984 परमेश्वर द्वारा पूर्ण किये जाने का मौक़ा गंवाकर तुम हमेशा पछताओगे

1 इस राह पर आज तक हम चल पाएं हैं क्योंकि यह परमेश्वर ने निर्धारित किया था, इसलिए ऐसा मत सोचना कि तुम कुछ ख़ास हो या तुम बदकिस्मत हो—कोई भी परमेश्वर के वर्तमान कार्य के बारे में दावा नहीं करेगा, नहीं तो तुम्हारे टुकड़े-टुकड़े हो जाएंगे। परमेश्वर के कार्य के माध्यम से मेरे पास प्रकाश आया है, और चाहे कुछ भी हो, परमेश्वर इस समूह के लोगों को पूर्ण करेगा और उसका कार्य कभी भी बदला नहीं जा सकता—वह इन लोगों को रास्ते के अंत तक लाने वाला है और पृथ्वी पर अपना काम पूरा करने वाला है। यह कुछ ऐसा है जिसे हम सबको समझना चाहिए।

2 अधिकांश लोग "निरंतर आगे देखने वाले" और अतृप्त रहते हैं; उन सभी की परमेश्वर के वर्तमान चिंतित इरादों की समझ में कमी है, इसलिए उन सभी को भाग जाने के विचार आते हैं। वे हमेशा एक जंगली घोड़े की तरह अपनी लगाम फेंक कर जंगल में घूमने निकल जाना चाहते हैं, लेकिन कम ही ऐसे लोग हैं जो कनान की अच्छी भूमि में बसकर मानव जीवन के मार्ग की तलाश करना चाहते हैं। दूध और शहद बहने वाली भूमि में प्रवेश कर लेने के बाद, अगर लोग इसका आनंद न लें, तो वे और क्या चाहते हैं? सच कहूं तो, कनान की अच्छी भूमि के बाहर हर जगह जंगल ही जंगल है। यहां तक कि जब लोग आराम के स्थान में प्रवेश करते हैं तो भी वे अपने कर्तव्य को पूरा करने में असमर्थ रहते हैं; क्या वे वेश्या नहीं हैं?

3 यदि तुमने इस माहौल में परमेश्वर द्वारा तुम्हें पूर्ण करने का अवसर गंवा दिया है, तो तुम्हें शेष दिनों में पश्चाताप होगा; तुम्हें अत्यंत पछतावा महसूस होगा। तुम मूसा की तरह हो जाओगे जो केवल कनान की भूमि को देखता रहता था और उसका आनंद नहीं ले पाया था, अपनी खाली मुट्ठी ज़ोर-से दबाता था और पछतावे से भरकर मृत्यु को प्राप्त हो गया था—क्या तुम्हें नहीं लगता है कि यह शर्मनाक है? क्या तुम्हें नहीं लगता कि दूसरों द्वारा स्वयं का मज़ाक उड़ाया जाना एक शर्मनाक बात है? क्या तुम तैयार हो कि दूसरे तुम्हें अपमानित करें? क्या तुम्हारे पास वह दिल नहीं जो अपने लिए अच्छा काम करने की कोशिश करे? क्या तुम नहीं चाहते कि तुम एक सम्माननीय और ईमानदार व्यक्ति बनो जिसे परमेश्वर ने पूर्ण किया है? क्या तुम वास्तव में एक ऐसे व्यक्ति हो जिसमें संकल्प की कमी है? तुम दूसरी राहों पर चलने के लिए तैयार नहीं हो, लेकिन तुम उस मार्ग पर भी चलने के लिए तैयार नहीं हो जिसे परमेश्वर ने तुम्हारे लिए निर्धारित किया है? क्या तुम स्वर्ग की इच्छा के विरुद्ध जाने की हिम्मत रखते हो? चाहे तुम्हारा कौशल जितना भी महान हो, क्या तुम वास्तव में स्वर्ग को अपमानित कर सकते हो?

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "मार्ग... (7)" से रूपांतरित

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