सत्य को खोजने वाले सभी लोगों का हम से सम्पर्क करने का स्वागत करते हैं

मसीह के न्याय के अनुभव की गवाहियाँ

ठोस रंग

विषय-वस्तुएँ

फॉन्ट

फॉन्ट का आकार

लाइन स्पेस

पृष्ठ की चौड़ाई

0 खोज परिणाम

कोई परिणाम नहीं मिला

`

45. मेरे जीवन सिद्धांतों ने मुझे टूटा हुआ छोड़ दिया

चैंगकाई बेंझी सिटी, लिआओनिंग प्रदेश

एक सामान्य वाक्यांश “अच्छे लोग सबसे पीछे रह जाते हैं”, ऐसी बात है जिससे मैं बेहद निजी तौर पर परिचित हूं। मेरे पति और मैं पूरी तरह से निष्कपट लोग थे: जब ऐसे मामले आते थे जिनमें हमारा खुद का निजी लाभ या हानि शामल हो, तो हम दूसरों के साथ झगड़ा करने या उलझने वाले लोगों में से नहीं थे। हम जहां धीरज धर सकते थे हम धीरज धरते थे, हम जहां समझौता कर सकते थे, वहां हम समझौता करने की पूरी कोशिश करते थे। परिणामस्वरूप, अक्सर ही दूसरों द्वारा हमें धोखा दिया जाता और हमारा शोषण किया जाता था। वाकई यह लगता था कि जीवन में, “अच्छे लोग सबसे पीछे रह जाते हैं” — अगर तुम के दिल में बहुत ज्यादा अच्छाई हो, अगर तुम अपने मामलों में बहुत समझौता कर रहे हो और शालीन हो, तो तुम छले जाने के लिए काफी जिम्मेदार हो। अपने मन में इन विचारों को रखते हुए, मैंने इन सभी शोषणों से खुद को बचाने और निराश में और न जीने का संकल्प लिया: भविष्य के मामलों में और दूसरों के साथ निपटने में, मैं बहुत समझौता न करने का संकल्प लिया। मेरे सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कार्य को स्वीकार कर लेने के बाद भी, मैंने अपने आचरण और दूसरों के साथ अपने संवाद में इस सिद्धांत को लागू किया।

एक समय, मैं एक बहन के साथ अपने कर्तव्यों को पूरा करने के लिए काम कर रही थी। यह बहन अक्सर ही मेरी अयोग्यताओं और कमियों पर उंगली उठाया करती थी; मुझे ऐसा लगता था कि वह हर तरीके में मुझे दबा रही थी। आरंभ में मैंने सोचा: खुद से घर से दूर होना, कुछ सहनशीलता का प्रयोग करने की कोशिश करना आसान नहीं है। बाद में, हालांकि, उस बहन के अपनी आलोचनाओं में निर्दयी साबित होने के बाद, मैं अंतत: उस “अच्छे लोग सबसे पीछे रह जाते हैं” वाक्यांश के बारे में सोचा। मुझे ऐसा लगा कि वह बहन जरूरत यह जान गई होगा कि मैं बहुत ज्यादा अच्छी थी और इसीलिए आसान लक्ष्य थी और उसने छोटे—मोटे और महत्वहीन मामलों पर भी बहुत ज्यादा ध्यान देकर मेरे लिए बातों को मुश्किल बनाने का फैसला लिया था। मैं निर्णय लिया कि मैं और ज्यादा समझौता करने या उसका बर्ताव सहने वाली नहीं थी, इसलिए मैंने अपने अंदर दबी हुई उजड्ड ऊर्जा को इकट्ठा करती और उसे आघात जैसी निंदा में छोड़ देती, और तब ही रुकती जब वह बहन एक भी शब्द कहने की हिम्मत न कर पाती। बाद में, उस बहन ने मुझे उसके साथ संवाद करने के लिए कहा और भरोसा दिलाया कि उसे आभास हो गया है कि उसने बात करने और व्यवहार का तरीका काफी अमानवीय था और उसने उम्मीद की कि मैं उसे माफ कर पाउंगी। उसने यह भी कहा कि परमेश्वर ने इस परिस्थिति की योजना बनाई थी और उसने उससे निपटने के लिए मुझे एक माध्यम के रूप में चुना। जब मैंने यह सुना, तो तुम सोच सकते हो कि मैं कितनी खुश हुई, जैसे कि मैं एक जंग से जीतकर आया एक चार सितारा वाला सेनानायक हूं। इसके साथ ही, मैं यह तक मान गई कि “अच्छे लोग सबसे पीछे रह जाते हैं” वाक्यांश के कई सारे फायदे भी हैं।

हाल ही में, कलीसिया द्वारा जारी “शैतान की 100 चालें जिन पर भ्रष्ट मनुष्य अस्तित्व के लिए भरोसा करते हैं” को पढ़ते हुए, मैंने एक अवतरण पढ़ा जिसमें कहा गया था: “'अच्छे लोग सबसे पीछे रह जाते हैं।' … शैतान द्वारा हज़ारों सालों से मानवता को भ्रष्ट किया गया है और ऐसी अनगिनत धोखे हैं जिनका प्रयोग शैतान लोगों को मन परिवर्तन करने के लिए करता है। यहां हमने ऐसे 100 धोखों का वर्णन किया है जिसे मानवता जीवन में उनका मार्गदर्शन करने के लिए बहुमूल्य सूक्तियों के रूप में स्वीकार करती है। ये धोखें मनुष्य के दिल की गहराई में पहले से ही घर कर चुके हैं; अगर सत्य से सज्जित न हो, तो मनुष्य इन धोखों की सच्ची प्रकृति का अनावरण करने में ज्यादा असक्षम होते हैं। अगर मनुष्य जीने के लिए सूक्तियों और सिद्धांतों के रूप में लगातार शैतान के इन धोखों को थामे रखेगा, तो भ्रष्ट मानवता को कभी भी उद्धार हासिल नहीं होगा।” इस सहभागिता से इस अवतरण को पढ़ने के बाद, मैं अचानक ही समझ गई, जैसे कि लंबे सपने से जागी हूं: “अच्छे लोग सबसे पीछे रह जाते हैं” वाक्यांश मानव जाति को राज़ी और भ्रष्ट करने के​ लिए शैतान द्वारा निर्मित एक धोखा है। परमेश्वर कहता है कि दूसरों के साथ हमारे वार्तालाप में, हमें स्वीकार्य करने वाला, धैर्यवान, सहिष्णु और क्षमाशील होना चाहिए। साफ तौर पर, शैतान के जीवन का सिद्धांत “अच्छे लोग पीछे रहते हैं”, हमें अच्छाई से दूर और बुराई की ओर ले जाता है, हमें दूसरों से व्यवहार करते हुए बहुत ज्यादा अच्छा और शांतचित्त न रहना सिखाता है। खुद को बचाने के लिए, हमें “आंख के बदले आंख, दांत के बदले दांत” लेना चाहिए, हमें कठोर, बर्बर और बुरा बनना चाहिए। मैंने जाना कि “अच्छे लोग सबसे पीछे रह जाते हैं” एक धोखे को प्रकट करता है, जो सत्य से बिल्कुल विपरीत है, यह शैतान का तर्क है, यह शैतान की नकारात्मकता से संबं​ध रखता है, जो बड़े लाल अजगर की एक खराबी है। शैतान इन दिखावटी 'सिद्धांतों' के माध्यम से कार्य करता है, ताकि मनुष्य एक—दूसरे के लिए चाल चलने हेतु भ्रमित हो जाए, निर्दयता से कत्ल करें और जिद और अनंत प्रतिस्पर्धा करें, और जब तक उनमें बिल्कुल भी मानवता न रह जाए तो किसी के भी समक्ष समर्पण न करें। इस तरह से, मनुष्य खुद शैतान जैसा ही भ्रष्ट हो जाता है, बलिदान की वस्तुएं इसके साथ दफन हो जाता है, और शैतान सभी मानवता को भ्रष्ट करने और निगलने के अपने लक्ष्य को हासिल कर लेता है। मैं इस धोखें को समझ नहीं पाई और “अच्छे लोग सबसे पीछे रह जाते हैं” को स्वीकार करने और सम्मान देने वाले सत्य के रूप में मानने लगी। मैंने सोचा कि मैं बहुत ज्यादा अच्छी नहीं बन सकती या समझौता नहीं कर सकती, और कि दूसरों के साथ निपटने में धैर्यवान या सहिष्णु होना मूर्खों और अज्ञानियों का तरीका है और इससे मैं केवल धोखे और शोषण का शिकार ही बनूंगी। चूंकि मैंने इस धोखे को हमेशा ही जीने का सिद्धांत बनाया हुआ था, इसलिए जब उस बहन ने मेरी कमियों को पहचानने और बेहतरीन के लिए उनमें बदलाव लाने में मेरी मदद करने के लिए मुझे वे कमियां बताई, तो न केवल मैंने उसकी टिप्पणियों को स्वीकार नहीं किया, बल्कि असल में मैंने सोचा कि वह मुझे तंग कर रही थी और छोटी—मोटी बातों पर ज्यादा ध्यान दे रही थी। परिणामस्वरूप, मैंने अपने अंदर के पशु को बाहर निकाला, एक दानव जैसे बर्ताव किया। यहां तक कि जब उस बहन ने खुद को अपमानित किया और मुझसे माफी मांगी, तो भी मैंने खुद को लेकर ज्ञान अर्जित नहीं किया या शर्मिंदगी महसूस नहीं की, बल्कि इसके विपरीत यह सोचते हुए एक जीत जैसी खुशी जाहिर की, कि उस बहन ने अंतत: 'हार स्वीकार' की क्योंकि मैं “अच्छे लोग सबसे पीछे रह जाते हैं” के अपने सिद्धांत पर अटल थी। 'इस जीत' को पाकर, मैंने शैतान के इस सिद्धांत का समर्थन और प्रशंसा करने को लेकर और भी प्रोत्साहन महसूस किया। मैं कितनी बेहूदा, कितनी निरर्थक थी! मैं अच्छाई के लिए बुराई को चुनते हुउ, चीजों को पूरी तरह से बिगाड़ दिया था; मैं असल में तर्क—वितर्क कर पाई थी! परमेश्वर का अंतिम कार्य मानवता को शैतान की खराबी से शुद्ध करना, और उनके भ्रष्ट स्वभाव को बदलने के लिए सत्य का प्रयोग करना है। हालांकि, मेरी खुद की स्थिति में, मैंने सत्य की खोज नहीं की थी, या मेरे अंदर मौजूद शैतान की खराबी को पहचानने की कोशिश नहीं की थी, न ही मैंने खुद को बदलने के लिए सत्य का अभ्यास किया था। बल्कि, मैं शैतान के धोखों को थामे रखा और सत्य को नकार दिया। अगर मैंने ऐसा ही करना जारी रखा होता, तो मैं कभी भी खुद को समझना शुरू नहीं करता। मैं कभी भी सत्य हासिल नहीं कर पाता और अपने स्वभाव में बदलाव नहीं ला पाता। अंत में, परमेश्वर द्वारा मुझे नष्ट कर दिया जाता, जैसा कि शैतान का भाग्य है।

तुम्हारी प्रबंधन और रोशनी के लिए परमेश्वर तुम्हारा धन्यवाद, जिससे मैं जान पाया कि शैतान का सिद्धांत “अच्छे लोग सबसे पीछे रह जाते हैं” एक धोखे से अधिक कुछ नहीं है, जिसका प्रयोग शैतान मानव जाति को दिग्भ्रमित और भ्रष्ट करने के लिए करता है। इस वाक्यांश का प्रयोग भ्रष्ट मानव जाति द्वारा एक—दूसरे से लड़ने के लिए एक बहाने और माध्यम के रूप में किया जाता है। यह वाक्यांश सत्य से पूर्णत: विपरीत है, और यह मानव जाति को केवल भ्रष्ट और बर्बाद ही कर सकती है। अगर मनुष्य शैतान की खराबी से अपना पोषण हासिल करता है, अगर वह शैतान के सिद्धांतों के अनुसार कार्य करता है, तो वह केवल और भी ज्यादा भ्रष्ट और बुरा ही बनेगा। वह उत्तरोत्तर कम मानवीय रह जाएगा और परमेश्वर का उत्तरोत्तर ज्यादा विरोध करेगा, परमेश्वर से दूर हो जाएगा। उसे कभी भी परमेश्वर का उद्धार नहीं मिलेगा। सर्वशक्तिमान परमेश्वर, मैं तुम्हारों और सत्य के अपने अनुसरण में अपना पूरा प्रयास डालने का संकल्प लेता हूं, ताकि मैं अपने अंदर शैतान की विभिन्न प्रकार की खराबियों को पहचान सकूं, शैतान के धोखों को पूर्णतया त्याग सकू, और फिर कभी शैतान के सिद्धांतों के अनुसार काम न करूं। मैं सभी मामलों में तुम्हारी इच्छा पाने, और तुम्हारे वचन का पालन करने का संकल्प लेता हूं, ताकि तुम्हारी वचन मेरे दिल के अंदर गहराई में घर कर जाएं और वे सिद्धांत बन जाएं जिससे हम काम करते हैं, वे मानक जिसके विरुद्ध मैं खुद का मापन करता हूं। मुझे पूरी तरह से तुम्हारे वचन के अनुसार जीने दो।

पिछला:मैं सभी की अगुआई स्वीकार करने के लिए राज़ी हूं

अगला:एक सच्ची भागीदारी

शायद आपको पसंद आये