुत-से चुने हुए लोगों को निष्कासित या अलग-थलग कर दिया है, जिन्होंने उन्हें कलीसियाई जीवन में फिर से बहाल करने से मना कर दिया है, जिनमें परमेश्वर के चुने हुए लोगों के प्रति ज़रा भी प्रेम नहीं है और जो परमेश्वर के चुने हुए लोगों की समस्याएँ नहीं पूछते या उनकी परवाह नहीं करते, उन्हें ज़िम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए और इस्तीफ़ा देना चाहिए।

5. जिन्होंने परमेश्वर के चुने हुए लोगों की, कार्य व्यवस्था पर संगति करने और झूठे नेताओं और मसीह-विरोधियों को पहचानने की क्षमता को सीमित किया है, जिन्होंने परमेश्वर के चुने हुए लोगों को कार्य व्यवस्था के अनुसार अपने कर्तव्य पूरे करने और सत्य का अभ्यास करने से रोका है और बेतुके सिद्धांत फैलाए हैं ताकि लोग कलीसिया और नेताओं की आज्ञा मानें, उन्हें ज़िम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए और इस्तीफ़ा देना चाहिए।

6. जो भी परमेश्वर की भेंटों को अपना मानते हुए उनका दुरुपयोग करते हैं या जो कार्य व्यवस्था के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए भेंटों का दुरुपयोग करते हैं, उन्हें ज़िम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए और इस्तीफ़ा देना चाहिए और साथ ही, अपने अपराधों के तथ्यों को पूरी तरह कबूल करना चाहिए और हड़पा गया पूरा धन चुकाना चाहिए।

7. जिन्होंने भी परमेश्वर के चुने हुए ऐसे लोगों से बदला लिया है या उनकी निंदा की है जो झूठे नेताओं और मसीह-विरोधियों को बेनकाब करने की हिम्मत करते हैं और सही के लिए खड़े होते हैं या जिन्होंने उन्हें दबाया है या चोट पहुँचाई है, वे वास्तव में अत्यधिक दुष्ट शैतान हैं और उन्हें ज़िम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए और इस्तीफ़ा देना चाहिए।

जिस भी कुकर्मी ने उपर्युक्त सात कार्यों में से कोई भी कार्य किया है, परमेश्वर का घर अब उसे नेतृत्व या किसी भी स्तर के कार्यकर्ता पदों पर बने रहने की और अनुमति नहीं देगा क्योंकि इन लोगों ने परमेश्वर के कार्य को गंभीर रूप से बाधित किया है और उसमें व्यवधान डाला है, उनमें परमेश्वर के चुने हुए लोगों के प्रति ज़रा भी प्रेम नहीं है, उन्होंने क्रूरतापूर्वक परमेश्वर के चुने हुए लोगों को नुकसान पहुँचाया है, उन्होंने परमेश्वर के चुने हुए लोगों द्वारा सत्य को समझने या उन्हें परमेश्वर के कार्य का पालन करने से रोकने की भरसक कोशिश की है और यहाँ तक कि उन्होंने परमेश्वर के उन चुने हुए लोगों की निंदा की है और उन्हें फँसाया है जो कार्य व्यवस्था का पालन करते हैं और धार्मिकता को बनाए रखते हैं। यह एक अप्रमेय बुराई, एक अतुलनीय पाप है। परमेश्वर के चुने हुए लोग नेतृत्व और कार्यकर्ता पदों पर ऐसे कुकर्मियों को अब और बर्दाश्त नहीं कर सकते और उद्धार के लिए परमेश्वर को पुकारते हैं। यह स्पष्ट है कि इन झूठे नेताओं, कार्यकर्ताओं और मसीह-विरोधियों ने लोगों के गुस्से को भड़काया है और परमेश्वर के स्वभाव का अपमान किया है, इसलिए उन्हें ज़िम्मेदारी लेते हुए इस्तीफ़ा देना चाहिए। यह पूरी तरह से परमेश्वर की इच्छा और लोगों की आकांक्षाओं के अनुरूप है। यदि आज वे ज़िम्मेदारी स्वीकार करते हुए इस्तीफ़ा दे देते हैं और यह दिखा देते हैं कि वे पश्चाताप के लायक हैं, तो परमेश्वर का घर उन्हें दूसरा मौका देगा; उन्हें अपने कलीसियाई जीवन और सौंपे गए समुचित कर्तव्यों को बनाए रखने की अनुमति दे दी जाएगी—और यदि वे सत्य का अनुसरण कर सकते हैं और वास्तव में पश्चाताप करते हैं, तो भी उनके पास बचाए जाने का अवसर होगा। लेकिन यदि वे ज़िम्मेदारी स्वीकार नहीं करते और इस्तीफ़ा नहीं देते और परमेश्वर के घर का विरोध जारी रखते हैं, तो उन्हें मसीह-विरोधी के रूप में परिभाषित किया जा सकता है और तब उन्हें परमेश्वर के चुने हुए लोगों द्वारा निष्कासित और हमेशा के लिए अस्वीकार कर दिया जाना चाहिए।

— 'कार्य व्यवस्था' से उद्धृत

जिन परिस्थितियों में लोगों को ज़िम्मेदारी स्वीकार करने और इस्तीफ़ा देने के ज़रूरत नहीं है, उनके उलट वे उन परिस्थितियों को कैसे पहचानें और निर्धारित करें जिसमें उन्हें ज़िम्मेदारी स्वीकार करते हुए इस्तीफ़ा देना चाहिए? कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं के पास पवित्र आत्मा का कार्य नहीं है और वे ज़रा सा भी व्यावहारिक कार्य करने में अक्षम हैं। वे बस इतना ही कर सकते हैं कि साधारण मामलों को संभाल लें और कुछ तुच्छ, महत्वहीन कार्य कर लें। ऐसे लोगों को ज़िम्मेदारी स्वीकार करते हुए इस्तीफ़ा दे देना चाहिए। यदि वे कुछ व्यावहारिक और लाभकारी कार्य कर सकते हैं, भले ही उनके कार्य का परिणाम उतना उत्पादक न हो, फिर भी अपेक्षाकृत उनकी मानवता बेहतर हो और वे आज्ञापालक हों, तो ऐसे लोगों को उनकी भूमिकाओं में बनाए रखा जा सकता है। अपनी भूमिका में बने रहने की शर्तें क्या हैं? उन्हें कुछ व्यावहारिक कार्य करने में समर्थ होना चाहिए। कम-से-कम उनकी समझ शुद्ध हो, सत्य पर संगति के लिए कुछ वास्तविकताएँ रखते हों, दूसरों को कुछ मदद दें और उन्हें उन्नत बनाएँ और कुछ व्यावहारिक समस्याओं को सुलझाएँ। ऐसे लोगों को खुद पर कोई ज़िम्मेदारी लेने और इस्तीफ़ा देने की ज़रूरत नहीं है। यदि कोई व्यक्ति कोई भी व्यावहारिक कार्य करने के अयोग्य है और हर तरह की रुकावट और बाधा पैदा करता है और साथ ही, उसे यह भी नहीं पता कि उसे किस तरह का कार्य करना चाहिए और केवल तभी कार्य करता है जब दूसरे उसे बताते हैं कि क्या वह क्या करे, तो ऐसे व्यक्ति को इस्तीफ़ा दे देना चाहिए। अब तक ये सिद्धांत तुम लोगों को स्पष्ट हो जाने चाहिए, है न? यदि कुछ लोग नहीं जानते कि उन्हें ज़िम्मेदारी लेते हुए इस्तीफ़ा देना चाहिए या नहीं, तो उन्हें परमेश्वर के चुने हुए लोगों से पूछना चाहिए क्योंकि वे ही सर्वाधिक अधिकृत हैं। यदि तुमने आत्म-चिंतन किया है और तुम्हें साफ़ पता है कि अतीत में तुमने कैसा व्यवहार किया है, तुमने सही मायने में पश्चाताप किया है और भविष्य में कुछ व्यावहारिक कार्य करने की गारंटी दे सकते हो, तो तुम्हें खुद पर कोई ज़िम्मेदारी लेते हुए इस्तीफ़ा देने की ज़रूरत नहीं है। यदि तुम कोई भी व्यावहारिक कार्य करने के बिलकुल अयोग्य हो और इस कारण तुम्हें ज़िम्मेदारी स्वीकार करनी और इस्तीफ़ा देना चाहिए, फिर भी तुम्हें लगता है कि ऐसा करके तुम परमेश्वर को धोखा दोगे तो क्या यह वास्तव में उसे धोखा देना है? यह परमेश्वर के चुने हुए लोगों और उसके घर के कार्य के लिए फ़ायदेमंद है। इस्तीफ़ा देने के बाद यदि तुम उन कर्तव्यों के निर्वहन में निष्ठावान रहते हो जिन्हें निभाने में तुम समर्थ हो, जैसे कि सुसमाचार का प्रचार करना, भाइयों और बहनों की मेजबानी करना या कुछ साधारण कार्यों को पूरा करना, तो तुम्हें तुम्हारा स्थान मिल जाएगा। यदि तुम ज़िम्मेदारी स्वीकार करते हुए इस्तीफ़ा नहीं देते और अभी भी नेतृत्व की भूमिका निभाते रहते हो, तो तुम बाधा बन जाओगे। यदि तुम फिर भी इस्तीफ़ा नहीं देते और यही सोचना जारी रखते हो कि इस्तीफ़ा परमेश्वर के प्रति धोखा है तो तुम्हारे सोचने का तरीका विशुद्ध भुलावा है। यदि तुम ज़िम्मेदारी स्वीकार करते हुए इस्तीफ़ा दे देते हो, तो जो रास्ते का पत्थर तुम बन गए हो, वह हट जाएगा और तब तुम एक बाधा नहीं रहोगे। यह परमेश्वर के प्रति धोखा नहीं है; बल्कि यह दिखाता है कि तुम्हारे पास विवेक है। यदि तुम वास्तव में पश्चाताप कर सकते हो तो यह सत्य को स्वीकार करना और परमेश्वर के प्रति समर्पण करना है। यदि तुम बुराई और परमेश्वर का विरोध करना जारी रखते हो, परमेश्वर के चुने हुए लोग जिएँ या मरें, इसकी कोई परवाह नहीं करते तो तुम्हारे पास परमेश्वर का दंड भोगने के सिवाय कोई विकल्प नहीं होगा। न केवल तुम अपनी सारी मान-प्रतिष्ठा खो दोगे, बल्कि परमेश्वर द्वारा नष्ट भी कर दिए जाओगे।

— 'जीवन में प्रवेश पर धर्मोपदेश और संगति' से उद्धृत

पिछला: 64. अगुआओं और कार्यकर्ताओं पर अभियोग लगाने के सिद्धान्‍त

अगला: 66. अगुआओं और कार्यकर्ताओं में बदलाव के सिद्धान्‍त

अब बड़ी-बड़ी विपत्तियाँ आ रही हैं और वह दिन निकट है जब परमेश्वर भलाई का प्रतिफल देगें और बुराई को दण्ड देंगे। हमें एक सुंदर गंतव्य कैसे मिल सकता है?

संबंधित सामग्री

610 प्रभु यीशु का अनुकरण करो

1पूरा किया परमेश्वर के आदेश को यीशु ने, हर इंसान के छुटकारे के काम को,क्योंकि उसने परमेश्वर की इच्छा की परवाह की,इसमें न उसका स्वार्थ था, न...

वचन देह में प्रकट होता है न्याय परमेश्वर के घर से शुरू होता है अंत के दिनों के मसीह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अत्यावश्यक वचन परमेश्वर के दैनिक वचन परमेश्वर का आगमन हो चुका है, वह राजा है सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों का संकलन सत्य का अभ्यास करने के 170 सिद्धांत मेमने का अनुसरण करो और नए गीत गाओ राज्य का सुसमाचार फ़ैलाने के लिए दिशानिर्देश परमेश्वर की भेड़ें परमेश्वर की आवाज को सुनती हैं परमेश्वर की आवाज़ सुनो परमेश्वर के प्रकटन को देखो राज्य के सुसमाचार पर अत्यावश्यक प्रश्न और उत्तर मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवों की गवाहियाँ विजेताओं की गवाहियाँ मैं वापस सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पास कैसे गया

सेटिंग्स

  • इबारत
  • कथ्य

ठोस रंग

कथ्य

फ़ॉन्ट

फ़ॉन्ट आकार

लाइन स्पेस

लाइन स्पेस

पृष्ठ की चौड़ाई

विषय-वस्तु

खोज

  • यह पाठ चुनें
  • यह किताब चुनें