144 मैं आजीवन मसीह का अनुसरण करने की प्रतिज्ञा लेती हूँ

1 मुख्य भूमि चीन, जहाँ चीनी सरकार के शैतानों ने सत्ता पर कब्ज़ा किया हुआ है, वाकई एक अंधकार और आतंक की धरती है। मैं परमेश्वर के प्रकटन और कार्य का उपदेश देती और गवाही देती हूँ, लेकिन सरकार मेरा पीछा करती है। मैं अक्सर पुलिस के साइरेन की आवाज़ सुनती हूँ। मुझ पर लगातार गिरफ़्तारी और जेल जाने की तलवार लटकती रहती है। चीन हैवानों का महल है, जहाँ शैतान की सत्ता है; यहाँ ईसाइयों के लिये कोई आसरा नहीं है। पता नहीं वो दिन कब आएगा, जब मैं सामान्य ढंग से सभा और अपने कर्तव्य का निर्वाह कर पाऊँगी, और मुझे पुलिस द्वारा पकड़े जाने के डर से छुपना नहीं पड़ेगा? मैं परमेश्वर के वचनों को शांति से कब पढ़ पाऊँगी, और ऐसा कब होगा जब मुझे ख़ानाबदोश की तरह नहीं रहना पड़ेगा? यह "धार्मिक आज़ादी और जीने का अधिकार" क्या होता है? यह सब हैवानों के सरगना की कपटपूर्ण मूर्खता के सिवा कुछ नहीं है। इतनी बड़ी दुनिया में किसको पता है कि चीनी ईसाइयों का इस तरह उत्पीड़न हो रहा है?

2 मैं कितनी ख़ुशनसीब हूँ कि मैंने परमेश्वर के प्रकटन और कार्य को देखा है, फिर भी बड़े लाल अजगर के द्वारा मेरा पीछा किया जाता है, मेरा दमन किया जाता है, और मुझे मजबूरन अपना घर छोड़ना पड़ा है, अपने प्रियजनों से बिछड़ना पड़ा है। मुझे चीनी सरकार के दरिंदों से नफ़रत है जिनमें इंसानियत नाम की कोई चीज़ नहीं है। उत्पीड़न, मुश्किलों और परीक्षणों के ज़रिये, मैंने साफ़ तौर पर इन दरिंदों के घिनौने चेहरे देख लिये हैं। स्वर्गिक मार्ग उतार-चढ़ावों से भरा है—मगर परमेश्वर का साथ मेरे दिल को सुकून देता है। इन मुश्किलों के बीच, मैं परमेश्वर के प्रेम की अनुभूति करती हूँ; उसके अनुग्रह का ख़्याल करके, मेरे दिल में मधुरता आ जाती है। परमेश्वर की देखभाल और अप्रकट सुरक्षा के कारण मैं बार-बार शेर के मुँह में जाने से बचती रही हूँ। लगातार ख़तरों और मुश्किलों के बीच, परमेश्वर के वचनों ने मेरी आस्था को और मज़बूत किया है। यह देखकर कि परमेश्वर सर्वशक्तिमान है, और हर चीज़ पर उसका शासन है, मेरा संकल्प और दृढ़ हुआ है कि मैं उसका अनुसरण करूँ।

3 मैंने चीनी सरकार के हाथों बेइंतिहा दुख और उत्पीड़न सहे हैं; इससे ज़ाहिर है कि मेरी कद-काठी बहुत ही लघु है। परीक्षणों और शुद्धिकरण के बीच, मेरा शरीर दुर्बल है; मेरे भीतर बहुत अधिक नकारात्मकता और शिकायतें भरी हुई हैं। लेकिन फिर भी, समय आने पर, परमेश्वर के वचन मुझे प्रबुद्ध और प्रकाशित करते हैं, मुझे बल देते हैं, और इस योग्य बनाते हैं कि मैं मज़बूती से खड़ी रह सकूँ। मुश्किलों में, मैं परमेश्वर के प्रेम की, उसकी सुरक्षा की अनुभूति करती हूँ और मैं बड़े लाल अजगर से और भी ज़्यादा घृणा करने लगती हूँ। परीक्षणों से गुज़र कर मैं अनेक सत्यों को समझती हूँ; मेरा भ्रष्ट स्वभाव शुद्ध हो रहा है, और मैं मसीह का अनुसरण करने के लिये सब कुछ त्याग देती हूँ। मैं परमेश्वर के रूबरू रह चुकी हूँ, हालाँकि स्वर्गिक मार्ग ऊबड़-खाबड़ और मुश्किलों से भरा है, लेकिन मैंने पहचान लिया है कि मसीह सत्य है—भले ही मुझे जेल में सड़ना पड़े, मैं आजीवन मसीह का अनुसरण करने की प्रतिज्ञा लेती हूँ।

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