999 हमारे लिए परमेश्वर का प्रोत्साहन

1 मैं अपने भाईयों और बहनों के लिए आशा से भरा हुआ हूँ, और मुझे विश्वास है कि तुम लोग निराश या हतोत्साहित नहीं हो, और परमेश्वर चाहे कुछ भी करे, तुम लोग आग से भरे एक घड़े की तरह रहोगे—तुम लोगों की गर्मी कभी कम नहीं होगी और तुम लोग अंत तक जारी रहोगे, जब तक कि परमेश्वर का कार्य पूरी तरह प्रकट नहीं होता, जब तक कि उस नाटक का अंत नहीं होता जिसका निर्देशन परमेश्वर करता है। मेरी तुम लोगों से कोई दूसरी आवश्यकता नहीं है। मैं सभी से बस यही आशा करता हूँ कि तुम लोग इसे जारी रख सको, तुम लोग परिणामों के बारे में चिंतित न हो।

2 तुम सब मेरे साथ सहयोग करो ताकि जो काम मुझे करना चाहिए वह अच्छे-से किया जाए और कोई भी इसमें रुकावट या गड़बड़ी पैदा न करे। जब काम का यह भाग पूरा हो जाएगा, तो परमेश्वर तुम लोगों के समक्ष सब कुछ प्रकट करेगा। जब मेरा कार्य पूरा हो जाएगा, तो परमेश्वर के सामने विवरण प्रस्तुत करते समय मैं तुम लोगों को श्रेय दूंगा। क्या यह बेहतर नहीं है?

3 परमेश्वर बस तुम्हें अपनी इच्छा को जानने और समझने की अनुमति देता है। वह तुम्हें अपने भविष्य के कार्य पर विचार करने की अनुमति नहीं देता है। हमें बस परमेश्वर पर आस्था रखने की और उसके मार्गदर्शन के अनुसार कार्य करने की, वास्तविक कठिनाइयों को व्यावहारिक रूप से संभालने की, और परमेश्वर के लिए चीज़ों को मुश्किल या उसके लिए परेशानी पैदा न करने की ज़रूरत है। हमें सिर्फ़ उतना ही करना चाहिए जो हमें करना चाहिए—बस यही पर्याप्त है कि हम परमेश्वर के वर्तमान कार्य के भीतर उपस्थित रहें!

4 जिस मार्ग पर मैं तुम लोगों की अगुवाई कर रहा हूँ वह मेरा कार्य है, मेरी ज़िम्मेदारी है, और इसे परमेश्वर द्वारा बहुत पहले इसलिए विहित किया गया था ताकि हमारा आज के दिन तक इतनी दूर तक आना पूर्वनिर्धारित किया जा सके—हम ऐसा करने में सक्षम रहे हैं यह हम पर ईश्वरीय कृपा है, और हालांकि यह एक आसान राह नहीं रही, हमारी मित्रता अनंत है, और इसे पीढ़ियों तक साझा किया जाएगा।

5 चाहे जयकार और हँसी रही हो या उदासी और आँसू रहे हों, वे सब हमारे लिए सुंदर यादें बनाते हैं! शायद तुम लोगों को पता होना चाहिए कि मेरे कार्य के लिए मेरे पास बहुत दिन नहीं बचे। मेरे पास कार्यों की इतनी सारी परियोजनाएं हैं, और मैं अक्सर तुम लोगों का साथ नहीं दे सकता हूँ। मुझे आशा है कि तुम लोग मुझे समझ सकते हो—क्योंकि हमारी मूल दोस्ती अभी भी वैसी ही है। मुझे उम्मीद है कि अतीत में जो कुछ हमने साझा किया था, उसमें से हमारी दोस्ती का पुष्प खिलेगा।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "मार्ग... (8)" से रूपांतरित

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