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8. ईमानदार व्यक्ति और धोखेबाज व्यक्ति में क्या अंतर है?

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:

ईमानदारी का अर्थ है अपना हृदय परमेश्वर को अर्पित करना; किसी भी चीज़ में उस से ढकोसला नहीं करना; सभी चीजों में उसके प्रति निष्कपट होना, सत्य को कभी भी नहीं छुपाना; कभी भी ऐसा कार्य नहीं करना जो उन लोगों को धोखा देता हो जो ऊँचे हैं और उन लोगों को भ्रम में डालता हो जो नीचे हैं; और कभी भी ऐसा काम नहीं करना जो केवल परमेश्वर की चापलूसी करने के लिए किया जाता है। संक्षेप में, ईमानदार होने का अर्थ है अपने कार्यों और वचनों में अशुद्धता से परहेज करना, और न तो परमेश्वर को और न ही मनुष्य को धोखा देना। जो मैं कहता हूँ वह बहुत साधारण है, किन्तु तुम लोगों के लिए दुगुना दुष्कर है। बल्कि बहुत से लोग ईमानदारी से बोलने और कार्य करने की अपेक्षा नरक के लिए दण्डित किए जाएँगे। इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि जो बेईमान हैं उनके लिए मेरे भण्डार में अन्य उपचार है। वास्तव में, मैं उस बड़ी कठिनाई को समझता हूँ जिसका तुम लोग ईमानदार मनुष्य बनने का प्रयास करते समय सामना करते हो। तुम सभी लोग अपने स्वयं के क्षुद्र मानकों से किसी शिष्ट मनुष्य का विश्लेषण करने में बहुत चतुर और निपुण हो; अतः मेरा कार्य अधिक सरल हो जाता है। और चूँकि तुम लोगों में से प्रत्येक अपने रहस्यों को अपने-अपने सीने से लगाए रहता है, तो ठीक है, मैं तुम लोगों को, एक-एक करके, आग द्वारा "परीक्षण" से गुज़रने के लिए विपत्ति में भेजूँगा, ताकि उसके बाद तुम मेरे वचनों पर विश्वास करने के लिए सर्वथा समर्पित हो जाओगे। अंततः, मैं तुम लोगों के मुँह से "परमेश्वर निष्ठा का परमेश्वर है" शब्द खींच निकालूँगा, तब तुम लोग अपनी छाती को पीटोगे और विलाप करोगे कि "कुटिल तो मनुष्य का हृदय है।"

"वचन देह में प्रकट होता है" से "तीन चेतावनियाँ" से

मैं उन लोगों की बहुत अधिक सराहना करता हूँ जो दूसरों के बारे में संदेह को आश्रय नहीं देते हैं और उन्हें भी बहुत पसंद करता हूँ जो सहजता से सत्य को स्वीकार करते हैं; इन दो तरह के मनुष्यों के लिए मैं बहुत अधिक परवाह दिखाता हूँ, क्योंकि मेरी दृष्टि में वे ईमानदार मनुष्य हैं। यदि तुम बहुत धोखेबाज हो, तो तुम्हारे पास एक संरक्षित हृदय होगा और सभी मामलों और सभी लोगों के बारे में संदेह के विचार होंगे। इसी कारण से, मुझ में तुम्हारा विश्वास संदेह कि नींव पर बना है। इस प्रकार के विश्वास को मैं कभी भी स्वीकार नहीं करूँगा। सच्चे विश्वास का अभाव होने पर, तुम सच्चे प्रेम से और भी अधिक दूर होगे। और यदि तुम परमेश्वर पर भी संदेह करने और अपनी इच्छानुसार उसके बारे में अनुमान लगाने में समर्थ हो, तो तुम संदेह से परे मनुष्यों में सबसे सबसे अधिक धोखेबाज हो।

"वचन देह में प्रकट होता है" से "पृथ्वी के परमेश्वर को कैसे जानें" से

कुछ लोग परमेश्वर की उपस्थिति में नियम-निष्ठ और उचित शैली में व्यवहार करते हैं और विशेष रूप से "शिष्ट" व्यवहार करते हैं, मगर पवित्रात्मा की उपस्थिति में वे अवज्ञाकारी हो जाते हैं और सभी संयम खो देते हैं। क्या तुम लोग ऐसे मनुष्य की गिनती ईमानदार लोगों की श्रेणी में करोगे? यदि तुम एक पाखंडी हो और ऐसे व्यक्ति हो जो लोगों से घुलने मिलने में दक्ष है, तो मैं कहता हूँ कि तुम निश्चित रूप से ऐसे व्यक्ति हो जो परमेश्वर को तुच्छ समझता है। यदि तुम्हारे वचन बहानों और अपनी महत्वहीन तर्कसंगतताओं से भरे हुए हैं, तो मैं कहता हूँ कि तुम ऐसे व्यक्ति हो जो सत्य का अभ्यास करने का अत्यधिक अनिच्छुक है। यदि तुममें बहुत से आत्मविश्वास हैं जिन्हें साझा करने के तुम अनिच्छुक हो, और यदि तुम अपने रहस्यों को-कहने का अर्थ है, अपनी कठिनाईयों को-दूसरों के सामने प्रकट करने के अत्यधिक अनिच्छुक हो ताकि प्रकाश का मार्ग खोजा जा सके, तो मैं कहता हूँ कि तुम ऐसे व्यक्ति हो जिसे आसानी से उद्धार प्राप्त नहीं होगा और जो आसानी से अंधकार से नहीं निकलेगा। यदि सच्चाई का मार्ग खोजने से तुम लोगों को प्रसन्नता मिलती है, तो तुम उसके समान हो जो सदैव प्रकाश में जीवन निवास करता है। यदि तुम परमेश्वर के घर में सेवा करने वाले के रूप काम करने वाला बन कर प्रसन्न हो, तथा गुमनामी में कर्मठतापूर्वक और शुद्ध अंतःकरण के साथ काम करते हो, हमेशा अर्पित करते हो और कभी भी लेते नहीं हो, तो मैं कहता हूँ कि तुम एक वफादार संत हो, क्योंकि तुम किसी प्रतिफल की खोज नहीं करते हो और तुम मात्र एक ईमानदार मनुष्य बने रहते हो। यदि तुम निष्कपट बनने के इच्छुक हो, यदि तुम अपना सर्वस्व व्यय करने के इच्छुक हो, यदि तुम परमेश्वर के लिए अपना जीवन बलिदान करने और उसका गवाह बनने में समर्थ हो, यदि तुम इस स्तर तक ईमानदार हो जहाँ तुम केवल परमेश्वर को प्रसन्न करना जानते हो, और अपने बारे में विचार नहीं करते हो या अपने लिए कुछ नहीं लेते हो, तो मैं कहता हूँ कि ये लोग वे हैं जो प्रकाश में पोषित हैं और सदा के लिए राज्य में रहेंगे। तुम्हें पता होना चाहिए कि तुम्हारे भीतर सच्चा विश्वास और सच्ची वफादारी है कि नहीं, परमेश्वर के लिए कष्ट उठाने का तुम्हारा कोई अभिलेख है कि नहीं, और तुमने परमेश्वर के प्रति पूरी तरह से समर्पण किया है कि नहीं। यदि तुममें इन बातों का अभाव है, तो तुम्हारे भीतर अवज्ञा, धोखा, लालच, और शिकायत बची है। चूँकि तुम्हारा हृदय ईमानदार नहीं है, इसलिए तुमने कभी भी परमेश्वर से सकारात्मक स्वीकृति प्राप्त नहीं की है और कभी भी प्रकाश में जीवन नहीं बिताया है। अंत में किसी व्यक्ति का भाग्य कैसे सम्पन्न होता है यह इस बात पर निर्भर करता है कि उसके पास एक ईमानदार और रक्तिम हृदय है कि नहीं, और उसके पास एक शुद्ध आत्मा है कि नहीं। यदि तुम कोई ऐसे व्यक्ति हो जो अत्यधिक बेईमान है, जिसके पास ईर्ष्यालु हृदय है, और कोई ऐसे व्यक्ति हो जिसकी आत्मा अशुद्ध है, तो तुम्हारे भाग्य का अभिलेख निश्चित रूप से ऐसी जगह में है जहाँ मनुष्य को दण्ड दिया जाता है।

"वचन देह में प्रकट होता है" से "तीन चेतावनियाँ" से

एक धोखेबाज़ व्यक्ति किसी पर भी अपनी चालें आज़माता है, जिसमें उसके अपने रिश्तेदार शामिल होते हैं-यहां तक कि उसके अपने बच्चे भी शामिल होते हैं। भले ही तुम उसके साथ कितने भी साफ़दिल से पेश आओ, वह तुम्हारे साथ चाल चलने की कोशिश करेगा। यह उसके स्वभाव का सही चेहरा है, और वह इस स्वभाव का ही बना हुआ है। इसे बदलना मुश्किल है और वह हर समय इसी तरह रहता है। ईमानदार लोग कभी-कभी धूर्त और धोखेबाज़ शब्द कह सकते हैं, लेकिन ऐसा व्यक्ति आम तौर पर ईमानदार रहता है और दूसरों के साथ अपने संबंधों में बिना उनका अनुचित लाभ उठाए ईमानदारी से काम करता है। जब वह अन्य लोगों के साथ बात करता है, तो वह उन्हें आज़माने के लिए जानबूझकर कुछ बातें नहीं बोलता है; वह तब भी काफ़ी ईमानदार रहता है और खुले दिल से दूसरों के साथ संवाद कर सकता है। हर कोई कहता है कि वह एक ईमानदार व्यक्ति है, लेकिन फिर भी ऐसा समय होता है जब वह थोड़ी-बहुत धोखेबाज़ी से बात करता है। यह केवल दूषित स्वभाव का प्रकटन है और यह उसके स्वभाव का प्रतिनिधित्व नहीं करता क्योंकि वह उस प्रकार का व्यक्ति नहीं है।

"मसीह की बातचीतों के अभिलेख" से "मनुष्य का स्वभाव कैसे जानें" से

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