1. बाइबल केवल परमेश्वर के दो चरणों के कार्य का अभिलेख है, जो व्यवस्था का युग और अनुग्रह का युग थे; वह परमेश्वर के संपूर्ण कार्य का अभिलेख नहीं है

संदर्भ के लिए बाइबल के पद:

"और भी बहुत से काम हैं, जो यीशु ने किए; यदि वे एक एक करके लिखे जाते, तो मैं समझता हूँ कि पुस्तकें जो लिखी जातीं वे संसार में भी न समातीं" (यूहन्ना 21:25)।

"मुझे तुम से और भी बहुत सी बातें कहनी हैं, परन्तु अभी तुम उन्हें सह नहीं सकते। परन्तु जब वह अर्थात् सत्य का आत्मा आएगा, तो तुम्हें सब सत्य का मार्ग बताएगा, क्योंकि वह अपनी ओर से न कहेगा परन्तु जो कुछ सुनेगा वही कहेगा, और आनेवाली बातें तुम्हें बताएगा" (यूहन्ना 16:12-13)।

"देख, यहूदा के गोत्र का वह सिंह जो दाऊद का मूल है, उस पुस्तक को खोलने और उसकी सातों मुहरें तोड़ने के लिये जयवन्त हुआ है" (प्रकाशितवाक्य 5:5)।

"जिसके कान हों वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है। जो जय पाए, उस को मैं गुप्‍त मन्ना में से दूँगा, और उसे एक श्‍वेत पत्थर भी दूँगा; और उस पत्थर पर एक नाम लिखा हुआ होगा, जिसे उसके पानेवाले के सिवाय और कोई न जानेगा" (प्रकाशितवाक्य 2:17)।

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:

बाइबल किस प्रकार की पुस्तक है? पुराना विधान व्यवस्था के युग के दौरान किया गया परमेश्वर का कार्य है। बाइबल के पुराने विधान में व्यवस्था के युग के दौरान किया गया यहोवा का समस्त कार्य और उसका सृष्टि के निर्माण का कार्य दर्ज है। इसमें यहोवा द्वारा किया गया समस्त कार्य दर्ज है, और वह अंततः मलाकी की पुस्तक के साथ यहोवा के कार्य का वृत्तांत समाप्त करता है। पुराने विधान में परमेश्वर द्वारा किए गए दो तरह के कार्य दर्ज हैं : एक सृष्टि की रचना का कार्य, और दूसरा व्यवस्था की आज्ञा देना। दोनों ही यहोवा द्वारा किए गए कार्य थे। व्यवस्था का युग यहोवा परमेश्वर के नाम से किए गए कार्य का प्रतिनिधित्व करता है; यह मुख्यतः यहोवा के नाम से किए गए कार्य की समग्रता है। इस प्रकार, पुराने विधान में यहोवा का कार्य दर्ज है, और नए विधान में यीशु का कार्य, वह कार्य जिसे मुख्यतः यीशु के नाम से किया गया था। यीशु के नाम का महत्व और उसके द्वारा किया गया कार्य अधिकांशत: नए विधान में दर्ज हैं। पुराने विधान के व्यवस्था के युग के दौरान यहोवा ने इस्राएल में मंदिर और वेदी का निर्माण किया, उसने यह साबित करते हुए पृथ्वी पर इस्राएलियों के जीवन का मार्गदर्शन किया कि वे उसके चुने हुए लोग हैं, उसके द्वारा पृथ्वी पर चुने गए उसके मनोनुकूल लोगों का पहला समूह हैं, वह पहला समूह, जिसकी उसने व्यक्तिगत रूप से अगुआई की थी। इस्राएल के बारह कबीले यहोवा के चुने हुए पहले लोग थे, और इसलिए उसने, व्यवस्था के युग के यहोवा के कार्य का समापन हो जाने तक, हमेशा उनमें कार्य किया। कार्य का दूसरा चरण नए विधान के अनुग्रह के युग का कार्य था, और उसे यहूदी लोगों के बीच, इस्राएल के बारह कबीलों में से एक के बीच किया गया था। उस कार्य का दायरा छोटा था, क्योंकि यीशु देहधारी हुआ परमेश्वर था। यीशु ने केवल यहूदिया की पूरी धरती पर काम किया, और सिर्फ साढ़े तीन वर्षों का काम किया; इस प्रकार, जो कुछ नए विधान में दर्ज है, वह पुराने विधान में दर्ज कार्य की मात्रा से आगे निकलने में सक्षम नहीं है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'बाइबल के विषय में (1)' से उद्धृत

बाइबल इतिहास की पुस्तक है। निस्संदेह, उसमें नबियों की कुछ भविष्यवाणियाँ भी शामिल हैं, और वे भविष्यवाणियाँ किसी भी मायने में इतिहास नहीं हैं। बाइबल में अनेक भाग शामिल हैं—उसमें केवल भविष्यवाणियाँ ही नहीं हैं, या केवल यहोवा का कार्य ही नहीं है, और न ही उसमें मात्र पौलुस के धर्मपत्र हैं। तुम्हें ज्ञात होना चाहिए कि बाइबल में कितने भाग शामिल हैं; पुराने विधान में उत्पत्ति, निर्गमन...शामिल हैं, और उसमें नबियों द्वारा लिखी गई भविष्यवाणियों की पुस्तकें भी हैं। अंत में, पुराना विधान मलाकी की पुस्तक के साथ समाप्त होता है। इसमें व्यवस्था के युग के कार्य को दर्ज किया गया है, जिसकी अगुआई यहोवा द्वारा की गई थी; उत्पत्ति से लेकर मलाकी की पुस्तक तक, यह व्यवस्था के युग के समस्त कार्य का विस्तृत अभिलेख है। अर्थात्, पुराने विधान में वह सब-कुछ दर्ज है, जिसे उन लोगों द्वारा अनुभव किया गया था, जिनका व्यवस्था के युग में यहोवा द्वारा मार्गदर्शन किया गया था। ... उस समय के नबी यहोवा द्वारा प्रेरित थे और उन्होंने कुछ भविष्यवाणियाँ कीं, उन्होंने कई वचन बोले, और अनुग्रह के युग की चीजों, और साथ ही अंत के दिनों में संसार के विनाश—वह कार्य, जिसे करने की यहोवा की योजना थी—के बारे में भविष्यवाणी की। बाकी सभी पुस्तकों में यहोवा के द्वारा इस्राएल में किए गए कार्य को दर्ज किया गया है। इस प्रकार, जब तुम बाइबल पढ़ते हो, तो तुम मुख्य रूप से यहोवा द्वारा इस्राएल में किए गए कार्यों के बारे में पढ़ रहे होते हो; बाइबल के पुराने विधान में मुख्यतः इस्राएल का मार्गदर्शन करने का यहोवा का कार्य और मिस्र से बाहर इस्राएलियों का मार्गदर्शन करने के लिए उसके द्वारा मूसा का उपयोग दर्ज किया गया है, जिसने उन्हें फिरौन के बंधनों से छुटकारा दिलाया और उन्हें बाहर सुनसान जंगल में ले गया, जिसके बाद उन्होंने कनान में प्रवेश किया और इसके बाद कनान का जीवन ही उनके लिए सब-कुछ था। इसके अलावा सब पूरे इस्राएल में यहोवा के कार्य के अभिलेख से निर्मित है। पुराने विधान में दर्ज सब-कुछ इस्राएल में यहोवा का कार्य है, यह वह कार्य है जिसे यहोवा ने उस भूमि पर किया, जिसमें उसने आदम और हव्वा को बनाया था। जबसे परमेश्वर ने नूह के बाद आधिकारिक रूप से पृथ्वी पर लोगों की अगुआई करनी आरंभ की, तब से पुराने विधान में दर्ज सब-कुछ इस्राएल का कार्य है। और उसमें इस्राएल के बाहर का कोई भी कार्य दर्ज क्यों नहीं किया गया है? क्योंकि इस्राएल की भूमि मानवजाति का पालना है। शुरुआत में, इस्राएल के अलावा कोई अन्य देश नहीं थे, और यहोवा ने अन्य किसी स्थान पर कार्य नहीं किया। इस तरह, बाइबल के पुराने विधान में जो कुछ भी दर्ज है, वह केवल उस समय इस्राएल में किया गया परमेश्वर का कार्य है। नबियों द्वारा, यशायाह, दानिय्येल, यिर्मयाह और यहेज़केल द्वारा बोले गए वचन ... उनके वचन पृथ्वी पर उसके अन्य कार्य के बारे में पूर्वकथन करते हैं, वे यहोवा स्वयं परमेश्वर के कार्य का पूर्वकथन करते हैं। यह सब-कुछ परमेश्वर से आया, यह पवित्र आत्मा का कार्य था, और नबियों की इन पुस्तकों के अलावा, बाकी हर चीज़ उस समय यहोवा के कार्य के बारे में लोगों के अनुभवों का अभिलेख है।

सृष्टि की रचना का कार्य मानवजाति के आने से पहले हुआ, किंतु उत्पत्ति की पुस्तक मानवजाति के आने के बाद ही आई; यह व्यवस्था के युग के दौरान मूसा द्वारा लिखी गई पुस्तक थी। यह आज तुम लोगों के बीच होने वाली चीज़ों के समान है : तुम उन्हें उनके होने के बाद भविष्य में लोगों को दिखाने के लिए, और भविष्य के लोगों के लिए, लिख लेते हो; जो कुछ भी तुम लोगों ने दर्ज किया, वे ऐसी चीज़ें हैं जो अतीत में घटित हुई थीं—वे इतिहास से बढ़कर और कुछ नहीं हैं। पुराने विधान में दर्ज की गई चीजें इस्राएल में यहोवा के कार्य हैं, और जो कुछ नए विधान में दर्ज है, वह अनुग्रह के युग के दौरान यीशु के कार्य हैं; वे परमेश्वर द्वारा दो भिन्न-भिन्न युगों में किए गए कार्य के दस्तावेज हैं। पुराना विधान व्यवस्था के युग के दौरान परमेश्वर के कार्य का दस्तावेजीकरण करता है, और इस प्रकार पुराना विधान एक ऐतिहासिक पुस्तक है, जबकि नया विधान अनुग्रह के युग के कार्य का उत्पाद है। जब नया कार्य आरंभ हुआ, तो नया विधान भी पुराना पड़ गया—और इस प्रकार, नया विधान भी एक ऐतिहासिक पुस्तक है। निस्संदेह, नया विधान पुराने विधान के समान सुव्यवस्थित नहीं है, न ही उसमें उतनी बातें दर्ज हैं। यहोवा द्वारा बोले गए अनेक वचनों में से सभी बाइबल के पुराने विधान में दर्ज किए गए हैं, जबकि सुसमाचार की चार पुस्तकों में यीशु के कुछ ही वचन दर्ज किए गए हैं। निस्संदेह, यीशु ने भी बहुत काम किया, किंतु उसे विस्तार से दर्ज नहीं किया गया। नए विधान में कम दर्ज किया गया है, क्योंकि यीशु ने कितना काम किया; पृथ्वी पर साढ़े तीन वर्षों के दौरान किए गए उसके कार्य और प्रेरितों के कार्य की मात्रा यहोवा के कार्य से बहुत ही कम थी। और इसलिए, पुराने विधान की तुलना में नए विधान में कम पुस्तकें हैं।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'बाइबल के विषय में (1)' से उद्धृत

बाइबल को पुराना नियम और नया नियम भी कहते हैं। क्या तुम लोग जानते हो कि "नियम" से क्या तात्पर्य है? "पुराने नियम" में "नियम" इस्राएल के लोगों के साथ बांधी गई परमेश्वर की वाचा से आता है, जब उसने मिस्रियों को मार डाला था और इस्राएलियों को फिरौन से बचाया था। बेशक, इस वाचा का प्रमाण दरवाज़ों की चौखट के ऊपर पोता गया मेमने का लहू था, जिसके द्वारा परमेश्वर ने मनुष्य के साथ एक वाचा बांधी थी, जिसमें कहा गया था कि वे सभी लोग, जिनके दरवाज़ों के ऊपर और अगल-बगल मेमने का लहू लगा हुआ है, इस्राएली हैं, वे परमेश्वर के चुने हुए लोग हैं, और उन सभी को यहोवा द्वारा बख्श दिया जाएगा (क्योंकि यहोवा तब मिस्र के सभी ज्येष्ठ पुत्रों और ज्येष्ठ भेड़ों और मवेशियों को मारने ही वाला था)। इस वाचा के अर्थ के दो स्तर हैं। मिस्र के लोगों और मवेशियों में से किसी को भी यहोवा द्वारा छोड़ा नहीं जाएगा; वह उनके सभी ज्येष्ठ पुत्रों और ज्येष्ठ भेड़ों और मवेशियों को मार डालेगा। इस प्रकार, भविष्यवाणी की अनेक पुस्तकों में यह भविष्यवाणी की गई थी कि यहोवा की वाचा के परिणामस्वरूप मिस्रियों को बहुत अधिक ताड़ना मिलेगी। यह वाचा के अर्थ का प्रथम स्तर है। यहोवा ने मिस्र के ज्येष्ठ पुत्रों और उसके सभी ज्येष्ठ मवेशियों को मार डाला, और उसने सभी इस्राएलियों को छोड़ दिया, जिसका अर्थ था कि वे सभी, जो इस्राएल की भूमि के थे, उन्हें यहोवा द्वारा संजोया गया था, और उन सभी को छोड़ दिया गया; वह उनमें दीर्घकालीन कार्य करना चाहता था, और उसने मेमने के लहू का उपयोग करके उनके साथ वाचा स्थापित की। तब से यहोवा ने इस्राएलियों को नहीं मारा, और कहा कि वे सदा के लिए उसके चुने हुए लोग होंगे। इस्राएल के बारह कबीलों के बीच वह समूचे व्यवस्था के युग के लिए अपने कार्य में लग गया, उसने इस्राएलियों पर अपनी सारी व्यवस्थाएँ प्रकट कीं, और उनके बीच में से नबी और न्यायी चुने, और वे उसके कार्य के केंद्र में रहे। यहोवा ने उनके साथ एक वाचा बांधी थी : जब तक युग परिवर्तित नहीं होता, वह सिर्फ चुने हुए लोगों के बीच में ही कार्य करेगा। यहोवा की वाचा अपरिवर्तनीय थी, क्योंकि वह लहू से बनी थी, और वह उसके चुने हुए लोगों के साथ स्थापित की गई थी। इससे भी अधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि उसने समूचे युग के दौरान अपना कार्य करने के लिए एक उचित क्षेत्र और लक्ष्य चुना था, और इसलिए लोगों ने इस वाचा को विशेष रूप से महत्वपूर्ण समझा था। यह वाचा के अर्थ का दूसरा स्तर है। उत्पत्ति को छोड़कर, जो वाचा की स्थापना के पहले की थी, पुराने नियम में अन्य सभी पुस्तकें वाचा की स्थापना के बाद इस्राएलियों के बीच किए गए परमेश्वर के कार्य को दर्ज करती हैं। बेशक, उनमें यदा-कदा अन्यजातियों का लेखा-जोखा भी है, किंतु कुल मिलाकर, पुराना नियम इस्राएल में किए गए परमेश्वर के कार्य का दस्तावेज़ है। इस्राएलियों के साथ यहोवा की वाचा के कारण व्यवस्था के युग के दौरान लिखी गई पुस्तकें "पुराना नियम" कहलाती हैं। उनका नाम इस्राएलियों के साथ बांधी गई यहोवा की वाचा के आधार पर रखा गया है।

नए नियम का नाम यीशु द्वारा क्रूस पर बहाए गए लहू और उन सभी के साथ उसकी वाचा के आधार पर रखा गया है, जो उस पर विश्वास करते हैं। यीशु की वाचा यह थी : लोगों को उसके द्वारा बहाए गए लहू के कारण अपने पाप क्षमा करवाने के लिए बस उस पर विश्वास करना था, और इस प्रकार वे बचा लिए जाते, और उसके ज़रिये नया जन्म प्राप्त करते, और अब पापी न रहते; उसका अनुग्रह प्राप्त करने के लिए लोगों को सिर्फ उस पर विश्वास करना था, और मरने के बाद उन्हें नरक में कष्ट न भोगना पड़ता। अनुग्रह के युग के दौरान लिखी गई सभी पुस्तकें इस वाचा के बाद आईं, और वे सभी उसमें शामिल कार्य और कथनों की दस्तावेज हैं। वे प्रभु यीशु के क्रूस पर चढ़ाए जाने या उस वाचा से प्राप्त उद्धार से आगे नहीं जातीं; वे सभी ऐसी पुस्तकें हैं, जो प्रभु के उन भाइयों द्वारा लिखी गई थीं, जिनके पास अनुभव थे। इस प्रकार, इन पुस्तकों का नाम भी एक वाचा के आधार पर रखा गया है : उन्हें नया नियम कहा जाता है। इन दोनों नियमों में सिर्फ व्यवस्था का युग और अनुग्रह का युग शामिल हैं, और इनका अंतिम युग के साथ कोई संबंध नहीं है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'बाइबल के विषय में (2)' से उद्धृत

बहुत से लोग मानते हैं कि बाइबल को समझना और उसकी व्याख्या कर पाना सच्चे मार्ग की खोज करने के समान है—परन्तु वास्तव में, क्या बात इतनी सरल है? बाइबल की इस वास्तविकता को कोई नहीं जानता कि यह परमेश्वर के कार्य के ऐतिहासिक अभिलेख और उसके कार्य के पिछले दो चरणों की गवाही से बढ़कर और कुछ नहीं है, और इससे तुम्हें परमेश्वर के कार्य के लक्ष्यों की कोई समझ हासिल नहीं होती। बाइबल पढ़ने वाला हर व्यक्ति जानता है कि यह व्यवस्था के युग और अनुग्रह के युग के दौरान परमेश्वर के कार्य के दो चरणों को लिखित रूप में प्रस्तुत करता है। पुराने नियम सृष्टि के समय से लेकर व्यवस्था के युग के अंत तक इस्राएल के इतिहास और यहोवा के कार्य को लिपिबद्ध करता है। पृथ्वी पर यीशु के कार्य को, जो चार सुसमाचारों में है, और पौलुस के कार्य नए नियम में दर्ज किए गए हैं; क्या ये ऐतिहासिक अभिलेख नहीं हैं? अतीत की चीज़ों को आज सामने लाना उन्हें इतिहास बना देता है, और इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे कितनी सच्ची और यथार्थ हैं, वे हैं तो इतिहास ही—और इतिहास वर्तमान को संबोधित नहीं कर सकता, क्योंकि परमेश्वर पीछे मुड़कर इतिहास नहीं देखता! तो यदि तुम केवल बाइबल को समझते हो और परमेश्वर आज जो कार्य करना चाहता है, उसके बारे में कुछ नहीं समझते और यदि तुम परमेश्वर में विश्वास करते हो, किन्तु पवित्र आत्मा के कार्य की खोज नहीं करते, तो तुम्हें पता ही नहीं कि परमेश्वर को खोजने का क्या अर्थ है। यदि तुम इस्राएल के इतिहास का अध्ययन करने के लिए, परमेश्वर द्वारा समस्त लोकों और पृथ्वी की सृष्टि के इतिहास की खोज करने के लिए बाइबल पढ़ते हो, तो तुम परमेश्वर पर विश्वास नहीं करते। किन्तु आज, चूँकि तुम परमेश्वर में विश्वास करते हो और जीवन का अनुसरण करते हो, चूँकि तुम परमेश्वर के ज्ञान का अनुसरण करते हो और मृत पत्रों और सिद्धांतों या इतिहास की समझ का अनुसरण नहीं करते हो, इसलिए तुम्हें परमेश्वर की आज की इच्छा को खोजना चाहिए और पवित्र आत्मा के कार्य की दिशा की तलाश करनी चाहिए। यदि तुम पुरातत्ववेत्ता होते तो तुम बाइबल पढ़ सकते थे—लेकिन तुम नहीं हो, तुम उनमें से एक हो जो परमेश्वर में विश्वास करते हैं। अच्छा होगा तुम परमेश्वर की आज की इच्छा की खोज करो। बाइबल को पढ़कर तुम अधिक से अधिक इस्राएल के इतिहास को थोड़ा-बहुत समझ जाओगे, तुम इब्राहिम, दाऊद और मूसा के जीवन के बारे में जानोगे तो तुम्हें पता चलेगा कि वे किस प्रकार यहोवा का आदर करते थे, यहोवा किस प्रकार अपने विरोधियों को जला देता था और वह उस युग के लोगों से किस प्रकार बात करता था। तुम केवल अतीत में किए गए परमेश्वर के कार्य के बारे में जानोगे। बाइबल के अभिलेखों का सम्बन्ध इस बात से है कि इस्राएल के आदिम लोग किस प्रकार यहोवा का आदर करते थे और यहोवा के मार्गदर्शन में रहते थे। चूंकि इस्राएली परमेश्वर के चुने हुए लोग थे, इसलिए पुराने नियम में तुम यहोवा के प्रति इस्राएल के सभी लोगों की वफादारी देख सकते हो, कैसे लोग यहोवा की आज्ञा मानते थे, यहोवा किस प्रकार उन सबकी परवाह करता था और उन्हें आशीष देता था; तुम जान सकते हो कि जब परमेश्वर ने इस्राएल में कार्य किया तो वह दया और प्रेम से भरपूर था और भस्मकारी ज्वालाएँ उसके वश में थीं, दीन-हीन से लेकर शक्तिशाली तक, सभी इस्राएली यहोवा का आदर करते थे, और इस तरह सारे देश को परमेश्वर का आशीर्वाद प्राप्त था। ऐसा है इस्राएल का इतिहास, जो पुराने नियम में दर्ज है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'बाइबल के विषय में (4)' से उद्धृत

बाइबिल में दर्ज की गई चीज़ें सीमित हैं; वे परमेश्वर के संपूर्ण कार्य का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकतीं। सुसमाचार की चारों पुस्तकों में कुल मिलाकर एक सौ से भी कम अध्याय हैं, जिनमें एक सीमित संख्या में घटनाएँ लिखी हैं, जैसे यीशु का अंजीर के वृक्ष को शाप देना, पतरस का तीन बार प्रभु को नकारना, सलीब पर चढ़ाए जाने और पुनरुत्थान के बाद यीशु का चेलों को दर्शन देना, उपवास के बारे में शिक्षा, प्रार्थना के बारे में शिक्षा, तलाक के बारे में शिक्षा, यीशु का जन्म और वंशावली, यीशु द्वारा चेलों की नियुक्ति, इत्यादि। फिर भी मनुष्य इन्हें ख़ज़ाने जैसा महत्व देता है, यहाँ तक कि उनसे आज के काम की जाँच तक करता है। यहाँ तक कि वे यह भी विश्वास करते हैं कि यीशु ने अपने जीवनकाल में सिर्फ इतना ही कार्य किया, मानो परमेश्वर केवल इतना ही कर सकता है, इससे अधिक नहीं। क्या यह बेतुका नहीं है?

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'देहधारण का रहस्य (1)' से उद्धृत

यदि तुम व्यवस्था के युग के कार्य को देखना चाहते हो, और यह देखना चाहते हो कि इस्राएली किस प्रकार यहोवा के मार्ग का अनुसरण करते थे, तो तुम्हें पुराना विधान पढ़ना चाहिए; यदि तुम अनुग्रह के युग के कार्य को समझना चाहते हो, तो तुम्हें नया विधान पढ़ना चाहिए। पर तुम अंतिम दिनों के कार्य को किस प्रकार देखते हो? तुम्हें आज के परमेश्वर की अगुआई स्वीकार करनी चाहिए, और आज के कार्य में प्रवेश करना चाहिए, क्योंकि यह नया कार्य है, और किसी ने पूर्व में इसे बाइबल में दर्ज नहीं किया है। आज परमेश्वर देहधारी हो चुका है और उसने चीन में अन्य चयनित लोगों को छाँट लिया है। परमेश्वर इन लोगों में कार्य करता है, वह पृथ्वी पर अपना काम जारी रख रहा है, और अनुग्रह के युग के कार्य से आगे जारी रख रहा है। आज का कार्य वह मार्ग है जिस पर मनुष्य कभी नहीं चला, और ऐसा तरीका है जिसे किसी ने कभी नहीं देखा। यह वह कार्य है, जिसे पहले कभी नहीं किया गया—यह पृथ्वी पर परमेश्वर का नवीनतम कार्य है। इस प्रकार, जो कार्य पहले कभी नहीं किया गया, वह इतिहास नहीं है, क्योंकि अभी तो अभी है, और वह अभी अतीत नहीं बना है। लोग नहीं जानते कि परमेश्वर ने पृथ्वी पर और इस्राएल के बाहर पहले से बड़ा और नया काम किया है, जो पहले ही इस्राएल के दायरे के बाहर और नबियों के पूर्वकथनों के पार जा चुका है, वह भविष्यवाणियों के बाहर नया और अद्भुत, और इस्राएल के परे नवीनतर कार्य है, और ऐसा कार्य, जिसे लोग न तो समझ सकते हैं और न ही उसकी कल्पना कर सकते हैं। बाइबल ऐसे कार्य के सुस्पष्ट अभिलेखों को कैसे समाविष्ट कर सकती है? कौन आज के कार्य के प्रत्येक अंश को, बिना किसी चूक के, अग्रिम रूप से दर्ज कर सकता है? कौन इस अति पराक्रमी, अति बुद्धिमत्तापूर्ण कार्य को, जो परंपरा के विरुद्ध जाता है, इस पुरानी घिसी-पिटी पुस्तक में दर्ज कर सकता है? आज का कार्य इतिहास नहीं है, और इसलिए, यदि तुम आज के नए पथ पर चलना चाहते हो, तो तुम्हें बाइबल से विदा लेनी चाहिए, तुम्हें बाइबल की भविष्यवाणियों या इतिहास की पुस्तकों के परे जाना चाहिए। केवल तभी तुम नए मार्ग पर उचित तरीके से चल पाओगे, और केवल तभी तुम एक नए राज्य और नए कार्य में प्रवेश कर पाओगे।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'बाइबल के विषय में (1)' से उद्धृत

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