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82. ऐसा क्यों कहा गया है कि प्रभु यीशु की सभी भविष्यवाणियाँ सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अंत के दिनों के कार्य के जरिये साकार हो गई हैं और उन्हें हासिल कर लिया गया है?

परमेश्वर के वचन से जवाब:

अंत के दिनों में किया गया कार्य हर चीज़ को समाप्ति की ओर ले जाता है; जो कुछ व्यवस्था के युग में किया गया वह आरम्भ का कार्य है; और जो अनुग्रह के युग में किया गया वह छुटकारे का कार्य है। जहाँ तक इस सम्पूर्ण छ:-हज़ार-वर्षों की प्रबंधन योजना में कार्य के दर्शनों की बात है, तो किसी को भी अंर्तदृष्टि या समझ प्राप्त नहीं हो सकती है। ऐसे दर्शन हमेशा से ही रहस्य रहे हैं। …अंत के दिन मात्र वह समय है जिसमें छ:-हज़ार-वर्षों की प्रबंधन योजना के समस्त कार्य को तुम लोगों पर प्रकट किया जाता है। यह रहस्य से पर्दा उठाना है। ऐसे रहस्य को किसी भी मनुष्य के द्वारा अनावृत नहीं किया जा सकता है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि मनुष्य के पास बाइबल की कितनी अधिक समझ है, यह वचनों से बढ़कर और कुछ नहीं है, क्योंकि मनुष्य बाइबिल के सार को नहीं समझता है। जब मनुष्य बाइबल को पढ़ता है, तो वह कुछ सच्चाईयों को प्राप्त कर सकता है, कुछ वचनों की व्याख्या कर सकता है या कुछ प्रसिद्ध अंशों या उद्धरणों का सूक्ष्म परीक्षण कर सकता है, परन्तु वह उन वचनों के भीतर निहित अर्थ को निकालने में कभी भी समर्थ नहीं होगा, क्योंकि मनुष्य जो कुछ देखता है वे मृत वचन हैं, यहोवा और यीशु के कार्य के दृश्य नहीं हैं, और मनुष्य ऐसे कार्य के रहस्य को सुलझाने में असमर्थ है। इसलिए, छ:-हज़ार-वर्षों की प्रबंधन योजना का रहस्य सबसे बड़ा रहस्य है, एक ऐसा रहस्य जो मनुष्य से बिलकुल छिपा हुआ और उसके लिए सर्वथा अचिन्त्य है। कोई भी सीधे तौर पर परमेश्वर की इच्छा को नहीं समझ सकता है, जब तक कि वह मनुष्य को स्वयं न समझाए और खुल कर न कहे, अन्यथा, वे सर्वदा मनुष्य के लिए पहेली बने रहेंगे और सर्वदा मुहरबंद रहस्य बने रहेंगे। जो धार्मिक जगत में हैं वे उन पर कभी ध्यान नहीं देते हैं; यदि तुम लोगों को आज नहीं बताया जाए, तो तुम लोग भी समझने में समर्थ नहीं। भविष्यद्वक्ताओं की सभी भविष्यवाणियों की तुलना में छः हज़ार वर्षों का यह कार्य अधिक रहस्यमय है। यह सृजन के बाद से सबसे बड़ा रहस्य है, और पहले का कोई भी भविष्यद्वक्ता कभी भी इसकी थाह पाने में सफल नहीं हुआ है, क्योंकि इस रहस्य को केवल अंत के युग में ही खोला जाता है और पहले कभी प्रकट नहीं किया गया है। …

…अंत के दिनों का कार्य यहोवा और यीशु के कार्य को और उन सभी रहस्यों को प्रकट कर देता है जिन्हें मनुष्य के द्वारा समझा नहीं गया है। इसे मानवजाति की नियति और अंत को प्रकट करने के लिए और मानवजाति के बीच उद्धार के सब कार्य का समापन करने के लिए किया जाता है। अंत के दिनों में कार्य का यह चरण सभी चीज़ों को समाप्ति की ओर ले आता है। मनुष्य के द्वारा समझे नहीं गए सभी रहस्यों को, मनुष्य को ऐसे रहस्यों में अंर्तदृष्टि पाने की अनुमति देने और उनके हृदयों में एक स्पष्ट समझ पाने के लिए, अवश्य सुलझाया जाना चाहिए। केवल तभी मनुष्य को उनके प्रकारों के अनुसार विभाजित किया जा सकता है। जब छ:-हज़ार-वर्षों की प्रबंधन योजना पूर्ण हो जाती है केवल उसके पश्चात् ही परमेश्वर का स्वभाव अपनी सम्पूर्णता में मनुष्य की समझ में आएगा, क्योंकि तब उसकी प्रबंधन योजना समाप्त हो।

"वचन देह में प्रकट होता है" से "देहधारण का रहस्य (4)" से

उस समय, यीशु ने बहुतायत से ऐसे कार्य किये जो उसके शिष्यों की समझ से बाहर थे, और बहुतायत से ऐसा कहा जो लोगों की समझ में नहीं आया। इसका कारण यह है कि, उस समय, उसने व्याख्या नहीं की। इस प्रकार, उसके जाने के कई वर्ष बाद, मत्ती ने उसकी वंशावली बनायी, और अन्य लोगों ने भी बहुतायत से कार्य किये जो मनुष्य की इच्छा के थे। यीशु मनुष्य को पूर्ण करने और प्राप्त करने के लिए नहीं, बल्कि कार्य का एक चरण करने के लिए आया था: स्वर्ग के राज्य के सुसमाचार को आगे बढ़ाना और क्रूसीकरण के कार्य को पूरा करना—और इसलिए एक बार जब यीशु को सलीब पर चढ़ा दिया गया, तो उसके कार्य का पूरी तरह से अंत हो गया। किन्तु वर्तमान चरण—विजय के कार्य—में अधिक वचन अवश्य बोले जाने चाहिए, अधिक कार्य अवश्य किया जाना चाहिए, कई प्रक्रियाएँ अवशय होनी चाहिए। इसलिए भी यीशु और यहोवा के कार्यों के रहस्य अवश्य प्रकट किये जाने चाहिए, ताकि सभी लोगों को अपने विश्वास में समझ और स्पष्टता मिल जाए, क्योंकि यह अंत के दिनों का कार्य है, और अंत के दिन परमेश्वर के कार्य की समाप्ति है, इस कार्य के समापन का समय है। …उस समय, यीशु ने बहुतायत से कार्य किया जो मनुष्य के लिए समझ से बाहर था। वह चुपचाप चला गया, और आज भी ऐसे कई लोग हैं जो उसके वचनों को नहीं समझते हैं, जिनकी समझ त्रुटिपूर्ण है मगर फिर भी उनके द्वारा सही मानी जाती है, जो नहीं जानते हैं कि वे गलत हैं। अंत में, यह वर्तमान चरण परमेश्वर के कार्य का पूर्णतः अंत करेगा, और इसका उपसंहार प्रदान करेगा। परमेश्वर की प्रबंधन योजना सभी की समझ और सभी के ज्ञान में आ जाएगी। मनुष्य के भीतर धारणाएँ, उसके इरादे, उसकी त्रुटिपूर्ण समझ, यहोवा और यीशु के कार्यों के प्रति उसकी धारणाएँ, अन्य जतियों के बारे में उसके विचार और उसके सभी विचलन और उसकी सभी त्रुटियाँ ठीक कर दी जाएँगी। और जीवन के सभी सही मार्ग, और परमेश्वर द्वारा किया गय समस्त कार्य और संपूर्ण सत्य मनुष्य की समझ में आ जाएँगे। जब ऐसा होगा, तो कार्य का यह चरण समाप्त हो जाएगा।

"वचन देह में प्रकट होता है" से "परमेश्वर के कार्य का दर्शन (2)" से

वह कार्य जिसका मैं हज़ारों सालों से प्रबंधन करता आ रहा हूँ वह केवल अंत के दिनों में ही मनुष्य के सामने पूर्णतः प्रकट होता है। केवल अब है कि मैंने अपने प्रबन्धन के पूरे रहस्य को मनुष्य के लिए खोला है। मनुष्य मेरे कार्य के उद्देश्य को जानता है और इसके अतिरिक्त उसने मेरे सभी रहस्यों की समझ प्राप्त कर ली है। और मैंने मनुष्य को उस मंज़िल के बारे में सब कुछ बता दिया है जिसके बारे में वह चिंतित है। मैंने पहले से ही मनुष्य के लिए अपने सारे रहस्यों को अनावृत कर दिया है जो लगभग 5,900 सालों से अधिक समय से गुप्त थे। यहोवा कौन है? मसीहा कौन है? यीशु कौन है? तुम लोगों को यह सब ज्ञात होना चाहिए। मेरा कार्य इन्हीं नामों पर निर्भर करता है। क्या तुम लोग इसे समझ गए हो?

"वचन देह में प्रकट होता है" से "सुसमाचार को फैलाने का कार्य मनुष्यों को बचाने का कार्य भी है" से

पिछला:हम सभी पाप करने और स्वीकार कर लेने के चक्र में फंसे हुए जी रहे हैं और इससे छूटने का कोई रास्ता नहीं है; क्या सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन वाकई मानवजाति को बदल कर शुद्ध कर सकते हैं?

अगला:ऐसा क्यों है कि उद्धार केवल सर्वशक्तिमान परमेश्वर में विश्वास करने और परमेश्वर के अंत के दिनों के कार्य को स्वीकार करने के जरिये ही संभव है?