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अंतिम दिनों के मसीह के लिए गवाहियाँ 

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प्रश्न 38: हाल के वर्षों में, धार्मिक संसार में विभिन्न मत और संप्रदाय अधिक से अधिक निराशाजनक हो गए हैं, लोगों ने अपना मूल विश्वास और प्यार खो दिया है और वे अधिक से अधिक नकारात्मक और कमज़ोर बन गए हैं। हम उत्साह का मुरझाना भी देखते हैं और हमें लगता है कि हमारे पास प्रचार करने के लिए कुछ नहीं है और हम सभी ने पवित्र आत्मा के कार्य को खो दिया है। कृपया हमें बताओ, पूरी धार्मिक दुनिया इतनी निराशाजनक क्यों है? क्या परमेश्वर वास्तव में इस दुनिया से नफरत करता है और क्या उसने इसे त्याग दिया है? हमें 'प्रकाशित वाक्य' पुस्तक में धार्मिक दुनिया के प्रति परमेश्वर के शाप को कैसे समझना चाहिए?

उत्तर:

वास्तव में, धार्मिक समुदाय का परमेश्वर के विरोध का इतिहास कम से कम व्यवस्था के युग के अंत से शुरू हुआ। जब परमेश्वर ने अनुग्रह के युग के दौरान पहली बार देह धारण की और अपना कार्य किया, उस समय भी धार्मिक समुदाय पर फरीसियों और मसीह विरोधियों ने बहुत पहले से ही कब्जा कर लिया था। यह प्रभु यीशु के पाप मुक्ति के कार्य के लिए विरोधी बन गया था। जब, अंत के दिनों के मसीह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर प्रकट होते हैं और अपना कार्य करते हैं, वे लोग जो धार्मिक समुदाय में हैं वे अभी भी परमेश्वर के अंत के दिनों के न्याय के कार्य के सामने एक दुश्मन की तरह खडे हो जाते हैं। वे न सिर्फ पागलपन के साथ सर्वशक्तिमान परमेश्वर की निंदा और तिरस्कार करते हैं, बल्कि वे सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया पर अत्याचार करने और दमन के लिए शैतानी सीसीपी शासन के साथ मिल जाते हैं। उन्होंने दोबारा परमेश्वर को सूली पर चढ़ाने का घोर पाप किया है! प्रभु यीशु ने न केवल फरीसियों को शापित किया, धार्मिक समुदाय के अंधकार को भी उजागर किया, लेकिन जब सर्वशक्तिमान परमेश्वर अंत के दिनों में अपना न्याय का कार्य करते हैं, वे तब भी पादरियों और एल्डर्स के वास्तविक स्वभाव: उनके परमेश्वर के प्रति विरोध को उजागर करते हैं: इसके साथ ही, वह उन मसीह विरोधियों को शापित करते हैं जिन्होंने परमेश्वर को दोबारा सूली पर चढ़ाया। यह वास्तव में सोच ने पर मजबूर कर देता है! दोनों ही बार जब भी परमेश्वर ने देह धारण की, उन्होंने धार्मिक समुदाय को निंदित और शापित कियाI यह क्या दर्शाता है? परमेश्वर द्वारा चुने हुए लोग आखिरकार समज जाते हैं कि धार्मिक समुदाय, महान बेबीलोन का पतन नियत है। धार्मिक समुदाय केवल परमेश्वर के नाम में विश्वास रखता है, लेकिन वास्तव में कभी भी परमेश्वर को गौरवान्वित नहीं करता और उनकी गवाही नहीं देता। वे यकीनन उनकी इच्छा को क्रियान्वित नहीं करते। वे परमेश्वर द्वारा चुने हुए लोगों को उनके सिंहासन तक नहीं ला सकते। वे वाकई उनका सही मार्ग पर जाने के लिए अगुवाई नहीं कर सकते, जिससे कि वे सत्य को समझें और परमेश्वर को उनके वचनों के पालन और अनुभव से जानें। धार्मिक नेता पूरी तरह से परमेश्वर की इच्छा के विरुद्ध जाते हैं। वे खुद भी सत्य का पालन नहीं करते, लेकिन वे लोगों को आदर पाने और उनसे अपनी आराधना करवाने के लिए उनको बाइबल के ज्ञान और धार्मिक सिद्धांत का उपदेश देते हैं। वे विश्वासियों को पाखंडी फरीसियों के मार्ग पर ले जाते हैं। वे परमेश्वर के द्वारा चुने हुए लोगों को ठेस पहुँचाते और बरबाद करते हैं। यह प्रमाणित करने के लिए पर्याप्त है कि सभी धार्मिक नेता शैतान के हथियार बन गये हैं, असली मसीह-विरोधी। उनके मानवजाति को बचाने के तीन चरणों के कार्य के दौरान, मानवता को बचाने और मानवता की रक्षा के लिए परमेश्वर ने दो बार देह धारण की। पूरा धार्मिक समुदाय मसीह का दुश्मन है; वे परमेश्वर के उद्धार के कार्य में रुकावटें बन गये हैं। उन्होंने परमेश्वर के स्वभाव को अपमानित किया और परिणामस्वरूप उन्होंने उनको शापित और दंडित किया। यह ऐसे ही है जैसे कि भविष्यवाणियाँ कहती है, "गिर गया, बड़ा बेबीलोन गिर गया है, वह दुष्‍टात्माओं का निवास, और हर एक अशुद्ध आत्मा का अड्डा…" (प्रकाशितवाक्य 18:2), "गिर पड़ा, वह बड़ा बेबीलोन गिर पड़ा, जिसने अपने व्यभिचार की कोपमय मदिरा सारी जातियों को पिलाई है" (प्रकाशितवाक्य 14:8), "हे बड़े नगर, बेबीलोन! हे दृढ़ नगर, हाय! हाय! घड़ी भर में ही तुझे दण्ड मिल गया है" (प्रकाशितवाक्य 18:10)।

चलिये देखते हैं, सर्वशक्तिमान परमेश्वर किस तरह कट्टरता से परमेश्वर का विरोध करनेवाले मसीह विरोधियों और मसीह-विरोधियों द्वारा नियंत्रित धार्मिक समुदाय की निंदा करते हैं। सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं, "मसीह अंतिम दिनों में आता है ताकि वे सभी जो सच्चाई से उस पर विश्वास करते हैं उन्हें जीवन प्रदान किया जाए। … यदि तुम उसे पहचानने में असमर्थ हो , और उसकी भर्त्सना करते हो, निंदा करते हो और यहां तक कि उसे पीड़ा पहुंचाते हो, तो तुम अनन्त समय तक जलाए जाते रहने के लिए निर्धारित कर दिये गए हो और तुम कभी भी परमेश्वर के राज्य में प्रवेश नहीं कर पाओगे। इसी कारण से मसीह ही स्वयं पवित्र आत्मा और परमेश्वर की अभिव्यक्ति है, जिसे परमेश्वर ने पृथ्वी पर अपना कार्य सौंपा है। इसलिए मैं कहता हूं कि अंतिम दिनों में जो मसीह के द्वारा कार्य किया गया है उसे तुम स्वीकार नहीं करते हो तो तुम पवित्र आत्मा की निंदा करते हो। और उसका प्रतिकार पवित्र आत्मा की निंदा करने वालों को सहना होगा वह सभी के लिए स्वत:-स्पष्ट है। … क्योंकि तुम जिसका विरोध करते हो वह मनुष्य नहीं है, जिसको नकार रहे हो वह नन्हा सा प्राणी नहीं है, बल्कि मसीह है। क्या तुम परिणामों के बारे में जानते हो? तुमने कोई छोटी-मोटी गलती नहीं की है, बल्कि एक बहुत ही जघन्य अपराध किया है" ("वचन देह में प्रकट होता है" से "केवल अंतिम दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनन्त जीवन का मार्ग दे सकता है" से)।

"स्मरण करें कि 2000 वर्ष पहले यहूदियों द्वारा यीशु को सलीब पर चढ़ा दिए जाने के बाद क्या हुआ था। यहूदियों को इस्राएल से निर्वासित कर दिया गया था और वे दुनियाभर के देशों में भाग गए थे। कई लोगों को मार दिया गया था, और सम्पूर्ण यहूदी देश अभूतपूर्व विनाश के अधीन कर दिया गया था। उन्होंने परमेश्वर को सलीब पर चढ़ाया था—जघन्य अपराध किया था—और परमेश्वर के स्वभाव को उकसाया था। उन्होंने जो किया था उसका उनसे भुगतान करवाया गया था, उनसे उनके कार्यों के परिणामों को भुगतवाया गया था। उन्होंने परमेश्वर की निंदा की थी, परमेश्वर को अस्वीकार किया था, और इसलिए उनकी केवल एक ही नियति थी: परमेश्वर द्वारा दण्डित किया जाना। यही वह कड़वा परिणाम और आपदा है जो उनके शासक अपने देश और राष्ट्र पर लाए" ("वचन देह में प्रकट होता है" से "परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है" से)।

"हमें विश्वास है कि परमेश्वर जो कुछ प्राप्त करना चाहता है उस मार्ग में कोई भी देश या शक्ति ठहर नहीं सकता है। वे जो परमेश्वर के कार्य में बाधा उत्पन्न करते हैं, परमेश्वर के वचन का विरोध करते हैं, परमेश्वर की योजना में विघ्न डालते हैं और उसे बिगाड़ते हैं, अंततः परमेश्वर के द्वारा दण्डित किए जाएँगे। वह जो परमेश्वर के कार्य की अवज्ञा करता है उसे नर्क भेज दिया जाएगा; कोई भी देश जो परमेश्वर के कार्य का विरोध करने के लिए उठता है, वह इस पृथ्वी पर से मिटा दिया जाएगा; कोई भी देश जो परमेश्वर के कार्य का विरोध करने के लिए उठता है वह इस पृथ्वी पर से मिटा दिया जाएगा; और उसका अस्तित्व समाप्त हो जाएगा" ("वचन देह में प्रकट होता है" से "परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है" से)।

"किन्तु जब तक पुराना संसार निरन्तर बना रहता है, मैं सारे विश्व में खुले तौर पर अपनी प्रशासनिक आज्ञाओं की घोषणा करते हुए, अपने प्रचण्ड प्रकोप को इनके राष्ट्रों के ऊपर तेजी से फेंकूँगा, और जो कोई उनका उल्लंघन करता है उनको ताड़ना दूँगा:

जैसे ही मैं बोलने के लिए विश्व की तरफ अपने चेहरे को घुमाता हूँ, सारी मानवजाति मेरी आवाज़ को सुनती है, और उसके बाद उन सभी कार्यों को देखती है जिसे मैंने समूचे ब्रह्माण्ड में गढ़ा है। वे जो मेरी इच्छा के विरूद्ध जाते हैं, अर्थात्, जो मनुष्य के कार्यों से मेरा विरोध करते हैं, वे मेरी ताड़ना के अधीन नीचे गिर जाएँगे। … विश्व के भीतर अनेक राष्ट्रों को नए सिरे से विभक्त कर दिया जाएगा और मेरे राष्ट्र के द्वारा बदल दिया जाएगा, जिसकी वजह से पृथ्वी के राष्ट्र हमेशा हमेशा के लिए विलुप्त हो जाएँगे और एक राष्ट्र बन जाएँगे जो मेरी आराधना करता हो; पृथ्वी के सभी राष्ट्रों को नष्ट कर दिया जाएगा, और उनका अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। विश्व के भीतर मनुष्यों में, वे सभी जो शैतान से संबंध रखते हैं उनका सर्वनाश कर दिया जाएगा; वे सभी जो शैतान की आराधना करते हैं उन्हें जलती हुई आग के द्वारा नीचा दिखाया जाएगा—अर्थात्, उनको छोड़कर जो अभी इस धारा के अन्तर्गत हैं, बाकियों को राख में बदल दिया जाएगा। जब मैं बहुत से लोगों को ताड़ना देता हूँ, तो वे जो, भिन्न-भिन्न अंशों में, धार्मिक संसार में हैं, मेरे कार्यों के द्वारा जीत लिए जा कर मेरे राज्य में लौट आएँगे, क्योंकि उन्होंने एक श्वेत बादल पर सवार पवित्र जन के आगमन को देख लिया होगा। समस्त मानवता अपने-अपने स्वभाव का अनुसरण करेगी, और जो कुछ उसने किया है उससे भिन्न-भिन्न ताड़नाएँ प्राप्त करेगी। वे जो मेरे विरूद्ध खड़े हुए हैं सभी नष्ट हो जाएँगे; जहाँ तक उनकी बात है जिन्होंने पृथ्वी पर अपने कार्यों में मुझे शामिल नहीं किया है, वे, क्योंकि उन्होंने जिस प्रकार अपने आपको दोषमुक्त किया है, पृथ्वी पर मेरे पुत्रों और मेरे लोगों के शासन के अधीन निरन्तर बने रहेंगे। मैं अपने महान कार्य की समाप्ति की घोषणा करने के लिए पृथ्वी पर अपनी ध्वनि आगे करते हुए अपने आपको असंख्य लोगों और असंख्य राष्ट्रों के सामने प्रकट करूँगा, ताकि समस्त मानवजाति अपनी आँखों से देखे" ("वचन देह में प्रकट होता है" से "छब्बीसवाँ कथन" से)।

"संसार का पतन हो रहा है! बेबीलोन गतिहीनता में है! धार्मिक संसार—कैसे पृथ्वी पर मेरी सामर्थ्य द्वारा नष्ट नहीं किया जा सकता है? कौन अभी भी मेरी अवज्ञा और मेरा विरोध करने का साहस करता है? धर्म शास्त्र? सभी धार्मिक अधिकारी? पृथ्वी के शासक और अधिकारी? स्वर्गदूत? कौन मेरे शरीर की सिद्धता और परिपूर्णता का उत्सव नहीं मनाता है? सभी लोगों में से, कौन बिना रूके मेरी स्तुति नहीं गाता है, कौन बिना नागा किए प्रसन्न नहीं है? … पृथ्वी के राष्ट्रों का विनाश कैसे नहीं हो सकता है? पृथ्वी के राष्ट्रों का पतन कैसे नहीं हो सकता है? मेरे लोग आनंदित कैसे नहीं हो सकते हैं? वे खुशी से गीत कैसे नहीं गा सकते हैं?" ("वचन देह में प्रकट होता है" से "बाईसवाँ कथन" से)।

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों का हर वाक्य सत्य है; उनमें अधिकार और प्रभाव है; तरह परमेश्वर की धार्मिकता, प्रताप, क्रोध और अपमानित न होने वाले स्वभाव को दर्शाते हैं। वे जो परमेश्वर का विरोध करते हैं, परमेश्वर के कार्य में रुकावट या बाधा डालते हैं निश्चित तौर पर परमेश्वर से दंड और प्रतिकार पायेंगे। जैसा कि हम सभी जानते हैं, व्यवस्था के युग में सोदोम के निवासियों ने सार्वजनिक रूप से परमेश्वर का खंडन और विरोध किया था। उन्होंने परमेश्वर के स्वभाव को क्रोधित किया और वे सभी परमेश्वर द्वारा नष्ट कर दिए गये; उनका एक कण भी नहीं बचा। अनुग्रह के युग में, यहूदियों के मुख्य प्रचारकों, धर्मशास्त्रियों और फरीसियों ने सार्वजनिक तौर पर प्रभु यीशु का विरोध और निंदा की। उन्होंने प्रभु यीशु को सूली पर चढ़ाने के लिए रोमन सरकार के साथ सांठ-गांठ की। उन्होंने परमेश्वर के स्वभाव को उकसा कर एक घोर पाप किया। पूरे यहूदी राष्ट्र को अभूतपूर्व विनाश के हवाले कर दिया गया था। अंत के दिनों में, धार्मिक नेताओं ने सर्वशक्तिमान परमेश्वर को बेहूदगी से आँका, उनका विरोध और निंदा की। यहाँ तक कि उन्होंने दुष्ट सीसीपी का सहयोग किया और उनके साथ सांठ-गाँठ की उन भाई - बहनों का दमन करने, गिरफ्तार कराने और उन पर अत्याचार करने के लिए जिन्होंने राज्य के सुसमाचार को फैलाया। उन्होंने बहुत पहले पवित्र आत्मा का तिरस्कार करने का और परमेश्वर को दोबारा से सूली पर चढ़ाने का घिनौना पाप किया। यहाँ तक कि उनका बुरा व्यवहार सोदोम के लोगों से भी ज्यादा बुरा था। ये यहूदी फरीसियों की तुलना में बहुत है। वे मसीह विरोधी हैं जिन्हें परमेश्वर के अंत के दिनों में किये गये कार्य के द्वारा उजागर किया गया। वे दुष्ट धार्मिक शक्तियाँ हैं जिन्होंने परमेश्वर का विरोध अत्यंत कठोरता और कट्टरता से किया जैसा इतिहास में कभी नहीं हुआ! धार्मिक समुदाय पूरी तरह से दुष्ट ताकतों से बना है जो परमेश्वर का विरोध करती हैं। यह मसीह विरोधी राक्षसों का झुंड है। यह एक कट्टर गढ़ है जो मसीह के राज्य के साथ बराबरी करने की कोशिश करता है। वो परमेश्वर के कट्टर दुश्मनों का शैतानी गुट है, जो हठपूर्वक उनका विद्रोह करता है! परमेश्वर का धर्मी स्वभाव को अपमानित नहीं किया जा सकता। परमेश्वर की पवित्रता को गंदा नहीं किया जा सकता! अंत के दिनों में किया गया परमेश्वर का कार्य एक नये युग की शुरुआत और पुराने युग का अंत है। धार्मिक समुदाय जो हर तरह के मसीह-विरोधी राक्षसों और साथ ही दुष्ट संसार द्वारा नियंत्रित है जल्द ही अंत के दिनों में परमेश्वर की महाविपति के द्वारा नष्ट हो जायेगा। परमेश्वर का धर्मी दंड पहले ही पहुँच चुका है! यह वैसा ही है जैसा सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं, "संसार का पतन हो रहा है! बेबीलोन गतिहीनता में है! धार्मिक संसार—कैसे पृथ्वी पर मेरी सामर्थ्य द्वारा नष्ट नहीं किया जा सकता है?" ("वचन देह में प्रकट होता है" से "बाईसवाँ कथन" से)।

अगर वे सभी जो अंत के दिनों के सर्वशक्तिमान परमेश्वर के न्याय के कार्य को स्वीकार नहीं करते, धार्मिक समुदाय में प्रभु यीशु के नाम को वे चाहे जैसे रखते हों, वे बाइबल का अनुसरण चाहे जैसे करतेहों, धर्म का उद्धार या धार्मिक समारोह चाहे जैसे करते हों, वे चाहे जैसे परिश्रम करते हों, तकलीफ या त्याग करते हों, अगर वे पश्चाताप नहीं करते और सर्वशक्तिमान परमेश्वर की तरफ नहीं लौटते, तो वे भी बाकी बचे हुए धार्मिक समुदाय के साथ झंझोड़े और खत्म कर दिये जायेंगे। परमेश्वर ने यह आदेश बहुत पहले ही दे दिया था; कोई भी इसे बदल नहीं सकता! परमेश्वर ने बहुत पहले ही अपने चुने हुए लोगों को रहस्योद्घाटन की भविष्यवाणी में पुकारा था, "हे मेरे लोगो, उस में से निकल आओ, कि तुम उसके पापों में भागी न हो, और उसकी विपत्तियों में से कोई तुम पर आ न पड़े" (प्रकाशितवाक्य 18:4)।

"राज्य के सुसमाचार पर उत्कृष्ट प्रश्न और उत्तर संकलन" से

पिछला:प्रश्न 37: यद्यपि पादरी और प्राचीन लोग धार्मिक दुनिया में सत्ता रखते हैं और वे ढोंगी फरीसियों के मार्ग पर चलते हैं, हम तो प्रभु यीशु में विश्वास करते हैं, पादरी और प्राचीन लोगों में नहीं, तो तुम यह कैसे कह सकते हो कि हम भी फरीसियों के रास्ते पर चलते हैं? क्या हम वास्तव में धर्म के भीतर रहकर परमेश्वर में विश्वास करने के द्वारा बचाए नहीं जा सकते हैं?

अगला:प्रश्न 41: हमने चीनी कम्युनिस्ट सरकार और धार्मिक दुनिया के कई भाषण ऑनलाइन देखे हैं जो सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया की बदनामी और झूठी निंदा करते हैं, उन पर आक्षेप और कलंक लगाते हैं (जैसे कि झाओयुआन, शेडोंग प्रांत की "5.28" वाली घटना)। हम यह भी जानते हैं कि सीसीपी लोगों से झूठ और गलत बातें कहने में, और तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर लोगों को धोखा देने में माहिर है, साथ ही साथ उन देशों का जिनके यह विरोध में है, अपमान करने, उन पर हमला करने और उन का न्याय करने में भी माहिर है, इसलिए सीसीपी के कहे गए किसी भी शब्द पर बिल्कुल विश्वास नहीं किया जाना चाहिए। लेकिन धार्मिक पादरियों और प्राचीन लोगों के द्वारा कही गई कई बातें सीसीपी के शब्दों से मेल खाती हैं, इसलिए हमें सीपीपी और धार्मिक दुनिया से आने वाले निन्दापूर्ण, अपमानजनक शब्दों को कैसे परखना चाहिए?

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