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परमेश्वर और इंसान के लिये अलग-अलग आरामगाह

I

परमेश्वर की अपनी मंज़िल और इंसान की अपनी है।

विश्राम करते हुए परमेश्वर, दिखाता रहेगा राह इंसान को,

इंसान करेगा आराधना उस सच्चे परमेश्वर की जो स्वर्ग में है।

न परमेश्वर रहेगा इंसानों के बीच, ना इंसान रह पाएगा उसकी मंज़िल में।

रह नहीं सकते परमेश्वर और इंसान एक राज्य में,

रह नहीं सकते परमेश्वर और इंसान एक राज्य में,

जीने के अपने-अपने दस्तूर के साथ।

इंसान परमेश्वर के प्रबंधन का फल है और लक्ष्य है उसके पथ-प्रदर्शन का,

परमेश्वर ही करता है अगुवाई इंसान की।

परमेश्वर का और मानव का सार अलग है।

परमेश्वर ही करता है अगुवाई इंसान की।

परमेश्वर का और मानव का सार अलग है।

II

मानव की आरामगाह धरती है; और स्वर्ग है परमेश्वर की विश्राम-स्थली।

करते हुए विश्राम धरती पर मानव, करेगा आराधना परमेश्वर की।

और जब विश्राम करेगा परमेश्वर, तो वो अगुवाई करेगा मानव की।

और जब विश्राम करेगा परमेश्वर, तो वो अगुवाई करेगा मानव की।

धरती से नहीं, करेगा स्वर्ग से अगुवाई परमेश्वर।

परमेश्वर आत्मा है अब भी, मानव शरीर है अब भी।

विश्राम करने के दोनों के हैं अपने तौर-तरीके।

मानव के मध्य प्रकट होगा परमेश्वर जब विश्राम करेगा।

मानव के मध्य प्रकट होगा परमेश्वर जब विश्राम करेगा।

मानव जब विश्राम करेगा, तब स्वर्ग में परमेश्वर उसको लाएगा घुमाने,

स्वर्ग की दुनिया दिखलाने, स्वर्ग में आनंद कराने।

स्वर्ग की दुनिया दिखलाने, स्वर्ग में आनंद कराने।

"वचन देह में प्रकट होता है" से

पिछला:जिनको परमेश्वर पा लेगा, वो अनंत आशीष का आनंद लेंगे

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