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परमेश्वर की इच्छा स्पष्ट रही है सभी के लिए

I

मनुष्य की सृष्टि से,

परमेश्वर का अस्तित्व, उसकी इच्छा, उसका स्वरुप और स्वभाव

रहा है खुला सभी के लिए।

परमेश्वर ने कभी जान कर नहीं छुपाया अपना सार,

न अपना स्वभाव या इच्छा।

ये तो केवल मानवता है जो नहीं देती परमेश्वर के कार्यों पे,

उसकी इच्छा पर ध्यान,

और इसीलिए परमेश्वर के बारे में मनुष्य की समझ है बेहद कमजोर।

मनुष्य की सृष्टि से,

परमेश्वर का अस्तित्व, उसकी इच्छा, उसका स्वरुप और स्वभाव

रहा है खुला सभी के लिए।

II

इसका अर्थ है कि जिस समय परमेश्वर अपने व्यक्तित्व को छुपाता है,

वो पूरे समय रहता, इंसान के ही पास,

और हर एक पल खड़ा वह ज़ाहिर करता, अपनी इच्छा,

अपना स्वभाव, और सार।

और एक प्रकार से परमेश्वर का व्यक्तित्व है खुला सब लोगों के लिए,

लेकिन क्योंकि इंसान है अंधा, नहीं करता आज्ञापालन,

नहीं देख पाता इंसान प्रभु का रूप,

नहीं देख पाता प्रभु का रूप।

मनुष्य की सृष्टि से,

परमेश्वर का अस्तित्व, उसकी इच्छा, उसका स्वरुप और स्वभाव

रहा है खुला सभी के लिए और खुला रहा है सभी लोगों के लिए।

"वचन देह में प्रकट होता है" से

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