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प्रभु हर युग में नए कार्य करते हैं

परमेश्वर के वचन का भजन प्रभु हर युग में नए कार्य करते हैं प्रभु की प्रज्ञा नहीं बदलती, प्रभु का विस्मय नहीं बदलता, उनकी धार्मिकता नहीं बदलती, उनका वैभव नहीं बदलता, प्रभु का सत्व नहीं बदलता, उनमें जो है और वे जो हैं कभी ना बदलेगा। और उनक कार्य अग्रसर है और गहराता जा रहा प्रभु हैं सदा नए, कभी न पुराने, नया नाम, नया काम हर युग में; नया संकल्प, नया स्वभाव। मानव देख सका ना यह स्वभाव, तो प्रभु अब भी होते सलीब पर और उन्हीं से सीमांकित! प्रभु की प्रज्ञा नहीं बदलती, प्रभु का विस्मय नहीं बदलता, उनकी धार्मिकता नहीं बदलती, उनका वैभव नहीं बदलता, प्रभु का सत्व नहीं बदलता, उनमें जो है और वे जो हैं कभी ना बदलेगा। प्रभु का कार्य नया, कभी न पुराना, पर वे कभी ना हैं बदलते। कर नहीं सकते बखान आप जड़ भाषा में ६००० वर्षों के कार्य प्रभु के। प्रभु ना सरल जैसा तू समझे, काम चलता है उनका युग युग से। नाम उनका हुआ जेहोवा से जीसस। देखो काम उनका कितना बदला युगों में! प्रभु की प्रज्ञा नहीं बदलती, प्रभु का विस्मय नहीं बदलता, उनकी धार्मिकता नहीं बदलती, उनका वैभव नहीं बदलता, प्रभु का सत्व नहीं बदलता, उनमें जो है और वे जो हैं कभी ना बदलेगा। इतिहास अग्रसर है आगे ही आगे। प्रभु के काम अग्रसर हैं समापन की ओर, छ: हज़ार वर्षों की योजना के। पर हैं अभी और नए काम करने, हर दिन और हर साल। नयी राहें, नये ज़माने, नयी चीज़ें, और बड़े काम। प्रभु नहीं रुके पुरानी राहों में; नए काम, अविरत, सदा ही चलते। प्रभु की प्रज्ञा नहीं बदलती, प्रभु का विस्मय नहीं बदलता, उनकी धार्मिकता नहीं बदलती, उनका वैभव नहीं बदलता, प्रभु का सत्व नहीं बदलता, उनमें जो है और वे जो हैं कभी ना बदलेगा। सदा सर्वदा! (नया काम!) चलता है! (नया काम!) अग्रसर है! (नया काम!) हर युग में! प्रभु करते हैं अपना नया काम! वचन देह में प्रगट होता है से

प्रभु हर युग में नए कार्य करते हैं

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