57. परमेश्वर के कार्य और बाइबल के बीच वास्तव में क्या संबंध है? परमेश्वर का कार्य पहले आया या कि बाइबल पहले आयी?

परमेश्वर के वचन से जवाब:

कि यह परमेश्वर के कार्य के ऐतिहासिक अभिलेख, और परमेश्वर के कार्य के पिछले दो चरणों की गवाही से बढ़कर और कुछ नहीं है, और तुम्हें परमेश्वर के कार्य के लक्ष्यों की कोई समझ नहीं देता है। जिस किसी ने भी बाइबल को पढ़ा है वह जानता है कि यह व्यवस्था के युग और अनुग्रह के युग के दौरान परमेश्वर के कार्य के दो चरणों को प्रलेखित करता है। पुराना विधान इस्राएल के इतिहास और सृष्टि के समय से लेकर व्यवस्था के अंत तक यहोवा के कार्य का कालक्रम से अभिलेखन करता है। नया विधान पृथ्वी पर यीशु के कार्य को, जो चार सुसमाचारों में है, और साथ की पौलुस के कार्य को भी अभिलिखित करता है; क्या वे ऐतिहासिक अभिलेख नहीं हैं? …बाइबल को पढ़ कर, तुम अधिक से अधिक इस्राएल के इतिहास को थोड़ा बहुत समझ जाओगे, तुम इब्राहीम, दाऊद और मूसा के जीवनों के बारे में जानोगे, तुम पाओगे कि वे किस प्रकार यहोवा का आदर करते थे, यहोवा ने किस प्रकार उन्हें जला दिया था जो उसका विरोध करते थे, और वह उस युग के लोगों से किस प्रकार बात करता था। तुम केवल अतीत में किए गए परमेश्वर के कार्य के बारे में जानोगे। बाइबल के अभिलेख इस बात से सम्बन्धित हैं कि इस्राएल के प्राचीन लोग किस प्रकार यहोवा का आदर करते थे और यहोवा के मार्गदर्शन के अधीन रहते थे। क्योंकि इस्राएली परमेश्वर के चुने हुए लोग थे, इसलिए पुराने विधान में तुम यहोवा के प्रति इस्राएल के सभी लोगों की वफादारी को देख सकते हो, यह देख सकते हो कि सभी लोग जो यहोवा की आज्ञा मानते थे उस के द्वारा किस प्रकार उनकी देखभाल की जाती थी और उन्हें धन्य किया जाता था, तुम जान सकते हो कि जब परमेश्वर ने इस्राएल में कार्य किया तब वह दया और करूणा से भरपूर था, और साथ सी उसमें भस्म करनेवाली आग की लपटें थीं, और यह कि, सबसे दीन-हीन से लेकर पराक्रमी तक, सभी इस्राएली यहोवा का आदर करते थे, और इसलिए सारे देश पर परमेश्वर का आशीर्वाद था। पुराने विधान में अभिलिखत इस्राएल का इतिहास ऐसा ही है।

"वचन देह में प्रकट होता है" से "बाइबल के विषय में (4)" से

सृष्टि की रचना का कार्य मानवजाति के आने से पहले हुआ, किन्तु उत्पत्ति की पुस्तक सिर्फ मानवजाति के आने के बाद ही आयी; यह वह पुस्तक थी जिसे मूसा के द्वारा व्यवस्था के युग के दौरान लिखा गया था। यह ऐसी चीज़ों के समान है जो आज तुम लोगों के बीच होती हैं: उनके होने के बाद, तुम लोग, भविष्य में लोगों को दिखाने के लिए, और भविष्य के लोगों के लिए उन्हें लिख लेते हो, जो कुछ भी तुम लोगों ने दर्ज किया वे ऐसी बातें हैं जो अतीत में घटित हुई थीं—वे इतिहास से बढ़कर और कुछ भी नहीं हैं। पुराने विधान में दर्ज की गई चीजें इस्राएल में यहोवा के कार्य हैं, और जो कुछ भी नए विधान में दर्ज है वह अनुग्रह के युग के दौरान यीशु के कार्य हैं; वे दो भिन्न-भिन्न युगों में परमेश्वर के द्वारा किए गए कार्य को अभिलिखित करते हैं। पुराना विधान व्यवस्था के युग के दौरान परमेश्वर के कार्य को अभिलिखित करता है, और इस प्रकार पुराना विधान एक ऐतिहासिक पुस्तक है, जबकि नया विधान अनुग्रह के युग के कार्य का उत्पाद है। जब नया कार्य आरम्भ हुआ, तो ये पुस्तकें पुरानी पड़ गईं—और इस प्रकार, नया विधान भी एक ऐतिहासिक पुस्तक है। वास्तव में, नया विधान पुराने विधान के समान सुव्यवस्थित नहीं है, न ही इसमें इतनी बातें दर्ज हैं। पुराने विधान के यहोवा के द्वारा बोले गए सभी वचनों को बाइबल में दर्ज किया गया है, जबकि सुसमाचार की चार पुस्तकों में यीशु के कुछ ही वचनों को दर्ज किया गया। वास्तव में, यीशु ने भी बहुतायत से काम किए, किन्तु उन्हें विस्तारपूर्वक दर्ज नहीं किया गया था। नए विधान में इसलिए कम दर्ज किया गया है क्योंकि यीशु ने जितना काम किया; पृथ्वी पर साढे़-तीन-वर्षों के दौरान किए गए उसके कार्य और प्रेरितों के कार्य की मात्रा यहोवा के कार्य की अपेक्षा बहुत ही कम थी। और इस प्रकार, पुराने विधान की अपेक्षा नए विधान में कम पुस्तकें हैं।

…यीशु के समय में, यीशु ने अपने में पवित्र आत्मा के कार्य के अनुसार यहूदियों और उन सब की अगुवाई की थी जिन्होंने उस समय उसका अनुसरण किया था। उसने जो कुछ किया उस में उसने बाइबल को आधार के रूप में नहीं लिया, बल्कि वह अपने कार्य के अनुसार बोला; बाइबल क्या कहती है उसने उस पर कोई ध्यान नहीं दिया, और न ही उसने अपने अनुयायियों की अगुवाई करने के लिए बाइबल में किसी मार्ग को ढूँढ़ा था। ठीक उस समय से ही जब उसने कार्य करना आरम्भ किया, उसने पश्चाताप—एक शब्द जिसके बारे में पुराने विधान की भविष्यवाणियों में बिलकुल भी उल्लेख नहीं किया गया था—के मार्ग को फैलाया। न केवल उसने बाइबल के अनुसार कार्य नहीं किया, बल्कि उसने एक नए मार्ग की अगुवाई भी की, और नया कार्य किया। जब उसने उपदेश दिए तब उसने कभी भी बाइबल को संदर्भित नहीं किया। व्यवस्था के युग के दौरान, बीमारों को चंगा करने और दुष्टात्माओं को निकालने के उसके चमत्कारों को करने के योग्य कोई कभी नहीं हो पाया था। उनका कार्य, उनकी शिक्षाएँ, उनका अधिकार—व्यवस्था के युग के दौरान किसी ने भी इसे नहीं किया था। यीशु ने मात्र अपना नया काम किया, और भले ही बहुत से लोगों ने बाइबल का उपयोग करते हुए उसकी निन्दा की—और यहाँ तक कि उसे सलीब पर चढ़ाने के लिए पुराने विधान का उपयोग किया—फिर भी उसका कार्य पुराने विधान से बढ़कर था; यदि ऐसा न होता, तो लोग उसे सलीब पर क्यों चढ़ाते? क्या यह इसलिए नहीं था क्योंकि पुराने विधान में उसकी शिक्षाओं, और बीमारों को चंगा करने और दुष्टात्माओं को निकालने की उसकी योग्यता के बारे में कुछ नहीं कहा गया था? उसका कार्य एक नए मार्ग की अगुवाई करने के लिए था, यह जानबूझकर बाइबल के विरूद्ध "लड़ाई करना", या जानबूझकर पुराने विधान को अनावश्यक बना देना नहीं था। वह केवल अपनी सेवकाई करने के लिए आया था, और अपने नए कार्य को उन लोगों के लिए लेकर आया था जो उसके लिए लालायित थे और उसे खोजते थे। …क्या परमेश्वर के कार्य में सिद्धांतों को लागू किए जाने की आवश्यकता है? और क्या इसे भविष्यवक्ताओं के पूर्वकथनों के अनुसार अवश्य होना चाहिए? आख़िरकार, कौन बड़ा हैः परमेश्वर या बाइबल? परमेश्वर का कार्य बाइबल के अनुसार क्यों होना चहिए? क्या ऐसा हो सकता है कि परमेश्वर को बाइबल से आगे बढ़ने का कोई अधिकार नहीं है? क्या परमेश्वर बाइबल से दूर नहीं जा सकता है और अन्य काम नहीं कर सकता है? यीशु और उनके शिष्यों ने सब्त का पालन क्यों नहीं किया? यदि उसे सब्त का पालन करना होता और पुराने विधान की आज्ञाओं के अनुसार अभ्यास करना होता, तो आने के बाद यीशु ने सब्त का पालन क्यों नहीं किया, बल्कि इसके बजाए उसने पाँव धोए, सिर को ढका, रोटी तोड़ी और दाखरस पीया? क्या यह सब पुराने विधान की आज्ञाओं से अनुपस्थित नहीं हैं? यदि यीशु पुराने विधान का सम्मान करता, तो उसने इन सिद्धांतो का अनादर क्यों किया? तुम्हें जानना चाहिए कि पहले कौन आया था, परमेश्वर या बाइबल! सब्त का प्रभु होते हुए, क्या वह बाइबल का भी प्रभु नहीं हो सकता है?

"वचन देह में प्रकट होता है" से "बाइबल के विषय में (1)" से

उस से पहले, इस्राएल के लोग केवल पुराना नियम ही पढ़ते थे। दूसरे शब्दों में, अनुग्रह के युग में लोग पुराना नियम पढ़ते थे। नया नियम केवल अनुग्रह के युग के दौरान ही प्रकट हुआ था। जब यीशु काम करता था तब नया नियम मौजूद नहीं था; उसके पुनरूत्थान और स्वर्गारोहण के बाद ही लोगों ने उसके कार्य को दर्ज किया या लिखा था। केवल तब ही सुसमाचार की चार पुस्तकें, और उसके अतिरिक्त पौलुस और पतरस की धर्मपत्र, साथ ही साथ प्रकाशित वाक्य की पुस्तक आई थी। प्रभु यीशु के स्वर्ग जाने के केवल तीन सौ साल बाद, जब उसके बाद की पीढ़ियों ने उनके लेखों का मिलान किया था, तब नया नियम अस्तित्व में आया। जब यह कार्य पूरा हो गया केवल तभी नया नियम अस्तित्व में आया था; यह पहले मौजूद नहीं था। परमेश्वर ने वह सब कार्य किया था, प्रेरित पौलुस ने वह सब कार्य किया था, उसके बाद पौलुस और पतरस के धर्मपत्रों को एक साथ मिलाया गया था, और पतमुस के टापू में यूहन्ना के द्वारा दर्ज किए गए सबसे बड़े दर्शन को अंत में रखा गया था, क्योंकि वह अंतिम दिनों के कार्य के विषय में भविष्यवाणी करता है। ये सब बाद में आनेवाली पीढ़ियों के समायोजन थे…. इस प्रकार, यदि तुम ईश्वर के रूप में बाइबल की आराधना करते हो तो तुम बहुत ही ज़्यादा नासमझ और मूर्ख हो। तुम आज के लिए परमेश्वर के वचनों को क्यों नहीं खोजते हो? केवल परमेश्वर का कार्य ही मनुष्य को बचा सकता है। बाइबल मनुष्य को बचा नहीं सकती है, यह हज़ारों सालों से बिलकुल भी नहीं बदली है, और यदि तुम बाइबल की आराधना करते हो तो तुम पवित्र आत्मा के कार्य को कभी प्राप्त नहीं करोगे।

"वचन देह में प्रकट होता है" से "बाइबल के विषय में (3)" से

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