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24. मैंने साफ तौर पर अपनी सही कद—काठी समझी

डिंग ज़ियांग तेंगज़ोउ सिटी, शैंडॉन्ग प्रदेश

एक बार मैं जिस कलीसिया में उपस्थित हुई थी, उसके अगुआओं की संगति में, कलीसिया के नव चयनित अगुआ ने कहा था: “मेरी कद-काठी पर्याप्त नहीं है। मुझे लगता है कि मैं इस कर्तव्य के निर्वहन के लिए उपयुक्‍त नहीं हूं। मैं कई चीजों से दबाव महसूस करती हूं, इस हद तक कि मैं लगातार कई दिनों और रातों तक सो भी नहीं पाई हूं।” उस समय, मैं परमेश्वर के अपने अनुसरण में भार ढो रही थी, तो मैं उसके साथ संचार किया: “सारे कार्य परमेश्वर द्वारा किये जाते हैं; मनुष्य तो बस थोड़ा सा सहयोग करता है। अगर हम भार महसूस करते हो, तो ज्यादा से ज्यादा परमेश्वर के समक्ष प्रस्तुत होने और परमेश्वर पर भरोसा करने से, निश्चित रूप से हम परमेश्वर की सर्वशक्ति और बुद्धि को समझ पाएंगे। अपने काम से बोझ महसूस करना अच्‍छी बात है। लेकिन अब बोझ तनाव बन जाता है, तो वह बाधा बन जाएगा, और यह नकारात्मकता और यहां तक कि परमेश्वर के प्रति गलतफहमी भी लाएगा।” परमेश्वर के मार्गदर्शन में, मैंने महसूस किया कि मेरे संचार खास तौर पर प्रकाशित थे। उस बहन ने भी यह माना कि वह ऐसी स्थिति में थी, जहां उसके दिल में परमेश्वर के लिए स्थान नहीं था, और कि वह परमेश्वर के भरोसे रहने की जगह यह खुद कर रही थी, और इस तरह से उसने प्रवेश का मार्ग खोजा। मैं उस समय काफी खुश थी क्योंकि मैंने सोचा कि मैं उस बहन की समस्या को हल कर पाई, जिससे मैंने साबित किया कि मेरे पास सत्य के इस पहलू की यथार्थता है।

दो महीने के बाद, कलीसिया ने मेरे कर्तव्यों को पूरा करने के लिए मेरा पुन: आवंटन सुधार समूह में कर दिया। जब मैं पहली बार पहुंची, तो मैं पाठ के सुधानों के पीछे के सिद्धांतों को नहीं समझ पाई। बार—बार पाठों के ऐसे आलेख देखकर जिनमें सुधार, व्यवस्था और मार्गदर्न की जरूरत थी, मैं खुद को नकारात्मकता की स्थिति में जाने से नहीं रोक पाई। मुझे कुछ भी समझ नहीं आता था, और फिर भी मुझे न केवल अपने इस कर्तव्य को पूरा करना था बल्कि मुझे इन आलेखों की कमियों का पता लगाने का काम भी दिया गया था। इसमें मुझसे बहुत ज्यादा मांग की गई थी! मैं बस बहुत ज्यादा दबाव महसूस करने लगी थी और शांत नहीं हो पा रही थी, और मैं यह भी नहीं जानती थी कि परमेश्वर के भरोसे कैसे रहा जाए। मैं इतनी ज्यादा बेचैन हो गई थी कि लगातार तीन दिन और रातों तक सो नहीं पाई। मैं अपनी स्थिति के समक्ष काफी घबरा गई थी। जब मैं कलीसिया की उस नई अगुआ की समस्या को हल करने में उसकी मदद की थी, तो मैंने सोचा था कि मैं सत्य के इस पहलू को पूरी तरह से समझती हूं। लेकिन ऐसा कैसे हो सकता है कि अब जब मैं ऐसी समस्या में फंस गई हूं, तो मुझे नहीं पता कि ऐसी अनुभव को कैसे संभाला जाए? मैं अपनी व्याकुलता और उलझन को लेकर परमेश्वर के समक्ष पहुंची।

बाद में, मैंने “कार्य और प्रवेश (2)” में परमेश्वर के वचन पढ़ें: “जब मनुष्य कार्य करता और बोलता है, या अपनी आध्यात्मिक भक्ति में मनुष्य की प्रार्थना के दौरान, एक सच्चाई उसे अचानक स्पष्ट हो जाएगी। वास्तव में, हालाँकि, मनुष्य जो देखता है वह केवल पवित्र आत्मा द्वारा प्रबुद्धता है (प्राकृतिक रूप से, यह मनुष्य से सहयोग से संबंधित है) और मनुष्य की सच्ची कद-काठी नहीं है।अनुभव की अवधि के बाद जिसमें मनुष्य कई वास्तविक कठिनाइयों का सामना करता है, ऐसी परिस्थितियों में मनुष्य की वास्तविक कद-काठी स्पष्ट होती है। … केवल इस तरह के अनुभव के कई चक्रों के बाद ही कई ऐसे लोग जो अपनी आत्माओं के भीतर जाग गए हैं, वे महसूस करते हैं कि अतीत में यह उनकी वास्तविकता नहीं थी, बल्कि पवित्र आत्मा से एक क्षणिक रोशनी थी, और मनुष्य को केवल रोशनी प्राप्त हुई थी। जब पवित्र आत्मा मनुष्य को सच्चाई समझने के लिए प्रबुद्ध करता है, तो ऐसा प्रायः, संदर्भ के बिना, स्पष्ट और विशिष्ट तरीके से होता है। अर्थात्, वह इस प्रकाशन में मनुष्य की कठिनाइयों को शामिल नहीं करता है, और बल्कि सीधे ही सत्य को प्रकट करता है। जब मनुष्य प्रवेश में कठिनाइयों का सामना करता है, तो मनुष्य पवित्र आत्मा द्वारा प्रबुद्धता को शामिल करता है, और यह मनुष्य का वास्तविक अनुभव बन जाता है।” जैसे ही मैंने इस अवतरण पर चिंतन किया, मैं समझ गई: उस बहन की समस्या को हल करने में उसकी मदद करने पर मैंने जो सत्य समझा था, वह परमेश्वर के प्रकाशन से आया था। यह उस समय के मेरे सहयोग के कारण था कि मुझे पवित्र आत्मा की प्रबुद्धता हासिल हुई थी। लेकिन यह मेरी सच्ची कद—काठी नहीं थी और इससे यह भी नहीं सिद्ध होता था कि मुझे सत्य का वह पहलू हासिल हो गया था। पवित्र आत्मा ने उस समय मुझे सत्य को समझने के लिए प्रबु​द्ध किया था क्योंकि यह मेरे कार्य के लिए जरूरी था, और मेरे सहयोग के माध्यम से, उसने मेरे काम की समस्याओं और कठिनाइयों को हल करने में मेरी मदद की थी। लेकिन इस संदर्भ में मेरे असल अनुभव पाने से पहले, मेरी कद—काठी तब भी काफी छोटी थी। इसलिए जब मैं प्रवेश में कठिनाइयों का सामना करती हूं, तो यह केवल पवित्र आत्मा की प्रबुद्धता को सम्मिलित करने के माध्यम से ही होता है, कि यह मेरी जिंदगी का असल अनुभव बन सकता है।

परमेश्वर के वचनों की प्रबुद्धता और मार्गदर्शन में, मैंने परमेश्वर को स्वीकार करने और उस पर भरोसा करने के लिए अपने दिल को शांत किया, और सौंपे गए उन आलेखों और उदाहरणों के पीछे के लिखित सिद्धांतों की ध्यानपूर्वक तुलना और मंथन करके, मैंने अनजाने में ही परमेश्वर की प्रबुद्धता और मार्गदर्शन हासिल किया, जिससे मैं धीरे—धीरे उन आलेखों की समस्याओं को समझने में सक्षम हुई, उन आलेखों को सुधारने पर मेरे विचारों में और भी स्पष्टता आई, और साथ ही मैंने परमेश्वर के लोगों द्वारा हमारे लिखित आलेखों का अभ्यास करने की जरूरत के पीछे के अर्थ की प्रशंसा भी की। मैं अपनी नकारात्मकता और गलतफहमी से भी धीरे—धीरे बाहर निकलने में सक्षम हुई।

परमेश्वर को आभार। इस अनुभव के माध्यम से मैं अपनी समझ की भूलों से मुड़ते हुए साफ तौर पर अपनी सच्ची कद—काठी देख पाई। इससे मुझे आभास हुआ कि पवित्र आत्मा द्वारा प्रबुद्ध की गई सत्य की मेरी समझ मेरे असली अनुभव को प्रदर्शित नहीं करती है। इसके अलावा, इसका यह अर्थ नहीं था कि मेरे पास सत्य के इस पहलू की वास्तविकता है। अब से, मैं अभ्यास और प्रवेश करने के लिए असल जीवन में पवित्र आत्मा की प्रबुद्धता लाने की और भी इच्छुक हूं, ताकि ये सत्य असल में मेरी जिंदगी की वास्तविकता बन सकें।

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